अकाउंटिंग की भाषा — ये शब्द ज़रूर जानो
डे 4 पर मीरा दफ़्तर पहुँची तो शर्मा सर अपनी डेस्क पर प्रिंटेड कार्ड्स सजा रहे थे। हर कार्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में एक शब्द लिखा था: ASSETS, LIABILITIES, CAPITAL, REVENUE, EXPENSES। "आज," उन्होंने कहा, "हम वोकैब्युलरी सीखते हैं। हर प्रोफ़ेशन की अपनी भाषा होती है। डॉक्टर्स 'फ़्रैक्चर' कहते हैं, 'टूटी हड्डी' नहीं। लॉयर्स 'प्लेंटिफ़' कहते हैं, 'शिकायत करने वाला' नहीं। और अकाउंटेंट्स के भी अपने शब्द हैं। आज के बाद, तुम अकाउंटेंट की तरह बोलोगी।"

ये शब्द क्यों सीखने हैं?
मीरा ने कार्ड्स देखे और थोड़ी चिंता हुई। "शर्मा सर, ये पेचीदा लग रहे हैं।"
"लग रहे हैं पेचीदा," उन्होंने माना। "लेकिन हैं नहीं। हर शब्द कुछ ऐसा डिस्क्राइब करता है जो तुम पहले से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जानती हो। मैं बस उसका पेशेवर नाम दे रहा हूँ।"
"ऐसे सोचो। तुम जानती हो धनिया क्या होता है, है ना?"
"कोरिएंडर," मीरा ने कहा।
"सही। इंग्लिश में कोरिएंडर। लैटिन में Coriandrum sativum। एक ही चीज़ के तीन नाम। अकाउंटिंग के शब्द भी ऐसे ही हैं — वो चीज़ों के पेशेवर नाम हैं जो तुम पहले से समझती हो।"
"चलो शुरू करते हैं। और हम हर उदाहरण के लिए रावत आंटी की दुकान इस्तेमाल करेंगे, ताकि सब कुछ रियल लगे।"
एसेट्स — तुम्हारे पास क्या है
शर्मा सर ने पहला कार्ड उठाया: ASSETS।
"एसेट वो है जो बिज़नेस के पास है या जिस पर बिज़नेस का कंट्रोल है, और जिसकी वैल्यू है।"
एसेट = कोई भी चीज़ जो बिज़नेस की अपनी है और जिसकी वैल्यू है। ये बिज़नेस को अभी या फ़्यूचर में पैसा कमाने में मदद करती है।
"चलो रावत आंटी की दुकान में चलते हैं और एसेट्स की तरफ़ इशारा करते हैं।"
उन्होंने दुकान के अंदर की एक फ़ोटो निकाली (नेगी भैया ने विज़िट के दौरान फ़ोन से क्लिक की थी)।
रावत आंटी के एसेट्स क्या हैं?
| एसेट | ये क्या है? | ये वैल्यूएबल क्यों है? |
|---|---|---|
| रजिस्टर में कैश | कैश बॉक्स में रखा पैसा | इससे और स्टॉक ख़रीद सकती हैं, बिल भर सकती हैं |
| बैंक अकाउंट में पैसा | दुकान से जुड़े सेविंग्स अकाउंट में पैसा | वही — उपलब्ध पैसा |
| स्टॉक (इन्वेंटरी) | अलमारियों पर रखा सारा सामान — चावल, दाल, साबुन, तेल, बिस्किट्स | ये बेचकर पैसा कमाएँगी |
| दुकान का फ़र्नीचर | अलमारियाँ, काउंटर, डिस्प्ले रैक, तराज़ू | दुकान चलाने के लिए ज़रूरी हैं |
| रेफ़्रिजरेटर | फ़्रिज जिसमें कोल्ड ड्रिंक्स और मक्खन रखती हैं | इसके बिना ठंडे आइटम्स नहीं बेच सकतीं |
| ग्राहकों पर बाक़ी रक़म | औरत के ₹380 उधार, बड़े ऑर्डर वाले ग्राहक के ₹850 बाक़ी | ये पैसा बाद में आएगा |
| दुकान की बिल्डिंग (अगर उनकी अपनी है) | दुकान की फ़िज़िकल बिल्डिंग | इसके बिना बिज़नेस करने की जगह नहीं |
