शुरुआत

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ये किताब किसके लिए है?

तुमने अभी 10th पास किया है। शायद तुम कोई ऐसा हुनर ढूँढ रहे हो जो नौकरी दिला सके। शायद किसी ने बोला "अकाउंटिंग में स्कोप है" और तुमने सोचा — अकाउंटिंग होता क्या है?

ये किताब तुम्हारे लिए है।

कोई फ़र्क नहीं पड़ता अगर तुमने कभी कंप्यूटर नहीं खोला। कोई फ़र्क नहीं पड़ता अगर "GST" सुनकर डर लगता है। ये किताब पूरी करने के बाद तुम:

  • किसी भी छोटे बिज़नेस का हिसाब-किताब रख सकोगे
  • GST रिटर्न्स फ़ाइल कर सकोगे
  • ERP सॉफ़्टवेयर आराम से चला सकोगे
  • बुककीपर, GST प्रैक्टिशनर, या CA दफ़्तर असिस्टेंट की नौकरी के लिए लागू कर सकोगे

किरदारों से मिलो

ये कोई बोरिंग टेक्स्टबुक नहीं है। ये एक कहानी है।

तुम मीरा जोशी की कहानी पालन करोगे — बागेश्वर की 18 साल की लड़की जो हल्द्वानी में एक CA के दफ़्तर में ट्रेनी बनकर आती है। पहले दिन उसे अकाउंटिंग का 'अ' भी नहीं पता। आखिर तक वो पूरा दफ़्तर सँभालती है।

रास्ते में तुम और लोगों से भी मिलोगे:

  • शर्मा सर — CA जो मीरा को सिखाते हैं। धैर्य वाले, व्यावहारिक, रियल-वर्ल्ड उदाहरण देने वाले।
  • नेगी भैया — जूनियर अकाउंटेंट जो मीरा को डेली काम, सॉफ़्टवेयर, और शॉर्टकट्स दिखाता है।
  • रावत आंटी — अल्मोड़ा में किराना दुकान चलाती हैं। मीरा की पहली असली क्लाइंट।
  • बिश्त जी — होलसेल मसालों का बिज़नेस है। GST-रजिस्टर्ड, बड़े ट्रांज़ैक्शन्स। मीरा के दूसरे क्लाइंट।
  • पूजा — मीरा की दोस्त जो बैंक में काम करती है। बाद में करियर विकल्प पर बात करती है।

कहानियाँ काल्पनिक हैं, लेकिन हर समस्या असली है। हर कॉन्सेप्ट मीरा की ज़िंदगी से सीखाया गया है।

किताब कैसे बँटी है

किताब के छह भाग हैं:

भाग 1: बुनियाद — अकाउंटिंग क्या है? बिज़नेस हिसाब क्यों रखते हैं? डेबिट और क्रेडिट का मतलब क्या है? अगर कुछ नहीं पता तो यहीं से शुरू करो।

भाग 2: हाथ से हिसाब — वाउचर, जर्नल, लेजर, ट्रायल बैलेंस, फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स। मीरा पहले कागज़ पर सब कुछ सीखती है।

भाग 3: कंप्यूटर पर हिसाब — मीरा उद्यमो ERPLite सीखती है — एक ERP सॉफ़्टवेयर। जो हाथ से किया, वो अब कंप्यूटर पर तेज़ी से।

भाग 4: GST — GST क्या है? कैसे गणना करें। रिटर्न्स कैसे फ़ाइल करें। यही वो हुनर है जो नौकरी दिलाती है।

भाग 5: आगे की पढ़ाई — TDS, पेरोल, फ़िक्स्ड एसेट्स, बैंक रीकॉन्सिलिएशन। एक्स्ट्रा हुनर जो तुम्हें सबसे अलग बनाती हैं।

भाग 6: तुम्हारा करियर — ये ज्ञान तुम्हें कहाँ ले जा सकता है? पहली नौकरी कैसे पाएँ।

भाग 1 पहले पढ़ो। फिर क्रम से आगे बढ़ो। हर चैप्टर पिछले पर बना है।

एक और बात

हर चैप्टर का एक पैटर्न है:

  1. कहानी — मीरा को आज क्या मिला
  2. सबक — शर्मा सर कॉन्सेप्ट समझाते हैं
  3. हाथों-हाथ अभ्यास — मीरा खुद करती है
  4. क्विक रीकैप — ज़रूरी पॉइंट्स बुलेट में
  5. अभ्यास अभ्यास — अब तुम करो

सिर्फ पढ़ो मत। अभ्यास करो। मीरा ने ऐसे सीखा, और तुम भी ऐसे सीखोगे।


चलो शुरू करते हैं। आज मीरा का शर्मा सर के दफ़्तर में पहला दिन है।

अकाउंटिंग क्या है और ये क्यों ज़रूरी है

मीरा हल्द्वानी बस स्टैंड पर बस से उतरी, उसकी पीठ पर भारी बैकपैक था जिसमें नोटबुक्स और एक पानी की बोतल थी। उसके हाथ में एक प्रिंटेड लेटर था — शर्मा सर के CA दफ़्तर में ट्रेनी के तौर पर जॉइन करने का पेशकश। उसे पता नहीं था कि CA पूरे दिन करता क्या है। उसे "अकाउंटिंग" का मतलब भी ठीक से नहीं पता था। लेकिन उसके पापा ने कहा था, "मीरा, ये सीख लो तो नौकरी पक्की है।" तो बस वो यहाँ थी, बाज़ार के पीछे एक तंग गली में चलते हुए, एक छोटा नीला बोर्ड ढूँढ रही थी जिस पर लिखा था: V.K. Sharma & Associates, Chartered Accountants

मीरा हल्द्वानी में शर्मा सर के दफ़्तर पहुँच रही है, एक तंग सीढ़ी के ऊपर छोटा नीला बोर्ड


मीरा की पहली सुबह

मीरा ने दफ़्तर एक स्टेशनरी शॉप के ऊपर पहली मंज़िल पर ढूँढ लिया। छोटा सा कमरा था — तीन डेस्क, एक प्रिंटर, और मोटी-मोटी फ़ाइल्स से भरी अलमारियाँ। एक छत का पंखा धीरे-धीरे डोल रहा था।

एक नौजवान ने कंप्यूटर से ऊपर देखा। "तुम मीरा हो? मैं नेगी हूँ। आओ, यहाँ बैठो। शर्मा सर 11 बजे तक आएँगे।"

मीरा एक प्लास्टिक कुर्सी पर बैठ गई और इधर-उधर देखने लगी। नंबर। हर तरफ़ नंबर। दीवार पर टेप की हुई प्रिंटआउट्स। एक कैलेंडर जिसमें टैक्स की तारीख़ें लाल रंग से गोल की हुई थीं। कागज़ों के ढेर जिनमें रोज़ और कॉलम्स थे।

"नेगी भैया, ये सब क्या है?" उसने पूछा।

नेगी मुस्कुराया। "ये? ये अकाउंटिंग है। यहाँ हर नंबर किसी के बिज़नेस की कहानी बताता है — कितना कमाया, कितना ख़र्च किया, कितना टैक्स भरना है।"

मीरा ने पलकें झपकाईं। "लेकिन... क्या ये बस नंबर लिखना नहीं है?"

नेगी ने सिर हिलाया। "ज़्यादातर लोग यही सोचते हैं। लेकिन बस नंबर लिखने और अकाउंटिंग करने में बहुत बड़ा फ़र्क़ है। तुम जल्दी समझ जाओगी।"


अकाउंटिंग क्या है?

ठीक 11 बजे शर्मा सर आए। लंबे क़द के आदमी, चाँदी जैसे बाल, गले में चेन से लटका चश्मा, और चेहरे पर शांत मुस्कान। हाथ में स्टील का टिफ़िन और अख़बार।

"अरे, मीरा! आओ, आओ। बैठो, बैठो। नेगी, चाय लाओ।"

चाय आने के बाद शर्मा सर ने अपनी कुर्सी क़रीब खींची।

"तो, मीरा। बताओ। क्या तुम अपने पैसों का हिसाब रखती हो?"

मीरा ने एक पल सोचा। "हाँ सर। जब पापा महीने के पैसे देते हैं, तो मैं लिखती हूँ — बस का किराया, नोटबुक्स, खाना।"

"बहुत अच्छा! तुम्हारी वो छोटी सी नोटबुक — वही अकाउंटिंग की शुरुआत है। तुम हिसाब रख रही हो कि पैसा कहाँ से आया और कहाँ गया।"

उन्होंने एक पेन उठाया और कागज़ पर लिखा:

अकाउंटिंग = बिज़नेस में आने वाले और जाने वाले हर पैसे का पूरा, व्यवस्थित हिसाब रखना — ताकि तुम्हें हमेशा पता रहे कि पैसा कहाँ है और बिज़नेस कैसा चल रहा है।

"बस इतना?" मीरा ने पूछा।

"इसकी जान यही है," शर्मा सर ने कहा। "लेकिन की वर्ड है व्यवस्थित। कोई भी डायरी में नंबर लिख सकता है। अकाउंटिंग का मतलब है उन्हें एक सिस्टमैटिक तरीक़े से लिखना — कुछ नियमों का पालन करते हुए — ताकि वो जानकारी काम की हो।"

एक सिंपल फ़्लोचार्ट: पैसा आया -> लिखो -> पैसा गया -> लिखो -> अब तुम्हें पता है तुम कहाँ खड़े हो


तुम्हारा निजी खाता vs बिज़नेस का खाता

शर्मा सर पीछे झुके। "मीरा, तुम्हारी वो पर्सनल नोटबुक जिसमें तुम ख़र्चे लिखती हो — वो तुम्हारा निजी खाता है। तुम्हारे लिए काम करता है क्योंकि तुम्हारी ज़िंदगी सीधी-सादी है। पैसे का एक सोर्स: पापा। कुछ ख़र्चे: बस, खाना, किताबें।"

"लेकिन एक बिज़नेस? एक छोटी सी किराना दुकान भी? उसमें रोज़ सैकड़ों चीज़ें होती हैं।"

उन्होंने उँगलियों पर गिनाया:

  1. सामान ख़रीदना — दुकान अलग-अलग आपूर्तिकर्ता से चावल, दाल, साबुन, तेल ख़रीदती है।
  2. सामान बेचना — ग्राहक हर घंटे चीज़ें ख़रीदते हैं।
  3. बिल भरना — बिजली, किराया, फ़ोन।
  4. उधार देना — कुछ ग्राहक कहते हैं "लिखो, बाद में दूँगा।"
  5. उधार लेना — दुकानदार होलसेलर से सामान लेकर कहता है "अगले हफ़्ते पेमेंट करूँगा।"
  6. तनख़्वाह देना — अगर दुकान में कोई मददर है।
  7. टैक्स भरना — GST, आमदनी टैक्स।
  8. लोन लेना — शायद बैंक से, दुकान बढ़ाने के लिए।

"अगर तुम ये सब एक डायरी में बिना किसी सिस्टम के लिखो, तो एक हफ़्ते में गड़बड़ हो जाएगी," शर्मा सर ने कहा।

तुम्हारा निजी खाताबिज़नेस का खाता (अकाउंटिंग)
पैसे का एक सोर्स (पॉकेट मनी, तनख़्वाह)कई सोर्स (सेल्स, लोन्स, ब्याज)
कुछ ख़र्चेरोज़ सैकड़ों ट्रांज़ैक्शन्स
सिर्फ़ तुम्हें चाहिएसरकार, बैंक, और साझेदार को भी चाहिए
कोई नियम नहीं — जैसे मन करे लिखोनियम ज़रूरी हैं (ताकि सब समझ सकें)
ग़लतियों से ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ताग़लतियों का मतलब हो सकता है ग़लत टैक्स, पेनल्टी, या नुक़सान

"तो अकाउंटिंग मेरी पर्सनल नोटबुक जैसी है," मीरा ने धीरे से कहा, "लेकिन नियमों के साथ, और बिज़नेस के लिए।"

"बिल्कुल सही," शर्मा सर ने कहा।


फटी हुई नोटबुक — रावत आंटी की विज़िट

तभी दफ़्तर का दरवाज़ा खुला और एक औरत अंदर आई, थोड़ी हाँफ रही थी। सादी सलवार-कमीज़ पहनी थी और हाथ में एक कपड़े का थैला था।

"शर्मा जी! मुझे मदद चाहिए। बैंक मेरे अकाउंट्स माँग रहा है। मेरे पास कोई अकाउंट्स नहीं हैं। मेरे पास बस ये है।"

उसने थैले से एक पुरानी-सी नोटबुक निकाली। कवर फटा हुआ था। पन्ने गिर रहे थे। कुछ एंट्रीज़ पेंसिल में थीं, कुछ पेन में, कुछ नीली इंक में, कुछ लाल में। कई जगह तारीख़ें नहीं थीं। नाम छोटे करके लिखे थे। कुछ पन्नों पर चाय के दाग़ नंबरों को ढक रहे थे।

ये थीं रावत आंटी — वो रावत जनरल स्टोर चलाती थीं, अल्मोड़ा में एक किराना दुकान।

शर्मा सर ने नोटबुक ध्यान से खोली। "रावत जी, देखता हूँ..."

उन्होंने कुछ पन्ने पलटे और ज़ोर से पढ़ा:

  • "रमेश — 500" (कौन रमेश? 500 किसके? कब?)
  • "तेल — 2000" (कौन सा तेल? ख़रीदा या बेचा? किससे?)
  • "नक़द — 15000" (नक़द आया या गया? किस तारीख़ को?)

रावत आंटी की फटी, गंदी नोटबुक जिसमें अनसाफ़ एंट्रीज़ हैं vs नेगी भैया का कंप्यूटर पर साफ़-सुथरा लेजर

शर्मा सर ने प्यार से आह भरी। "रावत जी, मैं समझता हूँ। तुम चीज़ें लिखती रही हो। ये अच्छी बात है। लेकिन ये अकाउंटिंग नहीं है। ये बस... नोट्स हैं। मैं फ़र्क़ दिखाता हूँ।"

उन्होंने नेगी को बुलाया। "नेगी, रावत जी को बिश्त ट्रेडर्स का लेजर दिखाओ।"

नेगी ने अपना कंप्यूटर खोला और स्क्रीन रावत आंटी की तरफ़ घुमाई। उसमें एक साफ़-सुथरी, व्यवस्थित टेबल थी:

तारीख़विवरणपैसा आया (₹)पैसा गया (₹)बाक़ी (₹)
01-Apr-2025ओपनिंग बैलेंस50,000
02-Apr-2025गुप्ता स्टोर को हल्दी बेची12,00062,000
03-Apr-2025देहरादून के आपूर्तिकर्ता से जीरा ख़रीदा8,00054,000
05-Apr-2025बिजली का बिल भरा1,20052,800
06-Apr-2025मेहता किराना से पेमेंट मिली5,00057,800

रावत आंटी टकटकी लगाकर देखती रहीं। "ये तो बहुत साफ़ है। मुझे दिख रहा है कि क्या हो रहा है।"

"हाँ," शर्मा सर ने कहा। "किसी भी वक़्त तुम बता सकती हो कि कितना पैसा है। कौन तुम्हारा पैसा देना है। तुम्हें किसे पैसा देना है। तुम्हारा बिज़नेस फ़ायदे में है या नुक़सान में।"

"और ये," उन्होंने रावत आंटी की फटी नोटबुक की तरफ़ इशारा किया, "कुछ नहीं बताती।"

रावत आंटी शर्मिंदा हुईं। "लेकिन मैं तो बस एक छोटी दुकानदार हूँ..."

शर्मा सर ने हाथ उठाया। "छोटी से छोटी दुकान को भी सही अकाउंट्स चाहिए। बताता हूँ क्यों।"


एक छोटी किराना दुकान को भी अकाउंटिंग क्यों चाहिए

शर्मा सर ने और चाय डाली और आराम से बैठे। मीरा ने एक नई नोटबुक निकाली सब लिखने के लिए।

"पाँच बड़ी वजहें हैं कि हर बिज़नेस को — चाहे कितना भी छोटा हो — सही हिसाब-किताब रखना ज़रूरी है।"

वजह 1: पता चले कि कमा रहे हो या गँवा रहे हो

"रावत जी, सच-सच बताओ — तुम्हारी दुकान फ़ायदे में है?"

रावत आंटी हिचकिचाईं। "लगता तो है... मतलब, पैसा तो रोज़ आता है..."

"लेकिन क्या तुम्हें पता है हर महीने कितना ख़र्च होता है? सामान ख़रीदने पर, किराए पर, बिजली पर, ट्रांसपोर्ट पर?"

उन्होंने सिर हिलाया।

"बिना सही अकाउंट्स के, तुम्हें लगता है कि कमा रही हो, लेकिन असल में धीरे-धीरे नुक़सान हो रहा हो। कई छोटी दुकानें इसलिए बंद हो जाती हैं क्योंकि मालिक को कभी पता ही नहीं चला कि वो कमाने से ज़्यादा ख़र्च कर रहा था।"

बिना अकाउंट्स के ख़तरा: पिथौरागढ़ में एक दुकानदार ने शर्मा सर को बताया कि उसका बिज़नेस "अच्छा चल रहा है।" जब बैठकर ठीक से हिसाब लगाया, तो पता चला कि दुकान दो साल से हर महीने ₹3,000 का नुक़सान कर रही थी। मालिक धीरे-धीरे अपनी बचत ख़र्च कर रहा था बिना इसका एहसास किए।

वजह 2: बैंक से लोन मिले

"तुम आज मेरे पास इसलिए आई हो क्योंकि बैंक ने अकाउंट्स माँगे हैं। बैंक को लोन देने से पहले तुम्हारे अकाउंट्स देखने होते हैं। वो जानना चाहते हैं: क्या ये बिज़नेस ठीक चल रहा है? क्या ये इंसान पैसा वापस कर सकता है?"

"बिना सही अकाउंट्स के, बैंक तुम पर भरोसा नहीं कर सकता। तुम्हारी लोन एप्लिकेशन ख़ारिज हो जाएगी।"

वजह 3: सही टैक्स भरो

"सरकार बिज़नेसेज़ से टैक्स लेती है। अगर तुम रिकॉर्ड नहीं रखतीं, तो दो चीज़ें हो सकती हैं:"

  1. ज़्यादा टैक्स भरो — क्योंकि तुम अपने ख़र्चे प्रूव नहीं कर सकतीं, तो सरकार मान लेती है कि तुमने ज़्यादा कमाया।
  2. कम टैक्स भरो — ग़लती से, और फिर सरकार पेनल्टी (सज़ा के तौर पर एक्स्ट्रा पैसे) लगाती है।

"दोनों ख़राब हैं। सही अकाउंट्स का मतलब है कि तुम बिल्कुल सही रक़म भरो। न एक रुपया ज़्यादा, न एक रुपया कम।"

वजह 4: उधार का हिसाब रखो

"रावत जी, अभी कितने ग्राहकों पर तुम्हारा पैसा बाक़ी है?"

रावत आंटी ने सोचा। "शायद... पंद्रह? बीस?"

"कुल कितना?"

"मुझे... पक्का नहीं पता।"

"देखो? तुमने लोगों को उधार पर सामान दिया है और तुम्हें पता भी नहीं कि कितना देना है। वो तुम्हारा पैसा है। बिना हिसाब के, कुछ लोग भूल जाएँगे — या भूलने का नाटक करेंगे।"

वजह 5: बेहतर फ़ैसले लो

"अगर तुम अच्छे अकाउंट्स रखो, तो ऐसे सवालों के जवाब मिल सकते हैं:"

  • कौन सा सामान सबसे ज़्यादा बिकता है?
  • किस महीने सबसे ज़्यादा सेल होती है?
  • क्या मैं ट्रांसपोर्ट पर बहुत ज़्यादा ख़र्च कर रही हूँ?
  • इस चीज़ का स्टॉक ज़्यादा रखूँ या कम?

"अकाउंटिंग तुम्हें जानकारी देती है। जानकारी से फ़ैसले लेने में मदद मिलती है। अच्छे फ़ैसलों से बिज़नेस बढ़ता है।"

एक डायग्राम: सही अकाउंटिंग -> काम की जानकारी -> बेहतर फ़ैसले -> बिज़नेस में बढ़ोतरी

रावत आंटी ने धीरे-धीरे सिर हिलाया। "शर्मा जी, अब समझ आया। लेकिन शुरू कहाँ से करूँ?"

शर्मा सर मुस्कुराए। "चिंता मत करो। हम मदद करेंगे। असल में, मीरा यहाँ चरण बाय चरण अकाउंटिंग सीखेगी। और जैसे-जैसे वो सीखेगी, तुम्हारी बुक्स भी सँभालेंगे।"

उन्होंने मीरा की तरफ़ देखा। "मीरा, तुमने अभी अपना पहला लेसन सुना। चलो पक्का करें कि तुम ठीक से समझी हो।"


बस नंबर लिखना vs असली अकाउंटिंग

मीरा ज़ोर-शोर से नोट्स लिख रही थी। शर्मा सर ने गौर किया और बोले, "अच्छा। अब मैं फ़र्क़ बिल्कुल साफ़ कर देता हूँ।"

बस नंबर लिखनाअसली अकाउंटिंग
कोई तय फ़ॉर्मेट नहीं — कहीं भी, कैसे भी लिखोतय फ़ॉर्मेट — हर एंट्री में तारीख़, विवरण, और रक़म
कोई नियम नहीं कि क्या लिखना हैनियम बताते हैं कि हर तरह का ट्रांज़ैक्शन कैसे लिखना है
सिर्फ़ लिखने वाला समझता है (कभी-कभी वो भी नहीं!)अकाउंटिंग जानने वाला कोई भी पढ़ और समझ सकता है
फ़ायदा-नुक़सान आसानी से गणना नहीं हो सकताफ़ायदा-नुक़सान कभी भी गणना हो सकता है
बैंक, सरकार, या साझेदार को दिखा नहीं सकतेकिसी को भी दिखा सकते हो — ये एक स्टैंडर्ड भाषा है
नंबर शायद मिलें, शायद न मिलेंनंबर मिलने ही चाहिए — इसमें बिल्ट-इन चेक्स हैं

"इसे ऐसे सोचो," शर्मा सर ने कहा। "तुम जानती हो डॉक्टर्स प्जोखिम्रिप्शन कैसे लिखते हैं?"

"हाँ, उस भयंकर हैंडराइटिंग में," मीरा हँसी।

"बिल्कुल। लेकिन हैंडराइटिंग ख़राब होने के बावजूद, इंडिया का हर फ़ार्मासिस्ट उसे पढ़ सकता है। क्यों? क्योंकि एक सिस्टम पालन होता है। दवा का नाम, डोज़, कितनी बार लेनी है — ये हमेशा एक तय फ़ॉर्मेट में होता है। अकाउंटिंग भी बिज़नेस के नंबरों के साथ यही करती है। एक ऐसा सिस्टम बनाती है जिसे सब पालन कर सकें।"


जब अकाउंट्स नहीं रखते तो क्या होता है

शर्मा सर गंभीर हो गए। "मैं तुम्हें कुछ असली समस्याएँ बताता हूँ जो मैंने तीस साल CA रहते हुए देखी हैं।"

समस्या 1: टैक्स नोटिस और पेनल्टी

"रुद्रपुर में एक दुकानदार ने कभी कोई रिकॉर्ड नहीं रखे। एक दिन उसे आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस आया। उन्होंने उसकी आमदनी ₹12 लाख एस्टिमेट की और उस पर टैक्स माँगा। उसकी असली आमदनी सिर्फ़ ₹4 लाख थी — लेकिन उसके पास प्रूव करने के लिए कोई रिकॉर्ड नहीं थे। उसे ₹12 लाख पर टैक्स भरना पड़ा, प्लस पेनल्टी।"

समस्या 2: लोन रिजेक्शन

"काशीपुर में एक औरत अपना टेलरिंग बिज़नेस बढ़ाना चाहती थी। वो बैंक गई ₹2 लाख का लोन लेने। बैंक ने अकाउंट्स माँगे। उसके पास कुछ नहीं था। लोन ख़ारिज। उसका बिज़नेस अच्छा था, लेकिन वो कागज़ पर प्रूव नहीं कर सकी।"

समस्या 3: साझेदारी में झगड़े

"रामनगर में दो भाई मिलकर एक हार्डवेयर शॉप चलाते थे। कोई सही अकाउंट्स नहीं। पाँच साल बाद ज़बरदस्त लड़ाई। एक बोला 'मैंने ज़्यादा पैसा लगाया।' दूसरा बोला 'नहीं, मैंने।' कोई रिकॉर्ड नहीं था। परिवार टूट गया।"

समस्या 4: चोरी का पता ही नहीं चला

"हल्द्वानी में एक दुकान का मालिक था जिसका मददर रोज़ कैश बॉक्स से ₹500 चुरा रहा था। अकाउंटिंग नहीं होने की वजह से मालिक को कभी पता ही नहीं चला। ये दो साल तक चला। ₹3,65,000 का नुक़सान।"

समस्या 5: बिना वॉर्निंग के बिज़नेस डूब गया

"एक रेस्टोरेंट मालिक सोचता था कि बिज़नेस बहुत अच्छा चल रहा है क्योंकि ग्राहकों रोज़ आते थे। लेकिन उसने कभी अपने ख़र्चे ठीक से ट्रैक नहीं किए। जब तक उसे पता चला कि वो कमाने से ज़्यादा ख़र्च कर रहा है, तब तक ₹5 लाख का क़र्ज़ हो चुका था।"

एक कार्टून जिसमें पाँच समस्याएँ दिखाई गई हैं: टैक्स पेनल्टी नोटिस, लोन रिजेक्शन स्टैम्प, दो भाई लड़ रहे हैं, कैश बॉक्स से पैसे ग़ायब हो रहे हैं, बंद दुकान

मीरा ने रावत आंटी को देखा। रावत आंटी चिंतित लग रही थीं।

"चिंता मत करो," शर्मा सर ने प्यार से कहा। "ये समस्याएँ तब होती हैं जब अकाउंटिंग नहीं होती। यही तो हम ठीक करने आए हैं।"


अकाउंटिंग एक भाषा है

शर्मा सर उठे और दीवार पर लगे व्हाइटबोर्ड की तरफ़ गए।

"आज के लिए एक आख़िरी बात, मीरा। मैं चाहता हूँ कि तुम अकाउंटिंग को एक भाषा की तरह सोचो।"

"हिंदी एक भाषा है। इंग्लिश एक भाषा है। और अकाउंटिंग? ये बिज़नेस की भाषा है।"

"जैसे हिंदी में ग्रामर के नियम हैं — सब्जेक्ट, वर्ब, ऑब्जेक्ट — अकाउंटिंग में भी नियम हैं। जैसे बच्चे हिंदी के शब्द एक-एक करके सीखते हैं, वैसे ही तुम अकाउंटिंग के शब्द एक-एक करके सीखोगी।"

"और जैसे हिंदी जानने से तुम पूरे इंडिया में लोगों से बात कर सकती हो, वैसे ही अकाउंटिंग जानने से तुम दुनिया में कहीं का भी बिज़नेस समझ सकती हो।"

उन्होंने व्हाइटबोर्ड पर लिखा:

अकाउंटिंग = बिज़नेस की भाषा। ये नंबरों में बिज़नेस की कहानी बताती है। जो ये भाषा जानता है, वो किसी भी बिज़नेस की कहानी पढ़ सकता है।

"अल्मोड़ा की एक दुकान और मुंबई की एक कंपनी — दोनों एक ही अकाउंटिंग के नियम इस्तेमाल करती हैं। इसकी ख़ूबसूरती यही है। एक बार ये भाषा सीख ली, तो कहीं भी काम कर सकती हो।"

मीरा उस दिन पहली बार मुस्कुराई। भाषा तो वो सीख सकती है। उसने हिंदी सीखी है, इंग्लिश सीखी है। ये भी सीख सकती है।

शर्मा सर व्हाइटबोर्ड पर "अकाउंटिंग = बिज़नेस की भाषा" लिख रहे हैं जबकि मीरा नोट्स ले रही है


मीरा का दिन का काम

रावत आंटी के जाने से पहले, शर्मा सर ने मीरा को उसका पहला काम दिया।

"मीरा, मैं चाहता हूँ कि तुम रावत आंटी के साथ दस मिनट बैठो। उनकी नोटबुक देखो। जो भी ग़लतियाँ दिखें उनकी लिस्ट बनाओ। कौन सी जानकारी ग़ायब है? क्या करने से ये बेहतर होगी?"

मीरा रावत आंटी के साथ बैठी और नोटबुक पन्ना-पन्ना देखी। दस मिनट बाद उसके पास एक लिस्ट थी:

  1. कई एंट्रीज़ में तारीख़ नहीं — पता नहीं चलता कब हुआ।
  2. पूरे नाम नहीं — बस "रमेश" या "तेल।" कौन रमेश? कौन सा तेल?
  3. विवरण नहीं — "500" से पता नहीं चलता कि मिला या दिया।
  4. सब कुछ मिला-जुला — ख़रीदना, बेचना, ख़र्चे, सब एक ही पन्ने पर बिना किसी अलगाव के।
  5. कोई कुल नहीं — पन्ने बस चलते जाते हैं बिना किसी मंथली कुल या रनिंग बैलेंस के।
  6. कुछ पन्ने ग़ायब — कुछ पन्ने फटकर निकल गए थे।
  7. दो अलग-अलग हैंडराइटिंग — कभी रावत आंटी ने लिखा, कभी उनके बेटे ने, अलग-अलग स्टाइल में।
  8. नक़द और उधार में कोई फ़र्क़ नहीं — पता नहीं चलता कि पैसा सच में आया-गया या उधार था।

शर्मा सर ने उसकी लिस्ट पढ़ी और सिर हिलाया। "शाबाश। इनमें से हर एक समस्या को अकाउंटिंग हल करती है। अगले कुछ हफ़्तों में मैं तुम्हें सिखाऊँगा कि कैसे।"


क्विक रीकैप — चैप्टर 1

अकाउंटिंग क्या है? — बिज़नेस में आने-जाने वाले पैसे का व्यवस्थित तरीक़े से हिसाब रखना।

ये बस नंबर लिखने से अलग कैसे है? — इसमें नियम हैं, तय फ़ॉर्मेट है, और ऐसी जानकारी बनती है जिसे कोई भी पढ़ और समझ सकता है।

हर बिज़नेस को ये क्यों चाहिए?

  • फ़ायदा हो रहा है या नुक़सान, ये जानने के लिए
  • बैंक से लोन लेने के लिए
  • सही टैक्स भरने के लिए
  • कौन उधार देना है और किसे उधार देना है, ट्रैक करने के लिए
  • समझदारी से बिज़नेस के फ़ैसले लेने के लिए

बिना अकाउंटिंग के क्या होता है? — टैक्स पेनल्टी, लोन रिजेक्शन, झगड़े, चोरी, बिज़नेस डूबना।

मुख्य बात: अकाउंटिंग बिज़नेस की भाषा है। सीख लो, तो कहीं भी काम कर सकते हो।


अभ्यास अभ्यास — ख़ुद करके देखो

तुम्हें दुकान की ज़रूरत नहीं। अपनी ज़िंदगी या अपने घर के छोटे-मोटे ख़र्चों से ट्राई करो।

अभ्यास 1: एक ख़ाली नोटबुक लो। अगले तीन दिन, अपने घर में होने वाला हर पैसे का लेन-देन लिखो। ये फ़ॉर्मेट पालन करो:

तारीख़क्या हुआपैसा आया (₹)पैसा गया (₹)
उदाहरण: 12-Jun-2025पापा को तनख़्वाह मिली25,000
उदाहरण: 12-Jun-2025बाज़ार से सब्ज़ी ख़रीदी200

कम से कम 10 एंट्रीज़ लिखो।

अभ्यास 2: तीन दिन बाद, सारे "पैसा आया" जोड़ो और सारे "पैसा गया" जोड़ो। फ़र्क़ निकालो। वो नंबर तुम्हें क्या बताता है?

अभ्यास 3: अपने शहर या गाँव की एक छोटी दुकान के बारे में सोचो। उस दुकान में रोज़ होने वाले कम से कम 8 अलग-अलग तरह के ट्रांज़ैक्शन्स की लिस्ट बनाओ। (हिंट: सामान ख़रीदना, ग्राहकों को बेचना, किराया भरना, उधार देना...)

अभ्यास 4: रावत आंटी की गंदी नोटबुक की समस्याएँ देखो (जो मीरा ने लिस्ट बनाई)। इनमें से कौन सी समस्याएँ तुम्हारी नोटबुक में भी हैं? तुम उन्हें कैसे ठीक करोगे?


मज़ेदार तथ्य — दुनिया के सबसे पुराने अकाउंट्स

क्या तुम्हें पता है कि अकाउंटिंग दुनिया के सबसे पुराने हुनर में से एक है? प्राचीन मेसोपोटेमिया (आज का इराक़) में लोग 5,000 साल पहले मिट्टी की टैबलेट्स पर अकाउंट्स रखते थे! वो लिखते थे कि कितने बोरे अनाज हैं, कितनी भेड़ें बेचीं, और किसका कितना बाक़ी है।

इंडिया में कौटिल्य के अर्थशास्त्र (लगभग 300 ईसा पूर्व लिखा गया) में विस्तार से बताया गया है कि एक राज्य को अपने अकाउंट्स कैसे रखने चाहिए। तो जब तुम अकाउंटिंग सीखते हो, तो एक ऐसा हुनर सीख रहे हो जो हज़ारों साल पुराना है — और आज भी धरती पर सबसे काम के हुनर में से एक है।

और सबसे अच्छी बात: अकाउंटिंग की माँग कभी ख़त्म नहीं होगी। जब तक लोग बिज़नेस करेंगे, उन्हें किसी ना किसी की ज़रूरत होगी जो उनका हिसाब-किताब रखे। वो कोई तुम हो सकते हो।

कल, मीरा अकाउंटिंग की सबसे बुनियादी ईंट सीखेगी — ट्रांज़ैक्शन। असल में ट्रांज़ैक्शन किसे कहते हैं? चलो पता करते हैं।


पैसा आया, पैसा गया — ट्रांज़ैक्शन्स

मीरा का दफ़्तर में दूसरा दिन था। वो जल्दी आई, सबके लिए चाय बनाई, और अपनी नोटबुक खोलकर डेस्क पर बैठ गई। कल उसने सीखा था कि अकाउंटिंग क्यों ज़रूरी है। आज शर्मा सर ने पहला असली कॉन्सेप्ट सिखाने का वादा किया था। "आज," उन्होंने अपना स्टील का टिफ़िन डेस्क पर रखते हुए कहा, "हम ट्रांज़ैक्शन्स के बारे में सीखेंगे। ये अकाउंटिंग का एटम है। सब कुछ इसी से बनता है।"

मीरा अपनी डेस्क पर, नोटबुक खुली, पेन तैयार, शर्मा सर अपनी कुर्सी पर बैठ रहे हैं


ट्रांज़ैक्शन क्या है?

शर्मा सर ने अपनी डेस्क से दो चीज़ें उठाईं: एक पेन और एक दस रुपये का नोट।

"मीरा, मैं तुम्हें ये पेन दूँगा। तुम मुझे दस रुपये दो।"

मीरा हँसी लेकिन खेल में शामिल हो गई। उसने पेन लिया। उन्होंने दस रुपये का नोट लिया।

"अभी क्या हुआ?" उन्होंने पूछा।

"आपने मुझे दस रुपये में पेन बेचा," मीरा ने कहा।

"सही। कुछ एक्सबदलाव हुआ। मैंने तुम्हें पेन दिया। तुमने मुझे पैसे दिए। ये एक्सबदलाव — यही ट्रांज़ैक्शन है।"

उन्होंने व्हाइटबोर्ड पर लिखा:

ट्रांज़ैक्शन = कोई भी एक्सबदलाव जिसमें पैसा या पैसे की वैल्यू वाली कोई चीज़ शामिल हो।

"जब भी पैसा हाथ बदलता है, या सामान हाथ बदलता है, या पेमेंट करने का वादा किया जाता है — वो ट्रांज़ैक्शन है।"

"रोज़मर्रा की ज़िंदगी से और उदाहरण दूँ।"

उदाहरणक्या ये ट्रांज़ैक्शन है?क्यों?
तुम एक स्टॉल से ₹15 की चाय ख़रीदते होहाँपैसा (₹15) चाय के बदले एक्सबदलाव हुआ
तुम ₹199 का फ़ोन बिल भरते होहाँपैसा एक सेवा के बदले एक्सबदलाव हुआ
तुम एक दोस्त से ₹500 उधार लेते होहाँपैसा मिला, वापस करने का वादा है
तुम पड़ोसी को हाथ हिलाकर नमस्ते करते होनहींकोई पैसा या वैल्यू एक्सबदलाव नहीं हुई
तुम मंदिर में ₹100 चढ़ाते होहाँपैसा गया (भले ही बदले में कुछ फ़िज़िकली नहीं मिला, फिर भी ये ट्रांज़ैक्शन है)
तुम्हारी छत पर बारिश होती हैनहींकोई पैसा या वैल्यू शामिल नहीं

"तो ट्रांज़ैक्शन सिर्फ़ ख़रीदना-बेचना नहीं है?" मीरा ने पूछा।

"नहीं! किराया देना ट्रांज़ैक्शन है। लोन मिलना ट्रांज़ैक्शन है। मददर को तनख़्वाह देना ट्रांज़ैक्शन है। अपना ख़ुद का पैसा बिज़नेस में डालना — वो भी ट्रांज़ैक्शन है। कोई भी इवेंट जो बिज़नेस की पैसे की तस्वीर बदले, वो ट्रांज़ैक्शन है।"


कैश ट्रांज़ैक्शन vs क्रेडिट ट्रांज़ैक्शन

"अब," शर्मा सर ने कहा, "ट्रांज़ैक्शन्स दो मुख्य टाइप के होते हैं। ये इंपॉर्टेंट है। ध्यान से सुनो।"

कैश ट्रांज़ैक्शन — पैसा अभी

"जब तुम चाय ख़रीदकर तुरंत ₹15 देते हो — पैसा मौक़े पर ही हाथ बदलता है। ये कैश ट्रांज़ैक्शन है।"

कैश ट्रांज़ैक्शन = पेमेंट एक्सबदलाव के वक़्त तुरंत होती है।

"ध्यान दो: 'कैश' का मतलब यहाँ सिर्फ़ नोट और सिक्के नहीं है। अगर तुम ख़रीदते वक़्त UPI, डेबिट कार्ड, या बैंक ट्रांसफ़र से पे करो — तो भी ये कैश ट्रांज़ैक्शन है। बात ये है कि पेमेंट तुरंत हो गई।"

क्रेडिट ट्रांज़ैक्शन — पैसा बाद में

"लेकिन कभी-कभी पेमेंट तुरंत नहीं होती। रावत आंटी होलसेलर से चावल ख़रीदती हैं। चावल आज आता है। लेकिन पेमेंट अगले हफ़्ते। ये क्रेडिट ट्रांज़ैक्शन है।"

क्रेडिट ट्रांज़ैक्शन = सामान या सेवा अभी एक्सबदलती है, लेकिन पेमेंट बाद में। हिंदी में इसे उधार कहते हैं।

"मीरा, तुम्हारे गाँव में लोग उधार पर चीज़ें ख़रीदते हैं?"

"हर वक़्त!" मीरा ने कहा। "हमारी लोकल दुकान पर लोग बोलते हैं 'लिख लो, महीने में दूँगा।' दुकानदार अपनी बही खाता में लिखता है।"

"बिल्कुल। वो बही खाता वाली एंट्री? वही क्रेडिट ट्रांज़ैक्शन दर्ज करना है।"

एक कार्टून जिसमें दो सीन्स हैं: बाएँ — ग्राहक काउंटर पर कैश दे रहा है (कैश ट्रांज़ैक्शन); दाएँ — ग्राहक बोल रहा है "लिख लो, बाद में दूँगा" और दुकानदार नोटबुक में लिख रहा है (क्रेडिट ट्रांज़ैक्शन)

यहाँ एक कंपेरिज़न है:

कैश ट्रांज़ैक्शनक्रेडिट ट्रांज़ैक्शन
पेमेंट कब होती है?अभी, एक्सबदलाव के वक़्तबाद में — कुछ दिन, हफ़्ते, या महीनों बाद
ख़रीदने का उदाहरणसाबुन ख़रीदा, तुरंत ₹40 दिए₹5,000 का चावल ख़रीदा, अगले हफ़्ते पेमेंट
बेचने का उदाहरणग्राहक ने दाल ख़रीदी, ₹120 कैश दिएग्राहक सामान ले गया, बोला "शुक्रवार को दूँगा"
ख़तराकोई ख़तरा नहीं — पैसा मिल गयाख़तरा है — सामने वाला शायद पे न करे
हिंदी शब्दनक़दउधार
रिकॉर्ड ज़रूरी है?हाँहाँ — और ये भी ट्रैक करना होगा कि पेमेंट कब तक आनी है

पैसा आया vs पैसा गया

शर्मा सर ने व्हाइटबोर्ड पर दो ऐरोज़ बनाए — एक अंदर की तरफ़, एक बाहर की तरफ़।

"हर ट्रांज़ैक्शन बिज़नेस के नज़रिए से दो में से एक काम करता है:"

पैसा आया (इनफ़्लो)

"पैसा बिज़नेस में आता है। उदाहरण:"

  • ग्राहक सामान का पैसा देता है
  • ग्राहक पुराना उधार चुकाता है
  • बैंक से लोन मिलता है
  • तुम अपनी बचत बिज़नेस में डालते हो

पैसा गया (आउटफ़्लो)

"पैसा बिज़नेस से बाहर जाता है। उदाहरण:"

  • आपूर्तिकर्ता से स्टॉक ख़रीदते हो
  • किराया देते हो
  • बिजली का बिल भरते हो
  • मददर को तनख़्वाह देते हो
  • लोन की किस्त चुकाते हो

"कुछ ट्रांज़ैक्शन्स में पैसा आता है। कुछ में पैसा जाता है। अकाउंटेंट का काम है दोनों को दर्ज करना — साफ़, सही, और वक़्त पर।"

दो ऐरोज़: एक दुकान की तरफ़ इशारा कर रहा है "पैसा आया" लिखा है (सेल्स, लोन, पुराना उधार मिला), एक बाहर इशारा कर रहा है "पैसा गया" लिखा है (स्टॉक ख़रीदना, किराया, बिजली)


मीरा रावत आंटी की दुकान पर जाती है

दोपहर को शर्मा सर ने मीरा और नेगी भैया को रावत आंटी की दुकान पर भेजा, अल्मोड़ा। हल्द्वानी से बस का सफ़र पहाड़ी सड़कों से होते हुए तक़रीबन तीन घंटे का था।

रावत जनरल स्टोर मुख्य सड़क पर एक छोटी लेकिन बिज़ी किराना दुकान थी। अलमारियों में चावल, दाल, तेल, साबुन, बिस्किट्स, मसाले, और डिटर्जेंट भरे थे। रावत आंटी का बेटा काउंटर पर उनकी मदद करता था।

"मीरा, मैं चाहता हूँ कि तुम यहाँ दो घंटे बैठो," नेगी भैया ने कहा। "हर ट्रांज़ैक्शन देखो जो होता है। अपनी नोटबुक में लिखो। हर एक के लिए नोट करो:"

  1. क्या हुआ (विवरण)
  2. कितना पैसा (रक़म)
  3. कैश या क्रेडिट?
  4. पैसा आया या गया?

"मैं पास में बिष्ट जी के वेयरहाउस देखने जा रहा हूँ। 5 बजे तक वापस आता हूँ।"

मीरा काउंटर के पास एक स्टूल पर बैठी, नोटबुक हाथ में, और देखती रही।


रावत जनरल स्टोर में दो घंटे

दुकान मीरा की उम्मीद से ज़्यादा बिज़ी थी। सिर्फ़ दो घंटों में उसने ये देखा और लिखा:

ट्रांज़ैक्शन 1: एक औरत ने 2 kg चावल (₹80), 1 kg दाल (₹120), और एक साबुन (₹35) ख़रीदा। उसने ₹235 कैश दिए।

ट्रांज़ैक्शन 2: रावत आंटी के बेटे ने एक आपूर्तिकर्ता की डिलीवरी उतारी — 10 पैकेट बिस्किट्स, 5 kg हल्दी, और 20 साबुन। डिलीवरी वाले के पास ₹4,200 का बिल था। रावत आंटी ने कहा, "शनिवार को दूँगी।" डिलीवरी वाले ने नोट किया और चला गया।

ट्रांज़ैक्शन 3: एक बूढ़े आदमी ने आकर कहा, "रावत जी, पिछले महीने तेल और दाल उधार ली थी। ये लो ₹650।" रावत आंटी ने पैसे लिए और उसका नाम नोटबुक में ढूँढने लगीं।

ट्रांज़ैक्शन 4: रावत आंटी के बेटे ने बगल के पोस्ट दफ़्तर में जाकर बिजली का बिल भरा — ₹1,100।

ट्रांज़ैक्शन 5: एक स्कूल का लड़का आया और बिस्किट्स का पैकेट (₹20) और कोल्ड ड्रिंक (₹30) ख़रीदा। ₹50 कैश दिए।

ट्रांज़ैक्शन 6: रावत आंटी ने एक औरत को सामान का बंडल दिया जो बोली, "दीदी, लिखो ना, पेंशन आएगी तो दे दूँगी।" सामान ₹380 का था। ये उधार था।

ट्रांज़ैक्शन 7: एक आदमी ने 5 kg आटा (₹200) ख़रीदा और UPI से पे किया। फ़ोन बजा — "₹200 रिसीव्ड।"

ट्रांज़ैक्शन 8: रावत आंटी ने एक लड़के को ₹200 दिए जिसने सुबह भारी बोरियाँ उठाने में मदद की — उसकी दिहाड़ी।

ट्रांज़ैक्शन 9: एक नियमित ग्राहक ने बड़ा ऑर्डर दिया — 10 kg चावल, 5 kg चीनी, 2 लीटर तेल, और दूसरा सामान, कुल ₹1,850। उसने ₹1,000 कैश दिए और बोला, "बाक़ी अगले हफ़्ते।" तो ₹850 उधार पर था।

ट्रांज़ैक्शन 10: रावत आंटी ने रजिस्टर से कुछ कैश गिनकर ₹5,000 एक लिफ़ाफ़े में रखे। "ये मकान मालिक के लिए है," उन्होंने बेटे से कहा। "कल दे देना।" उन्होंने इसे किराए के लिए अलग रख दिया।

ट्रांज़ैक्शन 11: एक औरत ने दाल का पैकेट वापस किया, कहा कि इसमें कीड़े हैं। रावत आंटी ने वापस ले लिया और ₹120 कैश में लौटाए।

ट्रांज़ैक्शन 12: बंद करने के वक़्त के क़रीब, रावत आंटी ने बगल के स्टॉल से अपने और बेटे के लिए चाय और समोसे ख़रीदे — ₹60।

मीरा रावत जनरल स्टोर में काउंटर के पास स्टूल पर बैठी नोटबुक में लिख रही है जबकि ग्राहक आ-जा रहे हैं


मीरा अपने नोट्स व्यवस्थित करती है

हल्द्वानी वापसी की बस में, नेगी भैया ने मीरा की नोटबुक देखी। "अच्छा ऑब्ज़र्वेशन किया। अब इन्हें व्यवस्थित करो। सब कुछ एक टेबल में डालो।"

मीरा ने एक टेबल बनाई और ध्यान से भरी:

#क्या हुआरक़म (₹)कैश या क्रेडिट?पैसा आया या गया?
1ग्राहक ने चावल, दाल, साबुन ख़रीदा235कैशपैसा आया
2आपूर्तिकर्ता से बिस्किट्स, हल्दी, साबुन की डिलीवरी मिली4,200क्रेडिट (शनिवार को पे)पैसा जाएगा (बाद में)
3बूढ़े आदमी ने पिछले महीने का उधार चुकाया650कैशपैसा आया
4बिजली का बिल भरा1,100कैशपैसा गया
5स्कूल का लड़का, बिस्किट्स और कोल्ड ड्रिंक50कैशपैसा आया
6औरत ने उधार पर सामान लिया380क्रेडिट (पेंशन आने पर पे)पैसा जाएगा (सामान दिया)
7ग्राहक ने आटा ख़रीदा, UPI से पे किया200कैश (UPI = तुरंत)पैसा आया
8मददर लड़के को दिहाड़ी दी200कैशपैसा गया
9बड़ा ऑर्डर — ₹1,000 अभी, ₹850 उधार1,850कुछ कैश, कुछ क्रेडिटपैसा आया (₹1,000 अभी, ₹850 बाद में)
10मकान मालिक के लिए किराये का पैसा अलग रखा5,000कैशपैसा गया
11ख़राब दाल का पैकेट वापस, पैसे लौटाए120कैशपैसा गया
12ख़ुद के लिए चाय और समोसे ख़रीदे60कैशपैसा गया

नेगी भैया ने सिर हिलाकर तारीफ़ की। "ये रावत आंटी की फटी नोटबुक से बहुत बेहतर है, है ना?"

"बहुत बेहतर!" मीरा ने कहा। "मुझे सच में दिख रहा है कि आज क्या-क्या हुआ।"


ज़रूरी ऑब्ज़र्वेशन्स

अगली सुबह दफ़्तर में, शर्मा सर ने मीरा की टेबल देखी। उन्होंने कई ज़रूरी बातें बताईं।

1. UPI भी कैश ट्रांज़ैक्शन है

"ट्रांज़ैक्शन 7 देखो? ग्राहक ने UPI से पे किया। तुमने सही 'कैश' लिखा। बहुत से स्टूडेंट्स यहाँ कन्फ़्इस्तेमाल होते हैं। याद रखो: कैश ट्रांज़ैक्शन का मतलब है पेमेंट तुरंत हुई। फ़र्क नहीं पड़ता कि नोटों से हुई, सिक्कों से, UPI से, बैंक ट्रांसफ़र से, या डेबिट कार्ड से। अगर पैसा तुरंत मूव हुआ, तो ये कैश ट्रांज़ैक्शन है।"

2. कुछ कैश, कुछ क्रेडिट — ये आम बात है

"ट्रांज़ैक्शन 9 बहुत यथार्थवादी है। ग्राहक कुछ रक़म अभी देता है और कुछ बाद में। इंडियन बिज़नेसेज़ में ये हर वक़्त होता है। तुम्हें दोनों हिस्से साफ़ तौर पर दर्ज करने होंगे — कैश वाला हिस्सा और क्रेडिट वाला हिस्सा।"

3. रिटर्न्स भी ट्रांज़ैक्शन्स हैं

"ट्रांज़ैक्शन 11 — ग्राहक ने ख़राब दाल वापस की और रिफ़ंड मिला। इसे सेल्स रिटर्न कहते हैं। ये एक असली ट्रांज़ैक्शन है। पैसा बाहर गया। इसे दर्ज करना ज़रूरी है।"

4. मालिक के निजी ख़र्चे

"ट्रांज़ैक्शन 12 — रावत आंटी ने अपने लिए चाय ख़रीदी। ये ट्रिकी है। क्या ये बिज़नेस ख़र्चा है या पर्सनल ख़र्चा? सही अकाउंटिंग में, बिज़नेस ख़र्चों को पर्सनल ख़र्चों से अलग रखना ज़रूरी है। ये हम आगे ब्योरा में सीखेंगे।"

5. पैसा अलग रखना अभी ट्रांज़ैक्शन नहीं है

"ट्रांज़ैक्शन 10 — उन्होंने किराये का पैसा लिफ़ाफ़े में रखा। स्ट्रिक्टली स्पीकिंग, ट्रांज़ैक्शन तब होता है जब पैसा ऐक्चुअली मकान मालिक को दिया जाए। लिफ़ाफ़े में रखना बस तैयारी है। लेकिन इस चरण पर सिम्प्लिसिटी के लिए, हमने दर्ज कर लिया क्योंकि पैसा कमिटेड हो चुका है।"


छोटे बिज़नेस में ट्रांज़ैक्शन्स के टाइप्स

शर्मा सर ने व्हाइटबोर्ड पर एक चार्ट बनाया जिसमें रावत आंटी जैसी छोटी दुकान के सभी तरह के ट्रांज़ैक्शन्स समराइज़ किए:

1. सेल्स ट्रांज़ैक्शन्स

ग्राहकों को सामान बेचना।

  • कैश सेल्स (ग्राहक अभी पे करता है)
  • क्रेडिट सेल्स (ग्राहक बाद में पे करता है — उधार)

2. परचेज़ ट्रांज़ैक्शन्स

आपूर्तिकर्ता से सामान ख़रीदना दुकान में बेचने के लिए।

  • कैश परचेज़ (आपूर्तिकर्ता को अभी पे करो)
  • क्रेडिट परचेज़ (आपूर्तिकर्ता को बाद में पे करो)

3. ख़र्चा ट्रांज़ैक्शन्स

बिज़नेस चलाने पर पैसा ख़र्च करना (बेचने के लिए सामान ख़रीदना नहीं)।

  • किराया
  • बिजली
  • मज़दूरी/तनख़्वाह
  • मरम्मत
  • ट्रांसपोर्ट

4. रसीद ट्रांज़ैक्शन्स

वो पैसा मिलना जो बाक़ी था।

  • ग्राहक उधार चुकाता है
  • आपूर्तिकर्ता से रिफ़ंड मिलना

5. पेमेंट ट्रांज़ैक्शन्स

वो पैसा देना जो तुम पर बाक़ी है।

  • क्रेडिट पर ख़रीदे सामान का आपूर्तिकर्ता को पेमेंट
  • लोन की किस्त चुकाना

6. रिटर्न ट्रांज़ैक्शन्स

सामान वापस आना।

  • सेल्स रिटर्न (ग्राहक सामान तुम्हें वापस करता है)
  • परचेज़ रिटर्न (तुम सामान आपूर्तिकर्ता को वापस करते हो)

7. मालिक से जुड़े ट्रांज़ैक्शन्स

  • मालिक अपना निजी पैसा बिज़नेस में डालता है (कैपिटल)
  • मालिक बिज़नेस का पैसा निजी काम के लिए निकालता है (ड्रॉइंग्स)

एक फ़्लोचार्ट जिसमें सभी 7 तरह के ट्रांज़ैक्शन्स एक सेंट्रल "ट्रांज़ैक्शन" सर्कल से निकल रहे हैं

"अभी ये सब रटने की कोशिश मत करो," शर्मा सर ने कहा। "अगले कुछ हफ़्तों में तुम हर टाइप कई बार देखोगी। आज की ज़रूरी बात ये है: अब तुम जानती हो कि ट्रांज़ैक्शन क्या है, कैश और क्रेडिट में फ़र्क़ क्या है, और पैसा आया और पैसा गया में फ़र्क़ क्या है।"


हर ट्रांज़ैक्शन को दर्ज करना क्यों ज़रूरी है

"मीरा, एक आख़िरी बात," शर्मा सर ने कहा। "तुमने रावत आंटी की दुकान पर सिर्फ़ दो घंटे देखा और बारह ट्रांज़ैक्शन्स गिने। पूरे दिन में शायद पचास-साठ हों। एक महीने में? एक हज़ार से ऊपर।"

"अगर एक भी छूट गया, तो महीने के अंत में नंबर नहीं मिलेंगे। सोचो अगर सिर्फ़ एक ₹4,200 की क्रेडिट परचेज़ ट्रैक से बाहर हो जाए। महीने के अंत में तुम्हारे रिकॉर्ड दिखाएँगे कि तुम्हारे पास ₹4,200 ज़्यादा हैं जो असल में हैं ही नहीं। आपूर्तिकर्ता पैसा माँगने आएगा, और तुम कन्फ़्इस्तेमाल हो जाओगी।"

"इसीलिए अकाउंटेंट्स केयरफ़ुल लोग होते हैं। हर. एक. ट्रांज़ैक्शन. रिकॉर्ड. होना. चाहिए।"

उन्होंने ज़ोर से टेबल पर थपथपाया।

"तुम सीखोगी कि इन्हें ठीक से कैसे दर्ज करना है, आने वाले चैप्टर्स में। अभी जो हुनर तुम बना रही हो वो है: ऑब्ज़र्वेशन। हर ट्रांज़ैक्शन को होते हुए गौर करना सीखना। यही तुमने आज रावत आंटी की दुकान पर अभ्यास किया।"


क्विक रीकैप — चैप्टर 2

ट्रांज़ैक्शन क्या है? — कोई भी एक्सबदलाव जिसमें पैसा या पैसे की वैल्यू वाली कोई चीज़ शामिल हो।

दो मुख्य टाइप:

  • कैश ट्रांज़ैक्शन — पेमेंट तुरंत होती है (UPI, कार्ड, बैंक ट्रांसफ़र शामिल हैं)
  • क्रेडिट ट्रांज़ैक्शन — सामान/सेवा अभी, पेमेंट बाद में (उधार)

दो डायरेक्शन्स:

  • पैसा आया — पैसा बिज़नेस में आता है (सेल्स, उधार की वापसी, लोन मिलना)
  • पैसा गया — पैसा बिज़नेस से बाहर जाता है (ख़रीदारी, किराया, तनख़्वाह, बिल)

ट्रांज़ैक्शन्स की सात श्रेणियाँ: सेल्स, परचेज़, ख़र्चे, रसीद, पेमेंट्स, रिटर्न्स, मालिक से जुड़े।

सुनहरा नियम: हर एक ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड होना चाहिए। एक भी छूटा, तो नंबर नहीं मिलेंगे।


अभ्यास अभ्यास — ख़ुद करके देखो

अभ्यास 1: अपने घर के पास की एक छोटी दुकान पर जाओ (किराना, स्टेशनरी, चाय की दुकान — कुछ भी)। 30 मिनट से एक घंटे तक वहाँ बैठो। हर ट्रांज़ैक्शन जो देखो वो इस फ़ॉर्मेट में लिखो:

#क्या हुआरक़म (₹)कैश या क्रेडिट?पैसा आया या गया?

कम से कम 8 ट्रांज़ैक्शन्स दर्ज करो।

अभ्यास 2: नीचे दिए गए हर ट्रांज़ैक्शन के लिए बताओ — कैश है या क्रेडिट, और पैसा आया या गया (दुकानदार के नज़रिए से):

ट्रांज़ैक्शनकैश या क्रेडिट?पैसा आया या गया?
ग्राहक ₹45 का साबुन ख़रीदता है और UPI से पे करता है??
दुकानदार आपूर्तिकर्ता से 50 kg चावल ख़रीदता है, अगले हफ़्ते पे करेगा??
पिछले महीने सामान ख़रीदने वाला ग्राहक ₹800 देने आता है??
दुकानदार इलेक्ट्रीशियन को लाइट ठीक करने के ₹500 देता है??
ग्राहक ₹2,000 का सामान लेता है और बोलता है "1 तारीख़ को दूँगा"??
दुकानदार मकान मालिक को ₹15,000 किराया कैश में देता है??
ग्राहक टूटी टॉर्च वापस करता है और ₹150 वापस लेता है??
दुकानदार अपनी पर्सनल बचत से ₹10,000 दुकान की कैश बॉक्स में डालता है??

अभ्यास 3: अपने घर का एक दिन सोचो। उस दिन होने वाला हर ट्रांज़ैक्शन लिस्ट करो। सुबह की चाय (दूध, चीनी, गैस पर ₹ ख़र्च), स्कूल फ़ीस, बस का किराया, सब्ज़ी ख़रीदना, फ़ोन रीचार्ज — सब कुछ। तुम हैरान रहोगे कि एक दिन में कितने ट्रांज़ैक्शन्स होते हैं!


मज़ेदार तथ्य — बही खाता की परंपरा

इंडिया की अकाउंटिंग परंपरा दुनिया की सबसे पुरानी में से एक है। बही खाता सिस्टम भारतीय व्यापारी सदियों से इस्तेमाल कर रहे हैं। मारवाड़ी बिज़नेसमैन, गुजराती ट्रेडर्स, और पूरे देश के दुकानदार अपनी बहियाँ लाल कपड़े के कवर वाली हैंडरिटन किताबों में रखते आए हैं।

दिवाली पर कई इंडियन बिज़नेसेज़ नई बही खाता शुरू करती हैं — नए फ़ाइनेंशियल ईयर के लिए एक ताज़ी किताब। इसीलिए दिवाली को बिज़नेसेज़ के लिए नई शुरुआत का त्योहार भी कहते हैं। पुरानी किताब बंद होती है, और नई किताब देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ खोली जाती है।

और उत्तराखंड की पहाड़ियों में, दुकानदार पीढ़ियों से अपने तरीक़े से उधार का हिसाब रखते आए हैं — अक्सर एक छोटी नोटबुक में बस नाम और रक़म। जो तुम अभी सीख रहे हो वो वही है जो तुम्हारे दादा-दादी इंस्टिंक्ट से जानते थे, बस उसका व्यवस्थित्ड, पेशेवर वर्शन।

ये हुनर तुम्हारे ख़ून में है। तुम बस उसे पेशेवर बनाना सीख रहे हो।

अगले चैप्टर में मीरा अकाउंटिंग का सबसे ताक़तवर आइडिया सीखती है — डबल-एंट्री सिस्टम। हर ट्रांज़ैक्शन के दो पहलू होते हैं। ये सब कुछ बदल देता है।


डबल-एंट्री का जादू

मीरा डे 3 पर दफ़्तर में एक सवाल लेकर आई जो रात भर उसे सोने नहीं दे रहा था। "शर्मा सर, कल मैंने रावत आंटी की दुकान से बारह ट्रांज़ैक्शन्स रिकॉर्ड किए। लिखा कि क्या हुआ और कितना पैसा आया या गया। क्या ये काफ़ी नहीं है? और क्या बचा है?" शर्मा सर ने अपनी धीमी, जानकार मुस्कान दी। "मीरा, कल तुमने जो किया वो ऐसा था जैसे एक सिक्के का सिर्फ़ एक पहलू देखकर उसे डिस्क्राइब कर दो। आज मैं सिक्का पलटूँगा। आज तुम अकाउंटिंग का सबसे बड़ा आइडिया सीखोगी। आज के बाद, तुम पैसे को कभी उसी नज़र से नहीं देखोगी।"

शर्मा सर एक सिक्का पकड़े हुए, दोनों पहलू दिखाने के लिए पलट रहे हैं, जबकि मीरा उत्सुकता से देख रही है


हर ट्रांज़ैक्शन के दो पहलू होते हैं

शर्मा सर ने डेस्क पर एक ₹100 का नोट रखा।

"मीरा, मान लो रावत आंटी ₹100 में एक दाल का पैकेट बेचती हैं। कैश पेमेंट। सीधा सा ट्रांज़ैक्शन। क्या होता है?"

"उन्हें ₹100 मिलते हैं," मीरा ने कहा।

"हाँ। उनका कैश ₹100 बढ़ जाता है। लेकिन और क्या बदलता है?"

मीरा रुकी। "उम्म... उनका स्टॉक? उनके पास एक दाल का पैकेट था। अब नहीं है।"

शर्मा सर ने उत्साह में हल्के से डेस्क पर हाथ मारा। "बिल्कुल! दो चीज़ें बदलीं। उनका कैश बढ़ा ₹100 से। और उनका दाल का स्टॉक घटा कुछ रक़म से। एक ट्रांज़ैक्शन — दो इफ़ेक्ट्स।"

वो व्हाइटबोर्ड की तरफ़ गए।

"एक और उदाहरण देता हूँ। रावत आंटी ₹1,100 का बिजली बिल भरती हैं। क्या बदलता है?"

मीरा ने सोचा। "उनका कैश ₹1,100 कम हो जाता है।"

"और?"

"और... बिजली इस्तेमाल हुई। तो एक ख़र्चा है?"

"बिल्कुल सही। उनका कैश कम हुआ और उनका बिजली ख़र्चा बढ़ा। फिर से — एक ट्रांज़ैक्शन, दो इफ़ेक्ट्स।"

उन्होंने व्हाइटबोर्ड पर की आइडिया अंडरलाइन किया:

हर एक ट्रांज़ैक्शन कम से कम दो अकाउंट्स को असर डालता है।

ये अकाउंटिंग का बुनियादी नियम है। इसे डबल-एंट्री सिस्टम कहते हैं।

"ये आइडिया," शर्मा सर ने मीरा की तरफ़ मुड़कर कहा, "एक इटैलियन मैथमेटिशियन लूका पैसिओली ने सन 1494 में डिस्क्राइब किया था। 500 साल से ज़्यादा पहले। और आज भी दुनिया का हर बिज़नेस, बैंक, और सरकार इसे इस्तेमाल करती है। ये बिज़नेस की हिस्ट्री के सबसे बड़े इन्वेंशन्स में से एक है।"


झूले वाली एनालॉजी

"एक झूला (सीसॉ) सोचो," शर्मा सर ने कहा। "जिस पर बच्चे पार्क में खेलते हैं।"

"जब एक तरफ़ ऊपर जाती है, दूसरी नीचे आती है। झूला हमेशा बैलेंस करता है। अगर एक तरफ़ वज़न डालो, तो दूसरी तरफ़ बराबर वज़न डालना पड़ेगा।"

"अकाउंटिंग भी ऐसे ही काम करती है। जब एक अकाउंट एक तरफ़ प्रभावित होता है, तो दूसरा अकाउंट दूसरी तरफ़ उतनी ही रक़म से प्रभावित होना चाहिए। बुक्स को हमेशा बैलेंस करना चाहिए।"

एक सीसॉ जिसके बाएँ तरफ़ "डेबिट" और दाएँ तरफ़ "क्रेडिट" है, बिल्कुल बैलेंस्ड, दोनों तरफ़ ₹100

"अगर तुम्हारी बुक्स बैलेंस नहीं करतीं — अगर दोनों साइड्स बराबर नहीं हैं — तो मतलब कहीं ग़लती हुई है। ये बिल्ट-इन चेक ही डबल-एंट्री को इतना ताक़तवर बनाती है। ये त्रुटियाँ को अपने-आप पकड़ लेती है।"


डेबिट और क्रेडिट — बायाँ और दायाँ

"अब, मीरा, मुझे तुम्हें दो शब्द सिखाने हैं जो शुरू में लगभग हर किसी को कन्फ़्इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मैं सिंपल बनाता हूँ।"

उन्होंने बड़े अक्षरों में दो शब्द लिखे:

DEBIT और CREDIT

"जो भी तुम सोचती हो कि इन शब्दों का मतलब है, भूल जाओ। भूल जाओ कि 'डेबिट मतलब माइनस' या 'क्रेडिट मतलब प्लस।' ये ग़लत है। ये मीनिंग्स बैंकिंग से आती हैं, अकाउंटिंग से नहीं।"

"अकाउंटिंग में:"

डेबिट = अकाउंट का बायाँ (LEFT) हिस्सा

क्रेडिट = अकाउंट का दायाँ (RIGHT) हिस्सा

"बस इतना। डेबिट मतलब बायाँ। क्रेडिट मतलब दायाँ। और कुछ नहीं।"

उन्होंने व्हाइटबोर्ड पर एक सिंपल T-शेप बनाया:

        कैश अकाउंट
  ________________________
  |  DEBIT    |  CREDIT   |
  |  (बायाँ)  |  (दायाँ)   |
  |___________|___________|
  |           |           |
  |           |           |

"अकाउंटिंग में हर अकाउंट ऐसा दिखता है। इसे T-अकाउंट कहते हैं T शेप की वजह से। बायीं साइड डेबिट है। दायीं साइड क्रेडिट है।"

"जब हम कोई ट्रांज़ैक्शन दर्ज करते हैं, तो एक अकाउंट की डेबिट साइड पर रक़म डालते हैं और दूसरे अकाउंट की क्रेडिट साइड पर वही रक़म डालते हैं। यही डबल-एंट्री है। दो एंट्रीज़। हमेशा बराबर।"


तीन गोल्डन नियम

"अब इंपॉर्टेंट पार्ट आता है। तुम्हें कैसे पता चलेगा कि रक़म किस साइड पर डालनी है? तीन सिंपल नियम हैं। अकाउंटेंट्स इन्हें अकाउंटिंग के गोल्डन नियम कहते हैं।"

"लेकिन पहले, मुझे तुम्हें तीन तरह के अकाउंट्स बताने होंगे।"

तीन तरह के अकाउंट्स

टाइपइसका मतलबउदाहरण
रियल अकाउंटऐसी चीज़ों का अकाउंट जिन्हें छू सकते हो या माप सकते हो — एसेट्स और सामानकैश, स्टॉक, फ़र्नीचर, ज़मीन, मशीनरी
पर्सनल अकाउंटकिसी व्यक्ति या संस्था का अकाउंटरावत आंटी, बिश्त ट्रेडर्स, स्टेट बैंक, रमेश (एक ग्राहक)
नॉमिनल अकाउंटख़र्चों, नुक़सान, आमदनी, और मुनाफ़े का अकाउंटरेंट ख़र्चा, इलेक्ट्रिसिटी ख़र्चा, सेल्स आमदनी, इंटरेस्ट रिसीव्ड

"अगर ये नया लगता है तो चिंता मत करो। जल्दी आदत हो जाएगी। अब, तीन गोल्डन नियम।"

गोल्डन नियम 1: रियल अकाउंट

जो आए उसे डेबिट करो। जो जाए उसे क्रेडिट करो।

"अगर बिज़नेस में कैश आता है, तो कैश अकाउंट को डेबिट करो। अगर कैश जाता है, तो कैश अकाउंट को क्रेडिट करो। अगर स्टॉक आता है, तो स्टॉक को डेबिट करो। अगर स्टॉक जाता है, तो स्टॉक को क्रेडिट करो।"

गोल्डन नियम 2: पर्सनल अकाउंट

पाने वाले को डेबिट करो। देने वाले को क्रेडिट करो।

"अगर तुम मकान मालिक को पैसा देते हो (मकान मालिक पा रहा है), तो मकान मालिक का अकाउंट डेबिट करो। अगर ग्राहक तुम्हें पैसा देता है (ग्राहक दे रहा है), तो ग्राहक का अकाउंट क्रेडिट करो।"

गोल्डन नियम 3: नॉमिनल अकाउंट

सभी ख़र्चे और नुक़सान डेबिट करो। सभी आमदनी और मुनाफ़े क्रेडिट करो।

"अगर तुम किराया देते हो, रेंट एक ख़र्चा है — रेंट को डेबिट करो। अगर सेल्स से पैसा कमाते हो, सेल्स आमदनी है — सेल्स को क्रेडिट करो।"

शर्मा सर ने एक समरी टेबल बनाई:

अकाउंट का टाइपडेबिट नियमक्रेडिट नियम
रियल अकाउंट (चीज़ें)जो आएजो जाए
पर्सनल अकाउंट (लोग)पाने वालादेने वाला
नॉमिनल अकाउंट (ख़र्चे/आमदनी)ख़र्चे और नुक़सानआमदनी और मुनाफ़े

एक कलरफ़ुल चार्ट जिसमें तीन गोल्डन नियम हैं सिंपल आइकन्स के साथ: रियल के लिए बॉक्स, पर्सनल के लिए पर्सन, नॉमिनल के लिए रुपी साइन

"मीरा, ये तीन नियम हर एक ट्रांज़ैक्शन दर्ज करने में तुम्हारी गाइड करेंगे जो तुम कभी दर्ज करोगी। सीखो। याद करो। ये अकाउंटिंग की ग्रामर हैं।"


मीरा की पहली अभ्यास — एक-एक ट्रांज़ैक्शन करके

"काफ़ी थ्योरी हो गई," शर्मा सर ने कहा। "चलो अभ्यास करते हैं। मैं वो ट्रांज़ैक्शन्स लेता हूँ जो तुमने रावत आंटी की दुकान पर रिकॉर्ड किए थे और हर एक पर डबल-एंट्री लागू करते हैं।"

नेगी भैया ने कुर्सी खींची। "मैं भी मदद करता हूँ। मुझे याद है इस चरण पर मैं भी कन्फ़्इस्तेमाल था।"

ट्रांज़ैक्शन 1: ग्राहक ने चावल, दाल, और साबुन ₹235 में ख़रीदा, कैश दिया

"दो चीज़ें बदलीं," शर्मा सर ने कहा। "कैश आया। और सामान (स्टॉक) गया।"

  • कैश रियल अकाउंट है। कैश आ रहा है। तो: डेबिट कैश ₹235
  • सेल्स नॉमिनल अकाउंट है। ये आमदनी है। तो: क्रेडिट सेल्स ₹235
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
कैश235
सेल्स235

"देखा? डेबिट = क्रेडिट। झूला बैलेंस कर रहा है।"


ट्रांज़ैक्शन 2: आपूर्तिकर्ता से ₹4,200 की डिलीवरी क्रेडिट पर मिली (शनिवार को पे करेंगे)

"सामान दुकान में आया। लेकिन कैश नहीं गया। इसके बजाय, अब रावत आंटी पर आपूर्तिकर्ता का उधार है।"

  • परचेज़ (या स्टॉक) रियल अकाउंट है। सामान आया। तो: डेबिट परचेज़ ₹4,200
  • आपूर्तिकर्ता का अकाउंट पर्सनल अकाउंट है। आपूर्तिकर्ता ने सामान दिया। तो: क्रेडिट आपूर्तिकर्ता ₹4,200
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
परचेज़4,200
आपूर्तिकर्ता अकाउंट4,200

"कैश मूव नहीं हुआ। लेकिन फिर भी दो अकाउंट्स प्रभावित हुए।"


ट्रांज़ैक्शन 3: बूढ़े आदमी ने पिछले महीने का ₹650 का उधार चुकाया

"कैश आया। और बूढ़े आदमी का रावत आंटी पर उधार कम हुआ।"

  • कैश रियल अकाउंट है। कैश आ रहा है। तो: डेबिट कैश ₹650
  • बूढ़े आदमी का अकाउंट (डेटर) पर्सनल अकाउंट है। वो पैसा दे रहा है। तो: क्रेडिट बूढ़ा आदमी ₹650
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
कैश650
बूढ़ा आदमी (डेटर)650

ट्रांज़ैक्शन 4: बिजली का बिल ₹1,100 भरा

"कैश गया। बिजली एक ख़र्चा है।"

  • इलेक्ट्रिसिटी ख़र्चा नॉमिनल अकाउंट है। ये ख़र्चा है। तो: डेबिट इलेक्ट्रिसिटी ख़र्चा ₹1,100
  • कैश रियल अकाउंट है। कैश जा रहा है। तो: क्रेडिट कैश ₹1,100
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
इलेक्ट्रिसिटी ख़र्चा1,100
कैश1,100

ट्रांज़ैक्शन 5: स्कूल के लड़के ने बिस्किट्स और कोल्ड ड्रिंक ₹50 में ख़रीदी, कैश दिया

  • कैश — रियल अकाउंट, आ रहा है: डेबिट कैश ₹50
  • सेल्स — नॉमिनल अकाउंट, आमदनी: क्रेडिट सेल्स ₹50
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
कैश50
सेल्स50

ट्रांज़ैक्शन 6: औरत ने ₹380 का सामान उधार पर लिया

"सामान गया। लेकिन कैश नहीं आया। इसके बजाय, अब उस औरत पर रावत आंटी का उधार है।"

  • औरत का अकाउंट (डेटर) पर्सनल अकाउंट है। उसने सामान लिया (रिसीव किया)। तो: डेबिट औरत ₹380
  • सेल्स नॉमिनल अकाउंट है। आमदनी। तो: क्रेडिट सेल्स ₹380
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
औरत (डेटर)380
सेल्स380

"ध्यान दो: भले ही कैश मूव नहीं हुआ, हमने फिर भी सेल रिकॉर्ड की। सेल हो गई। पैसा बाद में आएगा।"


ट्रांज़ैक्शन 7: ग्राहक ने ₹200 का आटा ख़रीदा, UPI से पे किया

"कैश सेल जैसा ही। UPI तुरंत पेमेंट है।"

  • बैंक/UPI अकाउंट — रियल अकाउंट, पैसा आ रहा है: डेबिट बैंक ₹200
  • सेल्स — नॉमिनल अकाउंट, आमदनी: क्रेडिट सेल्स ₹200
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
बैंक (UPI)200
सेल्स200

ट्रांज़ैक्शन 8: मददर लड़के को ₹200 दिहाड़ी दी

  • वेजेज़ ख़र्चा — नॉमिनल अकाउंट, ख़र्चा: डेबिट वेजेज़ ₹200
  • कैश — रियल अकाउंट, जा रहा है: क्रेडिट कैश ₹200
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
वेजेज़ ख़र्चा200
कैश200

ट्रांज़ैक्शन 9: बड़ा ऑर्डर ₹1,850 — ₹1,000 कैश, ₹850 उधार

"इसमें तीन एंट्रीज़ हैं! कैश आ रहा है, एक डेटर बन रहा है, और सेल हो रही है।"

  • कैश — रियल अकाउंट, आ रहा है: डेबिट कैश ₹1,000
  • ग्राहक (डेटर) — पर्सनल अकाउंट, क्रेडिट पर सामान ले रहा है: डेबिट ग्राहक ₹850
  • सेल्स — नॉमिनल अकाउंट, आमदनी: क्रेडिट सेल्स ₹1,850
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
कैश1,000
ग्राहक (डेटर)850
सेल्स1,850

कुल डेबिट: 1,000 + 850 = ₹1,850। कुल क्रेडिट: ₹1,850। बैलेंस्ड!

"देखा, मीरा? कभी-कभी एक ट्रांज़ैक्शन तीन अकाउंट्स असर डाल सकता है। लेकिन नियम वही है: कुल डेबिट हमेशा कुल क्रेडिट के बराबर होना चाहिए।"


ट्रांज़ैक्शन 10: किराया ₹5,000 कैश में दिया

  • रेंट ख़र्चा — नॉमिनल अकाउंट, ख़र्चा: डेबिट रेंट ₹5,000
  • कैश — रियल अकाउंट, जा रहा है: क्रेडिट कैश ₹5,000
अकाउंटडेबिट (₹)क्रेडिट (₹)
रेंट ख़र्चा5,000
कैश5,000

पूरी तस्वीर — सभी 10 ट्रांज़ैक्शन्स

मीरा ने अब सभी दस ट्रांज़ैक्शन्स डबल-एंट्री से दर्ज कर लिए थे। शर्मा सर ने उससे कहा कि एक बड़ी समरी टेबल बनाओ।

#ट्रांज़ैक्शनडेबिट अकाउंटडेबिट ₹क्रेडिट अकाउंटक्रेडिट ₹
1कैश सेल: चावल, दाल, साबुनकैश235सेल्स235
2आपूर्तिकर्ता से क्रेडिट परचेज़परचेज़4,200आपूर्तिकर्ता4,200
3डेटर ने उधार चुकायाकैश650बूढ़ा आदमी (डेटर)650
4बिजली बिल भराइलेक्ट्रिसिटी ख़र्चा1,100कैश1,100
5कैश सेल: बिस्किट्स, कोल्ड ड्रिंककैश50सेल्स50
6क्रेडिट सेल: उधार पर सामानऔरत (डेटर)380सेल्स380
7UPI सेल: आटाबैंक (UPI)200सेल्स200
8मददर को दिहाड़ी दीवेजेज़ ख़र्चा200कैश200
9कुछ कैश, कुछ क्रेडिट सेलकैश + ग्राहक1,850सेल्स1,850
10किराया दियारेंट ख़र्चा5,000कैश5,000

मीरा ने सारे डेबिट्स जोड़े: 235 + 4,200 + 650 + 1,100 + 50 + 380 + 200 + 200 + 1,850 + 5,000 = ₹13,865

उसने सारे क्रेडिट्स जोड़े: 235 + 4,200 + 650 + 1,100 + 50 + 380 + 200 + 200 + 1,850 + 5,000 = ₹13,865

"मिल गए!" उसने आँखें चमकाते हुए कहा।

"ये हमेशा मिलते हैं," शर्मा सर ने कहा। "अगर नहीं मिले, तो कहीं ग़लती हुई है। यही डबल-एंट्री का जादू है। इसमें बिल्ट-इन त्रुटि डिटेक्टर है।"

मीरा की नोटबुक जिसमें पूरी समरी टेबल दिख रही है कुल डेबिट्स = कुल क्रेडिट्स, लाल पेन से सर्कल किया हुआ और एक हैप्पी फ़ेस


ये इतना ज़रूरी क्यों है?

मीरा पीछे झुकी। "ठीक है, शर्मा सर। मैं सिस्टम समझ गई। लेकिन इतनी मेहनत क्यों? कल की तरह बस 'कैश आया' और 'कैश गया' क्यों नहीं लिखें?"

शर्मा सर ने सिर हिलाया। उन्हें इस सवाल की उम्मीद थी।

"तीन वजहें।"

वजह 1: पूरी तस्वीर

"कल, जब तुमने लिखा 'कैश इन ₹235 सेल के लिए,' तुमने सिर्फ़ एक साइड दर्ज की। तुमने नहीं लिखा कि स्टॉक कम हुआ। डबल-एंट्री से तुम सब कुछ दर्ज करती हो। कुछ भी छिपा नहीं रहता।"

वजह 2: अपने-आप त्रुटि चेकिंग

"अगर तुम्हारे डेबिट्स, क्रेडिट्स के बराबर नहीं हैं, तो तुम्हें पता है कि ग़लती है। डबल-एंट्री के बिना, तुम त्रुटियाँ कर सकती हो और कभी पता ही न चले।"

वजह 3: फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स बना सकते हो

"महीने या साल के अंत में, ये सारी डेबिट और क्रेडिट एंट्रीज़ मिलकर ताक़तवर रिपोर्ट्स बनाती हैं — मुनाफ़ा एंड घाटा स्टेटमेंट, बैलेंस शीट। ये रिपोर्ट्स बिज़नेस की पूरी हेल्थ बताती हैं। एक सिंपल 'कैश आया, कैश गया' लिस्ट से ये नहीं बना सकते।"

"ऐसे सोचो," उन्होंने कहा। "कल की तुम्हारी सिंगल-एंट्री लिस्ट ऐसी थी जैसे एक बिल्डिंग को सामने से देखना। तुम फ़सॉड देखती हो। डबल-एंट्री ऐसा है जैसे पूरा ब्लूप्रिंट हो — सामने, पीछे, अंदर, प्लम्बिंग, वायरिंग, सब कुछ।"


शुरुआत में होने वाली आम ग़लतियाँ

नेगी भैया बोले। "मीरा, मैं बताता हूँ कि जब मैं ये सीख रहा था तो कौन सी ग़लतियाँ करता था।"

ग़लती 1: ये सोचना कि डेबिट = ख़राब और क्रेडिट = अच्छा

"नहीं! डेबिट बस बायाँ मीन्स करता है। क्रेडिट बस दायाँ। कैश को डेबिट करने का मतलब कैश बढ़ा — ये अच्छा है। रेंट ख़र्चा को डेबिट करने का मतलब किराये पर ख़र्चा हुआ — ये ख़र्चा है। डेबिट न अच्छा है, न बुरा।"

ग़लती 2: अकाउंट का टाइप पहचानना भूल जाना

"गोल्डन नियम लागू करने से पहले, तुम्हें पहचानना होगा: ये रियल, पर्सनल, या नॉमिनल अकाउंट है? अगर ये चरण छोड़ दिया, तो रक़म ग़लत साइड पर डाल दोगी।"

ग़लती 3: सिर्फ़ एक साइड दर्ज करना

"कभी-कभी नए सीखने वाले एक साइड पर इतना ध्यान करते हैं कि दूसरी भूल जाते हैं। हमेशा पूछो: 'दूसरी साइड क्या है?' हर ट्रांज़ैक्शन के दो पहलू हैं। हमेशा।"

ग़लती 4: बिज़नेस और मालिक को एक समझना

"अगर रावत आंटी दुकान की कैश बॉक्स से ₹500 अपने पर्सनल काम के लिए निकालती हैं, तो ये ट्रांज़ैक्शन है। बिज़नेस रावत आंटी को पैसा दे रहा है। कई नए सीखने वाले इसे दर्ज करना भूल जाते हैं क्योंकि 'उनका अपना पैसा है।' नहीं! अकाउंटिंग में, बिज़नेस और मालिक अलग-अलग एंटिटीज़ हैं।"

चार बॉक्सेज़ जिनमें आम ग़लतियाँ दिख रही हैं लाल X के साथ, हर एक के साथ छोटा डिस्क्रिप्शन


इसे सोचने का एक आसान तरीक़ा

शर्मा सर देख सकते थे कि मीरा सब कुछ प्रक्रिया कर रही है। उन्होंने एक और टूल दिया।

"मीरा, जब भी कोई ट्रांज़ैक्शन सामने आए, अपने आप से ये तीन सवाल पूछो, इसी ऑर्डर में:"

चरण 1: कौन से दो (या ज़्यादा) अकाउंट्स इन्वॉल्व्ड हैं?

चरण 2: हर अकाउंट किस टाइप का है — रियल, पर्सनल, या नॉमिनल?

चरण 3: उस टाइप का गोल्डन नियम लागू करो।

"हर बार ऐसा करो, कभी ग़लती नहीं होगी। कुछ सौ ट्रांज़ैक्शन्स के बाद, ये अपने-आप हो जाएगा। साइकल चलाने जैसा — सोचना नहीं पड़ेगा।"

यहाँ एक क्विक रेफ़रेंस है जो तुम हाथ के पास रख सकती हो:

अगर अकाउंट है...और सिचुएशन ये है...तो...
रियल अकाउंटकुछ बिज़नेस में आ रहा हैडेबिट
रियल अकाउंटकुछ बिज़नेस से जा रहा हैक्रेडिट
पर्सनल अकाउंटव्यक्ति/संस्था कुछ पा रहा हैडेबिट
पर्सनल अकाउंटव्यक्ति/संस्था कुछ दे रहा हैक्रेडिट
नॉमिनल अकाउंटये ख़र्चा या नुक़सान हैडेबिट
नॉमिनल अकाउंटये आमदनी या मुनाफ़ा हैक्रेडिट

क्विक रीकैप — चैप्टर 3

बड़ा आइडिया: हर ट्रांज़ैक्शन कम से कम दो अकाउंट्स असर डालता है। इसे डबल-एंट्री सिस्टम कहते हैं।

डेबिट और क्रेडिट प्लस और माइनस नहीं हैं। ये अकाउंट की बायीं और दायीं साइड हैं।

तीन तरह के अकाउंट्स:

  • रियल अकाउंट (चीज़ें: कैश, स्टॉक, फ़र्नीचर)
  • पर्सनल अकाउंट (लोग/संस्थाएँ)
  • नॉमिनल अकाउंट (ख़र्चे, नुक़सान, आमदनी, मुनाफ़े)

तीन गोल्डन नियम:

  1. रियल अकाउंट: जो आए डेबिट करो, जो जाए क्रेडिट करो
  2. पर्सनल अकाउंट: पाने वाले को डेबिट करो, देने वाले को क्रेडिट करो
  3. नॉमिनल अकाउंट: ख़र्चे/नुक़सान डेबिट करो, आमदनी/मुनाफ़े क्रेडिट करो

टेस्ट: कुल डेबिट्स हमेशा कुल क्रेडिट्स के बराबर होने चाहिए। अगर नहीं, तो ग़लती है।


अभ्यास अभ्यास — ख़ुद करके देखो

अभ्यास 1: नीचे दिए गए हर ट्रांज़ैक्शन के लिए बताओ: (a) कौन से अकाउंट्स इन्वॉल्व्ड हैं, (b) हर अकाउंट का टाइप (रियल, पर्सनल, या नॉमिनल), और (c) कौन सा अकाउंट डेबिट और कौन सा क्रेडिट होगा।

#ट्रांज़ैक्शन
1मीरा के पापा उसे महीने के ₹2,000 देते हैं (मीरा के नज़रिए से)
2एक किराना दुकान 20 kg चीनी ₹800 में ख़रीदती है, कैश देकर
3ग्राहक ₹450 का सामान ख़रीदता है और UPI से पे करता है
4दुकान मकान मालिक को ₹3,000 किराया देती है
5आपूर्तिकर्ता ₹6,000 का सामान क्रेडिट पर डिलीवर करता है
6एक ग्राहक जिसका ₹1,200 बाक़ी था, आकर पूरा पे करता है
7दुकान का मालिक अपनी पर्सनल बचत से ₹50,000 बिज़नेस में डालता है
8दुकान टूटी शेल्फ़ ठीक कराने पर ₹250 ख़र्च करती है

अभ्यास 2: यहाँ कुछ ट्रांज़ैक्शन्स पहले से रिकॉर्ड किए हैं। चेक करो कि सही हैं या नहीं। अगर नहीं, तो ठीक करो।

ट्रांज़ैक्शनडेबिटक्रेडिटसही है?
₹300 का सामान कैश में बेचाकैश ₹300सेल्स ₹300?
₹5,000 तनख़्वाह दीकैश ₹5,000तनख़्वाह ख़र्चा ₹5,000?
₹10,000 का फ़र्नीचर कैश में ख़रीदाफ़र्नीचर ₹10,000कैश ₹10,000?
डेटर से ₹2,000 मिलेडेटर ₹2,000कैश ₹2,000?

अभ्यास 3: चैप्टर 2 के अभ्यास 1 में तुमने जो ट्रांज़ैक्शन्स दुकान विज़िट में रिकॉर्ड किए थे, उन पर वापस जाओ। अब हर एक पर डबल-एंट्री लागू करो। मीरा जैसी टेबल बनाओ — डेबिट अकाउंट, डेबिट अमाउंट, क्रेडिट अकाउंट, क्रेडिट अमाउंट। क्या कुल्स मिलते हैं?


मज़ेदार तथ्य — वो इंसान जिसने सब बदल दिया

लूका पैसिओली एक फ़्रैंसिस्कन फ़्रायर (एक तरह के मॉन्क) और मैथमेटिशियन थे जो 1400 के दशक में इटली में रहते थे। 1494 में उन्होंने एक किताब लिखी Summa de Arithmetica, जिसमें डबल-एंट्री बुककीपिंग पर एक सेक्शन था।

उन्होंने ये सिस्टम इन्वेंट नहीं किया — वेनिस के व्यापारी कम से कम सौ सालों से इसे इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन उन्होंने पहली बार इसे एक किताब में साफ़ तौर पर लिखा। इसीलिए उन्हें "अकाउंटिंग के पिता" कहा जाता है।

और ये है हैरान करने वाली बात: 530 साल पहले जो सिस्टम उन्होंने डिस्क्राइब किया, वो असल में वही सिस्टम है जो आज दुनिया की हर कंपनी इस्तेमाल करती है — रावत आंटी की किराना दुकान से लेकर टाटा, रिलायंस, और ऐप्पल तक। स्केल बदलता है, टेक्नोलॉजी बदलती है, लेकिन कोर आइडिया वही रहता है: हर डेबिट का एक क्रेडिट है, और बुक्स बैलेंस होनी चाहिए।

मीरा एक ऐसा हुनर सीख रही थी जो प्रिंटिंग प्रेस से भी पुराना है। और वो अभी सिर्फ़ डे 3 पर थी।

अगले चैप्टर में मीरा अकाउंटिंग की वोकैब्युलरी सीखती है — एसेट्स, लायबिलिटीज़, कैपिटल, राजस्व, ख़र्चे। ये वो बिल्डिंग ब्लॉक्स हैं जिनमें हर अकाउंट फ़िट होता है।


अकाउंटिंग की भाषा — ये शब्द ज़रूर जानो

डे 4 पर मीरा दफ़्तर पहुँची तो शर्मा सर अपनी डेस्क पर प्रिंटेड कार्ड्स सजा रहे थे। हर कार्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में एक शब्द लिखा था: ASSETS, LIABILITIES, CAPITAL, REVENUE, EXPENSES। "आज," उन्होंने कहा, "हम वोकैब्युलरी सीखते हैं। हर प्रोफ़ेशन की अपनी भाषा होती है। डॉक्टर्स 'फ़्रैक्चर' कहते हैं, 'टूटी हड्डी' नहीं। लॉयर्स 'प्लेंटिफ़' कहते हैं, 'शिकायत करने वाला' नहीं। और अकाउंटेंट्स के भी अपने शब्द हैं। आज के बाद, तुम अकाउंटेंट की तरह बोलोगी।"

शर्मा सर की डेस्क पर पाँच प्रिंटेड कार्ड्स एक कतार में सजे हैं: ASSETS, LIABILITIES, CAPITAL, REVENUE, EXPENSES


ये शब्द क्यों सीखने हैं?

मीरा ने कार्ड्स देखे और थोड़ी चिंता हुई। "शर्मा सर, ये पेचीदा लग रहे हैं।"

"लग रहे हैं पेचीदा," उन्होंने माना। "लेकिन हैं नहीं। हर शब्द कुछ ऐसा डिस्क्राइब करता है जो तुम पहले से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जानती हो। मैं बस उसका पेशेवर नाम दे रहा हूँ।"

"ऐसे सोचो। तुम जानती हो धनिया क्या होता है, है ना?"

"कोरिएंडर," मीरा ने कहा।

"सही। इंग्लिश में कोरिएंडर। लैटिन में Coriandrum sativum। एक ही चीज़ के तीन नाम। अकाउंटिंग के शब्द भी ऐसे ही हैं — वो चीज़ों के पेशेवर नाम हैं जो तुम पहले से समझती हो।"

"चलो शुरू करते हैं। और हम हर उदाहरण के लिए रावत आंटी की दुकान इस्तेमाल करेंगे, ताकि सब कुछ रियल लगे।"


एसेट्स — तुम्हारे पास क्या है

शर्मा सर ने पहला कार्ड उठाया: ASSETS

"एसेट वो है जो बिज़नेस के पास है या जिस पर बिज़नेस का कंट्रोल है, और जिसकी वैल्यू है।"

एसेट = कोई भी चीज़ जो बिज़नेस की अपनी है और जिसकी वैल्यू है। ये बिज़नेस को अभी या फ़्यूचर में पैसा कमाने में मदद करती है।

"चलो रावत आंटी की दुकान में चलते हैं और एसेट्स की तरफ़ इशारा करते हैं।"

उन्होंने दुकान के अंदर की एक फ़ोटो निकाली (नेगी भैया ने विज़िट के दौरान फ़ोन से क्लिक की थी)।

रावत आंटी के एसेट्स क्या हैं?

एसेटये क्या है?ये वैल्यूएबल क्यों है?
रजिस्टर में कैशकैश बॉक्स में रखा पैसाइससे और स्टॉक ख़रीद सकती हैं, बिल भर सकती हैं
बैंक अकाउंट में पैसादुकान से जुड़े सेविंग्स अकाउंट में पैसावही — उपलब्ध पैसा
स्टॉक (इन्वेंटरी)अलमारियों पर रखा सारा सामान — चावल, दाल, साबुन, तेल, बिस्किट्सये बेचकर पैसा कमाएँगी
दुकान का फ़र्नीचरअलमारियाँ, काउंटर, डिस्प्ले रैक, तराज़ूदुकान चलाने के लिए ज़रूरी हैं
रेफ़्रिजरेटरफ़्रिज जिसमें कोल्ड ड्रिंक्स और मक्खन रखती हैंइसके बिना ठंडे आइटम्स नहीं बेच सकतीं
ग्राहकों पर बाक़ी रक़मऔरत के ₹380 उधार, बड़े ऑर्डर वाले ग्राहक के ₹850 बाक़ीये पैसा बाद में आएगा
दुकान की बिल्डिंग (अगर उनकी अपनी है)दुकान की फ़िज़िकल बिल्डिंगइसके बिना बिज़नेस करने की जगह नहीं

"ये सब के सब एसेट्स हैं," शर्मा सर ने कहा। "सबकी वैल्यू है। सब बिज़नेस में मदद करते हैं।"

मीरा ने हाथ उठाया। "उधार की रक़म एसेट कैसे? वो तो कैश नहीं है।"

"बहुत अच्छा सवाल! जब ग्राहक तुम्हारा पैसा देना है, तो वो पैसा अभी भी तुम्हारा है — ग्राहक ने अभी दिया नहीं। इसे रिसीवेबल कहते हैं। ये एसेट है क्योंकि तुम उम्मीद रखती हो कि मिलेगा। हाँ, जोखिम है कि ग्राहक शायद पे न करे, लेकिन जब तक ऐसा सोचने की वजह न हो, हम इसे एसेट मानते हैं।"

एसेट्स के टाइप्स

शर्मा सर ने एक क्विक टेबल बनाई:

श्रेणीउदाहरणकितने वक़्त रखते हो
करंट एसेट्सकैश, बैंक बैलेंस, स्टॉक, ग्राहकों पर बाक़ी रक़मशॉर्ट-टर्म — एक साल में इस्तेमाल हो जाते हैं या कैश में बदल जाते हैं
फ़िक्स्ड एसेट्सदुकान की बिल्डिंग, फ़र्नीचर, रेफ़्रिजरेटर, कंप्यूटरलॉन्ग-टर्म — कई साल इस्तेमाल होते हैं

"करंट एसेट्स बदलते रहते हैं — स्टॉक बिकता है, कैश आता-जाता है। फ़िक्स्ड एसेट्स लंबे वक़्त तक रहते हैं।"

रावत आंटी की दुकान के अंदर ऐरोज़ अलग-अलग चीज़ों की तरफ़ इशारा कर रहे हैं, हर एक पर लेबल: "एसेट: कैश रजिस्टर," "एसेट: अलमारियों पर स्टॉक," "एसेट: रेफ़्रिजरेटर," "एसेट: तराज़ू"


लायबिलिटीज़ — तुम पर क्या बाक़ी है

शर्मा सर ने दूसरा कार्ड उठाया: LIABILITIES

"लायबिलिटी एसेट का उलटा है। ये वो है जो तुम किसी और को देना है।"

लायबिलिटी = वो रक़म जो बिज़नेस को दूसरों को देनी है। एक क़र्ज़ या ज़िम्मेदारी।

"वापस चलते हैं रावत आंटी की दुकान पर। उन पर क्या बाक़ी है?"

लायबिलिटीये क्या है?किसे देना है?
आपूर्तिकर्ता का बिल: ₹4,200क्रेडिट पर मिली डिलीवरीआपूर्तिकर्ता जिसने बिस्किट्स, हल्दी, साबुन डिलीवर किए
बैंक लोन (अगर लिया है)दुकान शुरू करने या बढ़ाने के लिए लोनबैंक
बिना भरा बिजली बिलअगर बिल ड्यू है लेकिन अभी भरा नहींइलेक्ट्रिसिटी कंपनी
ग्राहक से एडवांस मिलाअगर किसी ग्राहक ने बड़े ऑर्डर के लिए एडवांस दिया जो अभी डिलीवर नहीं हुआग्राहक (उसे सामान देना है)

"लायबिलिटीज़ वादों जैसी हैं," शर्मा सर ने कहा। "तुमने आपूर्तिकर्ता को शनिवार को पे करने का वादा किया। वो वादा लायबिलिटी है। तुमने बैंक लोन तीन साल में चुकाने का वादा किया। वो वादा लायबिलिटी है।"

लायबिलिटीज़ के टाइप्स

श्रेणीउदाहरणकब पे करनी है?
करंट लायबिलिटीज़आपूर्तिकर्ता बिल्स, शॉर्ट-टर्म लोन्स, बिना दी तनख़्वाह, बिना दिया किरायाएक साल के अंदर
नॉन-करंट (लॉन्ग-टर्म) लायबिलिटीज़3-5 साल के बैंक लोन्स, लॉन्ग-टर्म उधारीएक साल से ज़्यादा बाद

मीरा ने सिर हिलाया। "तो एसेट्स वो हैं जो तुम्हारे पास हैं, और लायबिलिटीज़ वो हैं जो तुम पर बाक़ी हैं।"

"बिल्कुल। अब इंटरेस्टिंग बात आती है।"


कैपिटल — मालिक का अपना पैसा

शर्मा सर ने तीसरा कार्ड उठाया: CAPITAL

"जब रावत आंटी ने कई साल पहले दुकान शुरू की, उन्होंने अपनी बचत से पैसा लगाया। शायद ₹2,00,000 अपने पर्सनल पैसे से। वो पैसा — मालिक का अपना पैसा जो उसने बिज़नेस में निवेश किया — कैपिटल कहलाता है।"

कैपिटल = मालिक का अपना पैसा जो उसने बिज़नेस में लगाया है। इसे ओनर्स इक्विटी भी कहते हैं।

"ऐसे सोचो। बिज़नेस के पास एसेट्स हैं। कुछ एसेट्स उधार के पैसे (लायबिलिटीज़) से ख़रीदे गए। बाक़ी मालिक के अपने पैसे (कैपिटल) से ख़रीदे गए।"

इससे अकाउंटिंग का सबसे इंपॉर्टेंट इक्वेशन बनता है:

एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल

"बिज़नेस के पास जो कुछ भी है (एसेट्स) वो या तो उधार (लायबिलिटीज़) या मालिक के अपने निवेश (कैपिटल) से फ़ंडेड है। हमेशा। बिना एक्सेप्शन।"

चलो रावत आंटी की दुकान से टेस्ट करते हैं:

रक़म (₹)
कुल एसेट्स
रजिस्टर में कैश15,000
बैंक में पैसा25,000
अलमारियों पर स्टॉक1,20,000
फ़र्नीचर और फ़्रिज40,000
ग्राहकों पर बाक़ी12,000
कुल एसेट्स2,12,000
लायबिलिटीज़
आपूर्तिकर्ता को देना है32,000
बैंक लोन50,000
कुल लायबिलिटीज़82,000
कैपिटल (ओनर्स इक्विटी)
रावत आंटी का निवेश1,30,000
चेक: लायबिलिटीज़ + कैपिटल82,000 + 1,30,000 = 2,12,000

"देखा? एसेट्स (₹2,12,000) = लायबिलिटीज़ (₹82,000) + कैपिटल (₹1,30,000)। बैलेंस हो गया। ये हमेशा बैलेंस होता है। इसे अकाउंटिंग इक्वेशन कहते हैं।"

अकाउंटिंग इक्वेशन एक बैलेंस्ड तराज़ू की तरह: बाईं तरफ़ = एसेट्स (₹2,12,000), दाईं तरफ़ = लायबिलिटीज़ (₹82,000) + कैपिटल (₹1,30,000)

मीरा ने नंबरों को घूरा। "तो अगर मुझे कोई दो पता हों, तो तीसरा गणना कर सकती हूँ?"

"हाँ! अगर एसेट्स और लायबिलिटीज़ पता हैं, तो कैपिटल गणना कर सकती हो। अगर एसेट्स और कैपिटल पता हैं, तो लायबिलिटीज़ गणना कर सकती हो। ये इक्वेशन अकाउंटिंग की रीढ़ है।"

ड्रॉइंग्स के बारे में क्या?

"कैपिटल के बारे में एक और बात," नेगी भैया ने जोड़ा। "कभी-कभी मालिक बिज़नेस से अपने पर्सनल काम के लिए पैसा निकालता है। रावत आंटी शायद दुकान की कैश बॉक्स से ₹2,000 निकालें बेटे की स्कूल फ़ीस भरने के लिए। इसे ड्रॉइंग्स कहते हैं।"

ड्रॉइंग्स = मालिक द्वारा बिज़नेस से अपने पर्सनल इस्तेमाल के लिए निकाला गया पैसा या सामान।

"ड्रॉइंग्स कैपिटल कम करता है। अगर मालिक पैसा डालता है (कैपिटल बढ़ता है) और पैसा निकालता है (ड्रॉइंग्स कैपिटल कम करता है), तो किसी भी वक़्त नेट कैपिटल है:"

नेट कैपिटल = लगाया हुआ कैपिटल + मुनाफ़ा - ड्रॉइंग्स


राजस्व — कमाया हुआ पैसा

शर्मा सर ने चौथा कार्ड उठाया: REVENUE

"राजस्व वो पैसा है जो बिज़नेस अपने मेन काम से कमाता है।"

राजस्व (इसे आमदनी या सेल्स भी कहते हैं) = सामान बेचने या सेवा देने से बिज़नेस ने जो पैसा कमाया।

"रावत आंटी के लिए, राजस्व वो पैसा है जो वो दुकान में सामान बेचकर कमाती हैं। अगर एक दिन में ₹5,000 का सामान बिका, तो उस दिन का राजस्व ₹5,000 है।"

"ध्यान दो: राजस्व मुनाफ़ा के बराबर नहीं है। राजस्व सेल्स से कमाई गई कुल रक़म है। इसमें से अभी सारे ख़र्चे घटाने हैं। ख़र्चे घटाने के बाद जो बचता है वो मुनाफ़ा है।"

राजस्व के टाइप्स

टाइपविवरणरावत आंटी की दुकान का उदाहरण
सेल्स राजस्वसामान बेचने से पैसाग्राहकों को चावल, दाल, साबुन बेचना
सेवा राजस्वसेवा देने से पैसाअगर होम डिलीवरी के लिए ₹5 चार्ज करती हैं (ज़्यादातर किराना दुकानें नहीं करतीं, लेकिन कुछ करती हैं)
अदर आमदनीमुख्य काम के अलावा और कामों से पैसाबैंक सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज, या एक छोटी स्टोरेज स्पेस सब-लेट करने से किराया

"ज़्यादातर छोटी दुकानों में, लगभग सारा राजस्व सेल्स से आता है।"


ख़र्चे — बिज़नेस चलाने पर ख़र्चा

शर्मा सर ने पाँचवाँ और आख़िरी कार्ड उठाया: EXPENSES

"ख़र्चे बिज़नेस चलाने की लागत है।"

ख़र्चा = बिज़नेस चलाने और राजस्व कमाने पर ख़र्च किया गया पैसा। बिज़नेस करने की लागत।

"रावत आंटी सामान बेचकर राजस्व कमाती हैं। लेकिन वो राजस्व कमाने के लिए पैसा भी ख़र्च करना पड़ता है।"

ख़र्चाविवरणएक छोटी दुकान के लिए टिपिकल रक़म
लागत ऑफ़ गुड्स सोल्डजो सामान बेचती हैं उसकी ख़रीद की क़ीमत। अगर ₹80/kg में चावल बेचती हैं जो ₹60/kg में ख़रीदा, तो लागत ₹60ये आमतौर पर सबसे बड़ा ख़र्चा होता है
किरायादुकान की जगह का मंथली किराया₹3,000 - ₹10,000
बिजलीलाइट्स, पंखा, फ़्रिज की बिजली₹800 - ₹2,000
मज़दूरीमददर्स को पेमेंट₹4,000 - ₹8,000
ट्रांसपोर्टहोलसेलर से दुकान तक सामान लाने का ख़र्चा₹500 - ₹2,000
फ़ोन/इंटरनेटमोबाइल बिल, UPI चार्जेज़₹200 - ₹500
मरम्मतटूटी-फूटी चीज़ें ठीक करानाअलग-अलग
पैकेजिंगथैले, रैपिंग मटीरियल₹200 - ₹500

मुनाफ़ा का फ़ॉर्मूला

"अब, मीरा, तुम जानती हो राजस्व क्या है और ख़र्चे क्या हैं। मुनाफ़ा का फ़ॉर्मूला ख़ूबसूरती से सिंपल है।"

मुनाफ़ा = राजस्व - ख़र्चे

"अगर रावत आंटी एक महीने में ₹1,50,000 राजस्व कमाती हैं और उनके कुल ख़र्चे ₹1,20,000 हैं, तो मुनाफ़ा ₹30,000 है।"

"अगर ख़र्चे राजस्व से ज़्यादा हैं — मान लो राजस्व ₹1,00,000 है लेकिन ख़र्चे ₹1,10,000 — तो ₹10,000 का नुक़सान (घाटा) है।"

सिचुएशनराजस्व (₹)ख़र्चे (₹)नतीजा
अच्छा महीना1,50,0001,20,000₹30,000 का फ़ायदा
ख़राब महीना1,00,0001,10,000₹10,000 का नुक़सान
ब्रेक-ईवन1,20,0001,20,000न फ़ायदा, न नुक़सान

"इसीलिए अकाउंटिंग ज़रूरी है। इसके बिना रावत आंटी को पता ही नहीं चलेगा कि महीना अच्छा गया, ख़राब गया, या बस टूटा-बराबर रहा।"


और भी ज़रूरी शब्द

"बिग फ़ाइव तो कवर हो गए," शर्मा सर ने कहा। "अब कुछ और शब्द सिखाता हूँ जो रोज़ सामने आते हैं।"

डेटर — वो जिस पर तुम्हारा पैसा बाक़ी है

डेटर = वो व्यक्ति या बिज़नेस जिस पर तुम्हारे बिज़नेस का पैसा बाक़ी है। आमतौर पर वो ग्राहक जिसने क्रेडिट पर सामान ख़रीदा।

"याद है वो औरत जिसने ₹380 का सामान उधार लिया था? वो रावत आंटी की डेटर है। उस पर रावत आंटी का पैसा बाक़ी है।"

"रावत आंटी की बुक्स में, सभी ग्राहकों पर बाक़ी कुल रक़म को सन्ड्री डेटर्स या अकाउंट्स रिसीवेबल कहते हैं।"

"डेटर एक एसेट है — क्योंकि ये वो पैसा है जो आने वाला है।"

क्रेडिटर — वो जिसे तुम्हें पैसा देना है

क्रेडिटर = वो व्यक्ति या बिज़नेस जिसे तुम्हारे बिज़नेस को पैसा देना है। आमतौर पर वो आपूर्तिकर्ता जिसने क्रेडिट पर सामान दिया।

"आपूर्तिकर्ता जिसने ₹4,200 का सामान डिलीवर किया और शनिवार को पेमेंट का इंतज़ार कर रहा है — वो रावत आंटी का क्रेडिटर है।"

"रावत आंटी की बुक्स में, सभी आपूर्तिकर्ता को देने वाली कुल रक़म को सन्ड्री क्रेडिटर्स या अकाउंट्स पेएबल कहते हैं।"

"क्रेडिटर एक लायबिलिटी है — क्योंकि ये वो पैसा है जो तुम्हें देना है।"

शब्दकौन?दुकान के नज़रिए सेएसेट या लायबिलिटी?
डेटरग्राहक जिस पर तुम्हारा बाक़ी हैउसे तुम्हें पैसा देना हैएसेट (पैसा मिलेगा)
क्रेडिटरआपूर्तिकर्ता जिसे तुम्हें देना हैतुम्हें उसे पैसा देना हैलायबिलिटी (तुम्हें पे करना है)

"याद रखने का आसान तरीक़ा: डेटर — वो तुम्हारे डेट (क़र्ज़) में है। क्रेडिटर — उसने तुम्हें क्रेडिट दी।"

दो कार्टून फ़िगर्स: बाएँ — ग्राहक सामान लेकर जा रहा है, लेबल "डेटर (तुम्हारा बाक़ी है)"; दाएँ — आपूर्तिकर्ता बाँहें बाँधे खड़ा है इंतज़ार कर रहा है, लेबल "क्रेडिटर (तुम्हें देना है)"


स्टॉक / इन्वेंटरी — बेचने के लिए रखा सामान

स्टॉक (या इन्वेंटरी) = वो सामान जो बिज़नेस के पास बेचने के लिए उपलब्ध है।

"रावत आंटी की अलमारियों पर अभी जो कुछ भी है — चावल का हर बोरा, तेल की हर बोतल, बिस्किट्स का हर पैकेट — वो उनका स्टॉक है। जब कुछ बेचती हैं, स्टॉक कम होता है। जब आपूर्तिकर्ता से नया सामान ख़रीदती हैं, स्टॉक बढ़ता है।"

"स्टॉक एक एसेट है। ये अलमारियों पर रखा रहता है, सेल्स के ज़रिए कैश में बदलने का इंतज़ार करता है।"

जब स्टॉक...क्या होता है?
आपूर्तिकर्ता से सामान ख़रीदास्टॉक बढ़ता है
ग्राहक को सामान बेचास्टॉक घटता है
सामान ख़राब या एक्सपायर हो गयास्टॉक घटता है (और ये नुक़सान है)
स्टॉक काउंट में सामान कम निकलास्टॉक घटता है (शायद चोरी या ग़लती)

"हर महीने या साल के अंत में, दुकान का मालिक फ़िज़िकली सारा सामान गिनता है। इसे स्टॉक काउंट या फ़िज़िकल इन्वेंटरी कहते हैं। ये ज़रूरी है क्योंकि अलमारी पर असली स्टॉक बुक्स में लिखे स्टॉक से अलग हो सकता है — चोरी, नुक़सान, या रिकॉर्डिंग त्रुटियाँ की वजह से।"


गुडविल — अनदेखी वैल्यू

"मीरा, एक और इंटरेस्टिंग शब्द। मान लो रावत आंटी अपनी दुकान बेचने का फ़ैसला करती हैं। फ़र्नीचर ₹40,000 का है। स्टॉक ₹1,20,000 का है। लेकिन ख़रीदने वाला पूरे बिज़नेस के लिए ₹2,00,000 दे सकता है। क्यों?"

