ट्रायल बैलेंस — क्या सब जुड़ रहा है?
शुक्रवार का दिन। मीरा ने पूरे हफ़्ते वाउचर, जर्नल एंट्रीज़, और लेजर पोस्टिंग सीखी है। उसने पन्नों पर पन्ने भरे हैं। उसकी उँगलियों पर स्याही के निशान हैं। अब शर्मा सर उसके सामने एक खाली कागज़ रखते हैं। "मीरा, तुमने सारी एंट्रीज़ लेजर में पोस्ट कर दीं। हर अकाउंट बैलेंस कर दिया। लेकिन तुम्हें कैसे पता कि कोई गलती नहीं हुई? कैसे पता कि तुमने गलती से Rs. 5,000 डेबिट साइड पर नहीं डाल दिए जो क्रेडिट साइड पर होने चाहिए थे?" मीरा माथे पर बल डालती है। "मैं हर एंट्री दोबारा चेक करूँ?" शर्मा सर सिर हिलाते हैं। "इसमें पूरा दिन लग जाएगा। एक तेज़ तरीका है। इसे ट्रायल बैलेंस कहते हैं।"
ट्रायल बैलेंस क्या है?
डबल-एंट्री अकाउंटिंग का सुनहरा नियम याद है? हर डेबिट के बराबर एक क्रेडिट होता है। अगर तुम इस नियम को ठीक से पालन करो, तो तुम्हारे लेजर के सारे डेबिट बैलेंसेज़ का कुल, सारे क्रेडिट बैलेंसेज़ के कुल के बराबर होना चाहिए।
ट्रायल बैलेंस बस इतना है — तुम्हारे सारे लेजर अकाउंट बैलेंसेज़ की एक सूची, दो कॉलम्स में — एक तरफ़ डेबिट बैलेंसेज़, दूसरी तरफ़ क्रेडिट बैलेंसेज़। फिर दोनों कॉलम्स जोड़ो। अगर मिल गए, तो तुम्हारे बुक्स अरिथमेटिकली सही हैं।
ऐसे सोचो जैसे सब्ज़ी मंडी में तराज़ू। एक तरफ़ सब्ज़ी रखो और दूसरी तरफ़ बाट। अगर तराज़ू बराबर है, तो तोल सही है। अगर एक तरफ़ झुका, तो कुछ गड़बड़ है।
ट्रायल बैलेंस अकाउंटिंग का तराज़ू है।
शर्मा सर समझाते हैं:
"ट्रायल बैलेंस तुम्हें ये नहीं बताता कि सब कुछ सही है। ये बताता है कि तुम्हारे डेबिट्स और क्रेडिट्स बैलेंस में हैं। ये पहला चेक है — जैसे परोसने से पहले दाल चखना। अगर नमक गलत है, तो पता चल जाता है कि समस्या है। लेकिन नमक सही होने पर भी, दाल में और कुछ कम हो सकता है।"
ट्रायल बैलेंस क्या नहीं पकड़ सकता, ये बाद में देखेंगे। पहले, सीखते हैं कि बनाते कैसे हैं।
ट्रायल बैलेंस का फ़ॉर्मेट
ट्रायल बैलेंस एक सीधी-सादी टेबल है:
| क्र.सं. | अकाउंट का नाम | डेबिट बैलेंस (Rs.) | क्रेडिट बैलेंस (Rs.) |
|---|---|---|---|
| कुल (Total) | ____ | ____ |
हर रो एक लेजर अकाउंट है। तुम उसका क्लोज़िंग बैलेंस या तो डेबिट कॉलम में लिखते हो या क्रेडिट कॉलम में — कभी दोनों में नहीं।
- एसेट्स (कैश, बैंक, डेटर्स, फ़र्नीचर, स्टॉक) → डेबिट कॉलम
- ख़र्चे (पर्चेज़ेज़, रेंट, तनख़्वाह, इलेक्ट्रिसिटी) → डेबिट कॉलम
- ड्रॉइंग्स → डेबिट कॉलम