"ये सब के सब एसेट्स हैं," शर्मा सर ने कहा। "सबकी वैल्यू है। सब बिज़नेस में मदद करते हैं।"
मीरा ने हाथ उठाया। "उधार की रक़म एसेट कैसे? वो तो कैश नहीं है।"
"बहुत अच्छा सवाल! जब ग्राहक तुम्हारा पैसा देना है, तो वो पैसा अभी भी तुम्हारा है — ग्राहक ने अभी दिया नहीं। इसे रिसीवेबल कहते हैं। ये एसेट है क्योंकि तुम उम्मीद रखती हो कि मिलेगा। हाँ, जोखिम है कि ग्राहक शायद पे न करे, लेकिन जब तक ऐसा सोचने की वजह न हो, हम इसे एसेट मानते हैं।"
एसेट्स के टाइप्स
शर्मा सर ने एक क्विक टेबल बनाई:
| श्रेणी | उदाहरण | कितने वक़्त रखते हो |
|---|---|---|
| करंट एसेट्स | कैश, बैंक बैलेंस, स्टॉक, ग्राहकों पर बाक़ी रक़म | शॉर्ट-टर्म — एक साल में इस्तेमाल हो जाते हैं या कैश में बदल जाते हैं |
| फ़िक्स्ड एसेट्स | दुकान की बिल्डिंग, फ़र्नीचर, रेफ़्रिजरेटर, कंप्यूटर | लॉन्ग-टर्म — कई साल इस्तेमाल होते हैं |
"करंट एसेट्स बदलते रहते हैं — स्टॉक बिकता है, कैश आता-जाता है। फ़िक्स्ड एसेट्स लंबे वक़्त तक रहते हैं।"

लायबिलिटीज़ — तुम पर क्या बाक़ी है
शर्मा सर ने दूसरा कार्ड उठाया: LIABILITIES।
"लायबिलिटी एसेट का उलटा है। ये वो है जो तुम किसी और को देना है।"
लायबिलिटी = वो रक़म जो बिज़नेस को दूसरों को देनी है। एक क़र्ज़ या ज़िम्मेदारी।
"वापस चलते हैं रावत आंटी की दुकान पर। उन पर क्या बाक़ी है?"
| लायबिलिटी | ये क्या है? | किसे देना है? |
|---|---|---|
| आपूर्तिकर्ता का बिल: ₹4,200 | क्रेडिट पर मिली डिलीवरी | आपूर्तिकर्ता जिसने बिस्किट्स, हल्दी, साबुन डिलीवर किए |
| बैंक लोन (अगर लिया है) | दुकान शुरू करने या बढ़ाने के लिए लोन | बैंक |
| बिना भरा बिजली बिल | अगर बिल ड्यू है लेकिन अभी भरा नहीं | इलेक्ट्रिसिटी कंपनी |
| ग्राहक से एडवांस मिला | अगर किसी ग्राहक ने बड़े ऑर्डर के लिए एडवांस दिया जो अभी डिलीवर नहीं हुआ | ग्राहक (उसे सामान देना है) |
"लायबिलिटीज़ वादों जैसी हैं," शर्मा सर ने कहा। "तुमने आपूर्तिकर्ता को शनिवार को पे करने का वादा किया। वो वादा लायबिलिटी है। तुमने बैंक लोन तीन साल में चुकाने का वादा किया। वो वादा लायबिलिटी है।"
लायबिलिटीज़ के टाइप्स
| श्रेणी | उदाहरण | कब पे करनी है? |
|---|---|---|
| करंट लायबिलिटीज़ | आपूर्तिकर्ता बिल्स, शॉर्ट-टर्म लोन्स, बिना दी तनख़्वाह, बिना दिया किराया | एक साल के अंदर |
| नॉन-करंट (लॉन्ग-टर्म) लायबिलिटीज़ | 3-5 साल के बैंक लोन्स, लॉन्ग-टर्म उधारी | एक साल से ज़्यादा बाद |
मीरा ने सिर हिलाया। "तो एसेट्स वो हैं जो तुम्हारे पास हैं, और लायबिलिटीज़ वो हैं जो तुम पर बाक़ी हैं।"
"बिल्कुल। अब इंटरेस्टिंग बात आती है।"
कैपिटल — मालिक का अपना पैसा
शर्मा सर ने तीसरा कार्ड उठाया: CAPITAL।
"जब रावत आंटी ने कई साल पहले दुकान शुरू की, उन्होंने अपनी बचत से पैसा लगाया। शायद ₹2,00,000 अपने पर्सनल पैसे से। वो पैसा — मालिक का अपना पैसा जो उसने बिज़नेस में निवेश किया — कैपिटल कहलाता है।"