"क्योंकि... दुकान के नियमित ग्राहकों हैं? लोग इसे जानते हैं और ट्रस्ट करते हैं?" मीरा ने अंदाज़ा लगाया।

"बिल्कुल! दुकान की एक रेपुटेशन है। ग्राहक आदत और भरोसे की वजह से यहाँ आते हैं। वो अनदेखी वैल्यू — नाम, रेपुटेशन, ग्राहकों की लॉयल्टी — इसे गुडविल कहते हैं।"

गुडविल = बिज़नेस की रेपुटेशन, ग्राहक संबंधों, और ब्रांड नेम की वैल्यू। ये असली वैल्यू है, लेकिन इसे छू या देख नहीं सकते।

"गुडविल एक एसेट है, लेकिन ख़ास तरह का। इसे तौल या अलमारी पर नहीं रख सकते। ये बुक्स में तभी दिखता है जब कोई बिज़नेस ख़रीदा या बेचा जाता है।"

"उत्तराखंड में, कई पुरानी दुकानें दो-तीन पीढ़ियों से चल रही हैं। लोग इसलिए जाते हैं क्योंकि उनके दादा-दादी भी वहाँ जाते थे। वो लॉयल्टी गुडविल है। इसकी असली वैल्यू है।"


सब कुछ एक साथ — रावत आंटी की दुकान का मैप

शर्मा सर ने व्हाइटबोर्ड पर एक बड़ा डायग्राम बनाया। "मैं रावत आंटी की पूरी दुकान को हमारे अकाउंटिंग शब्दों से मैप करता हूँ।"

अकाउंटिंग शब्दइसका मतलबरावत आंटी की दुकान का उदाहरण
एसेट्सतुम्हारे पास क्या हैकैश (₹15,000), बैंक बैलेंस (₹25,000), स्टॉक (₹1,20,000), फ़र्नीचर और फ़्रिज (₹40,000), डेटर्स (₹12,000)
लायबिलिटीज़तुम पर क्या बाक़ी हैआपूर्तिकर्ता बिल्स (₹32,000), बैंक लोन (₹50,000)
कैपिटलमालिक का निवेशरावत आंटी का बिज़नेस में अपना पैसा (₹1,30,000)
राजस्वकमाया हुआ पैसादुकान से रोज़ की सेल्स
ख़र्चेबिज़नेस चलाने की लागतकिराया, बिजली, मज़दूरी, ट्रांसपोर्ट, ख़रीदारी
डेटर्सजिनका तुम पर बाक़ी हैउधार पर सामान लेने वाले ग्राहक
क्रेडिटर्सजिन्हें तुम्हें देना हैक्रेडिट पर सामान देने वाले होलसेलर्स
स्टॉकबेचने का सामानअलमारियों पर रखा सब कुछ
ड्रॉइंग्समालिक ने पैसा निकालारावत आंटी का बेटे की स्कूल फ़ीस के लिए ₹2,000 निकालना
गुडविलरेपुटेशन की वैल्यूवो ग्राहक जो भरोसे की वजह से आते हैं

रावत आंटी की दुकान का बर्ड्स-आई इलस्ट्रेशन जिसमें हर चीज़ पर लेबल है: अलमारियाँ "स्टॉक (एसेट)," कैश रजिस्टर "कैश (एसेट)," उधार नोट लेकर जाता ग्राहक "डेटर (एसेट)," पीछे के दरवाज़े पर डिलीवरी वाला "क्रेडिटर (लायबिलिटी)," बीच में रावत आंटी "कैपिटल (ओनर्स इक्विटी)," बिजली का मीटर "ख़र्चा," बिक रहा सामान "राजस्व"


पाँच श्रेणियाँ — एक और नज़र

शर्मा सर पक्का करना चाहते थे कि मीरा किसी भी चीज़ को सही श्रेणी में रख सके। उन्होंने रैपिड-फ़ायर क्विज़ दी।

"मैं रावत आंटी की दुकान से कुछ बोलता हूँ। तुम बताओ: एसेट, लायबिलिटी, कैपिटल, राजस्व, या ख़र्चा।"

शर्मा सर बोले...मीरा का जवाबस्पष्टीकरण
कैश बॉक्स में कैशएसेटकुछ जो बिज़नेस के पास है
आपूर्तिकर्ता को देने हैं ₹4,200लायबिलिटीकुछ जो बिज़नेस को देना है
रावत आंटी का शुरुआती ₹2,00,000 का निवेशकैपिटलमालिक का बिज़नेस में अपना पैसा
आज की ₹3,500 की सेल्सराजस्वसामान बेचकर कमाया पैसा
₹5,000 मंथली किरायाख़र्चाबिज़नेस चलाने की लागत
तराज़ूएसेटइक्विपमेंट जो बिज़नेस का है
अलग-अलग ग्राहकों पर ₹12,000 बाक़ीएसेटडेटर्स — बिज़नेस को मिलने वाला पैसा
बैंक लोन पर ब्याजख़र्चाउधार लेने की लागत
₹50,000 का बैंक लोनलायबिलिटीबैंक को देना है
₹200 का आटा बेचनाराजस्वसेल से कमाई
₹1,100 का बिजली बिलख़र्चादुकान चलाने की लागत
अलमारी पर चावल के बोरेएसेटस्टॉक — बेचने का सामान
डिलीवरी बॉय को ₹500 कमीशन जो ग्राहक लाने के लिए दीख़र्चाराजस्व कमाने के लिए ख़र्चा
रावत आंटी ₹1,000 अपने पर्सनल इस्तेमाल के लिए निकालती हैंड्रॉइंग्सकैपिटल कम करता है

"14 में 14!" नेगी भैया ने ताली बजाई।

मीरा मुस्कुराई। उसे अकाउंटिंग की भाषा में सोचना आने लगा था।


ये शब्द डबल-एंट्री से कैसे जुड़ते हैं

"एक आख़िरी बात, मीरा," शर्मा सर ने कहा। "कल का डबल-एंट्री सिस्टम याद है? देखो आज की वोकैब्युलरी उससे कैसे जुड़ती है।"

"अकाउंटिंग में हर अकाउंट इन पाँच श्रेणियाँ में से किसी एक में आता है: एसेट, लायबिलिटी, कैपिटल, राजस्व, या ख़र्चा।"

"और हर श्रेणी का डेबिट और क्रेडिट के साथ अपना बिहेवियर है।"

श्रेणीबढ़ता है... सेघटता है... सेसामान्य बैलेंस
एसेटडेबिटक्रेडिटडेबिट
लायबिलिटीक्रेडिटडेबिटक्रेडिट
कैपिटलक्रेडिटडेबिटक्रेडिट
राजस्वक्रेडिटडेबिटक्रेडिट
ख़र्चाडेबिटक्रेडिटडेबिट

"'सामान्य बैलेंस' का मतलब क्या है? वो साइड जहाँ बैलेंस आमतौर पर दिखता है। कैश एक एसेट है — इसका बैलेंस आमतौर पर डेबिट साइड पर होता है। बैंक लोन एक लायबिलिटी है — इसका बैलेंस आमतौर पर क्रेडिट साइड पर होता है।"

"ये टेबल अभी रटने की ज़रूरत नहीं। जैसे-जैसे और ट्रांज़ैक्शन्स अभ्यास करोगी, ये नैचुरल हो जाएगा। लेकिन इस पेज को बुकमार्क कर लो। कई बार वापस आओगी।"

एक समरी डायग्राम जिसमें पाँचों श्रेणियाँ अकाउंटिंग इक्वेशन के आस-पास अरेंज्ड हैं: बाईं तरफ़ एसेट्स, दाईं तरफ़ लायबिलिटीज़ + कैपिटल, राजस्व और ख़र्चे कैपिटल से जुड़े हैं (क्योंकि मुनाफ़ा कैपिटल बढ़ाता है)


अब तक की कहानी

मीरा ने नोटबुक बंद की और चार दिनों के नोट्स देखे।

  • डे 1: उसने सीखा अकाउंटिंग क्या है और क्यों ज़रूरी है।
  • डे 2: उसने सीखा ट्रांज़ैक्शन क्या है — अकाउंटिंग की ईंट।
  • डे 3: उसने सीखा कि हर ट्रांज़ैक्शन के दो पहलू होते हैं — डबल-एंट्री।
  • डे 4: उसने भाषा सीखी — एसेट्स, लायबिलिटीज़, कैपिटल, राजस्व, ख़र्चे।

"शर्मा सर," उसने कहा, "मुझे लगता है मैंने अभी एल्फ़ाबेट सीखी है। अक्षर पता हैं। लेकिन अभी तक कोई वाक्य नहीं लिखा।"

शर्मा सर ज़ोर से मुस्कुराए। "बिल्कुल सही तरीक़े से कहा। पार्ट 2 में, तुम वाक्य लिखना शुरू करोगी — ट्रांज़ैक्शन्स को जर्नल्स में दर्ज करना, लेजर्स में पोस्ट करना, और फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स तैयार करना। असली काम शुरू होता है।"

"लेकिन याद रखो: एल्फ़ाबेट के बिना वाक्य नहीं लिख सकते। इन चार दिनों ने तुम्हें नींव दी है। बाक़ी सब इसी पर बनेगा।"


क्विक रीकैप — चैप्टर 4

एसेट्स = जो बिज़नेस के पास है (कैश, स्टॉक, फ़र्नीचर, डेटर्स)। एसेट्स बिज़नेस की मदद करते हैं।

लायबिलिटीज़ = जो बिज़नेस पर बाक़ी है (आपूर्तिकर्ता बिल्स, बैंक लोन्स)। लायबिलिटीज़ ज़िम्मेदारियाँ हैं।

कैपिटल = मालिक का अपना पैसा जो बिज़नेस में लगाया।

राजस्व = सामान बेचने या सेवा देने से कमाया पैसा।

ख़र्चे = बिज़नेस चलाने पर ख़र्च किया पैसा।

अकाउंटिंग इक्वेशन: एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल। हमेशा।

और ज़रूरी शब्द:

  • डेटर — ग्राहक जिस पर तुम्हारा बाक़ी है (एसेट)
  • क्रेडिटर — आपूर्तिकर्ता जिसे तुम्हें देना है (लायबिलिटी)
  • स्टॉक/इन्वेंटरी — बेचने के लिए उपलब्ध सामान (एसेट)
  • ड्रॉइंग्स — मालिक पर्सनल इस्तेमाल के लिए पैसा निकालता है (कैपिटल कम होता है)
  • गुडविल — रेपुटेशन और भरोसे की अनदेखी वैल्यू (एसेट)

अभ्यास अभ्यास — ख़ुद करके देखो

अभ्यास 1: अपने शहर या गाँव की किसी असली दुकान या बिज़नेस के बारे में सोचो। कम से कम 5 एसेट्स, 3 लायबिलिटीज़ लिस्ट करो, और पता लगाओ कि कैपिटल कितना होगा। इस टेबल फ़ॉर्मेट में लिखो:

श्रेणीचीज़अंदाज़ा लगाई वैल्यू (₹)
एसेट
लायबिलिटी
कैपिटल

क्या तुम्हारा इक्वेशन बैलेंस करता है? (एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल)

अभ्यास 2: हर आइटम को वर्गीकृत करो — एसेट, लायबिलिटी, कैपिटल, राजस्व, या ख़र्चा:

आइटमश्रेणी
दफ़्तर में कंप्यूटर?
₹600 का मंथली इंटरनेट बिल?
ग्राहक पर ₹8,000 बाक़ी?
मालिक ₹3,00,000 निवेश करके बिज़नेस शुरू करता है?
एक दिन में ₹2,500 के समोसे और चाय बेचना?
चावल आपूर्तिकर्ता को ₹15,000 देना है?
मददर को ₹7,000 तनख़्वाह दी?
बैंक अकाउंट में ₹45,000?
बिज़नेस के लिए डिलीवरी वैन?
फ़िक्स्ड डिपॉज़िट पर ₹1,200 ब्याज मिला?

अभ्यास 3: रावत आंटी की दुकान में महीने के अंत में ये है। अकाउंटिंग इक्वेशन से उनका कैपिटल गणना करो।

आइटमरक़म (₹)
कैश18,000
बैंक बैलेंस30,000
स्टॉक1,35,000
फ़र्नीचर और फ़्रिज38,000
डेटर्स (जिनका बाक़ी है)9,500
कुल एसेट्स?
आपूर्तिकर्ता को देना28,000
बैंक लोन45,000
कुल लायबिलिटीज़?
कैपिटल?

अभ्यास 4: डेटर/क्रेडिटर सेक्शन से, इन सवालों के जवाब दो:

  1. राम तुम्हारी दुकान से ₹500 का सामान क्रेडिट पर ख़रीदता है। राम डेटर है या क्रेडिटर?
  2. तुम गुप्ता होलसेल से ₹3,000 का सामान क्रेडिट पर ख़रीदते हो। गुप्ता होलसेल डेटर है या क्रेडिटर?
  3. तुम किसके डेटर हो? तुम किसके क्रेडिटर हो?

मज़ेदार तथ्य — अकाउंटिंग पूरी दुनिया चलाती है

दुनिया का हर बिज़नेस — मुनस्यारी के एक छोटे चाय स्टॉल से लेकर कैलिफ़ोर्निया की ऐप्पल इंक. तक — वही पाँच श्रेणियाँ इस्तेमाल करता है: एसेट्स, लायबिलिटीज़, कैपिटल, राजस्व, ख़र्चे। और सब वही अकाउंटिंग इक्वेशन पालन करते हैं।

जब तुम न्इस्तेमाल में सुनते हो "रिलायंस ने ₹15,000 करोड़ का मुनाफ़ा रिपोर्ट किया," तो वो नंबर उसी सिस्टम से आया है जो तुम सीख रहे हो। जब सरकार अपना बजट पेश करती है, तो फ़ाइनेंस मिनिस्टर असल में पूरे देश के अकाउंट्स का एक बड़ा सेट प्रेज़ेंट कर रही होती है।

और ये बात तुम्हें मोटिवेट करने वाली है: इंडिया में लगभग 7 करोड़ छोटे बिज़नेसेज़ (MSMEs) हैं। ज़्यादातर को किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत है जो अकाउंटिंग समझता हो। सब CA अफ़ोर्ड नहीं कर सकते। कई को एक ट्रेंड बुककीपर चाहिए — कोई जो उनकी बुक्स साफ़ रखे, GST फ़ाइल करे, और उन्हें उनके अपने नंबर समझने में मदद करे।

वो इंसान तुम हो सकते हो। चार चैप्टर्स पढ़ लिए, और नींव तुम्हारी तैयार है। भाषा तुम्हारी है। अब वक़्त है उसे इस्तेमाल करने का।

पार्ट 2 में, मीरा पेन उठाती है और ट्रांज़ैक्शन्स को एक सही जर्नल में दर्ज करना शुरू करती है। असली बुककीपिंग शुरू होती है।


वाउचर — हर ट्रांज़ैक्शन का सबूत

मीरा की शर्मा सर के दफ़्तर में दूसरा हफ़्ता। सोमवार सुबह वो दफ़्तर पहुँचती है तो देखती है नेगी भैया छोटी-छोटी पर्चियों से घिरे बैठे हैं — कुछ प्रिंटेड, कुछ हाथ से लिखी हुई। "ये सब क्या है भैया?" वो पूछती है। नेगी भैया हँसते हैं। "ये वाउचर हैं। हर एक रुपया जो आता है या जाता है — उसका एक वाउचर चाहिए। वाउचर नहीं तो सबूत नहीं। सबूत नहीं तो अकाउंटिंग नहीं।" वो एक पर्ची उठाते हैं। "रावत आंटी ने ये शनिवार को छोड़ी थीं। पूरे हफ़्ते के ट्रांज़ैक्शन्स। आज तुम और मैं इन्हें छाँटेंगे।"


वाउचर क्यों ज़रूरी हैं

ये सोचो। तुमने अपने गाँव में एक दोस्त को Rs. 500 उधार दिए। एक महीने बाद तुम्हारा दोस्त बोलता है, "मैंने तुमसे कभी पैसे नहीं लिए।" तुम्हारे पास कोई सबूत नहीं। कोई गवाह नहीं। कोई लिखा हुआ कागज़ नहीं। तुम कर क्या सकते हो? कुछ नहीं।

अब वही बात बिज़नेस में सोचो। रावत आंटी ने एक आपूर्तिकर्ता से Rs. 10,000 का सामान खरीदा। कैश दिया। लेकिन कोई कागज़ नहीं, कोई रिकॉर्ड नहीं। बाद में आपूर्तिकर्ता बोलता है, "तुम अभी भी मुझे Rs. 10,000 देती हो।" रावत आंटी क्या करेंगी?

इसीलिए वाउचर होते हैं।

वाउचर एक लिखित दस्तावेज़ है जो साबित करता है कि कोई ट्रांज़ैक्शन हुआ।

ये अकाउंटिंग की नींव है। जर्नल या लेजर में कुछ भी लिखने से पहले, तुम्हें एक वाउचर चाहिए। वाउचर सोर्स डॉक्यूमेंट है — असली सबूत।

ऐसे सोचो:

  • बस टिकट इस बात का सबूत है कि तुमने किराया दिया।
  • मेडिकल शॉप की रसीद सबूत है कि तुमने दवाई खरीदी।
  • बैंक डिपॉज़िट स्लिप सबूत है कि तुमने बैंक में पैसे जमा किए।

अकाउंटिंग में, वाउचर सबूत है कि पैसा हिला।

शर्मा सर सीधी बात कहते हैं:

"मीरा, ये नियम ज़िंदगी भर याद रखो — वाउचर नहीं तो एंट्री नहीं। अगर किसी ट्रांज़ैक्शन का कोई डॉक्यूमेंट नहीं है, तो उसे रिकॉर्ड मत करो। कभी नहीं।"


6 तरह के वाउचर

सारे ट्रांज़ैक्शन्स एक जैसे नहीं होते। पैसा आता है। पैसा जाता है। पैसा अकाउंट्स के बीच मूव होता है। सामान बिकता है। सामान खरीदा जाता है। हर तरह के ट्रांज़ैक्शन का अपना वाउचर होता है।

यहाँ वो छह वाउचर हैं जो तुम्हें जानने चाहिए:

#वाउचर का प्रकारकब इस्तेमाल करेंपैसे की दिशा
1रसीद वाउचर (Receipt Voucher)जब बिज़नेस को पैसा मिलता हैपैसा अंदर आता है
2भुगतान वाउचर (Payment Voucher)जब बिज़नेस पैसा देता हैपैसा बाहर जाता है
3कॉन्ट्रा वाउचर (Contra Voucher)जब पैसा कैश और बैंक के बीच मूव होता है (कोई बाहरी पक्ष नहीं)पैसा अंदर ही घूमता है
4जर्नल वाउचर (Journal Voucher)नॉन-कैश एडजस्टमेंट्स के लिए (डेप्रिसिएशन, करेक्शन्स, आदि)असल में कोई कैश नहीं हिलता
5बिक्री वाउचर (Sales Voucher)जब बिज़नेस सामान या सेवाएँ बेचता हैसामान बाहर जाता है
6खरीद वाउचर (Purchase Voucher)जब बिज़नेस सामान या सेवाएँ खरीदता हैसामान अंदर आता है

आओ हर एक को रावत आंटी की दुकान के असली उदाहरण से समझते हैं।

छह प्रकार के वाउचर


1. रसीद वाउचर (Receipt Voucher)

कब इस्तेमाल करें: जब बिज़नेस को किसी से पैसा मिलता है।

रावत आंटी एक ग्राहक को किराने का सामान बेचती हैं। ग्राहक Rs. 350 कैश देता है। पैसा दुकान में अंदर आ रहा है। इसके लिए रसीद वाउचर चाहिए।

और उदाहरण:

  • कोई ग्राहक पुराना बिल चुकाता है
  • मालिक अपना पर्सनल पैसा बिज़नेस में लाता है
  • बिज़नेस को आपूर्तिकर्ता से रिफ़ंड मिलता है

मुख्य बात: कैश या बैंक बैलेंस बढ़ता है।


2. भुगतान वाउचर (Payment Voucher)

कब इस्तेमाल करें: जब बिज़नेस किसी को पैसा देता है।

रावत आंटी अपनी दुकान का महीने का किराया Rs. 5,000 मकान मालिक को देती हैं। पैसा दुकान से बाहर जा रहा है। इसके लिए भुगतान वाउचर चाहिए।

और उदाहरण:

  • आपूर्तिकर्ता का बिल चुकाना
  • बिजली का बिल देना
  • मददर को तनख़्वाह देना
  • दफ़्तर सप्लाइज़ खरीदना

मुख्य बात: कैश या बैंक बैलेंस घटता है।


3. कॉन्ट्रा वाउचर (Contra Voucher)

कब इस्तेमाल करें: जब पैसा बिज़नेस के अपने कैश और बैंक अकाउंट्स के बीच मूव होता है। कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं।

रावत आंटी अपनी दुकान के काउंटर से Rs. 20,000 कैश लेकर अल्मोड़ा के SBI ब्रांच में अपने बैंक अकाउंट में जमा करती हैं। पैसा अभी भी उन्हीं का है। बस एक जगह (कैश बॉक्स) से दूसरी जगह (बैंक) गया। इसके लिए कॉन्ट्रा वाउचर चाहिए।

और उदाहरण:

  • बैंक से दुकान के लिए कैश निकालना
  • एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफ़र करना

मुख्य बात: कुल पैसा वही रहता है। बस जगह बदलती है।

ऐसे सोचो — एक गिलास से दूसरे गिलास में पानी उँड़ेलना। पानी उतना ही है।


4. जर्नल वाउचर (Journal Voucher)

कब इस्तेमाल करें: जब असल में कोई कैश शामिल नहीं है, लेकिन अकाउंटिंग एंट्री फिर भी करनी है।

साल के आखिर में, शर्मा सर रावत आंटी को बताते हैं कि उनकी लकड़ी की अलमारियाँ (जिनकी कीमत Rs. 15,000 है) ने घिसावट की वजह से Rs. 1,500 की वैल्यू खो दी है। इसे डेप्रिसिएशन कहते हैं। किसी को कोई कैश नहीं दिया गया। लेकिन अलमारियों की वैल्यू कम हुई है, तो इसे दर्ज करना ज़रूरी है। इसके लिए जर्नल वाउचर चाहिए।

और उदाहरण:

  • पहले की एंट्री में गलती सुधारना
  • बैड डेट लिखना (ऐसा ग्राहक जो कभी पैसा नहीं देगा)
  • प्रीपेड ख़र्चे को एडजस्ट करना

मुख्य बात: कोई कैश नहीं हिलता। लेकिन बुक्स को अपडेट करना ज़रूरी है।


5. बिक्री वाउचर (Sales Voucher / Sales Invoice)

कब इस्तेमाल करें: जब बिज़नेस सामान या सेवाएँ बेचता है।

रावत आंटी एक ग्राहक को 10 kg चावल, 5 kg चीनी, और 2 पैकेट चाय बेचती हैं। वो बिल बनाती हैं। यही बिल सेल्स वाउचर है।

और उदाहरण:

  • कोई भी सामान की बिक्री — चाहे कैश हो या क्रेडिट
  • सेवा देकर उसका बिल बनाना

मुख्य बात: सामान या सेवाएँ बाहर जाते हैं। राजस्व अंदर आता है।


6. खरीद वाउचर (Purchase Voucher / Purchase Invoice)

कब इस्तेमाल करें: जब बिज़नेस सामान या सेवाएँ खरीदता है।

रावत आंटी अपनी दुकान के लिए स्टॉक खरीदती हैं — 50 kg चावल, 20 kg दाल, 10 kg चीनी — हल्द्वानी के एक होलसेलर से। होलसेलर उन्हें एक बिल देता है। यही बिल पर्चेज़ वाउचर है।

और उदाहरण:

  • कच्चा माल खरीदना
  • बेचने के लिए सामान खरीदना
  • सेवा खरीदना (जैसे दुकान की पेंटिंग करवाना)

मुख्य बात: सामान या सेवाएँ अंदर आते हैं। पैसा बाहर जाता है (या पेयेबल बनता है)।


वाउचर पर क्या लिखा होता है?

हर वाउचर — चाहे किसी भी टाइप का हो — उस पर कुछ ज़रूरी जानकारी होनी चाहिए। इसे वाउचर का "ID कार्ड" समझो।

यहाँ ज़रूरी हिस्से हैं:

फ़ील्डइसका मतलबउदाहरण
तारीख (Date)ट्रांज़ैक्शन कब हुआ?15-Jul-2025
वाउचर नंबरट्रैकिंग के लिए एक यूनीक सीरियल नंबरPV-042 (Payment Voucher #42)
वाउचर का प्रकार6 में से कौन सा टाइप है?Payment Voucher
किसे दिया / किससे मिलादूसरा पक्ष कौन है?मकान मालिक — श्री पंत जी
राशि (अंकों में)अंकों में रकमRs. 5,000
राशि (शब्दों में)शब्दों में रकमRupees Five Thousand Only
डेबिट अकाउंटकौन सा अकाउंट डेबिट होगा?Rent Account
क्रेडिट अकाउंटकौन सा अकाउंट क्रेडिट होगा?Cash Account
विवरण (नैरेशन)ट्रांज़ैक्शन का छोटा डिस्क्रिप्शनBeing rent paid for July 2025
अधिकृत (Authorized By)किसने अप्रूव किया?रावत आंटी का सिग्नेचर

शर्मा सर समझाते हैं:

"नैरेशन बहुत ज़रूरी है, मीरा। ये ट्रांज़ैक्शन की कहानी बताता है। इसे साफ़ लिखो। सालों बाद अगर कोई ये वाउचर पढ़े, तो उसे समझ आना चाहिए कि क्या हुआ था।"


भरे हुए वाउचर — नमूने

आओ अब तीन असली वाउचर देखते हैं जो मीरा रावत आंटी की दुकान के लिए भरती है।

नमूना 1: भुगतान वाउचर (Payment Voucher)

रावत आंटी July 2025 का दुकान किराया Rs. 5,000 देती हैं।

╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║                   रावत जनरल स्टोर                           ║
║              मेन रोड, अल्मोड़ा, उत्तराखंड                    ║
║                                                              ║
║                    PAYMENT VOUCHER                           ║
║                    (भुगतान वाउचर)                             ║
║                                                              ║
║  वाउचर नं.: PV-042            तारीख: 15-Jul-2025           ║
║                                                              ║
║  किसे दिया: श्री पंत जी (मकान मालिक)                         ║
║                                                              ║
║  Debit Account:  Rent Account                                ║
║  Credit Account: Cash Account                                ║
║                                                              ║
║  राशि: Rs. 5,000.00                                         ║
║  (Rupees Five Thousand Only)                                 ║
║                                                              ║
║  विवरण: Being shop rent paid for the month of                ║
║  July 2025 to Shri Pant Ji, landlord.                        ║
║                                                              ║
║                                                              ║
║  बनाया: मीरा              अधिकृत: रावत आंटी                 ║
║                                                              ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝

Rent Account डेबिट क्यों? क्योंकि किराया एक खर्चा (ख़र्चा) है। ख़र्चे डेबिट साइड पर बढ़ते हैं।

Cash Account क्रेडिट क्यों? क्योंकि कैश बाहर जा रहा है। जब कैश बाहर जाता है तो Cash Account क्रेडिट होता है।


नमूना 2: रसीद वाउचर (Receipt Voucher)

एक नियमित ग्राहक, डिमरी जी, Rs. 2,500 कैश देकर अपना पुराना बिल चुकाते हैं।

╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║                   रावत जनरल स्टोर                           ║
║              मेन रोड, अल्मोड़ा, उत्तराखंड                    ║
║                                                              ║
║                    RECEIPT VOUCHER                           ║
║                    (रसीद वाउचर)                              ║
║                                                              ║
║  वाउचर नं.: RV-078            तारीख: 15-Jul-2025           ║
║                                                              ║
║  किससे मिला: श्री डिमरी जी                                   ║
║                                                              ║
║  Debit Account:  Cash Account                                ║
║  Credit Account: Dimri Ji's Account (Debtor)                 ║
║                                                              ║
║  राशि: Rs. 2,500.00                                         ║
║  (Rupees Two Thousand Five Hundred Only)                     ║
║                                                              ║
║  विवरण: Being cash received from Shri Dimri Ji               ║
║  against his outstanding balance.                            ║
║                                                              ║
║                                                              ║
║  बनाया: मीरा              अधिकृत: रावत आंटी                 ║
║                                                              ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝

Cash Account डेबिट क्यों? क्योंकि कैश अंदर आ रहा है। जब कैश आता है तो Cash Account डेबिट होता है।

डिमरी जी का अकाउंट क्रेडिट क्यों? क्योंकि वो पैसा देनदार (डेटर) थे। अब जब उन्होंने पैसा दे दिया तो उनकी बकाया रकम कम होती है। उनका अकाउंट क्रेडिट करने से उनकी देनदारी कम होती है।


नमूना 3: कॉन्ट्रा वाउचर (Contra Voucher)

रावत आंटी Rs. 20,000 कैश अपने SBI बैंक अकाउंट में जमा करती हैं।

╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║                   रावत जनरल स्टोर                           ║
║              मेन रोड, अल्मोड़ा, उत्तराखंड                    ║
║                                                              ║
║                    CONTRA VOUCHER                            ║
║                    (कॉन्ट्रा वाउचर)                          ║
║                                                              ║
║  वाउचर नं.: CV-011            तारीख: 15-Jul-2025           ║
║                                                              ║
║  Debit Account:  SBI Bank Account                            ║
║  Credit Account: Cash Account                                ║
║                                                              ║
║  राशि: Rs. 20,000.00                                        ║
║  (Rupees Twenty Thousand Only)                               ║
║                                                              ║
║  विवरण: Being cash deposited into SBI Almora                 ║
║  branch account.                                             ║
║                                                              ║
║                                                              ║
║  बनाया: मीरा              अधिकृत: रावत आंटी                 ║
║                                                              ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝

Bank Account डेबिट क्यों? क्योंकि बैंक बैलेंस बढ़ रहा है। बैंक एक एसेट है। एसेट्स डेबिट साइड पर बढ़ती हैं।

Cash Account क्रेडिट क्यों? क्योंकि कैश बॉक्स से कैश बाहर जा रहा है। कैश कम हो रहा है।

ध्यान दो: कोई बाहरी पक्ष शामिल नहीं है। पैसा बस एक जेब से दूसरी जेब में गया।


मीरा टाइप्स कैसे याद रखती है

नेगी भैया मीरा को एक आसान ट्रिक सिखाते हैं:

"अपने आप से दो सवाल पूछो। पहला — क्या कैश शामिल है? दूसरा — पैसा किस दिशा में जा रहा है?"

यहाँ फ़ैसला फ़्लो है:

चरण 1: क्या इस ट्रांज़ैक्शन में कैश या बैंक शामिल है?

  • हाँ, और पैसा अंदर आ रहा है → रसीद वाउचर (Receipt Voucher)
  • हाँ, और पैसा बाहर जा रहा है → भुगतान वाउचर (Payment Voucher)
  • हाँ, लेकिन पैसा हमारे अपने कैश और बैंक के बीच मूव हो रहा है → कॉन्ट्रा वाउचर (Contra Voucher)
  • कैश बिल्कुल शामिल नहीं → जर्नल वाउचर (Journal Voucher)

चरण 2: क्या ये सामान की खरीद या बिक्री है?

  • सामान बेच रहे हैं → बिक्री वाउचर (Sales Voucher)
  • सामान खरीद रहे हैं → खरीद वाउचर (Purchase Voucher)

(ध्यान दो: कैश सेल में सेल्स वाउचर भी बनेगा बिक्री के लिए और रसीद वाउचर भी बनेगा कैश के लिए। व्यवहार में, बहुत से छोटे बिज़नेस दोनों को एक ही डॉक्यूमेंट में मिला देते हैं — सेल्स बिल।)

वाउचर टाइप चुनने का फ़ैसला फ़्लो


वाउचर नंबरिंग

शर्मा सर नंबरिंग पर बहुत पर्टिक्युलर हैं।

"हर वाउचर का एक यूनीक नंबर होना चाहिए, मीरा। इसी से हम उन्हें ट्रैक करते हैं। अगर वाउचर PV-042 गायब हो जाए, तो हमें तुरंत पता चल जाता है क्योंकि PV-041 है और PV-043 है, लेकिन 042 गायब है।"

आम सिस्टम ये है:

वाउचर का प्रकारप्रीफ़िक्सउदाहरण
Receipt VoucherRV-RV-001, RV-002, RV-003...
Payment VoucherPV-PV-001, PV-002, PV-003...
Contra VoucherCV-CV-001, CV-002, CV-003...
Journal VoucherJV-JV-001, JV-002, JV-003...
Sales VoucherSV-SV-001, SV-002, SV-003...
Purchase VoucherPUR-PUR-001, PUR-002, PUR-003...

नंबरिंग हर फ़ाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में (1 April) नए सिरे से शुरू होती है।


सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स (सहायक दस्तावेज़)

अकेला वाउचर काफ़ी नहीं है। इसके साथ एक सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट लगा होना चाहिए — असली बिल, रसीद, या इनवॉइस जो ट्रांज़ैक्शन को प्रूव करे।

उदाहरण:

वाउचरसपोर्टिंग डॉक्यूमेंट
किराये का पेमेंट वाउचरमकान मालिक से किराये की रसीद
स्टॉक का पर्चेज़ वाउचरआपूर्तिकर्ता का बिल/इनवॉइस
ग्राहक के पेमेंट का रसीद वाउचरदुकान की रसीद की कॉपी
बैंक डिपॉज़िट का कॉन्ट्रा वाउचरबैंक डिपॉज़िट स्लिप
बिजली का पेमेंट वाउचरबिजली का बिल

शर्मा सर सारे वाउचर एक फ़ाइल में रखते हैं, तारीख के हिसाब से। हर वाउचर के पीछे उसका सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट चरणल होता है।

"अगर कभी आमदनी टैक्स दफ़्तरर आया, या GST ऑडिट हुआ," शर्मा सर बोलते हैं, "तो वो वाउचर माँगेंगे। अगर तुम्हारे पास सब साफ़-सुथरे और व्यवस्थित्ड हैं, तो कोई दिक्कत नहीं। अगर नहीं हैं..." वो सिर हिलाते हैं। "मुसीबत।"


मीरा का पहला वाउचर

सुबह 11 बज रहे हैं। रावत आंटी दफ़्तर में फ़ोन करती हैं।

"शर्मा सर, मेरी मददर कमला को July की तनख़्वाह चाहिए। Rs. 4,000। क्या मीरा वाउचर बना सकती है?"

शर्मा सर मीरा की तरफ़ देखकर सिर हिलाते हैं। "बनाओ। तुम्हें पता है क्या करना है।"

मीरा सोचती है:

  1. क्या हो रहा है? रावत आंटी कमला को तनख़्वाह दे रही हैं।
  2. क्या कैश शामिल है? हाँ।
  3. किस दिशा में? कैश बाहर जा रहा है।
  4. तो कौन सा वाउचर? पेमेंट वाउचर।
  5. कौन सा अकाउंट डेबिट होगा? Salary Account (ये ख़र्चा है — ख़र्चे डेबिट होते हैं)।
  6. कौन सा अकाउंट क्रेडिट होगा? Cash Account (कैश बाहर जा रहा है — कैश क्रेडिट होता है)।

वो ध्यान से भरती है:

╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║                   रावत जनरल स्टोर                           ║
║              मेन रोड, अल्मोड़ा, उत्तराखंड                    ║
║                                                              ║
║                    PAYMENT VOUCHER                           ║
║                    (भुगतान वाउचर)                             ║
║                                                              ║
║  वाउचर नं.: PV-043            तारीख: 15-Jul-2025           ║
║                                                              ║
║  किसे दिया: श्रीमती कमला देवी (मददर)                       ║
║                                                              ║
║  Debit Account:  Salary Account                              ║
║  Credit Account: Cash Account                                ║
║                                                              ║
║  राशि: Rs. 4,000.00                                         ║
║  (Rupees Four Thousand Only)                                 ║
║                                                              ║
║  विवरण: Being salary paid to Smt. Kamla Devi                 ║
║  for the month of July 2025.                                 ║
║                                                              ║
║                                                              ║
║  बनाया: मीरा              अधिकृत: रावत आंटी                 ║
║                                                              ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝

शर्मा सर चेक करते हैं। "बिल्कुल सही," वो कहते हैं। "तुम्हारा पहला वाउचर। और भी बहुत बनाने हैं।"

मीरा मुस्कुराती है। ये एक छोटा सा कागज़ है। लेकिन इसका मतलब कुछ है। उसने अभी एक ऑफ़िशियल अकाउंटिंग डॉक्यूमेंट बनाया है।


क्विक रीकैप (संक्षिप्त सारांश)

  • वाउचर एक लिखित दस्तावेज़ है जो साबित करता है कि ट्रांज़ैक्शन हुआ।
  • 6 प्रकार हैं: रसीद, पेमेंट, कॉन्ट्रा, जर्नल, सेल्स, पर्चेज़।
  • रसीद वाउचर = पैसा आता है।
  • पेमेंट वाउचर = पैसा जाता है।
  • कॉन्ट्रा वाउचर = पैसा कैश और बैंक के बीच मूव होता है (इंटरनल)।
  • जर्नल वाउचर = कोई कैश शामिल नहीं, सिर्फ एडजस्टमेंट्स।
  • सेल्स वाउचर = सामान या सेवाएँ बेचे गए।
  • पर्चेज़ वाउचर = सामान या सेवाएँ खरीदे गए।
  • हर वाउचर पर होना चाहिए: तारीख, वाउचर नंबर, राशि (अंकों और शब्दों में), प्रभावितेड अकाउंट्स, नैरेशन, और ऑथराइज़ेशन।
  • वाउचर नहीं = एंट्री नहीं। ये सुनहरा नियम है।
  • हमेशा वाउचर के साथ सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स (बिल, रसीदें) लगाओ।

अभ्यास अभ्यास — खुद करो

नीचे दिए गए हर ट्रांज़ैक्शन के लिए सही वाउचर टाइप पहचानो। फिर किन्हीं दो के लिए पूरा वाउचर भरो।

#ट्रांज़ैक्शनवाउचर टाइप?
1रावत आंटी ने होलसेलर से Rs. 4,500 में 100 kg चावल खरीदा, कैश दिया________
2एक ग्राहक ने Rs. 800 का सामान खरीदा और UPI से पे किया________
3रावत आंटी ने बैंक से Rs. 10,000 दुकान के खर्चों के लिए निकाला________
4रावत आंटी ने Rs. 1,200 बिजली का बिल कैश में दिया________
5एक डेटर, जोशी जी, ने अपना Rs. 3,000 का हिसाब चुकाया________
6रावत आंटी ने बिश्त जी को Rs. 1,500 का सामान उधार बेचा________
7शर्मा सर ने साल के अंत में दुकान के फ़र्नीचर पर Rs. 2,000 का डेप्रिसिएशन रिकॉर्ड किया________
8रावत आंटी ने SBI अकाउंट से PNB अकाउंट में Rs. 15,000 ट्रांसफ़र किए________

उत्तर:

  1. पर्चेज़ वाउचर (और कैश पेमेंट के लिए पेमेंट वाउचर)
  2. रसीद वाउचर (और सेल के लिए सेल्स वाउचर)
  3. कॉन्ट्रा वाउचर
  4. पेमेंट वाउचर
  5. रसीद वाउचर
  6. सेल्स वाउचर
  7. जर्नल वाउचर
  8. कॉन्ट्रा वाउचर

बोनस: ऊपर के किन्हीं दो ट्रांज़ैक्शन्स को चुनो और पूरा वाउचर लिखो — तारीख, वाउचर नंबर, डेबिट और क्रेडिट अकाउंट्स, राशि अंकों और शब्दों में, नैरेशन, और ऑथराइज़ेशन के साथ।


मज़ेदार तथ्य (फ़न फ़ैक्ट)

प्राचीन भारत में व्यापारी ताड़पत्रों और कपड़े पर हिसाब रखते थे। चाणक्य ने 2,000 साल से भी पहले लिखी अपनी किताब अर्थशास्त्र में वित्तीय रिकॉर्ड रखने और उनकी ऑडिट करने के नियम बताए हैं। तब भी सिद्धांत वही था — लिख लो, सबूत रखो, और नंबर चेक करो। जब तुम आज एक वाउचर भरते हो, तो तुम उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हो जो दुनिया के ज़्यादातर देशों से भी पुरानी है!


अगले चैप्टर में, मीरा इन सारे वाउचर्स को एक जर्नल में लिखेगी — अकाउंटिंग की "डायरी"। असली बुककीपिंग शुरू होती है।

जर्नल — लिखने का तरीका

बुधवार की सुबह। मीरा शर्मा सर के दफ़्तर पहुँचती है तो उसकी डेस्क पर वाउचर्स का एक साफ़-सुथरा ढेर रखा है — सब रावत आंटी की दुकान से। कल उसने सीखा कि वाउचर क्या होते हैं। आज नेगी भैया उसके सामने एक मोटी नियम्ड नोटबुक रखते हैं। "ये," वो कवर पर थपकी देते हुए कहते हैं, "एक जर्नल है। तुम जानती हो लोग डायरी लिखते हैं? हर रात लिखते हैं कि आज क्या हुआ? जर्नल एक बिज़नेस की डायरी है। हर ट्रांज़ैक्शन, जिस क्रम में हुआ, यहाँ लिखा जाता है।" वो एक खाली पन्ने पर खोलते हैं। "आज तुम पूरा एक पन्ना भरोगी।"


जर्नल क्या है?

अपनी पर्सनल लाइफ़ में तुम डायरी रखते हो। तारीख लिखते हो, फिर लिखते हो कि आज क्या हुआ। "बाज़ार गए। प्रिया से मिले। Rs. 300 की नई चप्पल खरीदी।"

जर्नल भी ठीक ऐसा ही है — लेकिन बिज़नेस के लिए।

ये एक ऐसी बुक है जहाँ तुम हर ट्रांज़ैक्शन को, एक-एक करके, उसी क्रम में दर्ज करते हो जिस क्रम में वो हुआ। हर एंट्री में तारीख, प्रभावितेड अकाउंट्स, राशि, और एक छोटा डिस्क्रिप्शन होता है।

जर्नल को "बुक ऑफ़ ओरिजिनल एंट्री" (मूल प्रविष्टि की पुस्तक) भी कहते हैं क्योंकि ये पहली जगह है जहाँ कोई ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड होता है। वाउचर सबूत है। जर्नल रिकॉर्ड है।

शर्मा सर समझाते हैं:

"ऐसे सोचो, मीरा। वाउचर एक फ़ोटोग्राफ़ जैसा है — वो एक पल दर्ज करता है। जर्नल एक फ़िल्म जैसी है — वो पूरी कहानी बताती है, सीन बाय सीन, क्रम से।"


जर्नल का फ़ॉर्मेट

हर जर्नल में पाँच कॉलम्स होते हैं। मीरा खाली पन्ने को देखती है और कॉलम हेडिंग्स पढ़ती है:

तारीख (Date)विवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)

आओ हर कॉलम समझते हैं:

तारीख (Date) — ट्रांज़ैक्शन किस तारीख को हुआ। ये एक बार लिखते हो। अगर एक ही तारीख को कई ट्रांज़ैक्शन्स हुए, तो तारीख सिर्फ पहली एंट्री में लिखते हो। बाकी में "—" लिखते हो या खाली छोड़ देते हो।

विवरण (Particulars) — यहाँ अकाउंट के नाम और नैरेशन लिखा जाता है। इसका एक ख़ास पैटर्न है:

  • पहली लाइन: जो अकाउंट डेबिट हो रहा है, उसके बाद "Dr." लिखते हैं
  • दूसरी लाइन: "To" से शुरू होती है फिर जो अकाउंट क्रेडिट हो रहा है उसका नाम
  • तीसरी लाइन: ब्रैकेट्स में नैरेशन — एक छोटा डिस्क्रिप्शन कि क्या हुआ

L.F. (लेजर फ़ोलियो) — लेजर में उस अकाउंट का पेज नंबर। ये बाद में भरते हो, जब एंट्रीज़ लेजर में ट्रांसफ़र करते हो। अभी खाली छोड़ दो।

डेबिट (Rs.) — डेबिट होने वाली राशि। डेबिट अकाउंट वाली लाइन पर लिखी जाती है।

क्रेडिट (Rs.) — क्रेडिट होने वाली राशि। क्रेडिट अकाउंट वाली लाइन पर लिखी जाती है।

जर्नल पेज का फ़ॉर्मेट


जर्नल एंट्री कैसे लिखें — चरण बाय चरण

शर्मा सर मीरा को प्रक्रिया समझाते हैं:

चरण 1: वाउचर ध्यान से पढ़ो। क्या हुआ? किसने किसे पैसा दिया? कितना?

चरण 2: दो अकाउंट्स पहचानो। हर ट्रांज़ैक्शन कम से कम दो अकाउंट्स को असर डालता है। (डबल-एंट्री याद है पिछले चैप्टर से?)

चरण 3: तय करो कौन सा अकाउंट डेबिट होगा और कौन सा क्रेडिट। नियम लगाओ:

  • एसेट्स बढ़ती हैं → डेबिट
  • एसेट्स घटती हैं → क्रेडिट
  • ख़र्चे बढ़ते हैं → डेबिट
  • आमदनी बढ़ती है → क्रेडिट
  • लायबिलिटीज़ बढ़ती हैं → क्रेडिट
  • लायबिलिटीज़ घटती हैं → डेबिट

चरण 4: जर्नल में लिखो। फ़ॉर्मेट बिल्कुल सही पालन करो।

चरण 5: नैरेशन लिखो। छोटा और साफ़ रखो।

चरण 6: एंट्री के नीचे एक लाइन खींचो। ये एक एंट्री को दूसरी से अलग करती है।

आओ एक आसान उदाहरण देखते हैं।


उदाहरण एंट्री

वाउचर: रावत आंटी July 2025 का किराया Rs. 5,000 देती हैं।

चरण 1: कैश में किराया दिया। Rs. 5,000।

चरण 2: दो अकाउंट्स — Rent Account और Cash Account।

चरण 3: रेंट एक ख़र्चा है। ख़र्चे डेबिट साइड पर बढ़ते हैं। तो Rent A/c डेबिट होगा। कैश बाहर जा रहा है। एसेट्स क्रेडिट साइड पर घटती हैं। तो Cash A/c क्रेडिट होगा।

चरण 4 & 5: लिखो:

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
15-Jul-2025Rent A/c          Dr.5,000
  To Cash A/c5,000
(Being rent paid for July 2025)

ये एक पूरी जर्नल एंट्री है। अब आओ एक पूरे दिन की एंट्रीज़ करते हैं।


मीरा एक पूरे दिन की जर्नलिंग करती है

15 July 2025 है। रावत आंटी का दिन बिज़ी रहा। यहाँ रावत जनरल स्टोर में उस दिन हुए सारे ट्रांज़ैक्शन्स हैं। मीरा के सामने वाउचर रखे हैं। वो हर एक को दर्ज करने वाली है।

ट्रांज़ैक्शन 1: ओपनिंग कैश बैलेंस

रावत आंटी ने दिन की शुरुआत Rs. 25,000 कैश से की। (ये पहले से रिकॉर्ड था। मीरा को इसके लिए नई एंट्री नहीं चाहिए — ये कल का क्लोज़िंग बैलेंस है।)

ट्रांज़ैक्शन 2: कैश में सामान खरीदा

रावत आंटी ने हल्द्वानी के होलसेलर से स्टॉक (चावल, दाल, चीनी, तेल) Rs. 12,000 में खरीदा। कैश में दिया।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
15-Jul-2025Purchases A/c        Dr.12,000
  To Cash A/c12,000
(Being goods purchased for cash from Haldwani wholesaler)

क्यों? पर्चेज़ेज़ एक ख़र्चा है — डेबिट करो। कैश बाहर जा रहा है — क्रेडिट करो।


ट्रांज़ैक्शन 3: कैश में सामान बेचा

एक ग्राहक ने Rs. 1,800 का किराना सामान खरीदा। कैश दिया।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Cash A/c          Dr.1,800
  To Sales A/c1,800
(Being goods sold for cash)

क्यों? कैश आ रहा है — Cash A/c डेबिट। सेल्स आमदनी है — क्रेडिट।


ट्रांज़ैक्शन 4: उधार पर सामान बेचा

जोशी जी, नियमित ग्राहक, ने Rs. 3,500 का सामान उधार लिया (बाद में देंगे)।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Joshi Ji A/c         Dr.3,500
  To Sales A/c3,500
(Being goods sold on credit to Joshi Ji)

क्यों? जोशी जी अब पैसा देनदार हैं — वो डेटर बन गए। डेटर्स एसेट्स हैं। एसेट्स डेबिट साइड पर बढ़ती हैं। सेल्स आमदनी है — क्रेडिट।

ध्यान दो: यहाँ Cash A/c शामिल नहीं है। कोई कैश एक्सबदलाव नहीं हुआ। इसकी बजाय, जोशी जी का पर्सनल अकाउंट डेबिट हुआ।


ट्रांज़ैक्शन 5: डेटर से कैश मिला

डिमरी जी, जो पिछले हफ़्ते से Rs. 2,500 देनदार थे, आए और पूरा बैलेंस कैश में दिया।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Cash A/c          Dr.2,500
  To Dimri Ji A/c2,500
(Being cash received from Dimri Ji in full settlement)

क्यों? कैश आ रहा है — कैश डेबिट। डिमरी जी का उधार खत्म — उनका अकाउंट क्रेडिट करो ताकि देनदारी कम हो।


ट्रांज़ैक्शन 6: तनख़्वाह दी

मददर कमला देवी को Rs. 4,000 तनख़्वाह दी।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Salary A/c         Dr.4,000
  To Cash A/c4,000
(Being salary paid to Kamla Devi for July 2025)

क्यों? तनख़्वाह ख़र्चा है — डेबिट। कैश बाहर जा रहा है — क्रेडिट।


ट्रांज़ैक्शन 7: किराया दिया

मकान मालिक पंत जी को Rs. 5,000 दुकान का किराया दिया।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Rent A/c          Dr.5,000
  To Cash A/c5,000
(Being shop rent paid for July 2025)

ट्रांज़ैक्शन 8: बिजली का बिल दिया

Rs. 1,200 बिजली का बिल कैश में दिया।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Electricity Expense A/c     Dr.1,200
  To Cash A/c1,200
(Being electricity bill paid for July 2025)

ट्रांज़ैक्शन 9: बैंक में कैश जमा किया

रावत आंटी ने Rs. 5,000 अपने SBI बैंक अकाउंट में जमा किए।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"SBI Bank A/c        Dr.5,000
  To Cash A/c5,000
(Being cash deposited into SBI Almora branch)

ट्रांज़ैक्शन 10: उधार पर सामान खरीदा

बिश्त ट्रेडर्स से Rs. 8,000 का सामान उधार खरीदा (अगले महीने पेमेंट करेंगे)।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Purchases A/c        Dr.8,000
  To Bisht Traders A/c8,000
(Being goods purchased on credit from Bisht Traders)

क्यों? पर्चेज़ेज़ ख़र्चा है — डेबिट। बिश्त ट्रेडर्स अब क्रेडिटर हैं (हम उन्हें पैसा देनदार हैं) — क्रेडिट।


ट्रांज़ैक्शन 11: कैश में सामान बेचा

दोपहर की बिक्री। कई ग्राहकों ने कुल Rs. 4,200 का सामान खरीदा। सब कैश।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Cash A/c          Dr.4,200
  To Sales A/c4,200
(Being goods sold for cash — afternoon sales)

ट्रांज़ैक्शन 12: मालिक ने निजी इस्तेमाल के लिए पैसा निकाला

रावत आंटी ने दुकान की कैश से Rs. 2,000 अपने पर्सनल इस्तेमाल के लिए निकाले (बेटी की स्कूल फ़ीस)।

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
"Drawings A/c        Dr.2,000
  To Cash A/c2,000
(Being cash withdrawn by proprietor for personal use)

क्यों? ड्रॉइंग्स मालिक की कैपिटल कम करता है — Drawings A/c डेबिट। कैश बाहर जा रहा है — Cash A/c क्रेडिट।

ये ज़रूरी बात है: जब मालिक पर्सनल इस्तेमाल के लिए पैसा लेता है, तो ये बिज़नेस का ख़र्चा नहीं होता। ये ड्रॉइंग है। ये बिज़नेस में मालिक की हिस्सेदारी कम करता है।


पूरा जर्नल पेज

यहाँ 15 July 2025 का मीरा का पूरा जर्नल पेज है:

तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
15-Jul-2025Purchases A/c      Dr.12,000
  To Cash A/c12,000
(Being goods purchased for cash)
"Cash A/c        Dr.1,800
  To Sales A/c1,800
(Being goods sold for cash)
"Joshi Ji A/c       Dr.3,500
  To Sales A/c3,500
(Being goods sold on credit to Joshi Ji)
"Cash A/c        Dr.2,500
  To Dimri Ji A/c2,500
(Being cash received from Dimri Ji)
"Salary A/c       Dr.4,000
  To Cash A/c4,000
(Being salary paid to Kamla Devi)
"Rent A/c        Dr.5,000
  To Cash A/c5,000
(Being rent paid for July 2025)
"Electricity Expense A/c   Dr.1,200
  To Cash A/c1,200
(Being electricity bill paid)
"SBI Bank A/c      Dr.5,000
  To Cash A/c5,000
(Being cash deposited into bank)
"Purchases A/c      Dr.8,000
  To Bisht Traders A/c8,000
(Being goods purchased on credit)
"Cash A/c        Dr.4,200
  To Sales A/c4,200
(Being goods sold for cash — afternoon)
"Drawings A/c      Dr.2,000
  To Cash A/c2,000
(Being cash drawn by proprietor)
कुल (Total)49,20049,200

मीरा दोनों कॉलम्स जोड़ती है। डेबिट कुल = Rs. 49,200। क्रेडिट कुल = Rs. 49,200। मिल गए!

शर्मा सर उसके कंधे के ऊपर से देखते हैं। "अच्छा। कुल्स मैच हो गए। इसी से पता चलता है कि तुमने कोई गलती नहीं की। जर्नल में, सारे डेबिट्स का कुल हमेशा सारे क्रेडिट्स के कुल के बराबर होना चाहिए।"


कम्पाउंड जर्नल एंट्रीज़ (मिश्रित जर्नल प्रविष्टियाँ)

कभी-कभी, एक ही ट्रांज़ैक्शन में दो से ज़्यादा अकाउंट्स शामिल होते हैं। इसे कम्पाउंड एंट्री कहते हैं।

उदाहरण: रावत आंटी एक आपूर्तिकर्ता से Rs. 6,000 का सामान खरीदती हैं। Rs. 4,000 कैश में देती हैं और बाकी Rs. 2,000 उधार रखती हैं।

तीन अकाउंट्स शामिल हैं:

  • Purchases A/c (सामान आ रहा है) — डेबिट Rs. 6,000
  • Cash A/c (कैश बाहर जा रहा है) — क्रेडिट Rs. 4,000
  • Supplier A/c (उधार बैलेंस) — क्रेडिट Rs. 2,000
तारीखविवरण (Particulars)L.F.डेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
16-Jul-2025Purchases A/c      Dr.6,000
  To Cash A/c4,000
  To Supplier A/c2,000
(Being goods purchased, partly cash, partly credit)

ध्यान दो: डेबिट साइड (Rs. 6,000) अभी भी क्रेडिट साइड के बराबर है (Rs. 4,000 + Rs. 2,000 = Rs. 6,000)। डबल-एंट्री का सुनहरा नियम कभी नहीं टूटता।


शुरुआती लोगों की आम गलतियाँ

नेगी भैया मीरा को उन गलतियों की चेतावनी देते हैं जो वो खुद पहले करते थे:

  1. नैरेशन भूल जाना। नैरेशन के बिना, छह महीने बाद किसी को पता नहीं चलेगा कि एंट्री किस लिए थी।

  2. क्रेडिट अकाउंट पहले लिखना। हमेशा डेबिट अकाउंट पहले लिखो, फिर क्रेडिट अकाउंट "To" लगाकर।

  3. एंट्रीज़ के बीच लाइन न खींचना। लाइन्स के बिना, एंट्रीज़ एक-दूसरे में मिल जाती हैं और कन्फ़्इस्तेमालन होता है।

  4. गलत डेबिट/क्रेडिट। अगर डाउट हो, तो बुनियादी्स पर जाओ। पूछो: ये कौन सा टाइप का अकाउंट है (एसेट, लायबिलिटी, ख़र्चा, आमदनी, कैपिटल)? फिर नियम लगाओ।

  5. कुल्स मैच न होना। अगर पेज के नीचे डेबिट कुल और क्रेडिट कुल मैच नहीं करते, तो कहीं गलती है। वापस जाओ और हर एंट्री चेक करो।


क्विक रीकैप (संक्षिप्त सारांश)

  • जर्नल बुक ऑफ़ ओरिजिनल एंट्री है — बिज़नेस की "डायरी"।
  • फ़ॉर्मेट: Date | Particulars | L.F. | Debit | Credit
  • डेबिट अकाउंट पहले लिखा जाता है, उसके बाद "Dr."
  • क्रेडिट अकाउंट दूसरा लिखा जाता है, "To" से शुरू करके।
  • नैरेशन (ब्रैकेट्स में) बताता है कि क्या हुआ।
  • L.F. (लेजर फ़ोलियो) लेजर का पेज नंबर है — बाद में भरा जाता है।
  • कम्पाउंड एंट्री में दो से ज़्यादा अकाउंट्स शामिल होते हैं, लेकिन डेबिट्स फिर भी क्रेडिट्स के बराबर होते हैं।
  • हर पेज के नीचे, कुल डेबिट्स = कुल क्रेडिट्स होना चाहिए।
  • नैरेशन नहीं = अस्पष्ट एंट्री। हमेशा नैरेशन लिखो।

अभ्यास अभ्यास — खुद करो

20 July 2025 को रावत जनरल स्टोर के लिए नीचे दिए गए ट्रांज़ैक्शन्स को जर्नल फ़ॉर्मेट में दर्ज करो:

  1. Rs. 50,000 कैश से बिज़नेस शुरू किया।
  2. SBI में बैंक अकाउंट खोला और Rs. 30,000 जमा किए।
  3. Rs. 12,000 का दुकान का फ़र्नीचर खरीदा, चेक से पे किया।
  4. बिश्त ट्रेडर्स से Rs. 15,000 का सामान उधार खरीदा।
  5. Rs. 6,000 का सामान कैश में बेचा।
  6. डिमरी जी को Rs. 4,000 का सामान उधार बेचा।
  7. डिमरी जी से Rs. 2,000 मिले।
  8. Rs. 800 दुकान की सफ़ाई (मिसलेनियस ख़र्चा) के लिए दिए।

सारी एंट्रीज़ दर्ज करने के बाद, डेबिट और क्रेडिट कॉलम्स जोड़ो। क्या मिल रहे हैं?

हिंट्स:

  • ट्रांज़ैक्शन 1: Cash A/c Dr., To Capital A/c
  • ट्रांज़ैक्शन 2: SBI Bank A/c Dr., To Cash A/c (ये कॉन्ट्रा एंट्री है)
  • ट्रांज़ैक्शन 3: Furniture A/c Dr., To SBI Bank A/c
  • बाकी के लिए वही लॉजिक पालन करो। दो अकाउंट्स पहचानो। डेबिट और क्रेडिट तय करो। नैरेशन लिखो।

मज़ेदार तथ्य (फ़न फ़ैक्ट)

"जर्नल" शब्द फ़्रेंच भाषा के jour से आया है, जिसका मतलब है "दिन"। तो जर्नल का शाब्दिक अर्थ है "दैनिक" रिकॉर्ड। और फ़्रेंच ने ये लैटिन शब्द diurnalis से लिया, जिसका मतलब है "दिन का"। भाषाओं और सदियों में, आइडिया वही है — हर रोज़ लिखो कि क्या हुआ, बिना नागा किए। मीरा अब इस सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है!


अगले चैप्टर में, मीरा इन सारी जर्नल एंट्रीज़ को अलग-अलग अकाउंट्स में व्यवस्थित करेगी — इसे लेजर कहते हैं। जर्नल एक कहानी है जो क्रम से बताई गई है। लेजर वही कहानी है, लेकिन किरदार के हिसाब से छाँटी गई।

लेजर — अकाउंट्स को व्यवस्थित करना

गुरुवार की सुबह। मीरा कल भरी हुई जर्नल खोलती है और उन ग्यारह एंट्रीज़ को देखती है। "मुझे पूरा दिख रहा है कि 15 July को क्या-क्या हुआ," वो कहती है। "लेकिन अगर रावत आंटी पूछें — हमारे पास कुल कितना कैश है? या जोशी जी हमें कितना देनदार हैं? तो मुझे हर एंट्री पढ़नी पड़ेगी और कैश या जोशी जी वाली एंट्रीज़ छाँटनी पड़ेंगी।" नेगी भैया सिर हिलाते हैं। "बिल्कुल। इसीलिए लेजर होता है। जर्नल तुम्हें बताती है कि क्या हुआ, क्रम से। लेजर तुम्हें हर अकाउंट की पूरी कहानी बताता है, एक ही जगह।"


लेजर क्या है?

सोचो तुम्हारे पास एक स्कूल नोटबुक है। तुमने उसमें हिंदी, इंग्लिश, मैथ, साइंस — सबके नोट्स मिलाकर लिख दिए, जिस क्रम में क्लासेज़ हुईं। अगर कोई पूछे, "अपने सारे मैथ नोट्स दिखाओ," तो तुम्हें हर पन्ना पलटकर मैथ वाले हिस्से छाँटने पड़ेंगे। मुश्किल है, ना?

अब सोचो हर सब्जेक्ट की अलग नोटबुक है। सारा मैथ एक जगह। सारी हिंदी दूसरी जगह। कितना आसान है ढूँढना!

लेजर बिल्कुल यही करता है।

लेजर एक ऐसी बुक है जहाँ हर अकाउंट को अपना अलग पेज मिलता है।

  • एक पेज Cash Account का — सारी कैश-रिलेटेड एंट्रीज़ यहाँ आती हैं।
  • एक पेज Sales Account का — सारी सेल्स एंट्रीज़ यहाँ आती हैं।
  • एक पेज Rent Account का — सारी रेंट एंट्रीज़ यहाँ आती हैं।
  • एक पेज जोशी जी के अकाउंट का — जोशी जी से जुड़ा सब कुछ यहाँ आता है।

जर्नल तारीख के हिसाब से व्यवस्थित्ड है (पहले क्या हुआ, दूसरा क्या, तीसरा क्या...)। लेजर अकाउंट के हिसाब से व्यवस्थित्ड है (कैश की सारी बातें, सेल्स की सारी बातें...)।

शर्मा सर कहते हैं:

"जर्नल CCTV कैमरा जैसी है — सब कुछ क्रम से दर्ज करती है। लेजर एक एल्बम जैसा है जो व्यक्ति के हिसाब से सॉर्टेड है — एक व्यक्ति की सारी फ़ोटोज़ एक जगह।"


T-अकाउंट फ़ॉर्मेट

हर लेजर अकाउंट एक ख़ास फ़ॉर्मेट में लिखा जाता है जो अंग्रेज़ी अक्षर "T" जैसा दिखता है। इसीलिए इसे T-अकाउंट कहते हैं।

बुनियादी ढाँचा ये है:

                        अकाउंट का नाम
 ─────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)     |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────
 Date | Particulars | Amt  | Date | Particulars | Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────
      |             |      |      |             |
      |             |      |      |             |

बाईं तरफ़ डेबिट (Dr.) साइड है। दाईं तरफ़ क्रेडिट (Cr.) साइड है।

हर साइड में तीन कॉलम्स हैं:

  • Date — ट्रांज़ैक्शन कब हुआ
  • Particularsदूसरे अकाउंट का नाम जो शामिल था (ये बहुत ज़रूरी है!)
  • Amount — रुपयों में रकम

T-अकाउंट फ़ॉर्मेट


जर्नल से लेजर में पोस्टिंग कैसे करें

"पोस्टिंग" का मतलब है जर्नल से इन्फ़ॉर्मेशन को सही लेजर अकाउंट में कॉपी करना। ये है प्रक्रिया, चरण बाय चरण।

चरण 1: एक जर्नल एंट्री चुनो।

चरण 2: जो अकाउंट डेबिट हुआ था, उसके लेजर पेज पर जाओ। एंट्री बाईं (डेबिट) साइड पर लिखो। "Particulars" कॉलम में लिखो "To [क्रेडिट हुए अकाउंट का नाम]।"

चरण 3: जो अकाउंट क्रेडिट हुआ था, उसके लेजर पेज पर जाओ। एंट्री दाईं (क्रेडिट) साइड पर लिखो। "Particulars" कॉलम में लिखो "By [डेबिट हुए अकाउंट का नाम]।"

मुख्य नियम: लेजर के Particulars कॉलम में तुम हमेशा दूसरे अकाउंट का नाम लिखते हो — वो जो जर्नल एंट्री के ऑपोज़िट साइड पर है।

आओ एक उदाहरण से समझते हैं।


उदाहरण: किराये की पेमेंट को पोस्ट करना

जर्नल एंट्री:

DateParticularsL.F.DebitCredit
15-JulRent A/c Dr.5,000
To Cash A/c5,000

Rent Account में पोस्टिंग (जर्नल में डेबिट हुआ, तो LEFT साइड पर लिखो):

                          Rent Account
 ─────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)     |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────
 Date    | Particulars| Amt | Date | Particulars| Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────
 15-Jul  | To Cash    |5,000|      |            |

Cash Account में पोस्टिंग (जर्नल में क्रेडिट हुआ, तो RIGHT साइड पर लिखो):

                          Cash Account
 ─────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)     |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────
 Date    | Particulars| Amt | Date | Particulars| Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────
         |            |     |15-Jul| By Rent    |5,000

ध्यान दो — Rent Account में, Particulars में "To Cash" लिखा है — ये बताता है कि पैसा कहाँ गया। और Cash Account में, Particulars में "By Rent" लिखा है — ये बताता है कि कैश क्यों बाहर गया।


मीरा सारी एंट्रीज़ लेजर में पोस्ट करती है

अब मीरा 15 July की सारी 11 जर्नल एंट्रीज़ को उनके इज़्ज़तिव लेजर अकाउंट्स में पोस्ट करेगी। आओ हर लेजर अकाउंट एक-एक करके बनाते हैं।

उसे ये अकाउंट्स बनाने हैं:

  1. Cash Account
  2. Purchases Account
  3. Sales Account
  4. Joshi Ji Account
  5. Dimri Ji Account
  6. Salary Account
  7. Rent Account
  8. Electricity Expense Account
  9. SBI Bank Account
  10. Bisht Traders Account
  11. Drawings Account

आओ सबसे ज़रूरी अकाउंट्स ब्योरा में करते हैं।


लेजर 1: Cash Account

कैश 15 July को बहुत सारे ट्रांज़ैक्शन्स में दिखता है। मीरा सब इकट्ठा करती है:

कैश डेबिट हुआ (कैश अंदर आया) इन एंट्रीज़ में:

  • कैश सेल: Rs. 1,800
  • डिमरी जी से मिला: Rs. 2,500
  • कैश सेल (दोपहर): Rs. 4,200

कैश क्रेडिट हुआ (कैश बाहर गया) इन एंट्रीज़ में:

  • सामान खरीदा: Rs. 12,000
  • कमला को तनख़्वाह: Rs. 4,000
  • किराया: Rs. 5,000
  • बिजली: Rs. 1,200
  • बैंक में जमा: Rs. 5,000
  • ड्रॉइंग्स: Rs. 2,000

याद रखो, रावत आंटी ने दिन की शुरुआत Rs. 25,000 कैश से की थी (14 July का क्लोज़िंग बैलेंस)।

                          Cash Account
 ─────────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)          |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Date   | Particulars   | Amt   | Date   | Particulars      | Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 1-Jul  | To Balance b/d|25,000 | 15-Jul | By Purchases     |12,000
 15-Jul | To Sales      | 1,800 | 15-Jul | By Salary        | 4,000
 15-Jul | To Dimri Ji   | 2,500 | 15-Jul | By Rent          | 5,000
 15-Jul | To Sales      | 4,200 | 15-Jul | By Electricity   | 1,200
        |               |       | 15-Jul | By SBI Bank      | 5,000
        |               |       | 15-Jul | By Drawings      | 2,000
        |               |       | 15-Jul | By Balance c/d   | 4,300
 ─────────────────────────────────────────────────────────
        | Total         |33,500 |        | Total            |33,500
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 16-Jul | To Balance b/d| 4,300 |        |                  |

कैसे पढ़ें:

  • बाईं तरफ़ दिखता है कि कब-कब कैश आया: ओपनिंग बैलेंस (Rs. 25,000), दो कैश सेल्स (Rs. 1,800 और Rs. 4,200), और डिमरी जी से मिला (Rs. 2,500)। कुल डेबिट = Rs. 33,500।

  • दाईं तरफ़ दिखता है कि कब-कब कैश गया: पर्चेज़ेज़, तनख़्वाह, रेंट, इलेक्ट्रिसिटी, बैंक डिपॉज़िट, और ड्रॉइंग्स। कुल = Rs. 29,200।

  • अंतर है: Rs. 33,500 - Rs. 29,200 = Rs. 4,300। ये क्लोज़िंग बैलेंस है (Balance c/d = "carried down" यानी आगे ले जाया गया)।

  • क्लोज़िंग बैलेंस छोटी साइड पर लिखा जाता है ताकि दोनों साइड्स बराबर हो जाएँ (Rs. 33,500 = Rs. 33,500)।

  • अगला दिन इस बैलेंस से शुरू होता है — ओपनिंग बैलेंस (Balance b/d = "brought down" यानी लाया गया) डेबिट साइड पर (क्योंकि कैश एक एसेट है, और एसेट्स का डेबिट बैलेंस होता है)।


लेजर 2: Sales Account

सेल्स तीन एंट्रीज़ में क्रेडिट हुआ:

                          Sales Account
 ─────────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)          |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Date   | Particulars   | Amt   | Date   | Particulars   | Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 15-Jul | To Balance c/d| 9,500 | 15-Jul | By Cash       | 1,800
        |               |       | 15-Jul | By Joshi Ji   | 3,500
        |               |       | 15-Jul | By Cash       | 4,200
 ─────────────────────────────────────────────────────────
        | Total         | 9,500 |        | Total         | 9,500
 ─────────────────────────────────────────────────────────
        |               |       | 16-Jul | By Balance b/d| 9,500

सेल्स आमदनी अकाउंट है। आमदनी का क्रेडिट बैलेंस होता है। तो क्लोज़िंग बैलेंस डेबिट साइड पर आता है (छोटी साइड), और अगले दिन का ओपनिंग बैलेंस क्रेडिट साइड पर आता है।

दिन की कुल सेल्स = Rs. 1,800 + Rs. 3,500 + Rs. 4,200 = Rs. 9,500।


लेजर 3: Purchases Account

पर्चेज़ेज़ दो एंट्रीज़ में डेबिट हुआ:

                        Purchases Account
 ─────────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)          |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Date   | Particulars      | Amt   | Date   | Particulars   | Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 15-Jul | To Cash          |12,000 | 15-Jul | By Balance c/d|20,000
 15-Jul | To Bisht Traders | 8,000 |        |               |
 ─────────────────────────────────────────────────────────
        | Total            |20,000 |        | Total         |20,000
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 16-Jul | To Balance b/d   |20,000 |        |               |

पर्चेज़ेज़ ख़र्चा है। ख़र्चे का डेबिट बैलेंस होता है। कुल पर्चेज़ेज़ = Rs. 12,000 + Rs. 8,000 = Rs. 20,000।


लेजर 4: Joshi Ji Account (डेटर — देनदार)

जोशी जी ने उधार सामान खरीदा। वो Rs. 3,500 देनदार हैं।

                        Joshi Ji Account
 ─────────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)          |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Date   | Particulars   | Amt   | Date   | Particulars   | Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 15-Jul | To Sales      | 3,500 | 15-Jul | By Balance c/d| 3,500
 ─────────────────────────────────────────────────────────
        | Total         | 3,500 |        | Total         | 3,500
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 16-Jul | To Balance b/d| 3,500 |        |               |

जोशी जी डेटर हैं (हमें पैसा देनदार हैं)। डेटर्स एसेट्स हैं। एसेट्स का डेबिट बैलेंस होता है।


लेजर 5: Bisht Traders Account (क्रेडिटर — लेनदार)

हमने बिश्त ट्रेडर्स से उधार सामान खरीदा। हम उन्हें Rs. 8,000 देनदार हैं।

                      Bisht Traders Account
 ─────────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)          |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Date   | Particulars   | Amt   | Date   | Particulars   | Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 15-Jul | To Balance c/d| 8,000 | 15-Jul | By Purchases  | 8,000
 ─────────────────────────────────────────────────────────
        | Total         | 8,000 |        | Total         | 8,000
 ─────────────────────────────────────────────────────────
        |               |       | 16-Jul | By Balance b/d| 8,000

बिश्त ट्रेडर्स क्रेडिटर हैं (हम उन्हें पैसा देनदार हैं)। क्रेडिटर्स लायबिलिटीज़ हैं। लायबिलिटीज़ का क्रेडिट बैलेंस होता है।


लेजर 6: Rent Account

                          Rent Account
 ─────────────────────────────────────────────────────────
      Dr. (डेबिट साइड)          |     Cr. (क्रेडिट साइड)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Date   | Particulars   | Amt   | Date   | Particulars   | Amt
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 15-Jul | To Cash       | 5,000 | 15-Jul | By Balance c/d| 5,000
 ─────────────────────────────────────────────────────────
        | Total         | 5,000 |        | Total         | 5,000
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 16-Jul | To Balance b/d| 5,000 |        |               |

रेंट ख़र्चा है। डेबिट बैलेंस।


अकाउंट को बैलेंस करना — चरण बाय चरण

मीरा शर्मा सर से पूछती है, "अकाउंट को बैलेंस कैसे करें?"

शर्मा सर चरण समझाते हैं:

चरण 1: डेबिट साइड की सारी रकमें जोड़ो। क्रेडिट साइड की सारी रकमें जोड़ो।

चरण 2: दोनों कुल्स का अंतर निकालो।

चरण 3: अंतर को छोटी साइड पर लिखो "Balance c/d" (carried down) शब्दों के साथ। इससे दोनों साइड्स बराबर हो जाती हैं।

चरण 4: वही रकम कुल लाइन के नीचे बड़ी साइड पर लिखो "Balance b/d" (brought down) और अगली तारीख के साथ। ये अगली अवधि का ओपनिंग बैलेंस बन जाता है।

बैलेंस किस साइड पर आता है?

अकाउंट का प्रकारसामान्य बैलेंसBalance b/d कहाँ आता है
एसेट (कैश, बैंक, डेटर्स, फ़र्नीचर)डेबिटडेबिट साइड
ख़र्चा (रेंट, तनख़्वाह, पर्चेज़ेज़)डेबिटडेबिट साइड
लायबिलिटी (क्रेडिटर्स, लोन्स)क्रेडिटक्रेडिट साइड
आमदनी (सेल्स, कमीशन)क्रेडिटक्रेडिट साइड
कैपिटलक्रेडिटक्रेडिट साइड

मीरा ये अपनी नोटबुक में लिखती है और दो बार अंडरलाइन करती है।


"Particulars" कॉलम — एक ज़रूरी बात

नेगी भैया एक बात पॉइंट आउट करते हैं जो बहुत सारे नए सीखने वाले को कन्फ़्इस्तेमाल करती है:

"जर्नल में तुम लिखते हो 'Rent A/c Dr., To Cash A/c.' लेकिन लेजर में अलग तरीके से लिखते हो। Rent Account की डेबिट साइड पर तुम लिखते हो 'To Cash.' Cash Account की क्रेडिट साइड पर लिखते हो 'By Rent.' तुम हमेशा दूसरे अकाउंट का नाम लिखते हो।"

नियम ये है:

  • लेजर की डेबिट साइड पर, "To" लिखो और उसके बाद जो अकाउंट क्रेडिट हुआ उसका नाम।
  • लेजर की क्रेडिट साइड पर, "By" लिखो और उसके बाद जो अकाउंट डेबिट हुआ उसका नाम।

ये एक क्रॉस-रेफ़रेंस बनाता है। अगर तुम Cash Account देख रहे हो और क्रेडिट साइड पर "By Rent — Rs. 5,000" दिखता है, तो तुम्हें तुरंत पता चल जाता है: Rs. 5,000 बाहर गया, और वो रेंट के लिए गया। फिर तुम Rent Account पर जाकर दूसरी साइड देख सकते हो।


जर्नल vs. लेजर — तुलना

विशेषताजर्नललेजर
और क्या कहते हैंबुक ऑफ़ ओरिजिनल एंट्रीबुक ऑफ़ फ़ाइनल एंट्री
व्यवस्थित्ड कैसेतारीख के हिसाब से (क्रोनोलॉजिकल)अकाउंट के हिसाब से (बाय टॉपिक)
फ़ॉर्मेटDate, Particulars, LF, Dr, CrT-अकाउंट (Dr साइड, Cr साइड)
उद्देश्यट्रांज़ैक्शन्स दर्ज करना जैसे होते हैंअकाउंट-वाइज़ वर्गीकृत और समराइज़ करना
मिलानपेज के नीचे कुल्स मैच करते हैंहर अकाउंट अलग से बैलेंस होता है
पहले लिखा जाता है?हाँ — हमेशा पहलेनहीं — जर्नल से पोस्ट किया जाता है

ऐसे सोचो जैसे खाना पकाना: जर्नल तुम्हारी रेसिपी है (चरण-बाय-चरण इंस्ट्रक्शन्स)। लेजर तुम्हारी किचन है जो शेल्फ़ के हिसाब से व्यवस्थित्ड है — मसाले एक शेल्फ़ पर, दाल दूसरी पर, चावल तीसरी पर।


L.F. कॉलम भरना

याद है जर्नल में "L.F." कॉलम जो मीरा ने खाली छोड़ा था? अब वो भर सकती है।

जैसे-जैसे वो हर जर्नल एंट्री को लेजर में पोस्ट करती है, वो जर्नल के L.F. कॉलम में लेजर का पेज नंबर लिखती है। और लेजर में, एक करस्पॉन्डिंग कॉलम होता है (कभी-कभी J.F. — जर्नल फ़ोलियो कहलाता है) जहाँ वो जर्नल का पेज नंबर लिखती है।

ये एक टू-वे लिंक बनाता है:

  • जर्नल → लेजर (L.F. कॉलम)
  • लेजर → जर्नल (J.F. कॉलम)

अगर कभी किसी ट्रांज़ैक्शन को वापस सोर्स तक ट्रेस करना हो, तो इन पेज नंबर्स को ट्रेल की तरह पालन कर सकते हो।


क्विक रीकैप (संक्षिप्त सारांश)

  • लेजर हर अकाउंट को अपना अलग पेज देता है। उस अकाउंट की सारी एंट्रीज़ एक जगह इकट्ठा होती हैं।
  • फ़ॉर्मेट T-अकाउंट है: बाईं तरफ़ डेबिट साइड, दाईं तरफ़ क्रेडिट साइड।
  • पोस्टिंग का मतलब है जर्नल से एंट्रीज़ को सही लेजर अकाउंट्स में कॉपी करना।
  • Particulars कॉलम में दूसरे अकाउंट का नाम लिखो — डेबिट साइड पर "To" और क्रेडिट साइड पर "By" लगाओ।
  • अकाउंट बैलेंस करना: डेबिट और क्रेडिट कुल्स का अंतर निकालो, छोटी साइड पर "Balance c/d" लिखो, फिर नीचे "Balance b/d" के रूप में लाओ।
  • एसेट्स और ख़र्चे का डेबिट बैलेंस होता है। लायबिलिटीज़, आमदनी, और कैपिटल का क्रेडिट बैलेंस होता है।
  • L.F. (लेजर फ़ोलियो) जर्नल को लेजर से जोड़ता है, एक ट्रेसेबल ट्रेल बनाता है।

अभ्यास अभ्यास — खुद करो

पिछले चैप्टर के अभ्यास अभ्यास में दी गई जर्नल एंट्रीज़ (20 July 2025 के 8 ट्रांज़ैक्शन्स) को नीचे दिए गए लेजर अकाउंट्स में पोस्ट करो और हर एक को बैलेंस करो:

  1. Cash Account
  2. SBI Bank Account
  3. Capital Account
  4. Furniture Account
  5. Purchases Account
  6. Sales Account
  7. Bisht Traders Account
  8. Dimri Ji Account
  9. Miscellaneous Expense Account

याद रखो:

  • अगर जर्नल में अकाउंट डेबिट हुआ, तो उसे लेजर की LEFT (डेबिट) साइड पर पोस्ट करो।
  • अगर जर्नल में अकाउंट क्रेडिट हुआ, तो उसे लेजर की RIGHT (क्रेडिट) साइड पर पोस्ट करो।
  • Particulars कॉलम में दूसरे अकाउंट का नाम लिखो।
  • सारी एंट्रीज़ पोस्ट करने के बाद, हर अकाउंट बैलेंस करो।

खुद चेक करो: क्या Cash A/c का डेबिट बैलेंस है? क्या Capital A/c का क्रेडिट बैलेंस है? क्या Sales A/c का क्रेडिट बैलेंस है? अगर हाँ, तो तुम सही ट्रैक पर हो।


मज़ेदार तथ्य (फ़न फ़ैक्ट)

"लेजर" शब्द पुरानी इंग्लिश और डच भाषा से आया है जिसका मतलब है "पड़ा रहना" — यानी, एक ऐसी बुक जो डेस्क पर खुली पड़ी रहती है, हमेशा रेफ़रेंस के लिए तैयार। मध्यकालीन यूरोप में, व्यापारी अपनी लेजर्स को ज़ंजीरों से डेस्क से बाँधकर रखते थे क्योंकि वो इतनी कीमती होती थीं। लेजर खोना मतलब अपने पूरे बिज़नेस का इतिहास खोना। आज लेजर कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर के अंदर रहता है, लेकिन सिद्धांत 500 सालों में बदला नहीं है। दुनिया का हर बिज़नेस — रावत आंटी की किराना दुकान से लेकर Reliance Industries तक — लेजर रखता है।


अगले चैप्टर में, मीरा सारे लेजर बैलेंसेज़ को एक ही पेज पर रखेगी — ट्रायल बैलेंस। ये अकाउंटिंग का तरीका है पूछने का: "क्या मैंने सब सही किया?"

ट्रायल बैलेंस — क्या सब जुड़ रहा है?

शुक्रवार का दिन। मीरा ने पूरे हफ़्ते वाउचर, जर्नल एंट्रीज़, और लेजर पोस्टिंग सीखी है। उसने पन्नों पर पन्ने भरे हैं। उसकी उँगलियों पर स्याही के निशान हैं। अब शर्मा सर उसके सामने एक खाली कागज़ रखते हैं। "मीरा, तुमने सारी एंट्रीज़ लेजर में पोस्ट कर दीं। हर अकाउंट बैलेंस कर दिया। लेकिन तुम्हें कैसे पता कि कोई गलती नहीं हुई? कैसे पता कि तुमने गलती से Rs. 5,000 डेबिट साइड पर नहीं डाल दिए जो क्रेडिट साइड पर होने चाहिए थे?" मीरा माथे पर बल डालती है। "मैं हर एंट्री दोबारा चेक करूँ?" शर्मा सर सिर हिलाते हैं। "इसमें पूरा दिन लग जाएगा। एक तेज़ तरीका है। इसे ट्रायल बैलेंस कहते हैं।"


ट्रायल बैलेंस क्या है?

डबल-एंट्री अकाउंटिंग का सुनहरा नियम याद है? हर डेबिट के बराबर एक क्रेडिट होता है। अगर तुम इस नियम को ठीक से पालन करो, तो तुम्हारे लेजर के सारे डेबिट बैलेंसेज़ का कुल, सारे क्रेडिट बैलेंसेज़ के कुल के बराबर होना चाहिए।

ट्रायल बैलेंस बस इतना है — तुम्हारे सारे लेजर अकाउंट बैलेंसेज़ की एक सूची, दो कॉलम्स में — एक तरफ़ डेबिट बैलेंसेज़, दूसरी तरफ़ क्रेडिट बैलेंसेज़। फिर दोनों कॉलम्स जोड़ो। अगर मिल गए, तो तुम्हारे बुक्स अरिथमेटिकली सही हैं।

ऐसे सोचो जैसे सब्ज़ी मंडी में तराज़ू। एक तरफ़ सब्ज़ी रखो और दूसरी तरफ़ बाट। अगर तराज़ू बराबर है, तो तोल सही है। अगर एक तरफ़ झुका, तो कुछ गड़बड़ है।

ट्रायल बैलेंस अकाउंटिंग का तराज़ू है।

शर्मा सर समझाते हैं:

"ट्रायल बैलेंस तुम्हें ये नहीं बताता कि सब कुछ सही है। ये बताता है कि तुम्हारे डेबिट्स और क्रेडिट्स बैलेंस में हैं। ये पहला चेक है — जैसे परोसने से पहले दाल चखना। अगर नमक गलत है, तो पता चल जाता है कि समस्या है। लेकिन नमक सही होने पर भी, दाल में और कुछ कम हो सकता है।"

ट्रायल बैलेंस क्या नहीं पकड़ सकता, ये बाद में देखेंगे। पहले, सीखते हैं कि बनाते कैसे हैं।


ट्रायल बैलेंस का फ़ॉर्मेट

ट्रायल बैलेंस एक सीधी-सादी टेबल है:

क्र.सं.अकाउंट का नामडेबिट बैलेंस (Rs.)क्रेडिट बैलेंस (Rs.)
कुल (Total)________

हर रो एक लेजर अकाउंट है। तुम उसका क्लोज़िंग बैलेंस या तो डेबिट कॉलम में लिखते हो या क्रेडिट कॉलम में — कभी दोनों में नहीं।

  • एसेट्स (कैश, बैंक, डेटर्स, फ़र्नीचर, स्टॉक) → डेबिट कॉलम
  • ख़र्चे (पर्चेज़ेज़, रेंट, तनख़्वाह, इलेक्ट्रिसिटी) → डेबिट कॉलम
  • ड्रॉइंग्स → डेबिट कॉलम
  • लायबिलिटीज़ (क्रेडिटर्स, लोन्स) → क्रेडिट कॉलम
  • आमदनी (सेल्स, कमीशन, इंटरेस्ट रिसीव्ड) → क्रेडिट कॉलम
  • कैपिटल → क्रेडिट कॉलम

ट्रायल बैलेंस फ़ॉर्मेट


मीरा का पहला ट्रायल बैलेंस

आओ उन लेजर अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं जो मीरा ने 15 July के ट्रांज़ैक्शन्स से बनाए। उसने हर अकाउंट बैलेंस किया और ये क्लोज़िंग बैलेंसेज़ निकाले:

अकाउंटप्रकारक्लोज़िंग बैलेंसकौन सा कॉलम?
कैशएसेट4,300डेबिट
SBI बैंकएसेट5,000डेबिट
जोशी जीडेटर (एसेट)3,500डेबिट
पर्चेज़ेज़ख़र्चा20,000डेबिट
तनख़्वाहख़र्चा4,000डेबिट
रेंटख़र्चा5,000डेबिट
इलेक्ट्रिसिटी ख़र्चाख़र्चा1,200डेबिट
ड्रॉइंग्सड्रॉइंग्स2,000डेबिट
सेल्सआमदनी9,500क्रेडिट
डिमरी जीडेटर (एसेट)0— (पूरा सेटल हो गया)
बिश्त ट्रेडर्सक्रेडिटर (लायबिलिटी)8,000क्रेडिट
कैपिटल (ओपनिंग)कैपिटल27,500क्रेडिट

रुको — Rs. 27,500 की कैपिटल कहाँ से आई? ये रावत आंटी की ओपनिंग कैपिटल है। ये बिज़नेस में मालिक के निवेश को दर्शाती है। अवधि की शुरुआत में, बिज़नेस के पास Rs. 25,000 कैश और Rs. 2,500 डिमरी जी से मिलने वाला (रिसीवेबल) था। कुल Rs. 27,500, जो मालिक की इक्विटी है।

अब मीरा ट्रायल बैलेंस लिखती है:


रावत जनरल स्टोर का ट्रायल बैलेंस — 15 July 2025

क्र.सं.अकाउंट का नामडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
1Cash Account4,300
2SBI Bank Account5,000
3Joshi Ji (डेटर)3,500
4Purchases Account20,000
5Salary Account4,000
6Rent Account5,000
7Electricity Expense Account1,200
8Drawings Account2,000
9Sales Account9,500
10Bisht Traders (क्रेडिटर)8,000
11Capital Account27,500
कुल (Total)45,00045,000

मीरा कॉलम्स जोड़ती है:

  • डेबिट कुल: 4,300 + 5,000 + 3,500 + 20,000 + 4,000 + 5,000 + 1,200 + 2,000 = 45,000
  • क्रेडिट कुल: 9,500 + 8,000 + 27,500 = 45,000

मिल गए!

मीरा लंबी साँस छोड़ती है। "बैलेंस हो गया!"

शर्मा सर मुस्कुराते हैं। "अच्छा। इसका मतलब तुम्हारी जर्नल एंट्रीज़ सही थीं, पोस्टिंग सही थी, और मिलान सही थी। ट्रायल बैलेंस इसकी पुष्टि करता है।"


ट्रायल बैलेंस क्या साबित करता है?

ट्रायल बैलेंस अरिथमेटिकल एक्यूरेसी (गणितीय शुद्धता) साबित करता है। ये पुष्टि करता है कि:

  1. जर्नल की हर डेबिट एंट्री सही लेजर अकाउंट की डेबिट साइड पर पोस्ट हुई।
  2. हर क्रेडिट एंट्री क्रेडिट साइड पर पोस्ट हुई।
  3. अकाउंट्स सही बैलेंस हुए।
  4. कोई एंट्री सिर्फ एक साइड पर पोस्ट नहीं हुई (जो बैलेंस बिगाड़ देती)।

सीधे शब्दों में: मैथ सही है।


ट्रायल बैलेंस क्या साबित नहीं करता

ये बहुत ज़रूरी बात है। शर्मा सर मीरा को ये दो बार लिखवाते हैं।

"ट्रायल बैलेंस बिल्कुल सही नहीं है, मीरा। कुछ गलतियाँ ऐसी हैं जो ये पकड़ नहीं सकता। ट्रायल बैलेंस मैच होने पर भी, तुम्हारे बुक्स में गलतियाँ हो सकती हैं।"

ये हैं वो गलतियाँ जो ट्रायल बैलेंस मैच होने पर भी छुपी रह सकती हैं:

1. लोप की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ ओमिशन)

कोई ट्रांज़ैक्शन पूरी तरह भूल गए — जर्नल में रिकॉर्ड ही नहीं किया।

उदाहरण: रावत आंटी ने दुकान की सफ़ाई के लिए Rs. 300 दिए लेकिन मीरा दर्ज करना भूल गई। चूँकि कहीं भी एंट्री नहीं हुई — न डेबिट, न क्रेडिट — ट्रायल बैलेंस अभी भी बैलेंस करता है। लेकिन बुक्स गलत हैं।

2. आयोग की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ कमीशन)

एंट्री सही टाइप के अकाउंट में लेकिन गलत व्यक्ति के अकाउंट में हो गई।

उदाहरण: मीरा को डिमरी जी से Rs. 2,500 मिले लेकिन उसने गलती से जोशी जी के अकाउंट में लिख दिया। दोनों डेटर अकाउंट्स हैं। ट्रायल बैलेंस अभी भी बैलेंस करता है। लेकिन डिमरी जी के रिकॉर्ड गलत हैं, और जोशी जी के रिकॉर्ड गलत हैं।

3. सिद्धांत की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ प्रिंसिपल)

एंट्री गलत टाइप के अकाउंट में पोस्ट हो गई।

उदाहरण: रावत आंटी ने Rs. 3,000 की नई लकड़ी की अलमारी खरीदी। ये फ़र्नीचर है — एसेट। लेकिन मीरा ने इसे "पर्चेज़ेज़" में दर्ज कर दिया। ट्रायल बैलेंस अभी भी बैलेंस करता है (दोनों डेबिट एंट्रीज़ हैं)। लेकिन पर्चेज़ेज़ ज़्यादा दिख रहा है, और फ़र्नीचर गायब है।

4. प्रतिपूरक त्रुटि (कम्पेन्सेटिंग त्रुटियाँ)

दो अलग-अलग गलतियाँ एक-दूसरे को कैंसल कर देती हैं।

उदाहरण: मीरा ने Rent A/c Rs. 500 ज़्यादा डेबिट किया, और अलग से Sales A/c Rs. 500 ज़्यादा क्रेडिट किया। दोनों गलतियाँ कैंसल हो गईं। ट्रायल बैलेंस अभी भी बैलेंस करता है। लेकिन रेंट और सेल्स दोनों गलत हैं।

5. मूल प्रविष्टि की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ ओरिजिनल एंट्री)

गलत रकम डेबिट और क्रेडिट दोनों में इस्तेमाल की गई।

उदाहरण: रावत आंटी ने बिजली के लिए Rs. 1,200 दिए, लेकिन मीरा ने डेबिट और क्रेडिट दोनों में Rs. 1,400 लिखा। ट्रायल बैलेंस बैलेंस करता है (Rs. 1,400 = Rs. 1,400)। लेकिन असली रकम गलत है।

6. उलटी प्रविष्टि की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ रिवर्सल)

सही अकाउंट्स इस्तेमाल हुए लेकिन गलत साइड्स पर।

उदाहरण: मीरा ने कैश डेबिट किया और सेल्स क्रेडिट किया (सही)। लेकिन अगली एंट्री में, उसने सेल्स डेबिट किया और कैश क्रेडिट किया (उलटा)। कुल्स अभी भी बैलेंस कर सकते हैं, लेकिन अलग-अलग एंट्रीज़ गलत हैं।

त्रुटि का प्रकारक्या गलत हुआTB अभी भी बैलेंस करता है?
ओमिशन (लोप)ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड ही नहीं हुआहाँ
कमीशन (आयोग)गलत व्यक्ति, सही टाइपहाँ
प्रिंसिपल (सिद्धांत)गलत टाइप का अकाउंटहाँ
कम्पेन्सेटिंग (प्रतिपूरक)दो गलतियाँ कैंसल हो गईंहाँ
ओरिजिनल एंट्री (मूल प्रविष्टि)दोनों साइड्स पर गलत रकमहाँ
रिवर्सल (उलटी प्रविष्टि)सही अकाउंट्स, गलत साइड्सहाँ

शर्मा सर कहते हैं:

"इसीलिए ट्रायल बैलेंस पहला चेक है, आखिरी चेक नहीं। ऐसे सोचो जैसे मेडिकल टेस्ट। अगर ब्लड प्रेशर सामान्य है, तो इसका मतलब ये नहीं कि तुम पूरी तरह हेल्दी हो। लेकिन अगर ब्लड प्रेशर एब्सामान्य है, तो ज़रूर कुछ गड़बड़ है।"


जब ट्रायल बैलेंस मैच नहीं करता

अब बात करते हैं कि क्या होता है जब दोनों कॉलम्स एक नंबर नहीं दिखाते। इसका मतलब है कोई त्रुटि है। यहाँ उसे ढूँढने का तरीका है।

चरण 1: कॉलम्स दोबारा जोड़ो

सबसे आम गलती अरिथमेटिक त्रुटि होती है। डेबिट कॉलम दोबारा जोड़ो। क्रेडिट कॉलम दोबारा जोड़ो। गणनार इस्तेमाल करो अगर ज़रूरत हो।

चरण 2: सटीक अंतर निकालो

बड़े कुल में से छोटा घटाओ। ये अंतर तुम्हें क्लूज़ देता है।

चरण 3: अंतर से त्रुटि ढूँढो

शर्मा सर मीरा को तीन ट्रिक्स सिखाते हैं:

ट्रिक 1: क्या अंतर 2 से भाग हो सकता है?

अगर हाँ, तो इसे 2 से भाग करो। उस रकम को ढूँढो। हो सकता है तुमने कोई एंट्री गलत साइड पर पोस्ट कर दी हो।

उदाहरण: डेबिट कुल Rs. 47,000 है और क्रेडिट कुल Rs. 45,000। अंतर = Rs. 2,000। 2,000 का आधा = Rs. 1,000। Rs. 1,000 की एंट्री ढूँढो। हो सकता है तुमने इसे डेबिट साइड पर डाल दिया जो क्रेडिट साइड पर होनी चाहिए थी (या उल्टा)। इससे त्रुटि डबल हो जाती है — इसीलिए अंतर अमाउंट से दुगुना है।

ट्रिक 2: क्या अंतर 9 से भाग हो सकता है?

अगर हाँ, तो हो सकता है ट्रांसपोज़िशन त्रुटि हो — तुमने दो डिजिट्स उलटे लिख दिए।

उदाहरण: तुमने Rs. 4,500 की जगह Rs. 5,400 लिखा। अंतर = 5,400 - 4,500 = 900। और 900 / 9 = 100। ये ट्रांसपोज़िशन त्रुटि पुष्टि करता है। ऐसी एंट्रीज़ ढूँढो जहाँ डिजिट्स स्वैप हो सकते हैं।

और ट्रांसपोज़िशन उदाहरण:

  • 18 की जगह 81: अंतर = 63, और 63 / 9 = 7
  • 2,300 की जगह 3,200: अंतर = 900, और 900 / 9 = 100

ट्रिक 3: क्या अंतर किसी एक एंट्री की इग्ज़ैक्ट अमाउंट है?

अगर हाँ, तो हो सकता है तुम उस एंट्री को पूरी तरह पोस्ट करना भूल गए (सिर्फ डेबिट पोस्ट किया लेकिन क्रेडिट नहीं, या उल्टा)।

उदाहरण: अंतर ठीक Rs. 5,000 है। चेक करो कि Rs. 5,000 की कोई जर्नल एंट्री है जहाँ एक साइड पोस्ट नहीं हुई।

चरण 4: लेजर बैलेंसेज़ चेक करो

हर लेजर अकाउंट सही बैलेंस हुआ या नहीं, ये चेक करो। एक अकाउंट में एडिशन ग़लती पूरे ट्रायल बैलेंस को गड़बड़ कर सकती है।

चरण 5: जर्नल चेक करो

वापस जाओ और वेरिफ़ाई करो कि हर जर्नल एंट्री में डेबिट्स और क्रेडिट्स बराबर हैं।


अभ्यास सीनारियो: त्रुटि ढूँढना

नेगी भैया मीरा को टेस्ट देते हैं। वो उसे एक ट्रायल बैलेंस देते हैं जो मैच नहीं करता:

क्र.सं.अकाउंट का नामडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
1Cash Account8,500
2Capital Account30,000
3Purchases Account15,000
4Sales Account12,000
5Rent Account3,000
6Furniture Account10,000
7क्रेडिटर्स3,500
8डेटर्स7,200
9Salary Account2,700
कुल (Total)46,40045,500

अंतर = Rs. 46,400 - Rs. 45,500 = Rs. 900

क्या 900, 9 से भाग हो सकता है? हाँ! 900 / 9 = 100।

ये ट्रांसपोज़िशन त्रुटि सजेस्ट करता है। मीरा हर अमाउंट को लेजर से मैच करती है। वो Sales Account चेक करती है। लेजर बैलेंस Rs. 12,000 दिखता है। लेकिन जब वो क्रेडिट एंट्रीज़ दोबारा जोड़ती है: Rs. 1,800 + Rs. 3,500 + Rs. 4,200 + Rs. 3,400 = Rs. 12,900। Rs. 12,000 नहीं! किसी ने Rs. 12,900 की जगह Rs. 12,000 लिख दिया। अंतर Rs. 900 है। और 900 / 9 = 100। क्लासिक ट्रांसपोज़िशन त्रुटि — डिजिट्स रिअरेंज हो गए।

सेल्स को Rs. 12,900 करेक्ट करने पर:

  • डेबिट कुल: Rs. 46,400
  • क्रेडिट कुल: Rs. 30,000 + Rs. 12,900 + Rs. 3,500 = Rs. 46,400

अब मैच हो गया।

नेगी भैया मुस्कुराते हैं। "ढूँढ लिया। अच्छा डिटेक्टिव काम किया।"


ट्रायल बैलेंस कब बनाते हैं

व्यवहार में, बिज़नेसेज़ ट्रायल बैलेंस बनाते हैं:

  • हर महीने — चेक करने के लिए कि महीने की एंट्रीज़ सही हैं
  • हर तिमाही — ख़ासकर GST रिटर्न्स फ़ाइल करने से पहले
  • हर साल — फ़ाइनल अकाउंट्स (मुनाफ़ा & घाटा और बैलेंस शीट) बनाने से पहले

रावत आंटी की छोटी दुकान के लिए, मंथली ट्रायल बैलेंस काफ़ी है। बिश्त ट्रेडर्स के लिए, जहाँ ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन्स होते हैं, शर्मा सर क्वार्टरली चेक करना पसंद करते हैं।


सस्पेंस अकाउंट — एक अस्थायी उपाय

अगर त्रुटि तुरंत न मिले तो? शर्मा सर मीरा को एक व्यावहारिक ट्रिक सिखाते हैं:

"अगर ट्रायल बैलेंस मैच नहीं करता और तुमने वजहेबल टाइम ढूँढने में लगा दिया, तो एक टेम्पररी अकाउंट खोलो जिसे सस्पेंस अकाउंट कहते हैं। अंतर वहाँ डाल दो। इससे ट्रायल बैलेंस अभी के लिए बैलेंस हो जाता है। लेकिन याद रखो — सस्पेंस अकाउंट पट्टी जैसा है, इलाज नहीं। तुम्हें त्रुटि ढूँढकर ठीक करना ही होगा।"

उदाहरण: डेबिट कुल = Rs. 46,400, क्रेडिट कुल = Rs. 45,500। अंतर = Rs. 900। क्रेडिट्स Rs. 900 कम हैं।

क्र.सं.अकाउंट का नामडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
...(बाकी सारे अकाउंट्स)......
10सस्पेंस अकाउंट900
कुल (Total)46,40046,400

बाद में, जब त्रुटि मिल जाए, सस्पेंस अकाउंट बंद कर दो। मीरा के केस में, जब सेल्स त्रुटि मिला, तो सस्पेंस अकाउंट की ज़रूरत नहीं रही।


ट्रायल बैलेंस — एक विज़ुअल समरी

यहाँ देखो ट्रायल बैलेंस अकाउंटिंग साइकल में कहाँ फ़िट होता है:

  वाउचर  →  जर्नल  →  लेजर  →  ट्रायल बैलेंस
  (सबूत)    (रिकॉर्ड)   (व्यवस्थित)   (चेक)
  1. वाउचर — असली सबूत कि कुछ हुआ।
  2. जर्नल — ट्रांज़ैक्शन को क्रम से दर्ज करो।
  3. लेजर — अकाउंट-वाइज़ व्यवस्थित करो।
  4. ट्रायल बैलेंस — चेक करो कि सब जुड़ रहा है।

और ट्रायल बैलेंस के बाद? अगला चरण है फ़ाइनल अकाउंट्स बनाना — मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट और बैलेंस शीट। ये अगले चैप्टर में आता है।

वाउचर से ट्रायल बैलेंस तक अकाउंटिंग साइकल


क्विक रीकैप (संक्षिप्त सारांश)

  • ट्रायल बैलेंस सारे लेजर अकाउंट बैलेंसेज़ की सूची है दो कॉलम्स में: डेबिट और क्रेडिट।
  • अगर कुल डेबिट्स = कुल क्रेडिट्स, तो बुक्स अरिथमेटिकली सही हैं।
  • एसेट्स, ख़र्चे, और ड्रॉइंग्स डेबिट कॉलम में जाते हैं।
  • लायबिलिटीज़, आमदनी, और कैपिटल क्रेडिट कॉलम में जाते हैं।
  • ट्रायल बैलेंस अरिथमेटिकल एक्यूरेसी साबित करता है।
  • ये साबित नहीं करता कि सारी एंट्रीज़ सही हैं — ये ओमिशन, कमीशन, प्रिंसिपल, कम्पेन्सेशन, ओरिजिनल एंट्री, या रिवर्सल की त्रुटियाँ नहीं पकड़ सकता।
  • अगर ट्रायल बैलेंस मैच नहीं करता, तो चेक करो: 2 से भाग होता है (गलत साइड), 9 से भाग होता है (ट्रांसपोज़िशन), या इग्ज़ैक्ट अमाउंट (मिस्ड पोस्टिंग)।
  • सस्पेंस अकाउंट अनसुलझे अंतर का अस्थायी उपाय है।
  • हमेशा असली त्रुटि ढूँढो और ठीक करो। सस्पेंस अकाउंट समाधान नहीं है — ये बुकमार्क है।

अभ्यास अभ्यास — खुद करो

पार्ट A: ट्रायल बैलेंस बनाओ

पिछले चैप्टर के अभ्यास अभ्यास में बनाए गए लेजर अकाउंट्स (20 July 2025 के 8 ट्रांज़ैक्शन्स) का इस्तेमाल करके ट्रायल बैलेंस बनाओ। हर अकाउंट और उसका बैलेंस लिस्ट करो।

तुम्हारे ट्रायल बैलेंस में होने चाहिए:

  • Cash Account
  • SBI Bank Account
  • Capital Account
  • Furniture Account
  • Purchases Account
  • Sales Account
  • Bisht Traders Account
  • Dimri Ji Account
  • Miscellaneous Expense Account

क्या कुल्स मैच हो रहे हैं?

पार्ट B: त्रुटि ढूँढो

नीचे दिए गए ट्रायल बैलेंस में त्रुटि है। ढूँढो।

क्र.सं.अकाउंट का नामडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
1कैश12,000
2बैंक25,000
3कैपिटल50,000
4पर्चेज़ेज़18,000
5सेल्स16,200
6रेंट4,000
7तनख़्वाह5,400
8क्रेडिटर्स6,300
9डेटर्स8,100
कुल (Total)72,50072,500

ये बैलेंस कर रहा है! लेकिन इसमें त्रुटि छुपी है। शर्मा सर बताते हैं कि असल तनख़्वाह Rs. 4,500 दी गई थी, न कि Rs. 5,400। और असल डेटर्स बैलेंस Rs. 8,100 है।

ये किस तरह की त्रुटि है? (हिंट: 5,400 - 4,500 = 900। क्या 900, 9 से भाग होता है?)


मज़ेदार तथ्य (फ़न फ़ैक्ट)

ट्रायल बैलेंस इसलिए बनाया गया क्योंकि इंसान गलतियाँ करते हैं। सबसे सावधान अकाउंटेंट भी घंटों नंबर्स लिखने के बाद चूक सकता है। कंप्यूटर्स से पहले, भारत में अकाउंटेंट्स लालटेन की रोशनी में ट्रायल बैलेंस बनाते थे, ध्यान से लंबी-लंबी कॉलम्स हाथ से जोड़ते हुए। अगर बैलेंस मैच नहीं होता, तो कभी-कभी देर रात तक काम करते, एंट्री-बाय-एंट्री चेक करते। आज, अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर एक क्लिक में ट्रायल बैलेंस बना देता है। लेकिन ये समझना कि ये कैसे काम करता है — जैसा मीरा अब समझती है — इसका मतलब है तुम वो समस्याएँ पकड़ सकते हो जो सॉफ़्टवेयर भी मिस कर सकता है।


अगले चैप्टर में, मीरा ट्रायल बैलेंस लेकर फ़ाइनल अकाउंट्स बनाएगी — मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट और बैलेंस शीट। यहीं पर सारे नंबर्स मिलकर बड़ा सवाल जवाब देते हैं: "क्या बिज़नेस पैसा कमा रहा है?"

फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स — पूरी तस्वीर

March का आखिरी दिन है। फ़ाइनेंशियल ईयर खत्म हो गया। रावत आंटी शर्मा सर के दफ़्तर में बैठी हैं, थोड़ी नर्वस दिख रही हैं। "शर्मा सर, मेरे पति बार-बार पूछ रहे हैं — दुकान से पैसा बन रहा है या बस भाग-दौड़ हो रही है बेकार?" शर्मा सर मीरा की तरफ़ मुड़ते हैं। "ये वो पल है जहाँ सब कुछ एक साथ आता है। पूरे साल तुमने वाउचर बनाए, जर्नल एंट्रीज़ लिखीं, लेजर में पोस्ट किया, ट्रायल बैलेंस बनाए। अब हम वो एकमात्र सवाल जवाब देते हैं जो सच में मायने रखता है — क्या बिज़नेस पैसा कमा रहा है, और कितना हेल्दी है?" वो डेस्क पर तीन खाली कागज़ रखते हैं। "आज, मीरा, तुम तीन स्टेटमेंट्स बनाओगी: ट्रेडिंग अकाउंट, मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट, और बैलेंस शीट।"


फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स क्यों ज़रूरी हैं

सोचो तुम बागेश्वर के पास पहाड़ियों में पूरा दिन चल रहे हो। थक गए हो। अपने कदम गिन रहे थे, रास्ता देख रहे थे, निशान ट्रैक कर रहे थे। लेकिन एक पॉइंट पर, तुम रुकते हो और चारों तरफ़ देखते हो। पूछते हो: "कितनी दूर आ गए? अभी कहाँ हूँ?"

फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स वो रुककर चारों तरफ़ देखने का पल हैं।

पूरे साल, जर्नल हर कदम दर्ज करती है। लेजर कदमों को रास्ते के हिसाब से व्यवस्थित करता है। ट्रायल बैलेंस काउंट चेक करता है। लेकिन फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स तुम्हें उन सारे कदमों का नतीजा बताते हैं।

ये दो बड़े सवालों के जवाब देते हैं:

  1. क्या बिज़नेस ने मुनाफ़ा कमाया या घाटा हुआ? → इसका जवाब ट्रेडिंग अकाउंट और मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट देते हैं।
  2. बिज़नेस अभी क्या ओन करता है और क्या देनदार है? → इसका जवाब बैलेंस शीट देती है।

रावत आंटी को जर्नल एंट्रीज़ और लेजर पोस्टिंग्स से कोई मतलब नहीं। उन्हें इन दो सवालों से मतलब है। और ऐसे ही हर बिज़नेस ओनर, बैंक प्रबंधक, टैक्स दफ़्तरर, और निवेशक को।


तीन स्टेटमेंट्स

रावत जनरल स्टोर जैसे छोटे ट्रेडिंग बिज़नेस के लिए, हम साल के अंत में तीन स्टेटमेंट्स बनाते हैं:

स्टेटमेंटक्या दिखाता है
ट्रेडिंग अकाउंटग्रॉस मुनाफ़ा (या घाटा) — क्या दुकान ने सामान खरीदने-बेचने में पैसा कमाया?
मुनाफ़ा & घाटा अकाउंटनेट मुनाफ़ा (या घाटा) — सारे खर्चे चुकाने के बाद, कुछ बचा?
बैलेंस शीटफ़ाइनेंशियल पोज़ीशन — दुकान क्या ओन करती है बनाम क्या देनदार है।

ट्रेडिंग अकाउंट मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट में फ़ीड करता है। मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट बैलेंस शीट में फ़ीड करता है। ये एक चेन की कड़ियों की तरह जुड़े हैं।


पार्ट 1: ट्रेडिंग अकाउंट

ट्रेडिंग अकाउंट एक सीधा सवाल जवाब देता है: क्या दुकान ने सामान उसकी लागत से ज़्यादा में बेचकर पैसा कमाया?

अगर रावत आंटी Rs. 40 प्रति kg चावल खरीदती हैं और Rs. 50 प्रति kg बेचती हैं, तो Rs. 10 प्रति kg कमाती हैं। वो Rs. 10 ग्रॉस मुनाफ़ा (सकल लाभ) कहलाता है।

फ़ॉर्मूला

ग्रॉस मुनाफ़ा = नेट सेल्स - लागत ऑफ़ गुड्स सोल्ड (COGS)

आओ हर हिस्सा समझते हैं।

नेट सेल्स = कुल सेल्स - सेल्स रिटर्न्स (ग्राहकों द्वारा लौटाया गया सामान)

लागत ऑफ़ गुड्स सोल्ड (COGS) = ओपनिंग स्टॉक + पर्चेज़ेज़ + सीधा ख़र्चे - क्लोज़िंग स्टॉक

  • ओपनिंग स्टॉक = साल की शुरुआत में दुकान में रखा सामान।
  • पर्चेज़ेज़ = साल भर में खरीदा गया सामान (पर्चेज़ रिटर्न्स घटाकर)।
  • सीधा ख़र्चे = सामान को बिक्री के लिए तैयार करने से जुड़े खर्चे (ढुलाई, कैरिज, लदान/उतारी)।
  • क्लोज़िंग स्टॉक = साल के अंत में बिना बिका सामान।

ऐसे सोचो: तुम्हारे पास शुरू में कुछ सामान था, तुमने और खरीदा, उसे दुकान तक लाने में पैसा खर्च किया। ये तुम्हारी कुल लागत है। लेकिन सब कुछ बिका नहीं — कुछ सामान अभी भी अलमारियों पर रखा है। तो क्लोज़िंग स्टॉक घटा दो।

ट्रेडिंग अकाउंट फ़ॉर्मेट

         रावत जनरल स्टोर का ट्रेडिंग अकाउंट
            31 March 2026 को समाप्त वर्ष के लिए

 ─────────────────────────────────────────────────────────
    Dr. (खर्चे/लागत)          |   Cr. (आय/राजस्व)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 विवरण             | राशि(Rs)| विवरण            | राशि(Rs)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 To Opening Stock   | 45,000 | By Sales          |4,80,000
 To Purchases       |2,85,000| Less: Returns     |  (5,000)
 Less: Returns      | (3,000)| Net Sales         |4,75,000
 Net Purchases      |2,82,000|                   |
 To Carriage Inward |  8,000 | By Closing Stock  | 52,000
 To Freight         |  5,000 |                   |
                    |        |                   |
 To Gross Profit    |        |                   |
   (P&L Account    |        |                   |
    में transfer)   |1,87,000|                   |
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Total              |5,27,000| Total             |5,27,000
 ─────────────────────────────────────────────────────────

नंबर्स पढ़ते हैं:

रावत आंटी ने साल की शुरुआत Rs. 45,000 के सामान से की (ओपनिंग स्टॉक)। साल भर में Rs. 2,85,000 का सामान खरीदा और Rs. 3,000 का वापस किया (खराब सामान)। सामान दुकान तक लाने में Rs. 8,000 कैरिज (ढुलाई) और Rs. 5,000 फ़्रेट में खर्च किए।

कुल लागत साइड = Rs. 45,000 + Rs. 2,82,000 + Rs. 8,000 + Rs. 5,000 = Rs. 3,40,000।

कुल सेल्स Rs. 4,80,000 थीं, माइनस Rs. 5,000 सेल्स रिटर्न्स = Rs. 4,75,000 नेट सेल्स। साल के अंत में, Rs. 52,000 का सामान अभी बिना बिका था (क्लोज़िंग स्टॉक)।

कुल आमदनी साइड (ग्रॉस मुनाफ़ा से पहले) = Rs. 4,75,000 + Rs. 52,000 = Rs. 5,27,000।

ग्रॉस मुनाफ़ा = Rs. 5,27,000 - Rs. 3,40,000 = Rs. 1,87,000.