- लायबिलिटीज़ (क्रेडिटर्स, लोन्स) → क्रेडिट कॉलम
- आमदनी (सेल्स, कमीशन, इंटरेस्ट रिसीव्ड) → क्रेडिट कॉलम
- कैपिटल → क्रेडिट कॉलम

मीरा का पहला ट्रायल बैलेंस
आओ उन लेजर अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं जो मीरा ने 15 July के ट्रांज़ैक्शन्स से बनाए। उसने हर अकाउंट बैलेंस किया और ये क्लोज़िंग बैलेंसेज़ निकाले:
| अकाउंट | प्रकार | क्लोज़िंग बैलेंस | कौन सा कॉलम? |
|---|---|---|---|
| कैश | एसेट | 4,300 | डेबिट |
| SBI बैंक | एसेट | 5,000 | डेबिट |
| जोशी जी | डेटर (एसेट) | 3,500 | डेबिट |
| पर्चेज़ेज़ | ख़र्चा | 20,000 | डेबिट |
| तनख़्वाह | ख़र्चा | 4,000 | डेबिट |
| रेंट | ख़र्चा | 5,000 | डेबिट |
| इलेक्ट्रिसिटी ख़र्चा | ख़र्चा | 1,200 | डेबिट |
| ड्रॉइंग्स | ड्रॉइंग्स | 2,000 | डेबिट |
| सेल्स | आमदनी | 9,500 | क्रेडिट |
| डिमरी जी | डेटर (एसेट) | 0 | — (पूरा सेटल हो गया) |
| बिश्त ट्रेडर्स | क्रेडिटर (लायबिलिटी) | 8,000 | क्रेडिट |
| कैपिटल (ओपनिंग) | कैपिटल | 27,500 | क्रेडिट |
रुको — Rs. 27,500 की कैपिटल कहाँ से आई? ये रावत आंटी की ओपनिंग कैपिटल है। ये बिज़नेस में मालिक के निवेश को दर्शाती है। अवधि की शुरुआत में, बिज़नेस के पास Rs. 25,000 कैश और Rs. 2,500 डिमरी जी से मिलने वाला (रिसीवेबल) था। कुल Rs. 27,500, जो मालिक की इक्विटी है।
अब मीरा ट्रायल बैलेंस लिखती है:
रावत जनरल स्टोर का ट्रायल बैलेंस — 15 July 2025
| क्र.सं. | अकाउंट का नाम | डेबिट (Rs.) | क्रेडिट (Rs.) |
|---|---|---|---|
| 1 | Cash Account | 4,300 | |
| 2 | SBI Bank Account | 5,000 | |
| 3 | Joshi Ji (डेटर) | 3,500 | |
| 4 | Purchases Account | 20,000 | |
| 5 | Salary Account | 4,000 | |
| 6 | Rent Account | 5,000 | |
| 7 | Electricity Expense Account | 1,200 | |
| 8 | Drawings Account | 2,000 | |
| 9 | Sales Account | 9,500 | |
| 10 | Bisht Traders (क्रेडिटर) | 8,000 | |
| 11 | Capital Account | 27,500 | |
| कुल (Total) | 45,000 | 45,000 |
मीरा कॉलम्स जोड़ती है:
- डेबिट कुल: 4,300 + 5,000 + 3,500 + 20,000 + 4,000 + 5,000 + 1,200 + 2,000 = 45,000
- क्रेडिट कुल: 9,500 + 8,000 + 27,500 = 45,000
मिल गए!
मीरा लंबी साँस छोड़ती है। "बैलेंस हो गया!"
शर्मा सर मुस्कुराते हैं। "अच्छा। इसका मतलब तुम्हारी जर्नल एंट्रीज़ सही थीं, पोस्टिंग सही थी, और मिलान सही थी। ट्रायल बैलेंस इसकी पुष्टि करता है।"
ट्रायल बैलेंस क्या साबित करता है?