कैपिटल = मालिक का अपना पैसा जो उसने बिज़नेस में लगाया है। इसे ओनर्स इक्विटी भी कहते हैं।
"ऐसे सोचो। बिज़नेस के पास एसेट्स हैं। कुछ एसेट्स उधार के पैसे (लायबिलिटीज़) से ख़रीदे गए। बाक़ी मालिक के अपने पैसे (कैपिटल) से ख़रीदे गए।"
इससे अकाउंटिंग का सबसे इंपॉर्टेंट इक्वेशन बनता है:
एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल
"बिज़नेस के पास जो कुछ भी है (एसेट्स) वो या तो उधार (लायबिलिटीज़) या मालिक के अपने निवेश (कैपिटल) से फ़ंडेड है। हमेशा। बिना एक्सेप्शन।"
चलो रावत आंटी की दुकान से टेस्ट करते हैं:
| रक़म (₹) | |
|---|---|
| कुल एसेट्स | |
| रजिस्टर में कैश | 15,000 |
| बैंक में पैसा | 25,000 |
| अलमारियों पर स्टॉक | 1,20,000 |
| फ़र्नीचर और फ़्रिज | 40,000 |
| ग्राहकों पर बाक़ी | 12,000 |
| कुल एसेट्स | 2,12,000 |
| लायबिलिटीज़ | |
| आपूर्तिकर्ता को देना है | 32,000 |
| बैंक लोन | 50,000 |
| कुल लायबिलिटीज़ | 82,000 |
| कैपिटल (ओनर्स इक्विटी) | |
| रावत आंटी का निवेश | 1,30,000 |
| चेक: लायबिलिटीज़ + कैपिटल | 82,000 + 1,30,000 = 2,12,000 |
"देखा? एसेट्स (₹2,12,000) = लायबिलिटीज़ (₹82,000) + कैपिटल (₹1,30,000)। बैलेंस हो गया। ये हमेशा बैलेंस होता है। इसे अकाउंटिंग इक्वेशन कहते हैं।"

मीरा ने नंबरों को घूरा। "तो अगर मुझे कोई दो पता हों, तो तीसरा गणना कर सकती हूँ?"
"हाँ! अगर एसेट्स और लायबिलिटीज़ पता हैं, तो कैपिटल गणना कर सकती हो। अगर एसेट्स और कैपिटल पता हैं, तो लायबिलिटीज़ गणना कर सकती हो। ये इक्वेशन अकाउंटिंग की रीढ़ है।"
ड्रॉइंग्स के बारे में क्या?
"कैपिटल के बारे में एक और बात," नेगी भैया ने जोड़ा। "कभी-कभी मालिक बिज़नेस से अपने पर्सनल काम के लिए पैसा निकालता है। रावत आंटी शायद दुकान की कैश बॉक्स से ₹2,000 निकालें बेटे की स्कूल फ़ीस भरने के लिए। इसे ड्रॉइंग्स कहते हैं।"
ड्रॉइंग्स = मालिक द्वारा बिज़नेस से अपने पर्सनल इस्तेमाल के लिए निकाला गया पैसा या सामान।
"ड्रॉइंग्स कैपिटल कम करता है। अगर मालिक पैसा डालता है (कैपिटल बढ़ता है) और पैसा निकालता है (ड्रॉइंग्स कैपिटल कम करता है), तो किसी भी वक़्त नेट कैपिटल है:"
नेट कैपिटल = लगाया हुआ कैपिटल + मुनाफ़ा - ड्रॉइंग्स
राजस्व — कमाया हुआ पैसा
शर्मा सर ने चौथा कार्ड उठाया: REVENUE।
"राजस्व वो पैसा है जो बिज़नेस अपने मेन काम से कमाता है।"
राजस्व (इसे आमदनी या सेल्स भी कहते हैं) = सामान बेचने या सेवा देने से बिज़नेस ने जो पैसा कमाया।
"रावत आंटी के लिए, राजस्व वो पैसा है जो वो दुकान में सामान बेचकर कमाती हैं। अगर एक दिन में ₹5,000 का सामान बिका, तो उस दिन का राजस्व ₹5,000 है।"
"ध्यान दो: राजस्व मुनाफ़ा के बराबर नहीं है। राजस्व सेल्स से कमाई गई कुल रक़म है। इसमें से अभी सारे ख़र्चे घटाने हैं। ख़र्चे घटाने के बाद जो बचता है वो मुनाफ़ा है।"
