वाउचर — हर ट्रांज़ैक्शन का सबूत
मीरा की शर्मा सर के दफ़्तर में दूसरा हफ़्ता। सोमवार सुबह वो दफ़्तर पहुँचती है तो देखती है नेगी भैया छोटी-छोटी पर्चियों से घिरे बैठे हैं — कुछ प्रिंटेड, कुछ हाथ से लिखी हुई। "ये सब क्या है भैया?" वो पूछती है। नेगी भैया हँसते हैं। "ये वाउचर हैं। हर एक रुपया जो आता है या जाता है — उसका एक वाउचर चाहिए। वाउचर नहीं तो सबूत नहीं। सबूत नहीं तो अकाउंटिंग नहीं।" वो एक पर्ची उठाते हैं। "रावत आंटी ने ये शनिवार को छोड़ी थीं। पूरे हफ़्ते के ट्रांज़ैक्शन्स। आज तुम और मैं इन्हें छाँटेंगे।"
वाउचर क्यों ज़रूरी हैं
ये सोचो। तुमने अपने गाँव में एक दोस्त को Rs. 500 उधार दिए। एक महीने बाद तुम्हारा दोस्त बोलता है, "मैंने तुमसे कभी पैसे नहीं लिए।" तुम्हारे पास कोई सबूत नहीं। कोई गवाह नहीं। कोई लिखा हुआ कागज़ नहीं। तुम कर क्या सकते हो? कुछ नहीं।
अब वही बात बिज़नेस में सोचो। रावत आंटी ने एक आपूर्तिकर्ता से Rs. 10,000 का सामान खरीदा। कैश दिया। लेकिन कोई कागज़ नहीं, कोई रिकॉर्ड नहीं। बाद में आपूर्तिकर्ता बोलता है, "तुम अभी भी मुझे Rs. 10,000 देती हो।" रावत आंटी क्या करेंगी?
इसीलिए वाउचर होते हैं।
वाउचर एक लिखित दस्तावेज़ है जो साबित करता है कि कोई ट्रांज़ैक्शन हुआ।
ये अकाउंटिंग की नींव है। जर्नल या लेजर में कुछ भी लिखने से पहले, तुम्हें एक वाउचर चाहिए। वाउचर सोर्स डॉक्यूमेंट है — असली सबूत।
ऐसे सोचो:
- बस टिकट इस बात का सबूत है कि तुमने किराया दिया।
- मेडिकल शॉप की रसीद सबूत है कि तुमने दवाई खरीदी।
- बैंक डिपॉज़िट स्लिप सबूत है कि तुमने बैंक में पैसे जमा किए।
अकाउंटिंग में, वाउचर सबूत है कि पैसा हिला।
शर्मा सर सीधी बात कहते हैं:
"मीरा, ये नियम ज़िंदगी भर याद रखो — वाउचर नहीं तो एंट्री नहीं। अगर किसी ट्रांज़ैक्शन का कोई डॉक्यूमेंट नहीं है, तो उसे रिकॉर्ड मत करो। कभी नहीं।"
6 तरह के वाउचर
सारे ट्रांज़ैक्शन्स एक जैसे नहीं होते। पैसा आता है। पैसा जाता है। पैसा अकाउंट्स के बीच मूव होता है। सामान बिकता है। सामान खरीदा जाता है। हर तरह के ट्रांज़ैक्शन का अपना वाउचर होता है।
यहाँ वो छह वाउचर हैं जो तुम्हें जानने चाहिए:
| # | वाउचर का प्रकार | कब इस्तेमाल करें | पैसे की दिशा |
|---|---|---|---|
| 1 | रसीद वाउचर (Receipt Voucher) | जब बिज़नेस को पैसा मिलता है | पैसा अंदर आता है |
| 2 | भुगतान वाउचर (Payment Voucher) | जब बिज़नेस पैसा देता है | पैसा बाहर जाता है |
| 3 | कॉन्ट्रा वाउचर (Contra Voucher) | जब पैसा कैश और बैंक के बीच मूव होता है (कोई बाहरी पक्ष नहीं) | पैसा अंदर ही घूमता है |
| 4 | जर्नल वाउचर (Journal Voucher) | नॉन-कैश एडजस्टमेंट्स के लिए (डेप्रिसिएशन, करेक्शन्स, आदि) | असल में कोई कैश नहीं हिलता |
| 5 | बिक्री वाउचर (Sales Voucher) | जब बिज़नेस सामान या सेवाएँ बेचता है | सामान बाहर जाता है |
| 6 | खरीद वाउचर (Purchase Voucher) | जब बिज़नेस सामान या सेवाएँ खरीदता है | सामान अंदर आता है |
आओ हर एक को रावत आंटी की दुकान के असली उदाहरण से समझते हैं।

1. रसीद वाउचर (Receipt Voucher)
कब इस्तेमाल करें: जब बिज़नेस को किसी से पैसा मिलता है।