इसका मतलब रावत आंटी ने सिर्फ सामान खरीदने-बेचने से Rs. 1,87,000 कमाए — किराया, तनख़्वाह, बिजली, और बाकी खर्चे चुकाने से पहले।

मीरा रावत आंटी को आसान शब्दों में समझाती है:

"आंटी, हर Rs. 100 के बेचे गए सामान में, लगभग Rs. 60 सामान की लागत थी, और Rs. 40 तुम्हारा मार्जिन था। वो मार्जिन ही ग्रॉस मुनाफ़ा है।"


पार्ट 2: मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट

ग्रॉस मुनाफ़ा आखिरी जवाब नहीं है। रावत आंटी को अभी किराया, तनख़्वाह, बिजली, और बहुत सारे खर्चे देने हैं। मुनाफ़ा & घाटा (P&L) अकाउंट दिखाता है कि सारे खर्चों के बाद क्या बचा।

फ़ॉर्मूला

नेट मुनाफ़ा = ग्रॉस मुनाफ़ा + अदर आमदनी - सारे इनसीधा ख़र्चे

  • ग्रॉस मुनाफ़ा ट्रेडिंग अकाउंट से आता है।
  • अदर आमदनी = सामान बेचने के अलावा की आय (बैंक डिपॉज़िट्स पर इंटरेस्ट, कमीशन मिला, आदि)।
  • इनसीधा ख़र्चे = सामान से सीधे जुड़े नहीं खर्चे (किराया, तनख़्वाह, बिजली, स्टेशनरी, इंश्योरेंस, डेप्रिसिएशन, आदि)।

मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट फ़ॉर्मेट

      रावत जनरल स्टोर का मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट
           31 March 2026 को समाप्त वर्ष के लिए

 ─────────────────────────────────────────────────────────
    Dr. (खर्चे)                 |   Cr. (आय)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 विवरण              | राशि(Rs)| विवरण            | राशि(Rs)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 To Salary            | 48,000 | By Gross Profit   |1,87,000
 To Rent              | 60,000 |   (ट्रेडिंग से)    |
 To Electricity       | 14,400 | By Interest on    |
 To Telephone         |  3,600 |   Bank Deposit    |  2,400
 To Stationery &      |        | By Commission     |
   Printing           |  2,000 |   Received        |  1,500
 To Repair &          |        |                   |
   Maintenance        |  5,000 |                   |
 To Insurance         |  3,000 |                   |
 To Depreciation on   |        |                   |
   Furniture          |  2,500 |                   |
 To Miscellaneous     |        |                   |
   Expenses           |  4,000 |                   |
                      |        |                   |
 To Net Profit        |        |                   |
   (Capital Account  |        |                   |
    में transfer)     | 48,400 |                   |
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Total                |1,90,900| Total             |1,90,900
 ─────────────────────────────────────────────────────────

नंबर्स पढ़ते हैं:

कुल इनसीधा ख़र्चे = Rs. 48,000 + Rs. 60,000 + Rs. 14,400 + Rs. 3,600 + Rs. 2,000 + Rs. 5,000 + Rs. 3,000 + Rs. 2,500 + Rs. 4,000 = Rs. 1,42,500।

कुल आमदनी = ग्रॉस मुनाफ़ा Rs. 1,87,000 + इंटरेस्ट Rs. 2,400 + कमीशन Rs. 1,500 = Rs. 1,90,900।

नेट मुनाफ़ा = Rs. 1,90,900 - Rs. 1,42,500 = Rs. 48,400.

मीरा रावत आंटी से कहती है:

"आंटी, सबको पे करने के बाद — कमला की तनख़्वाह, मकान मालिक का किराया, इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, सब कुछ — तुम्हारी दुकान ने इस साल Rs. 48,400 का नेट मुनाफ़ा कमाया।"

रावत आंटी खुश हो जाती हैं। "तो हम पैसा कमा रहे हैं! बस भाग-दौड़ नहीं कर रहे बेकार।"

शर्मा सर जोड़ते हैं: "Rs. 48,400 साल में। मतलब लगभग Rs. 4,000 हर महीने मुनाफ़ा। एक छोटी किराना दुकान के लिए ठीक-ठाक है। लेकिन नंबर्स ध्यान से देखो — अकेला रेंट Rs. 60,000 है। ये तुम्हारा सबसे बड़ा खर्चा है। अगर कम किराये पर नेगोशिएट कर लो, तो मुनाफ़ा एकदम बढ़ जाएगा।"

यही फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की ताकत है। ये सिर्फ मुनाफ़ा नहीं दिखाते। ये दिखाते हैं पैसा कहाँ जा रहा है


हर ख़र्चा का मतलब

मीरा रावत आंटी को हर लाइन आइटम समझाती है:

खर्चाराशिइसका मतलब
तनख़्वाह48,000कमला देवी की तनख़्वाह: Rs. 4,000 x 12 महीने
रेंट60,000दुकान किराया: Rs. 5,000 x 12 महीने
इलेक्ट्रिसिटी14,400बिजली बिल: लगभग Rs. 1,200/महीना
टेलीफ़ोन3,600दुकान का फ़ोन/इंटरनेट: Rs. 300/महीना
स्टेशनरी2,000बिल, नोटबुक्स, पेन्स, रसीद बुक्स
रिपेयर्स5,000दुकान का शटर ठीक करवाना, प्लंबिंग रिपेयर
इंश्योरेंस3,000दुकान का इंश्योरेंस (आग और चोरी)
डेप्रिसिएशन2,500फ़र्नीचर और अलमारियों की वैल्यू समय के साथ कम होना
मिसलेनियस4,000छोटे खर्चे जो किसी और श्रेणी में फ़िट नहीं होते

पार्ट 3: बैलेंस शीट

P&L अकाउंट साल के बारे में बताता है — कितना पैसा आया और गया। बैलेंस शीट एक पल के बारे में बताती है — इस इग्ज़ैक्ट तारीख को बिज़नेस क्या ओन करता है और क्या देनदार है?

अकाउंटिंग इक्वेशन

बैलेंस शीट एक इक्वेशन पर बनी है:

एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल (ओनर्स इक्विटी)

ये इक्वेशन हमेशा सही होनी चाहिए। ये ऐसे कह रहा है: "बिज़नेस जो कुछ भी ओन करता है, वो या तो उधार लेकर (लायबिलिटीज़) या मालिक के निवेश (कैपिटल) से फ़ंडेड है।"

ऐसे सोचो। रावत आंटी की दुकान में अलमारियाँ, स्टॉक, कैश, और बैंक बैलेंस है। इस सबके लिए पैसा कहाँ से आया? या तो रावत आंटी खुद से (कैपिटल), या आपूर्तिकर्ता से जिन्हें अभी पेमेंट नहीं हुई (क्रेडिटर्स/लायबिलिटीज़)।

बैलेंस शीट फ़ॉर्मेट

         रावत जनरल स्टोर की बैलेंस शीट
               31 March 2026 को

 ─────────────────────────────────────────────────────────
   देनदारियाँ और पूँजी          |        संपत्तियाँ
   (Liabilities & Capital)     |        (Assets)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 विवरण             | राशि(Rs)| विवरण             | राशि(Rs)
 ─────────────────────────────────────────────────────────
                    |        |                    |
 Capital Account    |        | Fixed Assets       |
   Opening Balance  |2,00,000|   Furniture        | 25,000
   Add: Net Profit  |  48,400|   Less: Depreciation| (2,500)
   Less: Drawings   | (36,000)|  Net Furniture    | 22,500
   Closing Capital  |2,12,400|                    |
                    |        | Current Assets     |
 Current Liabilities|        |   Closing Stock    | 52,000
   Sundry Creditors | 35,000 |   Sundry Debtors  | 28,000
   Outstanding      |        |   Cash in Hand     | 15,400
     Expenses       |  4,500 |   Cash at Bank     | 78,000
                    |        |   Prepaid Insurance |  1,000
                    |        |   Interest Accrued  |    500
                    |        |                    |
 Loan (Long-term)   |        |                    |
   Bank Loan        | 45,500 |                    |
                    |        |                    |
 ─────────────────────────────────────────────────────────
 Total              |2,97,400| Total              |2,97,400
 ─────────────────────────────────────────────────────────

आओ इसे आसान भाषा में समझते हैं।


बाईं तरफ़: लायबिलिटीज़ और कैपिटल

कैपिटल अकाउंट:

  • रावत आंटी ने साल की शुरुआत Rs. 2,00,000 निवेश से की।
  • दुकान ने Rs. 48,400 नेट मुनाफ़ा कमाया। ये मुनाफ़ा मालिक का है, तो कैपिटल में जुड़ता है।
  • साल भर में, रावत आंटी ने Rs. 36,000 पर्सनल इस्तेमाल के लिए निकाले (ड्रॉइंग्स)। ये कैपिटल से घटता है।
  • क्लोज़िंग कैपिटल = Rs. 2,00,000 + Rs. 48,400 - Rs. 36,000 = Rs. 2,12,400।

करंट लायबिलिटीज़:

  • संड्री क्रेडिटर्स (Rs. 35,000): आपूर्तिकर्ता को बकाया जो उधार खरीदे सामान का है।
  • आउटस्टैंडिंग ख़र्चे (Rs. 4,500): खर्चे जो हो चुके हैं लेकिन अभी पे नहीं हुए (जैसे December का बिजली बिल 31 March तक पे नहीं हुआ)।

बैंक लोन (Rs. 45,500): दुकान सुधारने के लिए बैंक से लिया गया लॉन्ग-टर्म लोन।

कुल लायबिलिटीज़ + कैपिटल = Rs. 2,12,400 + Rs. 35,000 + Rs. 4,500 + Rs. 45,500 = Rs. 2,97,400।


दाईं तरफ़: एसेट्स

फ़िक्स्ड एसेट्स:

  • फ़र्नीचर: मूल लागत Rs. 25,000, माइनस Rs. 2,500 डेप्रिसिएशन = Rs. 22,500 नेट वैल्यू।
  • फ़िक्स्ड एसेट्स वो चीज़ें हैं जो बिज़नेस लंबे समय तक इस्तेमाल करता है — ये बिक्री के लिए नहीं हैं।

करंट एसेट्स:

  • क्लोज़िंग स्टॉक (Rs. 52,000): अलमारियों पर बिना बिका सामान।
  • संड्री डेटर्स (Rs. 28,000): ग्राहकों का बकाया जिन्होंने उधार खरीदा।
  • कैश इन हैंड (Rs. 15,400): दुकान की कैश बॉक्स में नकद।
  • कैश एट बैंक (Rs. 78,000): SBI अकाउंट में बैलेंस।
  • प्रीपेड इंश्योरेंस (Rs. 1,000): अगले साल के लिए अग्रिम दिया गया इंश्योरेंस।
  • इंटरेस्ट एक्रूड (Rs. 500): बैंक डिपॉज़िट पर कमाया गया इंटरेस्ट जो अभी मिला नहीं।

कुल एसेट्स = Rs. 22,500 + Rs. 52,000 + Rs. 28,000 + Rs. 15,400 + Rs. 78,000 + Rs. 1,000 + Rs. 500 = Rs. 2,97,400।

एसेट्स (Rs. 2,97,400) = लायबिलिटीज़ + कैपिटल (Rs. 2,97,400)

इक्वेशन बैलेंस कर रही है!


नंबर्स रावत आंटी को क्या बताते हैं

मीरा रावत आंटी के साथ बैठकर बैलेंस शीट रोज़मर्रा की भाषा में समझाती है:

"आंटी, तुम्हारी दुकान अभी ऐसी दिखती है:"

"तुम्हारी दुकान कुल Rs. 2,97,400 की चीज़ें ओन करती है — फ़र्नीचर, अलमारियों पर सामान, कैश बॉक्स में पैसा, बैंक में पैसा, और ग्राहकों से मिलने वाला बकाया।"

"इसमें से, Rs. 35,000 तुम्हारे आपूर्तिकर्ता को देना है। Rs. 4,500 बिना चुकाए बिलों का है। Rs. 45,500 बैंक लोन है। ये सब दूसरे लोगों का पैसा है जो अभी तुम्हारे बिज़नेस में है।"

"बाकी — Rs. 2,12,400 — तुम्हारा है। ये तुम्हारी कैपिटल है। बिज़नेस में तुम्हारी हिस्सेदारी।"

रावत आंटी सोचती हैं। "तो अगर मैं आज दुकान बंद कर दूँ, सब कुछ बेच दूँ, जिन्हें देना है दे दूँ, तो मेरे पास लगभग Rs. 2,12,400 बचेंगे?"

"मोटे तौर पर, हाँ," मीरा कहती है। "हालाँकि स्टॉक जल्दी बेचने पर Rs. 52,000 से कम मिल सकता है। और कुछ डेटर्स शायद पे न करें। लेकिन बुनियादी आइडिया यही है।"


तीनों स्टेटमेंट्स कैसे जुड़ते हैं

यहाँ फ़्लो है:

  ट्रेडिंग अकाउंट          मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट         बैलेंस शीट
  ───────────────          ─────────────────────         ──────────────
  सेल्स - COGS             ग्रॉस मुनाफ़ा                  नेट मुनाफ़ा
       ↓                   + अदर आमदनी                    ↓
  = ग्रॉस मुनाफ़ा  ────→    - इनसीधा ख़र्चे     कैपिटल अकाउंट
                                ↓                        में जुड़ता है
                           = नेट मुनाफ़ा  ────────→       बैलेंस शीट पर
  1. ट्रेडिंग अकाउंट ग्रॉस मुनाफ़ा देता है।
  2. ग्रॉस मुनाफ़ा मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट में जाता है, जो नेट मुनाफ़ा देता है।
  3. नेट मुनाफ़ा बैलेंस शीट में जाता है, जहाँ मालिक की कैपिटल में जुड़ता है।

ये तीन अलग-अलग रिपोर्ट्स नहीं हैं। ये एक कंटिन्यूअस कहानी है।


ज़रूरी शब्द जो मीरा को जानने चाहिए

शब्दमतलबउदाहरण
ओपनिंग स्टॉकसाल की शुरुआत में उपलब्ध सामान1 April को Rs. 45,000 का किराना
क्लोज़िंग स्टॉकसाल के अंत में बचा सामान31 March को Rs. 52,000 का किराना
संड्री डेटर्सग्राहक जो पैसा देनदार हैंजोशी जी Rs. 3,500 देनदार हैं
संड्री क्रेडिटर्सआपूर्तिकर्ता जिन्हें दुकान पैसा देती हैबिश्त ट्रेडर्स को Rs. 8,000 देना है
डेप्रिसिएशनसमय के साथ एसेट्स की वैल्यू कम होनाफ़र्नीचर हर साल Rs. 2,500 कम
ड्रॉइंग्समालिक पर्सनल इस्तेमाल के लिए पैसा लेता हैरावत आंटी ने Rs. 36,000 निकाले
आउटस्टैंडिंग ख़र्चेबिल जो अभी बाकी हैंDecember का बिजली बिल
प्रीपेड ख़र्चेअग्रिम चुकाए गए बिलअगले साल का इंश्योरेंस
कैरिज इनवर्डसामान लाने का ट्रांसपोर्ट खर्चाहल्द्वानी से ढुलाई

क्विक रीकैप (संक्षिप्त सारांश)

  • ट्रेडिंग अकाउंट दिखाता है ग्रॉस मुनाफ़ा = सेल्स - लागत ऑफ़ गुड्स सोल्ड।
  • लागत ऑफ़ गुड्स सोल्ड = ओपनिंग स्टॉक + नेट पर्चेज़ेज़ + सीधा ख़र्चे - क्लोज़िंग स्टॉक।
  • मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट दिखाता है नेट मुनाफ़ा = ग्रॉस मुनाफ़ा + अदर आमदनी - इनसीधा ख़र्चे।
  • बैलेंस शीट फ़ाइनेंशियल पोज़ीशन दिखाती है: एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल
  • नेट मुनाफ़ा कैपिटल में जुड़ता है बैलेंस शीट पर। ड्रॉइंग्स कैपिटल से घटते हैं।
  • फ़िक्स्ड एसेट्स बिज़नेस में लॉन्ग-टर्म इस्तेमाल होते हैं। करंट एसेट्स बार-बार बदलते हैं।
  • करंट लायबिलिटीज़ एक साल में देनी हैं। लॉन्ग-टर्म लायबिलिटीज़ बाद में।
  • तीनों स्टेटमेंट्स जुड़े हैं — ट्रेडिंग, P&L में फ़ीड करता है, P&L बैलेंस शीट में फ़ीड करता है।
  • ये स्टेटमेंट्स आखिरी सवालों के जवाब देते हैं: "क्या बिज़नेस फ़ायदेमंद है?" और "बिज़नेस की वैल्यू क्या है?"

अभ्यास अभ्यास — खुद करो

एक छोटी दुकान "पहाड़ी प्रोविज़न्स" के लिए ट्रेडिंग अकाउंट, मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट, और बैलेंस शीट बनाओ। 31 March 2026 को समाप्त वर्ष की जानकारी यहाँ है:

दी गई जानकारी:

मदराशि (Rs.)
ओपनिंग स्टॉक30,000
क्लोज़िंग स्टॉक35,000
पर्चेज़ेज़2,00,000
पर्चेज़ रिटर्न्स2,000
सेल्स3,20,000
सेल्स रिटर्न्स3,000
कैरिज इनवर्ड5,000
तनख़्वाह36,000
रेंट48,000
इलेक्ट्रिसिटी12,000
स्टेशनरी1,500
इंश्योरेंस2,400
डेप्रिसिएशन ऑन फ़र्नीचर1,800
इंटरेस्ट ऑन बैंक डिपॉज़िट1,200
फ़र्नीचर (ओरिजिनल लागत)18,000
कैश इन हैंड10,500
कैश एट बैंक45,000
संड्री डेटर्स15,000
संड्री क्रेडिटर्स22,000
कैपिटल (ओपनिंग)1,50,000
ड्रॉइंग्स24,000

चरण:

  1. ट्रेडिंग अकाउंट बनाओ और ग्रॉस मुनाफ़ा निकालो।
  2. मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट बनाओ और नेट मुनाफ़ा निकालो।
  3. बैलेंस शीट बनाओ और वेरिफ़ाई करो कि एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल।

ग्रॉस मुनाफ़ा के लिए हिंट:

  • नेट सेल्स = 3,20,000 - 3,000 = 3,17,000
  • COGS = 30,000 + (2,00,000 - 2,000) + 5,000 - 35,000 = 1,98,000
  • ग्रॉस मुनाफ़ा = 3,17,000 - 1,98,000 = 1,19,000

मज़ेदार तथ्य (फ़न फ़ैक्ट)

भारत में फ़ाइनेंशियल ईयर 1 April से 31 March तक चलता है। लेकिन क्या तुम जानते हो क्यों? जब अंग्रेज़ भारत पर राज करते थे, वो अपना फ़ाइनेंशियल ईयर सिस्टम लेकर आए। लेकिन ब्रिटेन ने बाद में January-December अपना लिया। भारत ने April-March इसलिए रखा क्योंकि ये फ़सल के मौसम से मेल खाता है — रबी की फ़सल March-April के आसपास आती है, जो वो समय था जब व्यापारी और ज़मींदार अपना हिसाब-किताब सेटल करते थे। तो भारतीय फ़ाइनेंशियल ईयर असल में हमारी ज़मीन के कृषि चक्र से जुड़ा है। जब रावत आंटी 31 March को अपने बुक्स बंद करती हैं, तो वो भारत की खेती की लय से जुड़ी एक परंपरा पालन कर रही हैं।


अगले चैप्टर में, मीरा चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स सीखती है — बिज़नेस द्वारा इस्तेमाल होने वाले सारे अकाउंट्स की व्यवस्थित्ड मास्टर लिस्ट। ये सफ़र शुरू करने से पहले नक्शा बनाने जैसा है।

चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स और शेड्यूल III

मीरा ने अब तक वाउचर, जर्नल, लेजर, ट्रायल बैलेंस, और फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स बना लिए हैं। उसे आत्मविश्वास आ गया है। फिर एक सुबह, शर्मा सर उसे एक नई क्लाइंट की फ़ाइल देते हैं — बिश्त ट्रेडर्स, होलसेल मसालों का बिज़नेस। मीरा फ़ाइल खोलती है और उसकी आँखें चौड़ी हो जाती हैं। दर्जनों अलग-अलग अकाउंट्स हैं — CGST इनपुट, SGST आउटपुट, फ़्रेट आउटवर्ड, गोडाउन रेंट, लोडिंग चार्जेज़, ट्रेड छूट, कमीशन पेड, कमीशन रिसीव्ड... "इतने सारे अकाउंट्स कोई कैसे ट्रैक करता है?" वो पूछती है। शर्मा सर मुस्कुराते हैं। "चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स से। ये एक टेबल ऑफ़ कंटेंट्स जैसा है उन सारे अकाउंट्स का जो बिज़नेस कभी भी इस्तेमाल करेगा। कोई भी बुककीपिंग शुरू करने से पहले, पहले ये चार्ट बनाओ। ये तुम्हारा नक्शा है।"


चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स क्या है?

सोचो तुम एक नया घर बना रहे हो। एक ईंट रखने से पहले, तुम्हें एक ब्लूप्रिंट चाहिए — एक प्लान जो हर कमरा, हर दरवाज़ा, हर खिड़की दिखाए।

चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स (COA) तुम्हारे अकाउंटिंग सिस्टम का ब्लूप्रिंट है। ये बिज़नेस द्वारा इस्तेमाल होने वाले हर अकाउंट की एक व्यवस्थित्ड, नंबर्ड सूची है।

COA के बिना, चीज़ें जल्दी गड़बड़ हो जाती हैं। एक व्यक्ति "इलेक्ट्रिसिटी" नाम से अकाउंट बनाता है। दूसरा "इलेक्ट्रिसिटी ख़र्चा" बनाता है। तीसरा "इलेक्ट्रिक बिल पेमेंट" बनाता है। क्या ये एक ही अकाउंट है या तीन अलग-अलग? किसी को पता नहीं। बुक्स कन्फ़्इस्तेमाल्ड हो जाते हैं।

COA के साथ, हर अकाउंट के पास होता है:

  • एक यूनीक नंबर (जैसे स्कूल में रोल नंबर)
  • एक नाम (साफ़ और स्टैंडर्ड)
  • एक ग्रुप (किस फ़ैमिली में आता है)

शर्मा सर समझाते हैं:

"PIN कोड सिस्टम जैसे सोचो। भारत के हर पोस्ट दफ़्तर का यूनीक PIN कोड है। 263601 अल्मोड़ा है। 263139 बागेश्वर है। तुम उन्हें कन्फ़्इस्तेमाल नहीं करते क्योंकि हर एक का नंबर है। वैसे ही, तुम्हारे बुक्स में हर अकाउंट को एक नंबर मिलता है। अकाउंट 4001 सेल्स है। अकाउंट 5001 पर्चेज़ेज़ है। कोई कन्फ़्इस्तेमालन नहीं।"


पाँच मुख्य ग्रुप्स

किसी भी बिज़नेस का हर अकाउंट पाँच ग्रुप्स में से किसी एक में आता है। बस पाँच। बिज़नेस चाहे कितना भी बड़ा हो या छोटा।

ग्रुपइसमें क्या शामिल हैसामान्य बैलेंसकहाँ दिखता है
1. एसेट्स (संपत्ति)बिज़नेस जो ओन करता हैडेबिटबैलेंस शीट
2. लायबिलिटीज़ (देनदारियाँ)बिज़नेस जो देनदार हैक्रेडिटबैलेंस शीट
3. इक्विटी (कैपिटल/पूँजी)मालिक की हिस्सेदारीक्रेडिटबैलेंस शीट
4. आमदनी (आय)कमाया गया पैसाक्रेडिटमुनाफ़ा & घाटा
5. ख़र्चे (खर्चे)खर्चा गया पैसाडेबिटमुनाफ़ा & घाटा

ये पाँच ग्रुप्स नींव हैं। बाकी सब इन पाँच में से किसी का सब-ग्रुप या ख़ास अकाउंट है।

आओ हर ग्रुप को बिश्त ट्रेडर्स और रावत आंटी की दुकान के उदाहरणों से समझते हैं।

पाँच अकाउंट ग्रुप्स


ग्रुप 1: एसेट्स — बिज़नेस क्या ओन करता है

एसेट्स वो चीज़ें हैं जिनकी वैल्यू है और जो बिज़नेस ओन करता है या कंट्रोल करता है।

सब-ग्रुप्स:

फ़िक्स्ड एसेट्स (नॉन-करंट एसेट्स) — चीज़ें जो बिज़नेस लंबे समय तक इस्तेमाल करता है। ये बिक्री के लिए नहीं हैं।

  • ज़मीन और भवन (Land and Building)
  • Furniture and Fixtures
  • Computers and Equipment
  • Vehicles
  • गोडाउन (वेयरहाउस) स्ट्रक्चर्स

करंट एसेट्स — चीज़ें जो बार-बार बदलती हैं, आमतौर पर एक साल के भीतर।

  • कैश इन हैंड
  • कैश एट बैंक
  • स्टॉक (इन्वेंटरी)
  • संड्री डेटर्स (अकाउंट्स रिसीवेबल) — ग्राहकों का बकाया
  • प्रीपेड ख़र्चे — अग्रिम चुकाए बिल
  • एडवांसेज़ टू आपूर्तिकर्ता — सामान मिलने से पहले आपूर्तिकर्ता को दिया पैसा

निवेश्स — फ़िक्स्ड डिपॉज़िट्स, शेयर्स, आदि में लगाया पैसा।

इंटैंजिबल एसेट्स — वैल्यू वाली चीज़ें जिन्हें छू नहीं सकते।

  • गुडविल
  • ट्रेडमार्क्स
  • सॉफ़्टवेयर लाइसेंसेज़

रावत आंटी की छोटी किराना दुकान के लिए, मुख्य एसेट्स हैं: कैश, बैंक बैलेंस, स्टॉक, डेटर्स, और फ़र्नीचर।

बिश्त ट्रेडर्स (बड़ा होलसेल बिज़नेस) के लिए, लिस्ट में ये भी शामिल हैं: गोडाउन, व्हीकल्स, कंप्यूटर इक्विपमेंट, और निवेश्स।


ग्रुप 2: लायबिलिटीज़ — बिज़नेस क्या देनदार है

लायबिलिटीज़ कर्ज़ और दायित्व हैं — पैसा जो बिज़नेस को दूसरों को देना है।

सब-ग्रुप्स:

नॉन-करंट लायबिलिटीज़ (लॉन्ग-टर्म) — कर्ज़ जो एक साल बाद देने हैं।

  • बैंक लोन्स (टर्म लोन्स)
  • मॉर्गेजेज़

करंट लायबिलिटीज़ — कर्ज़ जो एक साल के भीतर देने हैं।

  • संड्री क्रेडिटर्स (अकाउंट्स पेयेबल) — आपूर्तिकर्ता को बकाया
  • आउटस्टैंडिंग ख़र्चे — बिल आ चुके लेकिन अभी पे नहीं हुए
  • शॉर्ट-टर्म लोन्स
  • GST पेयेबल — कलेक्ट किया गया GST जो गवर्नमेंट को देना है
  • TDS पेयेबल — काटा गया टैक्स जो जमा करना है

रावत आंटी के लिए: संड्री क्रेडिटर्स (बिश्त ट्रेडर्स) और आउटस्टैंडिंग ख़र्चे।

बिश्त ट्रेडर्स के लिए: बैंक लोन, संड्री क्रेडिटर्स, GST पेयेबल, TDS पेयेबल।


ग्रुप 3: इक्विटी (कैपिटल) — मालिक की हिस्सेदारी

इक्विटी मतलब सारी लायबिलिटीज़ चुकाने के बाद बिज़नेस पर मालिक का दावा।

सब-ग्रुप्स:

  • कैपिटल अकाउंट — मालिक का निवेश
  • ड्रॉइंग्स अकाउंट — मालिक ने जो पैसा निकाला
  • रिज़र्व्ज़ एंड सरप्लस — जमा किए गए मुनाफ़े जो निकाले नहीं गए
  • करंट ईयर मुनाफ़ा/घाटा — P&L अकाउंट से आता है

रावत आंटी की सोल प्रोप्राइटरशिप के लिए, इक्विटी बस कैपिटल माइनस ड्रॉइंग्स प्लस मुनाफ़ा है।

बिश्त ट्रेडर्स के बड़े वर्ज़न जैसी कंपनी के लिए, इक्विटी में शेयर कैपिटल, रिटेन्ड अर्निंग्स, और अलग-अलग रिज़र्व्ज़ शामिल हैं।


ग्रुप 4: आमदनी (आय) — कमाया गया पैसा

आमदनी वो पैसा है जो बिज़नेस अपने संचालन और अन्य सोर्सेज़ से कमाता है।

सब-ग्रुप्स:

सीधा आमदनी (राजस्व फ़्रॉम संचालन):

  • Sales of Goods
  • Sales of Services

इनसीधा आमदनी (अदर आमदनी):

  • इंटरेस्ट रिसीव्ड (बैंक डिपॉज़िट्स पर)
  • कमीशन रिसीव्ड
  • रेंट रिसीव्ड (अगर बिज़नेस सब-लेट करता है)
  • छूट रिसीव्ड (जल्दी पेमेंट के लिए आपूर्तिकर्ता से)
  • मुनाफ़ा ऑन सेल ऑफ़ एसेट

रावत आंटी के लिए: सेल्स मुख्य आमदनी है। बैंक डिपॉज़िट पर इंटरेस्ट अदर आमदनी है।

बिश्त ट्रेडर्स के लिए: मसालों की सेल्स, दूसरे होलसेलर्स से कमीशन रिसीव्ड, और इंटरेस्ट रिसीव्ड।


ग्रुप 5: ख़र्चे (खर्चे) — खर्चा गया पैसा

ख़र्चे वो लागतें हैं जो बिज़नेस चलाने में आती हैं।

सब-ग्रुप्स:

सीधा ख़र्चे (लागत ऑफ़ गुड्स सोल्ड):

  • Purchases of Goods
  • Freight Inward / Carriage Inward
  • Loading and Unloading Charges
  • Customs Duty (इंपोर्टेड गुड्स के लिए)
  • वेजेज़ (सीधे प्रोडक्शन/सँभालनािंग में लगे वर्कर्स की)

इनसीधा ख़र्चे (ऑपरेटिंग ख़र्चे):

  • तनख़्वाह (दफ़्तर/एडमिन स्टाफ़ की)
  • रेंट
  • इलेक्ट्रिसिटी
  • टेलीफ़ोन एंड इंटरनेट
  • स्टेशनरी एंड प्रिंटिंग
  • इंश्योरेंस
  • रिपेयर एंड बनाए रखेंस
  • डेप्रिसिएशन
  • बैंक चार्जेज़
  • पेशेवर फ़ीज़ (CA, लॉयर)
  • ट्रैवलिंग ख़र्चे
  • मिसलेनियस ख़र्चे

टैक्स ख़र्चे:

  • आमदनी टैक्स (बिज़नेस के लिए, अगर एप्लिकेबल हो)

रावत आंटी के लिए: पर्चेज़ेज़, तनख़्वाह, रेंट, इलेक्ट्रिसिटी मुख्य हैं।

बिश्त ट्रेडर्स के लिए: ऊपर के सब, प्लस गोडाउन रेंट, व्हीकल ख़र्चे, लोडिंग चार्जेज़, कमीशन पेड (एजेंट्स को), और ट्रैवलिंग ख़र्चे (सेल्स स्टाफ़ अलग-अलग शहरों में क्लाइंट्स से मिलता है)।


अकाउंट नंबरिंग सिस्टम

हर अकाउंट को एक यूनीक नंबर मिलता है। नंबरिंग एक लॉजिकल पैटर्न पालन करती है जिससे नंबर देखकर ही ग्रुप पता चल जाता है।

यहाँ एक आम सिस्टम है:

नंबर रेंजग्रुपसब-ग्रुप उदाहरण
1000 - 1999एसेट्स1000-1099: फ़िक्स्ड एसेट्स, 1100-1199: निवेश्स, 1200-1499: करंट एसेट्स
2000 - 2999लायबिलिटीज़2000-2099: लॉन्ग-टर्म लायबिलिटीज़, 2100-2499: करंट लायबिलिटीज़
3000 - 3999इक्विटी3000-3099: कैपिटल, 3100-3199: रिज़र्व्ज़
4000 - 4999आमदनी4000-4099: सीधा आमदनी, 4100-4199: इनसीधा आमदनी
5000 - 5999ख़र्चे5000-5099: सीधा ख़र्चे (COGS), 5100-5499: इनसीधा ख़र्चे

जब मीरा अकाउंट नंबर 1201 देखती है, तो उसे तुरंत पता चलता है कि ये एसेट है (1000 सीरीज़) और करंट एसेट है (1200 सब-रेंज)। जब वो 5101 देखती है, तो जानती है कि ये इनसीधा ख़र्चा है।

शर्मा सर कहते हैं:

"ये नंबरिंग सिर्फ सुविधा के लिए नहीं है। जब तुम अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करते हो, तो सॉफ़्टवेयर इन नंबर्स का इस्तेमाल करके अपने-आप अकाउंट्स को बैलेंस शीट और मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट में सही ग्रुप्स में लगा देता है। नंबरिंग सही करो, तो रिपोर्ट्स सही निकलती हैं।"


कम्प्लीट चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स — बिश्त ट्रेडर्स

यहाँ पूरा COA है जो शर्मा सर बिश्त ट्रेडर्स (होलसेल मसालों का बिज़नेस) के लिए सेट अप करते हैं:

एसेट्स (1000 - 1999)

कोडअकाउंट का नामसब-ग्रुप
1001LandFixed Assets
1002Building (Godown)Fixed Assets
1003Furniture and FixturesFixed Assets
1004Computer and PrinterFixed Assets
1005Delivery VehicleFixed Assets
1006Accumulated Depreciation — BuildingFixed Assets (Contra)
1007Accumulated Depreciation — FurnitureFixed Assets (Contra)
1008Accumulated Depreciation — ComputerFixed Assets (Contra)
1009Accumulated Depreciation — VehicleFixed Assets (Contra)
1101Fixed Deposit with BankInvestments
1201Cash in HandCurrent Assets
1202SBI Current AccountCurrent Assets
1203PNB Savings AccountCurrent Assets
1301Closing Stock / InventoryCurrent Assets
1401Sundry Debtors — GeneralCurrent Assets
1402Rawat General Store (Debtor)Current Assets
1403Pandey Kirana (Debtor)Current Assets
1404Mountain Mart (Debtor)Current Assets
1501Advance to SuppliersCurrent Assets
1502Prepaid InsuranceCurrent Assets
1503TDS ReceivableCurrent Assets
1504GST Input — CGSTCurrent Assets
1505GST Input — SGSTCurrent Assets
1506GST Input — IGSTCurrent Assets

लायबिलिटीज़ (2000 - 2999)

कोडअकाउंट का नामसब-ग्रुप
2001SBI Term LoanLong-term Liabilities
2101Sundry Creditors — GeneralCurrent Liabilities
2102Annapurna Spices (Creditor)Current Liabilities
2103Delhi Masala House (Creditor)Current Liabilities
2104Kumaon Traders (Creditor)Current Liabilities
2201Outstanding SalaryCurrent Liabilities
2202Outstanding RentCurrent Liabilities
2203Outstanding ElectricityCurrent Liabilities
2301GST Output — CGSTCurrent Liabilities
2302GST Output — SGSTCurrent Liabilities
2303GST Output — IGSTCurrent Liabilities
2304TDS PayableCurrent Liabilities

इक्विटी (3000 - 3999)

कोडअकाउंट का नामसब-ग्रुप
3001Capital — Bisht JiCapital
3002Drawings — Bisht JiCapital (Contra)
3101Retained EarningsReserves

आमदनी (4000 - 4999)

कोडअकाउंट का नामसब-ग्रुप
4001Sales — Spices (Local)Direct Income
4002Sales — Spices (Interstate)Direct Income
4003Sales ReturnsDirect Income (Contra)
4101Interest ReceivedIndirect Income
4102Commission ReceivedIndirect Income
4103Discount ReceivedIndirect Income
4104Profit on Sale of AssetIndirect Income

ख़र्चे (5000 - 5999)

कोडअकाउंट का नामसब-ग्रुप
5001Purchases — Spices (Local)Direct Expenses
5002Purchases — Spices (Interstate)Direct Expenses
5003Purchase ReturnsDirect Expenses (Contra)
5004Freight InwardDirect Expenses
5005Carriage InwardDirect Expenses
5006Loading and UnloadingDirect Expenses
5007Customs/Mandi FeesDirect Expenses
5101Salary and WagesIndirect Expenses
5102Godown RentIndirect Expenses
5103Office RentIndirect Expenses
5104Electricity — GodownIndirect Expenses
5105Electricity — OfficeIndirect Expenses
5106Telephone and InternetIndirect Expenses
5107Stationery and PrintingIndirect Expenses
5108InsuranceIndirect Expenses
5109Repair and MaintenanceIndirect Expenses
5110Vehicle Running ExpensesIndirect Expenses
5111Travelling ExpensesIndirect Expenses
5112Commission Paid (to Agents)Indirect Expenses
5113Bank ChargesIndirect Expenses
5114Professional Fees (CA/Lawyer)Indirect Expenses
5115DepreciationIndirect Expenses
5116Bad DebtsIndirect Expenses
5117Discount AllowedIndirect Expenses
5118Miscellaneous ExpensesIndirect Expenses

ये 60 से ज़्यादा अकाउंट्स हैं! मीरा थोड़ा ओवरव्हेल्म होती है। लेकिन शर्मा सर उसे दिलासा देते हैं:

"तुम इन सबको हर रोज़ इस्तेमाल नहीं करोगी। कुछ अकाउंट्स साल में एक बार ही इस्तेमाल होते हैं — जैसे डेप्रिसिएशन या बैड डेट्स। लेकिन सब पहले से लिस्टेड और नंबर्ड होने से, तुम्हें कभी अंदाज़ा नहीं लगाना पड़ता। जब कोई नया ट्रांज़ैक्शन हो, चार्ट देखो, सही अकाउंट ढूँढो, और इस्तेमाल करो।"


GST अकाउंट्स COA में क्यों आते हैं

मीरा कुछ नया गौर करती है — अकाउंट्स जैसे "GST इनपुट — CGST" और "GST आउटपुट — SGST।"

नेगी भैया समझाते हैं:

"बिश्त ट्रेडर्स GST-रजिस्टर्ड है। जब वो सामान खरीदते हैं, तो आपूर्तिकर्ता को GST पे करते हैं। वो GST इनपुट अकाउंट्स में रिकॉर्ड होता है (ये ऐसा पैसा है जो गवर्नमेंट हमें वापस देती है)। जब वो सामान बेचते हैं, तो ग्राहक से GST कलेक्ट करते हैं। वो GST आउटपुट अकाउंट्स में रिकॉर्ड होता है (ये पैसा है जो हमें गवर्नमेंट को देना है)। महीने के अंत में, अंतर गणना करते हैं — बिश्त जी गवर्नमेंट को वही पे करते हैं।"

GST को हम इस किताब के पार्ट 4 में ब्योरा में कवर करेंगे। अभी बस इतना जानो कि GST अकाउंट्स चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स का हिस्सा हैं।

यहाँ एक सरल समरी है:

अकाउंटप्रकारमतलब
GST इनपुट (CGST/SGST/IGST)करंट एसेटGST जो हमने खरीदते वक़्त दिया — हम इसे वापस क्लेम कर सकते हैं
GST आउटपुट (CGST/SGST/IGST)करंट लायबिलिटीGST जो हमने बेचते वक़्त कलेक्ट किया — हमें गवर्नमेंट को देना है

कंपनीज़ एक्ट, 2013 की शेड्यूल III

शर्मा सर अब एक फ़ॉर्मल कॉन्सेप्ट इंट्रोड्यूस करते हैं।

"रावत आंटी की दुकान, जो सोल प्रोप्राइटरशिप है, उसके लिए हम बैलेंस शीट और P&L का कोई भी वजहेबल फ़ॉर्मेट इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन एक कंपनी के लिए — एक छोटी प्राइवेट कंपनी के लिए भी — गवर्नमेंट ने एक ख़ास फ़ॉर्मेट तय किया है। ये फ़ॉर्मेट कंपनीज़ एक्ट, 2013 की शेड्यूल III में है।"

शेड्यूल III क्या है?

शेड्यूल III, कंपनीज़ एक्ट, 2013 का एक सेक्शन है जो इग्ज़ैक्टली बताता है कि कंपनी को अपनी बैलेंस शीट और स्टेटमेंट ऑफ़ मुनाफ़ा एंड घाटा कैसे प्रेज़ेंट करनी है। ये बताता है:

  • कौन से लाइन आइटम्स दिखाने हैं
  • किस ऑर्डर में
  • कैसे ग्रुप करने हैं
  • क्या एडिशनल इन्फ़ॉर्मेशन (नोट्स) डिस्क्लोज़ करनी है

भले ही रावत आंटी और बिश्त ट्रेडर्स कंपनीज़ नहीं हैं (ये सोल प्रोप्राइटरशिप्स या साझेदारी्स हैं), शेड्यूल III समझना ज़रूरी है क्योंकि:

  1. बहुत से एम्प्लॉयर्स उम्मीद रखेंगे कि तुम्हें ये फ़ॉर्मेट पता हो।
  2. अगर बिश्त ट्रेडर्स कभी कंपनी बनता है, तो ये फ़ॉर्मेट ज़रूरी होगा।
  3. चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स ऐसा डिज़ाइन होना चाहिए कि शेड्यूल III में आसानी से मैप हो सके।

शेड्यूल III बैलेंस शीट फ़ॉर्मेट (सिम्प्लिफ़ाइड)

                    BALANCE SHEET
             31 March 20XX को

 ─────────────────────────────────────────────
 I. EQUITY AND LIABILITIES
    (पूँजी और देनदारियाँ)
 ─────────────────────────────────────────────

    1. Shareholders' Funds (शेयरधारकों की निधि)
       (a) Share Capital
       (b) Reserves and Surplus

    2. Non-Current Liabilities (दीर्घकालिक देनदारियाँ)
       (a) Long-term Borrowings
       (b) Deferred Tax Liabilities
       (c) Other Long-term Liabilities
       (d) Long-term Provisions

    3. Current Liabilities (चालू देनदारियाँ)
       (a) Short-term Borrowings
       (b) Trade Payables
       (c) Other Current Liabilities
       (d) Short-term Provisions

 ─────────────────────────────────────────────
 II. ASSETS (संपत्तियाँ)
 ─────────────────────────────────────────────

    1. Non-Current Assets (दीर्घकालिक संपत्तियाँ)
       (a) Property, Plant and Equipment
       (b) Intangible Assets
       (c) Capital Work-in-Progress
       (d) Non-Current Investments
       (e) Deferred Tax Assets
       (f) Long-term Loans and Advances
       (g) Other Non-Current Assets

    2. Current Assets (चालू संपत्तियाँ)
       (a) Inventories
       (b) Trade Receivables
       (c) Cash and Cash Equivalents
       (d) Short-term Loans and Advances
       (e) Other Current Assets

 ─────────────────────────────────────────────

ध्यान दो कुछ अंतर — जो ट्रेडिशनल फ़ॉर्मेट मीरा ने रावत आंटी के लिए इस्तेमाल किया उससे:

  • "संड्री क्रेडिटर्स" अब "ट्रेड पेयेबल्स" कहलाता है
  • "संड्री डेटर्स" अब "ट्रेड रिसीवेबल्स" कहलाता है
  • "फ़र्नीचर" अब "संपत्ति, प्लांट एंड इक्विपमेंट" में आता है
  • "स्टॉक" अब "इन्वेंटरीज़" कहलाता है
  • "कैश एट बैंक" और "कैश इन हैंड" मिलकर "कैश एंड कैश इक्विवेलेंट्स" हैं

नाम फ़ॉर्मल हो गए हैं, लेकिन कॉन्सेप्ट्स बिल्कुल वही हैं।


शेड्यूल III मुनाफ़ा & घाटा फ़ॉर्मेट (सिम्प्लिफ़ाइड)

          STATEMENT OF PROFIT AND LOSS
        31 March 20XX को समाप्त वर्ष के लिए

 ─────────────────────────────────────────────
 I.    Revenue from Operations        xx,xxx
 II.   Other Income                    x,xxx
 III.  Total Income (I + II)          xx,xxx

 IV.   Expenses:
       (a) Cost of Materials Consumed  xx,xxx
       (b) Purchases of Stock-in-Trade xx,xxx
       (c) Changes in Inventories       x,xxx
       (d) Employee Benefit Expense     x,xxx
       (e) Finance Costs                x,xxx
       (f) Depreciation and
           Amortisation Expense         x,xxx
       (g) Other Expenses               x,xxx
       Total Expenses                  xx,xxx

 V.    Profit Before Tax (III - IV)    x,xxx
 VI.   Tax Expense                     x,xxx
 VII.  Profit After Tax (V - VI)       x,xxx
 ─────────────────────────────────────────────

COA को फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स से मैप करना

यहाँ देखो चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स दो मुख्य फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में कैसे मैप होता है:

COA ग्रुपस्टेटमेंटसेक्शन
एसेट्स (1000-1999)बैलेंस शीटएसेट्स साइड
लायबिलिटीज़ (2000-2999)बैलेंस शीटलायबिलिटीज़ साइड
इक्विटी (3000-3999)बैलेंस शीटइक्विटी साइड
आमदनी (4000-4999)मुनाफ़ा & घाटाराजस्व / आमदनी
ख़र्चे (5000-5999)मुनाफ़ा & घाटाख़र्चे

अगर COA सही ग्रुपिंग और नंबरिंग के साथ सेट अप हो, तो अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर (या मैन्युअल अकाउंटेंट भी) अपने-आप अकाउंट्स को बैलेंस शीट और P&L के सही सेक्शन्स में सॉर्ट करके रिपोर्ट्स जेनरेट कर सकता है।


अच्छा चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स बनाने की टिप्स

शर्मा सर अपना अनुभव शेयर करते हैं:

1. शुरुआत सरल रखो। पहले दिन 100 अकाउंट्स मत बनाओ। 30-40 अकाउंट्स से शुरू करो। ज़रूरत के हिसाब से और जोड़ो।

2. ख़ास रहो लेकिन ज़्यादा ख़ास नहीं। "इलेक्ट्रिसिटी" अच्छा है। बड़े बिज़नेस के लिए "इलेक्ट्रिसिटी — गोडाउन" और "इलेक्ट्रिसिटी — दफ़्तर" और भी अच्छा है। लेकिन "इलेक्ट्रिसिटी — पीछे वाले कमरे का बल्ब #3" ज़्यादा हो गया।

3. लगातार नेमिंग रखो। एक स्टाइल तय करो और उसी पर चलो। अगर "तनख़्वाह एंड वेजेज़" लिखा है, तो अलग से "वेजेज़ & तनख़्वाह" नाम का अकाउंट मत बनाओ।

4. गैप के साथ नंबर करो। ध्यान दो नंबरिंग में गैप्स हैं (1001, 1002... न कि 1, 2, 3...)। इससे बाद में नए अकाउंट्स बिना रीनंबरिंग के इन्सर्ट हो सकते हैं। अगर 1005 (व्हीकल) और 1006 (डेप्रिसिएशन-बिल्डिंग) के बीच अकाउंट चाहिए, तो 1005a इस्तेमाल कर सकते हो या पहले से जगह छोड़ सकते हो।

5. GST अकाउंट्स अलग रखो। GST-रजिस्टर्ड बिज़नेसेज़ के लिए, हमेशा CGST, SGST, और IGST के अलग अकाउंट्स रखो — इनपुट और आउटपुट दोनों।

6. उद्योग से मैच करो। किराना दुकान के अकाउंट्स होटल या कारख़ाना से अलग होते हैं। COA को बिज़नेस के हिसाब से कस्टमाइज़ करो।


रावत आंटी vs. बिश्त ट्रेडर्स — COA तुलना

आओ देखते हैं कि बिज़नेस साइज़ के हिसाब से सरल COA कैसे अलग होता है:

विशेषतारावत जनरल स्टोरबिश्त ट्रेडर्स
अकाउंट्स की संख्या~25-30~60-70
GST अकाउंट्सनहीं (रजिस्टर्ड नहीं)हाँ — CGST, SGST, IGST इनपुट/आउटपुट
कई बैंक अकाउंट्स1 (SBI)2+ (SBI करंट, PNB सेविंग्स)
व्हीकल ख़र्चेनहींहाँ
कमीशन अकाउंट्सनहींहाँ (पेड और रिसीव्ड दोनों)
कई डेटर्स3-4 नेम्ड10+ नेम्ड
गोडाउन ख़र्चेनहींहाँ
TDS अकाउंट्सनहींहाँ

मीरा पैटर्न देखती है। बिज़नेस जितना बड़ा, COA उतना विस्तृत। लेकिन पाँच मुख्य ग्रुप्स कभी नहीं बदलते।


मीरा रावत आंटी के लिए COA बनाती है

अभ्यास के तौर पर, शर्मा सर मीरा से कहते हैं कि रावत जनरल स्टोर के लिए एक सरल COA बनाओ। ये उसने बनाया:

कोडअकाउंट का नामग्रुप
एसेट्स
1001Furniture and FixturesFixed Asset
1002Accumulated Depreciation — FurnitureFixed Asset (Contra)
1201Cash in HandCurrent Asset
1202SBI Savings AccountCurrent Asset
1301Closing StockCurrent Asset
1401Joshi Ji (Debtor)Current Asset
1402Dimri Ji (Debtor)Current Asset
1403Other DebtorsCurrent Asset
1501Prepaid InsuranceCurrent Asset
लायबिलिटीज़
2101Bisht Traders (Creditor)Current Liability
2102Haldwani Wholesaler (Creditor)Current Liability
2103Other CreditorsCurrent Liability
2201Outstanding SalaryCurrent Liability
2202Outstanding ElectricityCurrent Liability
2301Bank Loan (if any)Long-term Liability
इक्विटी
3001Capital — Rawat AuntyCapital
3002Drawings — Rawat AuntyCapital (Contra)
आमदनी
4001SalesDirect Income
4002Sales ReturnsDirect Income (Contra)
4101Interest ReceivedIndirect Income
ख़र्चे
5001PurchasesDirect Expense
5002Purchase ReturnsDirect Expense (Contra)
5003Freight / Carriage InwardDirect Expense
5101SalaryIndirect Expense
5102RentIndirect Expense
5103ElectricityIndirect Expense
5104TelephoneIndirect Expense
5105StationeryIndirect Expense
5106Repair and MaintenanceIndirect Expense
5107InsuranceIndirect Expense
5108DepreciationIndirect Expense
5109Miscellaneous ExpensesIndirect Expense

शर्मा सर समीक्षा करते हैं। "साफ़। व्यवस्थित्ड। हर अकाउंट अपनी जगह। बहुत अच्छा, मीरा। एक छोटी किराना दुकान के लिए ये सॉलिड चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स है।"


क्विक रीकैप (संक्षिप्त सारांश)

  • चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स (COA) बिज़नेस द्वारा इस्तेमाल होने वाले सारे अकाउंट्स की नंबर्ड, व्यवस्थित्ड सूची है।
  • हर अकाउंट 5 ग्रुप्स में से किसी एक में आता है: एसेट्स, लायबिलिटीज़, इक्विटी, आमदनी, ख़र्चे।
  • एसेट्स = बिज़नेस क्या ओन करता है (फ़िक्स्ड + करंट)।
  • लायबिलिटीज़ = बिज़नेस क्या देनदार है (लॉन्ग-टर्म + करंट)।
  • इक्विटी = मालिक की हिस्सेदारी (कैपिटल - ड्रॉइंग्स + मुनाफ़ा)।
  • आमदनी = कमाया गया पैसा (सेल्स + अदर आमदनी)।
  • ख़र्चे = खर्चा गया पैसा (सीधा + इनसीधा)।
  • अकाउंट नंबरिंग लॉजिकल सिस्टम पालन करता है: 1000s एसेट्स के लिए, 2000s लायबिलिटीज़, 3000s इक्विटी, 4000s आमदनी, 5000s ख़र्चे।
  • शेड्यूल III कंपनीज़ एक्ट, 2013 की, कंपनीज़ के लिए बैलेंस शीट और P&L का फ़ॉर्मेट प्जोखिम्राइब करती है।
  • अच्छा COA सरल, लगातार, और बिज़नेस के हिसाब से कस्टमाइज़्ड होता है।
  • GST-रजिस्टर्ड बिज़नेसेज़ को CGST, SGST, और IGST के अलग अकाउंट्स चाहिए — इनपुट और आउटपुट दोनों।

अभ्यास अभ्यास — खुद करो

पार्ट A: अकाउंट्स वर्गीकृत करो

नीचे दिए गए हर अकाउंट के लिए, पहचानो कि ये किस ग्रुप में आता है (एसेट, लायबिलिटी, इक्विटी, आमदनी, या ख़र्चा) और इस चैप्टर में बताए नंबरिंग सिस्टम के हिसाब से एक अकाउंट नंबर सजेस्ट करो।

अकाउंटग्रुप?सजेस्टेड कोड?
डिलीवरी वैन________________
GST आउटपुट — SGST________________
कमीशन रिसीव्ड________________
ओपनिंग स्टॉक________________
बैंक ओवरड्राफ़्ट________________
ड्रॉइंग्स________________
फ़्रेट आउटवर्ड________________
ट्रेड रिसीवेबल्स________________
रिटेन्ड अर्निंग्स________________
इंश्योरेंस प्रीमियम________________

पार्ट B: चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स बनाओ

एक काल्पनिक बिज़नेस के लिए पूरा चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स बनाओ: "कुमाऊँनी हैंडीक्राफ़्ट्स" — अल्मोड़ा में एक छोटी दुकान जो हाथ से बुने ऊनी शॉल, लकड़ी के क्राफ़्ट, और स्थानीय शहद बेचती है। दुकान GST-रजिस्टर्ड है। मालिक नेगी जी हैं। दुकान में एक एम्प्लॉयी है। एक बैंक अकाउंट है।

कम से कम ये शामिल करो:

  • 5 एसेट अकाउंट्स
  • 3 लायबिलिटी अकाउंट्स
  • 2 इक्विटी अकाउंट्स
  • 3 आमदनी अकाउंट्स
  • 8 ख़र्चा अकाउंट्स

इस चैप्टर में बताए सिस्टम के हिसाब से ठीक से नंबर करो।


मज़ेदार तथ्य (फ़न फ़ैक्ट)

स्टैंडर्डाइज़्ड चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स का कॉन्सेप्ट 1900 के शुरू में यूरोप में आया। लेकिन भारत में व्यवस्थित्ड वित्तीय रिकॉर्ड-कीपिंग बहुत पहले से है। हुंडी सिस्टम — जो भारतीय व्यापारी सदियों से इस्तेमाल करते आ रहे हैं — अलग-अलग प्रकार के ट्रांज़ैक्शन्स के लिए ख़ास श्रेणियाँ वाला एक शुरुआती व्यवस्थित्ड अकाउंटिंग सिस्टम था। जब बिश्त जी के दादा जी उत्तराखंड की पुरानी मंडियों में मसालों का व्यापार करते थे, तो वो बही-खाता (पारंपरिक खाता-बही) में ऐसी श्रेणियाँ से रिकॉर्ड रखते थे जो आधुनिक चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स से काफ़ी मिलती-जुलती हैं। नाम बदल गए हैं। सॉफ़्टवेयर नया है। लेकिन पैसे को श्रेणियाँ में व्यवस्थित करने का आइडिया? वो उतना ही पुराना है जितना व्यापार खुद।


इससे पार्ट 2 — हाथ से हिसाब पूरा होता है। मीरा अब जानती है कि वाउचर कैसे बनाएँ, जर्नल एंट्रीज़ कैसे लिखें, लेजर में कैसे पोस्ट करें, ट्रायल बैलेंस कैसे बनाएँ, फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स कैसे तैयार करें, और अकाउंट्स कैसे व्यवस्थित करें। वो कागज़-कलम से किसी भी छोटे बिज़नेस का हिसाब रख सकती है। पार्ट 3 में, वो ये सब कंप्यूटर पर करना सीखेगी उद्यमो ERPLite सॉफ़्टवेयर से। सॉफ़्टवेयर की स्पीड और ताकत उसे चौंका देगी — लेकिन सिर्फ इसलिए क्योंकि वो पहले से समझती है कि स्क्रीन के पीछे क्या हो रहा है।

Udyamo ERPLite से मिलो — तुम्हारा डिजिटल दफ़्तर

मीरा सोमवार सुबह दफ़्तर पहुँची तो देखा कि नेगी भैया कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे तेज़ी से टाइप कर रहे हैं। स्क्रीन पर नंबर उड़ रहे थे। मीरा ने पिछले कुछ हफ़्तों में कागज़ पर अकाउंटिंग सीखी थी — जर्नल, लेजर, ट्रायल बैलेंस। लेकिन ये कुछ अलग दिख रहा था। ये... तेज़ दिख रहा था।

"नेगी भैया, ये कौन सा सॉफ़्टवेयर है?" उसने पूछा।

नेगी भैया मुस्कुराए। "ये है Udyamo ERPLite। जो कुछ तुम हाथ से करती रही हो? ये सॉफ़्टवेयर वो सब सेकंडों में कर देता है। आओ, बैठो। आज तुम कंप्यूटर वाला तरीका सीखोगी।"


ERP क्या है?

चलो एक सीधे सवाल से शुरू करते हैं। ERP का मतलब क्या होता है?

ERP का पूरा नाम है एंटरप्राइज़ रिसोर्स योजना

सुनने में मुश्किल लगता है। चलो तोड़कर समझते हैं।

  • एंटरप्राइज़ = एक बिज़नेस या संगठन
  • रिसोर्स = पैसा, लोग, स्टॉक, मशीनें — वो सब कुछ जो बिज़नेस में इस्तेमाल होता है
  • योजना = इन सबको व्यवस्थित और सँभालना

तो ERP है एक ऐसा सॉफ़्टवेयर जो बिज़नेस की सारी चीज़ें मैनेज करता है — अकाउंटिंग, इन्वेंटरी, सेल्स, परचेज़ेज़, तनख़्वाह, टैक्स, रिपोर्ट्स।

इसे ऐसे समझो। रावत आंटी अपनी किराना दुकान चलाती हैं। उनके पास है:

  • रोज़ाना बिक्री के लिए एक नोटबुक
  • खरीदारी के लिए एक अलग नोटबुक
  • किसके पैसे बाकी हैं — उसके लिए एक डायरी
  • GST बिलों के लिए अलग-अलग कागज़
  • जोड़ के लिए एक गणनार

ये पाँच अलग-अलग जगहें हैं पाँच अलग-अलग चीज़ों के लिए। अगर वो एक नोटबुक अपडेट करना भूल गईं तो? अगर नंबर मिलें नहीं तो?

अब सोचो एक ही सिस्टम जहाँ ये सब एक साथ हो। जब वो बिक्री करें, तो स्टॉक अपने आप कम हो जाए। GST अपने आप गणना हो जाए। ग्राहक का बैलेंस अपने आप अपडेट हो जाए। मुनाफ़ा रिपोर्ट अपने आप बदल जाए।

ERP यही करता है।

ERP के बिनाERP के साथ
कई नोटबुक और रजिस्टरसब कुछ एक सॉफ़्टवेयर में
हाथ से गणनाअपने-आप गणना
गलतियाँ अक्सर होती हैंकम गलतियाँ
रिपोर्ट बनाने में घंटे लगते हैंरिपोर्ट सेकंडों में तैयार
पुराने रिकॉर्ड ढूँढना मुश्किलकोई भी रिकॉर्ड तुरंत सर्च करो
एक इंसान सीमित काम कर सकता हैएक इंसान बहुत ज़्यादा काम कर सकता है

Udyamo ERPLite क्यों?

बाज़ार में बहुत सारे ERP सॉफ़्टवेयर हैं। Tally, Zoho Books, Busy, QuickBooks — तुमने इनमें से कुछ के नाम सुने होंगे।

Udyamo ERPLite भारतीय बिज़नेस के लिए बनाया गया है। ये इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स को पालन करता है। ये GST समझता है। ये कंपनीज़ एक्ट के शेड्यूल III (स्टैंडर्ड चार्ट ऑफ अकाउंट्स जो हमने पिछले अध्याय में पढ़ा) को पालन करता है।

शर्मा सर अपनी अभ्यास में कई क्लाइंट्स के लिए ERPLite इस्तेमाल करते हैं। "एक बार एक अच्छा ERP सीख लो," उन्होंने मीरा से कहा, "तो कोई भी दूसरा सॉफ़्टवेयर जल्दी सीख लोगी। लॉजिक हर जगह एक ही है।"

ERPLite क्या-क्या कर सकता है:

फ़ीचरइसका मतलब
चार्ट ऑफ अकाउंट्ससभी अकाउंट हेड, शेड्यूल III फॉर्मेट में पहले से लोड
8 वाउचर टाइपजर्नल, रिसीट, पेमेंट, कॉन्ट्रा, सेल्स, परचेज़, डेबिट नोट, क्रेडिट नोट
सेल्स साइकलकोटेशन से इनवॉइस से पेमेंट तक — पूरा फ्लो
परचेज़ साइकलपरचेज़ ऑर्डर से बिल से पेमेंट तक — पूरा फ्लो
GST कम्प्लायंसटैक्स अपने आप गणना, GST रिपोर्ट तैयार
रिपोर्ट्सट्रायल बैलेंस, P&L, बैलेंस शीट, कैश फ्लो, और भी बहुत कुछ
मास्टर्सआइटम, ग्राहक, वेंडर, एम्प्लॉई — सब एक जगह
ड्राफ़्ट और पोस्टएंट्री को फ़ाइनल करने से पहले समीक्षा करो

अगर ये लिस्ट लंबी लग रही है तो चिंता मत करो। हम एक-एक करके सब कवर करेंगे, इस अध्याय में और आगे के अध्यायों में।


पहली झलक — लॉगिन करना

नेगी भैया ने कंप्यूटर पर ब्राउज़र खोला। "ERPLite तुम्हारे वेब ब्राउज़र में चलता है," उन्होंने समझाया। "कुछ भारी-भरकम इंस्टॉल करने की ज़रूरत नहीं। बस क्रोम या फ़ायरफ़ॉक्स खोलो, एड्रेस टाइप करो, और लॉगिन करो।"

चरण 1: ERPLite खोलो

नेगी भैया ने ब्राउज़र में ERPLite का एड्रेस टाइप किया। लॉगिन स्क्रीन दिखी।

ERPLite लॉगिन स्क्रीन — इस्तेमालरनेम और पासवर्ड फ़ील्ड्स के साथ साइन इन बटन

चरण 2: अपना क्रेडेंशियल्स डालो

हर इस्तेमालर को एक इस्तेमालरनेम और पासवर्ड मिलता है। शर्मा सर ने मीरा के लिए एक लॉगिन बनाया था।

  • इस्तेमालरनेम: meera@sharmaassociates
  • पासवर्ड: (शर्मा सर ने दिया हुआ)

"अपना पासवर्ड कभी किसी को मत बताना," नेगी भैया ने कहा। "तुम सॉफ़्टवेयर में जो भी करती हो वो तुम्हारे नाम से लॉग होता है। अगर कुछ गड़बड़ हो, तो वो देख सकते हैं कि किसने किया।"

चरण 3: डैशबोर्ड

लॉगिन करने के बाद, मीरा को डैशबोर्ड दिखा। ये ERPLite की होम स्क्रीन है — हर बार लॉगिन करने पर सबसे पहले यही दिखता है।

ERPLite डैशबोर्ड जिसमें कैश बैलेंस, रिसीवेबल्स, पेएबल्स, और हाल के ट्रांज़ैक्शंस के समरी कार्ड्स दिख रहे हैं

डैशबोर्ड पर एक नज़र में कई चीज़ें दिखीं:

  • कैश बैलेंस — अभी बिज़नेस के पास कितना कैश है
  • बैंक बैलेंस — बैंक अकाउंट में कितना है
  • रिसीवेबल्स — ग्राहकों पर कितना बाकी है
  • पेएबल्स — हमें आपूर्तिकर्ता को कितना देना है
  • रीसेंट ट्रांज़ैक्शंस — हाल ही में की गई एंट्रीज़

"डैशबोर्ड को अखबार के पहले पेज की तरह समझो," नेगी भैया ने कहा। "ये तुम्हें हेडलाइन्स देता है। अगर पूरी कहानी चाहिए, तो अंदर जाओ।"


ERPLite में नेविगेट करना — मेन मेनू

स्क्रीन के बाईं तरफ़ मीरा को एक मेनू दिखा। ये मेन नेविगेशन है — सॉफ़्टवेयर में इधर-उधर जाने का रास्ता।

ERPLite का बायाँ नेविगेशन मेनू जिसमें मास्टर्स, ट्रांज़ैक्शंस, रिपोर्ट्स, और सेटिंग्स सेक्शन दिख रहे हैं

मेनू में चार मुख्य सेक्शन हैं:

1. मास्टर्स

यहाँ तुम फ़ाउंडेशन डेटा सेट अप करते हो — वो चीज़ें जो रोज़ नहीं बदलतीं।

  • आइटम्स — उत्पाद और सेवाएँ जो तुम बेचते या खरीदते हो
  • ग्राहकों — वो लोग जो तुमसे खरीदते हैं
  • वेंडर्स — वो लोग जिनसे तुम खरीदते हो
  • एम्प्लॉईज़ — वो लोग जो तुम्हारे यहाँ काम करते हैं
  • चार्ट ऑफ अकाउंट्स — सभी अकाउंट हेड्स की लिस्ट

मास्टर्स को ऐसे समझो जैसे घर की नींव बनाना। एक बार ध्यान से करो। फिर उसके ऊपर बाकी सब बनाओ।

2. ट्रांज़ैक्शंस (लेन-देन)

यहाँ रोज़ का काम होता है।

  • वाउचर एंट्री — जर्नल, रिसीट, पेमेंट, कॉन्ट्रा
  • सेल्स — प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस, सेल्स ऑर्डर, सेल्स इनवॉइस, पेमेंट रिसीट
  • परचेज़ — परचेज़ ऑर्डर, परचेज़ बिल, पेमेंट

जब भी पैसा हिले — अंदर आए या बाहर जाए — तुम यहाँ दर्ज करो।

3. रिपोर्ट्स

यहाँ तुम अपनी सारी एंट्रीज़ का नतीजा देखते हो।

  • ट्रायल बैलेंस
  • मुनाफ़ा एंड घाटा स्टेटमेंट
  • बैलेंस शीट
  • कैश फ्लो स्टेटमेंट
  • डे बुक
  • सेल्स रजिस्टर
  • परचेज़ रजिस्टर
  • एज्ड रिसीवेबल्स
  • एज्ड पेएबल्स

"रिपोर्ट्स ही असली मकसद हैं," शर्मा सर हमेशा कहते थे। "हम ये सारी एंट्री इसलिए करते हैं ताकि अंत में मालिक देख सके — मैं पैसा कमा रहा हूँ या गँवा रहा हूँ?"

4. सेटिंग्स

यहाँ तुम सॉफ़्टवेयर को कॉन्फ़िगर करते हो।

  • व्यवस्थितेशन ब्योरा (कंपनी का नाम, पता, GSTIN, PAN)
  • फ़ाइनेंशियल ईयर
  • इस्तेमालर प्रबंधन (कौन लॉगिन कर सकता है, क्या एक्सेस है)
  • टैक्स सेटिंग्स
  • नंबर सीरीज़ (वाउचर्स की नंबरिंग कैसी होगी)

ये एक बार सेट अप करो। उसके बाद शायद ही कभी छुओ।

मेनू सेक्शनक्या होता है इसमेंकितनी बार इस्तेमाल करोगे
मास्टर्सआइटम, ग्राहक, वेंडर, एम्प्लॉई, चार्ट ऑफ अकाउंट्सएक बार सेट अप, कभी-कभी अपडेट
ट्रांज़ैक्शंसवाउचर, सेल्स, परचेज़हर रोज़
रिपोर्ट्सट्रायल बैलेंस, P&L, बैलेंस शीट, आदिहफ़्ते में, महीने में, ज़रूरत के हिसाब से
सेटिंग्सव्यवस्थितेशन, फ़ाइनेंशियल ईयर, इस्तेमालर्स, टैक्सएक बार सेट अप

व्यवस्थितेशन सेट अप करना

"कुछ भी करने से पहले," नेगी भैया ने कहा, "तुम्हें सॉफ़्टवेयर को बताना होगा कि तुम कौन हो। कौन सी कंपनी? GSTIN क्या है? कौन सा फ़ाइनेंशियल ईयर?"

इसे व्यवस्थितेशन सेटअप कहते हैं। जब तुम किसी नए बिज़नेस के लिए ERPLite शुरू करते हो तो सबसे पहला काम यही है।

शर्मा सर आए। "चलो अभ्यास करते हैं। मेरी अभ्यास — Sharma & Associates — को टेस्ट के तौर पर सेट अप करो।"

चरण 1: सेटिंग्स → व्यवस्थितेशन पर जाओ

मीरा ने बाएँ मेनू में सेटिंग्स पर क्लिक किया, फिर व्यवस्थितेशन पर।

ERPLite में व्यवस्थितेशन सेटअप फॉर्म जिसमें कंपनी का नाम, पता, GSTIN, PAN, और फ़ाइनेंशियल ईयर के फ़ील्ड्स दिख रहे हैं

चरण 2: ब्योरा भरो

एक फॉर्म आया जिसमें कई फ़ील्ड्स थे। चलो हर एक समझते हैं।

कंपनी नेम: बिज़नेस का कानूनी नाम।

मीरा ने टाइप किया: Sharma & Associates

एड्रेस: बिज़नेस का रजिस्टर्ड पता।

मीरा ने टाइप किया:

  • Near SBI Branch, Haldwani
  • District: Nainital
  • State: Uttarakhand
  • PIN: 263139

GSTIN: 15 अंकों का GST आइडेंटिफ़िकेशन नंबर।

"हर GST-रजिस्टर्ड बिज़नेस का एक GSTIN होता है," नेगी भैया ने समझाया। "ये स्टेट कोड से शुरू होता है। उत्तराखंड का कोड 05 है।"

मीरा ने टाइप किया: 05AABCS1234A1Z5

"ये एक सैंपल नंबर है," शर्मा सर ने कहा। "असल ज़िंदगी में तुम्हें GSTIN सरकार से मिलता है जब तुम GST के लिए रजिस्टर करते हो।"

चलो GSTIN का फॉर्मेट समझते हैं:

पोज़ीशनमतलबउदाहरण
1-2स्टेट कोड05 (उत्तराखंड)
3-12बिज़नेस का PANAABCS1234A
13एंटिटी नंबर1
14Z (डिफ़ॉल्ट)Z
15चेक डिजिट5

PAN: परमानेंट अकाउंट नंबर (10 कैरेक्टर्स)।

मीरा ने टाइप किया: AABCS1234A

ध्यान दो कि PAN, GSTIN के अंदर ही होता है। GSTIN के 3 से 12 कैरेक्टर PAN होते हैं।

फ़ाइनेंशियल ईयर: वो 12 महीनों का पीरियड जिसके लिए तुम अकाउंट्स रखते हो।

भारत में फ़ाइनेंशियल ईयर 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है।

मीरा ने सेलेक्ट किया:

  • स्टार्ट डेट: 01-04-2025
  • एंड डेट: 31-03-2026

फ़ाइनेंशियल ईयर सेलेक्शन ड्रॉपडाउन जिसमें अप्रैल 2025 से मार्च 2026 दिख रहा है

करेंसी: इंडियन रुपीज़ (INR)। ये डिफ़ॉल्ट है।

कॉन्टैक्ट ब्योरा:

चरण 3: सेव करो

मीरा ने सेव बटन पर क्लिक किया। एक हरा मैसेज आया: "व्यवस्थितेशन ब्योरा सेव्ड सफली।"

व्यवस्थितेशन ब्योरा सेव करने के बाद सफलता मैसेज

"बस इतना?" मीरा ने हैरानी से पूछा।

"बस इतना," नेगी भैया मुस्कुराए। "अब सॉफ़्टवेयर जानता है कि हम कौन हैं। हर इनवॉइस, हर रिपोर्ट, हर डॉक्यूमेंट पर ये ब्योरा अपने आप आएँगी।"


फ़ाइनेंशियल ईयर को समझो

शर्मा सर ने देखा कि मीरा फ़ाइनेंशियल ईयर को लेकर कन्फ़्इस्तेमाल्ड है। वो बैठकर समझाने लगे।

"मीरा, इसे स्कूल ईयर की तरह समझो। स्कूल अप्रैल में शुरू होता है और मार्च में खत्म, है ना? फ़ाइनेंशियल ईयर भी ऐसा ही है। भारत में हर बिज़नेस 1 अप्रैल से अपना अकाउंटिंग ईयर शुरू करता है और 31 मार्च को खत्म।"

कैलेंडर ईयरफ़ाइनेंशियल ईयरऐसे लिखते हैं
अप्रैल 2025 से मार्च 2026FY 2025-262025-26
अप्रैल 2026 से मार्च 2027FY 2026-272026-27

"जनवरी से दिसंबर क्यों नहीं?" मीरा ने पूछा।

"क्योंकि सरकार ने ऐसा तय किया है," शर्मा सर हँसकर बोले। "आमदनी टैक्स एक्ट कहता है कि फ़ाइनेंशियल ईयर अप्रैल से मार्च है। तो सब बिज़नेस उसी को पालन करते हैं। जब तुम ERPLite सेट अप करते हो, तो बताते हो कि कौन से फ़ाइनेंशियल ईयर में काम कर रहे हो। तुम्हारी सारी ट्रांज़ैक्शंस उसी साल के अंदर होनी चाहिए।"

ज़रूरी नियम: अगर तुम FY 2025-26 में काम कर रहे हो, तो तुम सिर्फ़ 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच की तारीख वाली ट्रांज़ैक्शंस डाल सकते हो। अगर तुम 15 अप्रैल 2026 की तारीख वाली ट्रांज़ैक्शन डालने की कोशिश करोगे, तो सॉफ़्टवेयर अलाउ नहीं करेगा — वो FY 2026-27 में आती है।


ड्राफ़्ट → पोस्ट वर्कफ़्लो

दिन खत्म होने से पहले, नेगी भैया ने मीरा को एक और ज़रूरी कॉन्सेप्ट दिखाया।

"ERPLite में, जब तुम कोई भी ट्रांज़ैक्शन डालते हो — वाउचर, इनवॉइस, कुछ भी — वो पहले ड्राफ़्ट मोड में जाता है।"

"इसका मतलब?" मीरा ने पूछा।

"ड्राफ़्ट का मतलब है — सेव हो गया लेकिन फ़ाइनल नहीं है। इसे ऐसे समझो जैसे पहले पेंसिल से लिखना। मिटा सकते हो, बदल सकते हो, सुधार सकते हो। जब तुम सैटिस्फ़ाइड हो, तो पेन से लिखो। वो है पोस्टिंग।"

ये ऐसे काम करता है:

चरणक्या होता हैएडिट कर सकते हो?
ड्राफ़्टएंट्री सेव है लेकिन फ़ाइनल नहीं। अकाउंट्स पर कोई असर नहीं।हाँ, आराम से
पोस्टेडएंट्री फ़ाइनल है। अकाउंट्स अपडेट हो गए। GL एंट्रीज़ बन गईं।नहीं (रिवर्स करके फिर से डालना होगा)

"सीधे सब पोस्ट क्यों नहीं कर देते?" मीरा ने पूछा।

"क्योंकि गलतियाँ होती हैं," नेगी भैया ने कहा। "सोचो तुमने Rs. 50,000 का इनवॉइस बनाया लेकिन सही अमाउंट Rs. 5,000 था। अगर ये तुरंत पोस्ट हो जाए, तो अकाउंट्स गलत हो जाएँगे। ड्राफ़्ट्स में, तुम — या शर्मा सर — एंट्री को फ़ाइनल करने से पहले समीक्षा कर सकते हो।"

कुछ दफ़्तरों में, वर्कफ़्लो और भी स्ट्रक्चर्ड होता है:

  1. जूनियर अकाउंटेंट (मीरा जैसे) एंट्री बनाते हैं → ड्राफ़्ट में जाती है
  2. सीनियर अकाउंटेंट (नेगी भैया जैसे) समीक्षा करते हैं → अप्रूव करते हैं
  3. एंट्री पोस्ट होती है → अकाउंट्स अपडेट होते हैं

इसे अप्रूवल प्रक्रिया कहते हैं। ये सुनिश्चित करता है कि कोई भी एंट्री बिना जाँच के बुक्स में न जाए।

ड्राफ़्ट से पोस्ट वर्कफ़्लो डायग्राम: एंट्री क्रिएटेड → ड्राफ़्ट → समीक्षा → अप्रूव → पोस्टेड

"फ़िलहाल," शर्मा सर ने कहा, "तुम ड्राफ़्ट में एंट्री बनाओगी। नेगी भैया समीक्षा करेंगे। जब वो अप्रूव करेंगे, तब पोस्ट होगी। इस तरह, तुम बिना परमानेंट गलती की चिंता किए सीख सकती हो।"

मीरा को राहत मिली। सीखते वक़्त एक सेफ़्टी नेट।


आज मीरा ने क्या सेट अप किया

चलो लिस्ट बनाते हैं कि ERPLite के साथ पहले सेशन में मीरा ने क्या-क्या किया:

  1. लॉगिन किया ERPLite में अपने इस्तेमालरनेम और पासवर्ड से
  2. डैशबोर्ड एक्सप्लोर किया — एक नज़र में कैश बैलेंस, रिसीवेबल्स, पेएबल्स देखे
  3. मेनू समझा — चार सेक्शन: मास्टर्स, ट्रांज़ैक्शंस, रिपोर्ट्स, सेटिंग्स
  4. व्यवस्थितेशन सेट अप किया — कंपनी का नाम, पता, GSTIN, PAN, फ़ाइनेंशियल ईयर डाला
  5. ड्राफ़्ट → पोस्ट वर्कफ़्लो समझा — एंट्रीज़ फ़ाइनल करने से पहले समीक्षा होती हैं

कंप्यूटर पर पहले दिन के लिए बुरा नहीं!


क्विक रीकैप

  • ERP का मतलब है एंटरप्राइज़ रिसोर्स योजना — बिज़नेस के सारे कामों को मैनेज करने का एक सॉफ़्टवेयर
  • Udyamo ERPLite एक इंडियन ERP सॉफ़्टवेयर है जो GST, शेड्यूल III चार्ट ऑफ अकाउंट्स, और पूरे अकाउंटिंग साइकल को सपोर्ट करता है
  • डैशबोर्ड तुम्हारी होम स्क्रीन है — एक नज़र में ज़रूरी नंबर दिखाता है
  • मेन मेनू के चार सेक्शन हैं: मास्टर्स (फ़ाउंडेशन डेटा), ट्रांज़ैक्शंस (रोज़ की एंट्री), रिपोर्ट्स (नतीजे), सेटिंग्स (कॉन्फ़िगरेशन)
  • व्यवस्थितेशन सेटअप पहला कदम है — कंपनी का नाम, GSTIN, PAN, पता, और फ़ाइनेंशियल ईयर डालो
  • GSTIN 15 अंकों का नंबर है जिसमें स्टेट कोड और PAN शामिल होता है
  • भारत में फ़ाइनेंशियल ईयर 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है
  • ड्राफ़्ट → पोस्ट वर्कफ़्लो एंट्री को फ़ाइनल करने से पहले समीक्षा करने देता है
  • अप्रूवल प्रक्रिया का मतलब है कि एक सीनियर व्यक्ति एंट्री को पोस्ट होने से पहले जाँचता है

अभ्यास अभ्यास — ये खुद करो

तुम एक नए क्लाइंट के लिए ERPLite सेट अप कर रहे हो। ये हैं ब्योरा:

बिज़नेस नेम: Kumaon Fresh Fruits ओनर: Pankaj Mehta एड्रेस: Main Market, Ranikhet, District Almora, Uttarakhand - 263645 GSTIN: 05BMPPM5678B1Z3 PAN: BMPPM5678B फ़ाइनेंशियल ईयर: 2025-26 फ़ोन: 05966-XXXXXX ईमेल: [email protected]

टास्क्स:

  1. GSTIN से स्टेट कोड निकालो। ये किस स्टेट का है?
  2. GSTIN से PAN निकालो। ऊपर दिए गए PAN से मैच करो।
  3. FY 2025-26 की स्टार्ट और एंड डेट क्या हैं?
  4. अगर पंकज तुम्हें 5 अप्रैल 2026 की तारीख का बिल दे, तो क्या तुम उसे FY 2025-26 में डाल सकते हो? क्यों या क्यों नहीं?
  5. ERPLite मेनू के चार मुख्य सेक्शन लिखो और हर एक में एक चीज़ बताओ जो मिलेगी।

बोनस: अगर तुम्हारे पास ERPLite का एक्सेस है, तो लॉगिन करो और ये व्यवस्थितेशन सेट अप करो। पूरे व्यवस्थितेशन फॉर्म का स्क्रीनशॉट लो।


फ़न फ़ैक्ट

क्या तुम जानते हो? "कंप्यूटर" शब्द का मतलब पहले एक इंसान होता था — मशीन नहीं! 1900 के दशक की शुरुआत में, "कंप्यूटर्स" वो लोग (अक्सर महिलाएँ) होती थीं जो डेस्क पर बैठकर हाथ से कैलकुलेशंस करती थीं। पहले इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर्स इन्हीं कैलकुलेशंस को तेज़ी से करने के लिए बनाए गए। तो जब तुम ERPLite इस्तेमाल करते हो, तो तुम वही काम कर रहे हो जो पहले कमरे भर लोग मिलकर करते थे — लेकिन तुम अकेले कर रहे हो, मिनटों में। ये है टेक्नोलॉजी की ताकत। बागेश्वर की मीरा, हल्द्वानी में बैठी, भारत में बना सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करके, पूरे उत्तराखंड के बिज़नेस के अकाउंट्स सँभाल रही है। बुरा नहीं है।

मास्टर्स — नींव तैयार करना

मीरा अगले दिन जल्दी दफ़्तर आ गई। वो एक्साइटेड थी। कल उसने ERPLite में लॉगिन करना और नेविगेट करना सीखा था। आज नेगी भैया ने कुछ और दिलचस्प सिखाने का वादा किया था।

"कोई भी ट्रांज़ैक्शन डालने से पहले," नेगी भैया ने चाय बनाते हुए कहा, "हमें मास्टर्स सेट अप करने होंगे। इसे ऐसे समझो — खाना बनाने से पहले सामान लाना और किचन व्यवस्थित करना ज़रूरी है। मास्टर्स अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर का सामान हैं।"

शर्मा सर आए। "आज हम बिष्ट जी का बिज़नेस सिस्टम में सेट अप करते हैं। वो हमारे सबसे बड़े क्लाइंट हैं। होलसेल मसाले — हल्दी, जीरा, धनिया, लाल मिर्च। उत्तराखंड के सारे स्वाद।" वो मुस्कुराए। "चलो शुरू करते हैं।"


मास्टर्स क्या हैं?

ERPLite में, मास्टर्स फ़ाउंडेशन डेटा है — वो जानकारी जो तुम एक बार सेट अप करते हो और बार-बार इस्तेमाल करते हो।

जब तुम सेल्स इनवॉइस बनाते हो, तो हर बार ग्राहक का नाम, पता, और GSTIN नहीं टाइप करना पड़ता। तुम इसे ग्राहक मास्टर में एक बार सेट अप कर लो। उसके बाद बस ड्रॉपडाउन से "Bisht Traders" सेलेक्ट करो, और सारी ब्योरा अपने आप भर जाएँगी।

ERPLite में पाँच तरह के मास्टर्स हैं:

मास्टरक्या स्टोर होता हैउदाहरण
आइटम्सउत्पाद और सेवाएँहल्दी पाउडर, 1 kg पैक
ग्राहकोंवो लोग जो तुमसे खरीदते हैंनैनीताल स्पाइस रेस्टोरेंट
वेंडर्सवो लोग जिनसे तुम खरीदते होDelhi Spice Suppliers Pvt Ltd
एम्प्लॉईज़वो लोग जो तुम्हारे यहाँ काम करते हैंमीरा जोशी, ट्रेनी अकाउंटेंट
चार्ट ऑफ अकाउंट्ससभी अकाउंट हेडकैश अकाउंट, सेल्स अकाउंट, GST पेएबल

चलो Bisht Traders के लिए हर एक सेट अप करते हैं।


आइटम मास्टर — बिज़नेस क्या बेचता है?

बिष्ट जी Bisht Traders चलाते हैं, हल्द्वानी में एक होलसेल मसालों का बिज़नेस। वो दिल्ली और राजस्थान से कच्चे मसाले खरीदते हैं। उन्हें प्रक्रिया और पैक करते हैं। फिर कुमाऊँ भर की दुकानों और रेस्टोरेंट्स को बेचते हैं।

उनके मुख्य उत्पाद हैं:

  • हल्दी पाउडर (Turmeric Powder)
  • जीरा (Cumin Seeds)
  • धनिया पाउडर (Coriander Powder)
  • लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder)
  • गरम मसाला (Garam Masala — मिक्स्ड स्पाइस ब्लेंड)

हर उत्पाद को आइटम मास्टर में सेट अप करना होगा। चलो देखते हैं कि क्या-क्या जानकारी चाहिए।

एक आइटम सेट अप करना

मीरा ने बाएँ मेनू में मास्टर्स → आइटम्स → न्यू आइटम पर क्लिक किया।

ERPLite में न्यू आइटम फॉर्म जिसमें नाम, HSN कोड, यूनिट, GST रेट, और दामेज़ के फ़ील्ड्स हैं

एक फॉर्म आया इन फ़ील्ड्स के साथ:

आइटम नेम: उत्पाद का नाम। मीरा ने टाइप किया: Turmeric Powder

आइटम कोड: जल्दी रेफ़रेंस के लिए एक छोटा कोड। मीरा ने टाइप किया: TUR-001

"ऐसे कोड्स बनाओ जो समझ आएँ," नेगी भैया ने सुझाव दिया। "TUR हल्दी के लिए, CUM जीरे के लिए, COR धनिया के लिए। जब सैकड़ों आइटम्स होते हैं तो काम आता है।"

HSN कोड: इसका पूरा नाम है हार्मोनाइज़्ड सिस्टम ऑफ नोमेंक्लेचर। ये सरकार द्वारा हर उत्पाद को दिया गया नंबर है, GST के लिए।

"भारत में हर उत्पाद का एक HSN कोड होता है," शर्मा सर ने समझाया। "मसाले HSN क्लासिफ़िकेशन के चैप्टर 9 में आते हैं। हल्दी पाउडर का कोड है 0910 30 30।"

मसालाHSN कोड
हल्दी पाउडर0910 30 30
जीरा0909 31 10
धनिया पाउडर0909 21 20
लाल मिर्च पाउडर0904 21 20
गरम मसाला0910 99 90

"इन्हें याद करने की ज़रूरत नहीं," नेगी भैया ने कहा। "तुम GST पोर्टल पर देख सकते हो। लेकिन हमेशा सही HSN कोड डालो — गलत कोड मतलब गलत टैक्स रेट, और गलत टैक्स रेट मतलब GST फ़ाइलिंग में मुसीबत।"

यूनिट ऑफ मेज़रमेंट (UoM): इस आइटम को कैसे मापते हैं?

मीरा ने सेलेक्ट किया: KG (किलोग्राम)

दूसरी आम यूनिट्स हैं: PCS (पीसेज़), LTR (लीटर्स), MTR (मीटर्स), BAG, BOX, DOZ (दर्ज़न)।

GST रेट: इस आइटम पर लागू टैक्स रेट।

ज़्यादातर मसालों पर 5% GST लगता है (सेम स्टेट में बिक्री के लिए 2.5% CGST + 2.5% SGST, या दूसरे स्टेट में बिक्री के लिए 5% IGST)।

मीरा ने सेलेक्ट किया: 5%

सेलिंग दाम: बिष्ट जी इस आइटम को किस दाम पर बेचते हैं।

मीरा ने टाइप किया: Rs. 180 प्रति kg

परचेज़ दाम: बिष्ट जी कच्ची हल्दी किस दाम पर खरीदते हैं।

मीरा ने टाइप किया: Rs. 120 प्रति kg

"सेलिंग दाम और परचेज़ दाम का अंतर तुम्हारा ग्रॉस मार्जिन है," शर्मा सर ने बताया। "हल्दी पर Rs. 60 प्रति kg। ये 33% मार्जिन है। मसालों के लिए बुरा नहीं।"

श्रेणी / ग्रुप: तुम आइटम्स को श्रेणियाँ में ग्रुप कर सकते हो।

मीरा ने जीरे के लिए होल स्पाइसेज़ और पाउडर के लिए ग्राउंड स्पाइसेज़ श्रेणी बनाई।

आइटम सेव करना

मीरा ने सेव पर क्लिक किया। आइटम, आइटम लिस्ट में दिख गया।

ERPLite की आइटम लिस्ट जिसमें Turmeric Powder, HSN कोड, GST रेट, और दामेज़ दिख रहे हैं

फिर उसने बाकी आइटम्स बनाए:

आइटम का नामकोडHSN कोडUoMGST रेटसेलिंग दामपरचेज़ दाम
Turmeric PowderTUR-0010910 30 30KG5%Rs. 180Rs. 120
Cumin SeedsCUM-0010909 31 10KG5%Rs. 450Rs. 320
Coriander PowderCOR-0010909 21 20KG5%Rs. 160Rs. 100
Red Chilli PowderCHI-0010904 21 20KG5%Rs. 280Rs. 190
Garam MasalaGAR-0010910 99 90KG5%Rs. 520Rs. 350

"पाँच आइटम्स हो गए," मीरा ने कहा। "इतना मुश्किल नहीं था।"

"असलियत में बिष्ट जी के करीब पचास आइटम्स हैं," नेगी भैया ने कहा। "अलग-अलग पैक साइज़, अलग-अलग गुणवत्ता। लेकिन तरीका हर एक के लिए वही है।"


ग्राहक मास्टर — हमसे कौन खरीदता है?

Bisht Traders दुकानों और रेस्टोरेंट्स को मसाले बेचते हैं। ये उनके ग्राहकों हैं। चलो एक ग्राहक सेट अप करते हैं।

मीरा ने मास्टर्स → ग्राहकों → न्यू ग्राहक पर क्लिक किया।

न्यू ग्राहक फॉर्म जिसमें नाम, GSTIN, पता, कॉन्टैक्ट ब्योरा, क्रेडिट लिमिट, और पेमेंट टर्म्स के फ़ील्ड्स हैं

ग्राहक नेम: Nainital Spice Restaurant

GSTIN: 05AABCN9876A1Z2

"अगर ग्राहक GST-रजिस्टर्ड है, तो हमेशा उनका GSTIN डालो," शर्मा सर ने कहा। "टैक्स इनवॉइस पर ये ज़रूरी है। अगर वो रजिस्टर्ड नहीं हैं — जैसे कोई छोटी दुकान — तो ये खाली छोड़ दो।"

एड्रेस:

  • Mall Road, Nainital
  • District: Nainital
  • State: Uttarakhand
  • PIN: 263001

कॉन्टैक्ट पर्सन: श्री रवि पांडे

फ़ोन: 94100XXXXX

ईमेल: [email protected]

क्रेडिट लिमिट: ये मैक्सिमम अमाउंट है जो ये ग्राहक किसी भी समय तुम पर बाकी रख सकता है।

मीरा ने टाइप किया: Rs. 50,000

"क्रेडिट लिमिट ज़रूरी है," नेगी भैया ने समझाया। "बिष्ट जी कभी-कभी उधार पर माल देते हैं — ग्राहक बाद में पे करता है। लेकिन अगर कोई ग्राहक बिना पे किए खरीदता जाए तो? क्रेडिट लिमिट एक सेफ़्टी चेक है। अगर उनका आउटस्टैंडिंग बैलेंस Rs. 50,000 पहुँच जाता है, तो सॉफ़्टवेयर एक और इनवॉइस बनाने से पहले वॉर्निंग देगा।"

पेमेंट टर्म्स: ग्राहक को पे करने के लिए कितने दिन मिलते हैं?

मीरा ने सेलेक्ट किया: 30 दिन

इसका मतलब अगर बिष्ट जी 1 जनवरी को माल भेजें, तो ग्राहक को 31 जनवरी तक पे करना होगा। अगर उसके बाद पे करें, तो वो ओवरड्यू हैं।

फ़ील्डमतलबउदाहरण
ग्राहक नेमखरीदार का कानूनी नामNainital Spice Restaurant
GSTINGST रजिस्ट्रेशन नंबर05AABCN9876A1Z2
एड्रेसकहाँ स्थित हैंMall Road, Nainital
कॉन्टैक्ट पर्सनकिसे कॉल करेंश्री रवि पांडे
क्रेडिट लिमिटमैक्सिमम आउटस्टैंडिंग अलाउडRs. 50,000
पेमेंट टर्म्सपे करने के लिए दिन30 दिन

मीरा ने ग्राहक सेव किया। फिर दो और जोड़े:

  • Almora Kitchen Supplies — अल्मोड़ा की एक दुकान, क्रेडिट लिमिट Rs. 30,000, पेमेंट टर्म्स 15 दिन
  • Kumaon Hotel Group — एक होटल चेन, क्रेडिट लिमिट Rs. 2,00,000, पेमेंट टर्म्स 45 दिन

ग्राहक लिस्ट जिसमें तीन ग्राहकों उनकी क्रेडिट लिमिट्स और पेमेंट टर्म्स के साथ दिख रहे हैं


वेंडर मास्टर — हम किससे खरीदते हैं?

वेंडर वो है जिससे तुम खरीदते हो। बिष्ट जी आपूर्तिकर्ता से कच्चे मसाले खरीदते हैं। ये आपूर्तिकर्ता उनके वेंडर्स हैं।

मीरा ने मास्टर्स → वेंडर्स → न्यू वेंडर पर क्लिक किया।

ये फॉर्म ग्राहक फॉर्म जैसा ही दिखता है। असल में बहुत सारे फ़ील्ड्स एक जैसे हैं — नाम, GSTIN, पता, कॉन्टैक्ट। फ़र्क रिश्ता में है: ग्राहक तुमसे खरीदता है, वेंडर तुम्हें बेचता है।

वेंडर नेम: Delhi Spice Suppliers Pvt Ltd

GSTIN: 07AABCD1234E1Z6

ध्यान दो स्टेट कोड 07 है — ये दिल्ली है। जब बिष्ट जी (उत्तराखंड, स्टेट कोड 05) दिल्ली के आपूर्तिकर्ता (स्टेट कोड 07) से खरीदते हैं, तो ये इंटर-स्टेट ट्रांज़ैक्शन है। GST, IGST होगा (CGST + SGST नहीं)। ERPLite ये GSTINs के आधार पर अपने आप सँभालता है।

एड्रेस:

  • खारी बावली, पुरानी दिल्ली
  • State: Delhi
  • PIN: 110006

कॉन्टैक्ट पर्सन: श्री अशोक गुप्ता

फ़ोन: 98110XXXXX

पेमेंट टर्म्स: 45 दिन

TDS एप्लिकेबल: हाँ

"TDS क्या है?" मीरा ने पूछा।

"TDS के बारे में बाद में ब्योरा में पढ़ेंगे," शर्मा सर ने कहा। "अभी बस इतना जान लो कि कभी-कभी जब तुम किसी वेंडर को पे करते हो, तो एक छोटा परसेंटेज काटकर सरकार को भेजना होता है। वेंडर को बाकी मिलता है। अगर इस वेंडर पर TDS लागू होता है, तो ये बॉक्स टिक करो।"

मीरा ने वेंडर सेव किया। एक और जोड़ा:

  • Rajasthan Masala Co. — GSTIN 08AABCR5678B1Z4 (स्टेट कोड 08 = राजस्थान), जोधपुर में, पेमेंट टर्म्स 30 दिन
वेंडरजगहGSTIN स्टेटट्रांज़ैक्शन का प्रकार
Delhi Spice Suppliersदिल्ली07 (दिल्ली)इंटर-स्टेट (IGST)
Rajasthan Masala Co.जोधपुर08 (राजस्थान)इंटर-स्टेट (IGST)
लोकल पैकेजिंग शॉपहल्द्वानी05 (उत्तराखंड)इंट्रा-स्टेट (CGST + SGST)

एम्प्लॉई मास्टर — यहाँ कौन काम करता है?

Bisht Traders में कुछ एम्प्लॉईज़ हैं। एम्प्लॉई मास्टर में उनकी ब्योरा स्टोर होती हैं पेरोल (तनख़्वाह प्रक्रियािंग) के लिए।

मीरा ने मास्टर्स → एम्प्लॉईज़ → न्यू एम्प्लॉई पर क्लिक किया।

न्यू एम्प्लॉई फॉर्म जिसमें नाम, PAN, बैंक ब्योरा, डेज़िग्नेशन, और तनख़्वाह के फ़ील्ड्स हैं

एम्प्लॉई नेम: राकेश कुमार

डेज़िग्नेशन: वेयरहाउस असिस्टेंट

PAN: ABCPK1234A

"एम्प्लॉईज़ के लिए PAN ज़रूरी है," नेगी भैया ने कहा। "अगर तुम किसी को एक सर्टेन लिमिट से ऊपर तनख़्वाह देते हो, तो उनकी तनख़्वाह से TDS काटना होता है। TDS फ़ाइलिंग के लिए उनका PAN चाहिए।"

बैंक ब्योरा:

  • बैंक नेम: State Bank of India
  • अकाउंट नंबर: 12345678901
  • IFSC कोड: SBIN0001234

"बैंक ब्योरा क्यों चाहिए?" मीरा ने पूछा।

"क्योंकि आजकल तनख़्वाह बैंक ट्रांसफ़र से दी जाती है," नेगी भैया ने कहा। "ERPLite एक पेमेंट फ़ाइल बना सकता है जो तुम बैंक में अपलोड करो। बैंक फिर अपने आप हर एम्प्लॉई के अकाउंट में तनख़्वाह ट्रांसफ़र कर देता है। कोई कैश सँभालनािंग नहीं, कोई जोखिम नहीं।"

तनख़्वाह कंपोनेंट्स:

  • बुनियादी तनख़्वाह: Rs. 12,000 प्रति माह
  • HRA (हाउस रेंट अलाउंस): Rs. 3,000 प्रति माह
  • कन्वेयंस: Rs. 1,600 प्रति माह
  • कुल: Rs. 16,600 प्रति माह

तनख़्वाह कंपोनेंट्स और पेरोल के बारे में बाद के चैप्टर में ब्योरा से सीखेंगे। अभी मीरा ने बस बुनियादी ब्योरा डाले।


चार्ट ऑफ अकाउंट्स — रीढ़ की हड्डी

चार्ट ऑफ अकाउंट्स बिज़नेस में इस्तेमाल होने वाले सभी अकाउंट हेड्स की लिस्ट है। हमने इसे पिछले अध्याय में ब्योरा से पढ़ा। अच्छी खबर ये है कि ERPLite में पहले से लोड चार्ट ऑफ अकाउंट्स आता है जो शेड्यूल III पर आधारित है।

मीरा ने मास्टर्स → चार्ट ऑफ अकाउंट्स पर क्लिक किया।

ERPLite में चार्ट ऑफ अकाउंट्स का ट्री व्यू जिसमें एसेट्स, लायबिलिटीज़, आमदनी, और ख़र्चे ग्रुप्स दिख रहे हैं

उसे एक पेड़ जैसी स्ट्रक्चर दिखी:

├── Assets (संपत्ति)
│   ├── Non-Current Assets
│   │   ├── Fixed Assets
│   │   │   ├── Land & Building
│   │   │   ├── Plant & Machinery
│   │   │   ├── Furniture & Fixtures
│   │   │   └── Vehicles
│   │   └── Investments
│   └── Current Assets
│       ├── Cash & Cash Equivalents
│       │   ├── Cash in Hand
│       │   └── Bank Accounts
│       ├── Trade Receivables
│       ├── Inventory
│       └── Advance Tax
├── Liabilities (देनदारी)
│   ├── Non-Current Liabilities
│   │   └── Long-term Loans
│   └── Current Liabilities
│       ├── Trade Payables
│       ├── GST Payable
│       │   ├── CGST Payable
│       │   ├── SGST Payable
│       │   └── IGST Payable
│       ├── TDS Payable
│       └── Salary Payable
├── Income (आय)
│   ├── Revenue from Operations
│   │   └── Sales
│   ├── Other Income
│   │   ├── Interest Income
│   │   └── Discount Received
├── Expenses (खर्चे)
│   ├── Cost of Goods Sold
│   │   └── Purchases
│   ├── Employee Benefit Expenses
│   │   └── Salaries & Wages
│   ├── Administrative Expenses
│   │   ├── Rent
│   │   ├── Electricity
│   │   ├── Telephone
│   │   └── Office Supplies
│   └── Financial Costs
│       └── Bank Charges
└── Equity (मालिक की पूँजी)
    ├── Owner's Capital
    └── Retained Earnings

"ये सब पहले से सेट अप है?" मीरा हैरान थी।

"हाँ," शर्मा सर ने कहा। "ERPLite, कंपनीज़ एक्ट के शेड्यूल III को पालन करता है। स्टैंडर्ड अकाउंट्स पहले से लोड हैं। ज़रूरत हो तो और अकाउंट्स जोड़ सकते हो, लेकिन स्टैंडर्ड वाले कभी डिलीट नहीं करने चाहिए।"

एक कस्टम अकाउंट जोड़ना

बिष्ट जी को कभी-कभी अपने वेयरहाउस में स्टोरेज स्पेस किराए पर देने से आमदनी होती है। ये किसी भी मौजूदा अकाउंट में नहीं आता। मीरा को नया अकाउंट बनाना था।

उसने Other Income पर राइट-क्लिक किया और ऐड सब-अकाउंट सेलेक्ट किया।

अकाउंट नेम: Warehouse Rental Income अकाउंट टाइप: आमदनी पैरेंट ग्रुप: Other Income

उसने सेव पर क्लिक किया। नया अकाउंट Other Income के नीचे दिख गया।

चार्ट ऑफ अकाउंट्स जिसमें Other Income के नीचे नया Warehouse Rental Income दिख रहा है

"ऐसे कस्टमाइज़ करते हैं," नेगी भैया ने कहा। "स्ट्रक्चर पहले से तैयार है। तुम बस पेड़ में पत्तियाँ जोड़ो।"

अकाउंट टाइप्स समझना

चार्ट ऑफ अकाउंट्स में हर अकाउंट का एक टाइप होता है। ये तय करता है कि वो कैसे बिहेव करता है:

अकाउंट टाइपसामान्य बैलेंसकिससे बढ़ता हैकिससे घटता हैउदाहरण
एसेटडेबिटडेबिटक्रेडिटकैश, बैंक, रिसीवेबल्स
लायबिलिटीक्रेडिटक्रेडिटडेबिटपेएबल्स, लोन्स, GST पेएबल
आमदनीक्रेडिटक्रेडिटडेबिटसेल्स, इंटरेस्ट आमदनी
ख़र्चाडेबिटडेबिटक्रेडिटपरचेज़ेज़, रेंट, तनख़्वाह
इक्विटीक्रेडिटक्रेडिटडेबिटकैपिटल, रिटेंड अर्निंग्स

"ये तुमने डबल-एंट्री वाले चैप्टर में सीखा था," शर्मा सर ने मीरा को याद दिलाया। "सॉफ़्टवेयर भी वही नियम पालन करता है। जब तुम कोई वाउचर पोस्ट करते हो, ERPLite चेक करता है कि हर डेबिट का बराबर क्रेडिट हो। अगर एंट्री बैलेंस्ड नहीं है, तो सेव नहीं होने देगा।"


सब कुछ जोड़कर देखो

अब मीरा को एक ज़रूरी बात समझ आई। सभी मास्टर्स आपस में जुड़े हुए हैं:

  • जब वो सेल्स इनवॉइस बनाती है, तो ग्राहक (ग्राहक मास्टर से) और आइटम्स (आइटम मास्टर से) सेलेक्ट करती है। GST रेट, आइटम मास्टर से आता है। इनवॉइस, चार्ट ऑफ अकाउंट्स के अकाउंट्स में पोस्ट होता है (सेल्स, GST पेएबल, ट्रेड रिसीवेबल्स)।

  • जब वो परचेज़ बिल बनाती है, तो वेंडर और आइटम्स सेलेक्ट करती है। ऑनलाइन पे करते समय वेंडर की बैंक ब्योरा काम आती हैं।

  • जब वो पेरोल प्रक्रिया करती है, तो एम्प्लॉई डेटा इस्तेमाल होता है — तनख़्वाह कंपोनेंट्स, PAN, बैंक ब्योरा।

सब कुछ मास्टर्स से ही बहता है।

Masters ──► Transactions ──► Reports

Items ──────┐
Customers ──┤
Vendors ────┼──► Vouchers, Invoices, Bills ──► Trial Balance, P&L, Balance Sheet
Employees ──┤
Chart of ───┘
Accounts

"मास्टर्स ध्यान से सेट अप करो," शर्मा सर ने कहा। "अगर नींव गलत है, तो उसके ऊपर बना सब कुछ गलत होगा। आइटम मास्टर में गलत GST रेट का मतलब उस आइटम वाले हर इनवॉइस में गलत टैक्स। ग्राहक मास्टर में गलत GSTIN का मतलब उस ग्राहक को भेजा हर इनवॉइस GST पोर्टल पर ख़ारिज होगा।"


आज मीरा ने क्या सेट अप किया

Bisht Traders के लिए मीरा ने जो कुछ बनाया, उसका समरी:

मास्टरबनाए गए रिकॉर्ड
आइटम्सHSN कोड्स, GST रेट्स, और दामेज़ के साथ 5 मसाला उत्पाद
ग्राहकोंGSTINs, क्रेडिट लिमिट्स, और पेमेंट टर्म्स के साथ 3 ग्राहकों
वेंडर्सGSTINs और पेमेंट टर्म्स के साथ 2 आपूर्तिकर्ता
एम्प्लॉईज़PAN और बैंक ब्योरा के साथ 1 एम्प्लॉई
चार्ट ऑफ अकाउंट्स1 कस्टम अकाउंट जोड़ा (Warehouse Rental Income)

क्विक रीकैप

  • मास्टर्स ERPLite में फ़ाउंडेशन डेटा हैं — एक बार सेट अप करो, बार-बार इस्तेमाल करो
  • आइटम मास्टर में उत्पाद/सेवाएँ स्टोर होते हैं — HSN कोड, GST रेट, यूनिट, और दामेज़ के साथ
  • HSN कोड सरकार द्वारा हर उत्पाद को दिया गया नंबर है — ये GST रेट तय करता है
  • ग्राहक मास्टर में खरीदार की ब्योरा स्टोर होती हैं — GSTIN, क्रेडिट लिमिट, और पेमेंट टर्म्स
  • वेंडर मास्टर में आपूर्तिकर्ता की ब्योरा स्टोर होती हैं — ग्राहकों जैसा ही लेकिन खरीदारी की तरफ़ से
  • एम्प्लॉई मास्टर में स्टाफ़ की ब्योरा स्टोर होती हैं — PAN और बैंक अकाउंट, पेरोल के लिए
  • चार्ट ऑफ अकाउंट्स शेड्यूल III अकाउंट्स के साथ पहले से लोड है — कस्टम अकाउंट्स जोड़ सकते हो लेकिन स्टैंडर्ड वाले डिलीट नहीं करने चाहिए
  • क्रेडिट लिमिट ग्राहक को उधार पर ज़रूरत से ज़्यादा खरीदने से रोकता है
  • पेमेंट टर्म्स तय करता है कि ग्राहक या वेंडर को पेमेंट सेटल करने के लिए कितने दिन हैं
  • सभी मास्टर्स आपस में जुड़े हैं — आइटम्स, ग्राहकों, वेंडर्स, और अकाउंट्स सब मिलकर ट्रांज़ैक्शंस बनाते हैं

अभ्यास अभ्यास — ये खुद करो

रावत आंटी अल्मोड़ा में Rawat General Store चलाती हैं। वो एक छोटी किराना दुकान हैं। वो GST के लिए रजिस्टर्ड नहीं हैं (उनका टर्नओवर थ्रेशोल्ड से कम है)। वो स्थानीय होलसेलर्स से सामान खरीदती हैं और आस-पड़ोस के ग्राहकों को बेचती हैं।

टास्क 1: रावत आंटी के लिए आइटम्स बनाओ

इन उत्पाद के लिए आइटम मास्टर एंट्रीज़ बनाओ:

आइटमHSN कोडUoMGST रेटसेलिंग दामपरचेज़ दाम
तूर दाल0713KG5%Rs. 140Rs. 110
बासमती चावल1006KG5%Rs. 95Rs. 72
सरसों का तेल1514LTR5%Rs. 180Rs. 155
चीनी1701KG5%Rs. 45Rs. 38
गेहूँ का आटा1101KG0%Rs. 35Rs. 28

ध्यान दो कि गेहूँ के आटे पर 0% GST है — ये एग्ज़ेम्प्ट है। सभी खाने की चीज़ों पर एक जैसा टैक्स नहीं लगता।

टास्क 2: एक ग्राहक बनाओ

Bisht Traders के लिए ये ग्राहक सेट अप करो:

  • नेम: Pahadi Kitchen Restaurant
  • GSTIN: 05AADPK4567C1Z9
  • एड्रेस: Lake View Road, Bhimtal, Uttarakhand - 263136
  • कॉन्टैक्ट: श्रीमती सुनीता पंत
  • क्रेडिट लिमिट: Rs. 75,000
  • पेमेंट टर्म्स: 21 दिन

टास्क 3: सोचो

  1. हर आइटम के लिए सही HSN कोड डालना क्यों ज़रूरी है?
  2. अगर तुम किसी ग्राहक की क्रेडिट लिमिट Rs. 0 रख दो तो क्या होगा?
  3. बिष्ट जी उत्तराखंड (स्टेट कोड 05) के वेंडर से भी खरीदते हैं और दिल्ली (स्टेट कोड 07) के वेंडर से भी। इन दोनों परचेज़ेज़ का GST कैसे अलग होगा?

फ़न फ़ैक्ट

"स्पाइस" शब्द लैटिन के species से आया है, जिसका मतलब है "सामान" या "माल"। पुराने ज़माने में, मसाले इतने कीमती थे कि उन्हें मुद्रा (करेंसी) की तरह इस्तेमाल किया जाता था। काली मिर्च को "ब्लैक गोल्ड" कहा जाता था। अरब व्यापारियों ने अपने मसालों के रास्ते सदियों तक गुप्त रखे। बिष्ट जी जो मसाले अपने हल्द्वानी के वेयरहाउस से बेचते हैं — हल्दी, जीरा, धनिया — यही वो मसाले हैं जिन्होंने कभी साम्राज्य बनाए और समुद्रों पर जहाज़ भेजे। और यहाँ मीरा है, ERPLite में इन्हें ट्रैक कर रही है, एक-एक HSN कोड के साथ।

ERPLite में वाउचर एंट्री

बुधवार की सुबह थी। बिष्ट जी खुद दफ़्तर आए थे। उन्होंने मीरा की डेस्क पर एक मोटा फ़ोल्डर रखा। अंदर बिल, रसीदें, बैंक स्लिप, और कागज़ के छोटे टुकड़ों पर हाथ से लिखे नोट्स थे।

"ये एक हफ़्ते का है," बिष्ट जी ने कहा। "बिक्री, खरीदारी, कैश मिला, कैश दिया, एक बैंक ट्रांसफ़र, और कुछ एडजस्टमेंट्स। मुझे ये सब सिस्टम में चाहिए।"

मीरा ने ढेर को देखा। नेगी भैया ने कुर्सी खींची। "चिंता मत करो," उन्होंने कहा। "एक-एक करके देखेंगे। आज दिन खत्म होते-होते तुम ERPLite का हर वाउचर टाइप जान जाओगी।"

शर्मा सर ने बिष्ट जी के लिए चाय बनाई। "मीरा, ये असली काम है। जो कुछ तुमने कागज़ पर सीखा — जर्नल, डेबिट्स, क्रेडिट्स — यहाँ ये कंप्यूटर पर ज़िंदा होता है।"


8 वाउचर टाइप्स

पिछले अध्यायों में तुमने सीखा कि हर फ़ाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन को वाउचर से रिकॉर्ड किया जाता है। वाउचर अकाउंटिंग की बुनियादी ईंट है।

ERPLite में 8 वाउचर टाइप हैं। हर एक एक ख़ास तरह की ट्रांज़ैक्शन के लिए बनाया गया है।

#वाउचर टाइपकिसके लिएउदाहरण
1जर्नलएडजस्टमेंट्स, करेक्शंस, नॉन-कैश एंट्रीज़डेप्रिसिएशन एंट्री, क्लोज़िंग एंट्रीज़
2रिसीटपैसा अंदर आना (कैश या बैंक)ग्राहक ने Rs. 10,000 दिए
3पेमेंटपैसा बाहर जाना (कैश या बैंक)किराया Rs. 5,000 दिया
4कॉन्ट्राकैश और बैंक के बीच ट्रांसफ़रकैश बैंक में जमा किया
5सेल्समाल या सेवा बेचनाग्राहक को मसालों का इनवॉइस
6परचेज़माल या सेवा खरीदनाआपूर्तिकर्ता से कच्चे मसालों का बिल
7डेबिट नोटपरचेज़ रिटर्न या दाम एडजस्टमेंट (वेंडर को)आपूर्तिकर्ता को खराब मसाले वापस किए
8क्रेडिट नोटसेल्स रिटर्न या छूट (ग्राहक को)ग्राहक ने एक्सपायर्ड स्टॉक वापस किया

"इसे ऐसे समझो," नेगी भैया ने समझाया। "हर वाउचर टाइप एक अलग फ़ॉर्म की तरह है। सही सिचुएशन के लिए सही फ़ॉर्म इस्तेमाल करो। किराया दर्ज करने के लिए सेल्स फ़ॉर्म नहीं लगाओगे।"

चलो बिष्ट जी के कागज़ों के फ़ोल्डर से एक-एक करके देखते हैं।


1. जर्नल वाउचर — सर्व-उपयोगी एंट्री

जर्नल वाउचर उन एंट्रीज़ के लिए है जिनमें सीधे कैश या बैंक लेन-देन नहीं होता। ये सबसे फ़्लेक्सिबल वाउचर टाइप है।

कब इस्तेमाल करें:

  • डेप्रिसिएशन एंट्रीज़
  • अकाउंट्स के बीच एडजस्टमेंट्स
  • ओपनिंग बैलेंसेज़
  • साल के अंत में क्लोज़िंग एंट्रीज़
  • जो एंट्री दूसरे टाइप्स में फ़िट न हो

बिष्ट जी का कागज़: शर्मा सर का एक नोट — "डिलीवरी वैन पर डेप्रिसिएशन दर्ज करो — तिमाही के लिए Rs. 15,000।"

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → वाउचर एंट्री → जर्नल पर क्लिक किया।

ERPLite में जर्नल वाउचर एंट्री फॉर्म जिसमें डेट, डेबिट अकाउंट, क्रेडिट अकाउंट, अमाउंट, और नैरेशन फ़ील्ड्स हैं

उसने भरा:

फ़ील्डवैल्यू
डेट30-06-2025
डेबिट अकाउंटडेप्रिसिएशन ख़र्चा
क्रेडिट अकाउंटएक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन — व्हीकल
अमाउंटRs. 15,000
नैरेशनFY 2025-26 की Q1 के लिए डिलीवरी वैन पर डेप्रिसिएशन

नैरेशन फ़ील्ड क्या है?