ट्रायल बैलेंस अरिथमेटिकल एक्यूरेसी (गणितीय शुद्धता) साबित करता है। ये पुष्टि करता है कि:
- जर्नल की हर डेबिट एंट्री सही लेजर अकाउंट की डेबिट साइड पर पोस्ट हुई।
- हर क्रेडिट एंट्री क्रेडिट साइड पर पोस्ट हुई।
- अकाउंट्स सही बैलेंस हुए।
- कोई एंट्री सिर्फ एक साइड पर पोस्ट नहीं हुई (जो बैलेंस बिगाड़ देती)।
सीधे शब्दों में: मैथ सही है।
ट्रायल बैलेंस क्या साबित नहीं करता
ये बहुत ज़रूरी बात है। शर्मा सर मीरा को ये दो बार लिखवाते हैं।
"ट्रायल बैलेंस बिल्कुल सही नहीं है, मीरा। कुछ गलतियाँ ऐसी हैं जो ये पकड़ नहीं सकता। ट्रायल बैलेंस मैच होने पर भी, तुम्हारे बुक्स में गलतियाँ हो सकती हैं।"
ये हैं वो गलतियाँ जो ट्रायल बैलेंस मैच होने पर भी छुपी रह सकती हैं:
1. लोप की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ ओमिशन)
कोई ट्रांज़ैक्शन पूरी तरह भूल गए — जर्नल में रिकॉर्ड ही नहीं किया।
उदाहरण: रावत आंटी ने दुकान की सफ़ाई के लिए Rs. 300 दिए लेकिन मीरा दर्ज करना भूल गई। चूँकि कहीं भी एंट्री नहीं हुई — न डेबिट, न क्रेडिट — ट्रायल बैलेंस अभी भी बैलेंस करता है। लेकिन बुक्स गलत हैं।
2. आयोग की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ कमीशन)
एंट्री सही टाइप के अकाउंट में लेकिन गलत व्यक्ति के अकाउंट में हो गई।
उदाहरण: मीरा को डिमरी जी से Rs. 2,500 मिले लेकिन उसने गलती से जोशी जी के अकाउंट में लिख दिया। दोनों डेटर अकाउंट्स हैं। ट्रायल बैलेंस अभी भी बैलेंस करता है। लेकिन डिमरी जी के रिकॉर्ड गलत हैं, और जोशी जी के रिकॉर्ड गलत हैं।
3. सिद्धांत की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ प्रिंसिपल)
एंट्री गलत टाइप के अकाउंट में पोस्ट हो गई।
उदाहरण: रावत आंटी ने Rs. 3,000 की नई लकड़ी की अलमारी खरीदी। ये फ़र्नीचर है — एसेट। लेकिन मीरा ने इसे "पर्चेज़ेज़" में दर्ज कर दिया। ट्रायल बैलेंस अभी भी बैलेंस करता है (दोनों डेबिट एंट्रीज़ हैं)। लेकिन पर्चेज़ेज़ ज़्यादा दिख रहा है, और फ़र्नीचर गायब है।
4. प्रतिपूरक त्रुटि (कम्पेन्सेटिंग त्रुटियाँ)
दो अलग-अलग गलतियाँ एक-दूसरे को कैंसल कर देती हैं।
उदाहरण: मीरा ने Rent A/c Rs. 500 ज़्यादा डेबिट किया, और अलग से Sales A/c Rs. 500 ज़्यादा क्रेडिट किया। दोनों गलतियाँ कैंसल हो गईं। ट्रायल बैलेंस अभी भी बैलेंस करता है। लेकिन रेंट और सेल्स दोनों गलत हैं।
5. मूल प्रविष्टि की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ ओरिजिनल एंट्री)