राजस्व के टाइप्स
| टाइप | विवरण | रावत आंटी की दुकान का उदाहरण |
|---|---|---|
| सेल्स राजस्व | सामान बेचने से पैसा | ग्राहकों को चावल, दाल, साबुन बेचना |
| सेवा राजस्व | सेवा देने से पैसा | अगर होम डिलीवरी के लिए ₹5 चार्ज करती हैं (ज़्यादातर किराना दुकानें नहीं करतीं, लेकिन कुछ करती हैं) |
| अदर आमदनी | मुख्य काम के अलावा और कामों से पैसा | बैंक सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज, या एक छोटी स्टोरेज स्पेस सब-लेट करने से किराया |
"ज़्यादातर छोटी दुकानों में, लगभग सारा राजस्व सेल्स से आता है।"
ख़र्चे — बिज़नेस चलाने पर ख़र्चा
शर्मा सर ने पाँचवाँ और आख़िरी कार्ड उठाया: EXPENSES।
"ख़र्चे बिज़नेस चलाने की लागत है।"
ख़र्चा = बिज़नेस चलाने और राजस्व कमाने पर ख़र्च किया गया पैसा। बिज़नेस करने की लागत।
"रावत आंटी सामान बेचकर राजस्व कमाती हैं। लेकिन वो राजस्व कमाने के लिए पैसा भी ख़र्च करना पड़ता है।"
| ख़र्चा | विवरण | एक छोटी दुकान के लिए टिपिकल रक़म |
|---|---|---|
| लागत ऑफ़ गुड्स सोल्ड | जो सामान बेचती हैं उसकी ख़रीद की क़ीमत। अगर ₹80/kg में चावल बेचती हैं जो ₹60/kg में ख़रीदा, तो लागत ₹60 | ये आमतौर पर सबसे बड़ा ख़र्चा होता है |
| किराया | दुकान की जगह का मंथली किराया | ₹3,000 - ₹10,000 |
| बिजली | लाइट्स, पंखा, फ़्रिज की बिजली | ₹800 - ₹2,000 |
| मज़दूरी | मददर्स को पेमेंट | ₹4,000 - ₹8,000 |
| ट्रांसपोर्ट | होलसेलर से दुकान तक सामान लाने का ख़र्चा | ₹500 - ₹2,000 |
| फ़ोन/इंटरनेट | मोबाइल बिल, UPI चार्जेज़ | ₹200 - ₹500 |
| मरम्मत | टूटी-फूटी चीज़ें ठीक कराना | अलग-अलग |
| पैकेजिंग | थैले, रैपिंग मटीरियल | ₹200 - ₹500 |
मुनाफ़ा का फ़ॉर्मूला
"अब, मीरा, तुम जानती हो राजस्व क्या है और ख़र्चे क्या हैं। मुनाफ़ा का फ़ॉर्मूला ख़ूबसूरती से सिंपल है।"
मुनाफ़ा = राजस्व - ख़र्चे
"अगर रावत आंटी एक महीने में ₹1,50,000 राजस्व कमाती हैं और उनके कुल ख़र्चे ₹1,20,000 हैं, तो मुनाफ़ा ₹30,000 है।"
"अगर ख़र्चे राजस्व से ज़्यादा हैं — मान लो राजस्व ₹1,00,000 है लेकिन ख़र्चे ₹1,10,000 — तो ₹10,000 का नुक़सान (घाटा) है।"
| सिचुएशन | राजस्व (₹) | ख़र्चे (₹) | नतीजा |
|---|---|---|---|
| अच्छा महीना | 1,50,000 | 1,20,000 | ₹30,000 का फ़ायदा |
| ख़राब महीना | 1,00,000 | 1,10,000 | ₹10,000 का नुक़सान |
| ब्रेक-ईवन | 1,20,000 | 1,20,000 | न फ़ायदा, न नुक़सान |
"इसीलिए अकाउंटिंग ज़रूरी है। इसके बिना रावत आंटी को पता ही नहीं चलेगा कि महीना अच्छा गया, ख़राब गया, या बस टूटा-बराबर रहा।"
और भी ज़रूरी शब्द
"बिग फ़ाइव तो कवर हो गए," शर्मा सर ने कहा। "अब कुछ और शब्द सिखाता हूँ जो रोज़ सामने आते हैं।"
डेटर — वो जिस पर तुम्हारा पैसा बाक़ी है