नैरेशन एक छोटा डिस्क्रिप्शन है कि ये एंट्री क्यों बनाई गई। सॉफ़्टवेयर के हिसाब से ये ज़रूरी नहीं, लेकिन अभ्यास में बहुत ज़रूरी है।

"हमेशा नैरेशन लिखो," शर्मा सर ने ज़ोर देकर कहा। "छह महीने बाद तुम ये एंट्री देखोगी और सोचोगी — डेप्रिसिएशन क्यों डेबिट किया? नैरेशन बताता है। ये तुम्हारे भविष्य के लिए तुम्हारा खुद का नोट है।"

मीरा ने सेव ऐज़ ड्राफ़्ट पर क्लिक किया। वाउचर सेव हो गया लेकिन पोस्ट नहीं हुआ।


2. रिसीट वाउचर — पैसा अंदर आना

रिसीट वाउचर तब इस्तेमाल होता है जब बिज़नेस में पैसा आता है — ग्राहक अपना बिल पे करे, या किसी और सोर्स से आमदनी आए।

बिष्ट जी का कागज़: एक बैंक स्लिप जिसमें Nainital Spice Restaurant से NEFT से Rs. 25,000 मिले दिखा रहा है।

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → वाउचर एंट्री → रिसीट पर क्लिक किया।

रिसीट वाउचर फॉर्म जिसमें रिसीव्ड फ़्रॉम, अमाउंट, पेमेंट मोड, बैंक अकाउंट, और रेफ़रेंस फ़ील्ड्स दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट25-06-2025
रिसीव्ड फ़्रॉमNainital Spice Restaurant (ग्राहक मास्टर से सेलेक्ट किया)
अमाउंटRs. 25,000
पेमेंट मोडबैंक ट्रांसफ़र (NEFT)
बैंक अकाउंटSBI Haldwani — अकाउंट 98765
रेफ़रेंस नंबरNEFT Ref: UTR20250625001
नैरेशनNainital Spice Restaurant से इनवॉइस #SI-2025-042 के अगेंस्ट पेमेंट मिला

जब मीरा ने ड्रॉपडाउन से "Nainital Spice Restaurant" सेलेक्ट किया, ERPLite ने अपने आप उनके आउटस्टैंडिंग इनवॉइसेज़ दिखा दिए। उसने देखा कि इनवॉइस #SI-2025-042 Rs. 47,250 का पेंडिंग है। ये Rs. 25,000 पार्शियल पेमेंट थी।

"सॉफ़्टवेयर जानता है कि हर ग्राहक पर कितना बाकी है," नेगी भैया ने कहा। "जब तुम रिसीट दर्ज करते हो, उनका आउटस्टैंडिंग बैलेंस कम हो जाता है। इस एंट्री के बाद, Nainital Spice Restaurant पर Rs. 47,250 की जगह Rs. 22,250 बाकी होंगे।"

पर्दे के पीछे — GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
बैंक अकाउंट (SBI Haldwani)25,000
ट्रेड रिसीवेबल्स — Nainital Spice Restaurant25,000

बैंक बढ़ा (डेबिट)। रिसीवेबल्स घटे (क्रेडिट)। डबल-एंट्री का नियम पूरा हुआ।


3. पेमेंट वाउचर — पैसा बाहर जाना

पेमेंट वाउचर तब इस्तेमाल होता है जब बिज़नेस से पैसा बाहर जाता है — आपूर्तिकर्ता को पे करना, किराया देना, बिजली का बिल देना।

बिष्ट जी का कागज़: मकान मालिक की रसीद — जून 2025 का किराया Rs. 8,000 कैश में दिया।

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → वाउचर एंट्री → पेमेंट पर क्लिक किया।

पेमेंट वाउचर फॉर्म जिसमें पेड टू, अमाउंट, पेमेंट मोड, अकाउंट, और नैरेशन फ़ील्ड्स दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट01-06-2025
पेड टूलैंडलॉर्ड — श्री तिवारी
अमाउंटRs. 8,000
पेमेंट मोडकैश
ख़र्चा अकाउंटरेंट ख़र्चा
नैरेशनBisht Traders वेयरहाउस का किराया, जून 2025

पर्दे के पीछे — GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
रेंट ख़र्चा8,000
कैश इन हैंड8,000

रेंट ख़र्चा बढ़ा (डेबिट)। कैश घटा (क्रेडिट)।

"पैटर्न देखो," शर्मा सर ने कहा। "रिसीट का मतलब पैसा अंदर आना — बैंक या कैश बढ़ता है। पेमेंट का मतलब पैसा बाहर जाना — बैंक या कैश घटता है। एंट्री का दूसरा हिस्सा इस पर निर्भर करता है कि किसने दिया या किसको दिया।"


4. कॉन्ट्रा वाउचर — अपने ही अकाउंट्स के बीच पैसे का ट्रांसफ़र

कॉन्ट्रा वाउचर तब इस्तेमाल होता है जब तुम अपने ही अकाउंट्स के बीच पैसा ट्रांसफ़र करते हो — जैसे कैश बैंक में जमा करना, या बैंक से कैश निकालना।

बिष्ट जी का कागज़: एक बैंक डिपॉज़िट स्लिप — SBI Haldwani में Rs. 50,000 कैश जमा किया।

"ये न ख़र्चा है न आमदनी," नेगी भैया ने समझाया। "पैसा बस एक जेब से दूसरी जेब में जा रहा है — कैश ड्रॉअर से बैंक अकाउंट में। कुल पैसा बदला नहीं।"

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → वाउचर एंट्री → कॉन्ट्रा पर क्लिक किया।

कॉन्ट्रा वाउचर फॉर्म जिसमें फ़्रॉम अकाउंट, टू अकाउंट, अमाउंट, और डेट दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट20-06-2025
फ़्रॉम अकाउंटकैश इन हैंड
टू अकाउंटबैंक अकाउंट (SBI Haldwani)
अमाउंटRs. 50,000
नैरेशनबैंक में कैश जमा किया

पर्दे के पीछे — GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
बैंक अकाउंट (SBI Haldwani)50,000
कैश इन हैंड50,000

बैंक बढ़ा। कैश घटा। कुल एसेट्स वही रहे।

"इसे ऐसे समझो जैसे एक गिलास से दूसरे गिलास में पानी डालना," मीरा ने कहा।

"बिल्कुल!" शर्मा सर ने कहा। "ये बिल्कुल सही एनालॉजी है। कुल पानी नहीं बदला। बस गिलास बदला।"


5. सेल्स वाउचर — माल बेचना

सेल्स वाउचर तब इस्तेमाल होता है जब तुम माल या सेवाएँ बेचते हो। पूरा सेल्स साइकल (कोटेशन से पेमेंट तक) अगले अध्याय में कवर करेंगे। अभी एक बुनियादी सेल्स एंट्री देखते हैं।

बिष्ट जी का कागज़: Almora Kitchen Supplies को बिक्री का बिल — 20 kg हल्दी पाउडर और 10 kg जीरा।

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → सेल्स → सेल्स इनवॉइस पर क्लिक किया।

सेल्स इनवॉइस फॉर्म जिसमें ग्राहक, आइटम्स, क्वांटिटीज़, रेट्स, GST गणना, और कुल दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट22-06-2025
ग्राहकAlmora Kitchen Supplies
इनवॉइस नंबरSI-2025-051 (ऑटो-जेनरेटेड)

आइटम लाइन्स:

आइटमQtyरेटअमाउंटGST 5%कुल
Turmeric Powder20 kgRs. 180Rs. 3,600Rs. 180Rs. 3,780
Cumin Seeds10 kgRs. 450Rs. 4,500Rs. 225Rs. 4,725
ग्रैंड कुलRs. 8,100Rs. 405Rs. 8,505

चूँकि Bisht Traders और Almora Kitchen Supplies दोनों उत्तराखंड में हैं (सेम स्टेट), GST इस तरह बँटेगा:

  • CGST @ 2.5% = Rs. 202.50
  • SGST @ 2.5% = Rs. 202.50
  • कुल GST = Rs. 405

ERPLite ने ये सब अपने आप गणना किया आइटम मास्टर में स्टोर GST रेट और GSTINs के स्टेट कोड्स के आधार पर।

पर्दे के पीछे — GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
ट्रेड रिसीवेबल्स — Almora Kitchen Supplies8,505
सेल्स — स्पाइसेज़8,100
CGST पेएबल202.50
SGST पेएबल202.50

6. परचेज़ वाउचर — माल खरीदना

परचेज़ वाउचर खरीदारी दर्ज करता है। पूरा परचेज़ साइकल बाद के अध्याय में कवर करेंगे। अभी एक बुनियादी एंट्री देखो।

बिष्ट जी का कागज़: Delhi Spice Suppliers का बिल — 100 kg कच्ची हल्दी Rs. 120/kg पर।

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → परचेज़ → परचेज़ बिल पर क्लिक किया।

परचेज़ बिल फॉर्म जिसमें वेंडर, आइटम्स, क्वांटिटीज़, रेट्स, GST, और कुल दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट18-06-2025
वेंडरDelhi Spice Suppliers Pvt Ltd
बिल नंबरDSPL/2025/789 (वेंडर का बिल नंबर)

आइटम लाइन्स:

आइटमQtyरेटअमाउंटIGST 5%कुल
Turmeric (Raw)100 kgRs. 120Rs. 12,000Rs. 600Rs. 12,600

चूँकि Delhi Spice Suppliers दिल्ली (07) में हैं और Bisht Traders उत्तराखंड (05) में, ये एक इंटर-स्टेट परचेज़ है। तो GST, IGST होगा (CGST + SGST नहीं)।

पर्दे के पीछे — GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
परचेज़ — रॉ स्पाइसेज़12,000
IGST इनपुट क्रेडिट600
ट्रेड पेएबल्स — Delhi Spice Suppliers12,600

ध्यान दो कि परचेज़ेज़ पर दिया गया GST, इनपुट क्रेडिट (एक एसेट) में जाता है, पेएबल अकाउंट में नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि तुम ये अमाउंट सरकार से वापस क्लेम कर सकते हो। इनपुट टैक्स क्रेडिट के बारे में GST वाले चैप्टर्स में और सीखेंगे।


7. डेबिट नोट — आपूर्तिकर्ता को माल वापस करना

डेबिट नोट तब इश्यू किया जाता है जब तुम आपूर्तिकर्ता को माल वापस करते हो, या आपूर्तिकर्ता दाम कम करने पर राज़ी होता है।

बिष्ट जी का कागज़: एक नोट — "Delhi Spice Suppliers को 10 kg खराब हल्दी वापस की।"

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → वाउचर एंट्री → डेबिट नोट पर क्लिक किया।

डेबिट नोट फॉर्म जिसमें वेंडर, ओरिजिनल बिल रेफ़रेंस, आइटम्स रिटर्न्ड, और अमाउंट दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट20-06-2025
वेंडरDelhi Spice Suppliers Pvt Ltd
ओरिजिनल बिल रेफ़रेंसDSPL/2025/789
आइटमTurmeric (Raw)
क्वांटिटी रिटर्न्ड10 kg
रेटRs. 120/kg
अमाउंटRs. 1,200
IGSTRs. 60
कुलRs. 1,260
वजहखराब माल — हल्दी गीली थी और उसमें फफूँद लगी थी

"इसे डेबिट नोट क्यों कहते हैं?" मीरा ने पूछा।

"क्योंकि तुम आपूर्तिकर्ता का अकाउंट डेबिट कर रही हो," शर्मा सर ने समझाया। "तुम कह रही हो — अब तुम मुझ पर Rs. 1,260 कम बाकी हो। या तुम्हें मुझे रिफ़ंड भेजना होगा। मेरी बुक्स में तुम्हारा अकाउंट नीचे आता है।"

पर्दे के पीछे — GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
ट्रेड पेएबल्स — Delhi Spice Suppliers1,260
परचेज़ — रॉ स्पाइसेज़1,200
IGST इनपुट क्रेडिट60

ये ओरिजिनल परचेज़ एंट्री का उल्टा है। पेएबल्स घटे। परचेज़ेज़ घटे। इनपुट क्रेडिट भी घटा (क्योंकि माल वापस किया, तो उस पर GST क्लेम नहीं कर सकते)।


8. क्रेडिट नोट — ग्राहक माल वापस करे

क्रेडिट नोट तब इश्यू किया जाता है जब ग्राहक माल वापस करता है, या तुम बिक्री के बाद छूट देते हो।

बिष्ट जी का कागज़: एक नोट — "Almora Kitchen Supplies ने 5 kg हल्दी पाउडर वापस किया — शेल्फ़ लाइफ़ खत्म हो गई थी।"

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → वाउचर एंट्री → क्रेडिट नोट पर क्लिक किया।

क्रेडिट नोट फॉर्म जिसमें ग्राहक, ओरिजिनल इनवॉइस रेफ़रेंस, आइटम्स रिटर्न्ड, और अमाउंट दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट28-06-2025
ग्राहकAlmora Kitchen Supplies
ओरिजिनल इनवॉइसSI-2025-051
आइटमTurmeric Powder
क्वांटिटी रिटर्न्ड5 kg
रेटRs. 180/kg
अमाउंटRs. 900
CGSTRs. 22.50
SGSTRs. 22.50
कुलRs. 945
वजहउत्पाद की शेल्फ़ लाइफ़ डिलीवरी से पहले ही खत्म हो गई

"क्रेडिट नोट क्यों?" मीरा ने पूछा।

"क्योंकि तुम ग्राहक का अकाउंट क्रेडिट कर रही हो," शर्मा सर ने कहा। "तुम कह रही हो — अब तुम मुझ पर Rs. 945 कम बाकी हो। मैं तुम्हें क्रेडिट दे रही हूँ।"

पर्दे के पीछे — GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
सेल्स — स्पाइसेज़900
CGST पेएबल22.50
SGST पेएबल22.50
ट्रेड रिसीवेबल्स — Almora Kitchen Supplies945

सेल्स घटी। GST पेएबल घटा। रिसीवेबल्स घटे। सब कुछ रिवर्स हुआ।


डेबिट नोट vs. क्रेडिट नोट — एक सरल समरी

स्टूडेंट्स अक्सर इन दोनों में कन्फ़्इस्तेमाल होते हैं। याद रखने का आसान तरीका:

डेबिट नोटक्रेडिट नोट
कौन इश्यू करता है?खरीदार (तुम) विक्रेता (वेंडर) कोविक्रेता (तुम) खरीदार (ग्राहक) को
कब?परचेज़ रिटर्न या दाम डिस्प्यूटसेल्स रिटर्न या छूट दिया
वेंडर के अकाउंट पर असरवेंडर का बैलेंस घटता है
ग्राहक के अकाउंट पर असरग्राहक का बैलेंस घटता है
GST पर असरतुम्हारा इनपुट क्रेडिट घटता हैतुम्हारा GST पेएबल घटता है

याद रखने की आसान ट्रिक: डेबिट नोट = तुमने कुछ गलत खरीदा। क्रेडिट नोट = तुमने कुछ गलत बेचा।


ऑटो-नंबरिंग

"क्या तुमने गौर किया," नेगी भैया ने बताया, "कि तुमने वाउचर नंबर नहीं टाइप किया? सिस्टम ने अपने आप बनाया।"

ERPLite सभी वाउचर्स के लिए ऑटो-नंबरिंग इस्तेमाल करता है। हर वाउचर टाइप की अपनी नंबर सीरीज़ होती है:

वाउचर टाइपनंबर फ़ॉर्मेटउदाहरण
जर्नलJV-2025-001JV-2025-001, JV-2025-002, ...
रिसीटRV-2025-001RV-2025-001, RV-2025-002, ...
पेमेंटPV-2025-001PV-2025-001, PV-2025-002, ...
कॉन्ट्राCV-2025-001CV-2025-001, CV-2025-002, ...
सेल्स इनवॉइसSI-2025-001SI-2025-001, SI-2025-002, ...
परचेज़ बिलPB-2025-001PB-2025-001, PB-2025-002, ...
डेबिट नोटDN-2025-001DN-2025-001, DN-2025-002, ...
क्रेडिट नोटCN-2025-001CN-2025-001, CN-2025-002, ...

"ऑटो-नंबरिंग गैप्स और डुप्लिकेट्स रोकता है," नेगी भैया ने कहा। "कभी दो इनवॉइसेज़ का सेम नंबर नहीं हो सकता। और कभी कोई नंबर छोड़ना नहीं हो सकता। ये GST कम्प्लायंस के लिए ज़रूरी है — टैक्स डिपार्टमेंट कंटीन्यूअस, अनब्रोकन इनवॉइस नंबर्स देखना चाहता है।"

नंबर फ़ॉर्मेट को सेटिंग्स → नंबर सीरीज़ में कस्टमाइज़ किया जा सकता है। लेकिन ज़्यादातर बिज़नेस के लिए डिफ़ॉल्ट फ़ॉर्मेट ठीक रहता है।


ड्राफ़्ट → पोस्ट वर्कफ़्लो — ऐक्शन में

अब मीरा ने बिष्ट जी के फ़ोल्डर के सारे वाउचर्स डाल दिए थे। लेकिन सब ड्राफ़्ट स्टेटस में थे।

नेगी भैया ने ड्राफ़्ट वाउचर्स की लिस्ट खोली।

ड्राफ़्ट वाउचर्स की लिस्ट जिसमें मीरा की सारी एंट्रीज़ डेट, टाइप, अमाउंट, और स्टेटस के साथ दिख रही हैं

"चलो मैं एक-एक समीक्षा करता हूँ," उन्होंने कहा।

उन्होंने पहला वाउचर खोला — डेप्रिसिएशन की जर्नल एंट्री। उन्होंने चेक किया:

  • डेट सही है?
  • अकाउंट्स सही हैं (डेप्रिसिएशन ख़र्चा डेबिटेड, एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन क्रेडिटेड)?
  • अमाउंट सही है (Rs. 15,000)?
  • नैरेशन ठीक है?

सब कुछ ठीक था। उन्होंने अप्रूव ऐंड पोस्ट पर क्लिक किया।

वाउचर का स्टेटस ड्राफ़्ट से पोस्टेड में बदल रहा है, हरे चेकमार्क के साथ

स्टेटस ड्राफ़्ट से पोस्टेड हो गया। एक हरा बैनर आया: "वाउचर JV-2025-001 पोस्टेड सफली। GL एंट्रीज़ क्रिएटेड।"

"एक बार वाउचर पोस्ट हो जाए," नेगी भैया ने समझाया, "तो तुम उसे एडिट नहीं कर सकते। GL एंट्रीज़ बन चुकी हैं। अकाउंट्स अपडेट हो चुके हैं। अगर पोस्टिंग के बाद गलती मिले, तो तुम्हें एक रिवर्सल एंट्री बनानी होगी — एक नया वाउचर जो गलत वाले को अनडू करे।"

उन्होंने एक-एक करके हर वाउचर देखा:

वाउचरस्टेटसनेगी भैया ने क्या किया
JV-2025-001 (डेप्रिसिएशन)ड्राफ़्ट → पोस्टेडअप्रूव किया
RV-2025-001 (ग्राहक से रिसीट)ड्राफ़्ट → पोस्टेडअप्रूव किया
PV-2025-001 (किराया पेमेंट)ड्राफ़्ट → वापस भेजाअमाउंट Rs. 8,000 नहीं Rs. 8,500 होना चाहिए
CV-2025-001 (कैश डिपॉज़िट)ड्राफ़्ट → पोस्टेडअप्रूव किया
SI-2025-051 (सेल्स इनवॉइस)ड्राफ़्ट → पोस्टेडअप्रूव किया
PB-2025-001 (परचेज़ बिल)ड्राफ़्ट → पोस्टेडअप्रूव किया
DN-2025-001 (डेबिट नोट)ड्राफ़्ट → पोस्टेडअप्रूव किया
CN-2025-001 (क्रेडिट नोट)ड्राफ़्ट → पोस्टेडअप्रूव किया

एक वाउचर वापस भेजा गया — किराये की पेमेंट। नेगी भैया ने गौर किया कि मकान मालिक की रसीद में असल में Rs. 8,500 लिखा है (इस महीने किराया बढ़ गया था)। मीरा ने गलती से Rs. 8,000 डाल दिया था।

"देखा?" नेगी भैया ने कहा। "इसीलिए ड्राफ़्ट चरण है। मैंने बुक्स में जाने से पहले गलती पकड़ ली। अब तुम इसे ठीक करो और फिर सेव करो।"

मीरा ने ड्राफ़्ट खोला, अमाउंट Rs. 8,500 कर दिया, नैरेशन अपडेट किया, और सेव किया। नेगी भैया ने समीक्षा करके पोस्ट कर दिया।


GL पोस्टिंग अपने आप कैसे होती है

"क्या मैं एक बात पूछ सकती हूँ?" मीरा ने कहा। "जब हम कागज़ पर अकाउंटिंग करते थे, तो मुझे जर्नल एंट्री लिखनी होती, फिर लेजर में पोस्ट करना, फिर ट्रायल बैलेंस बनाना। वो तीन चरण थे। ERPLite में, मैं बस वाउचर डालती हूँ और... बाकी सब अपने आप?"

"बिल्कुल," शर्मा सर ने कहा। "यही सॉफ़्टवेयर का जादू है।"

जब तुम वाउचर पोस्ट करते हो तो पर्दे के पीछे ये होता है:

चरण 1: तुम वाउचर बनाते हो (जैसे सेल्स इनवॉइस)
         ↓
चरण 2: समीक्षाअर अप्रूव करके पोस्ट करता है
         ↓
चरण 3: ERPLite अपने आप GL (जनरल लेजर) एंट्रीज़ बनाता है
         ↓
चरण 4: हर अकाउंट का लेजर तुरंत अपडेट होता है
         ↓
चरण 5: ट्रायल बैलेंस, P&L, बैलेंस शीट — सब रियल टाइम में अपडेट

"कागज़ पर ये घंटों लगता था," शर्मा सर ने कहा। "कंप्यूटर पर एक सेकंड से कम लगता है। इसीलिए बिज़नेसेज़ ERP सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करते हैं। इसलिए नहीं कि वो आलसी हैं — इसलिए कि वो एक्यूरेसी और स्पीड चाहते हैं।"

किसी भी वाउचर की GL एंट्रीज़ देखने के लिए वाउचर पर क्लिक करो और व्यू GL एंट्रीज़ या व्यू लेजर पोस्टिंग सेलेक्ट करो।

सेल्स इनवॉइस की GL एंट्रीज़ व्यू जिसमें सभी ऑटो-क्रिएटेड डेबिट और क्रेडिट एंट्रीज़ दिख रही हैं


एक दिन का काम — समरी

मीरा ने आज 8 वाउचर्स डाले। चलो बिष्ट जी के फ़ोल्डर से जो प्रक्रिया किया उसका समरी देखते हैं:

#वाउचर टाइपडिस्क्रिप्शनअमाउंट (Rs.)
1जर्नलडिलीवरी वैन पर डेप्रिसिएशन15,000
2रिसीटNainital Spice Restaurant से पेमेंट25,000
3पेमेंटवेयरहाउस का किराया8,500
4कॉन्ट्राबैंक में कैश जमा50,000
5सेल्सAlmora Kitchen Supplies को इनवॉइस8,505
6परचेज़Delhi Spice Suppliers का बिल12,600
7डेबिट नोटआपूर्तिकर्ता को खराब हल्दी वापसी1,260
8क्रेडिट नोटग्राहक से एक्सपायर्ड हल्दी वापसी945

"आठ वाउचर्स," मीरा ने कहा। "आठ अलग टाइप्स। आठ अलग GL एंट्रीज़। एक ही दोपहर में हो गया।"

"और कल," नेगी भैया ने कहा, "तुम लंच से पहले तीस कर लोगी। स्पीड अभ्यास से आती है।"


क्विक रीकैप

  • ERPLite में 8 वाउचर टाइप्स हैं: जर्नल, रिसीट, पेमेंट, कॉन्ट्रा, सेल्स, परचेज़, डेबिट नोट, क्रेडिट नोट
  • जर्नल = एडजस्टमेंट्स और नॉन-कैश एंट्रीज़
  • रिसीट = ग्राहकों या दूसरे सोर्सेज़ से पैसा आना
  • पेमेंट = ख़र्चे या वेंडर पेमेंट्स के लिए पैसा जाना
  • कॉन्ट्रा = अपने ही कैश और बैंक अकाउंट्स के बीच ट्रांसफ़र
  • सेल्स = बेचे गए माल/सेवाओं के इनवॉइसेज़
  • परचेज़ = खरीदे गए माल/सेवाओं के बिल्स
  • डेबिट नोट = वेंडर्स को रिटर्न्स (उन पर बाकी कम होता है)
  • क्रेडिट नोट = ग्राहकों से रिटर्न्स (उन पर बाकी कम होता है)
  • हमेशा नैरेशन लिखो — ये बताता है कि एंट्री क्यों बनाई
  • ऑटो-नंबरिंग सुनिश्चित करता है कि हर वाउचर का एक यूनीक, सीक्वेंशियल नंबर हो
  • ड्राफ़्ट → पोस्ट वर्कफ़्लो फ़ाइनल करने से पहले समीक्षा करने देता है
  • पोस्ट होने के बाद, GL एंट्रीज़ अपने आप बनती हैं — अकाउंट्स, ट्रायल बैलेंस, और रिपोर्ट्स तुरंत अपडेट होते हैं
  • पोस्टिंग के बाद गलती मिले तो रिवर्सल एंट्री बनाओ — पोस्टेड वाउचर कभी डिलीट नहीं करना

अभ्यास अभ्यास — ये खुद करो

यहाँ Bisht Traders की 6 ट्रांज़ैक्शंस हैं। हर एक के लिए सही वाउचर टाइप पहचानो, और GL एंट्री लिखो (कौन सा अकाउंट डेबिट होगा, कौन सा क्रेडिट)।

  1. बिष्ट जी ने Rs. 2,000 का बिजली बिल चेक से दिया।

    • वाउचर टाइप: ?
    • डेबिट: ? | क्रेडिट: ?
  2. Kumaon Hotel Group ने NEFT से Rs. 1,50,000 दिए।

    • वाउचर टाइप: ?
    • डेबिट: ? | क्रेडिट: ?
  3. बिष्ट जी ने दफ़्तर के काम के लिए बैंक से Rs. 20,000 कैश निकाला।

    • वाउचर टाइप: ?
    • डेबिट: ? | क्रेडिट: ?
  4. बिष्ट जी ने Pahadi Kitchen को 50 kg गरम मसाला Rs. 520/kg पर बेचा (plus 5% GST)। दोनों उत्तराखंड में हैं।

    • वाउचर टाइप: ?
    • कुल इनवॉइस अमाउंट गणना करो
    • GL एंट्री लिखो
  5. Pahadi Kitchen ने 5 kg गरम मसाला वापस किया — गलत फ़्लेवर ब्लेंड।

    • वाउचर टाइप: ?
    • क्रेडिट नोट का अमाउंट गणना करो
    • GL एंट्री लिखो
  6. शर्मा सर ने मीरा से कहा कि दफ़्तर फ़र्नीचर पर क्वार्टरली डेप्रिसिएशन दर्ज करो — Rs. 3,000।

    • वाउचर टाइप: ?
    • डेबिट: ? | क्रेडिट: ?

फ़न फ़ैक्ट

पुराने ज़माने में — हम 500 साल पहले की बात कर रहे हैं — Venice और Florence के इटालियन व्यापारी हर ट्रांज़ैक्शन एक किताब में लिखते थे जिसे giornale (जर्नल) कहते थे। "जर्नल" शब्द फ़्रेंच शब्द jour से आया है, जिसका मतलब है "दिन" — क्योंकि ये एक डेली रिकॉर्ड था। जब मीरा ERPLite में जर्नल वाउचर डालती है, तो वो एक ऐसी परंपरा आगे बढ़ा रही है जो मुग़ल साम्राज्य से भी पुरानी है। औज़ार बदल गए — पंख वाली कलम से कीबोर्ड तक — लेकिन लॉजिक बिल्कुल वही है। डेबिट बाईं तरफ़। क्रेडिट दाईं तरफ़। बुक्स को बैलेंस करना है।

सेल्स साइकल — कोटेशन से पेमेंट तक

दफ़्तर में फ़ोन बजा। नेगी भैया ने उठाया। "हाँ, बिष्ट जी... नया ग्राहक? नैनीताल ग्रैंड होटल... उन्हें मंथली मसाला आपूर्ति के लिए कोटेशन चाहिए?... ठीक है, मैं बना देता हूँ।"

उन्होंने फ़ोन रखा और मीरा की तरफ़ मुड़े। "बिल्कुल सही टाइमिंग। अब तुम पूरा सेल्स साइकल सीखने वाली हो। नैनीताल में एक नया होटल बिष्ट जी से हर महीने मसाले खरीदना चाहता है। उन्हें पहले फ़ॉर्मल कोटेशन चाहिए। अगर दामेज़ पसंद आए, तो ऑर्डर पुष्टि करेंगे। फिर हम डिलीवर करेंगे और इनवॉइस भेजेंगे। फिर वो पे करेंगे।"

"तो ये बस एक चरण नहीं है?" मीरा ने पूछा।

"नहीं," नेगी भैया ने कहा। "बिक्री एक सफ़र है — पहली बातचीत से लेकर आखिरी रुपये की वसूली तक। ERPLite इस सफ़र के हर कदम को मैनेज करता है। दिखाता हूँ।"


सेल्स साइकल — एक ओवरव्यू

बिज़नेस में, बिक्री शायद ही कभी एक चरण में होती है। खासकर B2B (बिज़नेस-टू-बिज़नेस) ट्रांज़ैक्शंस में — जहाँ एक कंपनी दूसरी कंपनी को बेचती है — एक फ़ॉर्मल प्रक्रिया होता है।

यहाँ पूरा सेल्स साइकल है:

ग्राहक दामेज़ पूछता है
        ↓
तुम प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस (कोटेशन) भेजते हो
        ↓
ग्राहक पुष्टि करता है → तुम सेल्स ऑर्डर बनाते हो
        ↓
तुम माल डिलीवर करते हो और टैक्स इनवॉइस भेजते हो
        ↓
ग्राहक पे करता है → तुम पेमेंट रिसीट दर्ज करते हो

चलो हर चरण समझते हैं:

चरणडॉक्यूमेंटमकसद
1प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइसएक कोटेशन — "ये हैं हमारे दामेज़, इतना खर्च आएगा"
2सेल्स ऑर्डरपुष्टिेशन — "ग्राहक ने मान लिया, हम डिलीवर करेंगे"
3सेल्स इनवॉइसबिल — "हमने डिलीवर किया, अब पे करो"
4पेमेंट रिसीटवसूली — "ग्राहक ने पे कर दिया"

इसे रेस्टोरेंट में खाना ऑर्डर करने की तरह समझो:

  1. तुम मेनू देखते हो (प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस — दामेज़ दिखाता है)
  2. तुम वेटर को ऑर्डर देते हो (सेल्स ऑर्डर — पुष्टि)
  3. खाना आता है बिल के साथ (सेल्स इनवॉइस — अब पे करो)
  4. तुम बिल पे करते हो (पेमेंट रिसीट — हो गया!)

ERPLite में, हर चरण अगले से जुड़ा है। एक प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस को एक क्लिक में सेल्स ऑर्डर में बदल सकते हो। सेल्स ऑर्डर को सेल्स इनवॉइस में बदल सकते हो। सब कुछ कनेक्टेड है।


चरण 1: प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस — कोटेशन

नैनीताल का होटल — Nainital Grand Hotel — जानना चाहता है कि मंथली मसाला आपूर्ति में कितना खर्च आएगा। मीरा को उन्हें प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस भेजना है।

पहले, उसने होटल को ग्राहक मास्टर में नए ग्राहक के रूप में सेट अप किया:

फ़ील्डवैल्यू
ग्राहक नेमNainital Grand Hotel
GSTIN05AAECN7890D1Z1
एड्रेसThe Mall Road, Nainital, Uttarakhand - 263001
कॉन्टैक्ट पर्सनश्री दिनेश रावत, परचेज़ प्रबंधक
क्रेडिट लिमिटRs. 1,00,000
पेमेंट टर्म्स30 दिन

अब उसने प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस बनाया।

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → सेल्स → प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस → न्यू पर क्लिक किया।

ERPLite में प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस फॉर्म जिसमें ग्राहक सेलेक्शन, आइटम लाइन्स, और कुल दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट01-07-2025
ग्राहकNainital Grand Hotel
वैलिड अनटिल15-07-2025 (कोट 15 दिन के लिए वैलिड है)

आइटम लाइन्स:

आइटमQty (प्रति माह)रेट (Rs./kg)अमाउंट (Rs.)
Turmeric Powder10 kg1801,800
Cumin Seeds5 kg4502,250
Coriander Powder8 kg1601,280
Red Chilli Powder5 kg2801,400
Garam Masala3 kg5201,560
सब-कुल8,290
GST @ 5%414.50
ग्रैंड कुल8,704.50

चूँकि Bisht Traders और Nainital Grand Hotel दोनों उत्तराखंड में हैं, GST इंट्रा-स्टेट है:

  • CGST @ 2.5% = Rs. 207.25
  • SGST @ 2.5% = Rs. 207.25

मीरा ने सेव पर क्लिक किया। प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस तैयार हो गया।

ज़रूरी बात: प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस कोई टैक्स इनवॉइस नहीं है। ये बस एक कोटेशन है। ये कोई GL एंट्री नहीं बनाता। ये अकाउंट्स पर कोई असर नहीं डालता। ये बस ग्राहक को बताने का फ़ॉर्मल तरीका है — "हम ये पेशकश कर सकते हैं।"

जेनरेट हुआ प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस PDF जिसमें Bisht Traders का हेडर, आइटम्स, GST ब्रेकअप, और टर्म्स दिख रहे हैं

मीरा ने प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस Nainital Grand Hotel के श्री दिनेश रावत को ईमेल कर दिया।


चरण 2: सेल्स ऑर्डर — पुष्टिेशन

तीन दिन बाद, श्री दिनेश रावत ने वापस कॉल किया। "हम कोटेशन स्वीकार करते हैं। कृपया 15 जुलाई से मंथली आपूर्ति शुरू करें।"

अब मीरा को प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस को सेल्स ऑर्डर में बदलना था।

उसने प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस (PI-2025-012) खोला और बटन पर क्लिक किया: कन्वर्ट टू सेल्स ऑर्डर

प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस पेज पर कन्वर्ट टू सेल्स ऑर्डर बटन

ERPLite ने प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस की सारी ब्योरा अपने आप भर दीं — ग्राहक, आइटम्स, क्वांटिटीज़, रेट्स। मीरा को बस डिलीवरी डेट डालनी थी।

फ़ील्डवैल्यू
सेल्स ऑर्डर नंबरSO-2025-008 (ऑटो-जेनरेटेड)
ऑर्डर डेट05-07-2025
डिलीवरी डेट15-07-2025
सभी आइटम्सप्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस से कैरी ओवर

उसने सब समीक्षा किया और सेव पर क्लिक किया।

सेल्स ऑर्डर क्या करता है?

सेल्स ऑर्डर एक इंटरनल पुष्टिेशन है। ये वेयरहाउस टीम को बताता है: "ये आइटम्स 15 जुलाई तक डिलीवरी के लिए तैयार करो।" ये अकाउंट्स टीम को बताता है: "जल्द ही इनवॉइस बनाना होगा।"

प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस की तरह, सेल्स ऑर्डर भी GL एंट्रीज़ नहीं बनाता। ये एक योजना डॉक्यूमेंट है, अकाउंटिंग डॉक्यूमेंट नहीं। अकाउंट्स पर असर तभी पड़ता है जब असली इनवॉइस बनता है।

डॉक्यूमेंटGL एंट्रीज़ बनता है?अकाउंट्स पर असर?
प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइसनहींनहीं
सेल्स ऑर्डरनहींनहीं
सेल्स इनवॉइसहाँहाँ
पेमेंट रिसीटहाँहाँ

"इसे ऐसे समझो," शर्मा सर ने कहा। "प्रोफ़ॉर्मा एक वादा है। सेल्स ऑर्डर एक प्लान है। इनवॉइस असली चीज़ है।"


चरण 3: सेल्स इनवॉइस — बिल

15 जुलाई को, बिष्ट जी ने Nainital Grand Hotel में मसाले डिलीवर कर दिए। अब मीरा को टैक्स इनवॉइस बनाना था।

उसने सेल्स ऑर्डर SO-2025-008 खोला और कन्वर्ट टू इनवॉइस पर क्लिक किया।

सेल्स ऑर्डर पेज पर कन्वर्ट टू इनवॉइस बटन

फिर से, ERPLite ने सारी ब्योरा कैरी ओवर कर दीं। मीरा ने समीक्षा किया:

सेल्स इनवॉइस:

फ़ील्डवैल्यू
इनवॉइस नंबरSI-2025-067 (ऑटो-जेनरेटेड)
इनवॉइस डेट15-07-2025
ग्राहकNainital Grand Hotel
GSTIN05AAECN7890D1Z1
प्लेस ऑफ आपूर्तिUttarakhand (सेम स्टेट)

आइटम लाइन्स (पहले जैसी):

आइटमHSNQtyरेटअमाउंटCGST 2.5%SGST 2.5%कुल
Turmeric Powder0910 30 3010 kg1801,80045.0045.001,890.00
Cumin Seeds0909 31 105 kg4502,25056.2556.252,362.50
Coriander Powder0909 21 208 kg1601,28032.0032.001,344.00
Red Chilli Powder0904 21 205 kg2801,40035.0035.001,470.00
Garam Masala0910 99 903 kg5201,56039.0039.001,638.00
कुल्स8,290207.25207.258,704.50

मीरा ने सेव ऐज़ ड्राफ़्ट पर क्लिक किया।

नेगी भैया ने इनवॉइस समीक्षा किया। उन्होंने चेक किया:

  • ग्राहक ब्योरा और GSTIN — सही
  • हर आइटम का HSN कोड — सही
  • GST रेट और गणना — सही
  • इनवॉइस कुल — Rs. 8,704.50 — सही

उन्होंने अप्रूव ऐंड पोस्ट पर क्लिक किया।

इनवॉइस पोस्टेड सफली, GL एंट्रीज़ क्रिएटेड का मैसेज

GL ऑटो-पोस्टिंग — पर्दे के पीछे क्या हुआ

जैसे ही इनवॉइस पोस्ट हुआ, ERPLite ने अपने आप ये GL एंट्रीज़ बनाईं:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
ट्रेड रिसीवेबल्स — Nainital Grand Hotel8,704.50
सेल्स — स्पाइसेज़8,290.00
CGST पेएबल207.25
SGST पेएबल207.25

चलो हर लाइन समझते हैं:

  1. ट्रेड रिसीवेबल्स बढ़ा (डेबिट): होटल पर अब बिष्ट जी का Rs. 8,704.50 बाकी है। ये एक एसेट है — पैसा जो भविष्य में आएगा।

  2. सेल्स बढ़ा (क्रेडिट): Rs. 8,290 का राजस्व रेकग्नाइज़ हुआ। ये Bisht Traders की आमदनी है।

  3. CGST पेएबल बढ़ा (क्रेडिट): बिष्ट जी ने होटल से Rs. 207.25 CGST के रूप में कलेक्ट किया। ये पैसा वो नहीं रखते — ये सरकार को देना है। ये एक लायबिलिटी है।

  4. SGST पेएबल बढ़ा (क्रेडिट): SGST के लिए भी वही बात — Rs. 207.25 स्टेट गवर्नमेंट को देना है।

"तुमने एक भी जर्नल एंट्री नहीं लिखी," शर्मा सर ने बताया। "तुमने बस सेल्स इनवॉइस भरा — ग्राहक का नाम, आइटम्स, क्वांटिटीज़। सॉफ़्टवेयर ने अकाउंटिंग अपने आप कर दी। डबल-एंट्री बिल्कुल सही है। डेबिट बराबर क्रेडिट। एसेट्स बराबर लायबिलिटीज़ प्लस इक्विटी। सब बैलेंस है।"

यही GL ऑटो-पोस्टिंग की ताकत है। अकाउंटेंट बिज़नेस ट्रांज़ैक्शन पर ध्यान देता है (किसने क्या खरीदा, कितने में, कब)। सॉफ़्टवेयर अकाउंटिंग लॉजिक सँभालता है (कौन सा अकाउंट डेबिट करना है, कौन सा क्रेडिट, कितना)।


चरण 4: पेमेंट रिसीट — पैसा मिलना

10 अगस्त को, Nainital Grand Hotel ने बिष्ट जी को पे किया। उनके बैंक अकाउंट में Rs. 8,704.50 का NEFT ट्रांसफ़र आया।

मीरा को ये पेमेंट दर्ज करना था।

उसने ट्रांज़ैक्शंस → सेल्स → पेमेंट रिसीट → न्यू पर क्लिक किया।

पेमेंट रिसीट फॉर्म जिसमें ग्राहक, इनवॉइस रेफ़रेंस, अमाउंट, और पेमेंट मेथड दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट10-08-2025
ग्राहकNainital Grand Hotel
अमाउंटRs. 8,704.50
पेमेंट मोडबैंक ट्रांसफ़र (NEFT)
बैंक अकाउंटSBI Haldwani
रेफ़रेंसUTR: NEFT20250810045

जब मीरा ने ग्राहक सेलेक्ट किया, ERPLite ने आउटस्टैंडिंग इनवॉइसेज़ दिखा दिए:

इनवॉइसडेटअमाउंटआउटस्टैंडिंगकितने दिन ओवरड्यू
SI-2025-06715-07-2025Rs. 8,704.50Rs. 8,704.5026 दिन

मीरा ने SI-2025-067 पर क्लिक किया ताकि ये पेमेंट उस इनवॉइस से लिंक हो जाए। पूरा अमाउंट पे हो रहा था।

उसने सेव किया और नेगी भैया ने पोस्ट कर दिया।

पेमेंट रिसीट की GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
बैंक अकाउंट — SBI Haldwani8,704.50
ट्रेड रिसीवेबल्स — Nainital Grand Hotel8,704.50

बैंक बढ़ा (पैसा मिला)। रिसीवेबल्स घटे (होटल पर अब कुछ बाकी नहीं)। सीधा और साफ़।


पूरा फ़्लो — सफ़र को ट्रेस करो

चलो शुरू से अंत तक पूरा सफ़र ट्रेस करते हैं:

चरणडॉक्यूमेंटडेटGL पर असर
1प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस PI-2025-01201-07-2025कोई नहीं
2सेल्स ऑर्डर SO-2025-00805-07-2025कोई नहीं
3सेल्स इनवॉइस SI-2025-06715-07-2025रिसीवेबल्स ↑, सेल्स ↑, GST पेएबल ↑
4पेमेंट रिसीट RV-2025-01510-08-2025बैंक ↑, रिसीवेबल्स ↓

ERPLite में, तुम ये पूरी चेन देख सकते हो। जब तुम सेल्स इनवॉइस खोलते हो, तो एक सेक्शन होता है डॉक्यूमेंट ट्रेल या लिंक्ड डॉक्यूमेंट्स जो दिखाता है:

PI-2025-012 (प्रोफ़ॉर्मा) → SO-2025-008 (ऑर्डर) → SI-2025-067 (इनवॉइस) → RV-2025-015 (रिसीट)

डॉक्यूमेंट ट्रेल जिसमें प्रोफ़ॉर्मा से पेमेंट रिसीट तक की लिंक्ड चेन दिख रही है

"ये ऑडिटिंग के लिए बहुत उपयोगी है," शर्मा सर ने कहा। "अगर टैक्स डिपार्टमेंट पूछे — इस इनवॉइस की ओरिजिनल कोटेशन दिखाओ — तो तुम सेकंडों में ट्रेस कर सकते हो। सब कुछ कनेक्टेड है।"


पार्शियल पेमेंट्स — आंशिक भुगतान का क्या?

"अगर ग्राहक एक बार में पूरा अमाउंट न दे तो?" मीरा ने पूछा। अच्छा सवाल।

मान लो Nainital Grand Hotel ने अभी सिर्फ़ Rs. 5,000 दिए और बाकी बाद में देने का वादा किया।

मीरा Rs. 5,000 की पेमेंट रिसीट बनाती। इनवॉइस SI-2025-067 का आउटस्टैंडिंग बैलेंस Rs. 8,704.50 से घटकर Rs. 3,704.50 हो जाता।

जब होटल बाकी Rs. 3,704.50 पे करता, वो एक और पेमेंट रिसीट बनाती और उसी इनवॉइस से लिंक करती।

ERPLite हर इनवॉइस के लिए ट्रैक करता है कि कितना पे हुआ और कितना पेंडिंग है। इसी तरह एज्ड रिसीवेबल्स रिपोर्ट काम करती है — ये दिखाती है कि कौन से इनवॉइसेज़ पार्शियली पेड हैं और आउटस्टैंडिंग अमाउंट कितना पुराना है।

इनवॉइसकुल अमाउंटअब तक पे हुआआउटस्टैंडिंगस्टेटस
SI-2025-067Rs. 8,704.50Rs. 5,000.00Rs. 3,704.50पार्शियली पेड

इंटर-स्टेट सेल्स का क्या?

अब तक हमारे सारे उदाहरण उत्तराखंड के अंदर (इंट्रा-स्टेट) थे। क्या होता है जब बिष्ट जी दूसरे स्टेट के ग्राहक को मसाले बेचें — जैसे, दिल्ली का कोई रेस्टोरेंट?

बस एक फ़र्क है — GST ट्रीटमेंट:

बिक्री का प्रकारGST लगेगाउदाहरण
इंट्रा-स्टेट (सेम स्टेट)CGST + SGSTBisht Traders (UK) बेचे Nainital Grand Hotel (UK) को
इंटर-स्टेट (अलग स्टेट)IGSTBisht Traders (UK) बेचे Delhi Restaurant (DL) को

कुल GST अमाउंट एक ही रहता है (Rs. 8,290 का 5% = Rs. 414.50)। लेकिन बँटवारा बदलता है:

इंट्रा-स्टेटइंटर-स्टेट
CGSTRs. 207.25
SGSTRs. 207.25
IGSTRs. 414.50
कुल GSTRs. 414.50Rs. 414.50

ERPLite ये अपने आप सँभालता है। ये सेलर के GSTIN का स्टेट कोड और बायर के GSTIN का स्टेट कोड देखता है। अगर दोनों मैच करें (दोनों 05), तो CGST + SGST लगाता है। अगर मैच न करें (05 और 07), तो IGST लगाता है।

तुम्हें याद रखने की ज़रूरत नहीं कि कौन सा लागू होगा। बस ग्राहक मास्टर में ग्राहक का GSTIN सही हो। सॉफ़्टवेयर बाकी काम करेगा।


चरण छोड़ना — क्या अलाउड है?

"क्या मुझे हमेशा पहले प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस बनाना होगा?" मीरा ने पूछा। "अगर कोई ग्राहक सीधे आए और तुरंत खरीदना चाहे?"

"अच्छा सवाल," नेगी भैया ने कहा। "हर बिक्री में चारों चरण ज़रूरी नहीं। तुम चरण छोड़ सकते हो।"

स्थितिकौन से चरण
नया ग्राहक फ़ॉर्मल कोट चाहता हैप्रोफ़ॉर्मा → सेल्स ऑर्डर → इनवॉइस → पेमेंट
नियमित ग्राहक रूटीन ऑर्डर करता हैसेल्स ऑर्डर → इनवॉइस → पेमेंट
वॉक-इन ग्राहक, कैश सेलइनवॉइस → पेमेंट (तुरंत)
अर्जेंट ऑर्डर, फ़ॉर्मैलिटीज़ का समय नहींइनवॉइस → पेमेंट

"प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस और सेल्स ऑर्डर विकल्पल हैं," शर्मा सर ने जोड़ा। "ये योजना टूल्स हैं। सेल्स इनवॉइस अनिवार्य है — इसके बिना बुक्स में कोई सेल नहीं। और पेमेंट रिसीट पैसा आने का हिसाब रखने के लिए ज़रूरी है।"

ERPLite में, तुम प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस या सेल्स ऑर्डर बनाए बिना सीधे सेल्स इनवॉइस बना सकते हो। सिस्टम फ़्लेक्सिबल है।


सेल्स डॉक्यूमेंट्स का समरी

चारों डॉक्यूमेंट्स का एक हैंडी रेफ़रेंस:

डॉक्यूमेंटज़रूरी?GL एंट्रीज़ बनती हैं?पोस्टिंग के बाद एडिट?क्या साबित करता है
प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइसविकल्पलनहींN/A (पोस्ट नहीं होता)"हमने ये दाम कोट किया"
सेल्स ऑर्डरविकल्पलनहींN/A (पोस्ट नहीं होता)"ग्राहक ने ऑर्डर पुष्टि किया"
सेल्स इनवॉइसअनिवार्यहाँनहीं"हमने ये माल इस दाम पर बेचा"
पेमेंट रिसीटअनिवार्य (पेमेंट के लिए)हाँनहीं"ग्राहक ने इतना अमाउंट पे किया"

क्विक रीकैप

  • सेल्स साइकल में 4 चरण तक हो सकते हैं: प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस → सेल्स ऑर्डर → सेल्स इनवॉइस → पेमेंट रिसीट
  • प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस एक कोटेशन है — ये अकाउंट्स पर कोई असर नहीं डालता
  • सेल्स ऑर्डर एक इंटरनल पुष्टिेशन है — ये भी अकाउंट्स पर कोई असर नहीं डालता
  • सेल्स इनवॉइस टैक्स बिल है — यहाँ GL एंट्रीज़ बनती हैं (रिसीवेबल्स, सेल्स, GST पेएबल)
  • पेमेंट रिसीट ग्राहक की पेमेंट दर्ज करता है (बैंक बढ़ता है, रिसीवेबल्स घटते हैं)
  • ERPLite डॉक्यूमेंट्स को कन्वर्ट कर सकता है: प्रोफ़ॉर्मा → सेल्स ऑर्डर → इनवॉइस एक क्लिक में
  • GL ऑटो-पोस्टिंग का मतलब सॉफ़्टवेयर अपने आप जर्नल एंट्रीज़ बनाता है — तुम बस बिज़नेस ब्योरा भरो
  • इंट्रा-स्टेट सेल्स में CGST + SGST लगता है; इंटर-स्टेट सेल्स में IGST — ERPLite ये GSTINs से तय करता है
  • तुम चरण छोड़ना कर सकते हो — हर सेल में प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस या सेल्स ऑर्डर ज़रूरी नहीं
  • पार्शियल पेमेंट्स सपोर्ट होते हैं — ERPLite हर इनवॉइस का आउटस्टैंडिंग अमाउंट ट्रैक करता है
  • डॉक्यूमेंट ट्रेल सभी रिलेटेड डॉक्यूमेंट्स को लिंक करता है, आसान ट्रेसिंग और ऑडिट के लिए

अभ्यास अभ्यास — ये खुद करो

बिष्ट जी को एक नया ग्राहक मिला: Hill View Cafe, Mukteshwar (GSTIN: 05AABHV3456F1Z7)। उन्हें मंथली आपूर्ति चाहिए:

  • गरम मसाला: 2 kg, Rs. 520/kg पर
  • लाल मिर्च पाउडर: 3 kg, Rs. 280/kg पर
  • हल्दी पाउडर: 4 kg, Rs. 180/kg पर

टास्क्स:

  1. इस ऑर्डर का सब-कुल (GST से पहले) गणना करो।

  2. GST गणना करो। ये इंट्रा-स्टेट सेल है (दोनों उत्तराखंड में)। CGST और SGST अमाउंट क्या होगा?

  3. ग्रैंड कुल (सब-कुल + GST) क्या होगा?

  4. जब सेल्स इनवॉइस पोस्ट होगा तो ERPLite कौन सी GL एंट्री बनाएगा? लिखो।

  5. दो हफ़्ते बाद, Hill View Cafe NEFT से Rs. 2,000 पे करता है। इस पार्शियल पेमेंट की GL एंट्री लिखो।

  6. पार्शियल पेमेंट के बाद, इस इनवॉइस पर आउटस्टैंडिंग बैलेंस कितना बचेगा?

  7. अगर Hill View Cafe उत्तराखंड की जगह हिमाचल प्रदेश में होता, तो GST ट्रीटमेंट कैसे बदलता? IGST अमाउंट कितना होता?

बोनस: इस ट्रांज़ैक्शन का डॉक्यूमेंट ट्रेल बनाओ — प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस से पेमेंट रिसीट तक — अपने मनचाहे डॉक्यूमेंट नंबर्स के साथ।


फ़न फ़ैक्ट

"सेल्स इनवॉइस" का कॉन्सेप्ट बहुत पुराना है। सबसे पुराना ज्ञात इनवॉइस Mesopotamia (आज का Iraq) में मिला, लगभग 2,000 ईसा पूर्व मिट्टी की टैबलेट पर लिखा हुआ। उसमें जौ (बार्ली) की बिक्री का रिकॉर्ड था। विक्रेता, खरीदार, मात्रा, और कीमत — सब रिकॉर्ड। चार हज़ार साल बाद, मीरा ERPLite में बिष्ट जी के मसालों के लिए बिल्कुल वही काम कर रही है। माध्यम बदला — मिट्टी की टैबलेट्स से कागज़ से सॉफ़्टवेयर तक। लेकिन आइडिया वही है: जब कुछ बेचो, लिख लो। क्या बेचा, किसको, कितने में, और कब। यही अकाउंटिंग का दिल है, और ये 4,000 सालों में नहीं बदला।

परचेज़ साइकल — ऑर्डर से बिल तक

बिष्ट जी फ़ोन पर चिंतित लग रहे थे। "हल्दी का स्टॉक कम हो रहा है। दिवाली का सीज़न आ रहा है और ऑर्डर्स की बाढ़ है। हमें दिल्ली से 500 kg कच्ची हल्दी चाहिए। और जोधपुर से 200 kg जीरा। क्या आज ऑर्डर कर सकते हो?"

मीरा ने नेगी भैया की तरफ़ देखा। उन्होंने सिर हिलाया। "अब तुम परचेज़ साइकल सीखोगी। सेल्स में पैसा अंदर आता है। परचेज़ेज़ में पैसा बाहर जाता है। आइडिया वही है, डायरेक्शन उल्टी।"

शर्मा सर ने जोड़ा, "और परचेज़ेज़ में एक एक्स्ट्रा चीज़ है जो सेल्स में नहीं — TDS। टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स। जब बिष्ट जी कुछ वेंडर्स को पे करते हैं, तो उन्हें एक छोटा परसेंटेज काटकर सरकार को भेजना होता है। सॉफ़्टवेयर सँभालता है, लेकिन तुम्हें समझना होगा क्यों।"

मीरा ने ERPLite खोला। परचेज़ सेक्शन तैयार था।


परचेज़ साइकल — एक ओवरव्यू

जैसे सेल्स साइकल के चरण होते हैं, परचेज़ साइकल भी एक सीक्वेंस पालन करता है।

तुम्हें माल या सेवा चाहिए
        ↓
तुम आपूर्तिकर्ता को परचेज़ ऑर्डर भेजते हो
        ↓
आपूर्तिकर्ता माल डिलीवर करता है
        ↓
आपूर्तिकर्ता बिल (इनवॉइस) भेजता है
        ↓
तुम बिल वेरिफ़ाई करके दर्ज करते हो
        ↓
तुम पेमेंट करते हो (कभी-कभी TDS काटकर)

चरण एक टेबल में:

चरणडॉक्यूमेंटमकसद
1परचेज़ ऑर्डर (PO)फ़ॉर्मल रिक्वेस्ट — "हम ये आइटम्स इन दामेज़ पर खरीदना चाहते हैं"
2परचेज़ बिलआपूर्तिकर्ता के इनवॉइस का रिकॉर्ड — "उन्होंने डिलीवर किया, ये रहा बिल"
3पेमेंटआपूर्तिकर्ता को पे करना — "ये रहा पैसा"

इसे घर के लिए सामान मँगवाने जैसे समझो:

  1. तुम दुकानदार को कॉल करो और कहो "10 kg चावल और 5 kg दाल भेज दो" — ये है परचेज़ ऑर्डर
  2. दुकानदार डिलीवर करता है और बिल देता है — ये है परचेज़ बिल
  3. तुम दुकानदार को पे करते हो — ये है पेमेंट

चलो मीरा के साथ बिष्ट जी का दिल्ली से कच्ची हल्दी का ऑर्डर करते हैं।


चरण 1: परचेज़ ऑर्डर — ऑर्डर करना

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → परचेज़ → परचेज़ ऑर्डर → न्यू पर क्लिक किया।

ERPLite में परचेज़ ऑर्डर फॉर्म जिसमें वेंडर सेलेक्शन, आइटम्स, क्वांटिटीज़, रेट्स, और डिलीवरी डेट दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
PO नंबरPO-2025-015 (ऑटो-जेनरेटेड)
डेट01-08-2025
वेंडरDelhi Spice Suppliers Pvt Ltd
अपेक्षित डिलीवरी डेट10-08-2025

आइटम लाइन्स:

आइटमQtyरेट (Rs./kg)अमाउंट (Rs.)
Turmeric (Raw)500 kg12060,000

चूँकि ये इंटर-स्टेट परचेज़ है (वेंडर दिल्ली में, बायर उत्तराखंड में), GST IGST होगा:

अमाउंट (Rs.)
सब-कुल60,000
IGST @ 5%3,000
ग्रैंड कुल63,000

मीरा ने सेव पर क्लिक किया।

ज़रूरी बात: सेल्स में प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस की तरह, परचेज़ ऑर्डर भी GL एंट्रीज़ नहीं बनाता। ये एक योजना डॉक्यूमेंट है। परचेज़ बिल रिकॉर्ड होने तक अकाउंट्स पर कोई असर नहीं पड़ता।

"खरीदने से पहले हमेशा PO बनाओ," नेगी भैया ने कहा। "इसके दो फ़ायदे हैं। पहला, वेंडर को पता होता है कि तुम्हें एग्ज़ैक्टली क्या चाहिए — कोई कन्फ़्इस्तेमालन नहीं। दूसरा, जब बिल आए, तो तुम उसे PO से तुलना कर सकते हो। अगर वेंडर अलग दाम लगाए या अलग क्वांटिटी भेजे, तो तुम तुरंत पकड़ लो।"

मीरा ने PO प्रिंट किया और बिष्ट जी ने साइन किया। उन्होंने Delhi Spice Suppliers को ईमेल कर दिया।

जेनरेट हुआ परचेज़ ऑर्डर PDF जिसमें Bisht Traders का हेडर, आइटम्स, और टर्म्स हैं


चरण 2: परचेज़ बिल — आपूर्तिकर्ता के इनवॉइस को दर्ज करना

दस दिन बाद, हल्दी आ गई। दिल्ली से डिलीवरी ट्रक 500 kg कच्ची हल्दी लेकर आया। माल के साथ, ड्राइवर ने आपूर्तिकर्ता का टैक्स इनवॉइस भी दिया — बिल No. DSPL/2025/1056, तारीख 10-08-2025।

बिष्ट जी की वेयरहाउस टीम ने माल चेक किया:

  • क्वांटिटी: 500 kg — PO से मैच करता है
  • गुणवत्ता: अच्छी — कोई डैमेज नहीं, कोई नमी नहीं
  • रेट: Rs. 120/kg — PO से मैच करता है

सब कुछ मैच कर रहा था। अब मीरा को ये बिल ERPLite में दर्ज करना था।

उसने PO-2025-015 खोला और कन्वर्ट टू परचेज़ बिल पर क्लिक किया।

परचेज़ ऑर्डर पेज पर कन्वर्ट टू परचेज़ बिल बटन

ERPLite ने PO से ब्योरा अपने आप भर दीं। मीरा ने आपूर्तिकर्ता के बिल की ब्योरा डालीं:

फ़ील्डवैल्यू
बिल नंबर इन ERPLitePB-2025-022 (ऑटो-जेनरेटेड — इंटरनल रेफ़रेंस)
आपूर्तिकर्ता का बिल नंबरDSPL/2025/1056 (वेंडर इसे क्या कहता है)
बिल डेट10-08-2025
वेंडरDelhi Spice Suppliers Pvt Ltd

"दो नंबर क्यों?" मीरा ने पूछा।

"आपूर्तिकर्ता का अपना नंबरिंग सिस्टम होता है," नेगी भैया ने समझाया। "DSPL/2025/1056 उनका इनवॉइस नंबर है। PB-2025-022 हमारा इंटरनल रेफ़रेंस है। दोनों चाहिए — हमारा अपने रिकॉर्ड के लिए, उनका GST रिटर्न से मैचिंग के लिए।"

आइटम लाइन्स:

आइटमHSNQtyरेटअमाउंटIGST 5%कुल
Turmeric (Raw)0910 30 30500 kg12060,0003,00063,000

मीरा ने सब समीक्षा किया। उसने सेव ऐज़ ड्राफ़्ट पर क्लिक किया।

नेगी भैया ने बिल की PO से तुलना की। क्वांटिटीज़ मैच। रेट्स मैच। उन्होंने अप्रूव ऐंड पोस्ट पर क्लिक किया।

अपने आप बनी GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
परचेज़ — रॉ स्पाइसेज़60,000
IGST इनपुट क्रेडिट3,000
ट्रेड पेएबल्स — Delhi Spice Suppliers63,000

चलो हर लाइन समझते हैं:

  1. परचेज़ बढ़ा (डेबिट): हमने Rs. 60,000 का माल खरीदा। ये एक ख़र्चा है (लागत ऑफ गुड्स)।

  2. IGST इनपुट क्रेडिट बढ़ा (डेबिट): हमने इस परचेज़ पर Rs. 3,000 IGST पे किया। लेकिन ये पैसा हम गँवाते नहीं — हम इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रूप में क्लेम कर सकते हैं। ये हमारे ग्राहकों से कलेक्ट किए GST से ऑफसेट होता है। इसे ऐसे समझो "GST जो हम पहले ही पे कर चुके — सरकार को हमें ये वापस देना है।" ये हमारी बुक्स में एक एसेट है।

  3. ट्रेड पेएबल्स बढ़ा (क्रेडिट): हम वेंडर को Rs. 63,000 देना है। ये एक लायबिलिटी है — पैसा जो हमें पे करना है।

"सेल्स इनवॉइस से फ़र्क देखो," शर्मा सर ने कहा। "सेल्स में, GST, पेएबल (लायबिलिटी — हम सरकार को देना है) में गया। परचेज़ेज़ में, GST, इनपुट क्रेडिट (एसेट — सरकार हमें देना है) में गया। दोनों एक-दूसरे से ऑफसेट होते हैं। यही GST की पूरी बुद्धिमत्ता है।"

परचेज़ बिल की GL एंट्रीज़ व्यू जिसमें तीन-लाइन एंट्री दिख रही है


चरण 3: पेमेंट — वेंडर को पे करना

आपूर्तिकर्ता की पेमेंट टर्म्स 45 दिन हैं। लेकिन बिष्ट जी अच्छे रिश्ते बनाए रखने के लिए जल्दी पे करना चाहते हैं। उन्होंने 25 अगस्त को पे करने का फ़ैसला किया — माल मिलने के सिर्फ़ 15 दिन बाद।

यहाँ एक नई चीज़ आती है — TDS

TDS क्या है?

TDS का पूरा नाम है टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स। ये आमदनी टैक्स कलेक्ट करने का एक तरीका है।

सीधी भाषा में: जब बिष्ट जी आपूर्तिकर्ता को Rs. 63,000 पे करते हैं, तो सरकार कहती है — "रुको। पूरा अमाउंट पे करने से पहले, एक छोटा परसेंटेज काटकर हमें भेजो। आपूर्तिकर्ता को बाकी मिलेगा। जब आपूर्तिकर्ता अपना आमदनी टैक्स रिटर्न फ़ाइल करेगा, तो वो इस अमाउंट का क्रेडिट क्लेम कर सकता है।"

"इसे ऐसे समझो," शर्मा सर ने कहा। "जब तुम्हारे स्कूल ने Rs. 1,000 की स्कॉलरशिप दी लेकिन Rs. 100 स्कूल फ़ंड के लिए काट लिया, तो तुम्हें Rs. 900 हाथ में मिले। लेकिन तुम अभी भी कह सकती हो 'मेरी स्कॉलरशिप Rs. 1,000 की थी।' TDS ऐसा ही है — वेंडर का बिल Rs. 63,000 का है लेकिन उन्हें कम मिलता है क्योंकि कुछ टैक्स पहले ही काट लिया गया।"

TDS कब लागू होता है?

TDS कुछ सिचुएशंस में लागू होता है। परचेज़ेज़ के लिए, सबसे आम सेक्शन है सेक्शन 194Q — माल की खरीद पर TDS। ये तब लागू होता है जब:

  • बायर का पिछले साल का कुल टर्नओवर Rs. 10 करोड़ से ज़्यादा हो, और
  • एक ही वेंडर से चालू साल में परचेज़ेज़ Rs. 50 लाख से ज़्यादा हो

हमारे उदाहरण में, मान लो बिष्ट जी की Delhi Spice Suppliers से इस साल की परचेज़ेज़ Rs. 50 लाख पार कर चुकी हैं, तो TDS लागू होगा।

सेक्शन 194Q के तहत TDS रेट है 0.1% परचेज़ अमाउंट (GST छोड़कर) पर।

TDS गणना:

अमाउंट (Rs.)
बिल अमाउंट (GST सहित)63,000
जिस अमाउंट पर TDS गणना होगा (GST छोड़कर)60,000
TDS @ 0.1% of Rs. 60,00060
वेंडर को पेएबल अमाउंट62,940
सरकार को जमा करना है TDS60

वेंडर को Rs. 63,000 की जगह Rs. 62,940 मिलते हैं। बाकी Rs. 60 बिष्ट जी, वेंडर की तरफ़ से आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट को जमा करते हैं।

ERPLite में पेमेंट दर्ज करना

मीरा ने ट्रांज़ैक्शंस → परचेज़ → पेमेंट → न्यू पर क्लिक किया।

पेमेंट फॉर्म जिसमें वेंडर, बिल रेफ़रेंस, अमाउंट, TDS डिडक्शन, और नेट पेमेंट दिख रहे हैं

फ़ील्डवैल्यू
डेट25-08-2025
वेंडरDelhi Spice Suppliers Pvt Ltd
बिल रेफ़रेंसPB-2025-022 / DSPL/2025/1056
बिल अमाउंटRs. 63,000
TDS एप्लिकेबल?Yes
TDS सेक्शन194Q — माल की खरीद
TDS रेट0.1%
TDS अमाउंटRs. 60 (ERPLite ने ऑटो-गणना किया)
नेट पेमेंटRs. 62,940
पेमेंट मोडबैंक ट्रांसफ़र (NEFT)
बैंक अकाउंटSBI Haldwani

ERPLite ने TDS अपने आप गणना किया। मीरा को बस पुष्टि करना था कि सही है।

उसने सेव ऐज़ ड्राफ़्ट पर क्लिक किया। नेगी भैया ने समीक्षा किया और पोस्ट कर दिया।

पेमेंट की GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
ट्रेड पेएबल्स — Delhi Spice Suppliers63,000
बैंक अकाउंट — SBI Haldwani62,940
TDS पेएबल — सेक्शन 194Q60

चलो समझते हैं:

  1. ट्रेड पेएबल्स घटा (डेबिट): अब हम वेंडर को कुछ नहीं देना। लायबिलिटी साफ़ हो गई।

  2. बैंक घटा (क्रेडिट): Rs. 62,940 हमारे बैंक अकाउंट से निकला। ये नेट पेमेंट है।

  3. TDS पेएबल बढ़ा (क्रेडिट): Rs. 60 अब एक लायबिलिटी है — ये हमें आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट को देना है। बिष्ट जी को ये TDS ड्यू डेट (इस्तेमालुअली अगले महीने की 7 तारीख) तक जमा करना है।

"तो वेंडर को Rs. 62,940 मिलते हैं, और सरकार को Rs. 60," मीरा ने पुष्टि किया। "कुल Rs. 63,000। बिल फ़ुली सेटल।"

"बिल्कुल," शर्मा सर ने कहा। "बिष्ट जी की वेंडर के प्रति ज़िम्मेदारी पूरी। अब एक नई ज़िम्मेदारी है — TDS सरकार को जमा करना। वो मंथली करते हैं।"

पेमेंट की GL एंट्रीज़ व्यू जिसमें ट्रेड पेएबल्स डेबिटेड, बैंक क्रेडिटेड, TDS पेएबल क्रेडिटेड दिख रहा है


पूरा परचेज़ फ़्लो — समरी

चलो शुरू से अंत तक सफ़र ट्रेस करते हैं:

चरणडॉक्यूमेंटडेटGL पर असर
1परचेज़ ऑर्डर PO-2025-01501-08-2025कोई नहीं
2परचेज़ बिल PB-2025-02210-08-2025परचेज़ेज़ ↑, इनपुट क्रेडिट ↑, पेएबल्स ↑
3पेमेंट PV-2025-03025-08-2025पेएबल्स ↓, बैंक ↓, TDS पेएबल ↑

सेल्स साइकल की तरह, ERPLite परचेज़ेज़ का भी डॉक्यूमेंट ट्रेल बनाए रख करता है:

PO-2025-015 (परचेज़ ऑर्डर) → PB-2025-022 (परचेज़ बिल) → PV-2025-030 (पेमेंट)

परचेज़ साइकल का डॉक्यूमेंट ट्रेल जिसमें लिंक्ड PO, बिल, और पेमेंट दिख रहे हैं


परचेज़ ऑर्डर vs. परचेज़ बिल — जब मैच न हो

"अगर वेंडर अलग क्वांटिटी भेजे या अलग दाम लगाए तो?" मीरा ने पूछा।

असल दुनिया में ये अक्सर होता है। कुछ आम सिचुएशंस देखते हैं:

सिचुएशन 1: वेंडर कम माल भेजे

तुमने 500 kg ऑर्डर किया लेकिन सिर्फ़ 480 kg आया (20 kg कम)।

PO को परचेज़ बिल में बदलते समय, मीरा क्वांटिटी 500 से 480 कर देगी। बिल अमाउंट अपने आप एडजस्ट हो जाएगा। बाकी 20 kg PO पर "पेंडिंग" रहेगा।

सिचुएशन 2: वेंडर ज़्यादा दाम लगाए

तुमने Rs. 120/kg पर एग्री किया लेकिन वेंडर के बिल में Rs. 125/kg है।

मीरा को ये चुपचाप स्वीकार नहीं करना चाहिए। उसे नेगी भैया और बिष्ट जी को बताना चाहिए। वो:

  • दाम डिफ़रेंस ख़ारिज कर सकते हैं और वेंडर से बिल रिवाइज़ कराएँ
  • नया दाम स्वीकार करें (शायद मार्केट रेट बढ़ गया)
  • बीच का रास्ता निकालें

जो भी तय हो, ERPLite में परचेज़ बिल फ़ाइनल एग्रीड अमाउंट से मैच होना चाहिए।

सिचुएशन 3: माल डैमेज्ड हो

20 kg हल्दी गीली आई। बिष्ट जी ख़ारिज करके वापस भेजते हैं।

मीरा परचेज़ बिल में पूरे 500 kg दर्ज करती है लेकिन फिर 20 kg (Rs. 2,400 + GST) का डेबिट नोट बनाती है। इससे वेंडर को देय अमाउंट कम हो जाता है। डेबिट नोट्स पिछले अध्याय में कवर कर चुके हैं।

स्थितिERPLite में क्या करना है
कम डिलीवरीबिल में वास्तविक मात्रा दर्ज करो
दाम में फ़र्कवेंडर से डिस्कस करो; एग्रीड अमाउंट दर्ज करो
डैमेज्ड मालपूरा बिल दर्ज करो, फिर रिटर्न्स के लिए डेबिट नोट बनाओ

एक और परचेज़ — राजस्थान से

मीरा को और अभ्यास देने के लिए, नेगी भैया ने उससे जोधपुर से जीरे का ऑर्डर प्रक्रिया करवाया।

परचेज़ ऑर्डर:

फ़ील्डवैल्यू
PO नंबरPO-2025-016
डेट01-08-2025
वेंडरRajasthan Masala Co. (GSTIN: 08AABCR5678B1Z4)
आइटमCumin Seeds (Raw)
क्वांटिटी200 kg
रेटRs. 320/kg
अमाउंटRs. 64,000
IGST @ 5%Rs. 3,200
कुलRs. 67,200

माल 12 अगस्त को आपूर्तिकर्ता के बिल — RMC/2025/445 के साथ आया।

परचेज़ बिल:

मीरा ने PO को परचेज़ बिल में कन्वर्ट किया। सब कुछ मैच था। उसने ड्राफ़्ट सेव किया। नेगी भैया ने पोस्ट किया।

GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
परचेज़ — रॉ स्पाइसेज़64,000
IGST इनपुट क्रेडिट3,200
ट्रेड पेएबल्स — Rajasthan Masala Co.67,200

पेमेंट (TDS के बिना):

बिष्ट जी की Rajasthan Masala Co. से इस साल की परचेज़ेज़ Rs. 50 लाख क्रॉस नहीं हुईं। तो TDS लागू नहीं।

पेमेंट सीधी-सादी है:

फ़ील्डवैल्यू
डेट10-09-2025
वेंडरRajasthan Masala Co.
अमाउंटRs. 67,200 (पूरा अमाउंट, कोई TDS नहीं)
पेमेंट मोडबैंक ट्रांसफ़र (NEFT)

GL एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
ट्रेड पेएबल्स — Rajasthan Masala Co.67,200
बैंक अकाउंट — SBI Haldwani67,200

"फ़र्क दिखा?" नेगी भैया ने कहा। "जब TDS नहीं होता, पेमेंट सीधी है — पूरा अमाउंट वेंडर को जाता है। जब TDS होता है, एक छोटा हिस्सा सरकार को जाता है। ERPLite दोनों केसेज़ सँभालता है।"


सेल्स साइकल vs. परचेज़ साइकल — आमने-सामने

मीरा ने अब दोनों साइकल्स सीख लिए। चलो तुलना करते हैं:

पहलूसेल्स साइकलपरचेज़ साइकल
डायरेक्शनतुम ग्राहक को बेचते होतुम वेंडर से खरीदते हो
पैसे का फ़्लोपैसा अंदर आता हैपैसा बाहर जाता है
चरण 1प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइस (विकल्पल)परचेज़ ऑर्डर (विकल्पल)
चरण 2सेल्स ऑर्डर (विकल्पल)
चरण 3सेल्स इनवॉइस (अनिवार्य)परचेज़ बिल (अनिवार्य)
चरण 4पेमेंट रिसीटपेमेंट
GST ट्रीटमेंटतुम GST कलेक्ट करते हो → पेएबल (लायबिलिटी)तुम GST पे करते हो → इनपुट क्रेडिट (एसेट)
TDSआमतौर पर लागू नहींलागू हो सकता है (Sec 194Q, आदि)
की अकाउंटट्रेड रिसीवेबल्स (एसेट)ट्रेड पेएबल्स (लायबिलिटी)

"सेल्स में, तुम माल देने वाले और पैसा लेने वाले हो," शर्मा सर ने समरी दी। "परचेज़ेज़ में, तुम माल लेने वाले और पैसा देने वाले हो। सब कुछ मिरर इमेज है।"


TDS — एक क्विक रेफ़रेंस

इस अध्याय में TDS इंट्रोड्यूस हुआ, तो पेमेंट्स पर लागू होने वाले आम TDS सेक्शंस की क्विक रेफ़रेंस टेबल:

सेक्शनपेमेंट का स्वरूपTDS रेटथ्रेशोल्ड
194Cकॉन्ट्रैक्टर पेमेंट्स1% (इंडिविजुअल) / 2% (कंपनी)Rs. 30,000 प्रति बिल या Rs. 1 लाख प्रति साल
194Jपेशेवर फ़ीस10%Rs. 30,000 प्रति साल
194Qमाल की खरीद0.1%Rs. 50 लाख प्रति साल (बायर टर्नओवर > Rs. 10 करोड़)
194Aब्याज (नॉन-बैंक)10%Rs. 5,000 प्रति साल

"TDS के बारे में बाद के अध्याय में बहुत ब्योरा से पढ़ेंगे," शर्मा सर ने कहा। "अभी बस इतना याद रखो — TDS तुम्हारा पैसा नहीं है। तुम वेंडर की पेमेंट से काटते हो और सरकार को जमा करते हो। अगर काटना भूल गए, तो तुम ज़िम्मेदार हो। अगर काटकर जमा करना भूल गए, तो मुसीबत में हो। ERPLite इन सबको ट्रैक करने में मदद करता है।"

ERPLite में, जब तुम किसी वेंडर को वेंडर मास्टर में "TDS एप्लिकेबल" मार्क करते हो, सॉफ़्टवेयर उस वेंडर को हर पेमेंट करते समय अपने आप TDS गणना करता है। तुम्हें बस सेक्शन और रेट पुष्टि करना होता है।


क्विक रीकैप

  • परचेज़ साइकल के 3 चरण हैं: परचेज़ ऑर्डर → परचेज़ बिल → पेमेंट
  • परचेज़ ऑर्डर वेंडर को फ़ॉर्मल रिक्वेस्ट है — ये अकाउंट्स पर कोई असर नहीं डालता
  • परचेज़ बिल वेंडर के इनवॉइस को दर्ज करता है — यहाँ GL एंट्रीज़ बनती हैं (परचेज़ेज़ ↑, इनपुट क्रेडिट ↑, पेएबल्स ↑)
  • पेमेंट वेंडर का बिल सेटल करती है — पेएबल्स घटते हैं, बैंक घटता है
  • TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) वेंडर की पेमेंट से काटा गया छोटा परसेंटेज है जो आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट को जमा किया जाता है
  • TDS ख़ास सिचुएशंस में लागू होता है (पेमेंट का स्वरूप, अमाउंट, और बायर के टर्नओवर पर निर्भर)
  • जब TDS काटा जाता है, वेंडर को कम मिलता है, और कटी हुई रकम तुम्हारी बुक्स में TDS पेएबल लायबिलिटी बनती है
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): परचेज़ेज़ पर पे किया GST एक एसेट है — इसे सेल्स पर कलेक्ट किए GST से ऑफसेट कर सकते हो
  • डॉक्यूमेंट ट्रेल PO → बिल → पेमेंट को कनेक्ट करता है, आसान ट्रेसिंग के लिए
  • हमेशा बिल की PO से तुलना करो — क्वांटिटीज़, रेट्स, और कुल्स चेक करो दर्ज करने से पहले
  • ERPLite TDS ऑटो-गणना करता है जब वेंडर, वेंडर मास्टर में TDS-एप्लिकेबल मार्क हो

अभ्यास अभ्यास — ये खुद करो

बिष्ट जी हल्द्वानी के एक स्थानीय आपूर्तिकर्ता से पैकेजिंग मटीरियल खरीदना चाहते हैं।

वेंडर: Pahad Packaging Solutions, Haldwani GSTIN: 05AABPP4567C1Z8 (उत्तराखंड — सेम स्टेट) आइटम्स:

आइटमQtyरेटHSN
1 kg Spice Pouch (printed)5,000 pcsRs. 3/pc3923
5 kg Spice Bag (jute)1,000 pcsRs. 15/pc6305

प्लास्टिक पाउचेज़ (3923) पर GST: 18% जूट बैग्स (6305) पर GST: 5%

टास्क्स:

  1. हर आइटम का कुल अमाउंट गणना करो (GST से पहले)।

  2. ये इंट्रा-स्टेट परचेज़ है (दोनों उत्तराखंड में)। हर आइटम का CGST और SGST गणना करो।

  3. परचेज़ बिल का ग्रैंड कुल क्या होगा?

  4. परचेज़ बिल की GL एंट्री लिखो। (हिंट: GST इनपुट क्रेडिट की दो लाइन्स होंगी — एक CGST की और एक SGST की।)

  5. बिष्ट जी की Pahad Packaging से इस साल की कुल परचेज़ेज़ सिर्फ़ Rs. 2 लाख हैं। क्या TDS लागू होगा? क्यों या क्यों नहीं?

  6. मान लो TDS लागू नहीं। पेमेंट की GL एंट्री लिखो।

  7. अब सोचो बिष्ट जी Gujarat के पैकेजिंग आपूर्तिकर्ता से खरीदें। GSTIN 24 (Gujarat का स्टेट कोड) से शुरू होता है। GST ट्रीटमेंट कैसे बदलेगा?

बोनस: अगर जूट बैग्स आएँ और 50 बैग्स फटे हुए हों, तो मीरा ERPLite में कौन सा डॉक्यूमेंट बनाएगी? इस डॉक्यूमेंट का अमाउंट गणना करो।


फ़न फ़ैक्ट

पुरानी दिल्ली की खारी बावली — जहाँ बिष्ट जी के आपूर्तिकर्ता हैं — एशिया की सबसे बड़ी होलसेल मसाला मार्केट है। ये 300 साल से ज़्यादा समय से चल रही है, मुग़ल बादशाह शाहजहाँ के ज़माने से। हर रोज़ हज़ारों टन मसाले यहाँ हाथ बदलते हैं — आंध्र प्रदेश की हल्दी, राजस्थान का जीरा, केरल की इलायची, गुंटूर की मिर्चें। इनमें से हर ट्रांज़ैक्शन में एक परचेज़ ऑर्डर, एक बिल, और एक पेमेंट शामिल है। लाखों अकाउंटिंग एंट्रीज़। लाखों GST कैलकुलेशंस। और कहीं हल्द्वानी में, मीरा ये सब दर्ज करना सीख रही है, एक-एक वाउचर करके। मसालों की दुनिया और अकाउंटिंग की दुनिया — ये हमेशा से जुड़ी रही हैं।

रिपोर्ट्स जो कहानी बताती हैं

सितंबर का आखिरी शुक्रवार था। बिष्ट जी गंभीर चेहरे के साथ दफ़्तर आए। "शर्मा सर, मुझे जानना है — मेरा बिज़नेस कैसा चल रहा है? मैं पैसा कमा रहा हूँ? किसके पैसे मुझ पर बाकी हैं? मुझे कितना देना है? मुझे सब कुछ चाहिए।"

शर्मा सर मुस्कुराए। "मीरा, ये वो मोमेंट है जब सब कुछ एक जगह आता है। पिछले कुछ हफ़्तों से तुम ट्रांज़ैक्शंस डालती रही हो — सेल्स, परचेज़ेस, रिसीट्स, पेमेंट्स। अब हम बड़ा सवाल पूछते हैं: उन सब नंबरों का मतलब क्या है?"

उन्होंने बिष्ट जी की तरफ़ मुड़कर कहा। "तीस मिनट दो। मीरा तुम्हारी हर ज़रूरी रिपोर्ट निकाल देगी।"

मीरा ने ERPLite खोला और रिपोर्ट्स पर क्लिक किया। वो इस मोमेंट का इंतज़ार कर रही थी।


रिपोर्ट्स क्यों ज़रूरी हैं

सच बात कहें। कोई भी दिन भर वाउचर्स डालने के शौक से अकाउंटेंट नहीं बनता। वाउचर्स इंग्रेडिएंट्स हैं। रिपोर्ट्स वो डिश है जो तुम सर्व करते हो।

रिपोर्ट्स उन सवालों के जवाब देती हैं जो बिज़नेस ओनर्स, निवेशक, बैंक्स, और टैक्स डिपार्टमेंट पूछते हैं:

सवालकौन सी रिपोर्ट जवाब देती है
क्या सारे अकाउंट्स बैलेंस में हैं?ट्रायल बैलेंस
हम मुनाफ़ा कमा रहे हैं या घाटा में हैं?मुनाफ़ा ऐंड घाटा स्टेटमेंट
हमारे पास क्या है और हम पर कितना बाकी है?बैलेंस शीट
कैश कहाँ से आया और कहाँ गया?कैश फ्लो स्टेटमेंट
आज बुक्स में क्या हुआ?डे बुक
हमारी सारी सेल्स और GST ब्योरा?सेल्स रजिस्टर
हमारी सारी परचेज़ेस और GST ब्योरा?परचेज़ रजिस्टर
किसके पैसे हम पर बाकी हैं और कब से?एज्ड रिसीवेबल्स
हम किसको कितना देना है और कब से?एज्ड पेएबल्स

"इसे मेडिकल रिपोर्ट की तरह समझो," शर्मा सर ने मीरा से कहा। "डॉक्टर बस टेम्परेचर नहीं देखता। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हार्ट रेट, कोलेस्ट्रॉल — ये सब मिलकर तुम्हारी सेहत की कहानी बताते हैं। ये रिपोर्ट्स मिलकर बिज़नेस की सेहत की कहानी बताती हैं।"

चलो Bisht Traders के लिए हर रिपोर्ट निकालते हैं और समझते हैं कि वो क्या दिखाती है।


1. ट्रायल बैलेंस — सारे अकाउंट्स एक नज़र में

मीरा ने रिपोर्ट्स → ट्रायल बैलेंस पर क्लिक किया।

उसने पीरियड सेलेक्ट किया: 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2025 (फ़ाइनेंशियल ईयर का पहला हाफ़)।

ERPLite में ट्रायल बैलेंस रिपोर्ट जिसमें सभी अकाउंट्स डेबिट और क्रेडिट बैलेंसेस के साथ दिख रहे हैं

ट्रायल बैलेंस दिखा। इसमें हर वो अकाउंट लिस्टेड था जिसमें इस पीरियड में एक्टिविटी हुई, क्लोज़िंग बैलेंस के साथ।

Bisht Traders — ट्रायल बैलेंस 30 सितंबर 2025 तक

अकाउंट का नामडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
एसेट्स
Cash in Hand45,000
Bank Account — SBI Haldwani3,82,000
Trade Receivables1,25,500
IGST Input Credit18,200
CGST Input Credit8,400
SGST Input Credit8,400
Inventory — Raw Spices2,40,000
Inventory — Finished Goods1,60,000
Fixed Assets — Delivery Van4,00,000
Accumulated Depreciation — Van30,000
लायबिलिटीज़
Trade Payables95,000
CGST Payable22,750
SGST Payable22,750
IGST Payable12,500
TDS Payable360
Salary Payable49,800
आमदनी
Sales — Spices12,80,000
Other Income — Warehouse Rent36,000
ख़र्चाेस
Purchase — Raw Spices7,20,000
Salaries & Wages99,600
Rent Expense51,000
Electricity12,000
Telephone4,500
Depreciation Expense30,000
Bank Charges1,800
Office Supplies6,500
Transport & Freight35,260
ओनर्स इक्विटी
Owner's Capital5,00,000
Retained Earnings2,78,000
TOTAL23,27,16023,27,160

"कुल्स मैच हो गए!" मीरा ने एक्साइटेड होकर कहा।

"यही ट्रायल बैलेंस का पूरा मकसद है," शर्मा सर ने कहा। "अगर डेबिट कुल बराबर क्रेडिट कुल है, तो इसका मतलब तुम्हारी सारी एंट्रीज़ डबल-एंट्री नियम पालन करती हैं। हर डेबिट की करेस्पॉन्डिंग क्रेडिट थी। बुक्स बैलेंस में हैं।"

ट्रायल बैलेंस कैसे पढ़ें

ट्रायल बैलेंस एक हेल्थ चेकअप समरी जैसा है। शर्मा सर ने ये बातें पॉइंट आउट कीं:

1. कैश की स्थिति: Cash in Hand (Rs. 45,000) + Bank (Rs. 3,82,000) = Rs. 4,27,000। बिज़नेस के पास पैसा अवेलेबल है।

2. रिसीवेबल्स: Rs. 1,25,500। ग्राहकों पर इतना बाकी है। क्या ये बहुत ज़्यादा है? एज्ड रिसीवेबल्स रिपोर्ट चेक करनी होगी।

3. पेएबल्स: Rs. 95,000। हमें आपूर्तिकर्ता को देना है। देखना होगा कि ये पेमेंट्स कब ड्यू हैं।

4. सेल्स vs. परचेज़ेस: Sales = Rs. 12,80,000 vs. Purchases = Rs. 7,20,000। ग्रॉस मार्जिन = Rs. 5,60,000। ये हेल्दी दिखता है।

5. GST चेक: Input Credit (IGST Rs. 18,200 + CGST Rs. 8,400 + SGST Rs. 8,400 = Rs. 35,000) vs. GST Payable (CGST Rs. 22,750 + SGST Rs. 22,750 + IGST Rs. 12,500 = Rs. 58,000)। नेट GST चुकाना = Rs. 58,000 - Rs. 35,000 = Rs. 23,000। ये GSTR-3B रिटर्न में जाएगा।

"अगर कुल्स मैच न हों," नेगी भैया ने कहा, "तो कुछ गड़बड़ है। शायद किसी एंट्री में सिर्फ़ डेबिट है और क्रेडिट नहीं। शायद कोई गणना त्रुटि है। ERPLite में ये शायद ही कभी होता है क्योंकि सॉफ़्टवेयर बैलेंस्ड एंट्रीज़ फ़ोर्स करता है। लेकिन अगर तुम किसी और सिस्टम से डेटा इम्पोर्ट करो, तो हमेशा पहले ट्रायल बैलेंस चेक करो।"


2. मुनाफ़ा ऐंड घाटा स्टेटमेंट — क्या हम पैसा कमा रहे हैं?

मीरा ने रिपोर्ट्स → मुनाफ़ा ऐंड घाटा स्टेटमेंट पर क्लिक किया।

पीरियड: 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2025

ERPLite में मुनाफ़ा ऐंड घाटा स्टेटमेंट जिसमें राजस्व, ख़र्चाेस, और नेट मुनाफ़ा दिख रहे हैं

Bisht Traders — मुनाफ़ा ऐंड घाटा स्टेटमेंट (अप्रैल-सितंबर 2025)

विवरणअमाउंट (Rs.)
राजस्व फ़्रॉम ऑपरेशंस
Sales — Spices12,80,000
अदर आमदनी
Warehouse Rental Income36,000
कुल आमदनी13,16,000
ख़र्चाेस
Cost of Goods Sold (Purchases)7,20,000
Salaries & Wages99,600
Rent Expense51,000
Depreciation30,000
Electricity12,000
Transport & Freight35,260
Office Supplies6,500
Telephone4,500
Bank Charges1,800
कुल ख़र्चाेस9,60,660
नेट मुनाफ़ा3,55,340

"छह महीने में तीन लाख पचपन हज़ार मुनाफ़ा," बिष्ट जी ने सिर हिलाते हुए कहा। "बुरा नहीं।"

P&L स्टेटमेंट कैसे पढ़ें

"P&L एक पीरियड की कहानी बताता है," शर्मा सर ने समझाया। "ये कहता है — इन छह महीनों में, तुमने कितना कमाया और कितना खर्च किया? दोनों का अंतर ही तुम्हारा मुनाफ़ा या घाटा है।"

क्या-क्या देखना चाहिए:

क्या चेक करेंक्या बताता हैबिष्ट जी के नंबर
ग्रॉस मुनाफ़ा (Sales - Purchases)माल के बाद कितना बचता हैRs. 5,60,000 (सेल्स का 43.75%)
ऑपरेटिंग ख़र्चाेसबिज़नेस चलाने में कितना लगता हैRs. 2,40,660
नेट मुनाफ़ासारे खर्चों के बाद क्या बचाRs. 3,55,340 (कुल आमदनी का 27%)
नेट मुनाफ़ा %बिज़नेस कितना कुशल है?27% — होलसेल के लिए हेल्दी

"अगर नेट मुनाफ़ा नेगेटिव हो," नेगी भैया ने कहा, "तो बिज़नेस घाटा में है। अगर बहुत कम हो — जैसे 2-3% — तो बिज़नेस बस बच रहा है। बिष्ट जी का 27% काफ़ी अच्छा है।"

"लेकिन ये आमदनी टैक्स से पहले है," शर्मा सर ने सावधान किया। "टैक्स के बाद, ऐक्चुअल मुनाफ़ा कम होगा। वो बाद में डील करेंगे।"


3. बैलेंस शीट — हमारे पास क्या है और किसे देना है?

मीरा ने रिपोर्ट्स → बैलेंस शीट पर क्लिक किया।

तारीख: 30 सितंबर 2025

ERPLite में बैलेंस शीट जिसमें एसेट्स, लायबिलिटीज़, और ओनर्स इक्विटी दिख रहे हैं

Bisht Traders — बैलेंस शीट 30 सितंबर 2025 तक

विवरणअमाउंट (Rs.)
ASSETS (संपत्ति)
नॉन-करंट एसेट्स
Fixed Assets (Delivery Van)4,00,000
Less: Accumulated Depreciation(30,000)
Net Fixed Assets3,70,000
करंट एसेट्स
Cash in Hand45,000
Bank Account3,82,000
Trade Receivables1,25,500
Inventory (Raw + Finished)4,00,000
GST Input Credit35,000
कुल एसेट्स13,57,500
LIABILITIES (देनदारी)
करंट लायबिलिटीज़
Trade Payables95,000
GST Payable58,000
TDS Payable360
Salary Payable49,800
कुल लायबिलिटीज़2,03,160
OWNER'S EQUITY (मालिक की पूँजी)
Owner's Capital5,00,000
Retained Earnings2,78,000
Current Year Profit3,55,340
कुल इक्विटी11,33,340
कुल (लायबिलिटीज़ + इक्विटी)13,36,500

"रुको," मीरा ने माथे पर शिकन डाली। उसने नंबर चेक किए। "कुल एसेट्स Rs. 13,57,500 है लेकिन लायबिलिटीज़ प्लस इक्विटी Rs. 13,36,500 है। Rs. 21,000 का फ़र्क है।"

"अच्छा पकड़ा," शर्मा सर ने कहा। "इसका मतलब शायद कोई अकाउंट सही वर्गीकृत नहीं हुआ, या इन्वेंटरी वैल्यूएशन में राउंडिंग डिफ़रेंस है। इसीलिए हम बैलेंस शीट चेक करते हैं — ये बताती है कि कुछ गड़बड़ है।"

अभ्यास में, ERPLite एक मिलान फ़िगर दिखाएगा या डिस्क्रेपेंसी हाइलाइट करेगा। अकाउंटेंट फिर निवेशिगेट करके ठीक करता है।

बैलेंस शीट कैसे पढ़ें

बैलेंस शीट एक स्नैपशॉट है — ये एक ख़ास मोमेंट की फ़ाइनेंशियल पोज़ीशन दिखाती है। P&L के उलट, जो एक पीरियड कवर करती है, बैलेंस शीट एक पर्टिकुलर डेट तक की होती है।

सुनहरा नियम: एसेट्स = लायबिलिटीज़ + ओनर्स इक्विटी

ये वही अकाउंटिंग इक्वेशन है जो हमने Part 1 में सीखा। बैलेंस शीट इस इक्वेशन की अल्टिमेट टेस्ट है।

सेक्शनक्या दिखाता हैक्या देखना है
एसेट्सबिज़नेस के पास क्या हैक्या इनफ़ कैश है? रिसीवेबल्स बहुत ज़्यादा तो नहीं?
लायबिलिटीज़बिज़नेस पर कितना बाकी हैपेमेंट्स ओवरड्यू तो नहीं? कर्ज़ कंट्रोल में है?
ओनर्स इक्विटीमालिक का क्या हैइक्विटी बढ़ रही है? (बढ़नी चाहिए, अगर मुनाफ़े अच्छे हैं)

"एक हेल्दी बिज़नेस," शर्मा सर ने कहा, "के पास लायबिलिटीज़ से ज़्यादा एसेट्स होते हैं। दोनों का अंतर ओनर्स इक्विटी है — मालिक के पास सच में क्या है। बिष्ट जी की इक्विटी Rs. 11,33,340 है, कुल एसेट्स Rs. 13,57,500 के अगेंस्ट। इसका मतलब सिर्फ़ Rs. 2,03,160 दूसरों को देना है। ये मज़बूत स्थिति है।"


4. कैश फ्लो स्टेटमेंट — कैश कहाँ गया?

मीरा ने रिपोर्ट्स → कैश फ्लो स्टेटमेंट पर क्लिक किया।

पीरियड: 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2025

ERPLite में कैश फ्लो स्टेटमेंट जिसमें ऑपरेटिंग, निवेश, और फ़ाइनेंसिंग एक्टिविटीज़ दिख रही हैं

Bisht Traders — कैश फ्लो स्टेटमेंट (अप्रैल-सितंबर 2025)

विवरणअमाउंट (Rs.)
ऑपरेटिंग एक्टिविटीज़ से कैश फ्लो
नेट मुनाफ़ा3,55,340
जोड़ो: डेप्रिसिएशन (नॉन-कैश ख़र्चा)30,000
वर्किंग कैपिटल में बदलाव:
— रिसीवेबल्स में बढ़ोतरी(1,25,500)
— इन्वेंटरी में बढ़ोतरी(4,00,000)
— पेएबल्स में बढ़ोतरी95,000
— GST/TDS लायबिलिटीज़ में बढ़ोतरी23,360
ऑपरेशंस से नेट कैश(21,800)
निवेश एक्टिविटीज़ से कैश फ्लो
डिलीवरी वैन की खरीद(4,00,000)
निवेश से नेट कैश(4,00,000)
फ़ाइनेंसिंग एक्टिविटीज़ से कैश फ्लो
मालिक की पूँजी5,00,000
पिछले साल से रिटेन्ड अर्निंग्स2,78,000
फ़ाइनेंसिंग से नेट कैश7,78,000
कैश में कुल बदलाव3,56,200
शुरुआती कैश ऐंड बैंक बैलेंस70,800
अंतिम कैश ऐंड बैंक बैलेंस4,27,000

कैश फ्लो स्टेटमेंट कैसे पढ़ें

"ये रिपोर्ट बहुत लोगों को कन्फ़्इस्तेमाल करती है," शर्मा सर ने कहा। "चलो सिंपल बनाता हूँ।"

कैश फ्लो स्टेटमेंट एक सवाल का जवाब देता है: कैश कहाँ से आया और कहाँ गया?

इसके तीन हिस्से हैं:

1. ऑपरेटिंग एक्टिविटीज़: रोज़मर्रा के बिज़नेस ऑपरेशंस से कैश।

बिष्ट जी ने कागज़ पर Rs. 3,55,340 का मुनाफ़ा कमाया। लेकिन उनका ऑपरेटिंग कैश फ्लो नेगेटिव (Rs. -21,800) है। क्यों? क्योंकि बहुत सारा कैश इन्वेंटरी में फँसा है (Rs. 4,00,000 के मसाले वेयरहाउस में पड़े हैं) और रिसीवेबल्स में (Rs. 1,25,500 ग्राहकों पर बाकी)। कागज़ पर मुनाफ़ा हमेशा हाथ में कैश नहीं होता।

"ये बहुत ज़रूरी है," शर्मा सर ने कहा। "कई फ़ायदेमंद बिज़नेसेस कैश की कमी से बंद हो जाते हैं क्योंकि उनका पैसा इन्वेंटरी और बाकी इनवॉइसेस में फँसा होता है। P&L कहता है मुनाफ़ा, लेकिन बैंक अकाउंट कहता है खाली। कैश फ्लो स्टेटमेंट ये समस्या रिवील करता है।"

2. निवेश एक्टिविटीज़: लंबे समय की एसेट्स पर खर्चा।

बिष्ट जी ने Rs. 4,00,000 की डिलीवरी वैन खरीदी। ये एक निवेश है — सालों तक काम आएगी।

3. फ़ाइनेंसिंग एक्टिविटीज़: मालिक या ऋणदाता से कैश।

बिष्ट जी ने Rs. 5,00,000 अपनी पूँजी डाली और पिछले सालों से Rs. 2,78,000 रिटेन्ड अर्निंग्स थी।

एक्टिविटीकैश अंदर या बाहर?बिष्ट जी का उदाहरण
ऑपरेटिंगबिज़नेस से कैशमुनाफ़ा, लेकिन इन्वेंटरी बिल्डअप से ऑफ़सेट
निवेशएसेट्स पर कैश खर्चाडिलीवरी वैन खरीदी
फ़ाइनेंसिंगमालिक/लोन्स से कैशमालिक ने Rs. 5,00,000 पूँजी डाली

5. डे बुक — आज क्या हुआ?

मीरा ने रिपोर्ट्स → डे बुक पर क्लिक किया।

उसने तारीख सेलेक्ट की: 15-07-2025

डे बुक रिपोर्ट जिसमें एक ख़ास डेट की सभी ट्रांज़ैक्शंस दिख रही हैं

डे बुक ने उस तारीख की हर रिकॉर्डेड ट्रांज़ैक्शन दिखाई:

डे बुक — 15 जुलाई 2025

टाइमवाउचर #टाइपविवरणडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
09:15SI-2025-067सेल्सNainital Grand Hotel — मसाले8,704.50
10:30PV-2025-028पेमेंटबिजली बिल — जुलाई2,500
11:00RV-2025-018रिसीटAlmora Kitchen — पेमेंट15,000
14:20PB-2025-024परचेज़Local Packaging — Pouches5,900
16:00JV-2025-005जर्नलप्रीपेड इंश्योरेंस एडजस्टमेंट3,0003,000

"डे बुक तुम्हारी डेली डायरी है," नेगी भैया ने कहा। "अगर बिष्ट जी कॉल करें और पूछें 'आज कौन सी एंट्रीज़ हुईं?', तो डे बुक खोलो और पढ़ दो। सब कुछ उसी ऑर्डर में लिस्टेड है जिसमें एंटर किया गया।"

डे बुक कब इस्तेमाल करें

  • डेली समीक्षा: हर दिन के अंत में डे बुक समीक्षा करो ताकि कुछ मिस न हो।
  • त्रुटि चेकिंग: अगर ट्रायल बैलेंस में कोई नंबर गलत लगे, तो उस डेट की डे बुक खोलो और हर एंट्री चेक करो।
  • ऑडिट: जब ऑडिटर कहे "15 जुलाई की सारी ट्रांज़ैक्शंस दिखाओ," तो डे बुक खोलो।

6. सेल्स रजिस्टर — GST ब्योरा के साथ सारी सेल्स

मीरा ने रिपोर्ट्स → सेल्स रजिस्टर पर क्लिक किया।

पीरियड: जुलाई 2025

सेल्स रजिस्टर जिसमें सभी इनवॉइसेस ग्राहक, आइटम्स, टैक्सेबल वैल्यू, और GST ब्रेकअप के साथ दिख रहे हैं

सेल्स रजिस्टर — जुलाई 2025

इनवॉइस #डेटग्राहकGSTINटैक्सेबल वैल्यूCGSTSGSTIGSTकुल
SI-2025-06102-07Almora Kitchen05AABAK...12,500312.50312.5013,125
SI-2025-06205-07Kumaon Hotel05AABKH...45,0001,1251,12547,250
SI-2025-06715-07Nainital Grand Hotel05AAECN...8,290207.25207.258,704.50
SI-2025-07020-07Delhi Restaurant07AABDR...22,0001,10023,100
SI-2025-07528-07Pahadi Kitchen05AADPK...16,80042042017,640
TOTAL1,04,5902,064.752,064.751,1001,09,819.50

सेल्स रजिस्टर क्यों ज़रूरी है

सेल्स रजिस्टर GST फ़ाइलिंग के लिए क्रिटिकल है। जब तुम GSTR-1 (मंथली/क्वार्टरली सेल्स रिटर्न) फ़ाइल करते हो, तो हर इनवॉइस रिपोर्ट करना होता है:

  • ग्राहक का नाम और GSTIN
  • टैक्सेबल वैल्यू
  • GST ब्रेकअप (CGST, SGST, या IGST)
  • HSN कोड

ERPLite का सेल्स रजिस्टर ये सब एक जगह देता है। तुम इसे एक्सेल फ़ाइल में एक्सपोर्ट करके GST पोर्टल पर अपलोड भी कर सकते हो।

"ये रिपोर्ट GST फ़ाइलिंग के दौरान मीरा की सबसे अच्छी दोस्त है," नेगी भैया ने कहा। "इसके बिना, तुम्हें एक-एक इनवॉइस खोलकर देखना पड़ता। इसके साथ, सब समराइज़्ड है।"

चौथा इनवॉइस देखो — Delhi Restaurant। चूँकि वो दिल्ली (स्टेट कोड 07) में हैं और Bisht Traders उत्तराखंड (स्टेट कोड 05) में, GST IGST है, CGST + SGST नहीं। सेल्स रजिस्टर ये अंतर साफ़ दिखाता है।


7. परचेज़ रजिस्टर — GST ब्योरा के साथ सारी परचेज़ेस

मीरा ने रिपोर्ट्स → परचेज़ रजिस्टर पर क्लिक किया।

पीरियड: जुलाई 2025

परचेज़ रजिस्टर जिसमें सभी बिल्स वेंडर, आइटम्स, टैक्सेबल वैल्यू, और GST ब्रेकअप के साथ दिख रहे हैं

परचेज़ रजिस्टर — जुलाई 2025

बिल #डेटवेंडरGSTINटैक्सेबल वैल्यूCGSTSGSTIGSTकुल
PB-2025-02005-07Delhi Spice Suppliers07AABCD...1,20,0006,0001,26,000
PB-2025-02112-07Rajasthan Masala Co.08AABCR...64,0003,20067,200
PB-2025-02318-07Local Packaging05AABLP...5,0004504505,900
PB-2025-02425-07Haldwani Transport05AABHT...8,500637.50637.509,775
TOTAL1,97,5001,087.501,087.509,2002,08,875

परचेज़ रजिस्टर क्यों ज़रूरी है

परचेज़ रजिस्टर दो काम करता है:

1. GST इनपुट क्रेडिट क्लेम: परचेज़ेस पर तुम जो GST पे करते हो, उसे ITC के रूप में क्लेम कर सकते हो। परचेज़ रजिस्टर सारा पे किया GST समराइज़ करता है — CGST, SGST, और IGST। जब तुम GSTR-3B फ़ाइल करते हो, ये कुल रिपोर्ट करते हो।

2. GSTR-2A/2B मैचिंग: GST पोर्टल में GSTR-2A/2B नाम का एक सिस्टम है जो दिखाता है कि तुम्हारे वेंडर्स ने अपने GSTR-1 में क्या रिपोर्ट किया। तुम्हें अपना परचेज़ रजिस्टर GSTR-2A/2B से मैच करना होता है। अगर किसी वेंडर ने तुम्हें बेचना रिपोर्ट करना भूल गया, तो शायद तुम्हें उस परचेज़ पर ITC न मिले। परचेज़ रजिस्टर मिसमैचेस पहचानने में मदद करता है।

परचेज़ रजिस्टर दिखाता हैकिसके लिए
वेंडर ब्योरा के साथ सारे परचेज़ बिल्सरिकॉर्ड कीपिंग
GST ब्रेकअप (CGST, SGST, IGST)इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम
वेंडर GSTINGSTR-2A/2B से मैचिंग
HSN के हिसाब से टैक्सेबल वैल्यूGST रिटर्न फ़ाइलिंग

8. एज्ड रिसीवेबल्स — हमारे पैसे किसके ऊपर बाकी हैं?

ये किसी भी बिज़नेस के लिए सबसे ज़रूरी रिपोर्ट्स में से एक है। मीरा ने रिपोर्ट्स → एज्ड रिसीवेबल्स पर क्लिक किया।

तारीख: 30 सितंबर 2025

एज्ड रिसीवेबल्स रिपोर्ट जिसमें ग्राहकों आउटस्टैंडिंग अमाउंट्स एजिंग बकेट्स में दिख रहे हैं

एज्ड रिसीवेबल्स — Bisht Traders, 30 सितंबर 2025 तक

ग्राहककरंट (0-30 दिन)31-60 दिन61-90 दिन90 दिन से ज़्यादाकुल आउटस्टैंडिंग
Nainital Grand Hotel8,704.508,704.50
Almora Kitchen Supplies13,12513,125
Kumaon Hotel Group47,25047,250
Pahadi Kitchen17,64017,640
Hill View Cafe38,78138,781
TOTAL26,344.5013,12547,25038,7811,25,500.50

एज्ड रिसीवेबल्स कैसे पढ़ें

ये रिपोर्ट आउटस्टैंडिंग अमाउंट्स को एजिंग बकेट्स में बाँटती है — अनपेड इनवॉइस कितना पुराना है।

"कॉलम बाय कॉलम देखो," शर्मा सर ने बिष्ट जी से कहा।

करंट (0-30 दिन): Rs. 26,344.50। ये इनवॉइसेस हाल के हैं। अभी चिंता की बात नहीं। पेमेंट टर्म्स अभी एक्सपायर नहीं हुई।

31-60 दिन: Rs. 13,125। Almora Kitchen Supplies थोड़ी ओवरड्यू है। एक पोलाइट रिमाइंडर भेजो।

61-90 दिन: Rs. 47,250। Kumaon Hotel Group पर बड़ा अमाउंट बाकी है और अब 2-3 महीने पुराना है। ये चिंता की बात है। बिष्ट जी को उन्हें कॉल करना चाहिए।

90 दिन से ज़्यादा: Rs. 38,781। Hill View Cafe ने तीन महीने से ज़्यादा से पे नहीं किया। ये रेड फ़्लैग है। शायद कोई डिस्प्यूट है, या कैफ़े को फ़ाइनेंशियल समस्याएँ हैं।

"आउटस्टैंडिंग जितना पुराना, वसूली उतनी मुश्किल," शर्मा सर ने कहा। "30 दिन पुराना इनवॉइस — शायद पैसा मिल जाए। 90 दिन पुराना — शायद। 180 दिन से ज़्यादा? शायद बैड डेट के रूप में राइट ऑफ़ करना पड़े।"

इस रिपोर्ट के आधार पर ऐक्शन आइटम्स:

ग्राहकउम्रऐक्शन
Nainital Grand Hotelकरंटकोई ऐक्शन ज़रूरी नहीं
Almora Kitchen Supplies31-60 दिनरिमाइंडर भेजो
Kumaon Hotel Group61-90 दिनख़ुद कॉल करो, फ़ॉलो-अप
Pahadi Kitchenकरंटकोई ऐक्शन ज़रूरी नहीं
Hill View Cafe90 दिन से ज़्यादाअर्जेंट — कॉल करो, विज़िट करो, लीगल नोटिस सोचो

"ये रिपोर्ट हर हफ़्ते निकालो," नेगी भैया ने कहा। "रिसीवेबल्स को पुराना मत होने दो। जितना देर लगाओगे, उतना मुश्किल होगा।"


9. एज्ड पेएबल्स — हमें किसे देना है?