रावत आंटी एक ग्राहक को किराने का सामान बेचती हैं। ग्राहक Rs. 350 कैश देता है। पैसा दुकान में अंदर आ रहा है। इसके लिए रसीद वाउचर चाहिए।
और उदाहरण:
- कोई ग्राहक पुराना बिल चुकाता है
- मालिक अपना पर्सनल पैसा बिज़नेस में लाता है
- बिज़नेस को आपूर्तिकर्ता से रिफ़ंड मिलता है
मुख्य बात: कैश या बैंक बैलेंस बढ़ता है।
2. भुगतान वाउचर (Payment Voucher)
कब इस्तेमाल करें: जब बिज़नेस किसी को पैसा देता है।
रावत आंटी अपनी दुकान का महीने का किराया Rs. 5,000 मकान मालिक को देती हैं। पैसा दुकान से बाहर जा रहा है। इसके लिए भुगतान वाउचर चाहिए।
और उदाहरण:
- आपूर्तिकर्ता का बिल चुकाना
- बिजली का बिल देना
- मददर को तनख़्वाह देना
- दफ़्तर सप्लाइज़ खरीदना
मुख्य बात: कैश या बैंक बैलेंस घटता है।
3. कॉन्ट्रा वाउचर (Contra Voucher)
कब इस्तेमाल करें: जब पैसा बिज़नेस के अपने कैश और बैंक अकाउंट्स के बीच मूव होता है। कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं।
रावत आंटी अपनी दुकान के काउंटर से Rs. 20,000 कैश लेकर अल्मोड़ा के SBI ब्रांच में अपने बैंक अकाउंट में जमा करती हैं। पैसा अभी भी उन्हीं का है। बस एक जगह (कैश बॉक्स) से दूसरी जगह (बैंक) गया। इसके लिए कॉन्ट्रा वाउचर चाहिए।
और उदाहरण:
- बैंक से दुकान के लिए कैश निकालना
- एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफ़र करना
मुख्य बात: कुल पैसा वही रहता है। बस जगह बदलती है।
ऐसे सोचो — एक गिलास से दूसरे गिलास में पानी उँड़ेलना। पानी उतना ही है।
4. जर्नल वाउचर (Journal Voucher)
कब इस्तेमाल करें: जब असल में कोई कैश शामिल नहीं है, लेकिन अकाउंटिंग एंट्री फिर भी करनी है।
साल के आखिर में, शर्मा सर रावत आंटी को बताते हैं कि उनकी लकड़ी की अलमारियाँ (जिनकी कीमत Rs. 15,000 है) ने घिसावट की वजह से Rs. 1,500 की वैल्यू खो दी है। इसे डेप्रिसिएशन कहते हैं। किसी को कोई कैश नहीं दिया गया। लेकिन अलमारियों की वैल्यू कम हुई है, तो इसे दर्ज करना ज़रूरी है। इसके लिए जर्नल वाउचर चाहिए।
और उदाहरण:
- पहले की एंट्री में गलती सुधारना
- बैड डेट लिखना (ऐसा ग्राहक जो कभी पैसा नहीं देगा)
- प्रीपेड ख़र्चे को एडजस्ट करना
मुख्य बात: कोई कैश नहीं हिलता। लेकिन बुक्स को अपडेट करना ज़रूरी है।
5. बिक्री वाउचर (Sales Voucher / Sales Invoice)
कब इस्तेमाल करें: जब बिज़नेस सामान या सेवाएँ बेचता है।
रावत आंटी एक ग्राहक को 10 kg चावल, 5 kg चीनी, और 2 पैकेट चाय बेचती हैं। वो बिल बनाती हैं। यही बिल सेल्स वाउचर है।
और उदाहरण:
- कोई भी सामान की बिक्री — चाहे कैश हो या क्रेडिट
- सेवा देकर उसका बिल बनाना
मुख्य बात: सामान या सेवाएँ बाहर जाते हैं। राजस्व अंदर आता है।
6. खरीद वाउचर (Purchase Voucher / Purchase Invoice)
कब इस्तेमाल करें: जब बिज़नेस सामान या सेवाएँ खरीदता है।
रावत आंटी अपनी दुकान के लिए स्टॉक खरीदती हैं — 50 kg चावल, 20 kg दाल, 10 kg चीनी — हल्द्वानी के एक होलसेलर से। होलसेलर उन्हें एक बिल देता है। यही बिल पर्चेज़ वाउचर है।
और उदाहरण:
- कच्चा माल खरीदना
- बेचने के लिए सामान खरीदना
- सेवा खरीदना (जैसे दुकान की पेंटिंग करवाना)
मुख्य बात: सामान या सेवाएँ अंदर आते हैं। पैसा बाहर जाता है (या पेयेबल बनता है)।
वाउचर पर क्या लिखा होता है?