डेटर = वो व्यक्ति या बिज़नेस जिस पर तुम्हारे बिज़नेस का पैसा बाक़ी है। आमतौर पर वो ग्राहक जिसने क्रेडिट पर सामान ख़रीदा।
"याद है वो औरत जिसने ₹380 का सामान उधार लिया था? वो रावत आंटी की डेटर है। उस पर रावत आंटी का पैसा बाक़ी है।"
"रावत आंटी की बुक्स में, सभी ग्राहकों पर बाक़ी कुल रक़म को सन्ड्री डेटर्स या अकाउंट्स रिसीवेबल कहते हैं।"
"डेटर एक एसेट है — क्योंकि ये वो पैसा है जो आने वाला है।"
क्रेडिटर — वो जिसे तुम्हें पैसा देना है
क्रेडिटर = वो व्यक्ति या बिज़नेस जिसे तुम्हारे बिज़नेस को पैसा देना है। आमतौर पर वो आपूर्तिकर्ता जिसने क्रेडिट पर सामान दिया।
"आपूर्तिकर्ता जिसने ₹4,200 का सामान डिलीवर किया और शनिवार को पेमेंट का इंतज़ार कर रहा है — वो रावत आंटी का क्रेडिटर है।"
"रावत आंटी की बुक्स में, सभी आपूर्तिकर्ता को देने वाली कुल रक़म को सन्ड्री क्रेडिटर्स या अकाउंट्स पेएबल कहते हैं।"
"क्रेडिटर एक लायबिलिटी है — क्योंकि ये वो पैसा है जो तुम्हें देना है।"
| शब्द | कौन? | दुकान के नज़रिए से | एसेट या लायबिलिटी? |
|---|---|---|---|
| डेटर | ग्राहक जिस पर तुम्हारा बाक़ी है | उसे तुम्हें पैसा देना है | एसेट (पैसा मिलेगा) |
| क्रेडिटर | आपूर्तिकर्ता जिसे तुम्हें देना है | तुम्हें उसे पैसा देना है | लायबिलिटी (तुम्हें पे करना है) |
"याद रखने का आसान तरीक़ा: डेटर — वो तुम्हारे डेट (क़र्ज़) में है। क्रेडिटर — उसने तुम्हें क्रेडिट दी।"

स्टॉक / इन्वेंटरी — बेचने के लिए रखा सामान
स्टॉक (या इन्वेंटरी) = वो सामान जो बिज़नेस के पास बेचने के लिए उपलब्ध है।
"रावत आंटी की अलमारियों पर अभी जो कुछ भी है — चावल का हर बोरा, तेल की हर बोतल, बिस्किट्स का हर पैकेट — वो उनका स्टॉक है। जब कुछ बेचती हैं, स्टॉक कम होता है। जब आपूर्तिकर्ता से नया सामान ख़रीदती हैं, स्टॉक बढ़ता है।"
"स्टॉक एक एसेट है। ये अलमारियों पर रखा रहता है, सेल्स के ज़रिए कैश में बदलने का इंतज़ार करता है।"
| जब स्टॉक... | क्या होता है? |
|---|---|
| आपूर्तिकर्ता से सामान ख़रीदा | स्टॉक बढ़ता है |
| ग्राहक को सामान बेचा | स्टॉक घटता है |
| सामान ख़राब या एक्सपायर हो गया | स्टॉक घटता है (और ये नुक़सान है) |
| स्टॉक काउंट में सामान कम निकला | स्टॉक घटता है (शायद चोरी या ग़लती) |
"हर महीने या साल के अंत में, दुकान का मालिक फ़िज़िकली सारा सामान गिनता है। इसे स्टॉक काउंट या फ़िज़िकल इन्वेंटरी कहते हैं। ये ज़रूरी है क्योंकि अलमारी पर असली स्टॉक बुक्स में लिखे स्टॉक से अलग हो सकता है — चोरी, नुक़सान, या रिकॉर्डिंग त्रुटियाँ की वजह से।"
गुडविल — अनदेखी वैल्यू
"मीरा, एक और इंटरेस्टिंग शब्द। मान लो रावत आंटी अपनी दुकान बेचने का फ़ैसला करती हैं। फ़र्नीचर ₹40,000 का है। स्टॉक ₹1,20,000 का है। लेकिन ख़रीदने वाला पूरे बिज़नेस के लिए ₹2,00,000 दे सकता है। क्यों?"