मीरा ने रिपोर्ट्स → एज्ड पेएबल्स पर क्लिक किया।

तारीख: 30 सितंबर 2025

एज्ड पेएबल्स रिपोर्ट जिसमें वेंडर्स आउटस्टैंडिंग अमाउंट्स एजिंग बकेट्स में दिख रहे हैं

एज्ड पेएबल्स — Bisht Traders, 30 सितंबर 2025 तक

वेंडरकरंट (0-30 दिन)31-60 दिन61-90 दिन90 दिन से ज़्यादाकुल आउटस्टैंडिंग
Delhi Spice Suppliers63,00063,000
Rajasthan Masala Co.22,00022,000
Local Packaging5,9005,900
Haldwani Transport4,1004,100
TOTAL73,00022,00095,000

एज्ड पेएबल्स कैसे पढ़ें

ये रिपोर्ट एज्ड रिसीवेबल्स का मिरर है — लेकिन दूसरी तरफ़ से। "किसके पैसे हम पर बाकी हैं" की जगह "हमें किसे देना है" दिखाता है।

"यहाँ सवाल अलग है," शर्मा सर ने कहा। "रिसीवेबल्स में तुम पुराने कर्ज़ की चिंता करते हो। पेएबल्स में ड्यू डेट्स की चिंता करते हो। अगर बिष्ट जी वेंडर को समय पर पे न करें, तो दो बातें होंगी: वेंडर माल भेजना बंद कर सकता है, और वेंडर ओवरड्यू अमाउंट पर ब्याज ले सकता है।"

बिष्ट जी की स्थिति अच्छी दिखती है: ज़्यादातर पेएबल्स करंट हैं (30 दिन के अंदर)। Rajasthan Masala Co. 31-60 दिन पर है — ये उनकी 30 दिन की पेमेंट टर्म्स के बस थोड़ा ऊपर है (मामूली ओवरड्यू)। 60 दिन से ज़्यादा पुराना कोई पेएबल नहीं।

"समय पर पे करो," बिष्ट जी ने कहा। "ये मेरा नियम है। आपूर्तिकर्ता के साथ अच्छी रेप्यूटेशन किसी भी चीज़ से ज़्यादा कीमती है।"


सब कुछ एक साथ लाना — डैशबोर्ड व्यू

सारी रिपोर्ट्स निकालने के बाद, मीरा ERPLite डैशबोर्ड पर वापस गई। अब उसे डैशबोर्ड का हर नंबर समझ आ रहा था।

ERPLite डैशबोर्ड जिसमें सारे की नंबर्स अब मीरा को समझ आ रहे हैं

डैशबोर्ड कार्डवैल्यूअब मीरा क्या जानती है
कैश बैलेंसRs. 45,000कैश फ्लो स्टेटमेंट से
बैंक बैलेंसRs. 3,82,000बैलेंस शीट से
कुल रिसीवेबल्सRs. 1,25,500एज्ड रिसीवेबल्स से
कुल पेएबल्सRs. 95,000एज्ड पेएबल्स से
राजस्व (YTD)Rs. 12,80,000P&L स्टेटमेंट से
नेट मुनाफ़ा (YTD)Rs. 3,55,340P&L स्टेटमेंट से

"जब तुमने पहली बार ये डैशबोर्ड देखा था," शर्मा सर ने कहा, "ये बस नंबर्स थे। अब हर नंबर के पीछे एक कहानी है। तुम जानती हो कि कौन सा ग्राहक तुम पर बाकी है। तुम जानती हो किस वेंडर को पे करना है। तुम जानती हो कि बिज़नेस फ़ायदेमंद है या नहीं। तुम जानती हो कैश कहाँ है। यही अकाउंटिंग है — नंबर्स जो कहानियाँ बताते हैं।"


हर रिपोर्ट कब निकालें

एक व्यावहारिक गाइड कि कौन सी रिपोर्ट कब निकालनी चाहिए:

रिपोर्टकितनी बारकिसे चाहिएक्यों
डे बुकरोज़अकाउंटेंटडेली एंट्रीज़ समीक्षा
ट्रायल बैलेंसमंथलीअकाउंटेंट, CAबुक्स बैलेंस्ड हैं या नहीं
सेल्स रजिस्टरमंथलीअकाउंटेंट, GST फ़ाइलिंगGSTR-1 तैयारी
परचेज़ रजिस्टरमंथलीअकाउंटेंट, GST फ़ाइलिंगITC क्लेम्स, GSTR-3B
एज्ड रिसीवेबल्सवीकलीबिज़नेस ओनर, अकाउंटेंटपेमेंट्स फ़ॉलो-अप
एज्ड पेएबल्सवीकलीबिज़नेस ओनर, अकाउंटेंटवेंडर पेमेंट्स प्लान
P&L स्टेटमेंटक्वार्टरली / एनुअलीबिज़नेस ओनर, निवेशक, बैंकलाभप्रदता मेज़र
बैलेंस शीटक्वार्टरली / एनुअलीबिज़नेस ओनर, निवेशक, बैंकफ़ाइनेंशियल हेल्थ मेज़र
कैश फ्लो स्टेटमेंटक्वार्टरली / एनुअलीबिज़नेस ओनर, बैंककैश मूवमेंट्स समझना

"हमारे जैसे CA दफ़्तर में," नेगी भैया ने कहा, "हम हर क्लाइंट का ट्रायल बैलेंस मंथली निकालते हैं। P&L और बैलेंस शीट बड़े क्लाइंट्स के लिए क्वार्टरली और छोटे क्लाइंट्स के लिए एनुअली बनाते हैं। सेल्स और परचेज़ रजिस्टर्स GST फ़ाइलिंग के लिए मंथली निकालते हैं। एज्ड रिसीवेबल्स और पेएबल्स ओनर की ज़िम्मेदारी है — उन्हें हर हफ़्ते चेक करना चाहिए।"


क्विक रीकैप

  • ट्रायल बैलेंस — सभी अकाउंट्स बैलेंसेस के साथ लिस्टेड; डेबिट्स बराबर क्रेडिट्स होने चाहिए; एक्यूरेसी का पहला चेक
  • मुनाफ़ा ऐंड घाटा स्टेटमेंट — एक पीरियड की आमदनी माइनस ख़र्चाेस; बताता है बिज़नेस मुनाफ़ा में है या घाटा में
  • बैलेंस शीट — एक पॉइंट इन टाइम पर एसेट्स, लायबिलिटीज़, और इक्विटी; एसेट्स = लायबिलिटीज़ + इक्विटी
  • कैश फ्लो स्टेटमेंट — कैश कहाँ से आया और कहाँ गया; फ़ायदेमंद बिज़नेस भी कैश-स्ट्रैप्ड हो सकता है
  • डे बुक — एक ख़ास डेट की हर ट्रांज़ैक्शन; तुम्हारी डेली डायरी
  • सेल्स रजिस्टर — GST ब्योरा के साथ सारे सेल्स इनवॉइसेस; GSTR-1 फ़ाइलिंग के लिए ज़रूरी
  • परचेज़ रजिस्टर — GST ब्योरा के साथ सारे परचेज़ बिल्स; ITC क्लेम्स और GSTR-3B के लिए ज़रूरी
  • एज्ड रिसीवेबल्स — किसके पैसे तुम पर बाकी हैं और कब से; पुराना = वसूली मुश्किल
  • एज्ड पेएबल्स — तुम किसे कितना देने हो और कब से; समय पर पे करो, रिश्ते बनाए रखो
  • ERPLite तुम्हारी डाली ट्रांज़ैक्शंस से सभी रिपोर्ट्स अपने आप बनाता है — कोई मैन्युअल गणना नहीं
  • रिपोर्ट्स नियमित निकालो — रोज़ (डे बुक), हफ़्ते में (रिसीवेबल्स/पेएबल्स), महीने में (TB, रजिस्टर्स), क्वार्टरली (P&L, BS, कैश फ्लो)

अभ्यास अभ्यास — ये खुद करो

यहाँ Rawat General Store का एक सिंप्लिफ़ाइड ट्रायल बैलेंस है। कुछ नंबर्स मिसिंग हैं। भरो।

Rawat General Store — ट्रायल बैलेंस 30 सितंबर 2025 तक

अकाउंटडेबिट (Rs.)क्रेडिट (Rs.)
Cash in Hand15,000
Bank Account42,000
Trade Receivables8,500
Inventory35,000
Furniture20,000
Trade Payables18,000
Owner's Capital50,000
Sales1,80,000
Purchases1,10,000
Rent12,000
Electricity3,000
Salary?
Retained Earnings?
TOTAL??

टास्क्स:

  1. अगर कुल्स बराबर होने चाहिए, और तनख़्वाह ख़र्चा Rs. 24,000 है, तो रिटेन्ड अर्निंग्स कितनी होनी चाहिए? (हिंट: सारे डेबिट्स जोड़ो, सारे ज्ञात क्रेडिट्स जोड़ो, और अंतर निकालो।)

  2. ऊपर के ट्रायल बैलेंस से गणना करो:

    • ग्रॉस मुनाफ़ा (Sales माइनस Purchases)
    • कुल ख़र्चाेस (Rent + Electricity + Salary)
    • नेट मुनाफ़ा (ग्रॉस मुनाफ़ा माइनस कुल ख़र्चाेस)
  3. ऊपर के नंबर्स इस्तेमाल करके Rawat General Store का एक सिंपल P&L स्टेटमेंट बनाओ।

  4. नीचे एज्ड रिसीवेबल्स देखो, रावत आंटी को सबसे पहले किस ग्राहक को कॉल करना चाहिए?

ग्राहक0-30 दिन31-60 दिन60 दिन से ज़्यादाकुल
श्रीमती पांडे500500
जोशी स्वीट्स2,0002,000
Old Town Dhaba6,0006,000
  1. एजिंग रिपोर्ट में सभी रिसीवेबल्स का कुल कितना है? क्या ये ट्रायल बैलेंस में Trade Receivables से मैच करता है?

फ़न फ़ैक्ट

सबसे पहली ज्ञात बैलेंस शीट 1868 में एक ब्रिटिश रेलवे कंपनी ने बनाई। लेकिन कॉन्सेप्ट बहुत पहले का है। 1494 में, एक इटालियन फ़्रायर — Luca Pacioli — ने एक किताब पब्लिश की जिसमें डबल-एंट्री सिस्टम डिस्क्राइब किया — डेबिट्स और क्रेडिट्स, जर्नल्स और लेजर्स, ट्रायल बैलेंसेस और बैलेंस शीट्स। उन्होंने इसे इन्वेंट नहीं किया — Venice के व्यापारी सदियों से इसे इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन उन्होंने इसे पहली बार ठीक से लिखा। Pacioli को "अकाउंटिंग का फ़ादर" कहा जाता है। उनकी किताब इतनी इन्फ़्लुएंशियल थी कि आज दुनिया भर का हर अकाउंटिंग स्टूडेंट — हल्द्वानी में मीरा सहित — अभी भी उसी सिस्टम को पालन कर रहा है जो उन्होंने 530 साल पहले डिस्क्राइब किया। जब मीरा ERPLite में ट्रायल बैलेंस निकालती है और देखती है कि डेबिट्स बराबर क्रेडिट्स हैं, तो वो वही नियम चेक कर रही है जो Pacioli ने 1494 में लिखा था। कुछ आइडियाज़ सच में टाइमलेस होते हैं।

GST क्या है? — पूरी तस्वीर

मीरा ने "GST" शब्द सौ बार सुना था। बागेश्वर के हर दुकानदार की इसके बारे में शिकायत थी। उसके चाचा कहते थे कि इसने छोटे बिज़नेस बर्बाद कर दिए। न्इस्तेमाल चैनल हर रात इस पर बहस करते थे। लेकिन जब सोमवार सुबह शर्मा सर ने पूछा — "मीरा, बताओ GST असल में है क्या?" — तो वो चुप हो गई। "सर, ये एक टैक्स है... गुड्स पर?" शर्मा सर मुस्कुराए। "आज तुम इसे ठीक से समझोगी। और इस हफ़्ते के अंत तक, तुम इसे सिर्फ़ समझोगी नहीं — तुम हमारे क्लाइंट्स के लिए GST रिटर्न्स भी फ़ाइल करोगी।"


GST से पहले की दुनिया

GST समझने के लिए पहले ये समझना ज़रूरी है कि इससे पहले क्या था। 1 जुलाई 2017 से पहले, भारत में कई अलग-अलग टैक्सेस का एक उलझा हुआ सिस्टम था।

सोचो बिष्ट जी के बारे में — हमारे होलसेल मसाला क्लाइंट, हल्द्वानी में। वो राजस्थान के किसानों से कच्चे मसाले ख़रीदते हैं, उन्हें प्रक्रिया और पैक करते हैं, और उत्तराखंड और दूसरे राज्यों की दुकानों में बेचते हैं। GST से पहले, उन्हें ये सब झेलना पड़ता था:

टैक्सकौन वसूलता थाकिस पर लगता था
एक्साइज़ ड्यूटीकेंद्र सरकारगुड्स की मैन्युफ़ैक्चरिंग पर
VAT (वैल्यू ऐडेड टैक्स)राज्य सरकारराज्य के अंदर गुड्स की बिक्री पर
CST (सेंट्रल सेल्स टैक्स)केंद्र सरकारराज्यों के बीच गुड्स की बिक्री पर
सेवा टैक्सकेंद्र सरकारसेवाेस (ट्रांसपोर्ट, इंश्योरेंस, आदि) पर
ऑक्ट्रॉय / एंट्री टैक्सस्थानीय / राज्य सरकारकिसी शहर या राज्य में गुड्स आने पर
परचेज़ टैक्सराज्य सरकारकुछ ख़ास ख़रीदारी पर

ये छह अलग-अलग टैक्सेस! और हर टैक्स के अपने नियम, अपनी रेट्स, अपने फ़ॉर्म्स, और अपने दफ़्तरर्स थे।

सबसे बड़ी समस्या: टैक्स पर टैक्स

शर्मा सर ने अपना चाय का कप उठाया और बोले, "मीरा, ये चाय से समझाता हूँ।"

मान लो तुम्हें एक कप चाय बनानी है। पुराना टैक्स सिस्टम ऐसा था:

  1. चाय बागान चायपत्ती उगाता है और एक्साइज़ ड्यूटी Rs 5 देता है।
  2. बागान चायपत्ती एक ट्रेडर को बेचता है Rs 100 + Rs 5 टैक्स = Rs 105 में।
  3. ट्रेडर चायपत्ती एक चाय की दुकान को Rs 150 में बेचता है। लेकिन VAT Rs 150 पर लगता है (जिसमें Rs 5 एक्साइज़ ड्यूटी पहले से शामिल है!)। तो अगर VAT 12% है, तो चाय की दुकान Rs 150 + Rs 18 = Rs 168 चुकाती है।
  4. चाय की दुकान चाय बनाकर एक कप Rs 20 में बेचती है। सेवा टैक्स Rs 20 पर लगता है।

समस्या दिखी? चरण 3 में, ट्रेडर ने ऐसी कीमत पर VAT दिया जिसमें एक्साइज़ ड्यूटी पहले से शामिल थी। यानी तुमने टैक्स के ऊपर टैक्स दिया। इसे कैस्केडिंग इफ़ेक्ट या "टैक्स ऑन टैक्स" कहते हैं।

नतीजा? ग्राहक के लिए सब कुछ महँगा हो गया। और बिष्ट जी जैसे बिज़नेस को हर टैक्स के लिए अलग रिटर्न फ़ाइल करना पड़ता था, अलग रिकॉर्ड रखने पड़ते थे, और अलग डिपार्टमेंट्स से निपटना पड़ता था।

पुराने सिस्टम की और समस्याएँ

समस्याउदाहरण
अलग-अलग राज्यों में अलग टैक्स रेट्समसालों पर VAT एक राज्य में 5% था और दूसरे में 14%। बिष्ट जी को हर राज्य की रेट्स याद रखनी पड़ती थीं।
राज्य की सीमा पर ट्रक रुकते थेजब भी बिष्ट जी उत्तराखंड से दिल्ली ट्रक भेजते, सीमा पर ऑक्ट्रॉय और एंट्री टैक्स की जाँच के लिए रोका जाता। ट्रक घंटों, कभी-कभी दिनों तक खड़े रहते।
अलग-अलग टैक्स टाइप्स में क्रेडिट नहीं मिलता थाअगर बिष्ट जी ने कच्चे माल पर एक्साइज़ ड्यूटी दी, तो वो अपना VAT कम करने के लिए उसका उपयोग नहीं कर सकते थे। टैक्सेस आपस में बात नहीं करते थे।
कम्प्लायंस का सिरदर्दएक बिज़नेस को साल में 30 से ज़्यादा टैक्स रिटर्न्स फ़ाइल करने पड़ सकते थे — अलग-अलग टैक्सेस और राज्यों के लिए।

पुराना मल्टी-टैक्स सिस्टम एक भूलभुलैया जैसा था जिसमें कई टोल बूथ थे


GST आया: एक देश, एक टैक्स

1 जुलाई 2017 को, भारत ने लगभग उन सभी टैक्सेस को एक ही टैक्स से बदल दिया जिसका नाम है GST — गुड्स ऐंड सेवाेस टैक्स

आइडिया सीधा है: गुड्स और सेवाेस की आपूर्ति पर एक ही टैक्स, हर चरण पर लगे, लेकिन पहले से चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट मिले।

शर्मा सर बोले, "ऐसे समझो मीरा। पुराना सिस्टम ऐसा था जैसे हल्द्वानी से दिल्ली जाओ और हर गाँव में अलग टोल चुकाओ। GST ऐसा है जैसे FASTag — एक सिस्टम, एक पेमेंट मेथड, सब कुछ अपने-आप ट्रैक होता है।"

GST ने किन टैक्सेस की जगह ली

GST ने इन सबकी जगह ली:

  • एक्साइज़ ड्यूटी
  • VAT / सेल्स टैक्स
  • सेवा टैक्स
  • CST (सेंट्रल सेल्स टैक्स)
  • ऑक्ट्रॉय और एंट्री टैक्स
  • परचेज़ टैक्स
  • एंटरटेनमेंट टैक्स
  • लग्ज़री टैक्स
  • कई और सेस और सरचार्जेस

ये सब गायब हो गए। इनकी जगह: एक GST

नोट: कुछ चीज़ें अभी भी GST से बाहर हैं — पेट्रोलियम उत्पाद (पेट्रोल, डीज़ल), इंसानों के पीने वाली शराब, और बिजली। इन पर अभी भी पुराने सिस्टम से टैक्स लगता है।


GST के तीन प्रकार

"लेकिन सर," मीरा ने पूछा, "अगर ये एक ही टैक्स है, तो हर बिल पर CGST, SGST, और IGST क्यों दिखता है?"

अच्छा सवाल। GST सिद्धांत में एक टैक्स है, लेकिन इसे तीन हिस्सों में बाँटा गया है — ये इस पर निर्भर करता है कि कौन बेच रहा है और कौन ख़रीद रहा है।

1. CGST — सेंट्रल GST

ये केंद्र सरकार (भारत सरकार) को जाता है।

2. SGST — स्टेट GST

ये राज्य सरकार (हमारे केस में, उत्तराखंड सरकार) को जाता है।

3. IGST — इंटीग्रेटेड GST

ये पहले केंद्र सरकार को जाता है, और फिर डेस्टिनेशन राज्य के साथ बाँटा जाता है।

कब कौन सा लगेगा?

नियम बहुत सीधा है:

बिक्री का प्रकारक्या लगेगाउदाहरण
एक ही राज्य में (इंट्रा-स्टेट)CGST + SGST (बराबर-बराबर)बिष्ट जी हल्द्वानी में नैनीताल की दुकान को बेचते हैं (दोनों उत्तराखंड में)
दूसरे राज्य में (इंटर-स्टेट)IGST (पूरी रेट)बिष्ट जी हल्द्वानी से दिल्ली के बायर को बेचते हैं

मान लो मसालों पर GST रेट 5% है।

  • इंट्रा-स्टेट बिक्री (हल्द्वानी से नैनीताल): CGST = 2.5% + SGST = 2.5% = कुल 5%
  • इंटर-स्टेट बिक्री (हल्द्वानी से दिल्ली): IGST = 5%

कुल टैक्स दोनों में बराबर है (5%)। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच कैसे बँटता है।

चलो बिष्ट जी का एक असली उदाहरण देखते हैं:

उदाहरण: बिष्ट जी देहरादून की दुकान को Rs 1,00,000 के मसाले बेचते हैं (एक ही राज्य)

मदराशि
टैक्सेबल वैल्यूRs 1,00,000
CGST @ 2.5%Rs 2,500
SGST @ 2.5%Rs 2,500
इनवॉइस कुलRs 1,05,000

उदाहरण: बिष्ट जी दिल्ली की दुकान को Rs 1,00,000 के मसाले बेचते हैं (दूसरा राज्य)

मदराशि
टैक्सेबल वैल्यूRs 1,00,000
IGST @ 5%Rs 5,000
इनवॉइस कुलRs 1,05,000

"राशि बराबर, लेबल अलग," शर्मा सर बोले। "ग्राहक दोनों तरीक़ों में बराबर कुल चुकाता है।"

इंट्रा-स्टेट के लिए CGST + SGST, इंटर-स्टेट के लिए IGST


GST रजिस्ट्रेशन किसे करवाना पड़ता है?

हर बिज़नेस को GST रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं है। सरकार ने एक सीमा (थ्रेशोल्ड) तय की है — अगर तुम्हारा टर्नओवर एक तय राशि से कम है, तो रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं।

रजिस्ट्रेशन थ्रेशोल्ड्स

आपूर्ति का प्रकारथ्रेशोल्ड (सामान्य राज्य)थ्रेशोल्ड (विशेष श्रेणी के राज्य*)
गुड्सRs 40 लाख प्रति वर्षRs 20 लाख प्रति वर्ष
सेवाेसRs 20 लाख प्रति वर्षRs 10 लाख प्रति वर्ष

विशेष श्रेणी के राज्यों में कुछ पूर्वोत्तर राज्य शामिल हैं। उत्तराखंड पहले इस सूची में था लेकिन गुड्स के लिए अब सामान्य श्रेणी में आ गया है।

हमारे क्लाइंट्स के लिए इसका क्या मतलब है?

  • रावत आंटी (रावत जनरल स्टोर, अल्मोड़ा): उनकी सालाना बिक्री लगभग Rs 15 लाख है। वो गुड्स बेचती हैं। थ्रेशोल्ड Rs 40 लाख है। तो उन्हें GST रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं। उनका बिज़नेस छोटा है।

  • बिष्ट जी (बिष्ट ट्रेडर्स, होलसेल मसाले): उनकी सालाना बिक्री लगभग Rs 90 लाख है। Rs 40 लाख से बहुत ऊपर। उन्हें GST रजिस्ट्रेशन करवाना ही होगा

अनिवार्य रजिस्ट्रेशन (थ्रेशोल्ड से कम होने पर भी)

कुछ बिज़नेस को थ्रेशोल्ड से कम टर्नओवर होने पर भी GST रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है:

  • कोई भी जो इंटर-स्टेट सप्लाइज़ करता है (दूसरे राज्य में बेचता है)
  • ई-कॉमर्स सेलर्स (Amazon, Flipkart, आदि पर बेचने वाले)
  • जिन्हें TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) काटना ज़रूरी है
  • जिन्हें TCS (टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स) वसूलना ज़रूरी है
  • इनपुट सेवा डिस्ट्रीब्यूटर्स
  • कैज़ुअल टैक्सेबल पर्सन्स (जैसे किसी मेले में अस्थायी दुकान लगाने वाले)

तो अगर रावत आंटी कभी Amazon पर अचार बेचना शुरू करें, तो उन्हें GST रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा — भले ही उनका टर्नओवर Rs 5 लाख ही हो।

GSTIN

रजिस्ट्रेशन करने पर तुम्हें एक GSTIN — गुड्स ऐंड सेवाेस टैक्स आइडेंटिफ़िकेशन नंबर मिलता है। ये 15 अंकों का नंबर होता है जो ऐसा दिखता है:

05AABCT1234C1Z5

इसे तोड़कर समझते हैं:

अंकमतलबउदाहरण
पहले 2स्टेट कोड05 = उत्तराखंड
अगले 10बिज़नेस का PANAABCT1234C
13वाँएंटिटी नंबर (एक ही PAN, अलग रजिस्ट्रेशंस)1
14वाँडिफ़ॉल्ट "Z"Z
15वाँचेक डिजिट5

बिष्ट जी का GSTIN "05" से शुरू होता है क्योंकि वो उत्तराखंड (स्टेट कोड 05) में रजिस्टर्ड हैं।


कंपोज़ीशन स्कीम — एक आसान विकल्प

शर्मा सर बोले, "अब मीरा, कुछ छोटे बिज़नेस इतनी कॉम्प्लेक्सिटी नहीं झेलना चाहते। उनके लिए कंपोज़ीशन स्कीम है।"

कंपोज़ीशन स्कीम क्या है?

ये छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक सिंप्लिफ़ाइड स्कीम है। हर इनवॉइस पर GST चार्ज करने और विस्तृत रिटर्न्स फ़ाइल करने की बजाय, तुम बस अपने टर्नओवर का एक फ़्लैट परसेंटेज चुकाते हो।

बिज़नेस का प्रकारकंपोज़ीशन रेट
मैन्युफ़ैक्चरर्स1% (0.5% CGST + 0.5% SGST)
ट्रेडर्स (गुड्स)1% (0.5% CGST + 0.5% SGST)
रेस्टोरेंट्स5% (2.5% CGST + 2.5% SGST)
सेवा प्रोवाइडर्स6% (3% CGST + 3% SGST)

कंपोज़ीशन किसके लिए?

  • सालाना टर्नओवर Rs 1.5 करोड़ तक (विशेष श्रेणी के राज्यों में Rs 75 लाख)
  • इंटर-स्टेट बिक्री नहीं कर सकते
  • ई-कॉमर्स के ज़रिए आपूर्ति नहीं कर सकते
  • कुछ नोटिफ़ाइड गुड्स (जैसे आइसक्रीम, तंबाकू) के मैन्युफ़ैक्चरर नहीं हो सकते

सबसे बड़ी बात: ITC नहीं मिलता

कंपोज़ीशन स्कीम का सबसे ज़रूरी नियम ये है: तुम ITC क्लेम नहीं कर सकते। तुम अपनी ख़रीदारी पर जो भी GST चुकाते हो — उसे अपना टैक्स कम करने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते।

साथ ही, तुम अपने इनवॉइस पर GST चार्ज नहीं कर सकते। तुम्हें बिल पर "कंपोज़ीशन टैक्सेबल पर्सन" लिखना पड़ता है। ग्राहक भी तुम्हारे बिल पर ITC नहीं ले सकता।

उदाहरण: क्या रावत आंटी को कंपोज़ीशन लेना चाहिए?

मान लो रावत आंटी का टर्नओवर अगले साल Rs 40 लाख पार कर जाता है और उन्हें GST रजिस्ट्रेशन लेनी पड़ती है। क्या उन्हें कंपोज़ीशन स्कीम चुनना चाहिए?

पहलूनियमित GSTकंपोज़ीशन स्कीम
टैक्स रेटअसली GST रेट (5%, 12%, 18%)फ़्लैट 1%
ख़रीदारी पर ITCहाँ, क्लेम कर सकते हैंनहीं
इनवॉइस का प्रकारटैक्स इनवॉइस (विस्तृत)बिल ऑफ़ आपूर्ति (सिंपल)
रिटर्न्समंथली/क्वार्टरली GSTR-1, मंथली GSTR-3Bक्वार्टरली CMP-08, एनुअल GSTR-4
कम्प्लायंस का बोझज़्यादाकम
इंटर-स्टेट बिक्रीकर सकते हैंनहीं कर सकते

रावत आंटी की छोटी किराना दुकान के लिए, जो सिर्फ़ लोकली बेचती हैं, कंपोज़ीशन स्कीम अच्छा विकल्प हो सकता है। कम कागज़ी काम, सीधा टैक्स गणना।

लेकिन बिष्ट जी के लिए, जो कई राज्यों में मसाले बेचते हैं, कंपोज़ीशन स्कीम विकल्प नहीं है — वो इंटर-स्टेट बिक्री करते हैं। साथ ही, उनकी ख़रीदारी का वॉल्यूम ज़्यादा है, तो ITC क्लेम न करने पर उनका बहुत नुक़सान होगा।


GST असल में काम कैसे करता है: आपूर्ति चेन

चलो एक पैकेट जीरे (cumin) का सफ़र ट्रेस करते हैं — खेत से तुम्हारी रसोई तक, हर चरण पर GST के साथ। मान लो मसालों पर GST 5% है।

चरण 1: किसान से बिष्ट जी (होलसेल ख़रीद)

किसान बिष्ट जी को कच्चा जीरा Rs 500 में बेचता है।

कृषि उत्पाद किसान की बिक्री पर GST से छूट प्राप्त है। तो किसान Rs 0 GST लेता है।

बिष्ट जी चुकाते हैं: Rs 500 (कोई GST नहीं)।

चरण 2: बिष्ट जी प्रक्रिया करके हल्द्वानी की एक दुकान को बेचते हैं

बिष्ट जी जीरे को साफ़ करते हैं, पैक करते हैं, और एक रिटेल दुकान को Rs 800 में बेचते हैं। अब GST लगता है।

राशि
टैक्सेबल वैल्यूRs 800
CGST @ 2.5%Rs 20
SGST @ 2.5%Rs 20
इनवॉइस कुलRs 840

बिष्ट जी Rs 40 GST वसूलते हैं। इसे आउटपुट टैक्स कहते हैं — वो टैक्स जो तुम अपनी बिक्री पर वसूलते हो।

बिष्ट जी की ख़रीद पर GST नहीं था (किसान को छूट थी)। तो उनका इनपुट टैक्स Rs 0 है।

वो सरकार को चुकाते हैं: आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स = Rs 40 - Rs 0 = Rs 40

चरण 3: रिटेल दुकान ग्राहक को बेचती है

रिटेल दुकान जीरे का पैकेट ग्राहक को Rs 1,000 में बेचती है।

राशि
टैक्सेबल वैल्यूRs 1,000
CGST @ 2.5%Rs 25
SGST @ 2.5%Rs 25
इनवॉइस कुलRs 1,050

रिटेल दुकान Rs 50 GST वसूलती है। लेकिन उसने बिष्ट जी को पहले ही Rs 40 GST चुकाया था।

दुकान सरकार को चुकाती है: Rs 50 - Rs 40 = Rs 10

सरकार ने कुल कितना टैक्स इकट्ठा किया

चरणसरकार को चुकाया गया टैक्स
किसानRs 0 (छूट)
बिष्ट जीRs 40
रिटेल दुकानRs 10
कुलRs 50

आख़िरी ग्राहक ने Rs 50 GST चुकाया (Rs 1,000 का 5%)। सरकार ने ठीक Rs 50 वसूले — एक रुपया ज़्यादा नहीं, एक रुपया कम नहीं। कोई टैक्स पर टैक्स नहीं। चेन में हर व्यक्ति ने सिर्फ़ उस वैल्यू पर टैक्स दिया जो उसने ऐड की

यही GST की ख़ूबसूरती है। यही "इनपुट टैक्स क्रेडिट" का मतलब है। ITC को हम Chapter 19 में विस्तार से पढ़ेंगे।

GST चेन — हर चरण पर क्रेडिट के साथ टैक्स बहता है


GST काउंसिल

"GST रेट्स कौन तय करता है?" मीरा ने पूछा।

GST काउंसिल वो संस्था है जो GST के सभी बड़े फ़ैसले लेती है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं।

काउंसिल ये तय करती है:

  • कौन से गुड्स और सेवाेस पर टैक्स लगेगा और कितना
  • कौन सी चीज़ें छूट प्राप्त (एग्ज़ेम्प्ट) हैं
  • थ्रेशोल्ड लिमिट्स
  • मॉडल GST लॉज़ और नियम
  • सिस्टम में कोई भी बदलाव

GST काउंसिल समय-समय पर मिलती है और रेट बदलावेस आमतौर पर इन बैठकों के बाद अनाउंस किए जाते हैं। इसीलिए तुम कभी-कभी ख़बरों में सुनते हो कि "GST काउंसिल ने XYZ चीज़ पर रेट कम कर दिया।"


GST टैक्स स्लैब्स

GST में चार मुख्य टैक्स स्लैब्स हैं:

स्लैबउदाहरण
5%मसाले, चाय, कॉफ़ी, खाद्य तेल, Rs 1,000 से कम के जूते
12%घी, मक्खन, बादाम, मोबाइल फ़ोन, सिलाई मशीन
18%ज़्यादातर चीज़ें — साबुन, टूथपेस्ट, हेयर ऑइल, कंप्यूटर, AC रेस्टोरेंट का खाना
28%लग्ज़री आइटम्स — कार, AC, वॉशिंग मशीन, एरेटेड ड्रिंक्स, तंबाकू

कुछ चीज़ें 0% (छूट प्राप्त) भी हैं: ताज़े फल, ताज़ी सब्ज़ियाँ, दूध, अंडे, बिना ब्रांड वाला आटा और चावल, किताबें, अख़बार।

इन टैक्स स्लैब्स को हम अगले चैप्टर में विस्तार से पढ़ेंगे।


हैंड्स-ऑन: बिष्ट जी का GST रजिस्ट्रेशन देखना

नेगी भैया ने मीरा को अपने कंप्यूटर के पास बुलाया। "तुम्हें बिष्ट जी की GST प्रोफ़ाइल ERPLite में दिखाता हूँ।"

Udyamo ERPLite में, GST ब्योरा कंपनी और पार्टी मास्टर रिकॉर्ड में रखी जाती हैं।

चरण 1: ERPLite खोलो और सेटिंग्स > कंपनी प्रोफ़ाइल पर जाओ।

यहाँ तुम देख सकते हो:

  • Company Name: Bisht Traders
  • GSTIN: 05AADFB1234R1Z8
  • State: Uttarakhand (05)
  • Registration Type: Regular

चरण 2: मास्टर्स > पार्टीज़ पर जाओ और किसी ग्राहक पर क्लिक करो।

हर ग्राहक के लिए तुम देख सकते हो:

  • ग्राहक GSTIN (अगर रजिस्टर्ड है)
  • स्टेट
  • बिक्री इंट्रा-स्टेट है या इंटर-स्टेट (ERPLite ये स्टेट कोड्स के आधार पर अपने-आप पता लगा लेता है)

चरण 3: एक हालिया सेल्स इनवॉइस देखो।

नेगी भैया ने देहरादून के एक ग्राहक की रीसेंट इनवॉइस खोली। इनवॉइस में दिख रहा था:

  • CGST @ 2.5% और SGST @ 2.5% (क्योंकि दोनों उत्तराखंड में हैं — इंट्रा-स्टेट)

फिर उन्होंने दिल्ली के ग्राहक की इनवॉइस खोली। इसमें दिख रहा था:

  • IGST @ 5% (क्योंकि उत्तराखंड से दिल्ली इंटर-स्टेट है)

"ERPLite ये अपने-आप करता है," नेगी भैया बोले। "एक बार ग्राहक का स्टेट सही से सेट कर दो, फिर ये ख़ुद पता लगा लेता है कि CGST+SGST लगाना है या IGST।"

ERPLite कंपनी प्रोफ़ाइल में बिष्ट जी की GST ब्योरा


क्विक रीकैप

  • GST का मतलब है गुड्स ऐंड सेवाेस टैक्स। इसने 1 जुलाई 2017 से कई पुराने टैक्सेस (VAT, एक्साइज़, सेवा टैक्स, CST, ऑक्ट्रॉय, आदि) की जगह ली।
  • पुराने सिस्टम में टैक्स पर टैक्स (कैस्केडिंग इफ़ेक्ट) लगता था। GST इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट से ठीक करता है।
  • GST के तीन प्रकार हैं: CGST (सेंट्रल), SGST (स्टेट), IGST (इंटीग्रेटेड)।
  • इंट्रा-स्टेट बिक्री = CGST + SGST। इंटर-स्टेट बिक्री = IGST। कुल रेट बराबर होता है।
  • रजिस्ट्रेशन थ्रेशोल्ड: गुड्स के लिए Rs 40 लाख, सेवाेस के लिए Rs 20 लाख।
  • कंपोज़ीशन स्कीम: फ़्लैट 1% टैक्स, कम कागज़ी काम, लेकिन ITC नहीं और इंटर-स्टेट बिक्री नहीं।
  • GST काउंसिल रेट्स और नियम तय करती है।
  • हर रजिस्टर्ड बिज़नेस को 15 अंकों का GSTIN मिलता है।

अभ्यास अभ्यास

अभ्यास 1: टैक्स का प्रकार पहचानो

बिष्ट ट्रेडर्स (हल्द्वानी, उत्तराखंड) की नीचे दी गई हर बिक्री के लिए लिखो कि CGST+SGST लगेगा या IGST:

  1. अल्मोड़ा, उत्तराखंड की दुकान को बिक्री
  2. लखनऊ, उत्तर प्रदेश के एक रेस्टोरेंट को बिक्री
  3. पिथौरागढ़, उत्तराखंड के ग्राहक को बिक्री
  4. जयपुर, राजस्थान के एक होलसेलर को बिक्री
  5. नैनीताल, उत्तराखंड के एक होटल को बिक्री

अभ्यास 2: GST गणना करो

बिष्ट जी हरिद्वार (उत्तराखंड) के बायर को Rs 50,000 (टैक्सेबल वैल्यू) की हल्दी पाउडर बेचते हैं। GST रेट 5% है। गणना करो:

  • CGST राशि
  • SGST राशि
  • कुल इनवॉइस राशि

अब वही चंडीगढ़ (दूसरा राज्य/UT) के बायर के लिए गणना करो:

  • IGST राशि
  • कुल इनवॉइस राशि

अभ्यास 3: कंपोज़ीशन या नियमित?

इनमें से हर बिज़नेस के लिए तय करो कि उन्हें कंपोज़ीशन स्कीम लेनी चाहिए या नियमित GST। अपना कारण दो।

  1. हल्द्वानी में एक चाय की दुकान, Rs 8 लाख सालाना टर्नओवर, सिर्फ़ लोकली बेचती है।
  2. एक हैंडीक्राफ़्ट सेलर, Rs 30 लाख टर्नओवर, पूरे भारत में Amazon पर बेचता है।
  3. एक मिठाई की दुकान, Rs 1 करोड़ टर्नओवर, सारी बिक्री उत्तराखंड में।
  4. एक होलसेल अनाज ट्रेडर, Rs 2 करोड़ टर्नओवर।

अभ्यास 4: GSTIN डिकोड करो

ये GSTIN दिया गया है: 05AABCB9876M1Z3

  • ये बिज़नेस किस राज्य में रजिस्टर्ड है?
  • PAN क्या है?
  • क्या ये इस PAN के तहत पहला रजिस्ट्रेशन है?

फ़न फ़ैक्ट

क्या तुम जानते हो? GST से पहले, भारत के ट्रक ड्राइवर अपने सफ़र का लगभग 60% समय राज्य की सीमाओं पर टैक्स इंस्पेक्शन के लिए इंतज़ार में बिताते थे। GST ने इंटर-स्टेट एंट्री टैक्सेस हटा दिए, और एक अध्ययन में पाया गया कि ट्रक अब हर दिन 300-400 km ज़्यादा तय कर सकते हैं। ये ऐसा है जैसे हल्द्वानी से दिल्ली और वापस — उतना समय जो पहले सिर्फ़ इंतज़ार में बर्बाद होता था! GST ने सिर्फ़ टैक्सेस को आसान नहीं किया — इसने सच में भारत की सड़कों को तेज़ बना दिया।

HSN कोड्स, टैक्स रेट्स और इनवॉइसिंग नियम

नेगी भैया ने मीरा को बिष्ट ट्रेडर्स के इनवॉइसेस का एक ढेर दिया। "क्या तुम चेक कर सकती हो कि सभी HSN कोड्स सही हैं?" मीरा ने काग़ज़ को घूरा। "Turmeric Powder" के बगल में नंबर था 0910। "Cumin Seeds" के बगल में 0909। "भैया, ये नंबर्स क्या हैं?" उसने पूछा। नेगी भैया हँसे। "ये HSN कोड्स हैं। दुनिया में हर उत्पाद का एक कोड होता है। आज तुम सीखोगी कि इन्हें कैसे ढूँढते हैं, ये क्यों ज़रूरी हैं, और बिष्ट जी के सभी मसालों के लिए ERPLite में कैसे सेट अप करते हैं।"


HSN क्या है?

HSN का मतलब है हार्मोनाइज़्ड सिस्टम ऑफ़ नोमेंक्लेचर। ये थोड़ा पेचीदा लगता है, तो तोड़कर समझते हैं।

  • हार्मोनाइज़्ड = सबकी सहमति से बना
  • सिस्टम = एक व्यवस्थित तरीक़ा
  • नोमेंक्लेचर = नामकरण की पद्धति

HSN एक अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली है उत्पाद को वर्गीकृत करने के लिए। इसे World Customs Organization (WCO) ने बनाया है। 200 से ज़्यादा देश ट्रेडेड गुड्स को वर्गीकृत करने के लिए HSN कोड्स इस्तेमाल करते हैं। जब बिष्ट जी के मसाले एक्सपोर्ट होते हैं, तो किसी भी देश के कस्टम्स दफ़्तरर HSN कोड देखकर तुरंत जान सकते हैं कि उत्पाद क्या है — बिना एक ही भाषा बोले।

भारत में, GST सिस्टम उत्पाद को पहचानने और सही टैक्स रेट लगाने के लिए HSN कोड्स इस्तेमाल करता है।

HSN कोड्स क्यों ज़रूरी हैं?

  1. सही टैक्स रेट: अलग-अलग उत्पाद पर अलग GST रेट्स हैं। HSN कोड बताता है कि कौन सी रेट लगेगी।
  2. एक जैसा क्लासिफ़िकेशन: उत्पाद क्या है, इसमें कोई कन्फ़्इस्तेमालन नहीं। "हल्दी" या "Turmeric Powder" — HSN कोड 0910 हर जगह एक ही है।
  3. रिटर्न्स और कम्प्लायंस: GSTR-1 (सेल्स रिटर्न) में HSN-वाइज़ बिक्री की समरी चाहिए।
  4. ऑडिट ट्रेल: टैक्स दफ़्तरर्स वेरिफ़ाई कर सकते हैं कि सही GST रेट चार्ज हुई या नहीं।

HSN कोड की संरचना

HSN कोड्स की एक हायरार्किकल (स्तरीय) संरचना होती है:

लेवलअंकक्या बताता हैउदाहरण
चैप्टरपहले 2 अंकबड़ी श्रेणी09 = Coffee, Tea, Spices
हेडिंगपहले 4 अंकउप-श्रेणी0910 = Ginger, saffron, turmeric, thyme
सब-हेडिंगपहले 6 अंकविशिष्ट उत्पाद091030 = Turmeric (curcuma)
टैरिफ़ आइटम8 अंकबहुत विशिष्ट09103010 = Turmeric, fresh

ज़्यादातर GST पर्पसेस के लिए, तुम्हें 4-डिजिट या 6-डिजिट HSN कोड्स चाहिए, तुम्हारे टर्नओवर के हिसाब से:

सालाना टर्नओवरकितने अंकों का HSN कोड चाहिए
Rs 5 करोड़ तक4-डिजिट HSN कोड
Rs 5 करोड़ से ऊपर6-डिजिट HSN कोड

बिष्ट जी का टर्नओवर लगभग Rs 90 लाख है। तो उन्हें अपने इनवॉइसेस पर 4-डिजिट HSN कोड्स चाहिए।


SAC — सेवाेस के लिए

जैसे गुड्स के लिए HSN कोड्स होते हैं, वैसे ही सेवाेस के लिए SAC कोड्स होते हैं — सेवाेस अकाउंटिंग कोड्स

SAC कोड्स 99 से शुरू होते हैं और इनकी भी सिमिलर संरचना है:

SAC कोडसेवा
9954कंस्ट्रक्शन सेवाेस
9971फ़ाइनेंशियल सेवाेस
9972रियल एस्टेट सेवाेस
9983कंप्यूटर और IT सेवाेस
9985सपोर्ट सेवाेस (क्लीनिंग, सिक्योरिटी, आदि)
9964पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सेवाेस
9965गुड्स ट्रांसपोर्ट सेवाेस
9992एजुकेशन सेवाेस

अगर शर्मा सर की CA फ़र्म अकाउंटिंग सेवाेस के लिए चार्ज करती है, तो SAC कोड 9982 (लीगल ऐंड अकाउंटिंग सेवाेस) के तहत आएगा।

इस किताब में, चूँकि बिष्ट जी गुड्स (मसाले) डील करते हैं, हम HSN कोड्स पर ध्यान करेंगे। लेकिन याद रखो: HSN गुड्स के लिए, SAC सेवाेस के लिए। सिद्धांत एक ही है।


सही HSN कोड कैसे ढूँढें

मीरा ने पूछा, "मुझे कैसे पता चलेगा कि कौन से मसाले के लिए कौन सा HSN कोड है?"

नेगी भैया ने उसे तीन तरीक़े दिखाए:

तरीक़ा 1: ऑफ़िशियल GST पोर्टल

cbic-gst.gov.in (Central Board of Indirect Taxes and Customs) पर जाओ। ये ऑफ़िशियल सोर्स है।

  1. वेबसाइट पर जाओ
  2. "GST Goods & Services Rates" या "HSN Code Search" पर जाओ
  3. उत्पाद का नाम टाइप करो (जैसे, "turmeric")
  4. सिस्टम मैचिंग HSN कोड्स और उनकी GST रेट्स दिखाएगा

तरीक़ा 2: GST रेट फ़ाइंडर ऐप

सरकार ने GST रेट फ़ाइंडर नाम की एक ऐप बनाई है जो Android और iOS दोनों पर उपलब्ध है। किसी भी उत्पाद को सर्च करके उसका HSN कोड और रेट जान सकते हो।

तरीक़ा 3: अपने CA से पूछो

जब कन्फ़्इस्तेमालन हो, तो अपने CA (जैसे शर्मा सर) से पूछो। कुछ उत्पाद ट्रिकी हो सकते हैं — एक ही चीज़ अलग-अलग कोड्स में आ सकती है, इस पर निर्भर करता है कि उसे कैसे प्रक्रिया किया गया है।

जैसे:

  • ताज़ी हल्दी (कच्ची, अभी-अभी निकली) = एक HSN कोड
  • सुखाई हुई हल्दी = दूसरा HSN कोड
  • हल्दी पाउडर (पिसी हुई) = तीसरा HSN कोड
  • कंज़्यूमर पैकिंग में ब्रांड नेम वाली हल्दी = रेट अलग हो सकती है

हमेशा ऑफ़िशियल सोर्स से वेरिफ़ाई करो।

CBIC पोर्टल पर HSN कोड्स देखना


चार GST टैक्स स्लैब्स

GST में चार मुख्य टैक्स स्लैब्स हैं: 5%, 12%, 18%, और 28%। कुछ चीज़ें 0% (एग्ज़ेम्प्ट) पर भी हैं और कुछ स्पेशल रेट्स पर (जैसे रफ़ डायमंड्स पर 0.25% और गोल्ड पर 3%)।

0% — एग्ज़ेम्प्ट आइटम्स (कोई GST नहीं)

इन चीज़ों पर GST नहीं लगता:

श्रेणीउदाहरण
ताज़ा खानाताज़े फल, ताज़ी सब्ज़ियाँ, ताज़ा दूध, अंडे, ताज़ा माँस, ताज़ी मछली
मूलभूत ज़रूरतेंबिना ब्रांड वाले चावल, गेहूँ, आटा, दालें, नमक
अन्य ज़रूरी चीज़ेंदही, लस्सी, छाछ (बिना ब्रांड), ब्रेड, गुड़
सांस्कृतिककिताबें, अख़बार, छपी सामग्री
स्वास्थ्यख़ून, मानव बाल, गर्भनिरोधक
कृषिबीज, पौधे, जैविक खाद

रावत आंटी की किराना दुकान में बहुत सी एग्ज़ेम्प्ट चीज़ें बिकती हैं — खुले चावल, दालें, ताज़ी सब्ज़ियाँ। यही एक वजह है कि उनका कुल टैक्सेबल टर्नओवर थ्रेशोल्ड से नीचे रह सकता है।

5% — कम दर

उदाहरण
ब्रांडेड/पैकेज्ड चावल, गेहूँ, आटा, दालें
चीनी, चाय, कॉफ़ी (इंस्टेंट नहीं)
मसाले (पैक्ड होने पर ज़्यादातर)
खाद्य तेल (सरसों, मूँगफली)
Rs 1,000 से कम के जूते
कोयला, खाद
स्किम्ड मिल्क पाउडर
Rs 1,000 से कम के कपड़े

बिष्ट जी के ज़्यादातर मसाले 5% स्लैब में आते हैं। पैक्ड मसाले जैसे हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर, जीरा, धनिया — सब 5% पर।

12% — मध्यम-कम दर

उदाहरण
घी, मक्खन, पनीर
बादाम, ड्राई फ़्रूट्स (प्रक्रिया्ड)
मोबाइल फ़ोन
सिलाई मशीन
छाता
ताश के पत्ते

18% — स्टैंडर्ड रेट

ये सबसे आम स्लैब है। बहुत सारी चीज़ें इसमें आती हैं।

उदाहरण
साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट
हेयर ऑइल, डिटर्जेंट
कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर
स्टील, एल्युमिनियम उत्पाद
AC रेस्टोरेंट का खाना
ज़्यादातर सेवाेस (IT, कंसल्टिंग, टेलीकॉम)
इंस्टेंट फ़ूड मिक्सेस, पास्ता, कॉर्नफ़्लेक्स

28% — लग्ज़री / सिन गुड्स

उदाहरण
कार, मोटरसाइकिल (एक निश्चित इंजन कैपेसिटी से ऊपर)
एयर कंडीशनर्स, वॉशिंग मशीन
एरेटेड ड्रिंक्स (Coca-Cola, Pepsi)
तंबाकू उत्पाद, सिगरेट
सीमेंट
पेंट और वार्निश

कुछ 28% आइटम्स पर अतिरिक्त कंपेंसेशन सेस भी लगता है — जैसे एक कार पर 28% GST + 15% सेस हो सकता है।

बिष्ट जी के उत्पाद की क्विक रेफ़रेंस

उत्पादHSN कोडGST रेट
Turmeric Powder (हल्दी पाउडर)09105%
Chilli Powder (मिर्च पाउडर)09045%
Cumin Seeds (जीरा)09095%
Coriander Powder (धनिया)09095%
Black Pepper (काली मिर्च)09045%
Ginger Powder (सोंठ)09105%
Cloves (लौंग)09075%
Cardamom (इलायची)09085%
Fennel Seeds (सौंफ़)09095%
Mixed Spice Powder (गरम मसाला)09105%

ज़्यादातर मसाले HSN के चैप्टर 09 (Coffee, Tea, Mate, and Spices) के तहत आते हैं और पैकेज्ड फ़ॉर्म में बेचने पर 5% पर टैक्स्ड होते हैं।


GST इनवॉइस नियम

अब जब हम HSN कोड्स और टैक्स रेट्स जानते हैं, तो चलो इनवॉइस के बारे में सीखते हैं। GST के सख़्त नियम हैं कि एक टैक्स इनवॉइस में क्या-क्या होना चाहिए।

टैक्स इनवॉइस में अनिवार्य फ़ील्ड्स

हर GST टैक्स इनवॉइस में ये सब ज़रूर होना चाहिए:

फ़ील्डविवरणउदाहरण (Bisht Traders)
आपूर्तिकर्ता नेमबेचने वाले का नामBisht Traders
आपूर्तिकर्ता एड्रेसरजिस्टर्ड पताMain Road, Haldwani, Uttarakhand
आपूर्तिकर्ता GSTIN15-डिजिट GST नंबर05AADFB1234R1Z8
इनवॉइस नंबरयूनीक, सीक्वेंशियल, अधिकतम 16 कैरेक्टर्सBT/2025-26/0147
इनवॉइस डेटजारी करने की तारीख़15-Jan-2026
बायर नेमग्राहक का नामMountain Spice Mart
बायर एड्रेसग्राहक का पताMall Road, Dehradun
बायर GSTINअगर रजिस्टर्ड है05AABCM5678P1Z2
प्लेस ऑफ़ आपूर्तिजिस राज्य में आपूर्ति डिलीवर होती हैUttarakhand (05)
HSN कोडहर आइटम के लिए0910
डिस्क्रिप्शनक्या बेचा जा रहा हैTurmeric Powder 500g
क्वांटिटीकितना200 पैकेट्स
यूनिटमाप की इकाईPcs / Kg / आदि
रेटप्रति यूनिट क़ीमत (टैक्स से पहले)Rs 45 प्रति पैकेट
टैक्सेबल वैल्यूक्वांटिटी x रेटRs 9,000
CGST रेट और अमाउंटअगर इंट्रा-स्टेट है2.5%, Rs 225
SGST रेट और अमाउंटअगर इंट्रा-स्टेट है2.5%, Rs 225
IGST रेट और अमाउंटअगर इंटर-स्टेट है(यहाँ एप्लिकेबल नहीं)
कुल अमाउंटग्रैंड कुलRs 9,450
सिग्नेचरबेचने वाले या ऑथराइज़्ड व्यक्ति कीबिष्ट जी का सिग्नेचर

ज़रूरी बात: अगर इनमें से एक भी फ़ील्ड ग़ायब या ग़लत है, तो बायर उस इनवॉइस पर ITC क्लेम नहीं कर सकता। इसीलिए इनवॉइसेस सही बनाना इतना क्रिटिकल है।

एक सैंपल इनवॉइस

बिष्ट जी का इनवॉइस ऐसा दिखता है:

+============================================================+
|                      BISHT TRADERS                          |
|  Main Road, Haldwani, Uttarakhand - 263139                 |
|  GSTIN: 05AADFB1234R1Z8          Phone: 9876543210         |
+============================================================+
|  TAX INVOICE                                                |
|  Invoice No: BT/2025-26/0147     Date: 15-Jan-2026         |
+------------------------------------------------------------+
|  Bill To:                                                   |
|  Mountain Spice Mart                                        |
|  Mall Road, Dehradun, Uttarakhand                           |
|  GSTIN: 05AABCM5678P1Z2                                    |
|  Place of Supply: Uttarakhand (05)                          |
+------+------------------+------+-----+--------+------------+
| HSN  | Description      | Qty  | Rate| Amount | GST        |
+------+------------------+------+-----+--------+------------+
| 0910 | Turmeric Pdr 500g|  200 |  45 |  9,000 | 5% (CGST   |
|      |                  |      |     |        | 2.5%+SGST  |
|      |                  |      |     |        | 2.5%)      |
| 0904 | Chilli Pdr 500g  |  150 |  40 |  6,000 | 5%         |
| 0909 | Cumin Seeds 200g |  100 |  60 |  6,000 | 5%         |
+------+------------------+------+-----+--------+------------+
|                         Taxable Value:     Rs 21,000        |
|                         CGST @ 2.5%:       Rs    525        |
|                         SGST @ 2.5%:       Rs    525        |
|                         ─────────────────────────────       |
|                         TOTAL:             Rs 22,050        |
+------------------------------------------------------------+
|  Amount in words: Twenty-Two Thousand Fifty Rupees Only     |
|                                                             |
|  Signature: ____________                                    |
+============================================================+

Bisht Traders का एक सैंपल GST टैक्स इनवॉइस


GST डॉक्यूमेंट्स के तीन प्रकार

हर बिक्री के लिए पूरा टैक्स इनवॉइस ज़रूरी नहीं। GST कानून तीन मुख्य प्रकार के डॉक्यूमेंट्स तय करता है:

1. टैक्स इनवॉइस

  • नियमित GST-रजिस्टर्ड व्यक्ति जारी करता है
  • ऊपर बताए गए सभी फ़ील्ड्स होते हैं (GSTIN, HSN, टैक्स ब्रेकअप, आदि)
  • बायर इसे ITC क्लेम करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है
  • बिष्ट जी अपनी सभी बिक्री के लिए टैक्स इनवॉइसेस जारी करते हैं

2. बिल ऑफ़ आपूर्ति

  • कंपोज़ीशन स्कीम में रजिस्टर्ड व्यक्ति जारी करता है
  • एग्ज़ेम्प्ट गुड्स (0% GST) बेचने पर भी जारी किया जाता है
  • इसमें कोई टैक्स ब्रेकअप नहीं दिखता (कोई CGST, SGST, IGST कॉलम्स नहीं)
  • इस पर "कंपोज़ीशन टैक्सेबल पर्सन" लिखा होना चाहिए
  • बायर बिल ऑफ़ आपूर्ति पर ITC क्लेम नहीं कर सकता

अगर रावत आंटी कंपोज़ीशन स्कीम में रजिस्टर करती हैं, तो वो बिल ऑफ़ आपूर्ति जारी करेंगी, टैक्स इनवॉइसेस नहीं।

3. रिसीट वाउचर

  • जब तुम गुड्स या सेवाेस डिलीवर करने से पहले एडवांस पेमेंट लेते हो तब जारी किया जाता है
  • एडवांस पर GST चुकाना पड़ता है
  • जब असली आपूर्ति होती है, तब टैक्स इनवॉइस जारी होती है और एडवांस एडजस्ट हो जाता है

क्विक कंपैरिज़न

फ़ीचरटैक्स इनवॉइसबिल ऑफ़ आपूर्तिरिसीट वाउचर
कौन जारी करता हैनियमित GST पर्सनकंपोज़ीशन पर्सन या एग्ज़ेम्प्ट गुड्स के लिएएडवांस लेने वाला कोई भी
टैक्स दिखता हैहाँ (CGST/SGST/IGST)नहींहाँ
बायर को ITCहाँनहींबाद में एडजस्ट होता है
HSN कोडज़रूरीविकल्पलज़रूरी नहीं

क्रेडिट नोट्स और डेबिट नोट्स

कभी-कभी इनवॉइस जारी करने के बाद कुछ बदल जाता है। जैसे:

  • बिष्ट जी ने 200 पैकेट्स भेजे लेकिन 10 ख़राब निकले। बायर वापस करता है। बिष्ट जी को ओरिजनल इनवॉइस वैल्यू कम करनी पड़ती है। वो क्रेडिट नोट जारी करते हैं।

  • बिष्ट जी ने Rs 40 प्रति पैकेट चार्ज किया लेकिन तय क़ीमत Rs 45 थी। उन्हें इनवॉइस वैल्यू बढ़ानी पड़ती है। वो डेबिट नोट जारी करते हैं।

क्रेडिट नोट

क्रेडिट नोट पिछले इनवॉइस की वैल्यू कम करता है। ये सेलर की आउटपुट टैक्स लायबिलिटी कम करता है।

कब इस्तेमाल होता है:

  • गुड्स वापस आते हैं
  • बिक्री के बाद क़ीमत कम होती है
  • सही रेट से ज़्यादा टैक्स चार्ज हो गया हो

डेबिट नोट

डेबिट नोट पिछले इनवॉइस की वैल्यू बढ़ाता है। ये सेलर की आउटपुट टैक्स लायबिलिटी बढ़ाता है।

कब इस्तेमाल होता है:

  • अतिरिक्त चार्जेस जोड़ने हों
  • बिक्री के बाद क़ीमत बढ़ती है
  • सही रेट से कम टैक्स चार्ज हो गया हो

क्रेडिट नोट्स और डेबिट नोट्स दोनों GSTR-1 में रिपोर्ट करने पड़ते हैं (ये हम Chapter 20 में कवर करेंगे)।


हैंड्स-ऑन: बिष्ट जी के लिए ERPLite में HSN कोड्स सेट अप करना

नेगी भैया बोले, "ठीक है मीरा, अब बिष्ट जी के सभी उत्पाद को ERPLite में सही HSN कोड्स और GST रेट्स के साथ सेट अप करते हैं।"

चरण 1: आइटम मास्टर खोलो

मास्टर्स > आइटम्स पर जाओ। पहले आइटम पर क्लिक करो: Turmeric Powder 500g

चरण 2: टैक्स ब्योरा भरो

आइटम ब्योरा फ़ॉर्म में, टैक्स / GST सेक्शन ढूँढो:

फ़ील्डक्या भरना है
HSN कोड0910
GST रेट5%
टैक्स श्रेणीनियमित

सेव पर क्लिक करो।

चरण 3: सभी आइटम्स के लिए दोहराओ

मीरा ने बिष्ट जी के हर उत्पाद को सेट अप किया:

उत्पादHSN कोडGST रेटस्टेटस
Turmeric Powder 500g09105%Done
Turmeric Powder 1kg09105%Done
Chilli Powder 500g09045%Done
Chilli Powder 1kg09045%Done
Cumin Seeds 200g09095%Done
Cumin Seeds 500g09095%Done
Coriander Powder 500g09095%Done
Black Pepper 100g09045%Done
Garam Masala 200g09105%Done
Cardamom 50g09085%Done

चरण 4: टेस्ट इनवॉइस से वेरिफ़ाई करो

सब कुछ ठीक काम कर रहा है ये पक्का करने के लिए, मीरा ने एक टेस्ट सेल्स इनवॉइस बनाई:

  1. ट्रांज़ैक्शंस > सेल्स इनवॉइस > न्यू पर जाओ
  2. ग्राहक चुनो: Mountain Spice Mart (Dehradun)
  3. आइटम जोड़ो: Turmeric Powder 500g, Qty: 10, रेट: Rs 45
  4. ERPLite अपने-आप भर देता है:
    • HSN कोड: 0910
    • GST रेट: 5%
    • CGST: 2.5% = Rs 11.25
    • SGST: 2.5% = Rs 11.25
    • कुल: Rs 472.50

"बढ़िया!" नेगी भैया बोले। "अब हर बार जब तुम बिष्ट जी के लिए इनवॉइस बनाओगी, HSN कोड और GST अपने-आप आ जाएगा। कोड्स याद रखने या मैन्युअली टैक्स गणना करने की ज़रूरत नहीं।"

चरण 5: इंटर-स्टेट इनवॉइस चेक करो

फिर मीरा ने दिल्ली के ग्राहक के लिए एक टेस्ट इनवॉइस बनाई:

  1. ग्राहक चुनो: Delhi Spice House (New Delhi)
  2. आइटम जोड़ो: Cumin Seeds 200g, Qty: 50, रेट: Rs 60
  3. ERPLite अपने-आप दिखाता है:
    • HSN कोड: 0909
    • GST रेट: 5%
    • IGST: 5% = Rs 150 (CGST/SGST में स्प्लिट नहीं क्योंकि इंटर-स्टेट है)
    • कुल: Rs 3,150

ERPLite इंटर-स्टेट सेल (उत्तराखंड से दिल्ली) डिटेक्ट करता है और अपने-आप CGST+SGST से IGST पर स्विच कर देता है।

ERPLite आइटम मास्टर में HSN कोड्स और GST रेट्स सेट अप करना


क्विक रीकैप

  • HSN (हार्मोनाइज़्ड सिस्टम ऑफ़ नोमेंक्लेचर) उत्पाद वर्गीकृत करने की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली है। हर उत्पाद का एक यूनीक कोड है।
  • SAC (सेवाेस अकाउंटिंग कोड) सेवाेस के लिए इक्विवैलेंट है। SAC कोड्स 99 से शुरू होते हैं।
  • HSN कोड्स देखने के लिए cbic-gst.gov.in या GST रेट फ़ाइंडर ऐप इस्तेमाल करो।
  • GST में चार मुख्य स्लैब्स हैं: 5%, 12%, 18%, 28%। कुछ आइटम्स एग्ज़ेम्प्ट (0%) हैं।
  • टैक्स इनवॉइस में होना चाहिए: आपूर्तिकर्ता और बायर ब्योरा, GSTIN, इनवॉइस नंबर, डेट, HSN कोड, क्वांटिटी, रेट, टैक्सेबल वैल्यू, CGST/SGST/IGST अमाउंट्स, कुल, और सिग्नेचर।
  • बिल ऑफ़ आपूर्ति कंपोज़ीशन स्कीम डीलर्स या एग्ज़ेम्प्ट गुड्स के लिए है — कोई टैक्स ब्रेकअप नहीं दिखता।
  • रिसीट वाउचर एडवांस पेमेंट मिलने पर जारी किया जाता है।
  • क्रेडिट नोट्स इनवॉइस वैल्यू कम करते हैं। डेबिट नोट्स बढ़ाते हैं।
  • ERPLite में, आइटम मास्टर में HSN कोड्स और GST रेट्स सेट अप करो। सॉफ़्टवेयर हर इनवॉइस पर अपने-आप टैक्स गणना करता है।

अभ्यास अभ्यास

अभ्यास 1: HSN कोड ढूँढो

नीचे दिए गए उत्पाद के HSN कोड्स ढूँढो (cbic-gst.gov.in या GST रेट फ़ाइंडर ऐप इस्तेमाल करो):

  1. Basmati Rice (ब्रांडेड, पैकेज्ड)
  2. Honey (स्वाभाविक)
  3. Mustard Oil (सरसों का तेल)
  4. Washing Soap (कपड़े धोने का साबुन)
  5. Notebooks (पेपर)

अभ्यास 2: टैक्स स्लैब पहचानो

नीचे की हर चीज़ के लिए GST रेट स्लैब (0%, 5%, 12%, 18%, या 28%) लिखो:

  1. किसान से ताज़े टमाटर
  2. ब्रांडेड पैकेज्ड आटा
  3. एक लैपटॉप कंप्यूटर
  4. Coca-Cola की एक बोतल
  5. एक मोबाइल फ़ोन
  6. एक अख़बार
  7. टूथपेस्ट
  8. घी (गाय का घी, ब्रांडेड)

अभ्यास 3: इनवॉइस में ग़लतियाँ ढूँढो

इस इनवॉइस को देखो और बताओ क्या ग़लत है (4 ग़लतियाँ हैं):

  BISHT TRADERS
  Haldwani, Uttarakhand
  Invoice No: 147          Date: 15/01/2026

  Sold to: Some Customer, Dehradun

  Turmeric Powder    200 pcs x Rs 45  = Rs 9,000
  GST @ 5%                            = Rs   450

  Total: Rs 9,450

(हिंट: ऊपर बताए गए अनिवार्य फ़ील्ड्स से कंपेयर करो।)

अभ्यास 4: क्रेडिट नोट या डेबिट नोट?

हर सिचुएशन के लिए बताओ कि बिष्ट जी को क्रेडिट नोट जारी करना चाहिए या डेबिट नोट:

  1. एक ग्राहक 50 पैकेट्स ख़राब मिर्च पाउडर वापस करता है।
  2. बिष्ट जी को पता चलता है कि उन्होंने सही 5% की जगह 12% GST चार्ज कर दी।
  3. ग्राहक गुणवत्ता अपग्रेड के कारण Rs 5 ज़्यादा प्रति पैकेट देने को राज़ी होता है।
  4. बिष्ट जी ने इनवॉइस भेजने के बाद 10% एक्स्ट्रा छूट दिया।

अभ्यास 5: ERPLite सेटअप

अगर तुम्हारे पास Udyamo ERPLite एक्सेस है, तो नीचे दिए गए आइटम्स को सही HSN कोड्स और GST रेट्स के साथ सेट अप करो:

  1. Fennel Seeds (सौंफ़) 200g
  2. Bay Leaves (तेज पत्ता) 50g
  3. Fenugreek Seeds (मेथी) 100g

एक इंट्रा-स्टेट और एक इंटर-स्टेट बिक्री के लिए टेस्ट इनवॉइस बनाओ। वेरिफ़ाई करो कि टैक्स सही गणना हो रहा है।


फ़न फ़ैक्ट

HSN सिस्टम सबसे पहले 1988 में World Customs Organization ने बनाया था, जिसका मुख्यालय Brussels, Belgium में है। आज, दुनिया के 98% से ज़्यादा व्यापार को HSN कोड्स से वर्गीकृत किया जाता है। तो जब बिष्ट जी अपने इनवॉइस पर हल्दी के लिए "0910" लिखते हैं, तो Japan, Brazil, या Germany का कोई कस्टम्स दफ़्तरर तुरंत जान जाएगा कि वो अदरक फ़ैमिली के मसालों की बात कर रहे हैं। हल्द्वानी में बिष्ट जी की छोटी सी मसाले की दुकान दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों जैसी ही उत्पाद लैंग्वेज बोलती है!

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) — क़ानूनी तरीक़े से कम टैक्स चुकाओ

बुधवार की दोपहर थी। मीरा ने बिष्ट जी के परचेज़ इनवॉइसेस ERPLite में एंटर करना अभी-अभी ख़त्म किया था। "शर्मा सर, बिष्ट जी ने इस महीने अपनी ख़रीदारी पर Rs 42,000 GST चुकाया। और बिक्री पर Rs 58,000 GST कलेक्ट किया। क्या उन्हें सच में Rs 58,000 सरकार को देने पड़ेंगे?" शर्मा सर मुस्कुराए। "नहीं मीरा। सिर्फ़ फ़र्क़ देना पड़ता है। Rs 58,000 माइनस Rs 42,000। यानी Rs 16,000। बाक़ी तो पहले ही चुक गया है। इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट — ITC कहते हैं। ये GST की जान है। और आज तुम इसे पूरी तरह समझोगी।"


ITC का मूल विचार

इनपुट टैक्स क्रेडिट, GST का सबसे ज़रूरी कॉन्सेप्ट है। अगर तुम ITC समझ गए, तो तुम समझ गए कि GST पुराने टैक्स सिस्टम से बेहतर क्यों है।

एक वाक्य में:

तुमने ख़रीदते वक़्त GST दिया। बेचते वक़्त GST वसूला। सरकार को सिर्फ़ फ़र्क़ देना है।

इसे फ़ॉर्मूला में लिखें:

चुकाना GST = बिक्री पर वसूला GST - ख़रीदारी पर दिया GST
            = आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स क्रेडिट

बस। तुमने ख़रीदारी पर जो GST दिया, वो तुम्हारा इनपुट टैक्स क्रेडिट है। तुम इसे सरकार को देने वाले GST को कम करने के लिए इस्तेमाल करते हो।

इसे "इनपुट" टैक्स क्रेडिट क्यों कहते हैं?

बिज़नेस में:

  • इनपुट्स = जो तुम बिज़नेस चलाने के लिए ख़रीदते हो (कच्चा माल, रीसेल के लिए गुड्स, सेवाेस)
  • आउटपुट = जो तुम बेचते हो

तुम्हारे इनपुट्स (ख़रीदारी) पर लगा टैक्स तुम्हारा "इनपुट टैक्स" है। तुम्हें इसका "क्रेडिट" मिलता है — मतलब ये तुम्हारा टैक्स बिल कम करता है।

ऐसे सोचो: मान लो तुम चाय की दुकान पर हो। तुम दुकानदार को Rs 100 का नोट देते हो। चाय Rs 30 की है। वो तुम्हें Rs 70 वापस देता है बाक़ी के। ITC उसी बाक़ी जैसा है — तुमने कुछ GST पहले ही अपनी ख़रीदारी से चुका दिया, तो सरकार तुम्हारा फ़ाइनल टैक्स बिल कम करके "बाक़ी" वापस दे देती है।


चरण-बाय-चरण: ITC कैसे काम करता है

चलो असली नंबर्स के साथ बिष्ट जी के बिज़नेस में ITC ट्रेस करते हैं।

बिष्ट जी की जनवरी की ख़रीदारी (उन्होंने क्या ख़रीदा)

ख़रीदारीआपूर्तिकर्ताटैक्सेबल वैल्यूGST @ 5%कुल चुकाया
हल्दी (कच्ची) राजस्थान सेRajasthan Spice Co.Rs 2,00,000Rs 10,000 (IGST)Rs 2,10,000
मिर्च (कच्ची) आंध्र सेAP Mirchi TradersRs 1,50,000Rs 7,500 (IGST)Rs 1,57,500
जीरा गुजरात सेGujarat Seeds LtdRs 1,00,000Rs 5,000 (IGST)Rs 1,05,000
पैकेजिंग मटीरियल (लोकल)Haldwani PackagingRs 40,000Rs 7,200 (CGST 3,600 + SGST 3,600) @ 18%Rs 47,200
ट्रांसपोर्ट चार्जेसKumaon TransportRs 50,000Rs 2,500 (CGST 1,250 + SGST 1,250) @ 5%Rs 52,500
कुलRs 5,40,000Rs 32,200Rs 5,72,200

बिष्ट जी का कुल इनपुट टैक्स (ख़रीदारी पर दिया GST) = Rs 32,200

बिष्ट जी की जनवरी की बिक्री (उन्होंने क्या बेचा)

बिक्रीग्राहकराज्यटैक्सेबल वैल्यूGST @ 5%कुल मिला
Turmeric Powder देहरादून की दुकान कोMountain Spiceउत्तराखंडRs 3,00,000Rs 15,000 (CGST 7,500 + SGST 7,500)Rs 3,15,000
Chilli Powder दिल्ली के होलसेलर कोDelhi Masala Houseदिल्लीRs 2,00,000Rs 10,000 (IGST)Rs 2,10,000
जीरा नैनीताल की दुकान कोLake City Storeउत्तराखंडRs 1,50,000Rs 7,500 (CGST 3,750 + SGST 3,750)Rs 1,57,500
मिक्स्ड ऑर्डर लखनऊ कोUP GrocersUPRs 1,00,000Rs 5,000 (IGST)Rs 1,05,000
कुलRs 7,50,000Rs 37,500Rs 7,87,500

बिष्ट जी का कुल आउटपुट टैक्स (बिक्री पर वसूला GST) = Rs 37,500

ITC गणना

सरकार को चुकाना GST = आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स क्रेडिट
                     = Rs 37,500 - Rs 32,200
                     = Rs 5,300

ITC के बिना, बिष्ट जी Rs 37,500 सरकार को चुकाते। ITC के साथ, वो सिर्फ़ Rs 5,300 चुकाते हैं। उन्होंने Rs 32,200 बचाए — क़ानूनी तरीक़े से! ये टैक्स चोरी नहीं है। सिस्टम ऐसे ही काम करने के लिए बना है।

ITC बिष्ट जी का सरकार को चुकाने वाला अमाउंट कम करता है


ITC कैसे सेट ऑफ़ होता है: CGST, SGST, IGST

ITC सिर्फ़ एक पूल नहीं है। तुम्हारा क्रेडिट टाइप (CGST, SGST, IGST) के हिसाब से बँटा होता है, और नियम हैं कि कौन सा क्रेडिट किस टैक्स के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो सकता है।

सेट-ऑफ़ के नियम

उपलब्ध ITCकिसके ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो सकता है
IGST क्रेडिटपहले IGST, फिर CGST, फिर SGST
CGST क्रेडिटपहले CGST, फिर IGST (SGST के ख़िलाफ़ नहीं)
SGST क्रेडिटपहले SGST, फिर IGST (CGST के ख़िलाफ़ नहीं)

याद रखने का मुख्य नियम: CGST क्रेडिट, SGST के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं हो सकता, और SGST क्रेडिट, CGST के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि CGST केंद्र का टैक्स है और SGST राज्य का टैक्स — ये सीधे एक-दूसरे में कन्वर्ट नहीं हो सकते।

बिष्ट जी का विस्तृत सेट-ऑफ़ (जनवरी)

पहले टाइप के हिसाब से ITC गणना करते हैं:

इनपुट टैक्स (ITC अर्न्ड):

टाइपराशिसोर्स
IGSTRs 22,500राजस्थान, AP, गुजरात से ख़रीदारी
CGSTRs 4,850हल्द्वानी के लोकल आपूर्तिकर्ता से ख़रीदारी
SGSTRs 4,850हल्द्वानी के लोकल आपूर्तिकर्ता से ख़रीदारी
कुल ITCRs 32,200

आउटपुट टैक्स (बिक्री पर वसूला टैक्स):

टाइपराशिसोर्स
IGSTRs 15,000दिल्ली, UP को बिक्री
CGSTRs 11,250उत्तराखंड के अंदर बिक्री
SGSTRs 11,250उत्तराखंड के अंदर बिक्री
कुल आउटपुटRs 37,500

चरण-बाय-चरण सेट-ऑफ़:

चरण 1: पहले IGST क्रेडिट इस्तेमाल करो (Rs 22,500)

  • IGST आउटपुट के ख़िलाफ़: Rs 15,000। बचा IGST क्रेडिट = Rs 7,500।
  • CGST आउटपुट के ख़िलाफ़: Rs 7,500। बचा IGST क्रेडिट = Rs 0।

चरण 2: CGST क्रेडिट इस्तेमाल करो (Rs 4,850)

  • बचे CGST आउटपुट के ख़िलाफ़: Rs 11,250 - Rs 7,500 = Rs 3,750। Rs 3,750 CGST क्रेडिट इस्तेमाल। बचा CGST क्रेडिट = Rs 1,100।
  • बचा CGST क्रेडिट (Rs 1,100) IGST के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो सकता है (लेकिन IGST पहले से ज़ीरो है)। तो Rs 1,100 कैरी फ़ॉरवर्ड होगा।

चरण 3: SGST क्रेडिट इस्तेमाल करो (Rs 4,850)

  • SGST आउटपुट के ख़िलाफ़: Rs 11,250। Rs 4,850 इस्तेमाल। बचा SGST आउटपुट = Rs 6,400।

चरण 4: बिष्ट जी असल में कितना कैश चुकाते हैं

टैक्सआउटपुटITC इस्तेमालकैश चुकाना
IGSTRs 15,000Rs 15,000 (IGST क्रेडिट से)Rs 0
CGSTRs 11,250Rs 7,500 (IGST) + Rs 3,750 (CGST) = Rs 11,250Rs 0
SGSTRs 11,250Rs 4,850 (SGST)Rs 6,400
कुलRs 37,500Rs 31,100Rs 6,400

बिष्ट जी Rs 6,400 कैश में चुकाते हैं। Rs 1,100 का CGST क्रेडिट अगले महीने के लिए कैरी फ़ॉरवर्ड होता है।

नोट: अगर सेट-ऑफ़ पेचीदा लग रहा है तो चिंता मत करो। ERPLite ये गणना अपने-आप करता है। लेकिन लॉजिक समझना ज़रूरी है ताकि तुम नंबर्स वेरिफ़ाई कर सको।


ITC क्लेम करने की शर्तें

किसी भी ख़रीदारी पर ITC क्लेम नहीं कर सकते। सख़्त शर्तें हैं। अगर एक भी शर्त पूरी नहीं हुई, तो ITC क्लेम ख़ारिज हो जाएगा।

पाँच शर्तें

शर्त 1: तुम्हारे पास वैलिड टैक्स इनवॉइस (या डेबिट नोट) होना चाहिए

इनवॉइस नहीं = ITC नहीं। इनवॉइस में सभी अनिवार्य फ़ील्ड्स होने चाहिए — आपूर्तिकर्ता GSTIN, HSN कोड, टैक्स ब्रेकअप, आदि। (ये हमने Chapter 18 में कवर किया।)

अगर बिष्ट जी किसी ऐसे किसान से मसाले ख़रीदते हैं जो GST रजिस्टर्ड नहीं है और GSTIN वाला इनवॉइस नहीं देता, तो बिष्ट जी उस ख़रीदारी पर ITC क्लेम नहीं कर सकते।

शर्त 2: तुम्हें गुड्स या सेवाेस असल में मिले होने चाहिए

जो गुड्स अभी रास्ते में हैं या डिलीवर नहीं हुए, उन पर ITC क्लेम नहीं कर सकते। गुड्स तुम्हारे (या तुम्हारे एजेंट के) कब्ज़े में होने चाहिए।

अगर बिष्ट जी 1,000 kg हल्दी ऑर्डर करते हैं और सिर्फ़ 800 kg पहुँचती है (200 kg रास्ते में खो गई), तो वो सिर्फ़ 800 kg पर ITC क्लेम कर सकते हैं जो असल में मिली।

शर्त 3: आपूर्तिकर्ता ने अपना GST रिटर्न फ़ाइल किया हो

ये बहुत ज़रूरी शर्त है। तुमने ख़रीदारी पर जो GST दिया, वो आपूर्तिकर्ता की GSTR-1 (सेल्स रिटर्न) में दिखना चाहिए। अगर आपूर्तिकर्ता तुमसे GST वसूलता है लेकिन अपना रिटर्न फ़ाइल नहीं करता, तो तुम्हारा ITC ख़त्म

इसीलिए शर्मा सर हमेशा क्लाइंट्स को कहते हैं: "रजिस्टर्ड, कम्प्लायंट आपूर्तिकर्ता से ख़रीदो।"

शर्त 4: तुमने ख़ुद अपना रिटर्न फ़ाइल किया हो

ITC तभी क्लेम कर सकते हो जब तुम GSTR-3B फ़ाइल करते हो। अगर तुम रिटर्न फ़ाइल नहीं करते, क्रेडिट नहीं मिलता।

शर्त 5: 180 दिनों के अंदर पेमेंट करना ज़रूरी है

अगर तुमने इनवॉइस डेट से 180 दिनों के अंदर आपूर्तिकर्ता को पेमेंट नहीं किया, तो तुम्हें ITC रिवर्स (वापस) करना पड़ेगा। जब पे करोगे, तब फिर से क्लेम कर सकते हो।

मान लो बिष्ट जी जनवरी में AP Mirchi Traders से Rs 1,00,000 की मिर्च ख़रीदते हैं लेकिन अगस्त तक पे नहीं करते (180 दिन से ज़्यादा)। जिस महीने 180 दिन पूरे होंगे, उन्हें ITC रिवर्स करना पड़ेगा। जब फ़ाइनली पे करेंगे, तब रीक्लेम कर सकते हैं।

शर्तों का सारांश

शर्तइसका मतलबपूरी न होने पर क्या होगा
वैलिड टैक्स इनवॉइससही GST इनवॉइस होना चाहिएITC नहीं मिलेगा
गुड्स/सेवाेस मिलेतुम्हारे कब्ज़े में होने चाहिएसिर्फ़ जो मिला उस पर ITC
आपूर्तिकर्ता ने रिटर्न फ़ाइल कियाआपूर्तिकर्ता की GSTR-1 में इनवॉइस दिखना चाहिएमैच होने तक ITC ब्लॉक
तुमने रिटर्न फ़ाइल कियातुम्हें GSTR-3B फ़ाइल करनी होगीफ़ाइलिंग के बिना ITC नहीं
180 दिनों में पेमेंटआपूर्तिकर्ता को समय पर पे करोITC रिवर्स, पेमेंट पर रीक्लेम

ब्लॉक्ड क्रेडिट्स — जब ITC मिलता ही नहीं

अगर ऊपर की पाँचों शर्तें पूरी भी हों, तो कुछ ख़रीदारी पर ITC क़ानून से ब्लॉक है। तुम चाहे कुछ भी करो, ITC क्लेम नहीं कर सकते।

ब्लॉक्ड क्रेडिट्स की सूची (CGST Act की सेक्शन 17(5))

ब्लॉक्ड आइटमक्यों
मोटर व्हीकल्स (कार, बाइक)पर्सनल इस्तेमाल की संभावना; ट्रांसपोर्ट बिज़नेस के लिए एक्सेप्शन
खाना-पीना (फ़ूड ऐंड बेवरेजेस)जब तक फ़ूड/हॉस्पिटैलिटी बिज़नेस में न हो
हेल्थ और फ़िटनेस सेवाेसजिम मेंबरशिप, हेल्थ क्लब
क्लब मेंबरशिप्ससोशल क्लब, स्पोर्ट्स क्लब
रेंट-ए-कैब सेवाेसजब तक ट्रांसपोर्ट कंपनी न हो
एम्प्लॉइज़ के ट्रैवल फ़ायदेलीव ट्रैवल, वेकेशंस
इम्मूवेबल संपत्ति का कंस्ट्रक्शनअपना दफ़्तर/शॉप बनाना (रियल एस्टेट डेवलपर नहीं)
पर्सनल इस्तेमाल की चीज़ेंकुछ भी जो पर्सनल कंज़म्पशन के लिए ख़रीदा, बिज़नेस के लिए नहीं
एग्ज़ेम्प्ट सप्लाइज़ बनाने के लिए गुड्स/सेवाेसअगर आउटपुट एग्ज़ेम्प्ट है, तो इनपुट्स पर ITC नहीं
खोए, चुराए, ख़राब, या फ़्री सैंपल दिए गए गुड्सवेस्ट पर ITC नहीं
कंपोज़ीशन स्कीम के तहत दिया टैक्सकंपोज़ीशन डीलर्स को ITC बिल्कुल नहीं

बिष्ट जी के उदाहरण

  • बिष्ट जी Rs 8,00,000 की कार ख़रीदते हैं प्लस GST। ITC ब्लॉक्ड। कार पर GST क्लेम नहीं कर सकते क्योंकि मोटर व्हीकल्स ब्लॉक्ड क्रेडिट्स हैं (जब तक कार गुड्स की ट्रांसपोर्टेशन के लिए न हो, जो सेडान नहीं है)।

  • बिष्ट जी क्लाइंट मीटिंग के लिए समोसे और चाय ऑर्डर करते हैं। लागत: Rs 2,000 प्लस GST। ITC ब्लॉक्ड। एम्प्लॉइज़/गेस्ट्स के लिए खाना-पीना ब्लॉक्ड क्रेडिट है।

  • बिष्ट जी Rs 3,00,000 की पैकेजिंग मशीन ख़रीदते हैं प्लस GST। ITC मिलेगा! बिज़नेस के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनरी ब्लॉक्ड लिस्ट में नहीं है। ये लेजिटिमेट बिज़नेस ख़र्चा है।

  • बिष्ट जी रीसेल के लिए हल्दी ख़रीदते हैं। ITC मिलेगा! रीसेल के लिए ख़रीदे गए गुड्स पूरी तरह ITC एलिजिबल हैं।


ITC रिवर्सल — कब ITC वापस करना पड़ता है

कभी-कभी तुम पहले ITC क्लेम करते हो लेकिन बाद में रिवर्स (वापस) करना पड़ता है। ये आम सिचुएशंस हैं:

सिचुएशन 1: 180 दिनों में पेमेंट नहीं

ये हम कवर कर चुके हैं। अगर 180 दिनों में आपूर्तिकर्ता को पे नहीं किया, ITC रिवर्स करो। पे करने पर रीक्लेम करो।

सिचुएशन 2: एग्ज़ेम्प्ट + टैक्सेबल दोनों सप्लाइज़ के लिए गुड्स इस्तेमाल

अगर बिष्ट जी कुछ इनपुट्स टैक्सेबल सप्लाइज़ (पैक्ड मसाले, 5% GST) और एग्ज़ेम्प्ट सप्लाइज़ (बिना ब्रांड खुले मसाले, 0% GST) दोनों बनाने में इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें एग्ज़ेम्प्ट हिस्से के लिए ITC प्रोपोर्शनली रिवर्स करना पड़ता है।

जैसे: अगर उनकी 20% बिक्री एग्ज़ेम्प्ट है, तो उन्हें अपने आम ITC का लगभग 20% रिवर्स करना होगा।

सिचुएशन 3: आपूर्तिकर्ता से क्रेडिट नोट मिला

अगर आपूर्तिकर्ता क्रेडिट नोट जारी करता है (रिटर्न्स, छूट, आदि के लिए), तो बिष्ट जी का ITC भी उसी हिसाब से कम करना होगा।

सिचुएशन 4: इनपुट्स पर्सनल इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल

अगर बिष्ट जी कुछ मसाले घर के लिए ले जाते हैं, तो उन मसालों पर ITC रिवर्स करना पड़ेगा। पर्सनल पर्पसेस के लिए इस्तेमाल किए गए बिज़नेस इनपुट्स ITC के लिए क्वालिफ़ाई नहीं करते।


मैचिंग कॉन्सेप्ट — GSTR-2A / GSTR-2B

"सरकार को कैसे पता चलता है कि मेरा ITC क्लेम वैलिड है?" मीरा ने पूछा।

शर्मा सर ने समझाया: "सरकार तुम्हारे क्लेम्स को तुम्हारे आपूर्तिकर्ता की फ़ाइलिंग्स से मैच करती है।"

ऐसे काम करता है:

  1. तुम्हारा आपूर्तिकर्ता GSTR-1 फ़ाइल करता है (अपनी बिक्री की ब्योरा)। तुम्हारे परचेज़ इनवॉइसेस उनके सेल्स डेटा में दिखते हैं।
  2. ये डेटा अपने-आप तुम्हारे GSTR-2A (डायनामिक, रियल-टाइम स्टेटमेंट) और GSTR-2B (स्टैटिक, मंथली स्टेटमेंट) में पॉपुलेट हो जाता है।
  3. जब तुम GSTR-3B फ़ाइल करके ITC क्लेम करते हो, सरकार चेक करती है: तुम्हारा ITC क्लेम GSTR-2B में जो दिखता है उससे मैच करता है?

अगर मिसमैच है — जैसे, तुम Supplier X से Rs 10,000 का ITC क्लेम करते हो, लेकिन Supplier X ने वो सेल अपनी GSTR-1 में कभी रिपोर्ट ही नहीं की — तो सरकार फ़्लैग करेगी।

GSTR-2A vs GSTR-2B

फ़ीचरGSTR-2AGSTR-2B
प्रकृतिडायनामिक (बदलता रहता है)स्टैटिक (हर महीने फ़िक्स)
कब अपडेट होता हैजब भी आपूर्तिकर्ता फ़ाइल/अमेंड करता हैअगले महीने की 14 तारीख़ को जेनरेट
किसके लिए इस्तेमालआपूर्तिकर्ता कम्प्लायंस चेक करने के लिएGSTR-3B में ITC क्लेम करने के लिए
ITC के लिए रिकमेंडनहीं (बदलता रहता है)हाँ (इसे रेफ़रेंस के रूप में इस्तेमाल करो)

अभ्यास में: GSTR-3B फ़ाइल करने से पहले, शर्मा सर हमेशा नेगी भैया से कहते हैं कि बिष्ट जी की GSTR-2B डाउनलोड करो और ERPLite के परचेज़ रजिस्टर से कंपेयर करो। कोई भी मिसमैच निवेशिगेट करनी चाहिए।

ITC मैचिंग प्रक्रिया — आपूर्तिकर्ता की GSTR-1 बायर की GSTR-2B में फ़ीड होती है


हैंड्स-ऑन: ERPLite में बिष्ट जी का मंथली ITC गणना करना

नेगी भैया ने मीरा को ERPLite में ITC चेक करना दिखाया।

चरण 1: GST रिपोर्ट खोलो

रिपोर्ट्स > GST रिपोर्ट्स > इनपुट टैक्स क्रेडिट समरी पर जाओ।

पीरियड चुनो: January 2026।

ERPLite एक समरी दिखाता है:

टैक्स टाइपउपलब्ध ITCसोर्स
IGSTRs 22,500इंटर-स्टेट ख़रीदारी
CGSTRs 4,850इंट्रा-स्टेट ख़रीदारी
SGSTRs 4,850इंट्रा-स्टेट ख़रीदारी
कुलRs 32,200

चरण 2: GSTR-2B से कंपेयर करो

GST पोर्टल से बिष्ट जी की GSTR-2B डाउनलोड करो। हर इनवॉइस कंपेयर करो:

आपूर्तिकर्ताइनवॉइस No.हमारे रिकॉर्डGSTR-2Bमैच?
Rajasthan Spice Co.RSC/456Rs 10,000Rs 10,000हाँ
AP Mirchi TradersAPM/789Rs 7,500Rs 7,500हाँ
Gujarat Seeds LtdGS/123Rs 5,000Rs 5,000हाँ
Haldwani PackagingHP/234Rs 7,200Rs 7,200हाँ
Kumaon TransportKT/567Rs 2,500Rs 2,500हाँ

सभी इनवॉइसेस मैच हुए! बिष्ट जी सेफ़ली Rs 32,200 ITC क्लेम कर सकते हैं।

चरण 3: ब्लॉक्ड क्रेडिट्स चेक करो

मीरा ने एक और परचेज़ एंट्री गौर की: "दफ़्तर लंच — Rs 1,200 + GST Rs 216।"

नेगी भैया बोले, "गुड कैच! खाना-पीना ब्लॉक्ड क्रेडिट है। ये Rs 216 हमें अपने ITC क्लेम में इन्क्लूड नहीं करना चाहिए। इसे ERPLite में 'ITC नॉट अवेलेबल' मार्क कर देता हूँ।"

ERPLite में, परचेज़ इनवॉइस एंटर करते वक़्त, हर लाइन आइटम के लिए एक विकल्प है:

  • ITC एलिजिबल: Yes / No

लंच ख़र्चा के लिए, इसे No सेट करो। ERPLite इसे ITC कैलकुलेशंस से बाहर रख देगा।

चरण 4: नेट पेएबल देखो

रिपोर्ट्स > GST रिपोर्ट्स > टैक्स लायबिलिटी समरी पर जाओ।

IGSTCGSTSGSTकुल
आउटपुट टैक्सRs 15,000Rs 11,250Rs 11,250Rs 37,500
इनपुट टैक्स क्रेडिटRs 22,500Rs 4,850Rs 4,850Rs 32,200
नेट पेएबल (सेट-ऑफ़ के बाद)Rs 0Rs 0Rs 6,400Rs 6,400
ITC कैरी फ़ॉरवर्डRs 0Rs 1,100Rs 0Rs 1,100

बिष्ट जी को इस महीने सरकार को Rs 6,400 कैश में चुकाने हैं। और Rs 1,100 का CGST क्रेडिट फ़रवरी में कैरी फ़ॉरवर्ड होगा।

ERPLite में ITC समरी जो नेट GST पेएबल दिखा रही है


क्विक रीकैप

  • ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट) = ख़रीदारी पर चुकाया GST। बिक्री पर देने वाला GST कम करने के लिए इस्तेमाल होता है।
  • फ़ॉर्मूला: चुकाना GST = आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स क्रेडिट
  • IGST क्रेडिट पहले IGST, फिर CGST, फिर SGST के ख़िलाफ़ सेट ऑफ़ होता है। CGST और SGST क्रेडिट्स एक-दूसरे में कन्वर्ट नहीं हो सकते।
  • ITC क्लेम करने की पाँच शर्तें: वैलिड इनवॉइस, गुड्स मिले, आपूर्तिकर्ता ने रिटर्न फ़ाइल किया, तुमने रिटर्न फ़ाइल किया, 180 दिनों में पेमेंट।
  • ब्लॉक्ड क्रेडिट्स: मोटर व्हीकल्स, खाना-पीना, पर्सनल आइटम्स, क्लब मेंबरशिप्स, कंस्ट्रक्शन, आदि।
  • ITC रिवर्सल तब होता है जब: 180 दिनों में पेमेंट नहीं, एग्ज़ेम्प्ट सप्लाइज़ के लिए गुड्स इस्तेमाल, क्रेडिट नोट मिला, या पर्सनल इस्तेमाल।
  • GSTR-2B ITC क्लेम्स का रेफ़रेंस डॉक्यूमेंट है। फ़ाइलिंग से पहले हमेशा रीकॉन्साइल करो।
  • ERPLite में, ब्लॉक्ड क्रेडिट आइटम्स को "ITC नॉट अवेलेबल" मार्क करो ताकि ITC कैलकुलेशंस से बाहर रहें।

अभ्यास अभ्यास

अभ्यास 1: ITC गणना करो

बिष्ट जी की फ़रवरी की ख़रीदारी:

ख़रीदारीचुकाया GST
राजस्थान से हल्दीRs 8,000 (IGST)
आंध्र प्रदेश से मिर्चRs 6,000 (IGST)
हल्द्वानी से पैकेजिंगRs 3,600 (CGST Rs 1,800 + SGST Rs 1,800)
दफ़्तर के लिए नया कंप्यूटरRs 14,400 (CGST Rs 7,200 + SGST Rs 7,200)
स्टाफ़ मीटिंग का लंचRs 540 (CGST Rs 270 + SGST Rs 270)

फ़रवरी की बिक्री पर आउटपुट टैक्स:

टैक्स टाइपराशि
IGSTRs 12,000
CGSTRs 9,000
SGSTRs 9,000

जनवरी से कैरी-फ़ॉरवर्ड: CGST Rs 1,100।

सवाल:

  1. कुल एलिजिबल ITC कितना है? (ब्लॉक्ड क्रेडिट्स याद रखो!)
  2. हर टैक्स टाइप (IGST, CGST, SGST) का नेट पेएबल गणना करो।
  3. क्या कोई ITC मार्च में कैरी फ़ॉरवर्ड होगा?

अभ्यास 2: ब्लॉक्ड या अलाउड?

नीचे की हर ख़रीदारी के लिए लिखो कि ITC ALLOWED है या BLOCKED:

  1. मसाले डिलीवर करने के लिए एक डिलीवरी वैन
  2. दफ़्तर स्टाफ़ के लिए चाय-नाश्ता
  3. अकाउंटेंट के लिए एक लैपटॉप
  4. नए वेयरहाउस का कंस्ट्रक्शन
  5. रीसेल के लिए कच्चे मसाले
  6. दफ़्तर के लिए प्रिंटर कार्ट्रिजेस
  7. बिष्ट जी के लिए जिम मेंबरशिप
  8. ग्राहकों को गुड्स भेजने के कूरियर चार्जेस

अभ्यास 3: ITC रिवर्सल

बिष्ट जी ने सितंबर में Gujarat Seeds Ltd से Rs 2,00,000 का जीरा ख़रीदा। GST चुकाया: Rs 10,000। ITC सितंबर में क्लेम किया।

  • मार्च में (180+ दिन बाद), उन्होंने अभी तक Gujarat Seeds Ltd को पे नहीं किया।
  • उन्हें ITC के साथ क्या करना चाहिए?
  • अगर अप्रैल में पे करते हैं, तो क्या होगा?

अभ्यास 4: GSTR-2B मिसमैच

फ़रवरी की GSTR-2B रीकॉन्साइल करते वक़्त, मीरा को पता चलता है कि एक आपूर्तिकर्ता (Haldwani Packaging, इनवॉइस HP/290, GST Rs 3,600) GSTR-2B में दिख ही नहीं रहा। उसे क्या करना चाहिए? कम से कम 3 चरण बताओ।


फ़न फ़ैक्ट

ITC सिर्फ़ भारत में नहीं है। ज़्यादातर देश जिनमें VAT (वैल्यू ऐडेड टैक्स) सिस्टम है, उनमें इससे मिलता-जुलता कॉन्सेप्ट है। यूरोपियन यूनियन में इसे "VAT डिडक्शन" कहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में इसे "GST क्रेडिट" कहते हैं। आइडिया हर जगह एक ही है — बिज़नेसेस को सिर्फ़ उस वैल्यू पर टैक्स देना चाहिए जो उन्होंने ऐड की, उस पर नहीं जिस पर पहले से टैक्स लग चुका है। ये कॉन्सेप्ट सबसे पहले एक फ़्रेंच टैक्स ऑफ़िशियल Maurice Laure ने 1954 में पेश किया था। तो अगली बार जब तुम बिष्ट जी के लिए ITC गणना करो, याद रखना — तुम एक ऐसा आइडिया इस्तेमाल कर रहे हो जो एक फ़्रेंचमैन ने 70 साल से ज़्यादा पहले ईजाद किया था!

GSTR-1 — तुम्हारी सेल्स रिटर्न

शुक्रवार की सुबह। शर्मा सर ने मीरा और नेगी भैया को अपने केबिन में बुलाया। "बिष्ट जी की जनवरी की GSTR-1 11 फ़रवरी को ड्यू है। बस चार दिन बाक़ी हैं। मीरा, मैं चाहता हूँ कि तुम इसे तैयार करो। नेगी भैया गाइड करेंगे।" मीरा नर्वस हो गई। थ्योरी में तो उसने GST समझ ली थी, लेकिन ये रियल था — एक असली क्लाइंट के लिए सरकार के पास असली रिटर्न फ़ाइल करना। "चिंता मत करो," नेगी भैया ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। "हम ERPLite से डेटा लेंगे। ज़्यादातर काम पहले से हो चुका है। बस वेरिफ़ाई और व्यवस्थित करना है।"


GSTR-1 क्या है?

GSTR-1 एक रिटर्न (सरकार के पास फ़ाइल किया जाने वाला रिपोर्ट) है जिसमें तुम्हारी सभी आउटवर्ड सप्लाइज़ की ब्योरा होती हैं — सीधी भाषा में, महीने की तुम्हारी सभी बिक्री

GST के तहत हर रजिस्टर्ड टैक्सपेयर (कंपोज़ीशन स्कीम वालों को छोड़कर) को GSTR-1 फ़ाइल करनी पड़ती है।

ऐसे सोचो: सरकार जानना चाहती है — तुमने किसे बेचा, कितना बेचा, और कितना GST चार्ज किया? GSTR-1 में तुम ये सब रिपोर्ट करते हो।

GSTR-1 कौन फ़ाइल करता है?

  • नियमित GST में रजिस्टर्ड हर व्यक्ति (कंपोज़ीशन स्कीम नहीं)
  • अगर महीने में ज़ीरो सेल्स भी हुई, तो भी निल GSTR-1 फ़ाइल करनी पड़ती है

फ़ाइलिंग फ़्रीक्वेंसी

तुम्हारा सालाना टर्नओवरGSTR-1 कितनी बार फ़ाइल करनी है
Rs 5 करोड़ से ज़्यादामंथली (अगले महीने की 11 तारीख़ तक)
Rs 5 करोड़ तकक्वार्टरली QRMP स्कीम के तहत (तिमाही ख़त्म होने के बाद अगले महीने की 13 तारीख़ तक)

QRMP का मतलब है क्वार्टरली रिटर्न्स विद मंथली पेमेंट। इस स्कीम में, छोटे बिज़नेसेस GSTR-1 क्वार्टरली फ़ाइल करते हैं लेकिन GST मंथली पे करते हैं।

बिष्ट जी का टर्नओवर लगभग Rs 90 लाख है — Rs 5 करोड़ से कम। उन्होंने QRMP स्कीम ऑप्ट की है, तो वो GSTR-1 क्वार्टरली फ़ाइल करते हैं। लेकिन सीखने के लिए, शर्मा सर चाहते हैं कि मीरा मंथली डेटा से अभ्यास करे।

ड्यू डेट

फ़ाइलिंग टाइपड्यू डेट
मंथली GSTR-1अगले महीने की 11 तारीख़
क्वार्टरली GSTR-1 (QRMP)तिमाही ख़त्म होने के बाद अगले महीने की 13 तारीख़

जनवरी 2026 (मंथली) के लिए: 11 फ़रवरी 2026 तक ड्यू।

अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही (QRMP) के लिए: 13 जनवरी 2026 तक ड्यू।


GSTR-1 में क्या-क्या जाता है?

GSTR-1 तुम्हारी सारी बिक्री दर्ज करता है, लेकिन उन्हें ख़ास श्रेणियाँ में व्यवस्थित करना पड़ता है। हर एक समझते हैं।

GSTR-1 के मुख्य सेक्शंस

टेबलक्या है इसमेंब्योरा
टेबल 4B2B इनवॉइसेसदूसरे GST-रजिस्टर्ड बिज़नेसेस को बिक्री (बायर के पास GSTIN है)
टेबल 5B2C (लार्ज) इनवॉइसेसअनरजिस्टर्ड पर्सन्स को बिक्री जहाँ इनवॉइस वैल्यू > Rs 2,50,000
टेबल 7B2C (स्मॉल)अनरजिस्टर्ड पर्सन्स को बिक्री की समरी जहाँ इनवॉइस वैल्यू <= Rs 2,50,000
टेबल 6एक्सपोर्ट्सभारत से बाहर के बायर्स को बिक्री
टेबल 9क्रेडिट नोट्स और डेबिट नोट्सपिछले इनवॉइसेस में एडजस्टमेंट्स
टेबल 11एडवांसेस रिसीव्डएडवांस पेमेंट्स पर GST (जहाँ इनवॉइस अभी जारी नहीं हुआ)
टेबल 11(B)एडवांस एडजस्टेडजब पिछले एडवांस के ख़िलाफ़ इनवॉइस जारी होता है
टेबल 12HSN समरीHSN कोड के हिसाब से सभी बिक्री की समरी
टेबल 13डॉक्यूमेंट्स इश्यूडइनवॉइस नंबर्स, क्रेडिट नोट नंबर्स, आदि की समरी

B2B vs B2C समझना

GSTR-1 में ये बहुत ज़रूरी फ़र्क़ है।

B2B (बिज़नेस टू बिज़नेस): तुम्हारा बायर GST-रजिस्टर्ड बिज़नेस है। तुम्हारे पास उसका GSTIN है। हर इनवॉइस इंडिविजुअली रिपोर्ट होती है पूरी ब्योरा के साथ — बायर GSTIN, इनवॉइस नंबर, डेट, वैल्यू, टैक्स अमाउंट्स।

इंडिविजुअली क्यों? क्योंकि बायर इस इनवॉइस पर ITC क्लेम करेगा। सरकार को तुम्हारी B2B इनवॉइस को बायर के ITC क्लेम से मैच करना है।

B2C (बिज़नेस टू कंज़्यूमर): तुम्हारा बायर GST-रजिस्टर्ड नहीं है (या तुम्हारे पास उसका GSTIN नहीं है)। इसकी दो उप-श्रेणियाँ हैं:

  • B2C लार्ज: इनवॉइस वैल्यू Rs 2,50,000 से ज़्यादा है। इंडिविजुअली रिपोर्ट होती है (क्योंकि बड़ा ट्रांज़ैक्शन है)।
  • B2C स्मॉल: इनवॉइस वैल्यू Rs 2,50,000 या कम है। समरी के रूप में रिपोर्ट होती है — टैक्स रेट और स्टेट के हिसाब से कुल बिक्री ग्रुप करके। इंडिविजुअल इनवॉइसेस लिस्ट नहीं होतीं।

बिष्ट जी की जनवरी 2026 की बिक्री का ब्रेकडाउन

चलो बिष्ट जी की जनवरी की बिक्री को GSTR-1 श्रेणियाँ में व्यवस्थित करते हैं:

B2B इनवॉइसेस (टेबल 4):

इनवॉइस No.डेटबायरबायर GSTINटैक्सेबल वैल्यूटैक्स टाइपटैक्स अमाउंट
BT/014105-JanMountain Spice Mart, Dehradun05AABCM5678P1Z2Rs 1,20,000CGST+SGSTRs 3,000 + Rs 3,000
BT/014208-JanDelhi Masala House, Delhi07AABCD9876R1Z5Rs 2,00,000IGSTRs 10,000
BT/014412-JanLake City Store, Nainital05AABCL3456K1Z9Rs 80,000CGST+SGSTRs 2,000 + Rs 2,000
BT/014618-JanUP Grocers, Lucknow09AABCU7890M1Z1Rs 1,00,000IGSTRs 5,000
BT/014722-JanKumaon Traders, Almora05AABCK2345N1Z4Rs 60,000CGST+SGSTRs 1,500 + Rs 1,500
BT/014928-JanHill Masala, Rishikesh05AABCH6789Q1Z7Rs 1,40,000CGST+SGSTRs 3,500 + Rs 3,500

ये सभी बायर्स GST-रजिस्टर्ड हैं (उनके पास GSTINs हैं)। हर इनवॉइस इंडिविजुअली रिपोर्ट होती है।

B2C स्मॉल (टेबल 7):

बिष्ट जी की कुछ बिक्री छोटी दुकानों या वॉक-इन ग्राहकों को थी जो GST-रजिस्टर्ड नहीं हैं। ये समरी के रूप में रिपोर्ट होती हैं:

राज्यटैक्स रेटटैक्सेबल वैल्यूCGSTSGSTIGST
उत्तराखंड5%Rs 50,000Rs 1,250Rs 1,250

(ये लोकल अनरजिस्टर्ड दुकानों को छोटी कैश बिक्री थी, सब Rs 2,50,000 प्रति इनवॉइस से कम।)

B2C लार्ज (टेबल 5):

इस महीने कोई नहीं। बिष्ट जी की किसी भी अनरजिस्टर्ड व्यक्ति को बिक्री Rs 2,50,000 से ऊपर नहीं गई।

क्रेडिट नोट्स (टेबल 9):

क्रेडिट नोट No.डेटओरिजनल इनवॉइसबायर GSTINवैल्यूटैक्स
BT/CN/00315-JanBT/014105AABCM5678P1Z2Rs 5,000CGST Rs 125 + SGST Rs 125

Mountain Spice Mart ने Rs 5,000 के कुछ ख़राब पैकेट्स वापस किए।

HSN समरी (टेबल 12):

HSN कोडडिस्क्रिप्शनUQCकुल Qtyटैक्सेबल वैल्यूIGSTCGSTSGST
0910Turmeric, ginger, spice mixesKgs2,400Rs 3,60,000Rs 8,000Rs 5,500Rs 5,500
0904Chilli, pepperKgs1,800Rs 2,20,000Rs 5,000Rs 3,000Rs 3,000
0909Cumin, coriander, fennelKgs1,200Rs 1,70,000Rs 2,000Rs 2,250Rs 2,250

UQC = यूनिट क्वांटिटी कोड (Kgs, Pcs, Ltrs, आदि)


IFF — इनवॉइस फ़र्निशिंग फ़ैसिलिटी

अगर बिष्ट जी QRMP स्कीम पर हैं (क्वार्टरली फ़ाइलिंग), तो उन्हें B2B इनवॉइसेस हर महीने IFF (इनवॉइस फ़र्निशिंग फ़ैसिलिटी) से रिपोर्ट करनी पड़ती हैं।

क्यों? क्योंकि उनके B2B ग्राहकों को उन इनवॉइसेस को अपनी GSTR-2B में देखना है ताकि ITC क्लेम कर सकें। अगर बिष्ट जी 3 महीने तक इनवॉइसेस रिपोर्ट करने का इंतज़ार करते हैं, तो उनके ग्राहकों उन महीनों में ITC क्लेम नहीं कर सकते।

IFF अगले महीने की 13 तारीख़ तक फ़ाइल होती है (क्वार्टरली GSTR-1 ड्यू डेट कॉन्सेप्ट जैसा ही, लेकिन मंथली सिर्फ़ B2B इनवॉइसेस के लिए)।

अगर तुम QRMP पर होमंथली क्या फ़ाइल करना हैक्वार्टरली क्या फ़ाइल करना है
B2B इनवॉइसेसIFF (13 तारीख़ तक)क्वार्टरली GSTR-1 का हिस्सा
B2C बिक्रीमंथली कुछ नहींक्वार्टरली GSTR-1 में रिपोर्ट
HSN समरीमंथली कुछ नहींक्वार्टरली GSTR-1 में रिपोर्ट

लेट फ़ाइलिंग की पेनल्टी

"अगर हम लेट फ़ाइल करें तो क्या होगा?" मीरा ने पूछा।

सिचुएशनपेनल्टी
GSTR-1 लेट फ़ाइलिंग (टैक्स लायबिलिटी है)Rs 50 प्रति दिन (Rs 25 CGST + Rs 25 SGST)
GSTR-1 लेट फ़ाइलिंग (निल रिटर्न)Rs 20 प्रति दिन (Rs 10 CGST + Rs 10 SGST)
मैक्सिमम पेनल्टीRs 10,000 प्रति रिटर्न (Rs 5,000 CGST + Rs 5,000 SGST)

"Rs 50 प्रति दिन शायद बहुत न लगे," शर्मा सर बोले। "लेकिन अगर 200 दिन लेट हो, तो Rs 10,000 हो जाएगा। और ये हर रिटर्न के लिए है। अगर 6 महीने की GSTR-1 मिस करो, तो Rs 60,000 पेनल्टी हो सकती है। प्लस, तुम्हारे ग्राहकों तब तक ITC क्लेम नहीं कर पाएँगे जब तक तुम फ़ाइल नहीं करते। वो तुमसे ख़रीदना बंद कर देंगे।"

फ़ाइल न करने के और नतीजे

  • तुम्हारे ग्राहकों तुम्हारे इनवॉइसेस अपनी GSTR-2A/2B में नहीं देख सकते
  • तुम्हारे ग्राहकों तुमसे ख़रीदारी पर ITC क्लेम नहीं कर सकते
  • लंबे समय तक डिफ़ॉल्ट करने पर, सरकार तुम्हारा GST रजिस्ट्रेशन कैंसल कर सकती है
  • GSTR-1 फ़ाइल करने तक तुम GSTR-3B फ़ाइल नहीं कर सकते (सीक्वेंशियल फ़ाइलिंग रिक्वायरमेंट)

हैंड्स-ऑन: ERPLite में GSTR-1 तैयार करना

अब देखते हैं मीरा ने ERPLite से बिष्ट जी की GSTR-1 कैसे तैयार की।

चरण 1: सभी सेल्स इनवॉइसेस वेरिफ़ाई करो

रिपोर्ट्स > GST रिपोर्ट्स > GSTR-1 रिपोर्ट पर जाओ।

पीरियड चुनो: January 2026।

ERPLite महीने की सभी सेल्स इनवॉइसेस पुल करता है और अपने-आप कैटेगराइज़ करता है:

  • B2B इनवॉइसेस: 6 इनवॉइसेस
  • B2C इनवॉइसेस: 3 इनवॉइसेस (सब स्मॉल, Rs 2,50,000 से कम)
  • क्रेडिट नोट्स: 1
  • डेबिट नोट्स: 0

मीरा ने काउंट चेक किया। "हमने जनवरी में BT/0141 से BT/0150 तक इनवॉइसेस इश्यू कीं। कुल 10 इनवॉइसेस। लेकिन BT/0143 कैंसल (वॉइड) हो गई थी और BT/0148 और BT/0150 प्रोफ़ॉर्मा इनवॉइसेस थीं (अभी सेल्स में कन्वर्ट नहीं हुईं)। तो 10 - 3 = 7 ऐक्चुअल इनवॉइसेस। प्लस एक अनरजिस्टर्ड पर्सन को थी, तो 6 B2B + 1 B2C। वेट — 3 B2C सेल्स थीं।"

नेगी भैया ने चेक किया: "काउंट सही है, लेकिन याद रखो — BT/0145 भी वॉक-इन ग्राहक को B2C सेल थी, और BT/0151 ऐक्चुअली जनवरी की इनवॉइस थी (30 Jan डेटेड, लेकिन 151 सीरीज़ में नंबर आया क्योंकि नेक्स्ट बैच में क्रॉस हो गया)। मैं चेक करता हूँ।"

ध्यान से वेरिफ़ाई करने के बाद:

श्रेणीकाउंटवेरिफ़ाइड?
B2B इनवॉइसेस6हाँ — सभी बायर GSTINs वेरिफ़ाइड
B2C स्मॉल3हाँ — सब Rs 2,50,000 से कम, कोई GSTIN नहीं
क्रेडिट नोट्स1हाँ — ओरिजनल इनवॉइस BT/0141 से लिंक्ड
कैंसल्ड1BT/0143 — कैंसल्ड वेरिफ़ाइड

चरण 2: हर B2B इनवॉइस समीक्षा करो

हर B2B इनवॉइस के लिए, मीरा ने वेरिफ़ाई किया:

  • बायर GSTIN सही है (बायर मास्टर से क्रॉस-चेक)
  • HSN कोड्स सही हैं
  • टैक्स रेट्स सही हैं (सभी मसालों के लिए 5%)
  • CGST/SGST या IGST स्टेट के हिसाब से सही लागू हुई

उसे एक इश्यू मिली: इनवॉइस BT/0144 में Lake City Store का GSTIN 05AABCL3456K2Z9 एंटर था, सही 05AABCL3456K1Z9 की जगह। 13वें डिजिट में टाइपो थी।

"गुड कैच!" नेगी भैया बोले। "अगर ग़लत GSTIN से फ़ाइल करें, तो Lake City Store को ये इनवॉइस उनकी GSTR-2B में नहीं दिखेगी। वो कॉल करके कम्प्लेन करेंगे। मैं ठीक कर देता हूँ।"

उन्होंने पार्टी मास्टर और इनवॉइस में GSTIN करेक्ट किया।

चरण 3: GSTR-1 JSON फ़ाइल जेनरेट करो

ERPLite में, रिपोर्ट्स > GST रिपोर्ट्स > GSTR-1 एक्सपोर्ट पर जाओ।

पीरियड चुनो: January 2026।

जेनरेट JSON पर क्लिक करो।

ERPLite एक JSON फ़ाइल बनाता है जो सीधे GST पोर्टल पर अपलोड की जा सकती है। फ़ाइल में सारा डेटा GSTR-1 फ़ॉर्मेट में व्यवस्थित्ड होता है — B2B इनवॉइसेस, B2C समरी, क्रेडिट नोट्स, HSN समरी, और डॉक्यूमेंट ब्योरा।

चरण 4: GST पोर्टल पर अपलोड करो

  1. बिष्ट जी के क्रेडेंशियल्स से gst.gov.in पर लॉग इन करो।
  2. रिटर्न्स > GSTR-1 पर जाओ।
  3. पीरियड चुनो: January 2026।
  4. अपलोड JSON पर क्लिक करो (या ऑफ़लाइन टूल इस्तेमाल करो)।
  5. ERPLite से जेनरेट की हुई फ़ाइल अपलोड करो।
  6. पोर्टल फ़ाइल प्रक्रिया करता है और समरी दिखाता है।

चरण 5: पोर्टल पर वेरिफ़ाई करो

अपलोड के बाद, मीरा ने पोर्टल पर हर सेक्शन चेक किया:

सेक्शनपोर्टल दिखाता हैहमारे रिकॉर्डमैच?
B2B (टेबल 4)6 इनवॉइसेस, Rs 7,00,0006 इनवॉइसेस, Rs 7,00,000हाँ
B2C स्मॉल (टेबल 7)Rs 50,000Rs 50,000हाँ
क्रेडिट नोट्स (टेबल 9)1 नोट, Rs 5,0001 नोट, Rs 5,000हाँ
HSN समरी (टेबल 12)3 HSN कोड्स3 HSN कोड्सहाँ

सब कुछ मैच हुआ।

चरण 6: रिटर्न फ़ाइल करो

  1. सबमिट पर क्लिक करो। (इससे डेटा लॉक हो जाता है — अब और बदलाव मुमकिन नहीं।)
  2. एक आख़िरी बार समरी समीक्षा करो।
  3. फ़ाइल विद DSC (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफ़िकेट) या फ़ाइल विद EVC (इलेक्ट्रॉनिक वेरिफ़िकेशन कोड via OTP) पर क्लिक करो।
  4. बिष्ट जी के रजिस्टर्ड मोबाइल पर भेजा गया OTP एंटर करो।
  5. फ़ाइल पर क्लिक करो।

हो गया! बिष्ट जी की जनवरी 2026 की GSTR-1 फ़ाइल हो गई।

मीरा को संतोष की लहर महसूस हुई। "मेरी पहली रिटर्न!"