हर वाउचर — चाहे किसी भी टाइप का हो — उस पर कुछ ज़रूरी जानकारी होनी चाहिए। इसे वाउचर का "ID कार्ड" समझो।
यहाँ ज़रूरी हिस्से हैं:
| फ़ील्ड | इसका मतलब | उदाहरण |
|---|---|---|
| तारीख (Date) | ट्रांज़ैक्शन कब हुआ? | 15-Jul-2025 |
| वाउचर नंबर | ट्रैकिंग के लिए एक यूनीक सीरियल नंबर | PV-042 (Payment Voucher #42) |
| वाउचर का प्रकार | 6 में से कौन सा टाइप है? | Payment Voucher |
| किसे दिया / किससे मिला | दूसरा पक्ष कौन है? | मकान मालिक — श्री पंत जी |
| राशि (अंकों में) | अंकों में रकम | Rs. 5,000 |
| राशि (शब्दों में) | शब्दों में रकम | Rupees Five Thousand Only |
| डेबिट अकाउंट | कौन सा अकाउंट डेबिट होगा? | Rent Account |
| क्रेडिट अकाउंट | कौन सा अकाउंट क्रेडिट होगा? | Cash Account |
| विवरण (नैरेशन) | ट्रांज़ैक्शन का छोटा डिस्क्रिप्शन | Being rent paid for July 2025 |
| अधिकृत (Authorized By) | किसने अप्रूव किया? | रावत आंटी का सिग्नेचर |
शर्मा सर समझाते हैं:
"नैरेशन बहुत ज़रूरी है, मीरा। ये ट्रांज़ैक्शन की कहानी बताता है। इसे साफ़ लिखो। सालों बाद अगर कोई ये वाउचर पढ़े, तो उसे समझ आना चाहिए कि क्या हुआ था।"
भरे हुए वाउचर — नमूने
आओ अब तीन असली वाउचर देखते हैं जो मीरा रावत आंटी की दुकान के लिए भरती है।
नमूना 1: भुगतान वाउचर (Payment Voucher)
रावत आंटी July 2025 का दुकान किराया Rs. 5,000 देती हैं।
╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║ रावत जनरल स्टोर ║
║ मेन रोड, अल्मोड़ा, उत्तराखंड ║
║ ║
║ PAYMENT VOUCHER ║
║ (भुगतान वाउचर) ║
║ ║
║ वाउचर नं.: PV-042 तारीख: 15-Jul-2025 ║
║ ║
║ किसे दिया: श्री पंत जी (मकान मालिक) ║
║ ║
║ Debit Account: Rent Account ║
║ Credit Account: Cash Account ║
║ ║
║ राशि: Rs. 5,000.00 ║
║ (Rupees Five Thousand Only) ║
║ ║
║ विवरण: Being shop rent paid for the month of ║
║ July 2025 to Shri Pant Ji, landlord. ║
║ ║
║ ║
║ बनाया: मीरा अधिकृत: रावत आंटी ║
║ ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝
Rent Account डेबिट क्यों? क्योंकि किराया एक खर्चा (ख़र्चा) है। ख़र्चे डेबिट साइड पर बढ़ते हैं।
Cash Account क्रेडिट क्यों? क्योंकि कैश बाहर जा रहा है। जब कैश बाहर जाता है तो Cash Account क्रेडिट होता है।
नमूना 2: रसीद वाउचर (Receipt Voucher)
एक नियमित ग्राहक, डिमरी जी, Rs. 2,500 कैश देकर अपना पुराना बिल चुकाते हैं।
╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║ रावत जनरल स्टोर ║
║ मेन रोड, अल्मोड़ा, उत्तराखंड ║