"क्योंकि... दुकान के नियमित ग्राहकों हैं? लोग इसे जानते हैं और ट्रस्ट करते हैं?" मीरा ने अंदाज़ा लगाया।
"बिल्कुल! दुकान की एक रेपुटेशन है। ग्राहक आदत और भरोसे की वजह से यहाँ आते हैं। वो अनदेखी वैल्यू — नाम, रेपुटेशन, ग्राहकों की लॉयल्टी — इसे गुडविल कहते हैं।"
गुडविल = बिज़नेस की रेपुटेशन, ग्राहक संबंधों, और ब्रांड नेम की वैल्यू। ये असली वैल्यू है, लेकिन इसे छू या देख नहीं सकते।
"गुडविल एक एसेट है, लेकिन ख़ास तरह का। इसे तौल या अलमारी पर नहीं रख सकते। ये बुक्स में तभी दिखता है जब कोई बिज़नेस ख़रीदा या बेचा जाता है।"
"उत्तराखंड में, कई पुरानी दुकानें दो-तीन पीढ़ियों से चल रही हैं। लोग इसलिए जाते हैं क्योंकि उनके दादा-दादी भी वहाँ जाते थे। वो लॉयल्टी गुडविल है। इसकी असली वैल्यू है।"
सब कुछ एक साथ — रावत आंटी की दुकान का मैप
शर्मा सर ने व्हाइटबोर्ड पर एक बड़ा डायग्राम बनाया। "मैं रावत आंटी की पूरी दुकान को हमारे अकाउंटिंग शब्दों से मैप करता हूँ।"
| अकाउंटिंग शब्द | इसका मतलब | रावत आंटी की दुकान का उदाहरण |
|---|---|---|
| एसेट्स | तुम्हारे पास क्या है | कैश (₹15,000), बैंक बैलेंस (₹25,000), स्टॉक (₹1,20,000), फ़र्नीचर और फ़्रिज (₹40,000), डेटर्स (₹12,000) |
| लायबिलिटीज़ | तुम पर क्या बाक़ी है | आपूर्तिकर्ता बिल्स (₹32,000), बैंक लोन (₹50,000) |
| कैपिटल | मालिक का निवेश | रावत आंटी का बिज़नेस में अपना पैसा (₹1,30,000) |
| राजस्व | कमाया हुआ पैसा | दुकान से रोज़ की सेल्स |
| ख़र्चे | बिज़नेस चलाने की लागत | किराया, बिजली, मज़दूरी, ट्रांसपोर्ट, ख़रीदारी |
| डेटर्स | जिनका तुम पर बाक़ी है | उधार पर सामान लेने वाले ग्राहक |
| क्रेडिटर्स | जिन्हें तुम्हें देना है | क्रेडिट पर सामान देने वाले होलसेलर्स |
| स्टॉक | बेचने का सामान | अलमारियों पर रखा सब कुछ |
| ड्रॉइंग्स | मालिक ने पैसा निकाला | रावत आंटी का बेटे की स्कूल फ़ीस के लिए ₹2,000 निकालना |
| गुडविल | रेपुटेशन की वैल्यू | वो ग्राहक जो भरोसे की वजह से आते हैं |

पाँच श्रेणियाँ — एक और नज़र
शर्मा सर पक्का करना चाहते थे कि मीरा किसी भी चीज़ को सही श्रेणी में रख सके। उन्होंने रैपिड-फ़ायर क्विज़ दी।
"मैं रावत आंटी की दुकान से कुछ बोलता हूँ। तुम बताओ: एसेट, लायबिलिटी, कैपिटल, राजस्व, या ख़र्चा।"
| शर्मा सर बोले... | मीरा का जवाब | स्पष्टीकरण |
|---|---|---|
| कैश बॉक्स में कैश | एसेट | कुछ जो बिज़नेस के पास है |
| आपूर्तिकर्ता को देने हैं ₹4,200 | लायबिलिटी | कुछ जो बिज़नेस को देना है |
| रावत आंटी का शुरुआती ₹2,00,000 का निवेश | कैपिटल | मालिक का बिज़नेस में अपना पैसा |
| आज की ₹3,500 की सेल्स | राजस्व | सामान बेचकर कमाया पैसा |
| ₹5,000 मंथली किराया | ख़र्चा | बिज़नेस चलाने की लागत |
| तराज़ू | एसेट | इक्विपमेंट जो बिज़नेस का है |
| अलग-अलग ग्राहकों पर ₹12,000 बाक़ी | एसेट | डेटर्स — बिज़नेस को मिलने वाला पैसा |
| बैंक लोन पर ब्याज | ख़र्चा | उधार लेने की लागत |
| ₹50,000 का बैंक लोन | लायबिलिटी | बैंक को देना है |
| ₹200 का आटा बेचना | राजस्व | सेल से कमाई |
| ₹1,100 का बिजली बिल | ख़र्चा | दुकान चलाने की लागत |