गलत रकम डेबिट और क्रेडिट दोनों में इस्तेमाल की गई।
उदाहरण: रावत आंटी ने बिजली के लिए Rs. 1,200 दिए, लेकिन मीरा ने डेबिट और क्रेडिट दोनों में Rs. 1,400 लिखा। ट्रायल बैलेंस बैलेंस करता है (Rs. 1,400 = Rs. 1,400)। लेकिन असली रकम गलत है।
6. उलटी प्रविष्टि की त्रुटि (त्रुटि ऑफ़ रिवर्सल)
सही अकाउंट्स इस्तेमाल हुए लेकिन गलत साइड्स पर।
उदाहरण: मीरा ने कैश डेबिट किया और सेल्स क्रेडिट किया (सही)। लेकिन अगली एंट्री में, उसने सेल्स डेबिट किया और कैश क्रेडिट किया (उलटा)। कुल्स अभी भी बैलेंस कर सकते हैं, लेकिन अलग-अलग एंट्रीज़ गलत हैं।
| त्रुटि का प्रकार | क्या गलत हुआ | TB अभी भी बैलेंस करता है? |
|---|---|---|
| ओमिशन (लोप) | ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड ही नहीं हुआ | हाँ |
| कमीशन (आयोग) | गलत व्यक्ति, सही टाइप | हाँ |
| प्रिंसिपल (सिद्धांत) | गलत टाइप का अकाउंट | हाँ |
| कम्पेन्सेटिंग (प्रतिपूरक) | दो गलतियाँ कैंसल हो गईं | हाँ |
| ओरिजिनल एंट्री (मूल प्रविष्टि) | दोनों साइड्स पर गलत रकम | हाँ |
| रिवर्सल (उलटी प्रविष्टि) | सही अकाउंट्स, गलत साइड्स | हाँ |
शर्मा सर कहते हैं:
"इसीलिए ट्रायल बैलेंस पहला चेक है, आखिरी चेक नहीं। ऐसे सोचो जैसे मेडिकल टेस्ट। अगर ब्लड प्रेशर सामान्य है, तो इसका मतलब ये नहीं कि तुम पूरी तरह हेल्दी हो। लेकिन अगर ब्लड प्रेशर एब्सामान्य है, तो ज़रूर कुछ गड़बड़ है।"
जब ट्रायल बैलेंस मैच नहीं करता
अब बात करते हैं कि क्या होता है जब दोनों कॉलम्स एक नंबर नहीं दिखाते। इसका मतलब है कोई त्रुटि है। यहाँ उसे ढूँढने का तरीका है।
चरण 1: कॉलम्स दोबारा जोड़ो
सबसे आम गलती अरिथमेटिक त्रुटि होती है। डेबिट कॉलम दोबारा जोड़ो। क्रेडिट कॉलम दोबारा जोड़ो। गणनार इस्तेमाल करो अगर ज़रूरत हो।
चरण 2: सटीक अंतर निकालो
बड़े कुल में से छोटा घटाओ। ये अंतर तुम्हें क्लूज़ देता है।
चरण 3: अंतर से त्रुटि ढूँढो
शर्मा सर मीरा को तीन ट्रिक्स सिखाते हैं:
ट्रिक 1: क्या अंतर 2 से भाग हो सकता है?
अगर हाँ, तो इसे 2 से भाग करो। उस रकम को ढूँढो। हो सकता है तुमने कोई एंट्री गलत साइड पर पोस्ट कर दी हो।
उदाहरण: डेबिट कुल Rs. 47,000 है और क्रेडिट कुल Rs. 45,000। अंतर = Rs. 2,000। 2,000 का आधा = Rs. 1,000। Rs. 1,000 की एंट्री ढूँढो। हो सकता है तुमने इसे डेबिट साइड पर डाल दिया जो क्रेडिट साइड पर होनी चाहिए थी (या उल्टा)। इससे त्रुटि डबल हो जाती है — इसीलिए अंतर अमाउंट से दुगुना है।
ट्रिक 2: क्या अंतर 9 से भाग हो सकता है?