║ ║
║ RECEIPT VOUCHER ║
║ (रसीद वाउचर) ║
║ ║
║ वाउचर नं.: RV-078 तारीख: 15-Jul-2025 ║
║ ║
║ किससे मिला: श्री डिमरी जी ║
║ ║
║ Debit Account: Cash Account ║
║ Credit Account: Dimri Ji's Account (Debtor) ║
║ ║
║ राशि: Rs. 2,500.00 ║
║ (Rupees Two Thousand Five Hundred Only) ║
║ ║
║ विवरण: Being cash received from Shri Dimri Ji ║
║ against his outstanding balance. ║
║ ║
║ ║
║ बनाया: मीरा अधिकृत: रावत आंटी ║
║ ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝
Cash Account डेबिट क्यों? क्योंकि कैश अंदर आ रहा है। जब कैश आता है तो Cash Account डेबिट होता है।
डिमरी जी का अकाउंट क्रेडिट क्यों? क्योंकि वो पैसा देनदार (डेटर) थे। अब जब उन्होंने पैसा दे दिया तो उनकी बकाया रकम कम होती है। उनका अकाउंट क्रेडिट करने से उनकी देनदारी कम होती है।
नमूना 3: कॉन्ट्रा वाउचर (Contra Voucher)
रावत आंटी Rs. 20,000 कैश अपने SBI बैंक अकाउंट में जमा करती हैं।
╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║ रावत जनरल स्टोर ║
║ मेन रोड, अल्मोड़ा, उत्तराखंड ║
║ ║
║ CONTRA VOUCHER ║
║ (कॉन्ट्रा वाउचर) ║
║ ║
║ वाउचर नं.: CV-011 तारीख: 15-Jul-2025 ║
║ ║
║ Debit Account: SBI Bank Account ║
║ Credit Account: Cash Account ║
║ ║
║ राशि: Rs. 20,000.00 ║
║ (Rupees Twenty Thousand Only) ║
║ ║
║ विवरण: Being cash deposited into SBI Almora ║
║ branch account. ║
║ ║
║ ║
║ बनाया: मीरा अधिकृत: रावत आंटी ║
║ ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝
Bank Account डेबिट क्यों? क्योंकि बैंक बैलेंस बढ़ रहा है। बैंक एक एसेट है। एसेट्स डेबिट साइड पर बढ़ती हैं।
Cash Account क्रेडिट क्यों? क्योंकि कैश बॉक्स से कैश बाहर जा रहा है। कैश कम हो रहा है।
ध्यान दो: कोई बाहरी पक्ष शामिल नहीं है। पैसा बस एक जेब से दूसरी जेब में गया।
मीरा टाइप्स कैसे याद रखती है
नेगी भैया मीरा को एक आसान ट्रिक सिखाते हैं:
"अपने आप से दो सवाल पूछो। पहला — क्या कैश शामिल है? दूसरा — पैसा किस दिशा में जा रहा है?"
यहाँ फ़ैसला फ़्लो है:
चरण 1: क्या इस ट्रांज़ैक्शन में कैश या बैंक शामिल है?
- हाँ, और पैसा अंदर आ रहा है → रसीद वाउचर (Receipt Voucher)
- हाँ, और पैसा बाहर जा रहा है → भुगतान वाउचर (Payment Voucher)
- हाँ, लेकिन पैसा हमारे अपने कैश और बैंक के बीच मूव हो रहा है → कॉन्ट्रा वाउचर (Contra Voucher)
- कैश बिल्कुल शामिल नहीं → जर्नल वाउचर (Journal Voucher)
चरण 2: क्या ये सामान की खरीद या बिक्री है?