| अलमारी पर चावल के बोरे | एसेट | स्टॉक — बेचने का सामान |
| डिलीवरी बॉय को ₹500 कमीशन जो ग्राहक लाने के लिए दी | ख़र्चा | राजस्व कमाने के लिए ख़र्चा |
| रावत आंटी ₹1,000 अपने पर्सनल इस्तेमाल के लिए निकालती हैं | ड्रॉइंग्स | कैपिटल कम करता है |
"14 में 14!" नेगी भैया ने ताली बजाई।
मीरा मुस्कुराई। उसे अकाउंटिंग की भाषा में सोचना आने लगा था।
ये शब्द डबल-एंट्री से कैसे जुड़ते हैं
"एक आख़िरी बात, मीरा," शर्मा सर ने कहा। "कल का डबल-एंट्री सिस्टम याद है? देखो आज की वोकैब्युलरी उससे कैसे जुड़ती है।"
"अकाउंटिंग में हर अकाउंट इन पाँच श्रेणियाँ में से किसी एक में आता है: एसेट, लायबिलिटी, कैपिटल, राजस्व, या ख़र्चा।"
"और हर श्रेणी का डेबिट और क्रेडिट के साथ अपना बिहेवियर है।"
| श्रेणी | बढ़ता है... से | घटता है... से | सामान्य बैलेंस |
|---|---|---|---|
| एसेट | डेबिट | क्रेडिट | डेबिट |
| लायबिलिटी | क्रेडिट | डेबिट | क्रेडिट |
| कैपिटल | क्रेडिट | डेबिट | क्रेडिट |
| राजस्व | क्रेडिट | डेबिट | क्रेडिट |
| ख़र्चा | डेबिट | क्रेडिट | डेबिट |
"'सामान्य बैलेंस' का मतलब क्या है? वो साइड जहाँ बैलेंस आमतौर पर दिखता है। कैश एक एसेट है — इसका बैलेंस आमतौर पर डेबिट साइड पर होता है। बैंक लोन एक लायबिलिटी है — इसका बैलेंस आमतौर पर क्रेडिट साइड पर होता है।"
"ये टेबल अभी रटने की ज़रूरत नहीं। जैसे-जैसे और ट्रांज़ैक्शन्स अभ्यास करोगी, ये नैचुरल हो जाएगा। लेकिन इस पेज को बुकमार्क कर लो। कई बार वापस आओगी।"

अब तक की कहानी
मीरा ने नोटबुक बंद की और चार दिनों के नोट्स देखे।
- डे 1: उसने सीखा अकाउंटिंग क्या है और क्यों ज़रूरी है।
- डे 2: उसने सीखा ट्रांज़ैक्शन क्या है — अकाउंटिंग की ईंट।
- डे 3: उसने सीखा कि हर ट्रांज़ैक्शन के दो पहलू होते हैं — डबल-एंट्री।
- डे 4: उसने भाषा सीखी — एसेट्स, लायबिलिटीज़, कैपिटल, राजस्व, ख़र्चे।
"शर्मा सर," उसने कहा, "मुझे लगता है मैंने अभी एल्फ़ाबेट सीखी है। अक्षर पता हैं। लेकिन अभी तक कोई वाक्य नहीं लिखा।"
शर्मा सर ज़ोर से मुस्कुराए। "बिल्कुल सही तरीक़े से कहा। पार्ट 2 में, तुम वाक्य लिखना शुरू करोगी — ट्रांज़ैक्शन्स को जर्नल्स में दर्ज करना, लेजर्स में पोस्ट करना, और फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट्स तैयार करना। असली काम शुरू होता है।"
"लेकिन याद रखो: एल्फ़ाबेट के बिना वाक्य नहीं लिख सकते। इन चार दिनों ने तुम्हें नींव दी है। बाक़ी सब इसी पर बनेगा।"
क्विक रीकैप — चैप्टर 4
एसेट्स = जो बिज़नेस के पास है (कैश, स्टॉक, फ़र्नीचर, डेटर्स)। एसेट्स बिज़नेस की मदद करते हैं।
लायबिलिटीज़ = जो बिज़नेस पर बाक़ी है (आपूर्तिकर्ता बिल्स, बैंक लोन्स)। लायबिलिटीज़ ज़िम्मेदारियाँ हैं।
कैपिटल = मालिक का अपना पैसा जो बिज़नेस में लगाया।
राजस्व = सामान बेचने या सेवा देने से कमाया पैसा।
ख़र्चे = बिज़नेस चलाने पर ख़र्च किया पैसा।
अकाउंटिंग इक्वेशन: एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल। हमेशा।
और ज़रूरी शब्द:
- डेटर — ग्राहक जिस पर तुम्हारा बाक़ी है (एसेट)
- क्रेडिटर — आपूर्तिकर्ता जिसे तुम्हें देना है (लायबिलिटी)