शर्मा सर ने सिर हिलाया। "अच्छा काम। लेकिन याद रखो, ये सिर्फ़ सेल्स साइड है। असली पेमेंट GSTR-3B फ़ाइल करते वक़्त होती है। वो नेक्स्ट है।"

ERPLite से GSTR-1 JSON GST पोर्टल पर अपलोड करना


GSTR-1 में आम ग़लतियाँ

शर्मा सर ने सालों के अनुभव से देखी गई ग़लतियों की एक लिस्ट शेयर की:

ग़लतीक्या ग़लत होता हैकैसे बचें
बायर का ग़लत GSTINबायर को इनवॉइस GSTR-2B में नहीं दिखती, ITC क्लेम नहीं कर सकताइनवॉइस से पहले हमेशा GSTIN वेरिफ़ाई करो
ग़लत प्लेस ऑफ़ आपूर्तिIGST की जगह CGST+SGST लग गया (या उलटा)बायर का स्टेट कोड चेक करो
मिसिंग इनवॉइसेसबिक्री अंडर-रिपोर्ट होती हैफ़ाइलिंग से पहले इनवॉइस रजिस्टर को GSTR-1 से रीकॉन्साइल करो
ग़लत HSN कोडटैक्स रेट मिसमैच, ऑडिट इश्इस्तेमालआइटम मास्टर लेवल पर HSN वेरिफ़ाई करो
क्रेडिट नोट्स रिपोर्ट नहीं किएज़रूरत से ज़्यादा टैक्स लायबिलिटी दिखती हैसभी क्रेडिट/डेबिट नोट्स इन्क्लूड करो
ड्यू डेट के बाद फ़ाइलिंगRs 50/दिन पेनल्टीरिमाइंडर्स सेट करो, डेटा एडवांस में तैयार करो
डुप्लिकेट इनवॉइसेसएक ही इनवॉइस दो बार रिपोर्ट हो गईERPLite रिपोर्ट में डुप्लिकेट्स चेक करो
इनवॉइस नंबर में ग़लत फ़ाइनेंशियल ईयरपोर्टल ख़ारिज करता हैइनवॉइस सीरीज़ FY से मैच करे

"सबसे आम ग़लती," शर्मा सर बोले, "ग़लत GSTIN है। हमेशा वेरिफ़ाई करो। एक डिजिट ग़लत और बायर का ITC गया। वो उनका पैसा है।"


अमेंडमेंट्स — फ़ाइलिंग के बाद ग़लतियाँ ठीक करना

अगर GSTR-1 फ़ाइल हो जाने के बाद मीरा को कोई त्रुटि मिलता है तो?

GST अमेंडमेंट्स अलाउ करता है। पिछले महीने की ग़लतियाँ अगले महीने की GSTR-1 में करेक्ट कर सकते हो।

सेक्शनक्या अमेंड कर सकते हो
टेबल 9Aपिछले महीनों की B2B इनवॉइसेस अमेंड करो
टेबल 9Bपिछले महीनों की B2C (लार्ज) इनवॉइसेस अमेंड करो
टेबल 9Cपिछले महीनों के क्रेडिट/डेबिट नोट्स अमेंड करो

हालाँकि, लिमिट्स हैं:

  • किसी फ़ाइनेंशियल ईयर के अमेंडमेंट्स सिर्फ़ इनमें से जो पहले हो तब तक कर सकते हो: अगले साल की 30 नवंबर, या एनुअल रिटर्न (GSTR-9) फ़ाइल करने की डेट।
  • GSTIN को अनरजिस्टर्ड से रजिस्टर्ड में अमेंड नहीं कर सकते (इससे B2C इनवॉइस, B2B बन जाती — अमेंडमेंट के रूप में अलाउड नहीं)।

"अगर कोई ग़लती मिले, बिल्कुल अगली रिटर्न में ठीक करो," शर्मा सर ने सलाह दी। "इकट्ठा मत होने दो।"


क्विक रीकैप

  • GSTR-1 पीरियड की तुम्हारी सभी आउटवर्ड सप्लाइज़ (बिक्री) रिपोर्ट करती है।
  • मंथली फ़ाइल होती है (टर्नओवर > Rs 5 करोड़) या क्वार्टरली QRMP के तहत।
  • ड्यू डेट: अगले महीने की 11 तारीख़ (मंथली) या तिमाही ख़त्म होने के बाद 13 तारीख़ (क्वार्टरली)।
  • मुख्य सेक्शंस: B2B इनवॉइसेस (इंडिविजुअल, बायर GSTIN के साथ), B2C लार्ज (इंडिविजुअल, > Rs 2.5 लाख), B2C स्मॉल (समरी), क्रेडिट/डेबिट नोट्स, HSN समरी
  • IFF (इनवॉइस फ़र्निशिंग फ़ैसिलिटी) QRMP टैक्सपेयर्स को मंथली B2B इनवॉइसेस रिपोर्ट करने देती है।
  • लेट फ़ाइलिंग पेनल्टी: Rs 50/दिन (या निल के लिए Rs 20/दिन), मैक्सिमम Rs 10,000
  • ERPLite सेल्स इनवॉइसेस से GSTR-1 डेटा ऑटो-जेनरेट करता है। JSON के रूप में एक्सपोर्ट करो और GST पोर्टल पर अपलोड करो।
  • फ़ाइलिंग से पहले हमेशा GSTINs, HSN कोड्स, और इनवॉइस काउंट्स वेरिफ़ाई करो।
  • ग़लतियाँ अगले पीरियड की GSTR-1 में अमेंड की जा सकती हैं।

अभ्यास अभ्यास

अभ्यास 1: इन बिक्री को कैटेगराइज़ करो

बिष्ट ट्रेडर्स ने फ़रवरी 2026 में नीचे दी गई बिक्री कीं। हर एक को B2B, B2C लार्ज, या B2C स्मॉल में कैटेगराइज़ करो:

  1. Rs 1,50,000 Mountain Spice Mart को (GSTIN: 05AABCM5678P1Z2)
  2. Rs 45,000 एक वॉक-इन ग्राहक को (कोई GSTIN नहीं)
  3. Rs 3,00,000 एक वेडिंग कैटरर को (कोई GSTIN नहीं)
  4. Rs 80,000 UP Grocers को (GSTIN: 09AABCU7890M1Z1)
  5. Rs 12,000 एक लोकल चाय की दुकान को (कोई GSTIN नहीं)
  6. Rs 2,80,000 Delhi Masala House को (GSTIN: 07AABCD9876R1Z5)

अभ्यास 2: पेनल्टी गणना करो

बिष्ट जी मार्च 2026 की GSTR-1 फ़ाइल करना भूल गए। उनकी सेल्स थीं (निल नहीं)। उन्होंने फ़ाइनली 25 अप्रैल 2026 को फ़ाइल की।

  1. फ़ाइलिंग कितने दिन लेट है?
  2. लेट फ़ी कितनी होगी?
  3. बिष्ट जी को और क्या-क्या नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं?

अभ्यास 3: ग़लती ढूँढो

GSTR-1 में इस B2B एंट्री को देखो:

इनवॉइस No.डेटबायरबायर GSTINप्लेस ऑफ़ आपूर्तिटैक्सेबल वैल्यूCGSTSGST
BT/015510-FebDelhi Masala House07AABCD9876R1Z5Delhi (07)Rs 80,000Rs 2,000Rs 2,000

क्या ग़लत है? (हिंट: बायर के स्टेट और टैक्स टाइप को देखो।)

अभ्यास 4: GSTR-1 तैयार करो

नीचे दिए गए बिष्ट ट्रेडर्स के फ़रवरी 2026 के सेल्स डेटा से, GSTR-1 के हर सेक्शन में क्या जाएगा उसकी समरी तैयार करो:

इनवॉइसडेटबायरGSTINस्टेटवैल्यूGST रेट
BT/015503-FebHill Masala05AABCH6789Q1Z7UKRs 90,0005%
BT/015607-FebDelhi Masala07AABCD9876R1Z5DelhiRs 1,60,0005%
BT/015710-FebWalk-inNoneUKRs 8,0005%
BT/015814-FebUP Grocers09AABCU7890M1Z1UPRs 1,20,0005%
BT/015920-FebWalk-inNoneUKRs 15,0005%
BT/016025-FebMountain Spice05AABCM5678P1Z2UKRs 2,10,0005%

साथ ही, 1 क्रेडिट नोट था: CN/004 डेटेड 18-Feb, BT/0155 के ख़िलाफ़, वैल्यू Rs 10,000।

इन्हें व्यवस्थित करो: B2B (टेबल 4), B2C स्मॉल (टेबल 7), क्रेडिट नोट्स (टेबल 9), और HSN समरी (टेबल 12)।


फ़न फ़ैक्ट

GST से पहले, भारत के पास बिक्री ट्रैक करने का कोई एक नेशनल सिस्टम नहीं था। तमिलनाडु का सेलर और उत्तराखंड का बायर बिल्कुल अलग-अलग फ़ॉर्म्स, अलग-अलग स्टेट ऑथॉरिटीज़ के पास फ़ाइल करते थे। राज्यों के बीच ट्रांज़ैक्शंस मैच और वेरिफ़ाई करना लगभग नामुमकिन था। GSTR-1 ने ये बदल दिया — अब भारत के हर रजिस्टर्ड बिज़नेस की हर बिक्री एक सेंट्रल डेटाबेस में रिकॉर्ड होती है। GST नेटवर्क (GSTN) हर साल 800 करोड़ से ज़्यादा इनवॉइसेस प्रक्रिया करता है। ये भारत के हर व्यक्ति के लिए 200 से ज़्यादा इनवॉइसेस हैं! और ये सब Infosys द्वारा बनाए गए टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म पर चलता है। हर बार जब मीरा बिष्ट जी की JSON फ़ाइल अपलोड करती है, वो इस विशाल नेशनल डेटाबेस में ऐड कर रही होती है।

GSTR-3B — मंथली समरी

"GSTR-1 सरकार को बताती है कि तुमने क्या बेचा," शर्मा सर ने समझाया। "लेकिन GSTR-3B वो है जहाँ तुम असल में पे करते हो।" 15 फ़रवरी थी। बिष्ट जी की जनवरी की GSTR-1 चार दिन पहले फ़ाइल हो चुकी थी। अब GSTR-3B की बारी थी — 20 तारीख़ को ड्यू। मीरा ने अपनी नोटबुक खोली। "तो GSTR-1 ऐसा है जैसे सरकार को अपना बिल बताना, और GSTR-3B ऐसा है जैसे बिल चुकाना?" शर्मा सर ने सिर हिलाया। "बिल्कुल सही। और आज तुम गणना करोगी कि बिष्ट जी को कितना देना है और उनकी पेमेंट करने में मदद करोगी।"


GSTR-3B क्या है?

GSTR-3B एक मंथली समरी रिटर्न है जो हर नियमित GST-रजिस्टर्ड व्यक्ति को फ़ाइल करनी पड़ती है। GSTR-1 की तरह नहीं, जो हर इनवॉइस डीटेल में लिस्ट करती है — GSTR-3B एक समरी देती है:

  1. तुम्हारा सारा आउटपुट टैक्स (बिक्री पर वसूला GST)
  2. तुम्हारा सारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ख़रीदारी पर दिया GST)
  3. नेट टैक्स पेएबल (दोनों का फ़र्क़)

और सबसे ज़रूरी बात — यहीं पर तुम असल में टैक्स पे करते हो। जब तुम GSTR-3B फ़ाइल करते हो, तब पेमेंट करते हो।

GSTR-1 vs GSTR-3B

फ़ीचरGSTR-1GSTR-3B
क्या रिपोर्ट होता हैसभी बिक्री की डीटेल्स (इनवॉइस-वाइज़)बिक्री, ख़रीदारी, और टैक्स की समरी
पेमेंटकोई पेमेंट नहींटैक्स पेमेंट होता है
फ़्रीक्वेंसीमंथली या क्वार्टरलीमंथली (ज़्यादातर के लिए)
ड्यू डेटअगले महीने की 11 तारीख़अगले महीने की 20 तारीख़
डीटेल का लेवलइनवॉइस-बाय-इनवॉइससमरी कुल्स
उद्देश्यसरकार को बिक्री की जानकारी देनाटैक्स गणना करना और चुकाना

ऐसे सोचो: GSTR-1 एक रेस्टोरेंट की आइटमाइज़्ड रिसीट जैसी है जो हर डिश दिखाती है। GSTR-3B नीचे का फ़ाइनल बिल है जो कहता है "कुल: Rs X. कृपया पे करें।"

GSTR-3B कौन फ़ाइल करता है?

  • हर नियमित GST-रजिस्टर्ड व्यक्ति
  • अगर महीने में कोई ट्रांज़ैक्शन नहीं हुआ — तो भी निल GSTR-3B फ़ाइल करो
  • कंपोज़ीशन स्कीम डीलर्स GSTR-3B फ़ाइल नहीं करते (वो क्वार्टरली CMP-08 फ़ाइल करते हैं)

ड्यू डेट

टर्नओवरड्यू डेट
Rs 5 करोड़ से ज़्यादाअगले महीने की 20 तारीख़
Rs 5 करोड़ तक (QRMP)अगले महीने की 22 या 24 तारीख़ (राज्य पर निर्भर)

उत्तराखंड के लिए, QRMP ड्यू डेट 22 तारीख़ है। लेकिन चूँकि हम मंथली डेटा से सीख रहे हैं, स्टैंडर्ड 20 तारीख़ को रेफ़रेंस मानते हैं।

जनवरी 2026 के डेटा के लिए: GSTR-3B 20 फ़रवरी 2026 तक ड्यू है।


GSTR-3B की संरचना

GSTR-3B की एक सिंपल संरचना है जिसमें कुछ मुख्य टेबल्स हैं। हर एक समझते हैं।

टेबल 3.1 — आउटवर्ड सप्लाइज़ (तुम्हारी बिक्री)

यहाँ तुम अपनी सभी बिक्री की कुल वैल्यू और टैक्स रिपोर्ट करते हो। ये श्रेणियाँ में बँटा है:

रोविवरणयहाँ क्या जाता है
(a)टैक्सेबल आउटवर्ड सप्लाइज़ (ज़ीरो-रेटेड, निल-रेटेड, और एग्ज़ेम्प्ट को छोड़कर)तुम्हारी सामान्य टैक्सेबल बिक्री — मुख्य नंबर
(b)ज़ीरो-रेटेड आउटवर्ड सप्लाइज़ (एक्सपोर्ट्स)भारत से बाहर के ग्राहकों को बिक्री
(c)निल-रेटेड और एग्ज़ेम्प्ट आउटवर्ड सप्लाइज़जिन चीज़ों पर टैक्स नहीं लगता (0% आइटम्स)
(d)इनवर्ड सप्लाइज़ (रिवर्स चार्ज)ऐसी ख़रीदारी जहाँ आपूर्तिकर्ता की बजाय तुम GST पे करते हो
(e)नॉन-GST आउटवर्ड सप्लाइज़GST से बाहर की चीज़ों की बिक्री (पेट्रोल, शराब, आदि)

बिष्ट जी के लिए, ज़्यादातर बिक्री रो (a) — टैक्सेबल आउटवर्ड सप्लाइज़ में जाती है।

बिष्ट जी का टेबल 3.1, जनवरी 2026:

रोविवरणटैक्सेबल वैल्यूIGSTCGSTSGSTसेस
(a)टैक्सेबल सप्लाइज़Rs 7,50,000Rs 15,000Rs 11,250Rs 11,2500
(b)ज़ीरो-रेटेड00000
(c)निल/एग्ज़ेम्प्ट00000
(d)रिवर्स चार्ज00000
(e)नॉन-GST00000

कुल आउटपुट टैक्स: IGST Rs 15,000 + CGST Rs 11,250 + SGST Rs 11,250 = Rs 37,500

नोट: Rs 5,000 का क्रेडिट नोट (रिटर्न्ड गुड्स के लिए) टैक्सेबल वैल्यू कम करता है। इसे इंक्लूड करें तो रो (a) में टैक्सेबल वैल्यू Rs 7,50,000 की बजाय Rs 7,45,000 होगी, और कुल टैक्स Rs 250 कम होगा। सिंप्लिसिटी के लिए, यहाँ ग्रॉस फ़िगर्स इस्तेमाल कर रहे हैं और क्रेडिट नोट एडजस्टमेंट फ़ाइनल गणना में अपने-आप हो जाता है।

टेबल 3.2 — अनरजिस्टर्ड पर्सन्स और कंपोज़ीशन डीलर्स को इंटर-स्टेट सप्लाइज़

इस टेबल में इंटर-स्टेट बिक्री दर्ज होती है जो इन्हें की गई:

  • अनरजिस्टर्ड पर्सन्स (कोई GSTIN नहीं)
  • कंपोज़ीशन डीलर्स

बिष्ट जी ने जनवरी में कोई इंटर-स्टेट B2C बिक्री नहीं की, तो ये टेबल उनके लिए ज़ीरो है।

टेबल 4 — एलिजिबल ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट)

टैक्स कम करने के लिए ये सबसे ज़रूरी टेबल है। यहाँ तुम क्लेम कर रहे ITC रिपोर्ट करते हो।

रोविवरणIGSTCGSTSGSTसेस
(A)उपलब्ध ITC
(1)गुड्स का इंपोर्ट00
(2)सेवाेस का इंपोर्ट00
(3)इनवर्ड सप्लाइज़ (रिवर्स चार्ज)0000
(4)ISD से इनवर्ड सप्लाइज़0000
(5)बाक़ी सभी ITCRs 22,500Rs 4,850Rs 4,8500
कुल उपलब्ध ITCRs 22,500Rs 4,850Rs 4,8500
(B)ITC रिवर्स्ड
(1)नियम 42 & 43 के अनुसार (प्रोपोर्शनल रिवर्सल)0000
(2)अन्य0000
(C)नेट उपलब्ध ITC (A - B)Rs 22,500Rs 4,850Rs 4,8500
(D)इनएलिजिबल ITC (टेबल 4(D) से)0Rs 270Rs 2700

रो (5) "बाक़ी सभी ITC" — यहाँ ज़्यादातर ITC जाता है — भारत के अंदर रजिस्टर्ड आपूर्तिकर्ता से ख़रीदारी।

रो (D) — यहाँ वो ITC रिपोर्ट करते हो जो एलिजिबल नहीं है (ब्लॉक्ड क्रेडिट्स जैसे चैप्टर 19 का दफ़्तर लंच)।

बिष्ट जी का नेट ITC = Rs 32,200 (ब्लॉक्ड क्रेडिट्स को छोड़कर IGST + CGST + SGST का कुल)।

टेबल 5 — एग्ज़ेम्प्ट, निल-रेटेड, और नॉन-GST सप्लाइज़

ये GST न लगने वाली सप्लाइज़ की समरी टेबल है:

टाइपइंटर-स्टेटइंट्रा-स्टेट
निल-रेटेड सप्लाइज़00
एग्ज़ेम्प्ट सप्लाइज़00
नॉन-GST सप्लाइज़00

बिष्ट जी सिर्फ़ टैक्सेबल गुड्स बेचते हैं, तो ये टेबल पूरा ज़ीरो है।

अगर रावत आंटी फ़ाइल कर रही होतीं (वो कुछ एग्ज़ेम्प्ट आइटम्स जैसे खुले चावल और दाल बेचती हैं), तो वो यहाँ उन वैल्इस्तेमाल को रिपोर्ट करतीं।

टेबल 6 — पेमेंट ऑफ़ टैक्स

ये फ़ाइनल टेबल है — असली पेमेंट गणना। यहीं ITC आउटपुट टैक्स के ख़िलाफ़ सेट ऑफ़ होता है।

बिष्ट जी के लिए ऐसे काम करता है:

चरण 1: आउटपुट टैक्स से शुरू करो

टैक्सआउटपुट टैक्स
IGSTRs 15,000
CGSTRs 11,250
SGSTRs 11,250
कुलRs 37,500

चरण 2: ITC लागू करो (सेट-ऑफ़)

चैप्टर 19 के सेट-ऑफ़ नियम याद करो:

  • IGST क्रेडिट पहले IGST, फिर CGST, फिर SGST के ख़िलाफ़
  • CGST क्रेडिट, CGST के ख़िलाफ़, फिर IGST
  • SGST क्रेडिट, SGST के ख़िलाफ़, फिर IGST
टैक्सआउटपुटITC सेट-ऑफ़कैश चुकाना
IGSTRs 15,000Rs 15,000 (IGST क्रेडिट से)Rs 0
CGSTRs 11,250Rs 7,500 (बचे IGST से) + Rs 3,750 (CGST क्रेडिट से) = Rs 11,250Rs 0
SGSTRs 11,250Rs 4,850 (SGST क्रेडिट से)Rs 6,400
कुलRs 37,500Rs 31,100Rs 6,400

कैरी-फ़ॉरवर्ड CGST क्रेडिट: Rs 4,850 - Rs 3,750 = Rs 1,100 (अगले महीने जाएगा)।

चरण 3: फ़ाइनल पेमेंट टेबल

विवरणIGSTCGSTSGSTसेसकुल
टैक्स पेएबल15,00011,25011,250037,500
ITC से पे किया15,00011,2504,850031,100
कैश में पे किया006,40006,400

बिष्ट जी को सरकार को Rs 6,400 कैश में चुकाने हैं।


कैसे पे करें: इलेक्ट्रॉनिक लेजर्स और चालान

GST पोर्टल पर हर टैक्सपेयर के तीन इलेक्ट्रॉनिक "वॉलेट्स" हैं:

1. इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर

ये सरकार के पास तुम्हारे बैंक अकाउंट जैसा है। जब तुम कैश में GST पे करते हो (नेट बैंकिंग, NEFT, RTGS, या बैंक में काउंटर पर), पैसा इस लेजर में जाता है।

2. इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर

इसमें तुम्हारा सारा ITC होता है। जब तुम्हारे आपूर्तिकर्ता GSTR-1 फ़ाइल करते हैं और ITC तुम्हारी GSTR-2B में आता है, वो यहाँ दिखता है।

3. इलेक्ट्रॉनिक लायबिलिटी लेजर

इसमें तुम्हारी कुल टैक्स ऑब्लिगेशन दिखती है। जब तुम GSTR-3B फ़ाइल करते हो, लायबिलिटी यहाँ दिखती है। तुम इसे क्रेडिट लेजर (ITC) और कैश लेजर से फ़ंड्स इस्तेमाल करके "पे" करते हो।

चालान बनाना और पेमेंट करना

Rs 6,400 पे करने के लिए, मीरा ने ये चरण पालन किए:

चरण 1: चालान बनाओ

GST पोर्टल पर, Services > Payments > Create Challan पर जाओ।

अमाउंट्स एंटर करो:

टैक्सराशि
SGSTRs 6,400
CGSTRs 0
IGSTRs 0
सेसRs 0
कुलRs 6,400

चरण 2: पेमेंट मेथड चुनो

मेथडकैसे काम करता है
नेट बैंकिंगपोर्टल से सीधे बैंक अकाउंट से पे करो
NEFT / RTGSमैंडेट जनरेट करो और किसी भी बैंक से पे करो
ओवर द काउंटरबैंक ब्रांच में पे करो (Rs 10,000 तक की राशि के लिए)

बिष्ट जी नेट बैंकिंग इस्तेमाल करते हैं। मीरा ने उनका बैंक सिलेक्ट किया, और बिष्ट जी ने पेमेंट ऑथराइज़ करने के लिए अपने बैंक अकाउंट में लॉग इन किया।

चरण 3: पेमेंट पुष्टिेशन

पेमेंट के बाद, राशि GST पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में दिखती है। चालान रेफ़रेंस नंबर जनरेट होता है (CIN — चालान आइडेंटिफ़िकेशन नंबर)।

चरण 4: GSTR-3B फ़ाइल करो

अब GSTR-3B पर वापस जाओ। सभी टेबल्स भरे हुए हैं। पेमेंट हो चुकी है। सबमिट और फिर फ़ाइल विद EVC (OTP) पर क्लिक करो।

जनवरी 2026 की GSTR-3B फ़ाइल हो गई! लायबिलिटी डिस्चार्ज हो गई।

GST पेमेंट फ़्लो — चालान से फ़ाइलिंग तक


इंटरेस्ट और लेट फ़ीस

लेट फ़ाइलिंग फ़ी

सिचुएशनलेट फ़ी
GSTR-3B लेट (टैक्स लायबिलिटी के साथ)Rs 50 प्रति दिन (Rs 25 CGST + Rs 25 SGST)
GSTR-3B लेट (निल रिटर्न)Rs 20 प्रति दिन (Rs 10 CGST + Rs 10 SGST)
मैक्सिममRs 10,000 प्रति रिटर्न

लेट पेमेंट पर इंटरेस्ट

अगर तुम GSTR-3B लेट फ़ाइल करते हो और टैक्स लेट पे करते हो, तो इंटरेस्ट भी देना पड़ता है:

सिचुएशनइंटरेस्ट रेट
टैक्स लेट पे कियाबक़ाया राशि पर 18% प्रति वर्ष
ज़्यादा ITC क्लेम और इस्तेमाल कियाज़्यादा राशि पर 24% प्रति वर्ष

इंटरेस्ट, ड्यू डेट के अगले दिन से असली पेमेंट की डेट तक गणना होता है।

उदाहरण: बिष्ट जी की जनवरी GSTR-3B 20 फ़रवरी को ड्यू थी। अगर 20 मार्च को फ़ाइल करते हैं (28 दिन लेट):

  • लेट फ़ी: 28 दिन x Rs 50 = Rs 1,400
  • Rs 6,400 पर 28 दिन का इंटरेस्ट: Rs 6,400 x 18% x 28/365 = Rs 88 (लगभग)
  • कुल एक्स्ट्रा लागत: Rs 1,400 + Rs 88 = Rs 1,488

"इसीलिए हम कभी डेडलाइन मिस नहीं करते," शर्मा सर ने दृढ़ता से कहा।


निल रिटर्न्स के लिए GSTR-3B

अगर किसी महीने बिष्ट जी की ज़ीरो सेल्स और ज़ीरो परचेज़ेस हुईं (शायद दुकान रेनोवेशन के लिए बंद थी), तो भी GSTR-3B फ़ाइल करनी पड़ती है। इसे निल GSTR-3B कहते हैं।

सभी टेबल्स ज़ीरो दिखाएँगे। कोई पेमेंट नहीं। लेकिन फ़ाइलिंग ज़रूरी है।

GST पोर्टल पर एक स्पेशल SMS-बेस्ड निल फ़ाइलिंग विकल्प भी है। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से SMS भेजकर निल GSTR-3B फ़ाइल कर सकते हो — पोर्टल में लॉग इन किए बिना।


हैंड्स-ऑन: ERPLite और पोर्टल पर बिष्ट जी की GSTR-3B फ़ाइल करना

चलो पूरा प्रक्रिया चरण बाय चरण देखते हैं।

पार्ट A: ERPLite से नंबर्स लो

चरण 1: ERPLite खोलो। Reports > GST Reports > GSTR-3B Report पर जाओ।

पीरियड चुनो: January 2026।

ERPLite एक रिपोर्ट जनरेट करता है जो GSTR-3B फ़ॉर्मेट मिरर करती है:

टेबल 3.1 — आउटवर्ड सप्लाइज़:

टाइपटैक्सेबल वैल्यूIGSTCGSTSGST
टैक्सेबल सप्लाइज़Rs 7,50,000Rs 15,000Rs 11,250Rs 11,250
ज़ीरो-रेटेड0000
निल/एग्ज़ेम्प्ट0000
रिवर्स चार्ज0000
नॉन-GST0000

टेबल 4 — ITC:

टाइपIGSTCGSTSGST
बाक़ी सभी ITCRs 22,500Rs 4,850Rs 4,850
ITC रिवर्स्ड000
नेट ITCRs 22,500Rs 4,850Rs 4,850
इनएलिजिबल ITC0Rs 270Rs 270

टेबल 6 — पेमेंट:

IGSTCGSTSGSTकुल
टैक्स पेएबल15,00011,25011,25037,500
ITC यूटिलाइज़्ड15,00011,2504,85031,100
कैश पेएबल006,4006,400

मीरा ने ये रिपोर्ट प्रिंट की और अपनी मैनुअल गणना से कंपेयर किया। सब कुछ मैच हुआ।

चरण 2: GSTR-1 डेटा से क्रॉस-चेक करो।

चेकGSTR-1 कुलGSTR-3B कुलमैच?
कुल टैक्सेबल वैल्यूRs 7,50,000Rs 7,50,000हाँ
कुल IGSTRs 15,000Rs 15,000हाँ
कुल CGSTRs 11,250Rs 11,250हाँ
कुल SGSTRs 11,250Rs 11,250हाँ

"हमेशा चेक करो कि GSTR-1 और GSTR-3B मैच करें," नेगी भैया बोले। "अगर नहीं करतीं, तो GST डिपार्टमेंट से नोटिस आएगा कि ऐसा क्यों है।"

चरण 3: ITC को GSTR-2B से क्रॉस-चेक करो।

पोर्टल से बिष्ट जी की GSTR-2B डाउनलोड करो। कुल ITC कंपेयर करो:

सोर्सIGSTCGSTSGSTकुल
GSTR-2BRs 22,500Rs 4,850Rs 4,850Rs 32,200
हमारा क्लेमRs 22,500Rs 4,850Rs 4,850Rs 32,200
मैच?हाँहाँहाँहाँ

पार्ट B: GST पोर्टल पर फ़ाइल करो

चरण 4: बिष्ट जी के क्रेडेंशियल्स से gst.gov.in पर लॉग इन करो।

चरण 5: Returns > GSTR-3B पर जाओ। पीरियड चुनो: January 2026।

चरण 6: हर टेबल भरो। पोर्टल में ऑनलाइन फ़ॉर्म है। ERPLite रिपोर्ट से नंबर्स एंटर करो:

  • टेबल 3.1: हर श्रेणी के लिए टैक्सेबल वैल्यू और टैक्स अमाउंट्स एंटर करो
  • टेबल 4: ITC डीटेल्स एंटर करो
  • टेबल 5: एग्ज़ेम्प्ट/निल/नॉन-GST वैल्इस्तेमाल एंटर करो (बिष्ट जी के लिए सब ज़ीरो)

चरण 7: अपना काम सेव करने के लिए सेव पर क्लिक करो।

चरण 8: पेमेंट ऑफ़ टैक्स (टेबल 6) पर क्लिक करो। पोर्टल अपने-आप सेट-ऑफ़ गणना करता है और दिखाता है:

Tax Payable:     IGST: 15,000   CGST: 11,250   SGST: 11,250
ITC Utilized:    IGST: 15,000   CGST: 11,250   SGST:  4,850
Cash Required:   IGST:      0   CGST:      0   SGST:  6,400

चरण 9: अगर इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो पहले चालान बनाओ और पेमेंट करो (जैसा ऊपर बताया)। Rs 6,400 कैश लेजर में आने के बाद, आगे बढ़ो।

चरण 10: ऑफ़सेट लायबिलिटी पर क्लिक करो। पोर्टल, क्रेडिट लेजर से ITC और कैश लेजर से कैश इस्तेमाल करके लायबिलिटी पे करता है।

चरण 11: फ़ाइनल समरी वेरिफ़ाई करो। सबमिट और फिर फ़ाइल विद EVC (रजिस्टर्ड मोबाइल पर OTP) पर क्लिक करो।

चरण 12: फ़ाइल्ड GSTR-3B और पेमेंट रिसीट डाउनलोड करो। बिष्ट जी की फ़ाइल में सेव करो।

"हो गया!" मीरा बोली, और मुस्कुराए बिना नहीं रह पाई।

"याद रखो," शर्मा सर बोले, "तुमने अभी बिष्ट जी के Rs 31,100 कैश पेमेंट बचाए — ITC सही से क्लेम करके। अगर तुमने उनकी ख़रीदारी ट्रैक नहीं की होती, इनवॉइसेस वेरिफ़ाई नहीं किए होते, और GSTR-2B से रीकंसाइल नहीं किया होता, तो उन्हें पूरे Rs 37,500 चुकाने पड़ते। यही एक अच्छे अकाउंटेंट की वैल्यू है।"

GSTR-3B फ़ाइलिंग कंप्लीट — फ़ाइनल पुष्टिेशन स्क्रीन


मंथली टाइमलाइन: सब एक साथ

बिष्ट जी का मंथली साइकल यहाँ है:

डेटक्या होता है
महीने का 1 से आख़िरी दिनबिज़नेस चलता है — बिक्री और ख़रीदारी
अगले महीने की 1-5 तारीख़ERPLite में सभी इनवॉइसेस रीकंसाइल करो
5-10 तारीख़GSTR-1 डेटा तैयार करो, वेरिफ़ाई करो, JSON एक्सपोर्ट करो
11 तारीख़GSTR-1 ड्यू डेट — फ़ाइल करो
11-14 तारीख़GSTR-2B डाउनलोड करो, ITC रीकंसाइल करो
14-18 तारीख़GSTR-3B डेटा तैयार करो, नेट पेएबल गणना करो
18-19 तारीख़चालान बनाओ, पेमेंट करो
20 तारीख़GSTR-3B ड्यू डेट — फ़ाइल करो

"ये टाइमलाइन दीवार पर टाँग दो," शर्मा सर ने मीरा से कहा। "हर महीने, वही रिदम। बारिश जैसी — आती है, तैयारी करो, संभालो।"


क्विक रीकैप

  • GSTR-3B मंथली समरी रिटर्न है जहाँ तुम GST गणना और पे करते हो।
  • टेबल 3.1: आउटपुट टैक्स (बिक्री) रिपोर्ट करो। श्रेणियाँ: टैक्सेबल, ज़ीरो-रेटेड, निल/एग्ज़ेम्प्ट, रिवर्स चार्ज, नॉन-GST।
  • टेबल 4: ITC रिपोर्ट करो। सभी एलिजिबल क्रेडिट्स इंक्लूड करो, ब्लॉक्ड क्रेडिट्स एक्सक्लूड करो, रिवर्सल्स नोट करो।
  • टेबल 5: एग्ज़ेम्प्ट, निल-रेटेड, और नॉन-GST सप्लाइज़ रिपोर्ट करो।
  • टेबल 6: पेमेंट टेबल। पहले ITC (क्रेडिट लेजर से), फिर बाक़ी कैश में (कैश लेजर से)।
  • ड्यू डेट: अगले महीने की 20 तारीख़ (QRMP के लिए 22/24)।
  • लेट फ़ी: Rs 50/दिन (मैक्स Rs 10,000)। इंटरेस्ट: 18% प्रति वर्ष
  • हमेशा GSTR-1 कुल्स को GSTR-3B कुल्स से, और ITC क्लेम्स को GSTR-2B से क्रॉस-चेक करो।
  • ERPLite तुम्हारी वाउचर एंट्रीज़ से GSTR-3B डेटा जनरेट करता है। वेरिफ़ाई करो, फिर GST पोर्टल पर फ़ाइल करो।

अभ्यास अभ्यास

अभ्यास 1: GSTR-3B टेबल 3.1 भरो

बिष्ट जी के फ़रवरी 2026 के सेल्स डेटा (चैप्टर 20 के अभ्यासेस से) इस्तेमाल करो:

इनवॉइसबायरस्टेटवैल्यूरेट
BT/0155Hill MasalaUKRs 90,0005%
BT/0156Delhi MasalaDelhiRs 1,60,0005%
BT/0157वॉक-इनUKRs 8,0005%
BT/0158UP GrocersUPRs 1,20,0005%
BT/0159वॉक-इनUKRs 15,0005%
BT/0160Mountain SpiceUKRs 2,10,0005%

क्रेडिट नोट: CN/004, Rs 10,000 (BT/0155 के ख़िलाफ़, इंट्रा-स्टेट)।

गणना करो:

  1. कुल टैक्सेबल वैल्यू
  2. कुल IGST
  3. कुल CGST
  4. कुल SGST

अभ्यास 2: नेट पेएबल गणना करो

फ़रवरी में उपलब्ध ITC (चैप्टर 19 अभ्यास 1 से):

  • IGST: Rs 14,000
  • CGST: Rs 9,000 + Rs 1,100 (जनवरी से कैरी फ़ॉरवर्ड) = Rs 10,100
  • SGST: Rs 9,000

जनवरी से कैरी फ़ॉरवर्ड: CGST Rs 1,100।

अभ्यास 1 के आउटपुट टैक्स से, गणना करो:

  1. हर टैक्स टाइप के लिए ITC सेट-ऑफ़
  2. हर टैक्स टाइप के लिए कैश पेएबल
  3. मार्च में कोई कैरी-फ़ॉरवर्ड?

अभ्यास 3: टाइमलाइन

बिष्ट जी का फ़ाइनेंशियल ईयर अप्रैल 2025 से मार्च 2026 है। साल के हर महीने की GSTR-3B ड्यू डेट्स लिस्ट करो (मंथली फ़ाइलिंग मान लो, 20 तारीख़ को ड्यू)। साल में कितनी GSTR-3B रिटर्न्स फ़ाइल होती हैं?

अभ्यास 4: व्हाट इफ़?

बिष्ट जी की फ़रवरी GSTR-3B में SGST पेएबल (कैश) Rs 4,000 है। लेकिन उनके बैंक अकाउंट में पैसे नहीं हैं। ड्यू डेट 20 मार्च है। वो 5 अप्रैल को पे कर पाते हैं।

  1. कितने दिन लेट?
  2. लेट फ़ी गणना करो।
  3. इंटरेस्ट गणना करो (Rs 4,000 पर 18% प्रति वर्ष)।
  4. कुल एक्स्ट्रा लागत कितनी?

फ़न फ़ैक्ट

एक हौसला बढ़ाने वाली बात: GST के पहले साल (2017-18) में, डेडलाइन वाले दिनों में GST पोर्टल कई बार क्रैश हो गया क्योंकि लाखों लोगों ने आख़िरी मिनट में फ़ाइल करने की कोशिश की। आज, सिस्टम हर महीने 1.4 करोड़ से ज़्यादा GSTR-3B फ़ाइलिंग्स स्मूदली सँभालता है। टेक्नोलॉजी काफ़ी इंप्रूव हो गई है। लेकिन लास्ट-मिनट फ़ाइलिंग की आदत नहीं बदली! शर्मा सर का सुनहरा नियम: "15 तारीख़ तक फ़ाइल करो। 20 तारीख़ को चैन से सोओ।" अगर मीरा ये डिसिप्लिन पालन करती है, तो वो भारत के 80% अकाउंटेंट्स से आगे रहेगी।

GSTR-9, E-Way बिल्स और कंप्लायंस

मार्च का आख़िरी हफ़्ता था। फ़ाइनेंशियल ईयर ख़त्म हो रहा था। शर्मा सर ने मीरा और नेगी भैया को योजना मीटिंग के लिए बुलाया। "बिष्ट जी का साल बंद करने से पहले हमें तीन काम करने हैं। एक — एनुअल रिटर्न, GSTR-9 की तैयारी। दो — बिष्ट जी की अगले हफ़्ते दिल्ली जाने वाली बड़ी मसालों की शिपमेंट के लिए e-Way बिल चाहिए। तीन — मैं पूरे साल का एक फ़ुल कंप्लायंस चेक करना चाहता हूँ ताकि पक्का हो कि कुछ छूटा तो नहीं।" उन्होंने मीरा की तरफ़ देखा। "आज के अंत तक, तुम तीनों काम संभालना सीख जाओगी।"


पार्ट 1: GSTR-9 — एनुअल रिटर्न

GSTR-9 क्या है?

GSTR-9, GST की एनुअल रिटर्न है। जहाँ GSTR-1 और GSTR-3B हर महीने (या तिमाही) फ़ाइल होती हैं, GSTR-9 साल में एक बार फ़ाइल होती है। ये पूरे फ़ाइनेंशियल ईयर की तुम्हारी सभी मंथली रिटर्न्स की समरी है।

इसे ऐसे सोचो जैसे एक एनुअल एग्ज़ाम पेपर जो सभी मंथली टेस्ट्स का सिलेबस कवर करता है। सरकार GSTR-9 से तुम्हारे बिज़नेस की साल भर की पूरी तस्वीर देखती है।

GSTR-9 कौन फ़ाइल करता है?

टैक्सपेयर का प्रकारएनुअल रिटर्न
नियमित GST टैक्सपेयरGSTR-9
कंपोज़ीशन स्कीम टैक्सपेयरGSTR-9A
ई-कॉमर्स ऑपरेटरGSTR-9B

बिष्ट जी नियमित टैक्सपेयर हैं, तो वो GSTR-9 फ़ाइल करते हैं।

नोट: जिन टैक्सपेयर्स का सालाना टर्नओवर Rs 2 करोड़ तक है, उनके लिए GSTR-9 फ़ाइल करने का विकल्प है (हाल की छूटों के अनुसार ये अनिवार्य नहीं है)। हालाँकि, फ़ाइल करना अच्छी अभ्यास है। शर्मा सर हमेशा फ़ाइल करने की सलाह देते हैं, भले ही विकल्पल हो।

ड्यू डेट

GSTR-9 की ड्यू डेट फ़ाइनेंशियल ईयर के बाद वाले साल की 31 दिसंबर है।

फ़ाइनेंशियल ईयरGSTR-9 ड्यू डेट
अप्रैल 2025 — मार्च 202631 दिसंबर 2026
अप्रैल 2024 — मार्च 202531 दिसंबर 2025

तो बिष्ट जी के पास FY 2025-26 की एनुअल रिटर्न फ़ाइल करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय है। लेकिन शर्मा सर तैयारी जल्दी शुरू कर देते हैं — अप्रैल या मई में ही — क्योंकि डेटा ताज़ा होता है और ग़लतियाँ पकड़ना आसान होता है।

GSTR-9 में क्या होता है?

GSTR-9 के छह हिस्से हैं:

पार्टक्या कवर होता है
पार्ट Iबुनियादी डीटेल्स — GSTIN, लीगल नेम, फ़ाइनेंशियल ईयर
पार्ट IIआउटवर्ड सप्लाइज़ (बिक्री) की डीटेल्स — GSTR-1 डेटा से
पार्ट IIIइनवर्ड सप्लाइज़ (ख़रीदारी) की डीटेल्स — GSTR-3B डेटा से
पार्ट IVचुकाए गए टैक्स की डीटेल्स — ITC और कैश से दिया IGST, CGST, SGST
पार्ट Vपिछले साल के ट्रांज़ैक्शंस जो इस साल रिपोर्ट हुए (अमेंडमेंट्स)
पार्ट VIअन्य जानकारी — HSN-वाइज़ आउटवर्ड और इनवर्ड सप्लाइज़ की समरी, लेट फ़ीस, रिफ़ंड्स, माँग्स

सबसे बड़ा काम: रीकंसिलिएशन

GSTR-9 की तैयारी का सबसे ज़रूरी हिस्सा रीकंसिलिएशन है। तुम्हें ये पक्का करना होगा कि:

  1. GSTR-1 कुल्स, GSTR-9 की बिक्री फ़िगर्स से मैच करें — हर इनवॉइस जो मंथली GSTR-1 में रिपोर्ट की, वो एनुअल कुल में ऐड होनी चाहिए।

  2. GSTR-3B कुल्स, GSTR-9 की टैक्स फ़िगर्स से मैच करें — 12 GSTR-3B रिटर्न्स में चुकाया कुल टैक्स एनुअल फ़िगर से मैच होना चाहिए।

  3. बुक्स ऑफ़ अकाउंट्स, GSTR-9 से मैच करें — तुम्हारे अकाउंटिंग रिकॉर्ड (ERPLite में) GST रिटर्न्स में रिपोर्ट किए गए से मैच होने चाहिए।

अगर मिसमैच है, तो वजह ढूँढना और ठीक करना होगा।

आम मिसमैचेस

मिसमैचक्यों होता हैकैसे ठीक करें
GSTR-1 बिक्री > बुक्सGSTR-1 में एक्स्ट्रा इनवॉइस (डुप्लिकेट, या अमेंडमेंट नहीं हुआ)GSTR-1 में अमेंडमेंट फ़ाइल करो
GSTR-1 बिक्री < बुक्सGSTR-1 में इनवॉइस मिसिंगकरंट ईयर GSTR-1 में इंक्लूड करो (टाइम लिमिट में हो तो)
GSTR-3B टैक्स > GSTR-1 टैक्सरिपोर्ट की गई बिक्री से ज़्यादा टैक्स चुकायारिवर्स चार्ज, एडवांसेस, या त्रुटियाँ चेक करो
GSTR-3B टैक्स < GSTR-1 टैक्सपे किए टैक्स से ज़्यादा बिक्री रिपोर्ट कीये गंभीर है — टैक्स बक़ाया है। इंटरेस्ट सहित पे करो।
GSTR-3B में ITC > GSTR-2B में ITCआपूर्तिकर्ता ने रिपोर्ट किया उससे ज़्यादा क्रेडिट क्लेम कियाज़्यादा ITC रिवर्स करो, इंटरेस्ट सहित पे करो

बिष्ट जी की एनुअल रीकंसिलिएशन (FY 2025-26)

मीरा ने रीकंसिलिएशन वर्कशीट से शुरू किया:

सेल्स रीकंसिलिएशन:

महीनाGSTR-1 टैक्सेबल वैल्यूबुक्स (ERPLite)डिफ़रेंस
अप्रैल 2025Rs 6,20,000Rs 6,20,0000
मई 2025Rs 7,10,000Rs 7,10,0000
जून 2025Rs 5,80,000Rs 5,80,0000
जुलाई 2025Rs 6,50,000Rs 6,50,0000
अगस्त 2025Rs 7,40,000Rs 7,40,0000
सितंबर 2025Rs 6,90,000Rs 6,90,0000
अक्टूबर 2025Rs 8,10,000Rs 8,10,0000
नवंबर 2025Rs 8,50,000Rs 8,50,0000
दिसंबर 2025Rs 9,20,000Rs 9,20,0000
जनवरी 2026Rs 7,50,000Rs 7,50,0000
फ़रवरी 2026Rs 5,93,000Rs 5,93,0000
मार्च 2026Rs 6,87,000Rs 6,87,0000
कुलRs 86,00,000Rs 86,00,0000

सभी महीने मैच हुए। मीरा को राहत मिली। हर महीने GSTR-1 सही से फ़ाइल करने का डिसिप्लिन काम आया।

ITC रीकंसिलिएशन:

सोर्सकुल ITC क्लेम्ड (FY)
GSTR-3B (12 महीनों का कुल)Rs 3,45,600
GSTR-2B (12 महीनों का कुल)Rs 3,42,100
बुक्स (ERPLite परचेज़ रजिस्टर)Rs 3,46,800

थोड़ा डिफ़रेंस था। मीरा ने निवेशिगेट किया:

  • GSTR-3B और GSTR-2B में Rs 3,500 का डिफ़रेंस: ये इसलिए था क्योंकि एक आपूर्तिकर्ता ने GSTR-1 लेट फ़ाइल की थी, और ITC अगले महीने की GSTR-2B में दिखा। मीरा ने ये एडजस्ट किया।
  • बुक्स और GSTR-3B में Rs 1,200 का डिफ़रेंस: ये ब्लॉक्ड क्रेडिट (दफ़्तर मील्स) था जो बुक्स में था लेकिन GSTR-3B से सही से एक्सक्लूड किया गया था। कोई एक्शन नहीं चाहिए — सही था।

एडजस्टमेंट्स के बाद, सब रीकंसाइल हो गया।

GSTR-9 के लिए एनुअल रीकंसिलिएशन वर्कशीट


पार्ट 2: E-Way बिल्स — गुड्स को दूर भेजना

E-Way बिल क्या है?

E-Way बिल (इलेक्ट्रॉनिक वे बिल) एक डॉक्यूमेंट है जो तब ज़रूरी होता है जब Rs 50,000 से ज़्यादा वैल्यू के गुड्स एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसपोर्ट हो रहे हों।

इसे गुड्स का डिजिटल "ट्रैवल परमिट" समझो। GST से पहले, ट्रक राज्य सीमाओं पर फ़िज़िकल इंस्पेक्शन के लिए रोके जाते थे। E-Way बिल्स ने वो बदल दिया — अब डीटेल्स ऑनलाइन हैं, और दफ़्तरर्स सिंपल स्कैन से वेरिफ़ाई कर सकते हैं।

E-Way बिल कब ज़रूरी है?

सिचुएशनE-Way बिल ज़रूरी?
गुड्स की वैल्यू > Rs 50,000, ट्रांसपोर्ट हो रहे हैंहाँ
गुड्स की वैल्यू <= Rs 50,000नहीं (आम तौर पर, लेकिन कुछ राज्यों में कम लिमिट है)
इंटर-स्टेट ट्रांसपोर्ट किसी भी वैल्यू काहाँ (कुछ राज्य Rs 50,000 से कम पर भी माँगते हैं)
एक ही शहर में ट्रांसपोर्टनहीं (आम तौर पर, अगर डिस्टेंस < 10 km कुछ राज्यों में)

E-Way बिल कौन बनाता है?

कौनकब
आपूर्तिकर्ता (गुड्स भेजने वाला)ज़्यादातर केसेस में, आपूर्तिकर्ता बनाता है
बायर (गुड्स लेने वाला)अगर आपूर्तिकर्ता नहीं बनाता, बायर बना सकता है
ट्रांसपोर्टरअगर आपूर्तिकर्ता और बायर दोनों नहीं बनाते, ट्रांसपोर्टर बना सकता है

क्या जानकारी चाहिए?

E-Way बिल जनरेट करने के लिए ये चाहिए:

फ़ील्डविवरणउदाहरण
आपूर्तिकर्ता का GSTINकौन भेज रहा है05AADFB1234R1Z8 (Bisht Traders)
रिसिपिएंट का GSTINकौन ले रहा है07AABCD9876R1Z5 (Delhi Masala House)
इनवॉइस नंबरकौन सी इनवॉइसBT/0165
इनवॉइस डेटइनवॉइस कब जारी हुई25-Mar-2026
गुड्स की वैल्यूकुल इनवॉइस वैल्यूRs 2,85,000
HSN कोडउत्पाद क्लासिफ़िकेशन0910, 0904
ट्रांसपोर्ट मोडरोड, रेल, एयर, शिपरोड
व्हीकल नंबरकौन सा व्हीकलUK07AB1234
ट्रांसपोर्टर IDट्रांसपोर्टर का GSTIN या एनरोलमेंट ID05AABCT5678Q1Z3
डिस्टेंसअनुमानित दूरी km में310 km (हल्द्वानी से दिल्ली)

E-Way बिल की वैलिडिटी

E-Way बिल की वैलिडिटी डिस्टेंस पर निर्भर करती है:

डिस्टेंसवैलिडिटी
200 km तक1 दिन
हर अतिरिक्त 200 km1 अतिरिक्त दिन
ओवर-डाइमेंशनल कार्गो: 20 km तक1 दिन
हर अतिरिक्त 20 km1 अतिरिक्त दिन

बिष्ट जी की हल्द्वानी से दिल्ली (लगभग 310 km) शिपमेंट के लिए: वैलिडिटी = 2 दिन (पहले 200 km के लिए डे 1 + बाक़ी 110 km अगले 200 km ब्रैकेट में डे 2)।

अगर गुड्स समय पर नहीं पहुँच सकते (ट्रक ख़राबी, रोड ब्लॉक, पहाड़ों में ख़राब मौसम), तो e-Way बिल एक्सपायर होने से पहले एक्सटेंड किया जा सकता है।

E-Way बिल नंबर (EBN)

जब e-Way बिल जनरेट होता है, तो एक यूनीक 12-डिजिट E-Way बिल नंबर (EBN) मिलता है। ये नंबर रास्ते में कोई भी GST दफ़्तरर वेरिफ़ाई कर सकता है।


हैंड्स-ऑन: बिष्ट जी की Delhi शिपमेंट के लिए E-Way बिल बनाना

बिष्ट जी Delhi Masala House को मसालों की एक बड़ी शिपमेंट भेज रहे हैं। इनवॉइस वैल्यू Rs 2,85,000 है — Rs 50,000 थ्रेशोल्ड से काफ़ी ऊपर। E-Way बिल अनिवार्य है।

तरीक़ा 1: E-Way बिल पोर्टल पर जनरेट करो

चरण 1: बिष्ट जी के क्रेडेंशियल्स से ewaybillgst.gov.in पर लॉग इन करो।

चरण 2: Generate E-Way Bill पर क्लिक करो।

चरण 3: फ़ॉर्म भरो:

फ़ील्डएंट्री
ट्रांज़ैक्शन टाइपआउटवर्ड (हम गुड्स भेज रहे हैं)
सब-टाइपआपूर्ति
डॉक्यूमेंट टाइपटैक्स इनवॉइस
डॉक्यूमेंट नंबरBT/0165
डॉक्यूमेंट डेट25-Mar-2026
फ़्रॉम — GSTIN05AADFB1234R1Z8
फ़्रॉम — स्टेटUttarakhand
टू — GSTIN07AABCD9876R1Z5
टू — स्टेटDelhi
आइटम — HSN0910
आइटम — डिस्क्रिप्शनTurmeric Powder and mixed spices
आइटम — वैल्यूRs 2,85,000
आइटम — टैक्स रेटIGST 5%
आइटम — टैक्स अमाउंटRs 14,250
ट्रांसपोर्ट मोडरोड
व्हीकल नंबरUK07AB1234
ट्रांसपोर्टर नेमKumaon Road Carriers
ट्रांसपोर्टर ID05AABCT5678Q1Z3
डिस्टेंस310 km

चरण 4: सबमिट पर क्लिक करो।

सिस्टम e-Way बिल जनरेट करता है और देता है:

  • E-Way बिल नंबर (EBN): 3210 5678 9012
  • जनरेटेड ऑन: 25-Mar-2026, 10:30 AM
  • वैलिड अंटिल: 27-Mar-2026, 11:59 PM (2 दिन)

चरण 5: E-Way बिल प्रिंट करो या EBN ट्रांसपोर्टर को शेयर करो। ड्राइवर के पास कॉपी होनी चाहिए (प्रिंटेड या मोबाइल पर)।

तरीक़ा 2: ERPLite से जनरेट करो

ERPLite में इंटिग्रेटेड e-Way बिल जनरेशन फ़ीचर है।

चरण 1: ERPLite में सेल्स इनवॉइस BT/0165 खोलो।

चरण 2: E-Way Bill बटन पर क्लिक करो (या Actions > Generate E-Way Bill पर जाओ)।

चरण 3: ERPLite इनवॉइस से ज़्यादातर फ़ील्ड्स प्री-फ़िल कर देता है:

  • आपूर्तिकर्ता डीटेल्स (कंपनी प्रोफ़ाइल से)
  • बायर डीटेल्स (पार्टी मास्टर से)
  • आइटम डीटेल्स, HSN कोड्स, टैक्स अमाउंट्स (इनवॉइस से)

बस ये ऐड करना है:

  • ट्रांसपोर्ट मोड: रोड
  • व्हीकल नंबर: UK07AB1234
  • ट्रांसपोर्टर डीटेल्स: Kumaon Road Carriers
  • डिस्टेंस: 310 km

चरण 4: जनरेट पर क्लिक करो। ERPLite API के ज़रिए e-Way बिल पोर्टल से कनेक्ट होकर बिल जनरेट करता है।

चरण 5: EBN, ERPLite में इनवॉइस के ख़िलाफ़ सेव हो जाता है। कभी भी प्रिंट कर सकते हो।

"ये कितना आसान है," मीरा बोली। "सब कुछ इनवॉइस से अपने-आप आ जाता है।"

नेगी भैया ने सिर हिलाया। "यही तो ERP का पूरा पॉइंट है। डेटा एक बार एंटर करो, हर जगह इस्तेमाल करो।"

ERPLite से e-Way बिल जनरेट करना


E-Way बिल के नियम याद रखो

नियमडीटेल्स
एडिट नहीं हो सकताएक बार जनरेट होने के बाद, e-Way बिल एडिट नहीं हो सकता। सिर्फ़ कैंसल करके नया बना सकते हो।
कैंसलेशन विंडोजनरेशन के 24 घंटे के अंदर कैंसल करना होगा। उसके बाद कैंसल नहीं हो सकता।
पार्ट B अपडेटअगर व्हीकल नंबर बदलता है (दूसरा ट्रक), तो पूरा बिल कैंसल किए बिना पार्ट B (ट्रांसपोर्ट डीटेल्स) अपडेट कर सकते हो।
कंसोलिडेटेड EWBअगर ट्रांसपोर्टर एक व्हीकल में कई कंसाइनीज़ के गुड्स ले जा रहा है, तो कंसोलिडेटेड E-Way बिल जनरेट कर सकता है।
वेरिफ़िकेशनGST दफ़्तरर्स व्हीकल्स रोककर चेक कर सकते हैं। वो पोर्टल पर EBN वेरिफ़ाई करते हैं। अगर वैलिड e-Way बिल नहीं है — पेनल्टी।
मिसिंग EWB की पेनल्टीRs 10,000 या चोरी किए जा रहे टैक्स में जो ज़्यादा हो। गुड्स और व्हीकल भी डिटेन हो सकते हैं।

पार्ट 3: आम कंप्लायंस ग़लतियाँ और पेनल्टीज़

शर्मा सर ने सालों की अभ्यास से बनाई हुई एक लिस्ट निकाली। "ये वो ग़लतियाँ हैं जो मैं सबसे ज़्यादा देखता हूँ। दूसरों की ग़लतियों से सीखो, मीरा।"

ग़लती 1: रिटर्न्स लेट फ़ाइल करना

रिटर्नलेट फ़ीइंटरेस्ट
GSTR-1Rs 50/दिन (मैक्स Rs 10,000)एप्लिकेबल नहीं (GSTR-1 में टैक्स पेमेंट नहीं)
GSTR-3BRs 50/दिन (मैक्स Rs 10,000)बक़ाया टैक्स पर 18% p.a.
GSTR-9Rs 200/दिन (Rs 100 CGST + Rs 100 SGST), मैक्स टर्नओवर का 0.50%सीधे एप्लिकेबल नहीं

बिष्ट जी (Rs 86 लाख टर्नओवर) के लिए: मैक्सिमम GSTR-9 लेट फ़ी = 0.50% x Rs 86,00,000 = Rs 43,000। ये बड़ी रक़म है।

ग़लती 2: ग़लत HSN कोड

ग़लत HSN कोड इस्तेमाल करने से:

  • ग़लत टैक्स रेट लग सकती है (ज़्यादा या कम)
  • रिटर्न्स में मिसमैच
  • GST डिपार्टमेंट से नोटिस
  • अगर ग़लत HSN की वजह से कम टैक्स दिया: डिफ़रेंस प्लस 18% इंटरेस्ट देना होगा

उदाहरण: अगर बिष्ट जी "मसाला पेस्ट" (जो अलग HSN में 18% GST पर आता है) को "स्पाइस पाउडर" (5% GST) वर्गीकृत करते हैं, तो ज़रूरी से 13% कम टैक्स दे रहे हैं। Rs 10 लाख की ऐसी बिक्री पर, वो Rs 1,30,000 अनपेड टैक्स है — प्लस इंटरेस्ट और मुमकिन पेनल्टी।

ग़लती 3: GSTR-1 और GSTR-3B में मिसमैच

तुम्हारी GSTR-1 (इनवॉइस-वाइज़ सेल्स डीटेल्स) और GSTR-3B (समरी टैक्स पेमेंट) एक जैसे कुल्स दिखाने चाहिए। अगर नहीं दिखाते:

अगर GSTR-1 > GSTR-3Bअगर GSTR-3B > GSTR-1
रिपोर्ट की गई बिक्री से कम टैक्स चुकायारिपोर्ट की गई बिक्री से ज़्यादा टैक्स चुकाया
सरकार अनपेड टैक्स के लिए नोटिस भेजती हैमुमकिन ओवर-पेमेंट (रिफ़ंड क्लेम कर सकते हो, लेकिन सिरदर्द है)
डिफ़रेंस इंटरेस्ट सहित चुकाना पड़ेगाठीक करने के लिए अमेंडमेंट्स फ़ाइल करनी होंगी

ग़लती 4: ITC रीकंसाइल नहीं करना

अगर तुम ऐसा ITC क्लेम करते हो जो GSTR-2B में सपोर्ट नहीं है (क्योंकि आपूर्तिकर्ता ने रिटर्न फ़ाइल नहीं किया), तो डिपार्टमेंट तुमसे एक्सेस ITC रिवर्स करने और 18% इंटरेस्ट पे करने को कहेगा।

बचाव: GSTR-3B फ़ाइल करने से पहले हमेशा ITC को GSTR-2B से रीकंसाइल करो। ये प्रक्रिया हम चैप्टर 19 और 21 में कवर कर चुके हैं।

ग़लती 5: E-Way बिल्स मिसिंग

जब भी Rs 50,000 से ज़्यादा के गुड्स मूव होते हैं, e-Way बिल जनरेट करना ज़रूरी है। अगर बिष्ट जी का ट्रक वैलिड e-Way बिल के बिना पकड़ा जाता है:

  • पेनल्टी: Rs 10,000 या टैक्स अमाउंट, जो भी ज़्यादा हो
  • डिटेंशन: गुड्स और व्हीकल डिटेन हो सकते हैं
  • रिलीज़: पेनल्टी और टैक्स (अगर एप्लिकेबल हो) चुकाने के बाद ही

उत्तराखंड के पहाड़ों में ट्रांसपोर्ट अनअनुमान लगाने योग्य हो सकता है। बिष्ट जी का एक बार एक ट्रक काठगोदाम के पास लैंडस्लाइड की वजह से 3 दिन फँस गया था। E-Way बिल एक्सपायर हो गई। उन्हें एक्सपायर होने से पहले एक्सटेंड करनी थी — जो वो लगभग भूल गए थे। नेगी भैया ने ठीक वक़्त पर ऑनलाइन एक्सटेंड करके बचा लिया।

ग़लती 6: निल रिटर्न्स फ़ाइल नहीं करना

अगर किसी महीने कोई ट्रांज़ैक्शन नहीं हुआ, तो भी निल रिटर्न्स फ़ाइल करनी पड़ती हैं। फ़ाइल नहीं करना = हर दिन लेट फ़ी बढ़ती जाती है।

ग़लती 7: ग़लत टैक्स टाइप चार्ज करना (CGST+SGST vs IGST)

अगर इनवॉइस पर प्लेस ऑफ़ आपूर्ति ग़लत है, तो ग़लत टैक्स टाइप चार्ज हो जाता है। जैसे:

  • इंटर-स्टेट सेल पर CGST+SGST चार्ज करना (IGST होना चाहिए)
  • इंट्रा-स्टेट सेल पर IGST चार्ज करना (CGST+SGST होना चाहिए)

इससे सेलर और बायर दोनों को समस्याएँ होती हैं। बायर को ITC नहीं मिल सकता, और सेलर को नोटिसेस आ सकते हैं।

पेनल्टीज़ का सारांश

उल्लंघनपेनल्टी
GSTR-1 लेटRs 50/दिन, मैक्स Rs 10,000
GSTR-3B लेटRs 50/दिन, मैक्स Rs 10,000 + इंटरेस्ट 18% p.a.
GSTR-9 लेटRs 200/दिन, मैक्स टर्नओवर का 0.50%
टैक्स लेट पेमेंटइंटरेस्ट @ 18% p.a.
ज़्यादा ITC क्लेमइंटरेस्ट @ 24% p.a. + मुमकिन पेनल्टी
मिसिंग e-Way बिलRs 10,000 या टैक्स अमाउंट (जो ज़्यादा हो) + डिटेंशन
ग़लत HSN / ग़लत टैक्सटैक्स का डिफ़रेंस + इंटरेस्ट 18% p.a. + मुमकिन पेनल्टी
फ़्रॉड / जानबूझकर चोरीटैक्स अमाउंट का 100% पेनल्टी, या Rs 10,000 (जो ज़्यादा हो) + प्रॉसिक्यूशन
ज़रूरी होने पर भी रजिस्टर नहीं करना100% टैक्स बक़ाया, मिनिमम Rs 10,000

साल भर की कंप्लायंस चेकलिस्ट

शर्मा सर ने मीरा को एक चेकलिस्ट दी जो हर अकाउंटेंट को पालन करनी चाहिए:

मंथली चेकलिस्ट

कामकबडन?
सभी सेल्स इनवॉइसेस रीकंसाइल करोअगले महीने की 1-5 तारीख़
सभी परचेज़ इनवॉइसेस रीकंसाइल करोअगले महीने की 1-5 तारीख़
सभी इनवॉइसेस पर HSN कोड्स वेरिफ़ाई करोGSTR-1 फ़ाइलिंग से पहले
GSTR-1 तैयार करो और फ़ाइल करो11 तारीख़ तक
GSTR-2B डाउनलोड करो और ITC रीकंसाइल करो14 तारीख़ के बाद
GSTR-3B तैयार करो और फ़ाइल करो20 तारीख़ तक
टैक्स पेमेंट करो (चालान)20 तारीख़ से पहले
बड़ी शिपमेंट्स के लिए e-Way बिल्स जनरेट करोगुड्स मूव होने से पहले
कोई पेंडिंग अमेंडमेंट्स फ़ाइल करोकरंट मंथ की GSTR-1 में
सभी फ़ाइल्ड रिटर्न्स और पेमेंट रिसीट्स सेव करोफ़ाइलिंग के बाद

क्वार्टरली चेकलिस्ट (QRMP टैक्सपेयर्स के लिए)

कामकब
IFF फ़ाइल करो (B2B इनवॉइसेस)हर महीने की 13 तारीख़ तक
क्वार्टरली GSTR-1 फ़ाइल करोतिमाही ख़त्म होने के बाद 13 तारीख़ तक
GSTR-3B मंथली फ़ाइल करो22/24 तारीख़ तक

एनुअल चेकलिस्ट

कामकब
GSTR-1 कुल्स को बुक्स से रीकंसाइल करोअप्रैल-मई
GSTR-3B कुल्स को बुक्स से रीकंसाइल करोअप्रैल-मई
क्लेम्ड ITC vs GSTR-2B रीकंसाइल करोअप्रैल-मई
GSTR-9 तैयार करोजून-सितंबर
GSTR-9 CA से समीक्षा करवाओअक्टूबर-नवंबर
GSTR-9 फ़ाइल करो31 दिसंबर तक
GSTR-9C फ़ाइल करो (अगर एप्लिकेबल — टर्नओवर > Rs 5 करोड़)31 दिसंबर तक

GSTR-9C — रीकंसिलिएशन स्टेटमेंट

जिन टैक्सपेयर्स का टर्नओवर Rs 5 करोड़ से ऊपर है, उनके लिए एक एडिशनल रिक्वायरमेंट है: GSTR-9C, जो एक सेल्फ़-सर्टिफ़ाइड रीकंसिलिएशन स्टेटमेंट है — इनके बीच:

  • एनुअल रिटर्न (GSTR-9)
  • ऑडिटेड फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स

बिष्ट जी का टर्नओवर Rs 5 करोड़ से कम है, तो उनके लिए GSTR-9C ज़रूरी नहीं। लेकिन शर्मा सर ने मीरा से कहा कि बड़े क्लाइंट्स के लिए इसे ध्यान में रखो।


हैंड्स-ऑन: मीरा बिष्ट जी को ईयर-एंड एक्टिविटीज़ में मदद करती है

एक्टिविटी 1: एनुअल सेल्स रिपोर्ट जनरेट करो

ERPLite में, Reports > GST Reports > Annual Summary पर जाओ।

फ़ाइनेंशियल ईयर चुनो: 2025-26।

ERPLite एक कंसोलिडेटेड व्यू जनरेट करता है:

तिमाहीटैक्सेबल सेल्सIGSTCGSTSGSTकुल टैक्स
Q1 (अप्रैल-जून)Rs 19,10,000Rs 28,500Rs 30,750Rs 30,750Rs 90,000
Q2 (जुलाई-सितंबर)Rs 20,80,000Rs 32,000Rs 34,000Rs 34,000Rs 1,00,000
Q3 (अक्टूबर-दिसंबर)Rs 25,80,000Rs 41,000Rs 43,500Rs 43,500Rs 1,28,000
Q4 (जनवरी-मार्च)Rs 20,30,000Rs 30,500Rs 33,250Rs 33,250Rs 97,000
पूरा सालRs 86,00,000Rs 1,32,000Rs 1,41,500Rs 1,41,500Rs 4,15,000

एक्टिविटी 2: फ़ाइल्ड रिटर्न्स से रीकंसाइल करो

मीरा ने ERPLite एनुअल कुल को पोर्टल पर फ़ाइल की गई सभी 12 GSTR-1 रिटर्न्स के कुल से कंपेयर किया:

सोर्सकुल टैक्सेबल सेल्सकुल टैक्स
ERPLite (बुक्स)Rs 86,00,000Rs 4,15,000
GSTR-1 रिटर्न्स का कुलRs 86,00,000Rs 4,15,000
डिफ़रेंसRs 0Rs 0

बिल्कुल सही मैच! वेरिफ़ाइड डेटा के साथ लगातार मंथ-बाय-मंथ फ़ाइलिंग ईयर-एंड पर काम आती है।

एक्टिविटी 3: GSTR-9 डेटा तैयार करो

मीरा ने एनुअल रिटर्न डेटा जनरेट करने के लिए ERPLite का GSTR-9 रिपोर्ट इस्तेमाल किया। ERPLite ज़्यादातर GSTR-9 टेबल्स अपने-आप भर देता है:

  • पार्ट II (सेल्स): सेल्स इनवॉइस रजिस्टर से
  • पार्ट III (परचेज़ेस/ITC): परचेज़ इनवॉइस रजिस्टर से
  • पार्ट IV (टैक्स पेड): पेमेंट रिकॉर्ड से
  • पार्ट VI (HSN समरी): आइटम मास्टर और इनवॉइस डेटा से

फिर उसने डेटा डाउनलोड किया और बिष्ट जी के समीक्षा और फ़ाइलिंग के लिए GST पोर्टल पर अपलोड किया।

एक्टिविटी 4: Delhi E-Way बिल जनरेट करो

जैसा ऊपर हैंड्स-ऑन सेक्शन में बताया, मीरा ने बड़ी Delhi शिपमेंट के लिए e-Way बिल सीधे ERPLite से जनरेट किया।

शर्मा सर ने सब कुछ समीक्षा किया और बोले, "ये एक्सीलेंट काम है, मीरा। बिष्ट जी की कंप्लायंस क्लीन है — कोई मिसमैच नहीं, कोई मिसिंग रिटर्न नहीं, कोई पेनल्टी नहीं। एक अच्छा अकाउंटेंट यही डिलीवर करता है।"

ERPLite में ईयर-एंड कंप्लायंस डैशबोर्ड


क्विक रीकैप

  • GSTR-9 एनुअल रिटर्न है। साल में एक बार 31 दिसंबर तक फ़ाइल होती है। सभी मंथली रिटर्न्स समराइज़ करती है।
  • GSTR-9 की की रीकंसिलिएशन है — GSTR-1, GSTR-3B, GSTR-2B, और बुक्स ऑफ़ अकाउंट्स मैच करो।
  • GSTR-9 की लेट फ़ी: Rs 200/दिन, मैक्स टर्नओवर का 0.50%
  • E-Way बिल तब ज़रूरी है जब Rs 50,000 से ज़्यादा के गुड्स ट्रांसपोर्ट हो रहे हों।
  • ewaybillgst.gov.in पर या सीधे ERPLite से जनरेट करो।
  • वैलिडिटी डिस्टेंस पर निर्भर: हर 200 km पर 1 दिन
  • मिसिंग e-Way बिल पेनल्टी: Rs 10,000 या टैक्स अमाउंट (जो ज़्यादा हो), प्लस गुड्स और व्हीकल की डिटेंशन।
  • आम कंप्लायंस ग़लतियाँ: लेट फ़ाइलिंग, ग़लत HSN, GSTR-1/3B मिसमैच, अनरीकंसाइल्ड ITC, मिसिंग e-Way बिल्स, निल रिटर्न्स फ़ाइल न करना।
  • साल भर कंप्लायंट रहने के लिए मंथली, क्वार्टरली, और एनुअल चेकलिस्ट्स इस्तेमाल करो।

अभ्यास अभ्यास

अभ्यास 1: GSTR-9 रीकंसिलिएशन

एक हाइपोथेटिकल बिज़नेस की सिंप्लिफ़ाइड एनुअल समरी यहाँ है:

महीनाGSTR-1 सेल्सGSTR-3B टैक्स पेडITC क्लेम्ड (GSTR-3B)GSTR-2B में ITC
अप्रैलRs 5,00,000Rs 8,000Rs 17,000Rs 17,000
मईRs 6,00,000Rs 12,000Rs 18,000Rs 16,500
जूनRs 4,50,000Rs 5,500Rs 17,000Rs 17,000

सवाल:

  1. तिमाही की कुल GSTR-1 सेल्स कितनी हैं?
  2. तिमाही में GSTR-3B से कुल कितना टैक्स पे हुआ?
  3. क्या कोई ITC मिसमैच है? किस महीने में? डिफ़रेंस कितना है?
  4. अकाउंटेंट को मिसमैच के बारे में क्या करना चाहिए?

अभ्यास 2: E-Way बिल

बिष्ट जी नीचे दी गई शिपमेंट्स भेज रहे हैं। हर एक के लिए बताओ कि e-Way बिल ज़रूरी है या नहीं:

  1. Rs 80,000 की हल्दी हल्द्वानी से देहरादून (200 km)
  2. Rs 30,000 की मिर्च हल्द्वानी से नैनीताल (65 km)
  3. Rs 1,50,000 के मिक्स्ड मसाले हल्द्वानी से लखनऊ (350 km)
  4. Rs 60,000 का जीरा बिष्ट जी के गोडाउन से उनकी दुकान (एक ही शहर, 3 km)

जिन शिपमेंट्स के लिए e-Way बिल ज़रूरी है, उनकी वैलिडिटी पीरियड गणना करो।

अभ्यास 3: पेनल्टी गणना

हर सिचुएशन के लिए कुल पेनल्टी/लागत गणना करो:

  1. बिष्ट जी FY 2025-26 की GSTR-9, 15 फ़रवरी 2027 को फ़ाइल करते हैं (46 दिन लेट)। उनका टर्नओवर Rs 86 लाख है।
  2. Rs 1,20,000 के मसालों का एक ट्रक e-Way बिल के बिना पकड़ा जाता है।
  3. बिष्ट जी अगस्त 2025 की GSTR-3B फ़ाइल करना भूल गए (टैक्स लायबिलिटी थी)। वो 15 अक्टूबर 2025 को फ़ाइल करते हैं। कैश टैक्स पेएबल Rs 8,000 था।

अभ्यास 4: कंप्लायंस चेकलिस्ट

आज महीने की 8 तारीख़ है। अब तक पूरे हो जाने चाहिए सभी GST टास्क्स लिस्ट करो और अगले 15 दिनों में आने वाले सभी टास्क्स लिस्ट करो। इस चैप्टर की मंथली चेकलिस्ट इस्तेमाल करो।

अभ्यास 5: फ़ुल-ईयर मॉक अभ्यास

तुम एक छोटे ट्रेडर (बिष्ट जी जैसे) के अकाउंटेंट हो। फ़ाइनेंशियल ईयर अभी ख़त्म हुआ है। साल भर में फ़ाइल की गई हर GST रिटर्न और अभी फ़ाइल होने वाली हर रिटर्न की लिस्ट बनाओ। इसमें शामिल करो:

  • रिटर्न टाइप
  • पीरियड
  • ड्यू डेट
  • स्टेटस (फ़ाइल्ड / पेंडिंग)

(मंथली GSTR-1 और GSTR-3B फ़ाइलिंग मान लो।)


फ़न फ़ैक्ट

जब 1 जुलाई 2017 को GST लॉन्च हुआ, तो पहला e-Way बिल सिस्टम कुछ ही दिनों में क्रैश हो गया — बहुत ज़्यादा बिल्स जनरेट हो रहे थे। फ़रवरी 2018 में बेहतर इंफ़्रास्ट्रक्चर के साथ रीलॉन्च किया गया। आज, भारत हर महीने 3 करोड़ से ज़्यादा e-Way बिल्स जनरेट करता है — यानी हर दिन लगभग 10 लाख बिल्स। E-Way बिल सिस्टम ने चेकपॉइंट्स पर ट्रकों के इंतज़ार का एवरेज टाइम घंटों से मिनटों में कम कर दिया है। उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए, जहाँ पहाड़ की संकरी सड़कों पर किसी भी चेकपॉइंट पर देरी का मतलब लंबा जाम है, ये बहुत बड़ा सुधार रहा है। अगली बार जब तुम कोई मसालों का ट्रक हल्द्वानी से मैदानी इलाक़ों की तरफ़ जाता देखो, तो जान लो कि कहीं एक कंप्यूटर में, एक e-Way बिल उसकी यात्रा ट्रैक कर रही है — और कहीं, मीरा जैसी एक अकाउंटेंट ने ये पक्का किया है कि वो समय पर जनरेट हुई है।

TDS — टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स (स्रोत पर कर कटौती)

हल्द्वानी में बारिश वाली एक गुरुवार की सुबह है। मीरा अपने कंप्यूटर पर परचेज़ रजिस्टर चेक कर रही है, तभी बिष्ट जी छाता झाड़ते हुए अंदर आते हैं। "शर्मा सर, मुझे अपने ट्रांसपोर्टर — रावत ट्रांसपोर्ट — को पिछले महीने की डिलीवरीज़ के Rs 75,000 देने हैं। पेमेंट तैयार कर दो?" शर्मा सर अखबार से ऊपर देखते हैं। "बिल्कुल। लेकिन बिष्ट जी, पेमेंट करने से पहले TDS काटना पड़ेगा, ये तो पता है ना?" बिष्ट जी आह भरते हैं। "हाँ, हाँ, वो TDS का सिरदर्द फिर से। मीरा बेटी, तुम्हें TDS के बारे में पता है?" मीरा ना में सिर हिलाती है। शर्मा सर मुस्कुराते हैं। "बिल्कुल सही वक्त है। चलो सीखते हैं।"

बिष्ट जी बारिश में शर्मा सर के दफ़्तर में ट्रांसपोर्टर का बिल लेकर आ रहे हैं


TDS क्या है?

शर्मा सर अपनी चाय रखते हैं और मार्कर उठाते हैं।

"मीरा, एक बात बताओ। सरकार किसी व्यक्ति से आमदनी टैक्स कब कलेक्ट करती है?"

मीरा सोचती है। "साल के अंत में? जब वो रिटर्न फ़ाइल करते हैं?"

"सही — यही सामान्य तरीका है। लेकिन सोचो। अगर सरकार पूरा साल इंतज़ार करे, तो क्या होगा? कुछ लोग सारा पैसा खर्च कर देंगे। कुछ छुपा लेंगे। कुछ बस भर ही नहीं पाएँगे। सरकार को लाखों लोगों के पीछे भागना पड़ेगा।"

वो व्हाइटबोर्ड पर एक सिंपल तस्वीर बनाते हैं:

"तो सरकार ने एक स्मार्ट तरीका निकाला। साल के अंत तक इंतज़ार करने की बजाय, उन्होंने कहा — पेमेंट करते समय ही टैक्स का एक छोटा हिस्सा काट लो।"

"एक नदी की कल्पना करो। सरकार सारा पानी समुद्र तक पहुँचने का इंतज़ार नहीं करती। वो अपस्ट्रीम में एक छोटा बाँध बनाकर रास्ते में ही कुछ पानी इकट्ठा कर लेती है। यही TDS है।"

TDS = टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स (स्रोत पर कर कटौती)। जब तुम किसी को पेमेंट करते हो, तो एक छोटा परसेंटेज टैक्स के रूप में काट (डिडक्ट) करके सीधे सरकार को भेज देते हो। पेमेंट पाने वाले को बाकी रकम मिलती है।

"तो टैक्स सोर्स पर — यानी जहाँ पैसा दिया जा रहा है, वहीं कलेक्ट हो जाता है। इसीलिए इसे टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स कहते हैं।"


एक रियल-लाइफ़ उदाहरण

शर्मा सर और आसान करके समझाते हैं।

"बिष्ट जी को रावत ट्रांसपोर्ट को डिलीवरी चार्जेज़ के Rs 75,000 देने हैं। TDS नियम के अनुसार, बिष्ट जी को पेमेंट करने से पहले एक छोटा परसेंटेज — मान लो 2% — टैक्स के रूप में काटना होगा।"

चलो नंबर्स देखते हैं:

मदरकम (Rs)
रावत ट्रांसपोर्ट का कुल बिल75,000
TDS कटौती 2% पर1,500
रावत ट्रांसपोर्ट को वास्तव में दी जाने वाली रकम73,500

"बिष्ट जी ट्रांसपोर्टर को Rs 73,500 देते हैं। बाकी Rs 1,500 सरकार को टैक्स के रूप में जाता है।"

"लेकिन क्या ये फ़ेयर है?" मीरा पूछती है। "ट्रांसपोर्टर ने Rs 75,000 कमाए लेकिन उसे सिर्फ Rs 73,500 मिले।"

"बहुत अच्छा सवाल!" शर्मा सर कहते हैं। "ट्रांसपोर्टर का पैसा नहीं कट रहा। जब रावत ट्रांसपोर्ट साल के अंत में अपना आमदनी टैक्स रिटर्न फ़ाइल करेगा, तो वो दिखा सकता है कि Rs 1,500 पहले ही उसकी तरफ से जमा हो चुके हैं। ये उसके कुल टैक्स में एडजस्ट हो जाएगा। इसे टैक्स का एडवांस पेमेंट समझो।"

"तो TDS ऐसा है जैसे... किस्तों में टैक्स भरना?"

"बिल्कुल सही। साल के अंत में एक बड़ी रकम की बजाय, पूरे साल में छोटी-छोटी रकम कलेक्ट होती रहती है।"

एक डायग्राम जिसमें दिखाया गया है: बिष्ट जी 75,000 देते हैं -> 1,500 TDS सरकार को जाता है -> बाकी 73,500 रावत ट्रांसपोर्ट को जाता है -> साल के अंत में रावत ट्रांसपोर्ट 1,500 को कुल टैक्स में एडजस्ट करता है


डिडक्टर कौन है? डिडक्टी कौन है?

हर TDS ट्रांज़ैक्शन में दो पक्ष होते हैं:

भूमिकाकौन?क्या करता है?
डिडक्टर (काटने वाला)पेमेंट करने वाला व्यक्तिपेमेंट से TDS काटता है और सरकार के पास जमा करता है
डिडक्टी (जिसका काटा जाता है)पेमेंट पाने वाला व्यक्तिTDS कटने के बाद पेमेंट प्राप्त करता है; अपने टैक्स रिटर्न में TDS का क्रेडिट क्लेम करता है

हमारे उदाहरण में:

  • डिडक्टर = बिष्ट ट्रेडर्स (वो पेमेंट कर रहे हैं)
  • डिडक्टी = रावत ट्रांसपोर्ट (वो पेमेंट प्राप्त कर रहे हैं)

"मीरा, ये याद रखो," शर्मा सर कहते हैं। "डिडक्टर की बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। उसे:

  1. सही TDS अमाउंट काटना होगा
  2. समय पर सरकार के पास जमा करना होगा
  3. TDS रिटर्न फ़ाइल करना होगा (एक रिपोर्ट जो सरकार को बताती है कि कितना TDS किससे काटा)
  4. डिडक्टी को TDS सर्टिफ़िकेट देना होगा"

"अगर डिडक्टर TDS काटना भूल जाए, या काटकर जमा न करे, तो पेनल्टी और इंटरेस्ट लगता है।"


TAN — टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर

"किसी बिज़नेस को TDS काटने से पहले आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट से एक स्पेशल नंबर लेना होता है," शर्मा सर समझाते हैं। "इसे TAN कहते हैं।"

TAN = टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन अकाउंट नंबर। ये 10 अक्षरों का अल्फ़ान्यूमेरिक कोड होता है। हर व्यक्ति जो TDS काटता है, उसके पास TAN होना ज़रूरी है।

"बिष्ट ट्रेडर्स का TAN है। ये कुछ ऐसा दिखता है: DELB12345C।"

"TAN के बिना तुम सरकार के पास TDS जमा नहीं कर सकते। TDS रिटर्न फ़ाइल नहीं कर सकते। ये अनिवार्य है।"

"क्या TAN और PAN एक ही चीज़ है?" मीरा पूछती है।

"नहीं। PAN (परमानेंट अकाउंट नंबर) तुम्हारी पर्सनल टैक्स आइडेंटिटी है — हर टैक्सपेयर के पास होता है। TAN खास उन लोगों के लिए है जो TDS काटते हैं। एक बिज़नेस के पास दोनों हो सकते हैं: PAN अपने आमदनी टैक्स के लिए और TAN दूसरों से TDS काटने के लिए।"

नंबरफ़ुल फ़ॉर्मकिसे चाहिएउद्देश्य
PANपरमानेंट अकाउंट नंबरहर टैक्सपेयर कोआमदनी टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने, अपने टैक्स को ट्रैक करने के लिए
TANटैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबरजो भी TDS काटता हैTDS जमा करने और TDS रिटर्न फ़ाइल करने के लिए

मुख्य TDS सेक्शंस और रेट्स

"अब इम्पॉर्टेंट हिस्सा आता है," शर्मा सर कहते हैं। "TDS हर चीज़ के लिए एक ही रेट नहीं है। अलग-अलग तरह के पेमेंट्स पर अलग-अलग TDS रेट्स हैं। आमदनी टैक्स एक्ट में अलग-अलग पेमेंट टाइप्स के लिए अलग-अलग सेक्शंस हैं।"

वो व्हाइटबोर्ड पर सबसे आम सेक्शंस लिखते हैं:

वो सेक्शंस जो तुम्हें जानने ज़रूरी हैं

सेक्शनपेमेंट का प्रकारकौन भरता है?TDS रेट
194Cकॉन्ट्रैक्टर/ट्रांसपोर्टर पेमेंट्सबिज़नेस जो कॉन्ट्रैक्टर को पे कर रहा है1% (इंडिविजुअल/HUF) या 2% (कंपनी/फ़र्म)
194Jपेशेवर या टेक्निकल फ़ीसबिज़नेस जो CA, वकील, डॉक्टर, कंसल्टेंट आदि को पे कर रहा है10%
194Hकमीशन या ब्रोकरेजबिज़नेस जो एजेंट को कमीशन दे रहा है5%
194Aइंटरेस्ट (सेविंग्स पर बैंक इंटरेस्ट के अलावा)बैंक या बिज़नेस जो इंटरेस्ट दे रहा है10%
194Iरेंट (किराया)टेनेंट जो किराया दे रहा है10% (बिल्डिंग/फ़र्नीचर/लैंड के लिए)

"ये पाँच सेक्शंस शायद 80% TDS वर्क कवर करते हैं जो तुम एक छोटे CA दफ़्तर में करोगी," शर्मा सर कहते हैं।

चलो हर एक को समझते हैं।


सेक्शन 194C — कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट्स

ये बिष्ट ट्रेडर्स जैसे बिज़नेसेज़ के लिए सबसे आम है।

"जब कोई बिज़नेस किसी कॉन्ट्रैक्टर को — ट्रांसपोर्टर, लेबर कॉन्ट्रैक्टर, प्रिंटिंग प्रेस, कैटरर — किसी कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम के लिए पे करता है, तो सेक्शन 194C के तहत TDS काटना होता है।"

रेट्स:

  • 1% अगर कॉन्ट्रैक्टर इंडिविजुअल या HUF (हिन्दू अनडिवाइडेड फ़ैमिली) है
  • 2% अगर कॉन्ट्रैक्टर कंपनी या फ़र्म है

थ्रेशोल्ड: TDS सिर्फ तभी ज़रूरी है जब:

  • एक पेमेंट Rs 30,000 से ज़्यादा हो, या
  • उस कॉन्ट्रैक्टर को साल भर में कुल पेमेंट्स Rs 1,00,000 से ज़्यादा हों

"बिष्ट जी का ट्रांसपोर्टर बिल Rs 75,000 है — ये Rs 30,000 से ऊपर है। तो TDS काटना होगा।"

"अगर रावत ट्रांसपोर्ट प्रोपराइटरशिप (एक व्यक्ति) है, तो रेट 1% होगा। अगर ये फ़र्म या कंपनी है, तो रेट 2% होगा।"


सेक्शन 194J — पेशेवर फ़ीस

"जब बिष्ट जी शर्मा सर की CA फ़र्म को ऑडिट या GST फ़ाइलिंग के लिए पे करते हैं, तो 194J के तहत TDS काटा जाता है।"

रेट: 10%

थ्रेशोल्ड: TDS सिर्फ तभी ज़रूरी है जब साल भर में कुल पेमेंट Rs 30,000 से ज़्यादा हो।

"तो अगर बिष्ट जी हमें पूरे साल के काम के लिए Rs 50,000 देते हैं, तो उन्हें 10% = Rs 5,000 TDS काटना होगा।"

मीरा की आँखें बड़ी हो जाती हैं। "वो आपकी फ़ीस से टैक्स काटते हैं, सर?"

शर्मा सर हँसते हैं। "हाँ! CA भी टैक्स भरते हैं, मीरा। यही TDS की खूबसूरती है — ये सबको पकड़ता है।"


सेक्शन 194H — कमीशन या ब्रोकरेज

"अगर बिष्ट जी का कोई सेल्स एजेंट है जो ग्राहकों लाने के बदले कमीशन कमाता है, और कमीशन मान लो Rs 40,000 साल में है, तो बिष्ट जी को 5% TDS काटना होगा।"

रेट: 5%

थ्रेशोल्ड: साल में Rs 15,000 से ज़्यादा पेमेंट।


सेक्शन 194A — इंटरेस्ट (ब्याज)

"अगर कोई बिज़नेस लोन पर इंटरेस्ट देता है — मान लो बिष्ट जी ने किसी दोस्त से पैसे उधार लिए और इंटरेस्ट दे रहे हैं — तो 10% TDS काटना होगा।"

रेट: 10%

थ्रेशोल्ड: Rs 5,000 प्रति वर्ष (नॉन-बैंक पेयर्स के लिए)। बैंक्स के लिए अलग थ्रेशोल्ड है Rs 40,000 की।


सेक्शन 194I — रेंट (किराया)

"अगर कोई बिज़नेस दफ़्तर, दुकान, गोदाम, या ज़मीन का किराया देता है, और सालाना किराया Rs 2,40,000 से ज़्यादा है, तो TDS काटना होगा।"

रेट: 10% बिल्डिंग, फ़र्नीचर, लैंड के लिए; 2% प्लांट और मशीनरी के लिए।

थ्रेशोल्ड: सालाना किराया Rs 2,40,000 से ज़्यादा।

"बिष्ट जी अपने गोदाम का Rs 15,000 महीना किराया देते हैं। ये Rs 1,80,000 सालाना है — लिमिट से कम। तो उनके रेंट पर TDS नहीं। लेकिन अगर वो Rs 25,000 महीने वाले बड़े वेयरहाउस में शिफ्ट हों, तो TDS लगेगा।"


थ्रेशोल्ड्स की समरी टेबल

मीरा अपनी नोटबुक में एक साफ़ टेबल बनाती है:

सेक्शनपेमेंट का प्रकारTDS रेटथ्रेशोल्ड लिमिट
194Cकॉन्ट्रैक्टर1% / 2%एक बिल > Rs 30,000 या सालाना कुल > Rs 1,00,000
194Jपेशेवर फ़ीस10%सालाना कुल > Rs 30,000
194Hकमीशन5%सालाना कुल > Rs 15,000
194Aइंटरेस्ट (ब्याज)10%सालाना कुल > Rs 5,000 (नॉन-बैंक)
194Iरेंट (किराया)10% / 2%सालाना कुल > Rs 2,40,000

"ये टेबल संभालकर रखो, मीरा," शर्मा सर कहते हैं। "लगभग हर दिन इसकी ज़रूरत पड़ेगी।"


TDS सरकार को कब जमा करना होता है?

"TDS काटने के बाद, तुम्हें इसे सरकार के पास जमा करना होता है। इसकी डेडलाइन्स हैं।"

TDS किस महीने काटाजमा करने की डेडलाइन
अप्रैल से फ़रवरी (कोई भी महीना)अगले महीने की 7 तारीख
मार्च30 अप्रैल

"तो अगर बिष्ट जी आज TDS काटते हैं — मान लो अक्टूबर में — तो TDS 7 नवंबर तक सरकार को जमा करना होगा।"

"अगर देर हो जाए तो?" मीरा पूछती है।

"1.5% प्रति माह इंटरेस्ट। और अगर TDS काटा ही नहीं, तो जिस तारीख को काटना चाहिए था, उससे 1% प्रति माह इंटरेस्ट। ये पेनल्टीज़ जल्दी बढ़ जाती हैं।"


TDS रिटर्न — फ़ॉर्म 26Q

"हर तिमाही (क्वार्टर), डिडक्टर को TDS रिटर्न फ़ाइल करना होता है। ये एक रिपोर्ट है जो सरकार को बताती है: मैंने किन-किन लोगों को पे किया, कितना पे किया, और कितना TDS काटा।"

क्वार्टरअवधिफ़ाइलिंग डेडलाइन
Q1अप्रैल - जून31 जुलाई
Q2जुलाई - सितंबर31 अक्टूबर
Q3अक्टूबर - दिसंबर31 जनवरी
Q4जनवरी - मार्च31 मई

"नॉन-तनख़्वाह TDS के लिए फ़ॉर्म 26Q इस्तेमाल होता है। तनख़्वाह TDS के लिए फ़ॉर्म 24Q होता है।"

"रिटर्न फ़ाइल करने के बाद, डिडक्टर को हर डिडक्टी को TDS सर्टिफ़िकेट देना होता है। इस सर्टिफ़िकेट को फ़ॉर्म 16A (नॉन-तनख़्वाह के लिए) या फ़ॉर्म 16 (तनख़्वाह के लिए) कहते हैं। इसमें दिखता है कि कितना TDS काटा गया।"

"डिडक्टी इस सर्टिफ़िकेट का इस्तेमाल अपने आमदनी टैक्स रिटर्न में क्रेडिट क्लेम करने के लिए करता है।"

मीरा अपनी नोटबुक में पूरा फ़्लो बनाती है:

डिडक्टर किसी को पे करता है → TDS काटता है → अगले महीने की 7 तारीख तक सरकार को TDS जमा करता है → क्वार्टरली रिटर्न (26Q) फ़ाइल करता है → डिडक्टी को TDS सर्टिफ़िकेट (16A) देता है → डिडक्टी अपने रिटर्न में क्रेडिट क्लेम करता है।


ERPLite में TDS सेट अप करना

नेगी भैया बात आगे बढ़ाते हैं। "ठीक है मीरा, थियरी बहुत हो गई। चलो मैं दिखाता हूँ कि ERPLite में TDS कैसे काम करता है।"

चरण 1: कंपनी सेटिंग्स में TDS इनेबल करो

"पहले, हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि बिष्ट ट्रेडर्स के लिए TDS चालू है।"

  1. ERPLite खोलो और जाओ सेटिंग्स > कंपनी सेटिंग्स
  2. टैक्स डिडक्शन ऐट सोर्स (TDS) वाला सेक्शन ढूँढो
  3. इनेबल TDS को ON करो
  4. कंपनी का TAN नंबर डालो: DELB12345C
  5. सेव पर क्लिक करो

ERPLite कंपनी सेटिंग्स स्क्रीन जिसमें TDS इनेबल है और TAN नंबर डाला गया है

चरण 2: TDS सेक्शंस सेट अप करो

"अब हमें ERPLite को बताना होगा कि हम कौन-कौन से TDS सेक्शंस इस्तेमाल करते हैं।"

  1. जाओ मास्टर्स > TDS सेक्शंस
  2. क्लिक करो + न्यू सेक्शन
  3. ब्योरा भरो:

सेक्शन 194C के लिए:

फ़ील्डवैल्यू
सेक्शन कोड194C
डिस्क्रिप्शनपेमेंट टू कॉन्ट्रैक्टर्स
रेट (इंडिविजुअल/HUF)1%
रेट (कंपनी/फ़र्म)2%
सिंगल बिल थ्रेशोल्ड30,000
एनुअल थ्रेशोल्ड1,00,000
  1. सेव पर क्लिक करो
  2. 194J, 194H, 194A, और 194I के लिए भी उनके रेट्स और थ्रेशोल्ड्स के साथ यही करो।

"ERPLite में आम TDS सेक्शंस पहले से लोडेड आते हैं," नेगी भैया कहते हैं। "लेकिन तुम्हें हमेशा चेक करना चाहिए कि रेट्स सही हैं। कभी-कभी बजट में सरकार रेट्स बदल देती है।"

ERPLite TDS सेक्शंस मास्टर लिस्ट जिसमें 194C, 194J, 194H, 194A, 194I दिख रहे हैं

चरण 3: वेंडर से TDS सेक्शन लिंक करो

"अब हमें ERPLite को बताना होगा कि रावत ट्रांसपोर्ट सेक्शन 194C में आता है।"

  1. जाओ मास्टर्स > वेंडर्स
  2. रावत ट्रांसपोर्ट खोलो
  3. टैक्स इन्फ़ॉर्मेशन टैब में सेट करो:
    • PAN: ABCPR1234F
    • TDS एप्लिकेबल: यस
    • TDS सेक्शन: 194C
    • एंटिटी टाइप: इंडिविजुअल (तो रेट 1% होगा)
  4. सेव पर क्लिक करो

"अब, हर बार जब हम रावत ट्रांसपोर्ट का परचेज़ बिल बनाएँगे, ERPLite अपने-आप TDS गणना करेगा।"


मीरा बिष्ट जी का ट्रांसपोर्टर पेमेंट प्रक्रिया करती है

"अब असली काम करने का समय है," नेगी भैया कहते हैं। "बिष्ट जी का ट्रांसपोर्टर बिल यहाँ है। चलो शुरू करते हैं।"

चरण 4: TDS के साथ परचेज़ बिल बनाओ

  1. जाओ ट्रांज़ैक्शंस > परचेज़ बिल > + न्यू

  2. हेडर भरो:

    • वेंडर: रावत ट्रांसपोर्ट
    • बिल नंबर: RT/2025-26/087
    • बिल डेट: 15-Oct-2025
    • ड्यू डेट: 30-Oct-2025
  3. लाइन आइटम जोड़ो:

    • डिस्क्रिप्शन: अक्टूबर 2025 के लिए ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज़
    • अमाउंट: Rs 75,000
  4. ERPLite अपने-आप TDS सेक्शन दिखाता है:

TDS ब्योरा
सेक्शन194C
एंटिटी टाइपइंडिविजुअल
TDS रेट1%
TDS अमाउंटRs 750

रुको — मीरा को कुछ दिखता है। "नेगी भैया, मैंने शर्मा सर के साथ 2% गणना किया था। वो Rs 1,500 आया था। लेकिन ERPLite 1% = Rs 750 दिखा रहा है। कौन सा सही है?"

नेगी भैया चेक करते हैं। "वेंडर इंडिविजुअल सेट है, इसलिए रेट 1% है। अगर रावत ट्रांसपोर्ट फ़र्म या कंपनी होती, तो 2% होता। रेट वेंडर की एंटिटी टाइप पर निर्भर करता है। शर्मा सर ने 2% उदाहरण के लिए इस्तेमाल किया था ताकि मैथ आसान हो। मैं बिष्ट जी से चेक करता हूँ।"

वो बिष्ट जी को कॉल करते हैं। रावत ट्रांसपोर्ट असल में एक साझेदारी फ़र्म है। तो रेट 2% होना चाहिए।

नेगी भैया वेंडर मास्टर अपडेट करते हैं:

  • एंटिटी टाइप: फ़र्म

अब ERPLite रीगणना करता है:

TDS ब्योरा (अपडेटेड)
सेक्शन194C
एंटिटी टाइपफ़र्म
TDS रेट2%
TDS अमाउंटRs 1,500
  1. बिल समरी अब ये दिखाती है:
मदरकम (Rs)
ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज़75,000
लेस: TDS u/s 194C @ 2%(1,500)
रावत ट्रांसपोर्ट को देय शुद्ध रकम73,500
  1. सेव पर क्लिक करो और फिर अप्रूव पर।

ERPLite परचेज़ बिल स्क्रीन जिसमें Rs 75,000 के ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज़ पर Rs 1,500 TDS ऑटो-गणना हुआ है

चरण 5: अकाउंटिंग एंट्रीज़ चेक करो

मीरा व्यू जर्नल एंट्री पर क्लिक करती है ताकि देख सके कि ERPLite ने पर्दे के पीछे क्या रिकॉर्ड किया:

अकाउंटडेबिट (Rs)क्रेडिट (Rs)
ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज़ (ख़र्चा)75,000
रावत ट्रांसपोर्ट (वेंडर/क्रेडिटर)73,500
TDS पेएबल — 194C (लायबिलिटी)1,500
कुल75,00075,000

"देखो कैसे बैलेंस हो रहा है?" नेगी भैया कहते हैं। "पूरे Rs 75,000 ख़र्चा हैं। लेकिन वेंडर को सिर्फ Rs 73,500 देने हैं। बाकी Rs 1,500 लायबिलिटी है — वो हमें सरकार को देना है।"

मीरा लॉजिक समझती है:

  • ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज़ डेबिट = हमने Rs 75,000 का ख़र्चा किया (पूरे बिल की रकम)
  • रावत ट्रांसपोर्ट क्रेडिट = हम वेंडर को सिर्फ Rs 73,500 देने हैं
  • TDS पेएबल क्रेडिट = हम सरकार को Rs 1,500 देने हैं

"जब हम वेंडर को पे करेंगे, तो Rs 73,500 देंगे। जब TDS जमा करेंगे, तो Rs 1,500 की लायबिलिटी साफ़ हो जाएगी।"

चरण 6: पेमेंट करो

  1. जाओ ट्रांज़ैक्शंस > पेमेंट > + न्यू
  2. वेंडर सेलेक्ट करो: रावत ट्रांसपोर्ट
  3. आउटस्टैंडिंग अमाउंट Rs 73,500 दिखाता है (Rs 75,000 नहीं — क्योंकि TDS पहले ही काट लिया गया)
  4. Rs 73,500 NEFT से पे करो
  5. सेव और अप्रूव पर क्लिक करो

चरण 7: सरकार को TDS जमा करो

"ये Rs 1,500, 7 नवंबर तक जमा करना होगा," नेगी भैया मीरा को याद दिलाते हैं।

  1. जाओ कंप्लायंस > TDS > डिपॉज़िट TDS
  2. ERPLite सभी पेंडिंग TDS अमाउंट्स दिखाता है:
डिडक्टीसेक्शनरकम (Rs)काटा गया
रावत ट्रांसपोर्ट194C1,50015-Oct-2025
  1. एंट्री सेलेक्ट करो और जेनरेट चालान पर क्लिक करो
  2. ERPLite एक चालान (पेमेंट फ़ॉर्म) जेनरेट करता है जिसका उपयोग बिष्ट जी सरकारी पोर्टल (OLTAS/ई-पे टैक्स) पर ऑनलाइन TDS भरने के लिए करते हैं
  3. पेमेंट के बाद, ERPLite में BSR कोड और चालान सीरियल नंबर डालो

ERPLite TDS डिपॉज़िट स्क्रीन जिसमें रावत ट्रांसपोर्ट का Rs 1,500 पेंडिंग TDS दिख रहा है


शर्मा सर की अपनी फ़ीस पर TDS

शर्मा सर हँसते हैं। "मीरा, अब मेरी फ़ीस पर भी TDS प्रक्रिया करो। बिष्ट जी हमारी फ़र्म को अकाउंटिंग और GST सेवाएँ के लिए साल में Rs 60,000 देते हैं। कौन सा सेक्शन?"

मीरा सोचती है। "पेशेवर फ़ीस... वो सेक्शन 194J है। रेट 10% है। थ्रेशोल्ड Rs 30,000 प्रति वर्ष है। बिष्ट जी Rs 60,000 दे रहे हैं — थ्रेशोल्ड से ऊपर। तो TDS = Rs 6,000।"

"सही! चलो सेट अप करो।"

मीरा परचेज़ बिल बनाती है:

मदरकम (Rs)
पेशेवर फ़ीस — V.K. Sharma & Associates60,000
लेस: TDS u/s 194J @ 10%(6,000)
देय शुद्ध रकम54,000

शर्मा सर सराहना से सिर हिलाते हैं। "मीरा, मैं भी टैक्स सिस्टम से ऊपर नहीं हूँ। कोई नहीं है।"


बचने वाली आम गलतियाँ

शर्मा सर तीस साल में देखी गई गलतियों की सूची बताते हैं:

  1. TDS न काटना — "मुझे पता नहीं था" बहाना नहीं चलता। कटौती की तारीख से 1% प्रति माह इंटरेस्ट।

  2. काटकर जमा न करना — ये सबसे बुरा है। 1.5% प्रति माह इंटरेस्ट, प्लस पेनल्टी। ख़र्चा भी डिसअलाउ हो सकता है।

  3. गलत सेक्शन या रेट — अगर तुम 194C इस्तेमाल करो जबकि 194J होना चाहिए, तो TDS रिटर्न में त्रुटियाँ आएँगे। हमेशा पेमेंट की नेचर चेक करो।

  4. थ्रेशोल्ड्स इग्नोर करना — TDS सिर्फ सर्टेन लिमिट्स के ऊपर ज़रूरी है। छोटी रकम पर काटने से बेवजह काम बढ़ता है।

  5. रिटर्न देर से फ़ाइल करना — Rs 200 प्रति दिन लेट फ़ी (मैक्सिमम = TDS अमाउंट)। तो अगर TDS Rs 1,500 है और तुम 10 दिन लेट हो, तो Rs 2,000 लेट फ़ी — TDS से भी ज़्यादा!

  6. TDS सर्टिफ़िकेट न देना — डिडक्टी को अपना फ़ॉर्म 16A चाहिए। न देने पर पेनल्टी: Rs 100 प्रति दिन प्रति सर्टिफ़िकेट।


डिडक्टी की तरफ — फ़ॉर्म 26AS चेक करना

"एक और बात," शर्मा सर कहते हैं। "डिडक्टी — जैसे रावत ट्रांसपोर्ट — चेक कर सकता है कि बिष्ट जी ने जो TDS जमा किया, वो सच में सरकार तक पहुँचा या नहीं।"

"कैसे?"

"फ़ॉर्म 26AS के ज़रिये। ये एक स्टेटमेंट है जो आमदनी टैक्स वेबसाइट पर उपलब्ध है। ये एक PAN के लिए सभी TDS क्रेडिट्स दिखाता है। रावत ट्रांसपोर्ट लॉगिन करके अपना 26AS चेक कर सकता है और देख सकता है: 'हाँ, बिष्ट ट्रेडर्स ने 194C के तहत Rs 1,500 काटा और जमा किया।' अगर वहाँ नहीं दिखता, तो कोई समस्या है।"

"हमारे लिए भी ये इम्पॉर्टेंट है। जब हम रावत ट्रांसपोर्ट का आमदनी टैक्स रिटर्न तैयार करते हैं, तो हम उनका 26AS चेक करते हैं ताकि TDS क्रेडिट क्लेम कर सकें।"


क्विक रीकैप — चैप्टर 23

TDS क्या है? टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स — पेमेंट के समय टैक्स का एक छोटा परसेंटेज काटकर सरकार को जमा करना।

डिडक्टर कौन है? पेमेंट करने वाला (जैसे बिष्ट ट्रेडर्स)।

डिडक्टी कौन है? पेमेंट पाने वाला (जैसे रावत ट्रांसपोर्ट)।

मुख्य सेक्शंस:

  • 194C — कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट्स (1% इंडिविजुअल, 2% फ़र्म/कंपनी)
  • 194J — पेशेवर फ़ीस (10%)
  • 194H — कमीशन (5%)
  • 194A — इंटरेस्ट (10%)
  • 194I — रेंट (10%)

TAN डिडक्टर्स के लिए अनिवार्य है।

जमा करने की डेडलाइन: अगले महीने की 7 तारीख।

TDS रिटर्न: फ़ॉर्म 26Q क्वार्टरली फ़ाइल होता है।

TDS सर्टिफ़िकेट: फ़ॉर्म 16A हर डिडक्टी को दिया जाता है।

ERPLite में: मास्टर्स में TDS सेक्शंस सेट अप करो, वेंडर्स से लिंक करो, और परचेज़ बिल्स पर TDS ऑटो-गणना होगा।


अभ्यास अभ्यास — खुद करके देखो

अभ्यास 1: हर पेमेंट के लिए सही TDS सेक्शन पहचानो और TDS गणना करो:

#पेमेंटसेक्शन?TDS रेट?TDS अमाउंट?
1बिष्ट जी एक लेबर कॉन्ट्रैक्टर (इंडिविजुअल) को Rs 40,000 देते हैं_______________
2बिष्ट जी शर्मा सर की CA फ़र्म को Rs 50,000 देते हैं_______________
3बिष्ट जी एक सेल्स एजेंट को Rs 8,000 कमीशन देते हैं (सालाना कुल)_______________
4बिष्ट जी वेयरहाउस के लिए Rs 25,000 मासिक किराया देते हैं_______________
5बिष्ट जी एक ट्रांसपोर्टर (इंडिविजुअल) को Rs 20,000 देते हैं (इस साल का एकमात्र बिल)_______________

उत्तर:

  1. 194C, 1%, Rs 400 (Rs 30,000 सिंगल बिल थ्रेशोल्ड से ऊपर)
  2. 194J, 10%, Rs 5,000 (Rs 30,000 एनुअल थ्रेशोल्ड से ऊपर)
  3. 194H — लेकिन TDS नहीं, क्योंकि Rs 8,000, Rs 15,000 थ्रेशोल्ड से कम है
  4. 194I, 10%, Rs 2,500 प्रति माह (सालाना किराया = Rs 3,00,000, Rs 2,40,000 थ्रेशोल्ड से ऊपर)
  5. 194C — लेकिन TDS नहीं, क्योंकि एक बिल Rs 20,000 Rs 30,000 थ्रेशोल्ड से कम है और ये साल का इकलौता बिल है (Rs 1,00,000 सालाना से भी कम)

अभ्यास 2: ऊपर पेमेंट #1 (लेबर कॉन्ट्रैक्टर, Rs 40,000, TDS 1%) के लिए जर्नल एंट्री लिखो।

अभ्यास 3: बिष्ट जी ने 15 अक्टूबर को Rs 1,500 TDS काटा लेकिन 15 दिसंबर तक जमा करना भूल गए। कितने महीने का इंटरेस्ट लगेगा? किस रेट से? इंटरेस्ट अमाउंट गणना करो।

(उत्तर: 2 महीने की देरी। 1.5% प्रति माह इंटरेस्ट = Rs 1,500 x 1.5% x 2 = Rs 45।)


फ़न फ़ैक्ट

क्या तुम्हें पता है कि TDS सिस्टम भारत में 1961 में आमदनी टैक्स एक्ट के साथ शुरू हुआ था? ये आइडिया ब्रिटिश "पे ऐज़ यू अर्न" (PAYE) सिस्टम से लिया गया था। आज, TDS भारत सरकार के आमदनी टैक्स कलेक्शन का सबसे बड़ा स्रोत है। 2023-24 में TDS कलेक्शन Rs 8 लाख करोड़ पार कर गया — ये कई छोटे देशों के पूरे GDP से भी ज़्यादा है! हर बार जब तुम TDS काटती हो, चाहे एक ट्रांसपोर्टर के बिल से Rs 750 ही, तुम इस विशाल सिस्टम का हिस्सा हो जो देश को चलाने में मदद करता है।

और एक बात जो तुम्हें मुस्कुरा देगी: बॉलीवुड एक्टर्स और क्रिकेट प्लेयर्स की फ़ीस से भी TDS काटा जाता है। तो अगली बार जब तुम किसी सुपरस्टार को स्क्रीन पर देखो, तो जानो कि कहीं, किसी ने बिल्कुल वही किया जो मीरा ने अभी सीखा — उनकी पेमेंट से TDS काटा।

अगले चैप्टर में मीरा के सामने एक नई चुनौती आती है — दफ़्तर स्टाफ़ की तनख़्वाह प्रक्रिया करना। पेरोल, PF, ESIC — सब नया है। देखते हैं वो कैसे सँभालती है।


पेरोल की बुनियाद — तनख़्वाह, PF, ESIC

महीने का आखिरी दिन है। मीरा को शर्मा सर के दफ़्तर में लगभग तीन महीने हो गए हैं, और वो वाउचर्स, GST, और TDS संभालना सीख चुकी है। आज, नेगी भैया अपनी स्क्रीन से ऊपर देखकर कहते हैं, "मीरा, अंदाज़ा लगाओ — तनख़्वाह डे! शर्मा सर चाहते हैं कि तुम इस महीने का पेरोल प्रक्रिया करो।" मीरा की आँखें चमकती हैं। "पेरोल? मैंने कभी नहीं किया।" नेगी भैया मुस्कुराते हैं। "हर चीज़ की पहली बार होती है। और आज ये पर्सनल भी है — क्योंकि इस बैच में तुम्हारी तनख़्वाह भी है।" मीरा सीधी बैठ जाती है। अचानक, ये लेसन बहुत ज़रूरी लगने लगता है।

मीरा हैरान होकर देख रही है जब नेगी भैया कंप्यूटर स्क्रीन पर पेरोल शीट दिखाते हैं


पेरोल क्या है?