- सामान बेच रहे हैं → बिक्री वाउचर (Sales Voucher)
- सामान खरीद रहे हैं → खरीद वाउचर (Purchase Voucher)
(ध्यान दो: कैश सेल में सेल्स वाउचर भी बनेगा बिक्री के लिए और रसीद वाउचर भी बनेगा कैश के लिए। व्यवहार में, बहुत से छोटे बिज़नेस दोनों को एक ही डॉक्यूमेंट में मिला देते हैं — सेल्स बिल।)

वाउचर नंबरिंग
शर्मा सर नंबरिंग पर बहुत पर्टिक्युलर हैं।
"हर वाउचर का एक यूनीक नंबर होना चाहिए, मीरा। इसी से हम उन्हें ट्रैक करते हैं। अगर वाउचर PV-042 गायब हो जाए, तो हमें तुरंत पता चल जाता है क्योंकि PV-041 है और PV-043 है, लेकिन 042 गायब है।"
आम सिस्टम ये है:
| वाउचर का प्रकार | प्रीफ़िक्स | उदाहरण |
|---|---|---|
| Receipt Voucher | RV- | RV-001, RV-002, RV-003... |
| Payment Voucher | PV- | PV-001, PV-002, PV-003... |
| Contra Voucher | CV- | CV-001, CV-002, CV-003... |
| Journal Voucher | JV- | JV-001, JV-002, JV-003... |
| Sales Voucher | SV- | SV-001, SV-002, SV-003... |
| Purchase Voucher | PUR- | PUR-001, PUR-002, PUR-003... |
नंबरिंग हर फ़ाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में (1 April) नए सिरे से शुरू होती है।
सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स (सहायक दस्तावेज़)
अकेला वाउचर काफ़ी नहीं है। इसके साथ एक सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट लगा होना चाहिए — असली बिल, रसीद, या इनवॉइस जो ट्रांज़ैक्शन को प्रूव करे।
उदाहरण:
| वाउचर | सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट |
|---|---|
| किराये का पेमेंट वाउचर | मकान मालिक से किराये की रसीद |
| स्टॉक का पर्चेज़ वाउचर | आपूर्तिकर्ता का बिल/इनवॉइस |
| ग्राहक के पेमेंट का रसीद वाउचर | दुकान की रसीद की कॉपी |
| बैंक डिपॉज़िट का कॉन्ट्रा वाउचर | बैंक डिपॉज़िट स्लिप |
| बिजली का पेमेंट वाउचर | बिजली का बिल |
शर्मा सर सारे वाउचर एक फ़ाइल में रखते हैं, तारीख के हिसाब से। हर वाउचर के पीछे उसका सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट चरणल होता है।
"अगर कभी आमदनी टैक्स दफ़्तरर आया, या GST ऑडिट हुआ," शर्मा सर बोलते हैं, "तो वो वाउचर माँगेंगे। अगर तुम्हारे पास सब साफ़-सुथरे और व्यवस्थित्ड हैं, तो कोई दिक्कत नहीं। अगर नहीं हैं..." वो सिर हिलाते हैं। "मुसीबत।"
मीरा का पहला वाउचर
सुबह 11 बज रहे हैं। रावत आंटी दफ़्तर में फ़ोन करती हैं।
"शर्मा सर, मेरी मददर कमला को July की तनख़्वाह चाहिए। Rs. 4,000। क्या मीरा वाउचर बना सकती है?"
शर्मा सर मीरा की तरफ़ देखकर सिर हिलाते हैं। "बनाओ। तुम्हें पता है क्या करना है।"
मीरा सोचती है:
- क्या हो रहा है? रावत आंटी कमला को तनख़्वाह दे रही हैं।
- क्या कैश शामिल है? हाँ।
- किस दिशा में? कैश बाहर जा रहा है।
- तो कौन सा वाउचर? पेमेंट वाउचर।
- कौन सा अकाउंट डेबिट होगा? Salary Account (ये ख़र्चा है — ख़र्चे डेबिट होते हैं)।
- कौन सा अकाउंट क्रेडिट होगा? Cash Account (कैश बाहर जा रहा है — कैश क्रेडिट होता है)।
वो ध्यान से भरती है:
╔══════════════════════════════════════════════════════════════╗
║ रावत जनरल स्टोर ║
║ मेन रोड, अल्मोड़ा, उत्तराखंड ║
║ ║
║ PAYMENT VOUCHER ║
║ (भुगतान वाउचर) ║
║ ║
║ वाउचर नं.: PV-043 तारीख: 15-Jul-2025 ║
║ ║
║ किसे दिया: श्रीमती कमला देवी (मददर) ║
║ ║
║ Debit Account: Salary Account ║