अगर हाँ, तो हो सकता है ट्रांसपोज़िशन त्रुटि हो — तुमने दो डिजिट्स उलटे लिख दिए।
उदाहरण: तुमने Rs. 4,500 की जगह Rs. 5,400 लिखा। अंतर = 5,400 - 4,500 = 900। और 900 / 9 = 100। ये ट्रांसपोज़िशन त्रुटि पुष्टि करता है। ऐसी एंट्रीज़ ढूँढो जहाँ डिजिट्स स्वैप हो सकते हैं।
और ट्रांसपोज़िशन उदाहरण:
- 18 की जगह 81: अंतर = 63, और 63 / 9 = 7
- 2,300 की जगह 3,200: अंतर = 900, और 900 / 9 = 100
ट्रिक 3: क्या अंतर किसी एक एंट्री की इग्ज़ैक्ट अमाउंट है?
अगर हाँ, तो हो सकता है तुम उस एंट्री को पूरी तरह पोस्ट करना भूल गए (सिर्फ डेबिट पोस्ट किया लेकिन क्रेडिट नहीं, या उल्टा)।
उदाहरण: अंतर ठीक Rs. 5,000 है। चेक करो कि Rs. 5,000 की कोई जर्नल एंट्री है जहाँ एक साइड पोस्ट नहीं हुई।
चरण 4: लेजर बैलेंसेज़ चेक करो
हर लेजर अकाउंट सही बैलेंस हुआ या नहीं, ये चेक करो। एक अकाउंट में एडिशन ग़लती पूरे ट्रायल बैलेंस को गड़बड़ कर सकती है।
चरण 5: जर्नल चेक करो
वापस जाओ और वेरिफ़ाई करो कि हर जर्नल एंट्री में डेबिट्स और क्रेडिट्स बराबर हैं।
अभ्यास सीनारियो: त्रुटि ढूँढना
नेगी भैया मीरा को टेस्ट देते हैं। वो उसे एक ट्रायल बैलेंस देते हैं जो मैच नहीं करता:
| क्र.सं. | अकाउंट का नाम | डेबिट (Rs.) | क्रेडिट (Rs.) |
|---|---|---|---|
| 1 | Cash Account | 8,500 | |
| 2 | Capital Account | 30,000 | |
| 3 | Purchases Account | 15,000 | |
| 4 | Sales Account | 12,000 | |
| 5 | Rent Account | 3,000 | |
| 6 | Furniture Account | 10,000 | |
| 7 | क्रेडिटर्स | 3,500 | |
| 8 | डेटर्स | 7,200 | |
| 9 | Salary Account | 2,700 | |
| कुल (Total) | 46,400 | 45,500 |
अंतर = Rs. 46,400 - Rs. 45,500 = Rs. 900
क्या 900, 9 से भाग हो सकता है? हाँ! 900 / 9 = 100।
ये ट्रांसपोज़िशन त्रुटि सजेस्ट करता है। मीरा हर अमाउंट को लेजर से मैच करती है। वो Sales Account चेक करती है। लेजर बैलेंस Rs. 12,000 दिखता है। लेकिन जब वो क्रेडिट एंट्रीज़ दोबारा जोड़ती है: Rs. 1,800 + Rs. 3,500 + Rs. 4,200 + Rs. 3,400 = Rs. 12,900। Rs. 12,000 नहीं! किसी ने Rs. 12,900 की जगह Rs. 12,000 लिख दिया। अंतर Rs. 900 है। और 900 / 9 = 100। क्लासिक ट्रांसपोज़िशन त्रुटि — डिजिट्स रिअरेंज हो गए।
सेल्स को Rs. 12,900 करेक्ट करने पर:
- डेबिट कुल: Rs. 46,400
- क्रेडिट कुल: Rs. 30,000 + Rs. 12,900 + Rs. 3,500 = Rs. 46,400
अब मैच हो गया।
नेगी भैया मुस्कुराते हैं। "ढूँढ लिया। अच्छा डिटेक्टिव काम किया।"
ट्रायल बैलेंस कब बनाते हैं
व्यवहार में, बिज़नेसेज़ ट्रायल बैलेंस बनाते हैं:
- हर महीने — चेक करने के लिए कि महीने की एंट्रीज़ सही हैं
- हर तिमाही — ख़ासकर GST रिटर्न्स फ़ाइल करने से पहले
- हर साल — फ़ाइनल अकाउंट्स (मुनाफ़ा & घाटा और बैलेंस शीट) बनाने से पहले
रावत आंटी की छोटी दुकान के लिए, मंथली ट्रायल बैलेंस काफ़ी है। बिश्त ट्रेडर्स के लिए, जहाँ ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन्स होते हैं, शर्मा सर क्वार्टरली चेक करना पसंद करते हैं।
सस्पेंस अकाउंट — एक अस्थायी उपाय
अगर त्रुटि तुरंत न मिले तो? शर्मा सर मीरा को एक व्यावहारिक ट्रिक सिखाते हैं:
"अगर ट्रायल बैलेंस मैच नहीं करता और तुमने वजहेबल टाइम ढूँढने में लगा दिया, तो एक टेम्पररी अकाउंट खोलो जिसे सस्पेंस अकाउंट कहते हैं। अंतर वहाँ डाल दो। इससे ट्रायल बैलेंस अभी के लिए बैलेंस हो जाता है। लेकिन याद रखो — सस्पेंस अकाउंट पट्टी जैसा है, इलाज नहीं। तुम्हें त्रुटि ढूँढकर ठीक करना ही होगा।"
उदाहरण: डेबिट कुल = Rs. 46,400, क्रेडिट कुल = Rs. 45,500। अंतर = Rs. 900। क्रेडिट्स Rs. 900 कम हैं।
| क्र.सं. | अकाउंट का नाम | डेबिट (Rs.) | क्रेडिट (Rs.) |
|---|---|---|---|
| ... | (बाकी सारे अकाउंट्स) | ... | ... |
| 10 | सस्पेंस अकाउंट | 900 | |
| कुल (Total) | 46,400 | 46,400 |
बाद में, जब त्रुटि मिल जाए, सस्पेंस अकाउंट बंद कर दो। मीरा के केस में, जब सेल्स त्रुटि मिला, तो सस्पेंस अकाउंट की ज़रूरत नहीं रही।
ट्रायल बैलेंस — एक विज़ुअल समरी
यहाँ देखो ट्रायल बैलेंस अकाउंटिंग साइकल में कहाँ फ़िट होता है:
वाउचर → जर्नल → लेजर → ट्रायल बैलेंस
(सबूत) (रिकॉर्ड) (व्यवस्थित) (चेक)
- वाउचर — असली सबूत कि कुछ हुआ।
- जर्नल — ट्रांज़ैक्शन को क्रम से दर्ज करो।
- लेजर — अकाउंट-वाइज़ व्यवस्थित करो।
- ट्रायल बैलेंस — चेक करो कि सब जुड़ रहा है।
और ट्रायल बैलेंस के बाद? अगला चरण है फ़ाइनल अकाउंट्स बनाना — मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट और बैलेंस शीट। ये अगले चैप्टर में आता है।

क्विक रीकैप (संक्षिप्त सारांश)
- ट्रायल बैलेंस सारे लेजर अकाउंट बैलेंसेज़ की सूची है दो कॉलम्स में: डेबिट और क्रेडिट।
- अगर कुल डेबिट्स = कुल क्रेडिट्स, तो बुक्स अरिथमेटिकली सही हैं।
- एसेट्स, ख़र्चे, और ड्रॉइंग्स डेबिट कॉलम में जाते हैं।
- लायबिलिटीज़, आमदनी, और कैपिटल क्रेडिट कॉलम में जाते हैं।
- ट्रायल बैलेंस अरिथमेटिकल एक्यूरेसी साबित करता है।
- ये साबित नहीं करता कि सारी एंट्रीज़ सही हैं — ये ओमिशन, कमीशन, प्रिंसिपल, कम्पेन्सेशन, ओरिजिनल एंट्री, या रिवर्सल की त्रुटियाँ नहीं पकड़ सकता।