शर्मा सर अपनी रोज़ की 11 बजे वाली चाय लेकर आते हैं। मीरा तुरंत पूछती है, "सर, पेरोल एग्ज़ैक्टली क्या होता है?"

"सीधी बात है, मीरा। पेरोल एम्प्लॉइज़ की तनख़्वाह गणना और पे करने का प्रक्रिया है। लेकिन ये सिर्फ चेक लिखना नहीं है। तुम्हें डिडक्शंस गणना करने होते हैं — जैसे PF, ESIC, पेशेवर टैक्स, TDS — और फिर जो बचता है वो एम्प्लॉई को देना होता है।"

पेरोल = हर एम्प्लॉई की ग्रॉस तनख़्वाह गणना करना, सभी डिडक्शंस (PF, ESIC, पेशेवर टैक्स, TDS) घटाना, और बाकी बची रकम (नेट तनख़्वाह) एम्प्लॉई को देना।

"ऐसे सोचो," शर्मा सर कहते हैं। "जब तुम सेब का एक थैला खरीदती हो, तो तुम दुकानदार को पैसे देती हो। लेकिन दुकानदार सारे पैसे नहीं रखता। उसे होलसेलर को देना होता है, किराया देना होता है, बिजली देनी होती है। जो बचता है वो उसका मुनाफ़ा है।"

"इसी तरह, तनख़्वाह के कई हिस्से होते हैं। कुछ हिस्से एम्प्लॉई को जाते हैं, कुछ सरकार को (PF, ESIC, टैक्स)। पेरोल प्रक्रिया तय करता है कि किसे कितना मिलेगा।"


CTC, ग्रॉस तनख़्वाह, और नेट तनख़्वाह

"कोई भी नंबर करने से पहले, तुम्हें तीन इम्पॉर्टेंट टर्म्स समझने होंगे," शर्मा सर कहते हैं।

CTC — लागत टू कंपनी

"ये वो कुल रकम है जो कंपनी एक एम्प्लॉई पर खर्च करती है। इसमें तनख़्वाह, एम्प्लॉयर का PF और ESIC शेयर, बोनस, इंश्योरेंस — सब कुछ शामिल है।"

"जब कोई जॉब एडवर्टाइज़मेंट कहती है 'CTC Rs 2,40,000 प्रति वर्ष,' तो इसका मतलब ये नहीं कि एम्प्लॉई के बैंक अकाउंट में Rs 2,40,000 आएँगे।"

ग्रॉस तनख़्वाह

"ये डिडक्शंस से पहले की तनख़्वाह है। इसमें बुनियादी, HRA, स्पेशल अलाउंस, कन्वेयंस, और अन्य कम्पोनेंट्स शामिल हैं। लेकिन इसमें एम्प्लॉयर के कॉन्ट्रीब्यूशंस शामिल नहीं होते।"

नेट तनख़्वाह (टेक-होम)

"ये वो अमाउंट है जो वास्तव में एम्प्लॉई के बैंक अकाउंट में आता है। ये ग्रॉस तनख़्वाह माइनस सभी डिडक्शंस है।"

CTC > ग्रॉस तनख़्वाह > नेट तनख़्वाह (टेक-होम)

यहाँ एक सिंपल फ़्लो है:

टर्मइसका मतलबउदाहरण
CTCएम्प्लॉयर पर कुल खर्चRs 2,40,000/वर्ष
ग्रॉस तनख़्वाहडिडक्शंस से पहले जो वादा किया गयाRs 2,00,000/वर्ष
डिडक्शंसPF, ESIC, पेशेवर टैक्स, TDSRs 30,000/वर्ष
नेट तनख़्वाहएम्प्लॉई को वास्तव में मिलता हैRs 1,70,000/वर्ष

"CTC और ग्रॉस का अंतर एम्प्लॉयर के कॉन्ट्रीब्यूशंस हैं — जैसे एम्प्लॉयर का PF और ESIC शेयर। एम्प्लॉई को ये अपनी पेस्लिप में कभी नहीं दिखता।"

मीरा अपनी नोटबुक में लिखती है: CTC माइनस एम्प्लॉयर कॉन्ट्रीब्यूशंस = ग्रॉस। ग्रॉस माइनस एम्प्लॉई डिडक्शंस = नेट (टेक-होम)।


तनख़्वाह कम्पोनेंट्स — तनख़्वाह को तोड़कर समझना

"हर तनख़्वाह कई हिस्सों से बनी होती है," शर्मा सर समझाते हैं। "चलो मैं आम कम्पोनेंट्स दिखाता हूँ।"

1. बुनियादी तनख़्वाह

"ये नींव है। ये आमतौर पर CTC का 40% से 50% होता है। कई दूसरे कम्पोनेंट्स — जैसे PF और HRA — बुनियादी पर गणना होते हैं। इसलिए बुनियादी सबसे इम्पॉर्टेंट नंबर है।"

2. HRA — हाउस रेंट अलाउंस

"ये एम्प्लॉई को किराया देने में मदद के लिए है। ये आमतौर पर बुनियादी का 40% से 50% होता है (मेट्रो सिटीज़ में 50%, बाकी सिटीज़ में 40%)। HRA के स्पेशल आमदनी टैक्स फ़ायदे हैं — अगर एम्प्लॉई किराया देता है, तो HRA का कुछ हिस्सा टैक्स से एग्ज़ेम्प्ट हो सकता है।"

"हल्द्वानी मेट्रो सिटी नहीं है, तो हम बुनियादी का 40% इस्तेमाल करते हैं।"

3. स्पेशल अलाउंस

"ये एक मिलान फ़िगर है। बुनियादी, HRA, और बाकी फ़िक्स्ड कम्पोनेंट्स गणना करने के बाद, ग्रॉस तनख़्वाह तक पहुँचने के लिए जो बचता है वो यहाँ डाला जाता है।"

4. कन्वेयंस अलाउंस

"यात्रा खर्च के लिए एक छोटी रकम — आमतौर पर Rs 1,600 प्रति माह। नए टैक्स रिज़ीम में ये अक्सर स्पेशल अलाउंस में मर्ज कर दिया जाता है।"

उदाहरण: मीरा की तनख़्वाह ब्रेकडाउन

शर्मा सर एक शीट निकालते हैं। "चलो तुम्हारी तनख़्वाह को उदाहरण के रूप में लेते हैं, मीरा। तुम्हारी CTC Rs 1,44,000 प्रति वर्ष है। यानी Rs 12,000 प्रति माह।"

कम्पोनेंटमासिक (Rs)वार्षिक (Rs)कैसे गणना किया
बुनियादी तनख़्वाह5,00060,000~42% ऑफ़ CTC
HRA2,00024,000बुनियादी का 40%
स्पेशल अलाउंस3,40040,800मिलान फ़िगर
ग्रॉस तनख़्वाह10,4001,24,800
एम्प्लॉयर PF (बुनियादी का 12%)6007,200एम्प्लॉयर देता है
एम्प्लॉयर ESIC (ग्रॉस का 3.25%)3384,056एम्प्लॉयर देता है
एम्प्लॉयर शेयर ऑफ़ अदर फ़ायदे6627,944इंश्योरेंस, बोनस प्रोविज़न, आदि
CTC12,0001,44,000

"देखो? तुम्हारी CTC Rs 12,000 प्रति माह है। लेकिन तुम्हारी ग्रॉस तनख़्वाह सिर्फ Rs 10,400 है। बाकी Rs 1,600 एम्प्लॉयर की लागत है — PF, ESIC, और अन्य फ़ायदे।"

मीरा नंबर्स को घूरती है। "तो मुझे Rs 10,400 भी नहीं मिलेंगे?"

"नहीं," शर्मा सर नर्मी से कहते हैं। "एम्प्लॉई डिडक्शंस भी हैं। चलो वो गणना करते हैं।"


PF — प्रॉविडेंट फ़ंड

"PF सरकार द्वारा चलाई जाने वाली रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम है। एम्प्लॉई और एम्प्लॉयर दोनों कॉन्ट्रीब्यूट करते हैं।"

PF = प्रॉविडेंट फ़ंड। एम्प्लॉई की तनख़्वाह का एक हिस्सा काटकर PF अकाउंट में जमा किया जाता है। एम्प्लॉयर भी उतनी ही रकम जोड़ता है। इस पैसे पर इंटरेस्ट मिलता है और रिटायरमेंट के बाद (या कुछ कंडीशंस में पहले) निकाला जा सकता है।

PF कैसे गणना होता है

कॉन्ट्रीब्यूशनरेटकिस पर आधारितमीरा की रकम (मासिक)
एम्प्लॉई का हिस्साबुनियादी का 12%बुनियादी तनख़्वाह5,000 का 12% = Rs 600
एम्प्लॉयर का हिस्साबुनियादी का 12%बुनियादी तनख़्वाह5,000 का 12% = Rs 600

"तो मीरा की तनख़्वाह से हर महीने Rs 600 काटे जाते हैं। और एम्प्लॉयर भी Rs 600 कॉन्ट्रीब्यूट करता है। कुल Rs 1,200 हर महीने मीरा के PF अकाउंट में जाते हैं।"

"रुको," मीरा कहती है। "तो एम्प्लॉयर भी मेरे लिए पैसे डाल रहा है?"

"हाँ! यही PF की खूबसूरती है। तुम्हारा एम्प्लॉयर तुम्हारे कॉन्ट्रीब्यूशन को मैच करता है। ये फ़्री मनी है — ठीक है, एग्ज़ैक्टली फ़्री नहीं, ये तुम्हारी CTC का हिस्सा है। लेकिन तुम्हारे भविष्य के लिए बचत हो रही है।"

"इस पर इंटरेस्ट भी मिलता है — अभी करीब 8.25% सालाना। 20-30 सालों में ये बड़ी रकम बन जाती है।"

इम्पॉर्टेंट नियम: PF उन सभी एस्टैब्लिशमेंट्स के लिए अनिवार्य है जहाँ 20 या उससे ज़्यादा एम्प्लॉइज़ हैं। छोटे एस्टैब्लिशमेंट्स भी वॉलंटरिली रजिस्टर कर सकते हैं। एम्प्लॉई का कॉन्ट्रीब्यूशन उसकी तनख़्वाह से काटा जाता है। एम्प्लॉयर का कॉन्ट्रीब्यूशन ग्रॉस तनख़्वाह के ऊपर अतिरिक्त लागत है।

PF स्प्लिट के बारे में एक नोट

"टेक्निकली, एम्प्लॉयर का 12% दो हिस्सों में बँटता है," नेगी भैया जोड़ते हैं:

  • 3.67% एम्प्लॉइज़ प्रॉविडेंट फ़ंड (EPF) में जाता है
  • 8.33% एम्प्लॉइज़ पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है

"लेकिन हमारी पेरोल गणना में, हम बस 12% एक नंबर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। PF डिपार्टमेंट अंदरूनी तौर पर स्प्लिट सँभालता है।"


ESIC — एम्प्लॉइज़ स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन

"ESIC एम्प्लॉइज़ के लिए सरकार द्वारा चलाई जाने वाली हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम जैसी है," शर्मा सर समझाते हैं।

ESIC = एम्प्लॉइज़ स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन। ये एम्प्लॉइज़ को मेडिकल फ़ायदे, सिकनेस फ़ायदे, मायनेनिटी फ़ायदे, और डिसेबिलिटी फ़ायदे प्रदान करती है। एम्प्लॉई और एम्प्लॉयर दोनों कॉन्ट्रीब्यूट करते हैं।

कौन कवर्ड है?

"ESIC उन एम्प्लॉइज़ पर लागू होती है जिनकी ग्रॉस तनख़्वाह Rs 21,000 प्रति माह या उससे कम है।"

मीरा की ग्रॉस तनख़्वाह Rs 10,400 है — Rs 21,000 से काफ़ी कम। तो ESIC उस पर लागू होती है।

ESIC कैसे गणना होता है

कॉन्ट्रीब्यूशनरेटकिस पर आधारितमीरा की रकम (मासिक)
एम्प्लॉई का हिस्साग्रॉस का 0.75%ग्रॉस तनख़्वाह10,400 का 0.75% = Rs 78
एम्प्लॉयर का हिस्साग्रॉस का 3.25%ग्रॉस तनख़्वाह10,400 का 3.25% = Rs 338

"तो मीरा की तनख़्वाह से Rs 78 काटे जाते हैं। एम्प्लॉयर अलग से Rs 338 भरता है।"

"ESIC से मीरा को ESI हॉस्पिटल्स और डिस्पेंसरीज़ में इलाज मिलता है। अगर वो बीमार पड़ती है, तो पेड सिक लीव मिलती है। अगर कोई एक्सीडेंट होता है, तो डिसेबिलिटी फ़ायदा मिलता है।"

"उत्तराखंड में हल्द्वानी, रुद्रपुर, और देहरादून में ESI डिस्पेंसरीज़ हैं," नेगी भैया जोड़ते हैं। "ये बहुत काम का फ़ायदा है।"


पेशेवर टैक्स

"ये एम्प्लॉयमेंट पर स्टेट-लेवल टैक्स है। अलग-अलग स्टेट्स में अलग-अलग रेट्स हैं।"

पेशेवर टैक्स = राज्य सरकार द्वारा तनख़्वाहड इंडिविजुअल्स और पेशेवर्स पर लगाया जाने वाला टैक्स। एम्प्लॉयर इसे एम्प्लॉई की तनख़्वाह से काटकर राज्य सरकार को जमा करता है।

"उत्तराखंड में पेशेवर टैक्स लगता है। रेट्स तनख़्वाह स्लैब पर निर्भर करते हैं।"

मासिक तनख़्वाह (Rs)पेशेवर टैक्स (Rs प्रति माह)
8,333 तकशून्य
8,334 से 16,667Rs 100
16,668 से 25,000Rs 150
25,000 से ऊपरRs 200

(नोट: पेशेवर टैक्स स्लैब्स अलग-अलग हो सकते हैं और राज्य सरकार अपडेट कर सकती है। हमेशा करंट रेट्स चेक करो।)

मीरा की ग्रॉस तनख़्वाह Rs 10,400 है — ये Rs 8,334 से Rs 16,667 के स्लैब में आती है। तो उसका पेशेवर टैक्स Rs 100 प्रति माह है।


मीरा की पूरी तनख़्वाह स्लिप

"अब सब मिलाकर देखते हैं," शर्मा सर कहते हैं।

अर्निंग्स (मीरा को क्या मिलता है)

कम्पोनेंटरकम (Rs)
बुनियादी तनख़्वाह5,000
HRA2,000
स्पेशल अलाउंस3,400
कुल ग्रॉस तनख़्वाह10,400

डिडक्शंस (क्या काटा जाता है)

डिडक्शनरकम (Rs)
एम्प्लॉई PF (बुनियादी का 12%)600
एम्प्लॉई ESIC (ग्रॉस का 0.75%)78
पेशेवर टैक्स100
तनख़्वाह पर TDS0 (आमदनी टैक्सेबल लिमिट से कम है)
कुल डिडक्शंस778

नेट तनख़्वाह (टेक-होम)

रकम (Rs)
ग्रॉस तनख़्वाह10,400
लेस: कुल डिडक्शंस778
नेट तनख़्वाह (टेक-होम)9,622

मीरा नंबर देखती है। "Rs 9,622। इतने मेरे बैंक अकाउंट में आएँगे?"

"हाँ," शर्मा सर कहते हैं। "अब समझ आया? तुम्हारी CTC Rs 12,000 है, लेकिन सारे डिडक्शंस और एम्प्लॉयर कॉन्ट्रीब्यूशंस के बाद, तुम्हें Rs 9,622 मिलते हैं।"

"लेकिन डिडक्शंस से बुरा मत मानो," नेगी भैया जोड़ते हैं। "PF का पैसा तुम्हारे भविष्य के लिए बच रहा है। ESIC तुम्हें हेल्थ कवरेज देता है। पेशेवर टैक्स राज्य की सेवाएँ फ़ंड करता है। ये सब अलग-अलग तरीकों से तुम्हारे पास वापस आता है।"


बाकी दो एम्प्लॉइज़

शर्मा सर के दफ़्तर में तीन एम्प्लॉइज़ हैं (मीरा सहित)। चलो तीनों का पेरोल गणना करते हैं।

नेगी भैया — जूनियर अकाउंटेंट

कम्पोनेंटरकम (Rs)
बुनियादी तनख़्वाह10,000
HRA4,000
स्पेशल अलाउंस6,000
ग्रॉस तनख़्वाह20,000

डिडक्शंस:

डिडक्शनरकम (Rs)
एम्प्लॉई PF1,200 (10,000 का 12%)
एम्प्लॉई ESIC150 (20,000 का 0.75%)
पेशेवर टैक्स150
कुल डिडक्शंस1,500

नेट तनख़्वाह: Rs 18,500

पंत जी — दफ़्तर असिस्टेंट

कम्पोनेंटरकम (Rs)
बुनियादी तनख़्वाह6,000
HRA2,400
स्पेशल अलाउंस3,600
ग्रॉस तनख़्वाह12,000

डिडक्शंस:

डिडक्शनरकम (Rs)
एम्प्लॉई PF720 (6,000 का 12%)
एम्प्लॉई ESIC90 (12,000 का 0.75%)
पेशेवर टैक्स100
कुल डिडक्शंस910

नेट तनख़्वाह: Rs 11,090

समरी — तीनों एम्प्लॉइज़

एम्प्लॉईग्रॉस (Rs)PF (Rs)ESIC (Rs)PT (Rs)नेट (Rs)
मीरा10,400600781009,622
नेगी भैया20,0001,20015015018,500
पंत जी12,0007209010011,090
कुल42,4002,52031835039,212

"कुल नेट तनख़्वाह पेआउट Rs 39,212 है। कुल एम्प्लॉई PF Rs 2,520 है। एम्प्लॉयर भी Rs 2,520 PF देता है। कुल एम्प्लॉयर ESIC ज़्यादा है — मैं गणना करता हूँ।"

एम्प्लॉयर ESIC:

  • मीरा: 10,400 का 3.25% = Rs 338
  • नेगी भैया: 20,000 का 3.25% = Rs 650
  • पंत जी: 12,000 का 3.25% = Rs 390
  • कुल एम्प्लॉयर ESIC: Rs 1,378

ERPLite में पेरोल प्रक्रिया करना

नेगी भैया बात आगे बढ़ाते हैं। "चलो मैं दिखाता हूँ कि ये सब ERPLite में कैसे करते हैं।"

चरण 1: एम्प्लॉइज़ सेट अप करो

  1. जाओ HR > एम्प्लॉइज़ > + न्यू एम्प्लॉई
  2. मीरा की ब्योरा भरो:
फ़ील्डवैल्यू
एम्प्लॉई नेमMeera Joshi
एम्प्लॉई कोडEMP-003
डेट ऑफ़ जॉइनिंग01-Aug-2025
डेज़िगनेशनट्रेनी
डिपार्टमेंटअकाउंट्स
PANABCPJ1234K
आधार1234-5678-9012
बैंक अकाउंटSBI हल्द्वानी, A/c 12345678901
UAN (PF के लिए)100987654321
ESIC नंबर3456789012
  1. सेव पर क्लिक करो

नेगी भैया और पंत जी के लिए भी यही करो।

ERPLite एम्प्लॉई मास्टर स्क्रीन जिसमें Meera Joshi की ब्योरा दिख रही हैं

चरण 2: तनख़्वाह स्ट्रक्चर सेट अप करो

"अब हमें ERPLite को बताना होगा कि हर एम्प्लॉई की तनख़्वाह कैसी दिखती है।"

  1. जाओ HR > तनख़्वाह स्ट्रक्चर > + न्यू
  2. नाम दो: "स्टैंडर्ड स्ट्रक्चर — ट्रेनी"
  3. कम्पोनेंट्स जोड़ो:
कम्पोनेंटटाइपगणना
बुनियादी तनख़्वाहअर्निंगफ़िक्स्ड अमाउंट: Rs 5,000
HRAअर्निंगबुनियादी का 40%
स्पेशल अलाउंसअर्निंगमिलान अमाउंट
एम्प्लॉई PFडिडक्शनबुनियादी का 12%
एम्प्लॉई ESICडिडक्शनग्रॉस का 0.75%
पेशेवर टैक्सडिडक्शनस्लैब के अनुसार
  1. ग्रॉस तनख़्वाह टारगेट सेट करो: Rs 10,400
  2. सेव पर क्लिक करो
  3. ये स्ट्रक्चर मीरा को असाइन करो

नेगी भैया (ग्रॉस Rs 20,000) और पंत जी (ग्रॉस Rs 12,000) के लिए भी सिमिलर स्ट्रक्चर्स बनाओ।

ERPLite तनख़्वाह स्ट्रक्चर स्क्रीन जिसमें ट्रेनी के कम्पोनेंट्स दिख रहे हैं

चरण 3: मंथली पेरोल जेनरेट करो

"ये एक्साइटिंग पार्ट है — असली तनख़्वाह स्लिप्स जेनरेट करना।"

  1. जाओ HR > पेरोल > प्रक्रिया पेरोल
  2. मंथ सेलेक्ट करो: अक्टूबर 2025
  3. एम्प्लॉइज़ सेलेक्ट करो: ऑल (या ख़ास एम्प्लॉइज़ सेलेक्ट करो)
  4. गणना पर क्लिक करो

ERPLite हर एम्प्लॉई की अर्निंग्स और डिडक्शंस गणना करके समरी दिखाता है:

एम्प्लॉईग्रॉस (Rs)डिडक्शंस (Rs)नेट पे (Rs)
Meera Joshi10,4007789,622
Negi (R.S. Negi)20,0001,50018,500
Pant Ji (H.C. Pant)12,00091011,090
कुल42,4003,18839,212
  1. एम्प्लॉई नेम पर क्लिक करके हर तनख़्वाह स्लिप समीक्षा करो
  2. अप्रूव पेरोल पर क्लिक करो

ERPLite पेरोल प्रक्रियािंग स्क्रीन जिसमें तीन एम्प्लॉइज़ की गणनाेड तनख़्वाहज़ दिख रही हैं

चरण 4: तनख़्वाह स्लिप देखो

मीरा अपनी तनख़्वाह स्लिप देखने के लिए अपना नाम क्लिक करती है:

╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║           V.K. SHARMA & ASSOCIATES                          ║
║           Main Road, Haldwani, Uttarakhand                  ║
║                                                              ║
║                    SALARY SLIP                               ║
║           Month: October 2025                                ║
║                                                              ║
║  Employee: Meera Joshi          Code: EMP-003               ║
║  Designation: Trainee           Department: Accounts        ║
║  PAN: ABCPJ1234K               UAN: 100987654321            ║
║  Bank: SBI Haldwani             A/c: 12345678901            ║
║                                                              ║
║  EARNINGS                 ║  DEDUCTIONS                     ║
║  Basic Salary    5,000    ║  Employee PF        600         ║
║  HRA             2,000    ║  Employee ESIC       78         ║
║  Special Allow.  3,400    ║  Professional Tax   100         ║
║                           ║  TDS                  0         ║
║                           ║                                  ║
║  Total Earnings 10,400    ║  Total Deductions   778         ║
║                                                              ║
║  NET PAY: Rs 9,622                                          ║
║  (Rupees Nine Thousand Six Hundred Twenty-Two Only)         ║
║                                                              ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝

"मेरी पहली तनख़्वाह स्लिप," मीरा धीरे से कहती है। वो इसे देर तक देखती रहती है। ये कागज़ का टुकड़ा बताता है कि वो कमा रही है। वो कॉन्ट्रीब्यूट कर रही है। वो इंनिर्भर है।

शर्मा सर गौर करते हैं। "फ़्रेम करने लायक है, है ना?" वो प्यार से कहते हैं।

चरण 5: पेमेंट प्रक्रिया करो

  1. जाओ HR > पेरोल > पे तनख़्वाहज़
  2. अक्टूबर 2025 का अप्रूव्ड पेरोल सेलेक्ट करो
  3. पेमेंट मोड: बैंक ट्रांसफ़र (NEFT)
  4. ERPLite तीन ट्रांसफ़र्स का पेमेंट बैच जेनरेट करता है:
एम्प्लॉईबैंक अकाउंटरकम (Rs)
Meera JoshiSBI 123456789019,622
R.S. NegiSBI 9876543210118,500
H.C. PantPNB 4567890123411,090
कुल39,212
  1. पेमेंट दर्ज करने के लिए प्रक्रिया पर क्लिक करो

पेरोल की अकाउंटिंग एंट्रीज़

"अब देखते हैं कि बुक्स में क्या होता है," शर्मा सर कहते हैं। "ये वो हिस्सा है जो पेरोल को अकाउंटिंग से जोड़ता है।"

जब पेरोल प्रक्रिया होता है, ERPLite एक जर्नल एंट्री बनाता है:

अकाउंटडेबिट (Rs)क्रेडिट (Rs)
तनख़्वाह ख़र्चा42,400
एम्प्लॉयर PF ख़र्चा2,520
एम्प्लॉयर ESIC ख़र्चा1,378
एम्प्लॉई PF पेएबल2,520
एम्प्लॉयर PF पेएबल2,520
एम्प्लॉई ESIC पेएबल318
एम्प्लॉयर ESIC पेएबल1,378
पेशेवर टैक्स पेएबल350
बैंक अकाउंट (नेट तनख़्वाह)39,212
कुल46,29846,298

मीरा लॉजिक समझती है:

  • तनख़्वाह ख़र्चा (डेबिट Rs 42,400) — कुल ग्रॉस तनख़्वाह बिज़नेस का ख़र्चा है।
  • एम्प्लॉयर PF ख़र्चा (डेबिट Rs 2,520) — एम्प्लॉयर का PF कॉन्ट्रीब्यूशन अतिरिक्त ख़र्चा है।
  • एम्प्लॉयर ESIC ख़र्चा (डेबिट Rs 1,378) — ESIC के लिए भी वही बात।
  • एम्प्लॉई PF पेएबल (क्रेडिट Rs 2,520) — एम्प्लॉइज़ से काटा गया पैसा, PF अथॉरिटीज़ को जमा करना है।
  • एम्प्लॉयर PF पेएबल (क्रेडिट Rs 2,520) — एम्प्लॉयर का मैचिंग कॉन्ट्रीब्यूशन, वो भी जमा करना है।
  • एम्प्लॉई ESIC पेएबल (क्रेडिट Rs 318) — ESIC को जमा करना है।
  • एम्प्लॉयर ESIC पेएबल (क्रेडिट Rs 1,378) — ESIC को जमा करना है।
  • पेशेवर टैक्स पेएबल (क्रेडिट Rs 350) — राज्य सरकार को जमा करना है।
  • बैंक अकाउंट (क्रेडिट Rs 39,212) — एम्प्लॉइज़ को वास्तव में दिया गया पैसा।

"देखो कैसे कुल डेबिट्स और कुल क्रेडिट्स बराबर हैं?" शर्मा सर बताते हैं। "दोनों तरफ Rs 46,298। डबल-एंट्री कभी नाकाम नहीं होती।"


PF और ESIC कब जमा करना है

"TDS की तरह, PF और ESIC की भी डेडलाइन्स हैं," नेगी भैया चेतावनी देते हैं।

पेमेंटजमा करने की डेडलाइनकहाँ
PF (एम्प्लॉई + एम्प्लॉयर)अगले महीने की 15 तारीखEPFO पोर्टल
ESIC (एम्प्लॉई + एम्प्लॉयर)अगले महीने की 15 तारीखESIC पोर्टल
पेशेवर टैक्सराज्य के नियमानुसार (आमतौर पर मंथली या क्वार्टरली)राज्य सरकार का पोर्टल

"अक्टूबर तनख़्वाह के लिए, PF और ESIC 15 नवंबर तक जमा करने होंगे।"

"PF देर से जमा करने पर 12% सालाना इंटरेस्ट लगता है, प्लस डैमेजेज़ जो अमाउंट के 100% तक हो सकते हैं। तो कभी देर मत करो।"


तनख़्वाह पर TDS के बारे में एक क्विक नोट

"तुमने गौर किया कि मीरा का तनख़्वाह पर TDS ज़ीरो है," शर्मा सर कहते हैं। "ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी एनुअल आमदनी न्यू टैक्स रिज़ीम के तहत टैक्सेबल लिमिट से कम है। लेकिन ज़्यादा तनख़्वाह वाले एम्प्लॉइज़ के लिए, एम्प्लॉयर को सेक्शन 192 के तहत हर महीने TDS गणना और काटना होता है।"

"एम्प्लॉयर को कैसे पता कि कितना TDS काटना है?"

"एम्प्लॉयर एम्प्लॉई की कुल एनुअल आमदनी एस्टिमेट करता है, पूरे साल का कुल टैक्स गणना करता है, और उसे 12 से डिवाइड करता है। वो मंथली अमाउंट हर तनख़्वाह से TDS के रूप में काटा जाता है।"

"हमारे तीन एम्प्लॉइज़ के लिए अभी इसकी चिंता नहीं। लेकिन जानना अच्छा है।"


पेरोल कंप्लायंस कैलेंडर

शर्मा सर की दीवार पर एक कैलेंडर है जिसमें लाल गोलों में डेट्स मार्क्ड हैं। वो पेरोल डेट्स जोड़ते हैं।

तारीखकाम
महीने का आखिरी दिनपेरोल प्रक्रिया करो, तनख़्वाहज़ पे करो
अगले महीने की 7 तारीखतनख़्वाह पर TDS जमा करो (अगर एप्लिकेबल हो)
अगले महीने की 15 तारीखPF कॉन्ट्रीब्यूशंस जमा करो
अगले महीने की 15 तारीखESIC कॉन्ट्रीब्यूशंस जमा करो
क्वार्टरलीपेशेवर टैक्स रिटर्न फ़ाइल करो
सालाना (31 मई)PF एनुअल रिटर्न फ़ाइल करो
सालानाएम्प्लॉइज़ को फ़ॉर्म 16 दो (तनख़्वाह TDS सर्टिफ़िकेट)

"पेरोल एक बार का काम नहीं है," शर्मा सर कहते हैं। "ये हर महीने होता है, और डेडलाइन्स सख्त हैं। चूको तो पेनल्टी है।"


क्विक रीकैप — चैप्टर 24

पेरोल = एम्प्लॉइज़ की तनख़्वाह सभी डिडक्शंस के साथ गणना करना और नेट अमाउंट पे करना।

CTC > ग्रॉस तनख़्वाह > नेट तनख़्वाह (टेक-होम)।

तनख़्वाह कम्पोनेंट्स: बुनियादी (CTC का 40-50%), HRA (बुनियादी का 40-50%), स्पेशल अलाउंस (मिलान फ़िगर)।

PF: एम्प्लॉई का बुनियादी का 12% + एम्प्लॉयर का 12%। अनिवार्य रिटायरमेंट सेविंग्स।

ESIC: एम्प्लॉई का ग्रॉस का 0.75% + एम्प्लॉयर का 3.25%। एप्लिकेबल अगर ग्रॉस तनख़्वाह Rs 21,000/माह या कम हो। हेल्थ और इंश्योरेंस फ़ायदे देता है।

पेशेवर टैक्स: तनख़्वाह से काटा जाने वाला स्टेट-लेवल टैक्स। स्टेट और तनख़्वाह स्लैब के अनुसार अलग-अलग होता है।

ERPLite में: तनख़्वाह स्ट्रक्चर्स के साथ एम्प्लॉइज़ सेट अप करो, मंथली पेरोल प्रक्रिया करो, तनख़्वाह स्लिप्स जेनरेट करो, और पेमेंट्स करो।

डेडलाइन्स: PF और ESIC अगले महीने की 15 तारीख तक। TDS अगले महीने की 7 तारीख तक।


अभ्यास अभ्यास — खुद करके देखो

अभ्यास 1: नीचे दी गई ब्योरा वाले एम्प्लॉई की पूरी तनख़्वाह स्लिप गणना करो:

  • बुनियादी तनख़्वाह: Rs 8,000
  • HRA: Rs 3,200 (बुनियादी का 40%)
  • स्पेशल अलाउंस: Rs 4,800
  • ग्रॉस तनख़्वाह: Rs 16,000

गणना करो: एम्प्लॉई PF, एम्प्लॉई ESIC, पेशेवर टैक्स, कुल डिडक्शंस, और नेट तनख़्वाह।

अभ्यास 2: एक कंपनी में 4 एम्प्लॉइज़ हैं जिनकी ग्रॉस तनख़्वाहज़ हैं: Rs 15,000, Rs 18,000, Rs 22,000, और Rs 10,000।

a) कौन से एम्प्लॉइज़ ESIC में कवर्ड हैं? (हिंट: ESIC लागू होती है अगर ग्रॉस Rs 21,000 या कम हो।)

b) सभी 4 एम्प्लॉइज़ का कुल एम्प्लॉई PF गणना करो। (मान लो सभी के लिए बुनियादी = ग्रॉस का 50%।)

अभ्यास 3: नीचे दिए गए पेरोल के लिए जर्नल एंट्री लिखो:

  • कुल ग्रॉस तनख़्वाह: Rs 50,000
  • एम्प्लॉई PF: Rs 3,000
  • एम्प्लॉयर PF: Rs 3,000
  • एम्प्लॉई ESIC: Rs 200
  • एम्प्लॉयर ESIC: Rs 867
  • पेशेवर टैक्स: Rs 400
  • बैंक से दी गई नेट तनख़्वाह: Rs 46,400

(हिंट: कुल डेबिट, कुल क्रेडिट के बराबर होना चाहिए।)

अभ्यास 1 के उत्तर:

  • एम्प्लॉई PF: 8,000 का 12% = Rs 960
  • एम्प्लॉई ESIC: 16,000 का 0.75% = Rs 120
  • पेशेवर टैक्स: Rs 100 (तनख़्वाह 8,334 से 16,667 के बीच है)
  • कुल डिडक्शंस: 960 + 120 + 100 = Rs 1,180
  • नेट तनख़्वाह: 16,000 - 1,180 = Rs 14,820

अभ्यास 2 के उत्तर: a) तीन एम्प्लॉइज़ कवर्ड हैं: Rs 15,000, Rs 18,000, और Rs 10,000। Rs 22,000 ग्रॉस वाला एम्प्लॉई Rs 21,000 ESIC लिमिट से ऊपर है। b) बुनियादी (ग्रॉस का 50%): 7,500 + 9,000 + 11,000 + 5,000 = 32,500। कुल एम्प्लॉई PF: 32,500 का 12% = Rs 3,900।


फ़न फ़ैक्ट

PF के बारे में कुछ इंटरेस्टिंग जानकारी। एम्प्लॉइज़ प्रॉविडेंट फ़ंड व्यवस्थितेशन (EPFO) दुनिया के सबसे बड़े सोशल सिक्योरिटी व्यवस्थितेशंस में से एक है। इसके पास Rs 18 लाख करोड़ से ज़्यादा एसेट्स हैं और 28 करोड़ से ज़्यादा अकाउंट्स हैं। ये लगभग यूनाइटेड स्टेट्स की पूरी आबादी जितने अकाउंट्स हैं!

जब शर्मा सर ने 1990 के दशक में एक यंग CA के रूप में काम शुरू किया, तो PF रिकॉर्ड हाथ से बड़ी-बड़ी रजिस्टर्स में रखे जाते थे। आज सब कुछ ऑनलाइन है। तुम अपने फ़ोन पर UMANG ऐप से या अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 011-22901406 पर मिस्ड कॉल देकर अपना PF बैलेंस चेक कर सकते हो।

और एक मोटिवेशन: PF वेल्थ बनाने का शानदार ज़रिया है। अगर मीरा Rs 600 प्रति माह कॉन्ट्रीब्यूट करती है (एम्प्लॉयर से Rs 600 मैच होने पर) 8.25% इंटरेस्ट पर, तो 60 साल की उम्र तक उसका PF बैलेंस Rs 50 लाख से ज़्यादा होगा। जवानी में शुरू करना ही सबसे बड़ा फ़र्क डालता है।

अगले चैप्टर में मीरा को पता चलता है कि ट्रक्स और कंप्यूटर्स जैसी चीज़ें भी समय के साथ अपनी वैल्यू खो देती हैं। फ़िक्स्ड एसेट्स और डेप्रिसिएशन — सुनने में पेचीदा लगता है, लेकिन शर्मा सर इसे आसान बना देते हैं।


फ़िक्स्ड एसेट्स और डेप्रिसिएशन (मूल्यह्रास)

आज बिष्ट जी बहुत खुश हैं। वो कागज़ों का एक फ़ोल्डर और चौड़ी मुस्कान लिए शर्मा सर के दफ़्तर में आते हैं। "शर्मा सर, मैंने नया डिलीवरी ट्रक खरीदा! टाटा इंट्रा V30 — Rs 8,00,000 का। अब मेरी डिलीवरीज़ अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, यहाँ तक कि मुनस्यारी भी समय पर पहुँचेंगी!" शर्मा सर बधाई देते हैं और फिर कहते हैं, "बहुत बढ़िया, बिष्ट जी। अब इसे तुम्हारी बुक्स में सही से दर्ज करना होगा। मीरा, तुम्हें पता है फ़िक्स्ड एसेट क्या होता है?" मीरा ना में सिर हिलाती है। शर्मा सर कुर्सी खींचते हैं। "नया लेसन शुरू करने का समय है।"

बिष्ट जी अपने फ़ोन पर नए डिलीवरी ट्रक की तस्वीरें दिखा रहे हैं जबकि शर्मा सर और मीरा देख रहे हैं


फ़िक्स्ड एसेट्स क्या होते हैं?

"मीरा, जब बिष्ट जी किसान से हल्दी खरीदते हैं, तो उसका क्या करते हैं?"

"अपने ग्राहकों को बेचते हैं," मीरा जवाब देती है।

"सही। हल्दी आती है और जाती है। ये स्टॉक है — बेचने के लिए। लेकिन ये ट्रक — क्या बिष्ट जी ये ट्रक बेचने वाले हैं?"

"नहीं। वो इसे डिलीवरीज़ के लिए इस्तेमाल करेंगे।"

"बिल्कुल। फ़िक्स्ड एसेट वो चीज़ है जो बिज़नेस खरीदता है बेचने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए — आमतौर पर एक साल से ज़्यादा।"

फ़िक्स्ड एसेट = कोई चीज़ जो बिज़नेस के पास होती है और जिसे वो एक साल से ज़्यादा अपने ऑपरेशंस चलाने के लिए इस्तेमाल करता है। ये बेचने के लिए नहीं होती। उदाहरण: बिल्डिंग, व्हीकल, कंप्यूटर, फ़र्नीचर, मशीनरी।

शर्मा सर आम फ़िक्स्ड एसेट्स की सूची बनाते हैं:

फ़िक्स्ड एसेटकिसके लिए इस्तेमाल होता हैसामान्य जीवनकाल
बिल्डिंग / दफ़्तरकाम करने की जगह20-60 साल
व्हीकल (ट्रक, कार, स्कूटर)डिलीवरी, यात्रा8-15 साल
कंप्यूटर / लैपटॉपदफ़्तर वर्क, अकाउंटिंग3-6 साल
फ़र्नीचर (डेस्क, चेयर, शेल्फ़)दफ़्तर सेटअप10-15 साल
मशीनरीमैन्यूफ़ैक्चरिंग, प्रक्रियािंग10-20 साल
एयर कंडीशनरदफ़्तर को ठंडा रखना8-10 साल

"बिष्ट जी के बिज़नेस के बारे में सोचो। उनके पास है:"

एसेटवैल्यू (Rs)
डिलीवरी ट्रक (नया)8,00,000
दुकान का फ़र्नीचर50,000
कंप्यूटर35,000
तराज़ू (वेइंग मशीन)15,000

"ये सब फ़िक्स्ड एसेट्स हैं। ये बिज़नेस को चलाने में मदद करते हैं, लेकिन बेचने के लिए नहीं हैं।"

फ़िक्स्ड एसेट्स बनाम करंट एसेट्स

"फ़िक्स्ड एसेट्स और करंट एसेट्स में एक इम्पॉर्टेंट अंतर है," शर्मा सर जोड़ते हैं।

फ़िक्स्ड एसेट्सकरंट एसेट्स
लंबे समय तक इस्तेमाल होते हैं (1 साल से ज़्यादा)1 साल के अंदर खत्म या बेचे जाते हैं
बेचने के लिए नहीं होतेबेचने या कैश में बदलने के लिए होते हैं
उदाहरण: बिल्डिंग, ट्रक, कंप्यूटरउदाहरण: स्टॉक, कैश, ग्राहकों से मिलने वाला पैसा
समय के साथ वैल्यू कम होती है (डेप्रिसिएशन)खरीद-बिक्री के साथ वैल्यू बदलती है

"बिष्ट जी का ट्रक फ़िक्स्ड एसेट है। बिष्ट जी का हल्दी का स्टॉक करंट एसेट है।"


फ़िक्स्ड एसेट्स की वैल्यू क्यों कम होती है?

शर्मा सर मार्कर उठाते हैं और व्हाइटबोर्ड पर दो ट्रक बनाते हैं — एक चमकदार और नया, एक पुराना और खराब।

"मीरा, अगर कोई तुम्हें एक ब्रांड-न्यू ट्रक और सेम मॉडल का 5 साल पुराना ट्रक पेशकश करे, तो तुम किसके लिए ज़्यादा पैसे दोगी?"

"नए वाले के लिए, ज़ाहिर तौर पर।"

"क्यों?"

"क्योंकि पुराना इस्तेमाल हो चुका है। उसमें समस्याएँ हो सकती हैं। पार्ट्स घिसे हो सकते हैं। वो... पुराना है।"

"बिल्कुल। समय के साथ, फ़िक्स्ड एसेट्स की वैल्यू कम होती है। ये तीन कारणों से होता है:"

1. टूट-फूट (वियर एंड टियर)

"ट्रक हर दिन उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों पर चलता है — हल्द्वानी से अल्मोड़ा, बागेश्वर से मुनस्यारी। इंजन घिसता है। टायर्स घिसते हैं। बॉडी पर खरोंचें और गड्ढे आते हैं। हर किलोमीटर इसकी वैल्यू कम करता है।"

2. समय बीतना (पैसेज ऑफ़ टाइम)

"भले ही ट्रक गैराज में खड़ा रहे और कभी इस्तेमाल न हो, तब भी वैल्यू कम होती है। क्यों? क्योंकि नया, बेहतर मॉडल आ जाता है। टेक्नोलॉजी सुधार हो जाती है। पुराना ट्रक आउटडेटेड हो जाता है। 2025 का ट्रक 2028 में कम वैल्यू का होगा भले ही कभी चलाया ही न गया हो।"

3. ऑब्सोलेसेंस (अप्रचलन)

"आज खरीदा गया कंप्यूटर 4-5 साल में स्लो और आउटडेटेड हो जाएगा। सॉफ़्टवेयर बदल जाते हैं। हार्डवेयर सुधार हो जाता है। पुराना कंप्यूटर साथ नहीं दे पाता। ये ऑब्सोलेसेंस है — एसेट इसलिए बेकार नहीं होता कि टूट गया, बल्कि इसलिए कि दुनिया आगे बढ़ गई।"

तीन पैनल्स जिनमें एक ट्रक दिखाया गया है: ईयर 1 (चमकदार और नया, Rs 8,00,000), ईयर 3 (कुछ खरोंचें, Rs 5,47,200), ईयर 5 (घिसा हुआ, Rs 3,72,736)


डेप्रिसिएशन क्या है?

"अब अकाउंटिंग वाला हिस्सा आता है," शर्मा सर कहते हैं। "हम जानते हैं कि फ़िक्स्ड एसेट्स की वैल्यू कम होती है। अकाउंटिंग को ये रिफ़्लेक्ट करना चाहिए। हम ट्रक को अपनी बुक्स में हमेशा Rs 8,00,000 पर नहीं दिखा सकते जबकि उसकी असली वैल्यू कम हो रही है।"

डेप्रिसिएशन = फ़िक्स्ड एसेट की वैल्यू को उसकी उपयोगी लाइफ़ (उपयोगी जीवनकाल) में धीरे-धीरे कम करने का प्रक्रिया। ये एक ख़र्चा है जो हर साल रिकॉर्ड किया जाता है।

"ऐसे सोचो। बिष्ट जी ने ट्रक Rs 8,00,000 में खरीदा। वो इसे करीब 10-15 साल इस्तेमाल करेंगे। ट्रक की लागत उन सभी सालों में बँटनी चाहिए — खरीद के साल में पूरी चार्ज नहीं होनी चाहिए।"

"ईयर 1 में ही पूरी चार्ज क्यों नहीं?" मीरा पूछती है।

"अच्छा सवाल। अगर बिष्ट जी पूरे Rs 8,00,000 ईयर 1 में ख़र्चा कर दें, तो उस साल मुनाफ़ा बहुत कम दिखेगा — और ईयर 2, 3, 4 में बहुत ज़्यादा। ये सही तस्वीर नहीं दिखाता। ट्रक हर साल इस्तेमाल हो रहा है, तो इसकी लागत का एक हिस्सा हर साल ख़र्चा होना चाहिए।"

एक सिंपल उदाहरण: सोचो तुमने मंदिर के लिए 365 अगरबत्तियों का एक बड़ा डिब्बा खरीदा। तुम ये नहीं कहोगी, "मैंने सारी अगरबत्तियाँ पहले दिन इस्तेमाल कर लीं।" तुम हर दिन एक अगरबत्ती जलाती हो। इसी तरह, डेप्रिसिएशन किसी एसेट की लागत को उन दिनों, महीनों, और सालों में फैला देता है जिनमें वो इस्तेमाल होता है।


डेप्रिसिएशन की दो मेथड्स

"दो मेन मेथड्स हैं," शर्मा सर समझाते हैं। "एक सिंपल और बराबर वाली। दूसरी इंडियन टैक्स लॉ में इस्तेमाल होती है।"

मेथड 1: स्ट्रेट लाइन मेथड (SLM)

"इस मेथड में, तुम हर साल बराबर डेप्रिसिएशन चार्ज करते हो।"

फ़ॉर्मूला:

एनुअल डेप्रिसिएशन = (एसेट की लागत - रेज़िड्यूअल वैल्यू) / उपयोगी लाइफ़ (सालों में)

रेज़िड्यूअल वैल्यू (जिसे स्क्रैप वैल्यू भी कहते हैं) वो है जो एसेट अपनी ज़िंदगी के बिल्कुल अंत में वर्थ हो सकता है। सिम्प्लिसिटी के लिए, इसे अक्सर ज़ीरो या छोटी रकम मान लिया जाता है।

उदाहरण: बिष्ट जी के ट्रक की लागत Rs 8,00,000। उपयोगी लाइफ़ = 10 साल। रेज़िड्यूअल वैल्यू = Rs 50,000।

एनुअल डेप्रिसिएशन = (8,00,000 - 50,000) / 10 = Rs 75,000 प्रति वर्ष

सालओपनिंग वैल्यू (Rs)डेप्रिसिएशन (Rs)क्लोज़िंग वैल्यू (Rs)
18,00,00075,0007,25,000
27,25,00075,0006,50,000
36,50,00075,0005,75,000
45,75,00075,0005,00,000
55,00,00075,0004,25,000

"देखो? हर साल सेम अमाउंट। सिंपल और समझने में आसान।"

मेथड 2: रिटन डाउन वैल्यू (WDV) मेथड

"ये मेथड इंडियन आमदनी टैक्स नियम में इस्तेमाल होती है। इसमें, तुम हर साल बची हुई वैल्यू का एक फ़िक्स्ड परसेंटेज चार्ज करते हो।"

फ़ॉर्मूला:

एनुअल डेप्रिसिएशन = साल की शुरुआत में WDV x डेप्रिसिएशन रेट

"रेट आमदनी टैक्स एक्ट द्वारा हर तरह के एसेट के लिए फ़िक्स किया गया है।"

उदाहरण: वही ट्रक। Rs 8,00,000। मोटर व्हीकल्स के लिए IT एक्ट डेप्रिसिएशन रेट = 15%।

सालओपनिंग WDV (Rs)डेप्रिसिएशन @ 15% (Rs)क्लोज़िंग WDV (Rs)
18,00,0001,20,0006,80,000
26,80,0001,02,0005,78,000
35,78,00086,7004,91,300
44,91,30073,6954,17,605
54,17,60562,6413,54,964

"अंतर गौर करो? WDV में, डेप्रिसिएशन अमाउंट हर साल कम होता जाता है। ईयर 1 में सबसे ज़्यादा डेप्रिसिएशन (Rs 1,20,000)। ईयर 5 में कम (Rs 62,641)। ये लॉजिकल है क्योंकि नया एसेट शुरुआती सालों में ज़्यादा वैल्यू खोता है।"


दोनों मेथड्स की तुलना

फ़ीचरस्ट्रेट लाइन (SLM)रिटन डाउन वैल्यू (WDV)
डेप्रिसिएशन अमाउंटहर साल बराबरहर साल कम होता जाता है
किसके लिए इस्तेमाल होती हैकंपनीज़ एक्ट (फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स)आमदनी टैक्स एक्ट (टैक्स कैलकुलेशंस)
गणना करने में आसान?हाँथोड़ा ज़्यादा काम
ज़्यादा यथार्थवादी?कम — एसेट्स बराबर वैल्यू नहीं खोतेज़्यादा — एसेट्स शुरू में ज़्यादा वैल्यू खोते हैं
वैल्यू ज़ीरो पहुँचती है?हाँ (अंततः)नहीं (कम होती रहती है लेकिन ज़ीरो कभी नहीं होती)

"अभ्यास में," शर्मा सर कहते हैं, "तुम फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स (कंपनीज़ एक्ट के अनुसार) के लिए SLM इस्तेमाल कर सकती हो और टैक्स गणना (आमदनी टैक्स एक्ट के अनुसार) करने के लिए WDV। दोनों इम्पॉर्टेंट हैं।"

"इस दफ़्तर में हमारे काम के लिए, हम ज़्यादातर WDV इस्तेमाल करते हैं क्योंकि हमारे अधिकतर क्लाइंट्स छोटे बिज़नेसेज़ और प्रोपराइटरशिप्स हैं जो आमदनी टैक्स कैलकुलेशंस पर ध्यान करते हैं।"


IT एक्ट डेप्रिसिएशन रेट्स

मीरा शर्मा सर के रेफ़रेंस चार्ट से इम्पॉर्टेंट रेट्स कॉपी करती है:

एसेट श्रेणीIT एक्ट रेट (WDV)
बिल्डिंग (रेज़िडेंशियल)5%
बिल्डिंग (कमर्शियल/कारख़ाना)10%
फ़र्नीचर एंड फ़िटिंग्स10%
प्लांट एंड मशीनरी (जनरल)15%
मोटर व्हीकल्स (सभी प्रकार)15%
कंप्यूटर्स और लैपटॉप्स40%
सॉफ़्टवेयर40%
इन्टैंजिबल एसेट्स (पेटेंट्स, आदि)25%

"कंप्यूटर्स 40% पर डेप्रिशिएट होते हैं!" मीरा कहती है। "ये तो बहुत तेज़ है।"

"हाँ। क्योंकि कंप्यूटर्स बहुत जल्दी आउटडेटेड हो जाते हैं। आज की दुनिया में 3 साल पुराना कंप्यूटर व्यावहारिकी पुरानी बात हो जाता है। टैक्स लॉ इसे रिकग्नाइज़ करता है और ज़्यादा डेप्रिसिएशन रेट अलाउ करता है।"

"व्हीकल्स 15% पर मॉडरेट हैं — वो ज़्यादा चलते हैं।"

"और बिल्डिंग्स 5-10% पर — वो सबसे लंबा चलती हैं।"


हाफ़-ईयर नियम (आधे साल का नियम)

"एक और नियम जानना ज़रूरी है," शर्मा सर कहते हैं। "अगर कोई एसेट फ़ाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में (यानी 30 सितंबर के बाद) खरीदा गया, तो उस साल सिर्फ आधी सामान्य डेप्रिसिएशन मिलती है।"

"फ़ाइनेंशियल ईयर अप्रैल से मार्च तक चलता है। अगर बिष्ट जी ने ट्रक 15 अक्टूबर को खरीदा — ये दूसरी छमाही में है — तो पहले साल की डेप्रिसिएशन होगी:"

हाफ़-ईयर डेप्रिसिएशन = Rs 1,20,000 / 2 = Rs 60,000

"लेकिन अगर उन्होंने 15 जून (पहली छमाही) को खरीदा होता, तो पूरे Rs 1,20,000 मिलते।"

"ये टैक्स योजना के लिए इम्पॉर्टेंट है," नेगी भैया जोड़ते हैं। "अगर कोई क्लाइंट सितंबर या अक्टूबर में कोई बड़ा एसेट खरीदने की सोच रहा है, तो हम कभी-कभी एडवाइज़ करते हैं कि 30 सितंबर से पहले खरीद लो ताकि पूरी डेप्रिसिएशन मिले।"


मीरा बिष्ट जी का ट्रक ERPLite में जोड़ती है

"ठीक है, चलो सॉफ़्टवेयर में करते हैं," नेगी भैया कहते हैं।

चरण 1: एसेट श्रेणियाँ सेट अप करो

  1. जाओ मास्टर्स > एसेट श्रेणियाँ
  2. चेक करो "मोटर व्हीकल्स" है या नहीं। अगर नहीं, तो + न्यू श्रेणी पर क्लिक करो
फ़ील्डवैल्यू
श्रेणी नेममोटर व्हीकल्स
डेप्रिसिएशन मेथडWDV (रिटन डाउन वैल्यू)
डेप्रिसिएशन रेट15%
एसेट अकाउंटफ़िक्स्ड एसेट्स — मोटर व्हीकल्स
डेप्रिसिएशन ख़र्चा अकाउंटडेप्रिसिएशन ख़र्चा
एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन अकाउंटएक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन — मोटर व्हीकल्स
  1. सेव पर क्लिक करो

"मैं बाकी श्रेणियाँ भी चेक करती हूँ," मीरा कहती है। उसे मिलते हैं:

श्रेणीमेथडरेट
बिल्डिंगWDV10%
फ़र्नीचर एंड फ़िटिंग्सWDV10%
कंप्यूटर्सWDV40%
प्लांट एंड मशीनरीWDV15%
मोटर व्हीकल्सWDV15%

"अच्छा — सब सेट अप है।"

ERPLite एसेट श्रेणियाँ मास्टर लिस्ट जिसमें पाँच श्रेणियाँ अपनी डेप्रिसिएशन रेट्स के साथ दिख रही हैं

चरण 2: नया एसेट जोड़ो

  1. जाओ एसेट्स > फ़िक्स्ड एसेट्स > + न्यू एसेट
  2. ब्योरा भरो:
फ़ील्डवैल्यू
एसेट नेमडिलीवरी ट्रक — टाटा इंट्रा V30
एसेट कोडFA-VEH-001
श्रेणीमोटर व्हीकल्स
परचेज़ डेट15-Oct-2025
परचेज़ दामRs 8,00,000
वेंडरटाटा मोटर्स डीलर, हल्द्वानी
इन्वॉइस नंबरTM/2025/4567
जगहबिष्ट ट्रेडर्स, हल्द्वानी
रजिस्ट्रेशन नंबरUK07-AB-1234
  1. ERPLite अपने-आप पिक करता है:

    • डेप्रिसिएशन मेथड: WDV
    • डेप्रिसिएशन रेट: 15%
    • हाफ़-ईयर नियम एप्लिकेबल: यस (30 सितंबर के बाद खरीदा)
  2. सेव पर क्लिक करो

"ट्रक अब बिष्ट जी की बुक्स में है," नेगी भैया कहते हैं।

ERPLite न्यू एसेट स्क्रीन जिसमें डिलीवरी ट्रक की ब्योरा Rs 8,00,000 परचेज़ दाम के साथ दिख रही हैं

चरण 3: परचेज़ एंट्री

जब एसेट सेव होता है, ERPLite एक जर्नल एंट्री बनाता है:

अकाउंटडेबिट (Rs)क्रेडिट (Rs)
फ़िक्स्ड एसेट्स — मोटर व्हीकल्स8,00,000
बैंक अकाउंट / वेंडर (टाटा मोटर्स)8,00,000

"ट्रक एक एसेट है, तो डेबिट साइड में जाएगा। पैसा बाहर गया (या पेएबल बनी), तो बैंक/वेंडर क्रेडिट होगा।"


3 साल की डेप्रिसिएशन गणना करना

"अब 3 साल की डेप्रिसिएशन गणना करते हैं," शर्मा सर कहते हैं। "मीरा, पहले कागज़ पर ट्राई करो, फिर ERPLite से चेक करेंगे।"

ईयर 1 (2025-26): हाफ़-ईयर नियम लागू

ट्रक 15 अक्टूबर 2025 को खरीदा गया — फ़ाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में।

रकम (Rs)
ओपनिंग WDV8,00,000
डेप्रिसिएशन @ 15%1,20,000
हाफ़-ईयर नियम (50%)60,000
क्लोज़िंग WDV7,40,000

ईयर 2 (2026-27): पूरा साल

रकम (Rs)
ओपनिंग WDV7,40,000
डेप्रिसिएशन @ 15%1,11,000
क्लोज़िंग WDV6,29,000

ईयर 3 (2027-28): पूरा साल

रकम (Rs)
ओपनिंग WDV6,29,000
डेप्रिसिएशन @ 15%94,350
क्लोज़िंग WDV5,34,650

समरी टेबल

सालओपनिंग WDV (Rs)डेप्रिसिएशन (Rs)क्लोज़िंग WDV (Rs)
2025-268,00,00060,000 (हाफ़ ईयर)7,40,000
2026-277,40,0001,11,0006,29,000
2027-286,29,00094,3505,34,650
3 साल की कुल डेप्रिसिएशन2,65,350

"तो 3 साल बाद, बिष्ट जी के Rs 8,00,000 के ट्रक की बुक वैल्यू उनके अकाउंट्स में Rs 5,34,650 है। कुल डेप्रिसिएशन Rs 2,65,350 हुआ।"

मीरा अपनी कैलकुलेशंस चेक करती है। मैच कर रही हैं। वो मुस्कुराती है।

"शानदार काम," शर्मा सर कहते हैं। "गौर करो कैसे डेप्रिसिएशन अमाउंट हर साल कम हो रहा है? ये WDV की नेचर है — शुरुआती सालों में ज़्यादा, बाद में कम।"


ERPLite में डेप्रिसिएशन रन करना

चरण 4: डेप्रिसिएशन गणना करो

  1. जाओ एसेट्स > गणना डेप्रिसिएशन
  2. फ़ाइनेंशियल ईयर सेलेक्ट करो: 2025-26
  3. गणना पर क्लिक करो

ERPLite सभी एसेट्स की डेप्रिसिएशन गणना करता है:

एसेटश्रेणीओपनिंग WDV (Rs)रेटहाफ़ ईयर?डेप्रिसिएशन (Rs)क्लोज़िंग WDV (Rs)
डिलीवरी ट्रकमोटर व्हीकल्स8,00,00015%यस60,0007,40,000
कंप्यूटरकंप्यूटर्स35,00040%नो14,00021,000
फ़र्नीचरफ़र्नीचर50,00010%नो5,00045,000
वेइंग मशीनप्लांट एंड मशीनरी15,00015%नो2,25012,750
कुल9,00,00081,2508,18,750
  1. समीक्षा करो और पोस्ट डेप्रिसिएशन पर क्लिक करो

ERPLite डेप्रिसिएशन गणना स्क्रीन जिसमें चार एसेट्स की गणनाेड डेप्रिसिएशन दिख रही है

चरण 5: डेप्रिसिएशन जर्नल एंट्री

ERPLite ये जर्नल एंट्री बनाता है:

अकाउंटडेबिट (Rs)क्रेडिट (Rs)
डेप्रिसिएशन ख़र्चा81,250
एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन — मोटर व्हीकल्स60,000
एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन — कंप्यूटर्स14,000
एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन — फ़र्नीचर5,000
एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन — प्लांट एंड मशीनरी2,250
कुल81,25081,250

मीरा एंट्री स्टडी करती है।

"दो नए टर्म्स दिखे," वो कहती है। "डेप्रिसिएशन ख़र्चा और एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन। इनमें क्या अंतर है?"

शर्मा सर समझाते हैं:

  • डेप्रिसिएशन ख़र्चा = इस साल की डेप्रिसिएशन। ये मुनाफ़ा एंड घाटा स्टेटमेंट में जाती है। ये एक ख़र्चा है जो मुनाफ़ा कम करता है।
  • एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन = अब तक चार्ज की गई कुल डेप्रिसिएशन, सभी सालों की मिलाकर। ये बैलेंस शीट में बैठती है, एसेट के अगेंस्ट एक नेगेटिव के रूप में।

"बैलेंस शीट में, एसेट्स ऐसे दिखते हैं:"

मदरकम (Rs)
मोटर व्हीकल्स (लागत)8,00,000
लेस: एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन(60,000)
नेट बुक वैल्यू (WDV)7,40,000

"लागत हमेशा Rs 8,00,000 रहती है — ये वो है जो वास्तव में पे किया गया। लेकिन एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन हर साल बढ़ती है, तो नेट बुक वैल्यू कम होती जाती है।"


जब कोई एसेट बेचा जाए तो क्या होता है?

"शर्मा सर, अगर बिष्ट जी 3 साल बाद ट्रक बेच दें तो?" मीरा पूछती है।

"बहुत अच्छा सवाल। जब फ़िक्स्ड एसेट बेचा जाता है, तो तीन चीज़ें हो सकती हैं।"

केस 1: बुक वैल्यू से ज़्यादा में बेचा (मुनाफ़ा)

अगर ट्रक की बुक वैल्यू Rs 5,34,650 है और बिष्ट जी इसे Rs 6,00,000 में बेचते हैं:

बिक्री पर मुनाफ़ा = Rs 6,00,000 - Rs 5,34,650 = Rs 65,350

ये मुनाफ़ा टैक्सेबल है।

केस 2: बुक वैल्यू से कम में बेचा (घाटा)

अगर बिष्ट जी इसे Rs 4,50,000 में बेचते हैं:

बिक्री पर घाटा = Rs 5,34,650 - Rs 4,50,000 = Rs 84,650

ये घाटा टैक्सेबल आमदनी कम कर सकता है।

केस 3: बिल्कुल बुक वैल्यू पर बेचा

कोई मुनाफ़ा नहीं, कोई घाटा नहीं। रियल लाइफ़ में ऐसा बहुत कम होता है।

"ERPLite इसे भी सँभालता है," नेगी भैया कहते हैं। "जब तुम कोई एसेट डिस्पोज़ करती हो, तो सेल दाम डालो और ERPLite अपने-आप मुनाफ़ा या घाटा गणना कर देगा।"


बिष्ट जी का एसेट रजिस्टर

"एक आखिरी बात," शर्मा सर कहते हैं। "हर बिज़नेस को एक एसेट रजिस्टर रखनी चाहिए — सभी फ़िक्स्ड एसेट्स की ब्योरा वाली सूची।"

ERPLite इसे अपने-आप जेनरेट करता है। यहाँ बिष्ट जी का है:

एसेटश्रेणीपरचेज़ डेटलागत (Rs)एक्यूम. डेप. (Rs)WDV (Rs)जगह
डिलीवरी ट्रकमोटर व्हीकल्स15-Oct-20258,00,00060,0007,40,000हल्द्वानी
कंप्यूटरकंप्यूटर्स01-Apr-202435,00014,00021,000दफ़्तर
फ़र्नीचरफ़र्नीचर01-Apr-202450,0005,00045,000दफ़्तर
वेइंग मशीनप्लांट एंड मशीनरी01-Apr-202415,0002,25012,750गोदाम
कुल9,00,00081,2508,18,750

"ये रजिस्टर इंश्योरेंस, टैक्स कैलकुलेशंस, ऑडिट्स, और लोन एप्लिकेशंस के लिए इम्पॉर्टेंट है," शर्मा सर कहते हैं।


क्विक रीकैप — चैप्टर 25

फ़िक्स्ड एसेट्स = वो चीज़ें जो बिज़नेस के पास हैं और 1 साल से ज़्यादा इस्तेमाल होती हैं (बिल्डिंग, व्हीकल, कंप्यूटर, फ़र्नीचर)। बेचने के लिए नहीं।

डेप्रिसिएशन = फ़िक्स्ड एसेट की वैल्यू को बुक्स में धीरे-धीरे कम करना। वियर एंड टियर, पुरानापन, और ऑब्सोलेसेंस को रिफ़्लेक्ट करता है।

दो मेथड्स:

  • स्ट्रेट लाइन (SLM): हर साल बराबर डेप्रिसिएशन। फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में इस्तेमाल होती है।
  • रिटन डाउन वैल्यू (WDV): बची हुई वैल्यू का परसेंटेज। शुरुआती सालों में ज़्यादा डेप्रिसिएशन। आमदनी टैक्स के लिए इस्तेमाल होती है।

मुख्य IT एक्ट रेट्स (WDV): व्हीकल्स 15%, कंप्यूटर्स 40%, फ़र्नीचर 10%, बिल्डिंग 10%.

हाफ़-ईयर नियम: अगर एसेट 30 सितंबर के बाद खरीदा, तो पहले साल सिर्फ 50% डेप्रिसिएशन।

जर्नल एंट्री: डेप्रिसिएशन ख़र्चा (Dr) और एक्यूमुलेटेड डेप्रिसिएशन (Cr)।

ERPLite में: रेट्स के साथ एसेट श्रेणियाँ सेट अप करो, एसेट्स जोड़ो, और डेप्रिसिएशन अपने-आप गणना करो।


अभ्यास अभ्यास — खुद करके देखो

अभ्यास 1: नीचे दी गई चीज़ों को फ़िक्स्ड एसेट या करंट एसेट में वर्गीकृत करो:

चीज़फ़िक्स्ड या करंट?
दफ़्तर में इस्तेमाल होने वाला कंप्यूटर_______
गोदाम में हल्दी का स्टॉक_______
बैंक में कैश_______
दफ़्तर में एयर कंडीशनर_______
दफ़्तर इस्तेमाल के लिए खरीदा गया प्रिंटर_______
ग्राहक से मिलने वाला पैसा_______

अभ्यास 2: WDV मेथड से 3 साल की डेप्रिसिएशन गणना करो:

  • एसेट: कंप्यूटर
  • लागत: Rs 60,000
  • IT एक्ट रेट: 40%
  • खरीदा: 10 जुलाई 2025 (पहली छमाही — ईयर 1 में पूरी डेप्रिसिएशन)

ये टेबल भरो:

सालओपनिंग WDV (Rs)डेप्रिसिएशन @ 40% (Rs)क्लोज़िंग WDV (Rs)
2025-2660,000______________
2026-27_____________________
2027-28_____________________

अभ्यास 3: स्ट्रेट लाइन मेथड से 3 साल की डेप्रिसिएशन गणना करो:

  • एसेट: फ़र्नीचर
  • लागत: Rs 1,00,000
  • उपयोगी लाइफ़: 10 साल
  • रेज़िड्यूअल वैल्यू: Rs 10,000

एनुअल डेप्रिसिएशन कितनी है? 3 साल बाद बुक वैल्यू क्या होगी?

उत्तर:

अभ्यास 1: फ़िक्स्ड, करंट, करंट, फ़िक्स्ड, फ़िक्स्ड, करंट।

अभ्यास 2:

सालओपनिंग WDV (Rs)डेप्रिसिएशन @ 40% (Rs)क्लोज़िंग WDV (Rs)
2025-2660,00024,00036,000
2026-2736,00014,40021,600
2027-2821,6008,64012,960

अभ्यास 3: एनुअल डेप्रिसिएशन = (1,00,000 - 10,000) / 10 = Rs 9,000। 3 साल बाद: 1,00,000 - (9,000 x 3) = Rs 73,000।


फ़न फ़ैक्ट

क्या तुम्हें पता है कि कुछ मशहूर बिल्डिंग्स अकाउंटिंग बुक्स में पूरी तरह डेप्रिशिएट हो चुकी हैं लेकिन अभी भी करोड़ों की हैं? मुंबई का ताज महल होटल, जो 1903 में बना, बुक्स में दशकों पहले पूरी तरह डेप्रिशिएट हो चुका होगा। लेकिन इसकी मार्केट वैल्यू? हज़ारों करोड़। ये बुक वैल्यू (बुक्स क्या कहती हैं) और मार्केट वैल्यू (कोई इसके लिए कितना देगा) का अंतर है।

और एक मज़ेदार बात: बिष्ट जी के ट्रक की बुक वैल्यू 3 साल बाद Rs 5,34,650 हो सकती है, लेकिन अगर उन्होंने इसे बहुत अच्छी हालत में रखा है और उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों ने बहुत ज़्यादा नुकसान नहीं पहुँचाया, तो असल सेलिंग दाम काफ़ी अलग हो सकता है। डेप्रिसिएशन एक अकाउंटिंग एस्टिमेट है, एग्ज़ैक्ट साइंस नहीं। रियल वर्ल्ड हमेशा बुक्स के नंबर्स से थोड़ा अलग होती है — और ये ठीक है। इम्पॉर्टेंट ये है कि बुक्स एक फ़ेयर और लगातार तस्वीर दिखाएँ।

अगले चैप्टर में मीरा बैंक अकाउंट्स और पेमेंट बैचेज़ के बारे में सीखेगी — क्योंकि आज की दुनिया में लगभग हर पेमेंट बैंक से होता है। कैश पुराना हो रहा है, हल्द्वानी में भी।


बैंक अकाउंट्स और पेमेंट बैचेज़

मंडे की सुबह। मीरा दफ़्तर पहुँचती है तो देखती है नेगी भैया वेंडर बिल्स के ढेर को घूरते हुए अपना माथा रगड़ रहे हैं। "आज पाँच वेंडर्स को पे करना है," वो बड़बड़ाते हैं। "रावत ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग आपूर्तिकर्ता, प्रिंटिंग प्रेस, इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, और क्लीनिंग सेवा। सब फ़्राइडे से पहले।" मीरा बिल्स देखती है। "क्या बिष्ट जी एक-एक करके पे नहीं कर सकते?" नेगी भैया सिर हिलाते हैं। "एक-एक करके मतलब पाँच बार बैंक पोर्टल पर जाना, पाँच ऑथराइज़ेशंस, पाँच एंट्रीज़। एक बेहतर तरीका है — पेमेंट बैचेज़। लेकिन पहले मुझे ये सुनिश्चित करना होगा कि बैंक अकाउंट्स सही से सेट अप हैं।" वो मीरा की तरफ मुड़ते हैं। "आज तुम सीखोगी कि बैंक्स और अकाउंटिंग साथ कैसे काम करते हैं।"

नेगी भैया अपनी डेस्क पर वेंडर बिल्स के ढेर और कंप्यूटर पर बैंकिंग स्क्रीन ओपन किए बैठे हैं


अकाउंटिंग में बैंक अकाउंट्स क्यों ज़रूरी हैं

शर्मा सर अपनी सुबह की चाय लेकर आते हैं और बात सुन लेते हैं।

"अच्छा टॉपिक है, नेगी। मीरा, एक बात बताता हूँ। बीस साल पहले, जब मैंने अभ्यास शुरू की, ज़्यादातर छोटे बिज़नेसेज़ पूरी तरह कैश पर चलते थे। दुकानदार ड्रॉअर से कैश निकालता, आपूर्तिकर्ता को देता, और बाकी वापस रख देता। सिंपल।"

"लेकिन आज? सब कुछ बदल गया है।"

वो उँगलियों पर गिनते हैं:

  1. UPI — बाहर चाय का स्टॉल भी गूगल पे स्वीकार करता है
  2. NEFT / RTGS — बैंक अकाउंट्स के बीच बड़े पेमेंट्स के लिए
  3. चेक — अभी भी इस्तेमाल होते हैं, हालाँकि अब कम
  4. IMPS — इंस्टेंट मनी ट्रांसफ़र, किसी भी समय, किसी भी दिन
  5. इंटरनेट बैंकिंग — कंप्यूटर या फ़ोन से पे करो

"बिष्ट जी भी, जो हल्द्वानी में होलसेल मसाले बेचते हैं, अपने 90% पेमेंट्स बैंक से करते हैं। Rs 50 से ऊपर के GST इन्वॉइसेज़ अक्सर बैंक से पे होते हैं। ज़्यादातर वेंडर्स बैंक ट्रांसफ़र प्रेफ़र करते हैं।"

अकाउंटिंग के लिए ये क्यों मायने रखता है? क्योंकि हर बैंक ट्रांज़ैक्शन एक ट्रेल बनाता है। बैंक के पास रिकॉर्ड है। तुम्हारी बुक्स में रिकॉर्ड है। ये दोनों रिकॉर्ड मैच होने चाहिए। अगर मैच नहीं हो रहे, तो कुछ गड़बड़ है — और उस "कुछ" को ढूँढ़ना बैंक रीकंसिलिएशन कहलाता है।

"और हाँ," शर्मा सर जोड़ते हैं, "आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट बैंक ट्रांज़ैक्शंस प्रेफ़र करता है। एक ट्रांज़ैक्शन में Rs 10,000 से ऊपर के कैश पेमेंट्स आमदनी टैक्स एक्ट (सेक्शन 40A(3)) के तहत डिडक्शन के रूप में अलाउ नहीं हैं। तो बैंक से बिज़नेस करना सिर्फ सुविधाजनक नहीं — कानूनी रूप से भी बेहतर है।"


ERPLite में बैंक अकाउंट्स सेट अप करना

"बुनियादी्स से शुरू करते हैं," नेगी भैया कहते हैं। "बिष्ट ट्रेडर्स के दो बैंक अकाउंट्स हैं। चलो उन्हें सेट अप करते हैं।"

चरण 1: बैंक अकाउंट जोड़ो

  1. जाओ मास्टर्स > बैंक अकाउंट्स > + न्यू
  2. प्राइमरी अकाउंट की ब्योरा भरो:
फ़ील्डवैल्यू
बैंक नेमस्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI)
ब्रांचहल्द्वानी मेन ब्रांच
अकाउंट नंबर30456789012
अकाउंट टाइपकरंट अकाउंट
IFSC कोडSBIN0001234
MICR कोड263002005
ओपनिंग बैलेंसRs 3,45,000 (01-Apr-2025 को)
अकाउंट होल्डरबिष्ट ट्रेडर्स
  1. सेव पर क्लिक करो

अब दूसरा अकाउंट जोड़ो:

फ़ील्डवैल्यू
बैंक नेमपंजाब नेशनल बैंक (PNB)
ब्रांचहल्द्वानी सिटी ब्रांच
अकाउंट नंबर2087654321098
अकाउंट टाइपकरंट अकाउंट
IFSC कोडPUNB0123400
ओपनिंग बैलेंसRs 87,000 (01-Apr-2025 को)
  1. सेव पर क्लिक करो

ERPLite बैंक अकाउंट सेटअप स्क्रीन जिसमें बिष्ट ट्रेडर्स की SBI अकाउंट ब्योरा दिख रही हैं

"दो बैंक अकाउंट्स क्यों?" मीरा पूछती है।

"कई बिज़नेसेज़ मल्टीपल अकाउंट्स रखते हैं," नेगी भैया समझाते हैं। "एक डेली ऑपरेशंस के लिए, एक सेविंग्स या ख़ास पर्पज़ के लिए। कुछ बिज़नेसेज़ में एक अकाउंट सिर्फ तनख़्वाह पेमेंट्स के लिए होता है, दूसरा वेंडर पेमेंट्स के लिए। इससे चीज़ें व्यवस्थित्ड रहती हैं।"

IFSC कोड समझना

"मीरा, तुम्हें पता है IFSC क्या है?"

IFSC = इंडियन फ़ाइनेंशियल सिस्टम कोड। ये 11 कैरेक्टर्स का कोड है जो एक ख़ास बैंक ब्रांच आइडेंटिफ़ाई करता है। NEFT, RTGS, और IMPS ट्रांसफ़र्स के लिए इसकी ज़रूरत होती है। पहले 4 कैरेक्टर्स बैंक कोड हैं, 5वाँ हमेशा 0 होता है, और आखिरी 6 ब्रांच आइडेंटिफ़ाई करते हैं।

"उदाहरण के लिए, SBIN0001234 — SBIN स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया है, 0 फ़िक्स्ड है, और 001234 ब्रांच कोड है।"

"किसी भी बैंक का IFSC RBI वेबसाइट पर या अपनी चेक बुक में मिल जाएगा।"


बैंक ट्रांज़ैक्शंस दर्ज करना

"हर बार जब बैंक से पैसा मूव होता है, हमें ERPLite में दर्ज करना होता है। चलो आम टाइप्स दिखाता हूँ।"

टाइप 1: बैंक पेमेंट (वेंडर को पेमेंट)

बिष्ट जी एक पैकेजिंग आपूर्तिकर्ता को NEFT से Rs 25,000 देते हैं।

  1. जाओ ट्रांज़ैक्शंस > पेमेंट > + न्यू
  2. भरो:
फ़ील्डवैल्यू
पेमेंट फ़्रॉमSBI अकाउंट — 30456789012
पेमेंट टूकुमार पैकेजिंग
अमाउंटRs 25,000
पेमेंट मोडNEFT
रेफ़रेंस नंबरNEFT/2025/78654
डेट20-Oct-2025
नरेशनअक्टूबर पैकेजिंग मटीरियल्स का पेमेंट
  1. सेव और अप्रूव पर क्लिक करो

जर्नल एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs)क्रेडिट (Rs)
कुमार पैकेजिंग (वेंडर)25,000
SBI बैंक अकाउंट25,000

टाइप 2: बैंक रिसीट (ग्राहक से प्राप्ति)

एक ग्राहक, गुप्ता किराना, अपने आउटस्टैंडिंग बिल्स के अगेंस्ट RTGS से Rs 50,000 देता है।

  1. जाओ ट्रांज़ैक्शंस > रिसीट > + न्यू
  2. भरो:
फ़ील्डवैल्यू
रिसीव्ड इनSBI अकाउंट — 30456789012
रिसीव्ड फ़्रॉमगुप्ता किराना
अमाउंटRs 50,000
पेमेंट मोडRTGS
रेफ़रेंस नंबरRTGS/2025/99876
  1. सेव और अप्रूव पर क्लिक करो

टाइप 3: इंटर-बैंक ट्रांसफ़र

बिष्ट जी SBI से PNB में Rs 50,000 ट्रांसफ़र करते हैं।

  1. जाओ ट्रांज़ैक्शंस > कॉन्ट्रा > + न्यू
  2. ट्रांसफ़र फ़्रॉम: SBI अकाउंट
  3. ट्रांसफ़र टू: PNB अकाउंट
  4. अमाउंट: Rs 50,000
  5. सेव पर क्लिक करो

जर्नल एंट्री:

अकाउंटडेबिट (Rs)क्रेडिट (Rs)
PNB बैंक अकाउंट50,000
SBI बैंक अकाउंट50,000

"ये बिल्कुल वैसा ही कॉन्ट्रा वाउचर है जो मीरा ने चैप्टर 5 में सीखा था," नेगी भैया बताते हैं। "पैसा एक जेब से दूसरी जेब में जाता है। कुल सेम रहता है।"


पेमेंट बैचेज़ — एक बार में कई वेंडर्स को पे करना

"अब मज़ेदार हिस्सा," नेगी भैया कहते हैं। "हमें पाँच वेंडर्स को पे करना है। पाँच अलग-अलग पेमेंट्स बनाने की बजाय, हम एक पेमेंट बैच बना सकते हैं।"

पेमेंट बैच = कई पेमेंट्स को एक साथ बंडल करना, एक सेट के रूप में समीक्षा और अप्रूव करना, और फिर एक बार में प्रक्रिया करना। इससे समय बचता है, गलतियाँ कम होती हैं, और ट्रैक करना आसान होता है।

पेमेंट बैचेज़ क्यों इस्तेमाल करें?

बैचेज़ के बिनाबैचेज़ के साथ
5 अलग पेमेंट एंट्रीज़ बनाओ1 बैच बनाओ जिसमें 5 एंट्रीज़ हों
हर एक को इंडिविजुअली अप्रूव करोसब एक बार में समीक्षा करो, एक बार अप्रूव करो
ट्रैक करना मुश्किल — कौन सा हुआ, कौन सा पेंडिंगसाफ़ स्टेटस — पूरा बैच या तो पेंडिंग है, अप्रूव्ड है, या पेड है
5 अलग बैंक ट्रांज़ैक्शंसएक फ़ाइल में एक्सपोर्ट करके बैंक पोर्टल पर अपलोड कर सकते हो
एक पेमेंट मिस हो सकता हैसभी पेमेंट्स एक जगह दिखते हैं

"बिष्ट ट्रेडर्स जैसे बिज़नेस के लिए जिसके 30-40 वेंडर्स हैं, पेमेंट बैचेज़ ज़रूरी हैं। पेमेंट डे पर, एक बैच बनाओ, समीक्षा करो, और प्रक्रिया करो।"

चरण 2: पेमेंट बैच बनाओ

  1. जाओ ट्रांज़ैक्शंस > पेमेंट बैच > + न्यू बैच
  2. बैच हेडर भरो:
फ़ील्डवैल्यू
बैच नेमअक्टूबर 2025 — वेंडर पेमेंट्स
पेमेंट डेट25-Oct-2025
बैंक अकाउंटSBI — 30456789012
पेमेंट मोडNEFT
  1. वेंडर्स और अमाउंट्स जोड़ो:
#वेंडरइन्वॉइस रेफ़रेंसरकम (Rs)अकाउंट नंबरIFSC
1रावत ट्रांसपोर्टRT/08773,50012345678901SBIN0005678
2कुमार पैकेजिंगKP/45625,00098765432101PUNB0098700
3हिमालय प्रिंटर्सHP/08912,00045678901234UCBA0004500
4UPCL (इलेक्ट्रिसिटी)OCT-20258,500(सीधा बिल पेमेंट)
5क्लीन एंड शाइन सेवाएँCSS/0236,00067890123456HDFC0001234
कुल1,25,000
  1. सेव पर क्लिक करो

ERPLite पेमेंट बैच स्क्रीन जिसमें 5 वेंडर्स का कुल Rs 1,25,000 का पेमेंट दिख रहा है

चरण 3: समीक्षा और अप्रूव

"बैच प्रक्रिया होने से पहले, इसे समीक्षा करना होता है," नेगी भैया कहते हैं।

"ये उन बिज़नेसेज़ के लिए इम्पॉर्टेंट है जहाँ कई लोग अकाउंट्स सँभालते हैं। बैच बनाने वाला हमेशा अप्रूव करने वाला नहीं होता। इस सेपरेशन को मेकर-चेकर कहते हैं — इससे गलतियों और फ़्रॉड का जोखिम कम होता है।"

  1. शर्मा सर (या बिष्ट जी) बैच खोलते हैं
  2. हर पेमेंट समीक्षा करते हैं:
    • क्या अमाउंट सही है?
    • क्या ये वैलिड इन्वॉइस के लिए है?
    • क्या बैंक अकाउंट सही है?
    • जहाँ ज़रूरी था, TDS काटा गया है? (रावत ट्रांसपोर्ट का पेमेंट TDS कटने के बाद है — Rs 75,000 की बजाय Rs 73,500)
  3. अप्रूव बैच पर क्लिक करते हैं

बैच स्टेटस "ड्राफ़्ट" से "अप्रूव्ड" हो जाता है।

चरण 4: बैंक अपलोड के लिए एक्सपोर्ट करो

"कई बैंक्स तुम्हें इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल पर मैन्युअली टाइप करने की बजाय फ़ाइल अपलोड करने देते हैं," नेगी भैया समझाते हैं।

  1. एक्सपोर्ट बैच पर क्लिक करो
  2. फ़ॉर्मेट सेलेक्ट करो: SBI बल्क पेमेंट फ़ॉर्मेट (हर बैंक का अपना फ़ॉर्मेट होता है)
  3. ERPLite सभी पेमेंट ब्योरा की एक फ़ाइल (आमतौर पर CSV या एक्सेल) जेनरेट करता है
  4. फ़ाइल डाउनलोड करो

फ़ाइल कुछ ऐसी दिखती है:

बेनिफ़िशियरी नेमअकाउंट नंबरIFSCअमाउंटनरेशन
रावत ट्रांसपोर्ट12345678901SBIN000567873500बिष्ट ट्रेडर्स Oct-25 RT/087
कुमार पैकेजिंग98765432101PUNB009870025000बिष्ट ट्रेडर्स Oct-25 KP/456
हिमालय प्रिंटर्स45678901234UCBA000450012000बिष्ट ट्रेडर्स Oct-25 HP/089
क्लीन एंड शाइन सेवाएँ67890123456HDFC00012346000बिष्ट ट्रेडर्स Oct-25 CSS/023
  1. बिष्ट जी SBI इंटरनेट बैंकिंग में लॉगिन करते हैं
  2. "बल्क पेमेंट" सेक्शन में फ़ाइल अपलोड करते हैं
  3. पेमेंट्स ऑथराइज़ करते हैं
  4. बैंक चारों NEFT पेमेंट्स एक बार में प्रक्रिया करता है

(इलेक्ट्रिसिटी बिल अलग से यूटिलिटी पोर्टल या बैंक बिल-पे सेवा से पे होता है।)

"इससे कितना समय बचता है," मीरा कहती है।

"खासकर GST सीज़न में," नेगी भैया सहमत होते हैं। "कुछ क्लाइंट्स के महीने में 50-60 वेंडर पेमेंट्स होते हैं। सोचो हर एक मैन्युअली करो!"

चरण 5: बैच को पेड मार्क करो

बैंक से पेमेंट्स पुष्टि होने के बाद:

  1. ERPLite में पेमेंट बैच पर वापस जाओ
  2. बैंक से मिले UTR नंबर्स (यूनीक ट्रांज़ैक्शन रेफ़रेंसेज़) डालो:
वेंडरUTR नंबर
रावत ट्रांसपोर्टSBIN325100234567
कुमार पैकेजिंगSBIN325100234568
हिमालय प्रिंटर्सSBIN325100234569
क्लीन एंड शाइन सेवाएँSBIN325100234570
  1. मार्क ऐज़ पेड पर क्लिक करो
  2. बैच स्टेटस "पेड" हो जाता है

ERPLite अपने-आप हर पेमेंट की जर्नल एंट्रीज़ बनाता है।

ERPLite पेमेंट बैच जो पेड मार्क है और UTR नंबर्स डाले गए हैं


बैंक रीकंसिलिएशन — तुम्हारी बुक्स और बैंक को मैच करना

"अब एक ऐसा टॉपिक आता है जो हर अकाउंटेंट को जानना ज़रूरी है," शर्मा सर कहते हैं। "बैंक रीकंसिलिएशन।"

"मीरा, पूछता हूँ। अगर ERPLite कहता है SBI बैलेंस Rs 2,20,000 है, और बैंक स्टेटमेंट कहता है बैलेंस Rs 2,35,000 है — कौन सही है?"

मीरा हिचकिचाती है। "बैंक स्टेटमेंट?"

"ज़रूरी नहीं। जवाब ये है — दोनों में से कोई भी गलत नहीं हो सकता। दोनों सही हो सकते हैं, बस अलग-अलग समय पर, या अलग-अलग इन्फ़ॉर्मेशन रिफ़्लेक्ट कर रहे हैं।"

बैंक रीकंसिलिएशन = तुम्हारी बुक्स (ERPLite) की बैंक स्टेटमेंट से तुलना करके अंतर पहचानना और सुनिश्चित करना कि दोनों मैच करें।

अंतर क्यों होता है?

"कई लेजिटिमेट कारण हैं जिनसे तुम्हारी बुक बैलेंस और बैंक बैलेंस अलग हो सकती हैं।"

कारणक्या हुआतुम्हारी बुक्सबैंक स्टेटमेंट
चेक दिया लेकिन साफ़ नहीं हुआतुमने वेंडर को चेक दिया। तुमने तुरंत दर्ज कर लिया। लेकिन वेंडर ने अभी डिपॉज़िट नहीं किया।पेमेंट रिकॉर्डेड (बैलेंस कम)अभी रिकॉर्ड नहीं (बैलेंस ज़्यादा)
चेक जमा किया लेकिन साफ़ नहीं हुआग्राहक ने चेक दिया। तुमने दर्ज करके जमा कर दिया। लेकिन बैंक ने अभी साफ़ नहीं किया।रिसीट रिकॉर्डेड (बैलेंस ज़्यादा)अभी रिकॉर्ड नहीं (बैलेंस कम)
बैंक चार्जेज़बैंक ने चार्जेज़ काटे (एनुअल फ़ीस, ट्रांज़ैक्शन फ़ीस) जिनके बारे में तुम्हें पता नहीं था।अभी रिकॉर्ड नहींपहले ही काट लिया
इंटरेस्ट क्रेडिटेडबैंक ने अकाउंट में इंटरेस्ट जमा किया। तुम्हें एग्ज़ैक्ट अमाउंट स्टेटमेंट आने तक पता नहीं था।अभी रिकॉर्ड नहींपहले ही जमा
ग्राहकों के सीधा डिपॉज़िट्सग्राहक ने सीधे बैंक अकाउंट में पे किया (UPI/NEFT) और तुमने अभी रिकॉर्ड नहीं किया।अभी रिकॉर्ड नहींपहले ही जमा
बैंक त्रुटियाँबैंक ने गलती की (रेयर लेकिन होता है)।तुम्हारा रिकॉर्डबैंक की गलती

"ऐसे सोचो," शर्मा सर कहते हैं। "तुम और बैंक दोनों एक ही अकाउंट के बारे में अलग-अलग नोटबुक्स में लिख रहे हो। कभी तुम कुछ पहले लिखती हो बैंक देखे इससे पहले। कभी बैंक कुछ पहले लिखता है तुम देखो इससे पहले। रीकंसिलिएशन तब होता है जब तुम बैठकर दोनों नोटबुक्स तुलना करती हो।"


ERPLite में बैंक रीकंसिलिएशन करना

मीरा का टास्क: बिष्ट ट्रेडर्स के SBI अकाउंट का अक्टूबर 2025 रीकंसिलिएशन

"चलो चरण बाय चरण करते हैं," नेगी भैया कहते हैं।

चरण 1: बैंक स्टेटमेंट लो

बिष्ट जी ने अपना अक्टूबर 2025 बैंक स्टेटमेंट SBI ऑनलाइन बैंकिंग से डाउनलोड किया है। ये दिखाता है:

डेटडिस्क्रिप्शनडेबिट (Rs)क्रेडिट (Rs)बैलेंस (Rs)
01-Octओपनिंग बैलेंस3,45,000
05-OctNEFT — गुप्ता किराना50,0003,95,000
10-Octचेक #456 — रेंट15,0003,80,000
15-OctNEFT — टाटा मोटर्स (ट्रक)8,00,000(4,20,000)
15-OctOD फ़ैसिलिटी एक्टिवेटेड5,00,00080,000
20-OctNEFT — कुमार पैकेजिंग25,00055,000
25-OctNEFT बैच — 4 पेमेंट्स97,500(42,500)
27-OctRTGS — मेहता होलसेल2,00,0001,57,500
28-OctUPI — पांडे स्टोर्स35,0001,92,500
30-Octबैंक चार्जेज़5001,92,000
31-OctOD पर इंटरेस्ट1,2001,90,800
31-Octक्लोज़िंग बैलेंस1,90,800

चरण 2: ERPLite से तुलना करो

मीरा ERPLite में बैंक लेजर खोलती है और लाइन बाय लाइन तुलना करती है।

  1. जाओ बैंकिंग > बैंक रीकंसिलिएशन
  2. बैंक सेलेक्ट करो: SBI — 30456789012
  3. पीरियड सेलेक्ट करो: अक्टूबर 2025
  4. बैंक स्टेटमेंट अपलोड या एंटर करो

ERPLite साइड-बाय-साइड कम्पैरिज़न दिखाता है:

डेटडिस्क्रिप्शनबुक अमाउंट (Rs)बैंक अमाउंट (Rs)मैच?
05-Octगुप्ता किराना रिसीट50,000 Cr50,000 Crयस
10-Octरेंट पेमेंट (चेक)15,000 Dr15,000 Drयस
15-Octटाटा मोटर्स पेमेंट8,00,000 Dr8,00,000 Drयस
20-Octकुमार पैकेजिंग25,000 Dr25,000 Drयस
25-Octबैच — 4 वेंडर्स97,500 Dr97,500 Drयस
27-Octमेहता होलसेल रिसीट2,00,000 Cr2,00,000 Crयस
28-Octपांडे स्टोर्स (UPI)35,000 Crनो — बुक्स में नहीं है
30-Octबैंक चार्जेज़500 Drनो — बुक्स में नहीं है
31-OctOD पर इंटरेस्ट1,200 Drनो — बुक्स में नहीं है

ERPLite बैंक रीकंसिलिएशन स्क्रीन जिसमें मैच्ड और अनमैच्ड एंट्रीज़ दिख रही हैं

चरण 3: अंतर पहचानो और ठीक करो

मीरा को तीन अनमैच्ड आइटम्स मिलते हैं:

1. पांडे स्टोर्स — Rs 35,000 (क्रेडिट, 28-Oct)

"ये ग्राहक की UPI पेमेंट है। सीधे बैंक में आई। हमने ERPLite में रिकॉर्ड नहीं किया।"

फ़िक्स: ERPLite में रिसीट एंट्री बनाओ:

  • रिसीव्ड फ़्रॉम: पांडे स्टोर्स
  • अमाउंट: Rs 35,000
  • मोड: UPI
  • डेट: 28-Oct-2025

2. बैंक चार्जेज़ — Rs 500 (डेबिट, 30-Oct)

"बैंक ने ट्रांज़ैक्शन फ़ीस के Rs 500 काटे। हमें स्टेटमेंट आने तक इसका पता नहीं था।"

फ़िक्स: ERPLite में पेमेंट एंट्री बनाओ:

  • पेड टू: SBI (बैंक चार्जेज़)
  • अमाउंट: Rs 500
  • अकाउंट: बैंक चार्जेज़ (ख़र्चा)
  • डेट: 30-Oct-2025

3. OD पर इंटरेस्ट — Rs 1,200 (डेबिट, 31-Oct)

"बिष्ट जी की ओवरड्राफ़्ट फ़ैसिलिटी है। बैंक ने Rs 1,200 इंटरेस्ट काटा।"

फ़िक्स: ERPLite में पेमेंट एंट्री बनाओ:

  • पेड टू: SBI (OD पर इंटरेस्ट)
  • अमाउंट: Rs 1,200
  • अकाउंट: इंटरेस्ट ख़र्चा
  • डेट: 31-Oct-2025

चरण 4: फ़िक्स करने के बाद — बैलेंस चेक करो

इन तीन एंट्रीज़ दर्ज करने के बाद, मीरा चेक करती है:

रकम (Rs)
ERPLite बुक बैलेंस (रीकंसिलिएशन से पहले)1,57,500
ऐड: पांडे स्टोर्स रिसीट+35,000
लेस: बैंक चार्जेज़-500
लेस: OD इंटरेस्ट-1,200
ERPLite बुक बैलेंस (रीकंसिलिएशन के बाद)1,90,800
बैंक स्टेटमेंट बैलेंस1,90,800

"मैच हो गया!" मीरा राहत से कहती है।

"यही गोल है," शर्मा सर कहते हैं। "रीकंसिलिएशन के बाद, तुम्हारी बुक बैलेंस और बैंक बैलेंस बिल्कुल सेम होनी चाहिए।"

चरण 5: रीकंसाइल्ड मार्क करो

  1. ERPLite में, सभी मैच्ड एंट्रीज़ को "रीकंसाइल्ड" मार्क करो
  2. कम्प्लीट रीकंसिलिएशन पर क्लिक करो
  3. ERPLite रीकंसिलिएशन रिकॉर्ड के लिए सेव करता है

"बैंक रीकंसिलिएशन कम से कम महीने में एक बार करनी चाहिए," शर्मा सर कहते हैं। "कुछ बिज़ी बिज़नेसेज़ हफ्ते में करती हैं। जितनी बार करोगी, उतना आसान होगा — क्योंकि कम आइटम्स चेक करने होंगे।"


अनसाफ़्ड चेक्स — एक स्पेशल केस

"मीरा, एक सिचुएशन है जो आज हमें नहीं मिली लेकिन तुम्हें जानना ज़रूरी है," शर्मा सर कहते हैं।

"कभी-कभी तुम चेक देती हो, और वेंडर को डिपॉज़िट करने में कुछ दिन लगते हैं। तुमने अपनी बुक्स में पेमेंट पहले ही दर्ज कर लिया। लेकिन बैंक ने अभी काटा नहीं है।"

उदाहरण: 29 अक्टूबर को, बिष्ट जी एक आपूर्तिकर्ता को Rs 8,000 का चेक लिखते हैं। मीरा इसे 29 अक्टूबर को ERPLite में दर्ज करती है। लेकिन आपूर्तिकर्ता 3 नवंबर तक चेक डिपॉज़िट नहीं करता।

  • 31 अक्टूबर को ERPLite बैलेंस: Rs 1,82,800 (कम — क्योंकि पेमेंट रिकॉर्ड हो चुका)
  • 31 अक्टूबर को बैंक बैलेंस: Rs 1,90,800 (ज़्यादा — चेक अभी साफ़ नहीं हुआ)
  • अंतर: Rs 8,000 (अनसाफ़्ड चेक)

"इस केस में, रीकंसिलिएशन के दौरान, तुम चेक को 'इश्यूड बट नॉट यट साफ़्ड' नोट करती हो। ये त्रुटि नहीं है। जब चेक डिपॉज़िट होगा तो ये अपने आप रिज़ॉल्व हो जाएगा।"

"ERPLite में इसके लिए एक कॉलम है — 'चेक साफ़िंग डेट।' तुम इसे ब्लैंक छोड़ती हो जब तक चेक बैंक स्टेटमेंट पर नहीं दिखता।"


पेमेंट मोड्स — एक क्विक रेफ़रेंस

मीरा एक साफ़ रेफ़रेंस टेबल बनाती है:

मोडफ़ुल फ़ॉर्मस्पीडलिमिटकब इस्तेमाल करें
NEFTनेशनल इलेक्ट्रॉनिक फ़ंड्स ट्रांसफ़र30 मिनट से 2 घंटेकोई अपर लिमिट नहींनियमित वेंडर पेमेंट्स
RTGSरियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंटइंस्टेंट (बैंक आवर्स में)मिनिमम Rs 2 लाखबड़े पेमेंट्स
IMPSइमीडिएट पेमेंट सेवाइंस्टेंट (24/7)Rs 5 लाख प्रति ट्रांज़ैक्शनअर्जेंट छोटे पेमेंट्स
UPIयूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेसइंस्टेंटRs 1 लाख (कुछ बैंक्स में Rs 2 लाख)छोटे पेमेंट्स, रिटेल
चेकसाफ़ होने में 2-3 वर्किंग डेज़कोई लिमिट नहीं (बैलेंस पर बेस्ड)जब दूसरे मोड्स अवेलेबल न हों
DDमाँग ड्राफ़्ट2-3 दिनकोई लिमिट नहींजब गारंटीड पेमेंट चाहिए

"कौन सा मोड सबसे अच्छा है?" मीरा पूछती है।

"अमाउंट और अर्जेंसी पर निर्भर करता है," नेगी भैया कहते हैं। "ज़्यादातर वेंडर पेमेंट्स के लिए NEFT ठीक है। ट्रक जैसे बड़े पेमेंट्स के लिए RTGS बेहतर है क्योंकि इंस्टेंट है और बड़ी रकम के लिए सूटेबल है। UPI छोटे, क्विक पेमेंट्स के लिए शानदार है।"


बैंक अकाउंट्स मैनेज करने की टिप्स

शर्मा सर अपने सालों के अनुभव शेयर करते हैं:

टिप 1: पर्सनल और बिज़नेस कभी मिक्स मत करो

"बिष्ट जी को अपने पर्सनल बैंक अकाउंट से कभी बिज़नेस ट्रांज़ैक्शंस नहीं करने चाहिए। दोनों को पूरी तरह अलग रखो। वरना टैक्स डिपार्टमेंट पर्सनल डिपॉज़िट्स को बिज़नेस आमदनी मान सकता है।"

टिप 2: हर ट्रांज़ैक्शन उसी दिन दर्ज करो

"बैंक एंट्रीज़ पाइल अप मत होने दो। अगर आज पेमेंट हुआ है, तो आज ही दर्ज करो। जितना देर करोगी, उतना भूलोगी, और रीकंसिलिएशन नाइटमेयर बन जाएगा।"

टिप 3: UTR/रेफ़रेंस नंबर्स रखो

"हर डिजिटल पेमेंट का एक रेफ़रेंस नंबर होता है — NEFT/RTGS का UTR, UPI रेफ़रेंस ID, चेक नंबर। हमेशा इन्हें ERPLite में दर्ज करो। अगर कभी कोई डिस्प्यूट हो, तो ये तुम्हारा प्रूफ़ है।"

टिप 4: हर महीने बिना चूके रीकंसाइल करो

"मैंने ऐसे बिज़नेसेज़ देखे हैं जिन्होंने एक साल तक रीकंसाइल नहीं किया। जब आखिरकार बैठे, तो सैकड़ों मिसमैचेज़ थे। कुछ जेन्यूइन त्रुटियाँ थे, कुछ फ़्रॉड थे जो अननोटिस्ड रह गए। मंथली रीकंसिलिएशन समस्याएँ को जल्दी पकड़ती है।"

टिप 5: अनइस्तेमालुअल चार्जेज़ पर नज़र रखो

"बैंक्स कभी-कभी ऐसी फ़ीस काटते हैं जिनकी तुम्हें उम्मीद नहीं होती — SMS चार्जेज़, डेबिट कार्ड फ़ीस, मिनिमम बैलेंस पेनल्टीज़। रीकंसिलिएशन के दौरान, हर बैंक चार्ज समीक्षा करो। अगर कुछ गलत लगे, तो बैंक को कॉल करो।"


क्विक रीकैप — चैप्टर 26

ERPLite में बैंक अकाउंट्स: बैंक नेम, अकाउंट नंबर, IFSC, और ओपनिंग बैलेंस के साथ सेट अप करो।

पेमेंट बैच: कई वेंडर पेमेंट्स को एक बैच में बंडल करो। समीक्षा, अप्रूव, बैंक को एक्सपोर्ट, और एक बार में प्रक्रिया करो। समय बचता है, गलतियाँ कम होती हैं।

बैंक एक्सपोर्ट: ERPLite तुम्हारे बैंक के बल्क पेमेंट फ़ॉर्मेट में फ़ाइल्स जेनरेट कर सकता है सीधा अपलोड के लिए।

बैंक रीकंसिलिएशन: तुम्हारी बुक्स की बैंक स्टेटमेंट से तुलना। अंतर आते हैं: अनसाफ़्ड चेक्स, बैंक चार्जेज़, इंटरेस्ट, सीधा डिपॉज़िट्स से।

गोल: रीकंसिलिएशन के बाद, बुक बैलेंस = बैंक बैलेंस।

पेमेंट मोड्स: NEFT (नियमित), RTGS (बड़ी रकम), IMPS (अर्जेंट), UPI (छोटे/क्विक), चेक (जब ज़रूरत हो)।

गोल्डन नियम: हर महीने रीकंसाइल करो। हर ट्रांज़ैक्शन उसी दिन दर्ज करो। पर्सनल और बिज़नेस अकाउंट्स अलग रखो।


अभ्यास अभ्यास — खुद करके देखो

अभ्यास 1: बिष्ट ट्रेडर्स की ERPLite 30 नवंबर को SBI बैलेंस Rs 1,45,000 दिखाती है। बैंक स्टेटमेंट Rs 1,62,000 दिखाता है। नीचे दिए गए क्लूज़ से अंतर के संभावित कारण पहचानो:

a) 28 नवंबर को एक आपूर्तिकर्ता को Rs 12,000 का चेक दिया गया लेकिन अभी डिपॉज़िट नहीं हुआ। b) 29 नवंबर को एक ग्राहक ने UPI से Rs 8,000 दिए, लेकिन मीरा ने अभी ERPLite में रिकॉर्ड नहीं किया। c) बैंक ने Rs 1,000 एनुअल बनाए रखेंस चार्ज काटा, अभी ERPLite में रिकॉर्ड नहीं।

रीकंसाइल्ड बैलेंस गणना करो।

अभ्यास 2: नीचे दिए गए वेंडर्स के लिए पेमेंट बैच बनाओ:

वेंडररकम (Rs)इन्वॉइस
शर्मा इलेक्ट्रिकल्स15,000SE/056
नैनीताल पेपर मिल्स8,500NPM/112
गढ़वाल लॉजिस्टिक्स22,000GL/089

कुल बैच अमाउंट क्या है? अगर गढ़वाल लॉजिस्टिक्स (ट्रांसपोर्टर, फ़र्म) पर 2% TDS लागू है, तो उन्हें वास्तव में कितना पेमेंट होगा?

अभ्यास 3: हर सिचुएशन को सही रीकंसिलिएशन एक्शन से मैच करो:

सिचुएशनएक्शन
बैंक ने Rs 350 इंटरेस्ट क्रेडिट कियाa) ERPLite में रिसीट दर्ज करो
ग्राहक ने NEFT से Rs 5,000 दिए, रिकॉर्ड नहींb) ERPLite में ख़र्चा (बैंक चार्जेज़) दर्ज करो
बैंक ने Rs 200 SMS चार्जेज़ काटेc) ERPLite में इंटरेस्ट आमदनी दर्ज करो
Rs 10,000 का चेक दिया लेकिन साफ़ नहीं हुआd) कोई एक्शन ज़रूरी नहीं — अपने आप साफ़ होगा

उत्तर:

अभ्यास 1:

  • बुक बैलेंस: Rs 1,45,000
  • ऐड: ग्राहक से UPI रिकॉर्ड नहीं: +8,000
  • लेस: बैंक चार्जेज़ रिकॉर्ड नहीं: -1,000
  • एडजस्टेड बुक बैलेंस: Rs 1,52,000
  • बैंक बैलेंस: Rs 1,62,000
  • लेस: चेक अभी साफ़ नहीं: -12,000 (बैंक ने अभी काटा नहीं, लेकिन हमने दर्ज कर लिया)
  • वेट — ठीक से रीकंसाइल करते हैं। बैंक बैलेंस Rs 1,62,000 माइनस अनसाफ़्ड चेक Rs 12,000 = Rs 1,50,000। लेकिन एडजस्टेड बुक बैलेंस Rs 1,52,000 है। Hmm — Rs 2,000 का अंतर बचता है। चेक करो कोई और आइटम तो नहीं!
  • असलीी, ठीक से रीकंसाइल करते हैं: बुक बैलेंस Rs 1,45,000 + Rs 8,000 (UPI) - Rs 1,000 (बैंक चार्जेज़) = 1,52,000। बैंक बैलेंस Rs 1,62,000 - Rs 12,000 (चेक नॉट साफ़्ड) = 1,50,000। Rs 2,000 का अंतर बचता है — कोई और आइटम निवेशिगेट करना होगा!

अभ्यास 2: कुल बैच = 15,000 + 8,500 + 22,000 = Rs 45,500। गढ़वाल लॉजिस्टिक्स पर TDS: 22,000 का 2% = Rs 440। गढ़वाल लॉजिस्टिक्स को असली पेमेंट: 22,000 - 440 = Rs 21,560। कुल असली बैच पेआउट: 15,000 + 8,500 + 21,560 = Rs 45,060।

अभ्यास 3: बैंक इंटरेस्ट = (c), ग्राहक NEFT = (a), SMS चार्जेज़ = (b), अनसाफ़्ड चेक = (d)।


फ़न फ़ैक्ट

इंडिया का UPI सिस्टम दुनिया के सबसे बड़े फ़िनटेक इनोवेशंस में से एक है। 2024 में, UPI ने 13,000 करोड़ से ज़्यादा ट्रांज़ैक्शंस प्रक्रिया किए — ये यूरोप और अमेरिका के सभी क्रेडिट कार्ड ट्रांज़ैक्शंस से ज़्यादा है! सिंगापुर, UAE, फ़्रांस, और श्रीलंका जैसे देशों ने पेमेंट्स के लिए UPI एडॉप्ट करना शुरू कर दिया है।

और एक अमेज़िंग बात: UPI नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) ने बनाया, और ये 2016 में लॉन्च हुआ। सिर्फ 8 साल बाद, हल्द्वानी का एक मसाला होलसेलर भी इसे अल्मोड़ा के ट्रांसपोर्टर को पे करने के लिए इस्तेमाल करता है। बस स्टैंड के पास सब्ज़ी वाले भी स्वीकार करते हैं। टेक्नोलॉजी जो कभी सिर्फ बड़े बैंक्स के लिए थी, अब सबकी जेब में है।

जब मीरा बिष्ट जी का बैंक अकाउंट रीकंसाइल करती है, तो वो इस डिजिटल रेवोल्यूशन में हिस्सा ले रही है — हर डिजिटल रुपये का हिसाब रख रही है, बिल्कुल वैसे जैसे शर्मा सर दशकों पहले हर कागज़ी रुपये का हिसाब रखते थे। टूल्स बदलते हैं। सिद्धांत नहीं बदलते।

मीरा ने अब TDS, पेरोल, डेप्रिसिएशन, और बैंक प्रबंधन सीख लिया है — अकाउंटिंग की "बुनियादी्स से आगे" की बातें। बुक के अगले हिस्से में, वो देखेगी कि इस ज्ञान का उसके करियर के लिए क्या मतलब है। ये उसे कहाँ ले जा सकता है? चलो पता करते हैं।


करियर पाथ्स — यह ज्ञान तुम्हें कहाँ ले जाएगा

शनिवार की सुबह थी। शर्मा सर ने मीरा को छुट्टी दी थी — "तुमने इसे कमाया है," उन्होंने कहा था। मीरा हल्द्वानी बस स्टैंड के पास चाय की दुकान पर बैठी थी, तभी उसे एक जाना-पहचाना चेहरा दिखा। पूजा! बागेश्वर की उसकी स्कूल की सहेली, सफेद चमचमाती शर्ट पहने, हाथ में लेदर हैंडबैग लिए। पूजा दो साल पहले हल्द्वानी आ गई थी। "पूजा! तुम यहाँ क्या कर रही हो?" मीरा उछलकर खड़ी हो गई। पूजा ने उसे कसकर गले लगाया। "मैं अब बैंक में काम करती हूँ — उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, रेलवे क्रॉसिंग के पास वाली ब्रांच। चल, चाय पीते हैं। मुझे तुम्हारी नई जॉब के बारे में सब कुछ सुनना है!"

मीरा और पूजा हल्द्वानी बस स्टैंड के पास चाय की दुकान पर बैठी हैं, महीनों बाद मिल रही हैं


दो सहेलियाँ, दो रास्ते

मीरा और पूजा ने कटिंग चाय और समोसे मँगवाए। वे बागेश्वर में 10वीं बोर्ड तक साथ पढ़ी थीं। दोनों पास हो गई थीं। किसी ने भी कॉलेज नहीं किया — पूजा के परिवार के पास पैसे नहीं थे, और मीरा के पिता चाहते थे कि वो कोई व्यावहारिक हुनर सीखे।

"तो तुम शर्मा सर की CA दफ़्तर में काम करती हो?" पूजा ने पूछा। "वहाँ असलीी करती क्या हो?"

मीरा मुस्कुराई। छह महीने पहले वो इस सवाल का जवाब नहीं दे पाती। अब दे सकती थी।

"मैं बुककीपिंग करती हूँ — शर्मा सर के क्लाइंट्स के सारे ट्रांज़ैक्शंस दर्ज करती हूँ। वाउचर्स बनाती हूँ, लेजर में पोस्ट करती हूँ, ट्रायल बैलेंस तैयार करती हूँ। GST रिटर्न फ़ाइलिंग में भी मदद करती हूँ — GSTR-1 और GSTR-3B। और मैंने ERPLite इस्तेमाल करना भी सीख लिया है, जो एक अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर है।"

पूजा की आँखें चमक उठीं। "यह तो कमाल है, मीरा। तुम तो पक्की अकाउंटेंट लग रही हो।"

"बन रही हूँ," मीरा ने कहा। "पर तुम बताओ। बैंक की जॉब कैसे मिली?"

पूजा ने अपनी चाय हिलाई। "आसान नहीं था। पूरी कहानी सुनाती हूँ। पर पहले — तुम्हें पता है कि जो तुमने सीखा है उससे कितने अलग-अलग करियर्स बन सकते हैं? तुम्हारे पास जितने ऑप्शंस हैं, तुम सोच भी नहीं सकतीं।"

उस बातचीत ने मीरा का अपने भविष्य को देखने का नज़रिया बदल दिया। आओ हम उन सभी करियर पाथ्स पर चलें जो बुककीपिंग और GST सीखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए खुले हैं।


करियर पाथ 1: GST प्रैक्टिशनर (GSTP)

GST प्रैक्टिशनर क्या होता है?