║ Credit Account: Cash Account ║
║ ║
║ राशि: Rs. 4,000.00 ║
║ (Rupees Four Thousand Only) ║
║ ║
║ विवरण: Being salary paid to Smt. Kamla Devi ║
║ for the month of July 2025. ║
║ ║
║ ║
║ बनाया: मीरा अधिकृत: रावत आंटी ║
║ ║
╚══════════════════════════════════════════════════════════════╝
शर्मा सर चेक करते हैं। "बिल्कुल सही," वो कहते हैं। "तुम्हारा पहला वाउचर। और भी बहुत बनाने हैं।"
मीरा मुस्कुराती है। ये एक छोटा सा कागज़ है। लेकिन इसका मतलब कुछ है। उसने अभी एक ऑफ़िशियल अकाउंटिंग डॉक्यूमेंट बनाया है।
क्विक रीकैप (संक्षिप्त सारांश)
- वाउचर एक लिखित दस्तावेज़ है जो साबित करता है कि ट्रांज़ैक्शन हुआ।
- 6 प्रकार हैं: रसीद, पेमेंट, कॉन्ट्रा, जर्नल, सेल्स, पर्चेज़।
- रसीद वाउचर = पैसा आता है।
- पेमेंट वाउचर = पैसा जाता है।
- कॉन्ट्रा वाउचर = पैसा कैश और बैंक के बीच मूव होता है (इंटरनल)।
- जर्नल वाउचर = कोई कैश शामिल नहीं, सिर्फ एडजस्टमेंट्स।
- सेल्स वाउचर = सामान या सेवाएँ बेचे गए।
- पर्चेज़ वाउचर = सामान या सेवाएँ खरीदे गए।
- हर वाउचर पर होना चाहिए: तारीख, वाउचर नंबर, राशि (अंकों और शब्दों में), प्रभावितेड अकाउंट्स, नैरेशन, और ऑथराइज़ेशन।
- वाउचर नहीं = एंट्री नहीं। ये सुनहरा नियम है।
- हमेशा वाउचर के साथ सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स (बिल, रसीदें) लगाओ।
अभ्यास अभ्यास — खुद करो
नीचे दिए गए हर ट्रांज़ैक्शन के लिए सही वाउचर टाइप पहचानो। फिर किन्हीं दो के लिए पूरा वाउचर भरो।
| # | ट्रांज़ैक्शन | वाउचर टाइप? |
|---|---|---|
| 1 | रावत आंटी ने होलसेलर से Rs. 4,500 में 100 kg चावल खरीदा, कैश दिया | ________ |
| 2 | एक ग्राहक ने Rs. 800 का सामान खरीदा और UPI से पे किया | ________ |
| 3 | रावत आंटी ने बैंक से Rs. 10,000 दुकान के खर्चों के लिए निकाला | ________ |
| 4 | रावत आंटी ने Rs. 1,200 बिजली का बिल कैश में दिया | ________ |
| 5 | एक डेटर, जोशी जी, ने अपना Rs. 3,000 का हिसाब चुकाया | ________ |
| 6 | रावत आंटी ने बिश्त जी को Rs. 1,500 का सामान उधार बेचा | ________ |
| 7 | शर्मा सर ने साल के अंत में दुकान के फ़र्नीचर पर Rs. 2,000 का डेप्रिसिएशन रिकॉर्ड किया | ________ |
| 8 | रावत आंटी ने SBI अकाउंट से PNB अकाउंट में Rs. 15,000 ट्रांसफ़र किए | ________ |
उत्तर:
- पर्चेज़ वाउचर (और कैश पेमेंट के लिए पेमेंट वाउचर)
- रसीद वाउचर (और सेल के लिए सेल्स वाउचर)
- कॉन्ट्रा वाउचर
- पेमेंट वाउचर
- रसीद वाउचर
- सेल्स वाउचर
- जर्नल वाउचर
- कॉन्ट्रा वाउचर
बोनस: ऊपर के किन्हीं दो ट्रांज़ैक्शन्स को चुनो और पूरा वाउचर लिखो — तारीख, वाउचर नंबर, डेबिट और क्रेडिट अकाउंट्स, राशि अंकों और शब्दों में, नैरेशन, और ऑथराइज़ेशन के साथ।
मज़ेदार तथ्य (फ़न फ़ैक्ट)
प्राचीन भारत में व्यापारी ताड़पत्रों और कपड़े पर हिसाब रखते थे। चाणक्य ने 2,000 साल से भी पहले लिखी अपनी किताब अर्थशास्त्र में वित्तीय रिकॉर्ड रखने और उनकी ऑडिट करने के नियम बताए हैं। तब भी सिद्धांत वही था — लिख लो, सबूत रखो, और नंबर चेक करो। जब तुम आज एक वाउचर भरते हो, तो तुम उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हो जो दुनिया के ज़्यादातर देशों से भी पुरानी है!
अगले चैप्टर में, मीरा इन सारे वाउचर्स को एक जर्नल में लिखेगी — अकाउंटिंग की "डायरी"। असली बुककीपिंग शुरू होती है।