- अगर ट्रायल बैलेंस मैच नहीं करता, तो चेक करो: 2 से भाग होता है (गलत साइड), 9 से भाग होता है (ट्रांसपोज़िशन), या इग्ज़ैक्ट अमाउंट (मिस्ड पोस्टिंग)।
- सस्पेंस अकाउंट अनसुलझे अंतर का अस्थायी उपाय है।
- हमेशा असली त्रुटि ढूँढो और ठीक करो। सस्पेंस अकाउंट समाधान नहीं है — ये बुकमार्क है।
अभ्यास अभ्यास — खुद करो
पार्ट A: ट्रायल बैलेंस बनाओ
पिछले चैप्टर के अभ्यास अभ्यास में बनाए गए लेजर अकाउंट्स (20 July 2025 के 8 ट्रांज़ैक्शन्स) का इस्तेमाल करके ट्रायल बैलेंस बनाओ। हर अकाउंट और उसका बैलेंस लिस्ट करो।
तुम्हारे ट्रायल बैलेंस में होने चाहिए:
- Cash Account
- SBI Bank Account
- Capital Account
- Furniture Account
- Purchases Account
- Sales Account
- Bisht Traders Account
- Dimri Ji Account
- Miscellaneous Expense Account
क्या कुल्स मैच हो रहे हैं?
पार्ट B: त्रुटि ढूँढो
नीचे दिए गए ट्रायल बैलेंस में त्रुटि है। ढूँढो।
| क्र.सं. | अकाउंट का नाम | डेबिट (Rs.) | क्रेडिट (Rs.) |
|---|---|---|---|
| 1 | कैश | 12,000 | |
| 2 | बैंक | 25,000 | |
| 3 | कैपिटल | 50,000 | |
| 4 | पर्चेज़ेज़ | 18,000 | |
| 5 | सेल्स | 16,200 | |
| 6 | रेंट | 4,000 | |
| 7 | तनख़्वाह | 5,400 | |
| 8 | क्रेडिटर्स | 6,300 | |
| 9 | डेटर्स | 8,100 | |
| कुल (Total) | 72,500 | 72,500 |
ये बैलेंस कर रहा है! लेकिन इसमें त्रुटि छुपी है। शर्मा सर बताते हैं कि असल तनख़्वाह Rs. 4,500 दी गई थी, न कि Rs. 5,400। और असल डेटर्स बैलेंस Rs. 8,100 है।
ये किस तरह की त्रुटि है? (हिंट: 5,400 - 4,500 = 900। क्या 900, 9 से भाग होता है?)
मज़ेदार तथ्य (फ़न फ़ैक्ट)
ट्रायल बैलेंस इसलिए बनाया गया क्योंकि इंसान गलतियाँ करते हैं। सबसे सावधान अकाउंटेंट भी घंटों नंबर्स लिखने के बाद चूक सकता है। कंप्यूटर्स से पहले, भारत में अकाउंटेंट्स लालटेन की रोशनी में ट्रायल बैलेंस बनाते थे, ध्यान से लंबी-लंबी कॉलम्स हाथ से जोड़ते हुए। अगर बैलेंस मैच नहीं होता, तो कभी-कभी देर रात तक काम करते, एंट्री-बाय-एंट्री चेक करते। आज, अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर एक क्लिक में ट्रायल बैलेंस बना देता है। लेकिन ये समझना कि ये कैसे काम करता है — जैसा मीरा अब समझती है — इसका मतलब है तुम वो समस्याएँ पकड़ सकते हो जो सॉफ़्टवेयर भी मिस कर सकता है।
अगले चैप्टर में, मीरा ट्रायल बैलेंस लेकर फ़ाइनल अकाउंट्स बनाएगी — मुनाफ़ा & घाटा अकाउंट और बैलेंस शीट। यहीं पर सारे नंबर्स मिलकर बड़ा सवाल जवाब देते हैं: "क्या बिज़नेस पैसा कमा रहा है?"