GST प्रैक्टिशनर वह व्यक्ति होता है जो GST पोर्टल पर ऑफ़िशियली रजिस्टर्ड होता है और दूसरे टैक्सपेयर्स की ओर से GST रिटर्न्स फ़ाइल करने के लिए ऑथराइज़्ड होता है। इसे ऐसे समझो — बहुत से छोटे बिज़नेस ओनर्स के पास न तो टाइम होता है और न ही नॉलेज कि वे अपने GST रिटर्न्स खुद फ़ाइल करें। वे एक GST प्रैक्टिशनर को हायर करते हैं जो उनके लिए यह काम करे।

शर्मा सर खुद एक GST प्रैक्टिशनर हैं। पर GSTP बनने के लिए CA होना ज़रूरी नहीं है।

GSTP कौन बन सकता है?

दो रास्ते हैं:

रास्ताज़रूरत
रास्ता 1: शिक्षातुम्हारा ग्रेजुएट होना ज़रूरी है (BA, BCom, BSc, या कोई भी डिग्री) या CA / CS / CMA
रास्ता 2: अनुभवतुम 10वीं पास होने चाहिए और GST रिटर्न फ़ाइलिंग या टैक्स अभ्यास में कम से कम 5 साल का अनुभव होना चाहिए

यह दूसरा रास्ता बहुत इम्पॉर्टेंट है। अगर तुम 10वीं पास हो और CA दफ़्तर में काम कर रहे हो — मीरा की तरह — तो 5 साल के अनुभव के बाद तुम GSTP बन सकते हो। कोई डिग्री नहीं चाहिए।

GSTP के रूप में रजिस्ट्रेशन कैसे करें

  1. GST पोर्टल पर जाओ: www.gst.gov.in
  2. "रजिस्टर ऐज़ GST प्रैक्टिशनर" पर क्लिक करो
  3. अपनी ब्योरा भरो — नाम, पता, आधार, PAN, अनुभव का प्रूफ़
  4. NACIN (नेशनल एकेडमी ऑफ़ कस्टम्स, इनसीधा टैक्सेज़ एंड नार्कोटिक्स) द्वारा आयोजित GSTP एग्ज़ाम पास करो
  5. अप्रूव होने पर तुम्हें एक ऑफ़िशियल GSTP एनरोलमेंट नंबर मिलता है

यह एग्ज़ाम तुम्हारी GST लॉ, रिटर्न फ़ाइलिंग, और ITC नियम की नॉलेज टेस्ट करता है। अगर तुमने इस बुक में सब कुछ पढ़ा है, तो एग्ज़ाम में आने वाला ज़्यादातर कंटेंट तुम पहले से जानते हो।

GSTP हर दिन क्या करता है?

  • क्लाइंट्स से सेल्स और परचेज़ का डेटा कलेक्ट करता है
  • हर महीने या क्वार्टर में GSTR-1 (सेल्स रिटर्न) तैयार करता है और फ़ाइल करता है
  • हर महीने GSTR-3B (समरी रिटर्न) तैयार करता है और फ़ाइल करता है
  • साल में एक बार GSTR-9 (एनुअल रिटर्न) फ़ाइल करता है
  • क्लाइंट्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करने में मदद करता है
  • GST डिपार्टमेंट की नोटिसेज़ सँभालता है
  • क्लाइंट्स को ड्यू डेट्स और नियम बदलाव के बारे में अपडेट रखता है

कितना कमा सकते हो?

स्थितिमासिक कमाई
शुरुआत — 5 से 10 क्लाइंट्सRs 15,000 — Rs 20,000
स्थापित — 20 से 30 क्लाइंट्सRs 25,000 — Rs 35,000
इलाके में नाम हो गया — 40+ क्लाइंट्सRs 40,000 — Rs 50,000 या उससे ज़्यादा

ज़्यादातर GSTP हर क्लाइंट से Rs 500 से Rs 2,000 पर मंथ चार्ज करते हैं, बिज़नेस के साइज़ और ट्रांज़ैक्शंस की संख्या के हिसाब से।

सबसे अच्छी बात

तुम घर से काम कर सकते हो। बस एक कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, और GST पोर्टल लॉगिन चाहिए। उत्तराखंड के छोटे शहरों — अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चम्पावत — में बहुत से GSTP अपना शहर छोड़े बिना क्लाइंट्स को सर्व करते हैं।

एक GST प्रैक्टिशनर अपने छोटे होम दफ़्तर से, लैपटॉप पर कई क्लाइंट्स के रिटर्न्स फ़ाइल कर रहा है


करियर पाथ 2: बुककीपर

बुककीपर क्या करता है?

एक बुककीपर किसी बिज़नेस के डे-टू-डे फ़ाइनेंशियल रिकॉर्ड बनाए रख करता है। यह एग्ज़ैक्टली वही काम है जो मीरा शर्मा सर की दफ़्तर में करती रही है।

रोज़ के काम में शामिल हैं:

  • सेल्स और परचेज़ ट्रांज़ैक्शंस दर्ज करना
  • वाउचर्स पोस्ट करना — रिसीट, पेमेंट, जर्नल, कॉन्ट्रा
  • सभी अकाउंट्स की लेजर बनाए रख करना
  • बैंक स्टेटमेंट्स रीकंसाइल करना
  • ट्रायल बैलेंस तैयार करना
  • अकाउंट्स रिसीवेबल (कौन हमें पैसे देने वाला है) और अकाउंट्स पेएबल (हमें किसे पैसे देने हैं) ट्रैक करना
  • इन्वॉइसेज़ फ़ाइल करना और रिकॉर्ड व्यवस्थित्ड रखना

बुककीपर के रूप में काम करने के दो तरीके

विकल्प A: एम्प्लॉइड बुककीपर — तुम एक कंपनी या एक दफ़्तर में काम करते हो। फ़िक्स्ड तनख़्वाह है, फ़िक्स्ड आवर्स हैं, और एक बॉस है। यह स्टेबिलिटी और जॉब पर सीखने के लिए अच्छा है।

विकल्प B: फ़्रीलांस बुककीपर — तुम कई छोटे बिज़नेसेज़ को सर्व करते हो। हर एक तुम्हें मंथली फ़ी देता है। तुम हफ्ते में एक-दो बार उनके पास जाते हो, या वे व्हाट्सऐप पर डेटा भेजते हैं और तुम घर से काम करते हो। इसमें ज़्यादा फ़्रीडम है और ज़्यादा कमाई भी हो सकती है, पर इसमें डिसिप्लिन और सेल्फ़-प्रबंधन चाहिए।

एम्प्लॉइड बुककीपरफ़्रीलांस बुककीपर
क्लाइंट्स की संख्याएक कंपनी5 से 15 छोटे बिज़नेसेज़
आमदनीफ़िक्स्ड तनख़्वाह: Rs 10,000 — Rs 20,000/मंथवेरिएबल: Rs 12,000 — Rs 25,000/मंथ
स्थिरताज़्यादा — नियमित तनख़्वाहमध्यम — क्लाइंट्स बनाए रखने पर निर्भर
आज़ादीकम — फ़िक्स्ड आवर्स, एक दफ़्तरज़्यादा — अपने आवर्स और क्लाइंट्स खुद चुनो
किसके लिए सबसे अच्छाशुरुआती लोग जो सीखना चाहते हैं1-2 साल के अनुभव वाले लोग

कोई डिग्री नहीं चाहिए — हुनर मायने रखती हैं

बुककीपिंग की सबसे अच्छी बात यह है। कोई तुम्हारी डिग्री नहीं पूछता। वे पूछते हैं: "क्या तुम वाउचर सही से पोस्ट कर सकते हो? क्या ट्रायल बैलेंस बना सकते हो? GST आता है?" अगर जवाब हाँ है, तो जॉब तुम्हारी है।

"मीरा," पूजा ने कहा, "तुम यह सब पहले से जानती हो। तुम चाहो तो कल से फ़्रीलांसिंग शुरू कर सकती हो।"

"मैं पहले और सीखना चाहती हूँ," मीरा ने कहा। "पर यह जानकर अच्छा लगा कि विकल्प है।"

फ़्रीलांस बुककीपर के रूप में क्लाइंट्स कैसे मिलें

  1. जिन्हें जानती हो उनसे शुरू करो — लोकल दुकानदार, फ़ैमिली फ़्रेंड्स, बिज़नेस चलाने वाले रिश्तेदार
  2. एक महीना फ़्री डेमो दो — "मुझे दिखाने दो कि व्यवस्थित्ड बुक्स कैसी दिखती हैं"
  3. शर्मा सर से रेफ़रल्स माँगो — CA दफ़्तरेज़ के पास अक्सर इतने छोटे क्लाइंट्स होते हैं कि वे सँभालना नहीं कर पाते
  4. लोकल बिज़नेस व्हाट्सऐप ग्रुप्स ज्वाइन करो और अपनी सेवाएँ पेशकश करो
  5. लोकल मार्केट, फ़ोटोकॉपी शॉप, या बैंक इलाक़ा में एक छोटा पोस्टर लगाओ

एक फ़्रीलांस बुककीपर किराना दुकान से बिल्स कलेक्ट कर रहा है, फिर घर पर लैपटॉप पर काम कर रहा है


करियर पाथ 3: CA दफ़्तर असिस्टेंट

यह जॉब क्या है?

भारत में हर CA दफ़्तर को असिस्टेंट्स चाहिए। ये वे लोग हैं जो असली डेली काम करते हैं — डेटा एंट्री, वाउचर पोस्टिंग, रिटर्न फ़ाइलिंग, क्लाइंट कोऑर्डिनेशन। शर्मा सर की दफ़्तर में नेगी भैया इसी रोल में हैं। मीरा वही काम सीख रही है।

हर दिन क्या करते हो?

  • अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर में वाउचर्स और इन्वॉइसेज़ एंटर करते हो
  • ट्रांज़ैक्शंस को सही लेजर अकाउंट्स में पोस्ट करते हो
  • कई क्लाइंट्स के लिए GST रिटर्न्स (GSTR-1, GSTR-3B) फ़ाइल करते हो
  • TDS रिटर्न्स (फ़ॉर्म 26Q) तैयार करते हो
  • ऑडिट के लिए फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स तैयार करने में मदद करते हो
  • क्लाइंट्स से कोऑर्डिनेट करते हो — डॉक्यूमेंट्स कलेक्ट करना, सवालों के जवाब देना, रिमाइंडर्स भेजना
  • फ़ाइल्स बनाए रख करते हो — फ़िज़िकल (कागज़ की फ़ाइल्स) और डिजिटल दोनों

कमाई की संभावना

लेवलअनुभवमासिक तनख़्वाह
फ़्रेशर / ट्रेनी0-1 सालRs 8,000 — Rs 12,000
जूनियर अकाउंटेंट1-3 सालRs 12,000 — Rs 18,000
सीनियर अकाउंटेंट3-5 सालRs 18,000 — Rs 25,000
दफ़्तर प्रबंधक5+ सालRs 25,000 — Rs 35,000

बढ़त का रास्ता

CA दफ़्तर सीखने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है। तुम्हें कई तरह के बिज़नेसेज़, कई तरह की समस्याएँ, और अकाउंटिंग और टैक्स के कई अलग-अलग इलाक़ाज़ देखने को मिलते हैं।

CA दफ़्तर असिस्टेंट से तुम आगे बढ़ सकते हो:

  1. सीनियर अकाउंटेंट — बड़े क्लाइंट्स सँभालो, जूनियर्स को सुपरवाइज़ करो
  2. आर्टिकल असिस्टेंट — अगर बाद में CA या CMA करने का तय करो, तो तुम्हारा अनुभव काउंट होता है
  3. टैक्स कंसल्टेंट — पर्याप्त अनुभव के बाद कुछ लोग अपनी टैक्स अभ्यास शुरू करते हैं
  4. GST प्रैक्टिशनर — 5 साल के अनुभव के बाद GSTP के रूप में रजिस्टर करो

नेगी भैया 12वीं के बाद सीधे शर्मा सर की दफ़्तर ज्वाइन किए थे। वे अब 25 साल के हैं और Rs 22,000 पर मंथ कमाते हैं। वे 15 क्लाइंट्स इंनिर्भरली सँभालते हैं। दो और साल में उनकी प्लान है GST प्रैक्टिशनर के रूप में रजिस्टर होकर अपनी अभ्यास शुरू करने की।

"यही नेगी भैया की प्लान है," मीरा ने पूजा को बताया। "उन्होंने ठीक वहीं से शुरुआत की जहाँ मैं अभी हूँ।"


करियर पाथ 4: बैंक बैक-दफ़्तर

अब पूजा की कहानी आती है।

"तो बताओ," मीरा ने कहा, "बैंक में कैसे गईं?"

पूजा ने अपना समोसा खत्म किया और हाथ पोंछे। "ठीक है, सुनो। तुम्हें पता है मैंने 10वीं पास की थी, ना? उसके बाद मैंने एक बुनियादी कंप्यूटर कोर्स किया — बस टाइपिंग, MS दफ़्तर, और डेटा एंट्री। फिर मामा जी ने बताया कि उत्तराखंड ग्रामीण बैंक एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के ज़रिए बैक-दफ़्तर स्टाफ़ हायर कर रहा है।"

"बैक-दफ़्तर क्या होता है?" मीरा ने पूछा।

बैंक बैक-दफ़्तर काम क्या है?

बैक-दफ़्तर बैंक का वो हिस्सा है जो ग्राहकों को दिखता नहीं। यह सारा काम काउंटर के पीछे होता है — ट्रांज़ैक्शंस प्रक्रिया करना, रिकॉर्ड बनाए रख करना, रिपोर्ट्स बनाना।

पूजा के डेली काम में शामिल हैं:

  • डेटा एंट्री — ग्राहक इन्फ़ॉर्मेशन, लोन ब्योरा, ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड बैंक के सिस्टम में एंटर करना
  • MIS रिपोर्टिंग — MIS का मतलब है प्रबंधन इन्फ़ॉर्मेशन सिस्टम। इसका मतलब है डेली और वीकली रिपोर्ट्स बनाना — कितने लोन दिए गए, कितने अकाउंट्स खुले, ब्रांच की कैश पोज़ीशन क्या है
  • डॉक्यूमेंट वेरिफ़िकेशन — लोन एप्लिकेशंस, KYC डॉक्यूमेंट्स, एड्रेस प्रूफ़्स चेक करना
  • रीकंसिलिएशन — बैंक के इंटरनल रिकॉर्ड को RBI और दूसरे बैंक्स से मिले रिकॉर्ड से मैच करना
  • पेमेंट प्रक्रियािंग — NEFT, RTGS, और IMPS ट्रांसफ़र्स प्रक्रिया करने में मदद करना

पूजा को यह जॉब कैसे मिली?

"आउटसोर्सिंग एजेंसी ने एक रिटन टेस्ट लिया," पूजा ने बताया। "उसमें बुनियादी मैथ्स, इंग्लिश, कंप्यूटर नॉलेज, और कुछ बैंकिंग टर्म्स थे। मैं पास हो गई, फिर इंटरव्यू हुआ। उन्होंने पूछा कि क्या मैं एक्सेल में काम कर सकती हूँ और क्या मुझे पता है बैलेंस शीट क्या होती है। मैंने हाँ कहा — क्योंकि मैंने एक फ़्री ऑनलाइन कोर्स से थोड़ा सीखा था।"

"शुरू में तनख़्वाह सिर्फ Rs 12,000 पर मंथ थी। पर अब दो साल बाद मुझे Rs 18,000 मिलते हैं। और सबसे अच्छी बात — मुझे अंदर से सीखने को मिलता है कि बैंक कैसे काम करता है।"

कमाई की संभावना

रोलमासिक तनख़्वाह
डेटा एंट्री ऑपरेटर (कॉन्ट्रैक्ट)Rs 10,000 — Rs 14,000
बैक-दफ़्तर असिस्टेंटRs 12,000 — Rs 18,000
MIS एग्ज़ीक्यूटिवRs 15,000 — Rs 22,000
बैक-दफ़्तर सुपरवाइज़रRs 20,000 — Rs 28,000

लागू कैसे करें

  1. बैंक रिक्रूटमेंट — पब्लिक सेक्टर बैंक्स (जैसे ग्रामीण बैंक्स, SBI, PNB) कभी-कभी सीधे बैक-दफ़्तर स्टाफ़ रिक्रूट करते हैं
  2. आउटसोर्सिंग एजेंसीज़ — बहुत से बैंक्स थर्ड-पार्टी कंपनीज़ (जैसे Quess, TeamLease, या लोकल एजेंसीज़) के ज़रिए बैक-दफ़्तर स्टाफ़ हायर करते हैं। एम्प्लॉयमेंट न्इस्तेमालपेपर या ऑनलाइन जॉब पोर्टल्स पर ओपनिंग्स देखो
  3. वॉक-इन इंटरव्इस्तेमाल — कुछ बैंक्स और एजेंसीज़ डिस्ट्रिक्ट टाउन्स में वॉक-इन ड्राइव्स करती हैं

"मीरा, तुम्हारी अकाउंटिंग नॉलेज से तुम इस जॉब में कमाल करोगी," पूजा ने कहा। "तुम डेबिट्स और क्रेडिट्स समझती हो, रीकंसिलिएशन जानती हो, बैलेंस शीट पढ़ सकती हो। ज़्यादातर बैक-दफ़्तर स्टाफ़ को शुरू में इनमें से कुछ भी नहीं आता।"

बैंक बैक-दफ़्तर के अंदर: कंप्यूटर्स की कतारें, स्टाफ़ डॉक्यूमेंट्स प्रक्रिया कर रहा है और डेटा एंटर कर रहा है


करियर पाथ 5: बैंकएश्योरेंस एजेंट

पूजा थोड़ा झुकी। "पर मैं तुम्हें अपनी जॉब की सबसे इंटरेस्टिंग बात बताती हूँ।"

"क्या मतलब?"

"तो बैक-दफ़्तर में एक साल काम करने के बाद, मेरे ब्रांच प्रबंधक ने पूछा कि क्या मैं इंश्योरेंस उत्पाद बेचना चाहती हूँ। बैंक का इंश्योरेंस कंपनीज़ से टाई-अप है — LIC, SBI लाइफ़, ICICI लोम्बार्ड। जब बैंक अपने ग्राहकों को इंश्योरेंस बेचता है, तो उसे बैंकएश्योरेंस कहते हैं।"

बैंकएश्योरेंस क्या है?

बैंकएश्योरेंस वह है जब एक बैंक अपने ग्राहकों को इंश्योरेंस उत्पाद बेचता है। हर पॉलिसी बिकने पर बैंक को कमीशन मिलता है, और जो एजेंट बेचता है उसे भी उस कमीशन में हिस्सा मिलता है।

बैंकएश्योरेंस एजेंट क्या करता है?

  • बैंक आने वाले ग्राहकों से बात करता है जो दूसरे काम के लिए आए हैं (जैसे फ़िक्स्ड डिपॉज़िट्स, लोन्स, अकाउंट ओपनिंग)
  • इंश्योरेंस उत्पाद समझाता है — लाइफ़ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस
  • ग्राहकों को सही पॉलिसी चुनने में मदद करता है
  • एप्लिकेशन फ़ॉर्म्स भरता है और प्रक्रिया करता है
  • हर साल रिन्यूअल्स पर फ़ॉलो-अप करता है

पूजा का अनुभव

"शुरू में मुझे डर लगा," पूजा ने माना। "मैं 'सेल्स पर्सन' नहीं हूँ। मैं शाई हूँ। पर फिर मुझे एहसास हुआ — मैं बेच नहीं रही, मदद कर रही हूँ। जब कोई बुज़ुर्ग अंकल बैंक में अपनी रिटायरमेंट की रकम जमा करने आते हैं, और मैं उन्हें समझाती हूँ कि उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी भी लेनी चाहिए — तो मैं असलीी उनकी भलाई कर रही हूँ।"

"पिछले महीने मैंने 8 पॉलिसीज़ बेचीं। मेरा कमीशन था Rs 14,000 — अपनी नियमित तनख़्वाह Rs 18,000 के ऊपर। तो मैंने एक महीने में Rs 32,000 कमाए!"

मीरा की चाय गिरते-गिरते बची। "Rs 32,000? पूजा, यह तो नेगी भैया से भी ज़्यादा है!"

पूजा हँसी। "हर महीना इतना अच्छा नहीं होता। कुछ महीनों में सिर्फ 2-3 पॉलिसीज़ बिकती हैं। पर एवरेज में मैं Rs 22,000 से Rs 28,000 कुल कमाती हूँ।"

कमाई की संभावना

कम्पोनेंटराशि
बेस तनख़्वाह (बैक-दफ़्तर)Rs 12,000 — Rs 18,000
इंश्योरेंस कमीशन (हर महीने बदलता है)Rs 2,000 — Rs 25,000
कुल मासिक आमदनीRs 14,000 — Rs 40,000+

शुरुआत कैसे करें

  1. पहले बैंक में जॉब लो (बैक-दफ़्तर या मददर के रूप में भी)
  2. अंदर आने के बाद अपने ब्रांच प्रबंधक को बैंकएश्योरेंस में इंटरेस्ट बताओ
  3. बैंक प्रशिक्षण अरेंज करेगा और IRDA लाइसेंस (इंश्योरेंस सेलिंग लाइसेंस) लेने में मदद करेगा
  4. ब्रांच में आने वाले ग्राहकों को बेचना शुरू करो

"की यह है," पूजा ने कहा, "कि पहले बैंक के अंदर आओ। एक बार अंदर आ गए, तो अवसरज़ खुलती जाती हैं।"


तुलना — सभी पाँच रास्ते एक नज़र में

मीरा ध्यान से पूजा की हर बात सुन रही थी। अब वो पूरी पिक्चर देखना चाहती थी। चलो सभी पाँच करियर पाथ्स की तुलना करते हैं।

करियर पाथन्यूनतम योग्यताशुरुआती तनख़्वाहबढ़त की संभावनाकाम करने का तरीका
GST प्रैक्टिशनर10वीं + 5 साल अनुभव या ग्रेजुएटRs 15,000/मंथRs 50,000+/मंथस्वतंत्र / घर से काम
बुककीपरकोई फ़ॉर्मल ज़रूरत नहींRs 10,000/मंथRs 25,000/मंथएम्प्लॉइड या फ़्रीलांस
CA दफ़्तर असिस्टेंट10वीं पास + बुनियादी हुनरRs 8,000/मंथRs 35,000/मंथदफ़्तर-बेस्ड
बैंक बैक-दफ़्तर10वीं/12वीं + कंप्यूटर हुनरRs 10,000/मंथRs 28,000/मंथबैंक दफ़्तर
बैंकएश्योरेंस एजेंटबैंक जॉब + IRDA लाइसेंसRs 14,000/मंथRs 40,000+/मंथबैंक + फ़ील्ड विज़िट्स

पाँच करियर पाथ्स की विज़ुअल तुलना, सबका शुरुआती बिंदु एक ही है: "बुककीपिंग और GST नॉलेज"


वो हुनर जो इन सभी करियर्स में चाहिए

"पूजा, इन सभी करियर्स में सबसे ज़्यादा कौन सी हुनर मायने रखती हैं?" मीरा ने पूछा।

पूजा ने एक पल सोचा। "ऑनेस्टली? तीन चीज़ें।"

हुनर 1: एक्युरेसी (सटीकता)

"बैंकिंग में, अकाउंटिंग में, GST में — एक्युरेसी ही सब कुछ है। अगर तुम बैंक अकाउंट नंबर में एक गलत डिजिट एंटर कर दो, तो किसी का पैसा गलत आदमी के पास चला जाता है। अगर GSTR-3B में गलत फ़िगर फ़ाइल कर दो, तो पेनल्टी लगती है। ध्यान से काम करना और अपने काम को डबल-चेक करना — यही सबसे इम्पॉर्टेंट हुनर है।"

हुनर 2: कंप्यूटर लिटरेसी

"तुम्हें प्रोग्रामर बनने की ज़रूरत नहीं है। पर कंप्यूटर इस्तेमाल करने में आरामदेह होना ज़रूरी है। टाइपिंग स्पीड मायने रखती है। एक्सेल आना मायने रखता है। अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल कर पाना मायने रखता है। मेरे बैंक में सब कुछ कंप्यूटर पर होता है। अगर तुम फ़ास्ट टाइप नहीं कर सकते और सॉफ़्टवेयर नेविगेट नहीं कर सकते, तो दिक्कत होगी।"

हुनर 3: कम्यूनिकेशन

"तुम्हें क्लाइंट्स से बात करनी पड़ती है। CA दफ़्तर में बिज़नेस ओनर्स से बात करते हो। बैंक में ग्राहकों से बात करते हो। तुम्हें चीज़ें सिंपल भाषा में समझानी आनी चाहिए, पोलाइट रहना चाहिए, और फ़ॉलो-अप करना चाहिए। बहुत से लोगों के पास टेक्निकल हुनर हैं पर कम्यूनिकेट अच्छे से नहीं कर पाते। अगर तुम दोनों कर सकते हो, तो तुम सबसे अलग हो।"

मीरा ने सिर हिलाया। उसे याद आया कि शर्मा सर कैसे हमेशा इतने आसानी समझाते थे। वो भी एक हुनर ही थी।


असली लोग, असली कहानियाँ

पूजा और मीरा ने चाय का दूसरा राउंड मँगवाया। पूजा ने अपने जानने वालों की कुछ कहानियाँ सुनाईं।

पिथौरागढ़ के रवि

रवि ने गवर्नमेंट स्कूल से 12वीं पास की। वो हल्द्वानी में एक CA दफ़्तर में Rs 7,000 पर मंथ पर ज्वाइन हुआ। तीन साल तक उसने सब कुछ सीखा — टैली, GST, TDS, ऑडिट असिस्टेंस। 23 साल की उम्र में उसने GST प्रैक्टिशनर के रूप में रजिस्टर कराया। आज, 27 साल की उम्र में, उसके 45 क्लाइंट्स हैं और वो Rs 50,000 पर मंथ से ज़्यादा कमाता है। उसने बस स्टैंड के पास एक छोटी दफ़्तर स्पेस खरीदी है।

अल्मोड़ा की सुनीता

सुनीता एक गृहिणी थीं जिन्होंने एक फ़्री गवर्नमेंट प्रशिक्षण प्रोग्राम से बुककीपिंग सीखी। उन्होंने अपने शहर की तीन छोटी दुकानों — एक किराना स्टोर, एक कपड़े की दुकान, और एक मेडिकल स्टोर — के बुक्स करना शुरू किया। वो हर दुकान से Rs 2,000 पर मंथ चार्ज करती हैं। तीन दुकानों से Rs 6,000 कमाती हैं। बहुत ज़्यादा नहीं है, पर वो यह काम घर से करती हैं, घर भी सँभालती हैं। उनकी प्लान है और क्लाइंट्स जोड़ने की।

रुद्रपुर के दीपक

दीपक ने बैंक में दो साल डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम किया। फिर वो लोन प्रक्रियािंग टीम में चला गया। उसने बैलेंस शीट्स, आमदनी स्टेटमेंट्स, और क्रेडिट एनालिसिस सीखी। अब वो एक प्राइवेट बैंक में लोन दफ़्तरर है, Rs 35,000 पर मंथ कमा रहा है।

"ये असली लोग हैं," पूजा ने कहा। "दिल्ली-मुंबई के नहीं। हमारे पहाड़ों के। हमारे शहरों के।"


आगे पढ़ाई के बारे में क्या?

"पूजा, क्या मुझे ग्रेजुएशन या कोई कोर्स करने के बारे में सोचना चाहिए?" मीरा ने पूछा।

"तुम क्या चाहती हो, उस पर निर्भर करता है। मैं बताती हूँ।"

लक्ष्यक्या पढ़ना हैकितना समयखर्चा
CA बनना हैCA फ़ाउंडेशन (12वीं या ग्रेजुएशन के बाद)4-5 सालRs 20,000 — Rs 50,000
एलिजिबिलिटी के लिए डिग्री चाहिएBA / BCom डिस्टेंस एजुकेशन से (IGNOU, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी)3 सालकुल Rs 15,000 — Rs 30,000
जल्दी सर्टिफ़िकेशन चाहिएNSDC हुनर सर्टिफ़िकेशन या NACIN GST सर्टिफ़िकेशन3-6 महीनेRs 2,000 — Rs 10,000
सॉफ़्टवेयर हुनर चाहिएकिसी लोकल इंस्टिट्यूट से टैली प्राइम कोर्स2-3 महीनेRs 3,000 — Rs 8,000

"मेरी सलाह है," पूजा ने कहा, "काम करती रहो और कमाती रहो। पर पार्ट-टाइम पढ़ो। IGNOU से BCom सिर्फ Rs 10,000 पर ईयर है। वीकेंड्स पर पढ़ सकती हो। तीन साल में तुम्हारे पास डिग्री भी होगी और तीन साल का वर्क अनुभव भी। यह कॉम्बिनेशन सोने जैसा है।"

मीरा ने यह अपनी नोटबुक में लिख लिया।


मीरा की समझ

जब चायवाले ने उनके खाली गिलास उठाए, मीरा ने पूजा को नई नज़रों से देखा। दो साल पहले, वे दोनों बागेश्वर की डरी हुई लड़कियाँ थीं जिन्होंने बस 10वीं पास की थी। आज, पूजा बैंक में Rs 25,000 पर मंथ कमा रही थी। मीरा GST रिटर्न्स फ़ाइल कर रही थी और फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स तैयार कर रही थी।

"पूजा, जानती हो मुझे क्या सबसे ज़्यादा हैरान करता है?" मीरा ने कहा।

"क्या?"

"स्कूल में किसी ने कभी हमें इन करियर्स के बारे में नहीं बताया। हमेशा कहते थे — डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर, सरकारी नौकरी। किसी ने बुककीपर नहीं कहा। किसी ने GST प्रैक्टिशनर नहीं कहा। किसी ने बैंक बैक-दफ़्तर नहीं कहा। ये असली करियर्स हैं। अच्छे करियर्स हैं। और हम ये कर सकती हैं।"

पूजा ने सिर हिलाया। "दुनिया ऐसी जॉब्स से भरी है जो छोटे शहर की लड़कियों को कोई नहीं बताता। पर वो मौजूद हैं। और वो उन लोगों का इंतज़ार कर रही हैं जिनके पास हुनर हैं।"

दोनों ने गले मिलकर हर शनिवार चाय पर मिलने का वादा किया।

मीरा और पूजा बस स्टैंड पर अलग हो रही हैं, दोनों मुस्कुरा रही हैं, दोनों अपने भविष्य को लेकर आत्मविश्वासी हैं


क्विक रीकैप — चैप्टर 27

बुककीपिंग और GST हुनर वाले किसी व्यक्ति के लिए पाँच करियर पाथ्स:

  1. GST प्रैक्टिशनर — कई क्लाइंट्स के लिए रिटर्न्स फ़ाइल करो। 10वीं + 5 साल अनुभव या डिग्री चाहिए। घर से काम कर सकते हो। कमाई Rs 15,000 — Rs 50,000/मंथ।

  2. बुककीपर — फ़ाइनेंशियल रिकॉर्ड बनाए रख करो। कोई डिग्री नहीं चाहिए। एम्प्लॉइड या फ़्रीलांस। कमाई Rs 10,000 — Rs 25,000/मंथ।

  3. CA दफ़्तर असिस्टेंट — डेटा एंट्री, वाउचर पोस्टिंग, रिटर्न फ़ाइलिंग। शुरुआत Rs 8,000/मंथ से, Rs 35,000/मंथ तक पहुँच सकते हो।

  4. बैंक बैक-दफ़्तर — डेटा एंट्री, MIS रिपोर्ट्स, डॉक्यूमेंट वेरिफ़िकेशन। कमाई Rs 10,000 — Rs 28,000/मंथ।

  5. बैंकएश्योरेंस एजेंट — बैंक के ज़रिए इंश्योरेंस बेचो। बेस तनख़्वाह + कमीशन। कमाई Rs 14,000 — Rs 40,000+/मंथ।

ज़रूरी हुनर: एक्युरेसी, कंप्यूटर लिटरेसी, कम्यूनिकेशन।

आगे की पढ़ाई: काम करते हुए डिस्टेंस एजुकेशन से BCom करो। NACIN GST सर्टिफ़िकेशन और टैली प्राइम कोर्स जल्दी और उपयोगी हैं।


अभ्यास अभ्यास — अपने ऑप्शंस एक्सप्लोर करो

अभ्यास 1: सेल्फ़-असेसमेंट

एक कागज़ लो। हर करियर पाथ के लिए 1 से 5 के पैमाने पर अपने आप को रेट करो:

करियर पाथमुझे कितनी दिलचस्पी है? (1-5)मैं आज कितना तैयार हूँ? (1-5)मुझे क्या सीखना है?
GST प्रैक्टिशनर
बुककीपर
CA दफ़्तर असिस्टेंट
बैंक बैक-दफ़्तर
बैंकएश्योरेंस एजेंट

अभ्यास 2: रिसर्च

GST पोर्टल (www.gst.gov.in) पर जाओ और "GST प्रैक्टिशनर" सेक्शन ढूँढो। एलिजिबिलिटी रिक्वायरमेंट्स और एग्ज़ाम सिलेबस पढ़ो। इस बुक से तीन चीज़ें लिखो जो तुम पहले से जानते हो और एग्ज़ाम में आती हैं।

अभ्यास 3: लोकल सर्वे

अपने शहर में पता करो:

  • कितनी CA दफ़्तरेज़ हैं? (लोगों से पूछो या गूगल मैप्स पर सर्च करो)
  • कौन-कौन से बैंक्स की ब्रांचेज़ यहाँ हैं?
  • क्या कोई आउटसोर्सिंग एजेंसीज़ हैं जो बैंक स्टाफ़ प्रोवाइड करती हैं?

कम से कम तीन जगहें लिखो जहाँ तुम आज जॉब के लिए लागू कर सकते हो।

अभ्यास 4: किसी से बात करो

अगर तुम किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हो जो अकाउंटिंग, बैंकिंग, या CA दफ़्तर में काम करता है — उससे बात करो। उनसे पूछो:

  • तुम्हें जॉब कैसे मिली?
  • तुम हर दिन क्या करते हो?
  • एक नया सीखने वाला को क्या सलाह दोगे?

वो जो कहें लिख लो। असली बातचीत किसी भी बुक से ज़्यादा सिखाती है।


हौसले की बात

एक इम्पॉर्टेंट बात सुनो। हर एक्सपर्ट कभी नया सीखने वाला था। हर CA कभी डरा हुआ स्टूडेंट था। हर बैंक प्रबंधक कभी ट्रेनी था। हर सफल GST प्रैक्टिशनर ने कभी अपना पहला रिटर्न काँपते हाथों से फ़ाइल किया था।

तुमने सबसे मुश्किल काम पहले ही कर लिया है — तुमने बुनियादी्स सीख लिए हैं। तुम डेबिट्स और क्रेडिट्स समझते हो। तुम बैलेंस शीट पढ़ सकते हो। तुम जानते हो GSTR-1 और GSTR-3B क्या हैं। तुम अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल कर सकते हो।

उत्तराखंड के एक छोटे शहर से, तुमने एक ऐसी फ़ाउंडेशन बनाई है जो बड़े शहरों के बहुत से लोगों के पास नहीं है। इस पर गर्व करो। और आगे बढ़ते रहो।

सोमवार की सुबह, मीरा शर्मा सर की दफ़्तर में एक नया सवाल लेकर आती है: "सर, मुझे पता है ये करियर पाथ्स मौजूद हैं। पर मैं असलीी जॉब इंटरव्यू की तैयारी कैसे करूँ? लोगों को कैसे दिखाऊँ कि मुझे क्या आता है?" शर्मा सर मुस्कुराते हैं। "यही," वो कहते हैं, "आज हम बात करेंगे।"


जॉब रेडीनेस — दिखाओ कि तुम क्या जानते हो

सोमवार की सुबह। मीरा ठीक 9:30 बजे दफ़्तर पहुँची। नेगी भैया पहले से अपनी डेस्क पर बैठे तेज़ी से टाइप कर रहे थे — GST फ़ाइलिंग सीज़न था। शर्मा सर 10 बजे हमेशा की तरह अपना स्टील का टिफ़िन और अखबार लेकर आए। कुर्सी पर बैठे और मीरा की तरफ देखा। "तो, मीरा। पूजा ने बताया कि तुम दोनों ने करियर ऑप्शंस पर अच्छी बातचीत की।" मीरा हैरान हुई — "आप पूजा को जानते हैं?" शर्मा सर हँसे। "उसकी ब्रांच का प्रबंधक मेरा क्लाइंट है। छोटा शहर, छोटी दुनिया। अब बैठो। आज का लेसन सबसे इम्पॉर्टेंट है। तुमने महीनों से अकाउंटिंग, GST, ERPLite, TDS, पेरोल सीखा है। यह सारा नॉलेज तुम्हारे दिमाग में है। पर जब तुम जॉब इंटरव्यू के लिए जाओगी, तो दिमाग के अंदर का नॉलेज इनविज़िबल होता है। तुम्हें उसे विज़िबल बनाना होगा। तुम्हें दिखाना होगा कि तुम क्या जानती हो।"

मीरा अपनी डेस्क पर नोटबुक के साथ बैठी है, शर्मा सर व्हाइटबोर्ड पर "शो व्हॉट यू नो" लिख रहे हैं


चरण 1: अपने काम का पोर्टफ़ोलियो बनाओ

पोर्टफ़ोलियो क्या होता है?

पोर्टफ़ोलियो तुम्हारे काम के सैम्पल्स का एक कलेक्शन होता है जो तुम्हारी हुनर प्रूव करता है। एक पेंटर पेंटिंग्स दिखाता है। एक दर्ज़ी सिले हुए कपड़े दिखाता है। एक अकाउंटेंट वो फ़ाइनेंशियल रिकॉर्ड दिखाता है जो उसने तैयार किए हैं।

"मीरा, पिछले कुछ महीनों में तुमने सैकड़ों वाउचर्स बनाए, कई ट्रायल बैलेंसेस, पूरे फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, और दर्जनों GST रिटर्न्स। यही तुम्हारा पोर्टफ़ोलियो है," शर्मा सर ने कहा।

पोर्टफ़ोलियो में क्या रखना है

शर्मा सर ने मीरा की एक लिस्ट बनाने में मदद की। यहाँ वो चीज़ें हैं जो तुम्हें कलेक्ट करनी चाहिए:

चीज़यह क्या दिखाती हैकैसे तैयार करें
सैम्पल वाउचर्स (5-6 तरह के)तुम्हें अलग-अलग तरह के ट्रांज़ैक्शंस दर्ज करना आता हैतुमने जो वाउचर्स बनाए हैं उनके स्क्रीनशॉट्स या फ़ोटोकॉपीज़ लो — रिसीप्ट, पेमेंट, जर्नल, कॉन्ट्रा, सेल्स, परचेज़
ट्रायल बैलेंसतुम अकाउंट्स कम्पाइल और वेरिफ़ाई कर सकते होतुमने जो ट्रायल बैलेंस तैयार किया है उसका एक प्रिंट लो। कुल्स मैच होने चाहिए।
मुनाफ़ा एंड घाटा स्टेटमेंटतुम कम्प्लीट आमदनी स्टेटमेंट बना सकते होएक P&L स्टेटमेंट प्रिंट करो — रियल या अभ्यास सेट ऑफ़ बुक्स से
बैलेंस शीटतुम एसेट्स, लायबिलिटीज़, और इक्विटी समझते होएक बैलेंस शीट प्रिंट करो — फ़ॉर्मेट शेड्यूल III के अनुसार होना चाहिए
GSTR-1 समरीतुम सेल्स रिटर्न फ़ाइल कर सकते होफ़ाइल्ड GSTR-1 का स्क्रीनशॉट लो (प्राइवेसी के लिए क्लाइंट का GSTIN और नाम हटा दो)
GSTR-3B समरीतुम मंथली समरी रिटर्न फ़ाइल कर सकते होफ़ाइल्ड GSTR-3B का स्क्रीनशॉट लो (वही प्राइवेसी नियम)
बैंक रीकंसिलिएशनतुम बुक्स को बैंक स्टेटमेंट से मैच कर सकते होतुमने जो रीकंसिलिएशन स्टेटमेंट बनाया है उसका एक प्रिंट लो
ERPLite स्क्रीनशॉट्सतुम अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल कर सकते होERPLite में अपने काम के स्क्रीनशॉट्स लो — वाउचर एंट्री स्क्रीन, रिपोर्ट स्क्रीन, लेजर व्यू

"पर सर," मीरा ने कहा, "इसमें कुछ कॉन्फ़िडेंशियल क्लाइंट डेटा है। मैं दूसरे लोगों के बिज़नेस के नंबर्स नहीं दिखा सकती।"

शर्मा सर ने सराहना से सिर हिलाया। "अच्छी सोच है। इसके दो तरीके हैं।"

कॉन्फ़िडेंशियलिटी कैसे सँभालें

विकल्प 1: अभ्यास डेटा इस्तेमाल करो — एक काल्पनिक बिज़नेस के लिए बुक्स बनाओ। उसे "मीरा जनरल स्टोर" या "अभ्यास कंपनी लि." कहो। ट्रांज़ैक्शंस एंटर करो, स्टेटमेंट्स बनाओ, अभ्यास रिटर्न्स फ़ाइल करो। इससे तुम्हारी हुनर दिखती हैं बिना किसी का प्राइवेट डेटा रिवील किए।

विकल्प 2: रियल वर्क रिडैक्ट करो — अगर तुम कोई रियल GSTR-1 या रियल बैलेंस शीट दिखाना चाहती हो, तो क्लाइंट का नाम, GSTIN, PAN, और कोई भी आइडेंटिफ़ाइंग ब्योरा ब्लैंक कर दो या ढक दो। फ़ॉर्मेट और अपना काम दिखाओ, क्लाइंट का डेटा नहीं।

पोर्टफ़ोलियो कैसे व्यवस्थित करें

एक आसान प्लास्टिक फ़ोल्डर लो जिसमें साफ़ स्लीव्स हों — जो किसी भी स्टेशनरी शॉप पर Rs 50-80 में मिल जाता है। इसे इस तरह व्यवस्थित करो:

  1. कवर पेज — तुम्हारा नाम, फ़ोन नंबर, ईमेल
  2. टेबल ऑफ़ कंटेंट्स — अंदर क्या-क्या है उसकी लिस्ट
  3. वाउचर सैम्पल्स — हर टाइप का एक
  4. फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स — ट्रायल बैलेंस, P&L, बैलेंस शीट
  5. GST रिटर्न सैम्पल्स — GSTR-1 और GSTR-3B स्क्रीनशॉट्स
  6. बैंक रीकंसिलिएशन
  7. ERPLite स्क्रीनशॉट्स
  8. कोई भी सर्टिफ़िकेट्स — कंप्यूटर कोर्स, अकाउंटिंग कोर्स, NACIN सर्टिफ़िकेशन

"जब तुम इंटरव्यू में इस फ़ोल्डर के साथ जाओगी," शर्मा सर ने कहा, "तुम पहले से 90% कैंडिडेट्स से आगे हो। ज़्यादातर लोग बस एक रिज़्यूमे लेकर आते हैं और कहते हैं 'मुझे अकाउंटिंग आती है।' तुम प्रूफ़ लेकर आती हो।"

एक नीट प्लास्टिक फ़ोल्डर डेस्क पर खुला हुआ, व्यवस्थित्ड सेक्शंस दिख रहे हैं: वाउचर्स, फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, GST रिटर्न्स, सर्टिफ़िकेट्स


चरण 2: अपना रिज़्यूमे / CV बनाओ

रिज़्यूमे क्या होता है?

रिज़्यूमे (जिसे CV — करिकुलम विटाई भी कहते हैं) एक या दो पेज का डॉक्यूमेंट होता है जो समराइज़ करता है कि तुम कौन हो, तुम्हें क्या आता है, और तुमने क्या किया है। यह पहली चीज़ है जो कोई भी एम्प्लॉयर देखता है।

"चलो मैं तुम्हें अच्छा रिज़्यूमे बनाना सिखाता हूँ," शर्मा सर ने कहा। उन्होंने कंप्यूटर पर एक ब्लैंक डॉक्यूमेंट खोला।

क्या-क्या शामिल करना है

यहाँ फ़ॉर्मेट है, सेक्शन बाय सेक्शन:


मीरा जोशी

फ़ोन: 98XX-XXXXXX | ईमेल: [email protected] | हल्द्वानी, उत्तराखंड


OBJECTIVE (उद्देश्य)

एक बुककीपर या अकाउंटिंग असिस्टेंट की पोज़िशन चाहती हूँ जहाँ मैं डबल-एंट्री अकाउंटिंग, GST रिटर्न फ़ाइलिंग, और अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर में अपनी हुनर का उपयोग करके व्यवस्थितेशन की सफलता में योगदान दे सकूँ।


SKILLS (कौशल)

  • डबल-एंट्री बुककीपिंग (जर्नल, लेजर, ट्रायल बैलेंस, फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स)
  • GST कम्प्लायंस (GSTR-1, GSTR-3B, ITC रीकंसिलिएशन, ई-वे बिल्स)
  • अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर: Udyamo ERPLite
  • TDS बुनियादी्स (डिडक्शन, चालान पेमेंट, रिटर्न फ़ाइलिंग)
  • पेरोल प्रक्रियािंग (तनख़्वाह कम्प्यूटेशन, PF, ESIC, पेशेवर टैक्स)
  • बैंक रीकंसिलिएशन
  • MS Excel (डेटा एंट्री, फ़ॉर्मूलाज़, बुनियादी चार्ट्स)
  • हिन्दी और इंग्लिश (बोलना, पढ़ना, लिखना)

WORK EXPERIENCE (कार्य अनुभव)

ट्रेनी अकाउंटेंट — V.K. Sharma & Associates, Chartered Accountants, हल्द्वानी (मंथ ईयर — प्रेज़ेंट)

  • 10+ क्लाइंट्स के डेली ट्रांज़ैक्शंस दर्ज करना और वाउचर्स बनाना
  • लेजर्स बनाए रख करना और मंथली ट्रायल बैलेंसेस तैयार करना
  • Rs 1 करोड़ तक के एनुअल टर्नओवर वाले क्लाइंट्स के लिए GSTR-1 और GSTR-3B रिटर्न्स फ़ाइल करना
  • एनुअल फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स और GSTR-9 तैयार करने में असिस्ट करना
  • बैंक रीकंसिलिएशन और पेमेंट ट्रैकिंग सँभालना
  • सभी बुककीपिंग टास्क्स के लिए Udyamo ERPLite इस्तेमाल करना

EDUCATION (शिक्षा)

  • 10वीं पास — Government Inter College, बागेश्वर, उत्तराखंड (ईयर)

ADDITIONAL LEARNING (अतिरिक्त शिक्षा)

  • बुककीपिंग और GST — CA V.K. Sharma के अंडर प्रशिक्षण (6 महीने)
  • बुनियादी कंप्यूटर कोर्स — (इंस्टिट्यूट का नाम, अगर एप्लीकेबल हो)

REFERENCES

माँगने पर उपलब्ध।


रिज़्यूमे में क्या नहीं रखना

शर्मा सर इस बारे में बहुत साफ़ थे:

यह मत लिखोक्यों
पिता का नाम, माता का नाम, जाति, धर्मरिलेवेंट नहीं है। एम्प्लॉयर्स को नहीं पूछना चाहिए। तुम्हें नहीं बताना चाहिए।
PIN कोड के साथ पूरा पोस्टल पताशहर और राज्य काफी है। पूरा पता प्राइवेसी जोखिम है।
जन्मतिथिइस चरण पर ज़रूरी नहीं। सिर्फ फ़ॉर्म में पूछें तो बताओ।
फ़ोटो (जब तक ख़ासली माँगी न जाए)इससे बायस हो सकता है। तभी लगाओ जब जॉब पोस्टिंग में माँगी गई हो।
हॉबीज़ जैसे "पढ़ना, गाने सुनना, क्रिकेट देखना"भारत में हर रिज़्यूमे यही कहता है। ज़ीरो वैल्यू ऐड होती है।
झूठे दावेकभी ऐसी हुनर का दावा मत करो जो तुम्हें नहीं आतीं। इंटरव्यू में पकड़े जाओगे।
लंबे पैराग्राफ़्सबुलेट पॉइंट्स इस्तेमाल करो। छोटी लाइन्स। आसानी से स्कैन हो सके।
स्पेलिंग ग़लतियाँ और खराब फ़ॉर्मेटिंगतीन बार प्रूफ़रीड करो। किसी और से चेक करवाओ। एक अकाउंटेंट को ब्योरा-ओरिएंटेड होना चाहिए — तुम्हारा रिज़्यूमे इसका पहला प्रूफ़ है।

"याद रखो," शर्मा सर ने कहा, "तुम्हारा रिज़्यूमे एक पेज का होना चाहिए। मैक्सिमम दो पेजेज़ अगर बहुत ज़्यादा अनुभव हो। शुरुआत कर रहे हो तो, मीरा, एक पेज बिल्कुल सही है।"

एक स्ट्रॉंग रिज़्यूमे के लिए टिप्स

  1. एक्शन वर्ड्स इस्तेमाल करो — "ट्रायल बैलेंसेस तैयार किए" न कि "ट्रायल बैलेंस के काम में इनवॉल्व्ड थी"
  2. नंबर्स इस्तेमाल करो — "10+ क्लाइंट्स के GST रिटर्न्स फ़ाइल किए" बेहतर है बनिस्बत "क्लाइंट्स के GST रिटर्न्स फ़ाइल किए"
  3. हुनर पहले, एजुकेशन बाद में — जब डिग्री नहीं है, तो जो तुम कर सकते हो उसे आगे रखो
  4. जॉब पोस्टिंग से मैच करो — अगर जॉब में "GST नॉलेज" माँगी है, तो रिज़्यूमे में "GST" प्रॉमिनेंटली दिखना चाहिए
  5. PDF में सेव करो — ईमेल करते समय हमेशा रिज़्यूमे PDF में भेजो। हर कंप्यूटर पर सेम दिखता है। वर्ड फ़ाइल किसी और की मशीन पर अलग दिख सकती है।

चरण 3: इंटरव्यू की तैयारी करो

नेगी भैया ने अपनी कुर्सी खींची। "मीरा, इसमें मैं मदद करता हूँ। मैं खुद कुछ इंटरव्इस्तेमाल दे चुका हूँ।"

"वो क्या पूछते हैं?" मीरा ने घबराकर पूछा।

"चिंता मत करो। हमारे लेवल की अकाउंटिंग जॉब्स के लिए सवाल काफी अनुमान लगाने योग्य होते हैं। मैं तुम्हें सबसे आम सवाल बताता हूँ।"

आम इंटरव्यू क्वेश्चंस और उनके जवाब कैसे दें

क्वेश्चन 1: "अपने बारे में बताइए।"

यह सबसे आम ओपनिंग क्वेश्चन है। अपनी पूरी लाइफ़ स्टोरी मत सुनाओ। 4-5 सेंटेंसेज़ में रखो।

सैम्पल आंसर: "मेरा नाम मीरा जोशी है। मैं बागेश्वर, उत्तराखंड से हूँ। पिछले छह महीनों से मैं हल्द्वानी में एक CA फ़र्म में ट्रेनी अकाउंटेंट के रूप में काम कर रही हूँ। मैं बुककीपिंग, GST रिटर्न फ़ाइलिंग सँभालती हूँ, और ERPLite नाम के अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर पर काम करती हूँ। मैं एक फ़ुल-टाइम अकाउंटिंग रोल ढूँढ रही हूँ जहाँ मैं इन हुनर को इस्तेमाल कर सकूँ और आगे बढ़ सकूँ।"

क्वेश्चन 2: "डबल-एंट्री बुककीपिंग क्या है?"

सैम्पल आंसर: "डबल-एंट्री का मतलब है कि हर ट्रांज़ैक्शन दो अकाउंट्स में रिकॉर्ड होता है — एक डेबिट होता है और एक क्रेडिट। सभी डेबिट्स का कुल हमेशा सभी क्रेडिट्स के कुल के बराबर होना चाहिए। इसी तरह हम त्रुटियाँ पकड़ते हैं और बुक्स बैलेंस्ड रखते हैं।"

क्वेश्चन 3: "डेबिट और क्रेडिट में क्या फर्क है?"

सैम्पल आंसर: "डेबिट अकाउंट का लेफ़्ट साइड होता है। क्रेडिट राइट साइड। जब कोई एसेट बढ़ता है, तो हम डेबिट करते हैं। जब कोई लायबिलिटी बढ़ती है, तो क्रेडिट करते हैं। ख़र्चे के लिए डेबिट। आमदनी के लिए क्रेडिट।"

क्वेश्चन 4: "आपने कौन से GST रिटर्न्स फ़ाइल किए हैं?"

सैम्पल आंसर: "मैंने GSTR-1 फ़ाइल किया है, जो आउटवर्ड सप्लाइज़ — सेल्स इनवॉइसेज़, B2B और B2C — की मंथली या क्वार्टरली रिटर्न है। और GSTR-3B, जो मंथली समरी रिटर्न है जिसमें कुल टैक्स लायबिलिटी, ITC क्लेम्ड, और नेट टैक्स पेएबल दिखता है। मैंने GSTR-9, एनुअल रिटर्न, तैयार करने में भी असिस्ट किया है।"

क्वेश्चन 5: "इनपुट टैक्स क्रेडिट क्या है?"

सैम्पल आंसर: "ITC वो GST है जो तुमने अपनी परचेज़ेज़ पर चुकाया, जिसे तुम अपनी सेल्स पर कलेक्ट किए GST में से घटा सकते हो। तो तुम सिर्फ फर्क सरकार को देते हो। जैसे, अगर तुमने सेल्स पर Rs 1,800 GST कलेक्ट किया और परचेज़ेज़ पर Rs 1,200 GST चुकाया, तो तुम सरकार को सिर्फ Rs 600 देते हो।"

क्वेश्चन 6: "आपने कौन सा अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल किया है?"

सैम्पल आंसर: "मैंने अपने सभी बुककीपिंग टास्क्स के लिए Udyamo ERPLite इस्तेमाल किया है — मास्टर्स क्रिएट करना, वाउचर्स एंटर करना, ट्रायल बैलेंस, P&L, और बैलेंस शीट जैसी रिपोर्ट्स जेनरेट करना। मैं सॉफ़्टवेयर में पूरे सेल्स साइकल और परचेज़ साइकल से फ़ैमिलियर हूँ। और मैं Tally Prime या कोई भी सॉफ़्टवेयर सीखने के लिए तैयार हूँ जो आपकी दफ़्तर में इस्तेमाल होता हो।"

क्वेश्चन 7: "क्या आप ट्रायल बैलेंस बना सकती हैं?"

सैम्पल आंसर: "हाँ। ट्रायल बैलेंस सभी लेजर अकाउंट्स की लिस्ट है जिसमें उनके डेबिट या क्रेडिट बैलेंसेस होते हैं। डेबिट कॉलम का कुल क्रेडिट कॉलम के कुल के बराबर होना चाहिए। अगर मैच नहीं करते, तो इसका मतलब बुक्स में कहीं त्रुटि है जिसे ढूँढकर ठीक करना होगा।"

क्वेश्चन 8: "हम आपको क्यों हायर करें?"

सैम्पल आंसर: "मेरे पास बुककीपिंग और GST फ़ाइलिंग का व्यावहारिक अनुभव है। मैंने CA दफ़्तर में रियल क्लाइंट्स के साथ काम किया है। मैं नंबर्स के साथ केयरफ़ुल हूँ, अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल कर सकती हूँ, और सीखने की भूख है। मेरे पास वर्क सैम्पल्स का एक पोर्टफ़ोलियो भी है जो मैं आपको दिखा सकती हूँ।"

फिर अपना फ़ोल्डर खोलो और उन्हें दिखाओ।

नेगी भैया के इंटरव्यू टिप्स

"कुछ जनरल सलाह," नेगी भैया ने कहा:

  1. सादे और साफ कपड़े पहनो — साफ कपड़े, बाल सँवारे हुए, पॉलिश किए जूते। महँगे कपड़ों की ज़रूरत नहीं। साफ कपड़ों की ज़रूरत है।
  2. 15 मिनट्स पहले पहुँचो — इंटरव्यू के लिए कभी लेट मत जाओ। अगर दफ़्तर दूर है, तो एक दिन पहले जाकर रास्ता चेक कर लो।
  3. पोर्टफ़ोलियो फ़ोल्डर, रिज़्यूमे, और ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स ले जाओ — 10वीं की मार्कशीट, Aadhaar कार्ड, कोई भी सर्टिफ़िकेट्स। फ़ोटोकॉपीज़ भी रखो।
  4. साफ और ईमानदारी से बोलो — अगर किसी सवाल का जवाब नहीं आता, तो कहो "मुझे नहीं पता, पर मैं सीखने को तैयार हूँ।" यह कुछ बना लेने से बहुत बेहतर है।
  5. सवाल भी पूछो — अंत में जब वो कहें "कोई सवाल है?" — तो कुछ पूछो। जैसे: "दफ़्तर में कौन सा सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल होता है?" या "मैं कितने क्लाइंट्स के साथ काम करूँगी?" या "क्या नई चीज़ें सीखने का मौका मिलेगा?" यह दिखाता है कि तुम गंभीर और इंटरेस्टेड हो।

मीरा अपनी डेस्क पर इंटरव्यू आंसर्स अभ्यास कर रही है, नेगी भैया इंटरव्यूअर बनकर सवाल पूछ रहे हैं


चरण 4: अपनी ERP हुनर का डेमो दो

"एक टिप जो तुम्हें सबसे अलग बनाएगी," शर्मा सर ने कहा। "जब इंटरव्यू में जाओ, लाइव डेमो देने की पेशकश करो।"

लाइव डेमो क्या है?

सिर्फ यह कहने के बजाय "मुझे ERPLite आता है," दिखाने की पेशकश करो। अगर उनके पास कंप्यूटर अवेलेबल है, तो पूछो कि क्या तुम सॉफ़्टवेयर ओपन करके डेमोंस्ट्रेट कर सकती हो:

  • चार्ट ऑफ़ अकाउंट्स में एक नया अकाउंट बनाना
  • एक सेल्स वाउचर एंटर करना
  • एक पेमेंट रिसीप्ट पोस्ट करना
  • ट्रायल बैलेंस या P&L रिपोर्ट जेनरेट करना

"ज़्यादातर कैंडिडेट्स सिर्फ बात करते हैं," शर्मा सर ने कहा। "जब तुम बैठकर उनके सामने असलीी काम करती हो — उनके जबड़े गिर जाते हैं। मैंने लोगों को इसी वजह से ऑन द स्पॉट हायर किया है।"

अगर वो अलग सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करते हों?

"सर, अगर वो ERPLite की जगह Tally Prime इस्तेमाल करते हों?" मीरा ने पूछा।

"अच्छा सवाल। कॉन्सेप्ट्स सेम हैं। ERPLite में वाउचर है तो Tally में भी वाउचर है। लेजर तो लेजर ही है। स्क्रीन्स अलग दिखती हैं, पर लॉजिक आइडेंटिकल है। अगर तुम एक अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर भरोसे से इस्तेमाल कर सकती हो, तो दूसरा एक हफ्ते में सीख सकती हो।"

"इंटरव्यू में कहो: 'मेरा ERPLite का अनुभव है। मैं एक ERP सिस्टम में पूरी अकाउंटिंग वर्कफ़्लो समझती हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि मैं आपका सॉफ़्टवेयर जल्दी सीख सकती हूँ क्योंकि अकाउंटिंग लॉजिक सेम है।'"


चरण 5: सीखते रहो — आगे क्या पढ़ना है

शर्मा सर मीरा के साथ बैठे और अगले साल का लर्निंग प्लान बनाया।

1. Tally Prime

Tally भारत में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर है। लगभग हर CA दफ़्तर, छोटा बिज़नेस, और ट्रेडिंग कंपनी इसे इस्तेमाल करती है। Tally Prime सीखना तुम्हारा अगला कदम होना चाहिए।

कैसे सीखें:

  • किसी लोकल Tally कोचिंग इंस्टिट्यूट ज्वाइन करो (2-3 महीने का कोर्स, Rs 3,000 — Rs 8,000)
  • या YouTube पर फ़्री सीखो — सर्च करो "Tally Prime फ़ुल कोर्स इन हिंदी"
  • Tally Prime के फ़्री ट्रायल वर्ज़न पर अभ्यास करो

क्या सीखोगे:

  • कंपनी क्रिएशन और लेजर सेटअप
  • वाउचर एंट्री (सेम कॉन्सेप्ट्स जो तुम पहले से जानते हो, अलग स्क्रीन)
  • Tally में GST सेटअप और रिटर्न प्रेपरेशन
  • इन्वेंटरी प्रबंधन
  • Tally में पेरोल

"चूँकि तुम अकाउंटिंग कॉन्सेप्ट्स पहले से समझती हो," शर्मा सर ने कहा, "Tally सीखना तुम्हारे लिए बहुत फ़ास्ट होगा। ज़्यादातर Tally कोर्सेज़ पहला महीना अकाउंटिंग बुनियादी्स सिखाने में लगाते हैं — वो सब तुम्हें पहले से आता है।"

2. एडवांस्ड Excel

Excel हर जगह इस्तेमाल होता है — सिर्फ अकाउंटिंग में नहीं बल्कि बैंकिंग, इंश्योरेंस, गवर्नमेंट दफ़्तरेज़, और हर कॉर्पोरेट जॉब में। बुनियादी्स (डेटा टाइप करना, आसान फ़ॉर्मूलाज़) काफी नहीं हैं। तुम्हें इंटरमीडिएट-लेवल Excel हुनर चाहिए।

क्या सीखना है:

Excel हुनरक्यों ज़रूरी है
VLOOKUP / XLOOKUPएक टेबल से दूसरी टेबल में वैल्इस्तेमाल ढूँढना — डेटा मैचिंग के लिए ज़रूरी
पिवट टेबल्सहज़ारों रोज़ का डेटा सेकंड्स में समराइज़ करना — MIS रिपोर्टिंग में इस्तेमाल होता है
IF, SUMIF, COUNTIFकंडीशनल फ़ॉर्मूलाज़ — सिर्फ तभी गणना करो जब सर्टेन कंडीशंस पूरी हों
डेटा वैलिडेशनड्रॉपडाउन लिस्ट्स और नियम बनाओ ताकि डेटा एंट्री त्रुटि-फ़्री हो
कंडीशनल फ़ॉर्मेटिंगसेल्स को अपने-आप हाइलाइट करो — जैसे ओवरड्यू पेमेंट्स लाल दिखाओ
बुनियादी चार्ट्सनंबर्स को बार चार्ट्स और पाई चार्ट्स में बदलो रिपोर्ट्स के लिए

कैसे सीखें:

  • फ़्री YouTube कोर्सेज़: सर्च करो "Excel फ़ॉर अकाउंटिंग हिंदी"
  • रोज़ अभ्यास करो — एक महीना रोज़ 30 मिनट्स भी काफी है

3. आमदनी टैक्स बुनियादी्स

GST एक टाइप का टैक्स है। आमदनी टैक्स दूसरा मेजर टैक्स है। अगर तुम लंबे समय तक CA दफ़्तर में काम करना चाहते हो या इंनिर्भर टैक्स प्रैक्टिशनर बनना है, तो आमदनी टैक्स समझना ज़रूरी है।

क्या सीखना है:

  • आमदनी टैक्स क्या है और किसे पे करना होता है
  • आय के पाँच हेड्स (तनख़्वाह, हाउस संपत्ति, बिज़नेस, कैपिटल गेन्स, अदर सोर्सेज़)
  • ITR फ़ाइलिंग — आमदनी टैक्स रिटर्न कैसे फ़ाइल करें
  • TDS रिटर्न्स — बुनियादी्स तो इस बुक से पहले से जानते हो
  • बुनियादी टैक्स योजना — सेक्शन 80C, 80D, आदि से टैक्स कैसे बचाएँ

कैसे सीखें:

  • आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट का फ़्री ई-लर्निंग पोर्टल है: www.incometax.gov.in
  • CA कोचिंग इंस्टिट्यूट्स शॉर्ट-टर्म ITR फ़ाइलिंग कोर्सेज़ पेशकश करते हैं
  • करके सीखो — पहले अपने फ़ैमिली मेंबर्स का ITR फ़ाइल करो

4. कंपनी अकाउंट्स

अगर तुम किसी बड़ी कंपनी में काम करना चाहते हो (सिर्फ छोटी दुकानों और ट्रेडर्स में नहीं), तो कुछ एडीशनल कॉन्सेप्ट्स समझने होंगे।

क्या सीखना है:

  • शेयर कैपिटल और शेयर्स के टाइप्स
  • Companies Act के शेड्यूल III के अनुसार कंपनी फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स
  • ऑडिट बुनियादी्स — स्टैचुटरी ऑडिट में क्या होता है
  • MCA (Ministry of Corporate Affairs) कम्प्लायंस — एनुअल फ़ाइलिंग्स

यह ज़्यादा एडवांस्ड है और 1-2 साल का अनुभव होने तक वेट कर सकता है।

5. ऑनलाइन सर्टिफ़िकेशंस

सर्टिफ़िकेशनकिसके द्वाराखर्चाअवधि
GST प्रैक्टिशनर सर्टिफ़िकेशनNACIN (गवर्नमेंट बॉडी)सिर्फ एग्ज़ाम फ़ीसेल्फ़-स्टडी + एग्ज़ाम
अकाउंटिंग एंड बुककीपिंगNSDC (National Skill Development Corporation)फ़्री या नॉमिनल2-3 महीने
Tally विद GSTTally EducationRs 5,000 — Rs 10,0002-3 महीने
एडवांस्ड Excelकई ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स (Coursera, Udemy)फ़्री से Rs 500सेल्फ़-पेस्ड

6. LinkedIn प्रोफ़ाइल

"मीरा, तुम्हारा LinkedIn प्रोफ़ाइल है?" शर्मा सर ने पूछा।

"LinkedIn क्या है?"

"यह Facebook जैसा है, पर पेशेवर्स के लिए। कंपनीज़ वहाँ जॉब्स पोस्ट करती हैं। रिक्रूटर्स वहाँ कैंडिडेट्स ढूँढते हैं। तुम्हें एक प्रोफ़ाइल बनाना चाहिए।"

LinkedIn कैसे सेट अप करें:

  1. www.linkedin.com पर जाओ और फ़्री अकाउंट बनाओ
  2. एक पेशेवर फ़ोटो लगाओ (आसान बैकग्राउंड, साफ-सुथरी अपीयरेंस, कैमरे की तरफ फ़ेस)
  3. हेडलाइन लिखो: "अकाउंटिंग ट्रेनी | बुककीपिंग | GST | ERPLite"
  4. एक छोटा समरी लिखो: अपनी हुनर और अनुभव के बारे में 3-4 सेंटेंसेज़
  5. वर्क अनुभव ऐड करो (रिज़्यूमे जैसा ही)
  6. हुनर ऐड करो — बुककीपिंग, GST, डबल-एंट्री अकाउंटिंग, ERPLite
  7. जिन्हें जानती हो उनसे कनेक्ट करो — शर्मा सर, नेगी भैया, पूजा, क्लासमेट्स
  8. हल्द्वानी, देहरादून, और जिन शहरों में काम करना चाहो वहाँ की कंपनीज़ और CA फ़र्म्स पालन करो

"उत्तराखंड में अब बहुत से रिक्रूटर्स LinkedIn पर अकाउंटिंग स्टाफ़ ढूँढते हैं," नेगी भैया ने कहा। "मुझे पिछले महीने देहरादून की एक फ़र्म से जॉब पेशकश आया सिर्फ इसलिए कि उन्होंने मेरी प्रोफ़ाइल वहाँ देखी।"

एक लैपटॉप स्क्रीन पर अकाउंटिंग पेशेवर की LinkedIn प्रोफ़ाइल दिख रही है, सेक्शंस हाइलाइटेड हैं: हेडलाइन, समरी, हुनर, अनुभव


चरण 6: मीरा का लर्निंग रोडमैप

शर्मा सर ने व्हाइटबोर्ड पर एक टाइमलाइन बनाई।

समय अवधिक्या करना है
अभी — 3 महीनेशर्मा सर की दफ़्तर में जारी रखो। Tally Prime सीखना शुरू करो (ईवनिंग क्लासेज़ या YouTube)। पोर्टफ़ोलियो बनाओ।
3 — 6 महीनेएडवांस्ड Excel सीखो। शर्मा सर की गाइडेंस में आमदनी टैक्स रिटर्न्स फ़ाइल करना शुरू करो। LinkedIn प्रोफ़ाइल बनाओ।
6 — 12 महीनेIGNOU से BCom (डिस्टेंस एजुकेशन) में एनरोल करो। NACIN GST सर्टिफ़िकेशन एग्ज़ाम दो। क्लाइंट्स इंनिर्भरली सँभालना शुरू करो।
साल 2या तो CA दफ़्तर में हायर तनख़्वाह पर कंटिन्यू करो, या बुककीपर/GSTP के रूप में फ़्रीलांसिंग शुरू करो। BCom जारी रखो।
साल 3BCom कम्प्लीट करो। GST प्रैक्टिशनर के रूप में रजिस्टर करो (अगर एलिजिबल हो)। तय करो कि CA/CMA करना है या अपनी अभ्यास बनानी है।

"यह कोई फ़िक्स्ड प्लान नहीं है," शर्मा सर ने कहा। "ज़िंदगी तुम पर ऑपर्च्यूनिटीज़ और चुनौतियाँ दोनों फेंकेगी। पर अगर डायरेक्शन है, तो भटकोगी नहीं।"


फ़ोन कॉल

गुरुवार की दोपहर थी। मीरा बिष्ट ट्रेडर्स के वाउचर्स पोस्ट कर रही थी, तभी उसका फ़ोन बज़ हुआ। अननोन नंबर। उसने लगभग फ़ोन नहीं उठाया।

"हैलो?"

"हैलो, क्या यह मीरा जोशी हैं?"

"जी, मैं बोल रही हूँ।"

"मैं राजेश पांडे बोल रहा हूँ, Pandey & Associates, Chartered Accountants, हल्द्वानी से। हमने आपका रिज़्यूमे देखा — शर्मा जी ने हमें भेजा था। हमारे यहाँ जूनियर अकाउंटेंट की ओपनिंग है। क्या आप इस शनिवार 11 बजे इंटरव्यू के लिए आ सकती हैं?"

मीरा का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने शर्मा सर की तरफ देखा। वो अखबार पढ़ने का नाटक कर रहे थे, पर उसे अखबार के पीछे एक हल्की मुस्कान दिख रही थी। उन्होंने बिना बताए उसका रिज़्यूमे भेज दिया था।

"हाँ सर। मैं आऊँगी। धन्यवाद।"

उसने फ़ोन रखा। उसके हाथ हल्के काँप रहे थे।

"सर... आपने मेरा रिज़्यूमे भेजा?"

शर्मा सर ने अखबार मोड़ा। "मीरा, पांडे जी अच्छे आदमी हैं। उनकी दफ़्तर बड़ी है — आठ स्टाफ़ मेंबर्स, सौ से ज़्यादा क्लाइंट्स। उन्हें कोई चाहिए जो GST इंनिर्भरली सँभाल सके। मैंने उन्हें तुम्हारे बारे में बताया।"

"पर सर, मैं अभी सीख रही हूँ—"

"तुम छह महीने से सीख रही हो। तुमने रियल GST रिटर्न्स फ़ाइल किए हैं। तुमने रियल फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स बनाए हैं। तुमने ERP सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल किया है। तुम उन बहुत से लोगों से ज़्यादा जानती हो जो सालों से यह काम कर रहे हैं। तुम तैयार हो।"

नेगी भैया अपनी कुर्सी पर घूमे। "मीरा! यह ग्रेट न्इस्तेमाल है। इंटरव्यू की चिंता मत करो। जो बात की वो सब याद रखो। पोर्टफ़ोलियो ले जाओ। साफ बोलो। दिखाओ कि तुम क्या जानती हो।"


तैयारी

उस शाम, मीरा बस स्टैंड के पास अपने छोटे किराये के कमरे में बैठी। उसने बिस्तर पर सब कुछ सजा लिया:

  1. पोर्टफ़ोलियो फ़ोल्डर — साफ-सुथरा व्यवस्थित्ड, वाउचर सैम्पल्स, ट्रायल बैलेंस, P&L स्टेटमेंट, बैलेंस शीट, GST रिटर्न स्क्रीनशॉट्स, और ERPLite स्क्रीनशॉट्स के साथ
  2. रिज़्यूमे — एक पेज, साफ व्हाइट पेपर पर प्रिंट किया हुआ, फ़ोन में भी PDF सेव है
  3. सर्टिफ़िकेट्स — 10वीं की मार्कशीट (ओरिजिनल + फ़ोटोकॉपी), कंप्यूटर कोर्स सर्टिफ़िकेट, Aadhaar कार्ड
  4. एक साफ कुर्ता और पैंट्स — आयरन किए हुए तैयार
  5. एक पेन और छोटी नोटबुक — इंटरव्यू में कोई इम्पॉर्टेंट बात लिखने के लिए

उसने एक बार फिर अपने जवाब रिहर्स किए:

  • "अपने बारे में बताइए" — शीशे के सामने अभ्यास किया, 45 सेकंड्स में टाइम किया
  • "डबल-एंट्री क्या है?" — साफ़, आसान समझानाेशन
  • "कौन से GST रिटर्न्स फ़ाइल किए?" — GSTR-1, GSTR-3B, GSTR-9 में असिस्टेड
  • "हम आपको क्यों हायर करें?" — व्यावहारिक अनुभव, पोर्टफ़ोलियो, सीखने की भूख

उसने पूजा को कॉल किया।

"पूजा, मेरा शनिवार को इंटरव्यू है!"

"मीरा! मुझे तुम पर बहुत गर्व है! तुम बहुत अच्छा करोगी। बस अपने जैसी रहो। और याद रखो — तुम यह सब जानती हो। तुम नाटक नहीं कर रही। तुम असलीी यह काम रोज़ करती हो।"

मीरा मुस्कुराई। पूजा सही कह रही थी।

उसने बागेश्वर में अपने पिता को कॉल किया।

"पापा, मेरा जॉब इंटरव्यू है।"

फ़ोन पर कुछ देर खामोशी रही। फिर पिता की आवाज़ आई, थोड़ी भर्राई हुई: "मीरा... मुझे हमेशा पता था कि तू अच्छा करेगी। तेरी माँ को बहुत गर्व होता।"

मीरा ने आँखें पोंछीं, सुबह 6 बजे का अलार्म लगाया, और सो गई।

मीरा का कमरा रात को — पोर्टफ़ोलियो फ़ोल्डर, रिज़्यूमे, कपड़े बिस्तर पर सजे हुए, अलार्म क्लॉक 6 AM पर सेट


शनिवार की सुबह

मीरा 10:45 AM पर Pandey & Associates पहुँची। यह शर्मा सर की दफ़्तर से बड़ी थी — एक सही रिसेप्शन इलाक़ा, चार कैबिन्स, और कंप्यूटर्स की एक रो जहाँ जूनियर स्टाफ़ काम कर रहे थे।

इंटरव्यू 30 मिनट्स चला। पांडे सर ने डबल-एंट्री, GST, TDS, और ERPLite के बारे में पूछा। मीरा ने हर सवाल का जवाब शांति से दिया। जब उन्होंने पूछा "क्या आप कोई काम दिखा सकती हैं जो आपने किया है?", तो उसने अपना पोर्टफ़ोलियो फ़ोल्डर खोला।

उन्होंने देखा — वाउचर्स, ट्रायल बैलेंस, बैलेंस शीट, GST रिटर्न स्क्रीनशॉट्स।

"यह सब आपने बनाया?" उन्होंने पूछा।

"जी सर। शर्मा सर की गाइडेंस में।"

पांडे सर ने सिर हिलाया। "एक आखिरी चीज़। क्या आप मुझे दिखा सकती हैं कि अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर में सेल्स वाउचर कैसे एंटर करेंगी?"

उन्होंने एक कंप्यूटर की तरफ इशारा किया जिस पर ERPLite खुला था।

मीरा बैठ गई। उसकी उँगलियों ने कीबोर्ड पाया। उसने सेल्स वाउचर मॉड्यूल खोला, ग्राहक सेलेक्ट किया, आइटम एंटर किया, क्वांटिटी, रेट। GST अपने-आप गणना हो गया। उसने वाउचर सेव किया, फिर पोस्टिंग दिखाने के लिए लेजर खोला।

दो मिनट्स से भी कम लगे।

पांडे सर चुपचाप देखते रहे। फिर मुस्कुराए।

"मीरा, कब से ज्वाइन कर सकती हो?"


क्विक रीकैप — चैप्टर 28

जॉब रेडीनेस कैसे बनाएँ:

  1. पोर्टफ़ोलियो — काम के सैम्पल्स कलेक्ट करो: वाउचर्स, ट्रायल बैलेंस, P&L, बैलेंस शीट, GST रिटर्न्स, ERPLite स्क्रीनशॉट्स। एक फ़ोल्डर में व्यवस्थित करो।

  2. रिज़्यूमे — एक पेज। हुनर पहले, एजुकेशन बाद में। एक्शन वर्ड्स और नंबर्स इस्तेमाल करो। PDF में सेव करो।

  3. इंटरव्यू प्रेप — आम क्वेश्चंस अभ्यास करो। साफ़, आसान जवाब तैयार करो। पोर्टफ़ोलियो ले जाओ।

  4. लाइव डेमो — अपनी ERP हुनर डेमोंस्ट्रेट करने की पेशकश करो। उनके सामने काम करना, इसके बारे में बात करने से ज़्यादा ताक़तवर है।

  5. सीखते रहो — Tally Prime, एडवांस्ड Excel, आमदनी टैक्स बुनियादी्स, ऑनलाइन सर्टिफ़िकेशंस, LinkedIn प्रोफ़ाइल।

सबसे इम्पॉर्टेंट सबक: तुम तैयार हो। तुम्हारे पास रियल हुनर हैं। जाओ और दुनिया को दिखाओ।


अभ्यास अभ्यास — तुम्हारा एक्शन प्लान

अभ्यास 1: पोर्टफ़ोलियो बनाओ

आज से शुरू करो। एक अभ्यास कंपनी बनाओ (नाम और कुछ ट्रांज़ैक्शंस सोच लो)। यह तैयार करो:

  • 6 वाउचर्स (हर टाइप का एक)
  • कम से कम 15 अकाउंट्स वाला ट्रायल बैलेंस
  • एक आसान P&L स्टेटमेंट
  • एक आसान बैलेंस शीट

प्रिंट करो। एक फ़ोल्डर में रखो।

अभ्यास 2: रिज़्यूमे लिखो

इस चैप्टर के फ़ॉर्मेट का इस्तेमाल करके अपना रिज़्यूमे लिखो। अपनी असली ब्योरा भरो। अगर वर्क अनुभव नहीं है, तो इन पर ध्यान करो:

  • इस बुक से सीखी हुनर
  • जो भी अभ्यास अभ्यास पूरे किए हैं
  • कंप्यूटर हुनर जो तुम्हें आती हैं
  • जो भाषाएँ बोलते हो

किसी दोस्त या फ़ैमिली मेंबर से पढ़वाओ और स्पेलिंग ग़लतियाँ चेक करवाओ।

अभ्यास 3: इंटरव्यू अभ्यास

किसी दोस्त या फ़ैमिली मेंबर को ढूँढो जो तुमसे ये सवाल पूछे:

  1. अपने बारे में बताइए।
  2. डबल-एंट्री बुककीपिंग क्या है?
  3. GST क्या है? कौन से रिटर्न्स पढ़े हैं?
  4. कौन सा अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर जानते हो?
  5. हम आपको क्यों हायर करें?

ज़ोर से बोलकर अभ्यास करो। फ़ोन पर दर्ज करो और वापस सुनो। क्या तुम साफ़ हो? आत्मविश्वासी हो? जब तक न हो, अभ्यास करते रहो।

अभ्यास 4: लर्निंग प्लान बनाओ

इस चैप्टर के रोडमैप का इस्तेमाल करके अगले 12 महीनों का अपना प्लान लिखो। क्या सीखोगे? कब सीखोगे? कौन से रिसोर्सेज़ इस्तेमाल करोगे?

महीनाक्या सीखना हैकैसे सीखना है
महीना 1-3
महीना 4-6
महीना 7-9
महीना 10-12

आखिरी शब्द — शर्मा सर की तरफ से

अपने आखिरी दिन पुरानी दफ़्तर में, Pandey & Associates ज्वाइन करने से पहले, शर्मा सर ने मीरा से नेगी भैया के जाने के बाद रुकने को कहा।

"मीरा, बैठो। मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूँ।"

वो बैठ गई।

"जब तुम छह महीने पहले इस दफ़्तर में आई थीं, तुम्हें डेबिट नहीं पता था। GST का फ़ुल फ़ॉर्म नहीं पता था। अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर ऑन करना नहीं आता था। तुम डरी हुई थीं और चुप रहती थीं।"

मीरा ने सिर हिलाया। उसे याद था।

"आज, तुम स्क्रैच से एक कम्प्लीट सेट ऑफ़ बुक्स तैयार कर सकती हो। GST रिटर्न्स फ़ाइल कर सकती हो। बैलेंस शीट पढ़कर बता सकती हो कि बिज़नेस हेल्दी है या नहीं। ERP सॉफ़्टवेयर इतने अच्छे से इस्तेमाल कर सकती हो कि सालों से इस फ़ील्ड में काम करने वाले बहुत से लोगों से बेहतर हो।"

वो रुके।

"तुम्हें पता है क्या फर्क पड़ा? टैलेंट नहीं। कोई फ़ैंसी डिग्री नहीं। यह: तुम हर रोज़ आईं। सवाल पूछे। गलतियाँ कीं और उनसे सीखा। अभ्यास करती रहीं जब तक सही नहीं हो गया।"

"बस इतना ही किसी भी करियर में चाहिए। आओ। सवाल पूछो। अभ्यास करो। सीखते रहो।"

उन्होंने अपने ड्रॉअर से एक छोटा रैप्ड बॉक्स निकाला। "एक तोहफा।"

मीरा ने खोला। अंदर एक आसान गणनार था — Casio, ग्रीन डिस्प्ले वाला — वही मॉडल जो शर्मा सर खुद इस्तेमाल करते हैं।

"हर अकाउंटेंट को एक अच्छा गणनार चाहिए," उन्होंने कहा, आँखों में चमक के साथ।

मीरा ने उसे सीने से लगा लिया। "शुक्रिया, सर। सब कुछ के लिए।"

"जाओ," शर्मा सर ने कहा। "जाओ और शानदार काम करो। और जब तुम्हारी अपनी दफ़्तर हो, तो किसी को वैसे ही ट्रेन करो जैसे मैंने तुम्हें किया। इसी तरह यह चेन चलती रहती है।"


मीरा शर्मा सर की दफ़्तर से हल्द्वानी की दोपहर की धूप में बाहर निकली। वही संकरी गली। वही नीचे स्टेशनरी की दुकान। पर वो वही लड़की नहीं थी जो छह महीने पहले उन सीढ़ियों पर चढ़ी थी। उसके पास एक हुनर थी। आत्मविश्वास था। सोमवार को एक जॉब उसका इंतज़ार कर रही थी।

उसने ऊपर छोटे नीले बोर्ड को देखा — V.K. Sharma & Associates, Chartered Accountants — और मुस्कुराई।

फिर वो मुड़ी और बस स्टैंड की तरफ चल पड़ी। बागेश्वर वापस जाने के लिए नहीं। आगे बढ़ने के लिए।

मीरा शर्मा सर की दफ़्तर की गली से आत्मविश्वास से चल रही है, हाथ में पोर्टफ़ोलियो फ़ोल्डर, चेहरे पर धूप, दूर हल्द्वानी की पहाड़ियाँ दिख रही हैं


शब्दावली — अकाउंटिंग टर्म्स

इस शब्दावली में वो सारे इम्पॉर्टेंट शब्द हैं जो तुमने इस बुक में सीखे। हर शब्द की इंग्लिश में मीनिंग और एक आसान एक-लाइन परिभाषा है। जब भी कोई शब्द भूल जाओ, इसे क्विक रेफ़रेंस की तरह इस्तेमाल करो।


बुनियादी अकाउंटिंग शब्द

हिन्दी शब्दइंग्लिश टर्मसरल परिभाषा
खाताअकाउंटएक रिकॉर्ड जो किसी एक व्यक्ति, वस्तु, या श्रेणी से जुड़े सभी ट्रांज़ैक्शंस ट्रैक करता है।
लेखांकनअकाउंटिंगकिसी बिज़नेस के सभी पैसों के लेन-देन को रिकॉर्ड, व्यवस्थित, और रिपोर्ट करने की प्रक्रिया।
लेखाकारअकाउंटेंटवो व्यक्ति जिसका काम फ़ाइनेंशियल रिकॉर्ड रखना और चेक करना है।
लेखा परीक्षाऑडिटकिसी बिज़नेस के अकाउंट्स की ऑफ़िशियल जाँच ताकि पता चले कि वो सही हैं।
शेषबैलेंसकिसी अकाउंट में कुल डेबिट्स और कुल क्रेडिट्स का फर्क।
बही-खाताबुककीपिंगहर पैसे के लेन-देन को व्यवस्थित्ड तरीके से दर्ज करने का डेली काम।
पूँजीकैपिटलवो पैसा या संपत्ति जो मालिक बिज़नेस शुरू करने या चलाने के लिए लगाता है।
नकदकैशहाथ में रखने वाला फ़िज़िकल पैसा — सिक्के और नोट।
जमा (Cr)क्रेडिट (Cr)अकाउंट का राइट साइड; वो एंट्री जो आमदनी या लायबिलिटीज़ बढ़ाती है।
नामे (Dr)डेबिट (Dr)अकाउंट का लेफ़्ट साइड; वो एंट्री जो एसेट्स या ख़र्चे बढ़ाती है।
दोहरा लेखाडबल एंट्रीएक सिस्टम जिसमें हर ट्रांज़ैक्शन दो अकाउंट्स में रिकॉर्ड होता है — एक डेबिट और एक क्रेडिट।
प्रविष्टिएंट्रीबुक्स ऑफ़ अकाउंट में लिखा गया किसी एक ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड।
वित्तीय वर्षफ़िस्कल ईयरअकाउंटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली 12 महीने की अवधि, भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक।
रोजनामचाजर्नलवो बुक जिसमें ट्रांज़ैक्शंस सबसे पहले डेट के हिसाब से रिकॉर्ड होते हैं, लेजर में पोस्ट करने से पहले।
खाता बहीलेजरवो बुक जिसमें हर अकाउंट का अलग पेज होता है, जिसमें उसके सारे ट्रांज़ैक्शंस दिखते हैं।
विवरणनैरेशनहर जर्नल एंट्री के नीचे लिखा गया छोटा डिस्क्रिप्शन जो बताता है कि ट्रांज़ैक्शन क्या था।
प्रारंभिक शेषओपनिंग बैलेंसनए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में किसी अकाउंट का बैलेंस।
अंतिम शेषक्लोज़िंग बैलेंसवित्तीय वर्ष के अंत में किसी अकाउंट का बैलेंस।
खतौनीपोस्टिंगजर्नल से एंट्रीज़ को इंडिविजुअल लेजर अकाउंट्स में ट्रांसफ़र करने की प्रक्रिया।
लेन-देनट्रांज़ैक्शनदो पार्टीज़ के बीच पैसे, सामान, या सेवाओं का कोई भी आदान-प्रदान।
प्रमाण पत्रवाउचरवो डॉक्यूमेंट जो प्रूफ़ है कि कोई ट्रांज़ैक्शन हुआ।
रसीदरिसीप्टपैसा मिलने का लिखित प्रूफ़।
भुगतानपेमेंटसामान या सेवाओं के बदले किसी को पैसा देने की क्रिया।
विपरीत प्रविष्टिकॉन्ट्रा एंट्रीदो कैश या बैंक अकाउंट्स के बीच का ट्रांज़ैक्शन, जैसे बैंक में कैश जमा करना।
आहरणड्रॉइंग्सवो पैसा या सामान जो मालिक बिज़नेस से निजी इस्तेमाल के लिए निकालता है।
साखगुडविलकिसी बिज़नेस की फ़िज़िकल एसेट्स से ऊपर की एक्स्ट्रा वैल्यू, जो उसकी रेप्यूटेशन पर आधारित है।

फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट के शब्द

हिन्दी शब्दइंग्लिश टर्मसरल परिभाषा
संपत्तिएसेट्सवो सब कुछ जो बिज़नेस का है और जिसकी वैल्यू है — कैश, मशीन्स, ज़मीन, स्टॉक।
देनदारियाँलायबिलिटीज़वो सब कुछ जो बिज़नेस को दूसरों को देना है — लोन्स, बिना चुकाए बिल्स, आपूर्तिकर्ता का उधार।
स्वामी की पूँजीइक्विटीबिज़नेस में मालिक का हिस्सा, जो एसेट्स में से लायबिलिटीज़ घटाकर निकलता है।
राजस्वराजस्वसामान या सेवाएँ बेचकर बिज़नेस की कमाई।
व्ययख़र्चाबिज़नेस चलाने में खर्च होने वाला पैसा — किराया, तनख़्वाह, बिजली।
लाभमुनाफ़ाजब राजस्व ख़र्चे से ज़्यादा हो — बिज़नेस ने पैसा कमाया।
हानिघाटाजब ख़र्चे राजस्व से ज़्यादा हों — बिज़नेस का पैसा डूबा।
शुद्ध लाभनेट मुनाफ़ाराजस्व से सभी ख़र्चे, टैक्सेज़ सहित, घटाने के बाद बचा फ़ाइनल मुनाफ़ा।
सकल लाभग्रॉस मुनाफ़ासेल्स में से बेचे गए माल की लागत घटाने पर, ऑपरेटिंग ख़र्चे घटाने से पहले का मुनाफ़ा।
तुलन पत्रबैलेंस शीटएक स्टेटमेंट जो दिखाता है कि किसी ख़ास डेट पर बिज़नेस के पास क्या है (एसेट्स) और क्या देना है (लायबिलिटीज़)।
लाभ और हानि खातामुनाफ़ा एंड घाटा अकाउंटएक स्टेटमेंट जो किसी अवधि की सारी आमदनी और सारे ख़र्चे दिखाता है, अंत में मुनाफ़ा या घाटा बताता है।
तलपटट्रायल बैलेंससभी लेजर अकाउंट्स की लिस्ट जिसमें उनके डेबिट या क्रेडिट बैलेंसेस होते हैं, यह चेक करने के लिए कि बुक्स बैलेंस्ड हैं।
नकद प्रवाह विवरणकैश फ़्लो स्टेटमेंटएक रिपोर्ट जो दिखाती है कि किसी अवधि में बिज़नेस में कितना कैश आया और कितना गया।
अनुसूची IIIशेड्यूल IIICompanies Act 2013 द्वारा बैलेंस शीट्स और P&L स्टेटमेंट्स बनाने के लिए निर्धारित फ़ॉर्मेट।
चालू संपत्तिकरंट एसेट्सवो एसेट्स जो एक साल में कैश में बदली जा सकती हैं — स्टॉक, डेटर्स, बैंक बैलेंस।
स्थायी संपत्तिफ़िक्स्ड एसेट्सलंबे समय तक इस्तेमाल के लिए रखी गई एसेट्स — ज़मीन, बिल्डिंग, मशीनरी, फ़र्नीचर।
चालू देनदारियाँकरंट लायबिलिटीज़वो कर्ज़ जो एक साल में चुकाने हैं — क्रेडिटर्स, शॉर्ट-टर्म लोन्स।
मूल्यह्रासडेप्रिसिएशनइस्तेमाल और टूट-फूट के कारण समय के साथ किसी फ़िक्स्ड एसेट की वैल्यू में कमी।
प्राप्य खातेअकाउंट्स रिसीवेबलवो पैसा जो ग्राहकों का बिज़नेस पर बकाया है — सामान या सेवाएँ दे दी गई हैं पर पैसा नहीं मिला।
देय खातेअकाउंट्स पेएबलवो पैसा जो बिज़नेस को आपूर्तिकर्ता को देना है — सामान या सेवाएँ मिल चुकी हैं पर पैसा नहीं दिया।
बेचे गए माल की लागतलागत ऑफ़ गुड्स सोल्ड (COGS)किसी अवधि में बेचे गए सामान को खरीदने या बनाने की कुल लागत।
कार्यशील पूँजीवर्किंग कैपिटलकरंट एसेट्स में से करंट लायबिलिटीज़ घटाने पर — डेली ऑपरेशंस के लिए उपलब्ध पैसा।
प्रावधानप्रोविज़न्सकिसी अपेक्षित खर्चे के लिए अलग रखा गया पैसा जो अभी चुकाया नहीं गया है।
आरक्षित निधिरिज़र्वबिज़नेस का वो मुनाफ़ा जो मालिकों में बाँटने की बजाय भविष्य के उपयोग के लिए रखा गया है।

GST के शब्द

हिन्दी शब्दइंग्लिश टर्मसरल परिभाषा
वस्तु एवं सेवा करGSTगुड्स एंड सेवाएँ टैक्स — पूरे भारत में सामान और सेवाओं की आपूर्ति पर लगने वाला एक सिंगल टैक्स।
केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा करCGSTसेंट्रल GST — राज्य के अंदर सेल्स पर GST का वो हिस्सा जो केंद्र सरकार को जाता है।
राज्य वस्तु एवं सेवा करSGSTस्टेट GST — राज्य के अंदर सेल्स पर GST का वो हिस्सा जो राज्य सरकार को जाता है।
एकीकृत वस्तु एवं सेवा करIGSTइंटीग्रेटेड GST — दो अलग-अलग राज्यों के बीच सेल्स पर लगने वाला GST।
जीएसटीआईएनGSTINहर GST-रजिस्टर्ड बिज़नेस को दिया गया 15-डिजिट का यूनीक आइडेंटिफ़िकेशन नंबर।
एचएसएन कोडHSN कोडहार्मोनाइज़्ड सिस्टम ऑफ़ नोमेंक्लेचर — टैक्स के लिए सामान वर्गीकृत करने के लिए इस्तेमाल होने वाला नंबर कोड।
एसएसी कोडSAC कोडसेवाएँ अकाउंटिंग कोड — टैक्स के लिए सेवाओं को वर्गीकृत करने के लिए इस्तेमाल होने वाला नंबर कोड।
इनपुट टैक्स क्रेडिटITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट)परचेज़ेज़ पर चुकाया गया GST जो सेल्स पर कलेक्ट किए GST में से घटाया जा सकता है।
जीएसटीआर-1GSTR-1मंथली या क्वार्टरली रिटर्न जो सभी आउटवर्ड सप्लाइज़ (सेल्स) रिपोर्ट करती है।
जीएसटीआर-3बीGSTR-3Bमंथली समरी रिटर्न जिसमें कुल टैक्स लायबिलिटी, ITC क्लेम्ड, और नेट टैक्स पेएबल दिखता है।
जीएसटीआर-9GSTR-9एनुअल रिटर्न जो वित्तीय वर्ष में फ़ाइल की गई सभी मंथली रिटर्न्स का समरी देती है।
ई-वे बिलई-वे बिलRs 50,000 से ज़्यादा कीमत का सामान ट्रांसपोर्ट करने के लिए ज़रूरी इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट।
कम्पोजीशन योजनाकम्पोज़िशन स्कीमRs 1.5 करोड़ तक टर्नओवर वाले छोटे बिज़नेसेज़ के लिए सरल GST योजना, कम टैक्स रेट्स और कम रिटर्न्स।
रिवर्स चार्जरिवर्स चार्जवो स्थिति जब सेलर की बजाय बायर सीधे सरकार को GST पे करता है।
आपूर्ति का स्थानप्लेस ऑफ़ आपूर्तिवो जगह जहाँ सामान डिलीवर होता है या सेवाएँ दी जाती हैं — इससे तय होता है कि CGST+SGST लगेगा या IGST।
कर चालानटैक्स इनवॉइसGST-रजिस्टर्ड सेलर द्वारा इश्यू किया गया बिल जिसमें बेचे गए सामान और लगाए गए GST की ब्योरा होती हैं।
क्रेडिट नोटक्रेडिट नोटवो डॉक्यूमेंट जो सामान वापसी होने पर या इनवॉइस की रकम कम करनी हो तो इश्यू किया जाता है।
डेबिट नोटडेबिट नोटवो डॉक्यूमेंट जो इनवॉइस की रकम बढ़ानी हो तो इश्यू किया जाता है।
बी2बीB2Bबिज़नेस टू बिज़नेस — एक रजिस्टर्ड बिज़नेस से दूसरे रजिस्टर्ड बिज़नेस को की गई सेल्स।
बी2सीB2Cबिज़नेस टू कंज़्यूमर — बिज़नेस से ऐसे एंड ग्राहक को सेल्स जो GST-रजिस्टर्ड नहीं है।
जीएसटी पोर्टलGST पोर्टलसरकारी वेबसाइट (www.gst.gov.in) जहाँ सारा GST रजिस्ट्रेशन, फ़ाइलिंग, और पेमेंट्स होता है।
जीएसटी प्रैक्टिशनरGST प्रैक्टिशनरवो व्यक्ति जो ऑफ़िशियली रजिस्टर्ड है दूसरे टैक्सपेयर्स की ओर से GST रिटर्न्स फ़ाइल करने के लिए।
शून्य रिटर्ननिल रिटर्नवो GST रिटर्न जो तब फ़ाइल की जाती है जब उस अवधि में कोई ट्रांज़ैक्शन नहीं हुआ — फिर भी फ़ाइल करना ज़रूरी है।
विलम्ब शुल्कलेट फ़ीड्यू डेट के बाद GST रिटर्न्स फ़ाइल करने पर लगने वाला पेनाल्टी।

TDS के शब्द

हिन्दी शब्दइंग्लिश टर्मसरल परिभाषा
स्रोत पर कर कटौतीTDSटैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स — पैसा देने से पहले उसमें से काटा गया टैक्स।
टैनTANटैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर — TDS काटने वाले हर व्यक्ति के लिए ज़रूरी 10-डिजिट नंबर।
कटौतीकर्ताडिडक्टरवो व्यक्ति या कंपनी जो पेमेंट से TDS काटकर सरकार को जमा करती है।
जिसका कर काटा गयाडिडक्टीवो व्यक्ति जिसे TDS कटने के बाद पेमेंट मिलता है।
फॉर्म 26क्यूफ़ॉर्म 26Qतनख़्वाह के अलावा पेमेंट्स (रेंट, पेशेवर फ़ीज़, कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट्स) के लिए क्वार्टरली TDS रिटर्न।
फॉर्म 24क्यूफ़ॉर्म 24Qतनख़्वाह पेमेंट्स के लिए क्वार्टरली TDS रिटर्न।
टीडीएस प्रमाण पत्रTDS सर्टिफ़िकेटडिडक्टर द्वारा डिडक्टी को दिया गया डॉक्यूमेंट (फ़ॉर्म 16 / 16A) जो प्रूफ़ है कि TDS काटा और जमा किया गया।
फॉर्म 16फ़ॉर्म 16एम्प्लॉयर द्वारा एम्प्लॉई को दिया गया TDS सर्टिफ़िकेट जिसमें साल भर की तनख़्वाह और TDS ब्योरा होती हैं।
फॉर्म 16एफ़ॉर्म 16Aनॉन-तनख़्वाह पेमेंट्स जैसे रेंट, पेशेवर फ़ीज़, या कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट्स के लिए TDS सर्टिफ़िकेट।
चालानचालानबैंक के ज़रिए सरकार को TDS जमा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली पेमेंट स्लिप।
पैनPANपरमानेंट अकाउंट नंबर — आमदनी टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी 10-कैरेक्टर अल्फ़ान्यूमेरिक नंबर।
धारा 194सीसेक्शन 194Cआमदनी टैक्स एक्ट की वो धारा जिसके तहत कॉन्ट्रैक्टर्स को पेमेंट्स पर TDS काटा जाता है।
धारा 194जेसेक्शन 194Jवो धारा जिसके तहत पेशेवर या टेक्निकल सेवा फ़ीज़ पर TDS काटा जाता है।

पेरोल के शब्द

हिन्दी शब्दइंग्लिश टर्मसरल परिभाषा
वेतन पत्रकपेरोलकिसी कंपनी के सभी एम्प्लॉईज़ की तनख़्वाह गणना करने और पे करने की प्रक्रिया।
सीटीसीCTCलागत टू कंपनी — किसी एम्प्लॉई पर कंपनी एक साल में जितना कुल खर्चा करती है, सभी फ़ायदे सहित।
सकल वेतनग्रॉस तनख़्वाहकिसी भी कटौती से पहले की कुल तनख़्वाह — बुनियादी पे और सभी अलाउंसेज़ शामिल।
शुद्ध वेतननेट तनख़्वाहसभी कटौतियों (PF, ESIC, TDS, PT) के बाद एम्प्लॉई को असलीी मिलने वाली तनख़्वाह।
मूल वेतनबुनियादी पेतनख़्वाह का कोर हिस्सा, आमतौर पर ग्रॉस तनख़्वाह का 40-50%, जिस पर PF और ग्रेच्युटी गणना होती है।
मकान किराया भत्ताHRAहाउस रेंट अलाउंस — एम्प्लॉईज़ को किराये के खर्चे में मदद के लिए दी जाने वाली रकम।
महँगाई भत्ताDAडियरनेस अलाउंस — एम्प्लॉईज़ को महँगाई के असर से बचाने के लिए दी जाने वाली रकम।
भविष्य निधिPFप्रॉविडेंट फ़ंड — रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम जिसमें एम्प्लॉई और एम्प्लॉयर दोनों बुनियादी पे का 12% कॉन्ट्रीब्यूट करते हैं।
कर्मचारी राज्य बीमाESICएम्प्लॉईज़' स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन — Rs 21,000/मंथ तक कमाने वाले एम्प्लॉईज़ के लिए हेल्थ और डिसेबिलिटी इंश्योरेंस स्कीम।
व्यावसायिक करपेशेवर टैक्सएम्प्लॉयड व्यक्तियों की तनख़्वाह से काटा जाने वाला स्टेट-लेवल टैक्स, आमतौर पर Rs 200/मंथ।
उपदानग्रेच्युटी5 या उससे ज़्यादा साल की लगातार सेवा पूरी करने वाले एम्प्लॉई को दी जाने वाली एकमुश्त रकम।
बोनसबोनसएम्प्लॉईज़ को दी जाने वाली एक्स्ट्रा पेमेंट, अक्सर त्योहारों पर या कंपनी की प्रदर्शन के आधार पर।
वेतन पर्चीपे स्लिपहर महीने एम्प्लॉई को दिया जाने वाला डॉक्यूमेंट जिसमें तनख़्वाह ब्रेकडाउन और कटौतियाँ दिखती हैं।
उपस्थितिअटेंडेंसइसका रिकॉर्ड कि एम्प्लॉई महीने में कितने दिन काम पर मौजूद रहा।
अतिरिक्त समयओवरटाइमसामान्य वर्किंग आवर्स से ज़्यादा काम किए गए एक्स्ट्रा घंटे, आमतौर पर ज़्यादा रेट पर पे होते हैं।
छुट्टी नकदीकरणलीव एनकैशमेंटबची हुई छुट्टी के दिनों के लिए एम्प्लॉई को मिलने वाला पेमेंट।

बैंकिंग के शब्द

हिन्दी शब्दइंग्लिश टर्मसरल परिभाषा
बैंक खाताबैंक अकाउंटबैंक द्वारा बनाए रख किया गया रिकॉर्ड जो ग्राहक के जमा और निकासी ट्रैक करता है।
चालू खाताकरंट अकाउंटबिज़नेसेज़ द्वारा बार-बार ट्रांज़ैक्शंस के लिए इस्तेमाल होने वाला बैंक अकाउंट, जमा या निकासी पर कोई लिमिट नहीं।
बचत खातासेविंग्स अकाउंटव्यक्तियों के लिए बैंक अकाउंट जिसमें जमा पैसे पर इंटरेस्ट मिलता है।
एनईएफटीNEFTनेशनल इलेक्ट्रॉनिक फ़ंड्स ट्रांसफ़र — बैंक अकाउंट्स के बीच बैचेज़ में पैसा ट्रांसफ़र करने का सिस्टम।
आरटीजीएसRTGSरियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट — बड़ी रकम (Rs 2 लाख और उससे ऊपर) इंस्टैंटली ट्रांसफ़र करने का सिस्टम।
आईएमपीएसIMPSइमीडिएट पेमेंट सेवा — छोटी रकम इंस्टैंटली ट्रांसफ़र करने का सिस्टम, 24x7 अवेलेबल।
यूपीआईUPIयूनीफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस — मोबाइल फ़ोन ऐप से इंस्टैंटली पैसा ट्रांसफ़र करने का सिस्टम।
आईएफएससीIFSCइंडियन फ़ाइनेंशियल सिस्टम कोड — इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफ़र्स के लिए किसी ख़ास बैंक ब्रांच को आइडेंटिफ़ाई करने वाला 11-कैरेक्टर कोड।
चेकचेकबैंक को लिखित आदेश कि तुम्हारे अकाउंट से एक ख़ास रकम किसी दूसरे व्यक्ति या कंपनी को दी जाए।
बैंक समाधानबैंक रीकंसिलिएशनबिज़नेस के बैंक रिकॉर्ड को बैंक के अपने स्टेटमेंट से मैच करके फर्क ढूँढने की प्रक्रिया।
बैंक विवरणबैंक स्टेटमेंटबैंक से मिलने वाला डॉक्यूमेंट जिसमें किसी अवधि की सभी जमा, निकासी, और बैलेंस की लिस्ट होती है।
अधिविकर्षओवरड्राफ़्टवो सुविधा जिसमें बैंक तुम्हें अकाउंट में जितना पैसा है उससे ज़्यादा निकालने देता है, एक लिमिट तक।
सावधि जमाफ़िक्स्ड डिपॉज़िटबैंक में एक फ़िक्स्ड अवधि के लिए जमा किया गया पैसा, सेविंग्स अकाउंट से ज़्यादा इंटरेस्ट रेट पर।
केवाईसीKYCनो योर ग्राहक — Aadhaar, PAN, और एड्रेस प्रूफ़ से ग्राहक की आइडेंटिटी वेरिफ़ाई करने की प्रक्रिया।

ERP और सॉफ़्टवेयर के शब्द

हिन्दी शब्दइंग्लिश टर्मसरल परिभाषा
ईआरपीERPएंटरप्राइज़ रिसोर्स योजना — ऐसा सॉफ़्टवेयर जो सारे बिज़नेस ऑपरेशंस (अकाउंटिंग, इन्वेंटरी, सेल्स, परचेज़ेज़) एक सिस्टम में मैनेज करता है।
मास्टरमास्टरसॉफ़्टवेयर में एक परमानेंट रिकॉर्ड — जैसे ग्राहक मास्टर, आइटम मास्टर, या अकाउंट मास्टर — जो बुनियादी ब्योरा स्टोर करता है।
वाउचर (ERP में)वाउचर (ERP में)अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर में ट्रांज़ैक्शन दर्ज करने के लिए इस्तेमाल होने वाला डेटा एंट्री फ़ॉर्म।
पोस्टिंग (ERP में)पोस्टिंग (ERP में)जब वाउचर सेव होता है और उसका असर लेजर अकाउंट्स में रिकॉर्ड होता है।
ड्राफ्टड्राफ़्टवो वाउचर जो शुरू हुआ है पर अभी फ़ाइनल नहीं — इसमें अभी बदलाव हो सकता है।
प्रस्तुतसबमिटेडवो वाउचर जो फ़ाइनल और पोस्ट हो चुका है — इसमें आसानी से बदलाव नहीं हो सकता।
स्वीकृतिअप्रूवलवो चरण जिसमें कोई सीनियर व्यक्ति वाउचर को समीक्षा और अप्रूव करता है पोस्ट होने से पहले।
खातों का चार्टचार्ट ऑफ़ अकाउंट्सकिसी बिज़नेस द्वारा इस्तेमाल होने वाले सभी अकाउंट्स की पूरी लिस्ट, श्रेणी के हिसाब से व्यवस्थित्ड।
रिपोर्टरिपोर्टसॉफ़्टवेयर द्वारा जेनरेट किया गया डेटा का समरी — ट्रायल बैलेंस, P&L, सेल्स रजिस्टर, आदि।
डैशबोर्डडैशबोर्डसॉफ़्टवेयर की मेन स्क्रीन जो की नंबर्स और क्विक लिंक्स एक नज़र में दिखाती है।
बैकअपबैकअपतुम्हारे सारे डेटा की अलग से सेव्ड कॉपी, ताकि कंप्यूटर नाकाम होने पर सब कुछ न खो।
उपयोगकर्ता भूमिकाइस्तेमालर रोलकिसी व्यक्ति को दी गई परमिशंस का सेट — वो सॉफ़्टवेयर में क्या देख, एंटर, एडिट, या डिलीट कर सकता है।
वित्तीय वर्ष (ERP में)फ़िस्कल ईयर (ERP में)सॉफ़्टवेयर में सेट की गई अकाउंटिंग पीरियड, आमतौर पर अप्रैल से मार्च।
प्रारंभिक प्रविष्टिओपनिंग एंट्रीनए वित्तीय वर्ष की पहली एंट्री जो पिछले साल के सभी क्लोज़िंग बैलेंसेस फ़ॉरवर्ड लाती है।

अन्य उपयोगी शब्द

हिन्दी शब्दइंग्लिश टर्मसरल परिभाषा
बीजक / चालानइनवॉइससेलर द्वारा बायर को भेजा गया बिल जिसमें दिए गए सामान या सेवाओं और देय रकम की लिस्ट होती है।
कोटेशनकोटेशनएक डॉक्यूमेंट जो बताए गए दाम पर सामान या सेवाएँ बेचने की पेशकश देता है, असली सेल से पहले।
क्रय आदेशपरचेज़ ऑर्डरबायर द्वारा सेलर को भेजा गया फ़ॉर्मल ऑर्डर, जो पुष्टि करता है कि कौन सा सामान चाहिए और किस दाम पर।
डिलीवरी नोटडिलीवरी नोटसामान के साथ जाने वाला डॉक्यूमेंट, जिसमें पैकेज में क्या है उसकी लिस्ट होती है।
माल / भण्डारस्टॉक / इन्वेंटरीवो सामान जो बिज़नेस के पास बेचने या इस्तेमाल करने के लिए अवेलेबल है।
कारोबारटर्नओवरकिसी अवधि में बिज़नेस द्वारा की गई सेल्स की कुल वैल्यू।
लेखा परीक्षा निशानऑडिट ट्रेलवो रिकॉर्ड जो दिखाता है कि किसने कौन सी एंट्री कब की और क्या बदलाव किए — काम ट्रैक और वेरिफ़ाई करने के लिए इस्तेमाल होता है।
उपार्जनएक्रूअलआमदनी या ख़र्चा को तब दर्ज करना जब वो होती है, न कि जब असलीी पैसा मिलता या जाता है।
नकद आधारकैश बेसिसआमदनी या ख़र्चा को तभी दर्ज करना जब असलीी पैसा मिलता या जाता है।
डूबत ऋणबैड डेटबिज़नेस को मिलने वाला वो पैसा जो शायद कभी नहीं मिलेगा।
समाधान / मिलानरीकंसिलिएशनदो रिकॉर्ड की जाँच करने की प्रक्रिया ताकि पता चले कि वो एक-दूसरे से मैच करते हैं।
वित्तीय वर्ष (FY)फ़ाइनेंशियल ईयर (FY)1 अप्रैल से 31 मार्च तक की 12 महीने की अवधि, भारत में सभी अकाउंटिंग और टैक्स के लिए इस्तेमाल होती है।
कर निर्धारण वर्ष (AY)असेसमेंट ईयर (AY)वित्तीय वर्ष के बाद का साल, जिसमें उस वित्तीय वर्ष का आमदनी टैक्स गणना और फ़ाइल किया जाता है।
अनुपालनकम्प्लायंससभी नियमों और कानूनों का पालन — समय पर रिटर्न्स फ़ाइल करना, सही टैक्स पे करना, सही रिकॉर्ड रखना।
जुर्मानापेनाल्टीनियमों का पालन न करने या डेडलाइन्स मिस करने पर सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्स्ट्रा रकम।
विलम्ब ब्याजइंटरेस्ट ऑन लेट पेमेंटटैक्स या कोई पेमेंट ड्यू डेट के बाद करने पर लगने वाला एक्स्ट्रा पैसा।
डिजिटल हस्ताक्षरडिजिटल सिग्नेचरऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स साइन करने का इलेक्ट्रॉनिक तरीका, रिटर्न्स फ़ाइल करने और ऑफ़िशियल सबमिशंस के लिए इस्तेमाल होता है।
आधारAadhaarभारत सरकार द्वारा हर निवासी को जारी किया गया 12-डिजिट का यूनीक आइडेंटिटी नंबर।

इस शब्दावली का उपयोग कैसे करें

  • पढ़ाई या काम करते समय इस शब्दावली को हाथ में रखो।
  • अगर कोई शब्द समझ न आए, पहले यहाँ देखो।
  • हर दिन 5 नए शब्द सीखने की कोशिश करो। 20 दिनों में तुम सारे 100+ शब्द जान लोगे।
  • इंग्लिश कॉलम इस्तेमाल करो अगर किसी को इंग्लिश टर्म समझाना हो।
  • इस शब्दावली में इस बुक के शब्द हैं। जैसे-जैसे तुम आगे सीखोगे, और शब्द मिलेंगे — उन्हें अपनी पर्सनल शब्दावली नोटबुक में ऐड करो।