- स्टॉक/इन्वेंटरी — बेचने के लिए उपलब्ध सामान (एसेट)
- ड्रॉइंग्स — मालिक पर्सनल इस्तेमाल के लिए पैसा निकालता है (कैपिटल कम होता है)
- गुडविल — रेपुटेशन और भरोसे की अनदेखी वैल्यू (एसेट)
अभ्यास अभ्यास — ख़ुद करके देखो
अभ्यास 1: अपने शहर या गाँव की किसी असली दुकान या बिज़नेस के बारे में सोचो। कम से कम 5 एसेट्स, 3 लायबिलिटीज़ लिस्ट करो, और पता लगाओ कि कैपिटल कितना होगा। इस टेबल फ़ॉर्मेट में लिखो:
| श्रेणी | चीज़ | अंदाज़ा लगाई वैल्यू (₹) |
|---|---|---|
| एसेट | ||
| लायबिलिटी | ||
| कैपिटल |
क्या तुम्हारा इक्वेशन बैलेंस करता है? (एसेट्स = लायबिलिटीज़ + कैपिटल)
अभ्यास 2: हर आइटम को वर्गीकृत करो — एसेट, लायबिलिटी, कैपिटल, राजस्व, या ख़र्चा:
| आइटम | श्रेणी |
|---|---|
| दफ़्तर में कंप्यूटर | ? |
| ₹600 का मंथली इंटरनेट बिल | ? |
| ग्राहक पर ₹8,000 बाक़ी | ? |
| मालिक ₹3,00,000 निवेश करके बिज़नेस शुरू करता है | ? |
| एक दिन में ₹2,500 के समोसे और चाय बेचना | ? |
| चावल आपूर्तिकर्ता को ₹15,000 देना है | ? |
| मददर को ₹7,000 तनख़्वाह दी | ? |
| बैंक अकाउंट में ₹45,000 | ? |
| बिज़नेस के लिए डिलीवरी वैन | ? |
| फ़िक्स्ड डिपॉज़िट पर ₹1,200 ब्याज मिला | ? |
अभ्यास 3: रावत आंटी की दुकान में महीने के अंत में ये है। अकाउंटिंग इक्वेशन से उनका कैपिटल गणना करो।
| आइटम | रक़म (₹) |
|---|---|
| कैश | 18,000 |
| बैंक बैलेंस | 30,000 |
| स्टॉक | 1,35,000 |
| फ़र्नीचर और फ़्रिज | 38,000 |
| डेटर्स (जिनका बाक़ी है) | 9,500 |
| कुल एसेट्स | ? |
| आपूर्तिकर्ता को देना | 28,000 |
| बैंक लोन | 45,000 |
| कुल लायबिलिटीज़ | ? |
| कैपिटल | ? |
अभ्यास 4: डेटर/क्रेडिटर सेक्शन से, इन सवालों के जवाब दो:
- राम तुम्हारी दुकान से ₹500 का सामान क्रेडिट पर ख़रीदता है। राम डेटर है या क्रेडिटर?
- तुम गुप्ता होलसेल से ₹3,000 का सामान क्रेडिट पर ख़रीदते हो। गुप्ता होलसेल डेटर है या क्रेडिटर?
- तुम किसके डेटर हो? तुम किसके क्रेडिटर हो?
मज़ेदार तथ्य — अकाउंटिंग पूरी दुनिया चलाती है
दुनिया का हर बिज़नेस — मुनस्यारी के एक छोटे चाय स्टॉल से लेकर कैलिफ़ोर्निया की ऐप्पल इंक. तक — वही पाँच श्रेणियाँ इस्तेमाल करता है: एसेट्स, लायबिलिटीज़, कैपिटल, राजस्व, ख़र्चे। और सब वही अकाउंटिंग इक्वेशन पालन करते हैं।
जब तुम न्इस्तेमाल में सुनते हो "रिलायंस ने ₹15,000 करोड़ का मुनाफ़ा रिपोर्ट किया," तो वो नंबर उसी सिस्टम से आया है जो तुम सीख रहे हो। जब सरकार अपना बजट पेश करती है, तो फ़ाइनेंस मिनिस्टर असल में पूरे देश के अकाउंट्स का एक बड़ा सेट प्रेज़ेंट कर रही होती है।
और ये बात तुम्हें मोटिवेट करने वाली है: इंडिया में लगभग 7 करोड़ छोटे बिज़नेसेज़ (MSMEs) हैं। ज़्यादातर को किसी ऐसे इंसान की ज़रूरत है जो अकाउंटिंग समझता हो। सब CA अफ़ोर्ड नहीं कर सकते। कई को एक ट्रेंड बुककीपर चाहिए — कोई जो उनकी बुक्स साफ़ रखे, GST फ़ाइल करे, और उन्हें उनके अपने नंबर समझने में मदद करे।
वो इंसान तुम हो सकते हो। चार चैप्टर्स पढ़ लिए, और नींव तुम्हारी तैयार है। भाषा तुम्हारी है। अब वक़्त है उसे इस्तेमाल करने का।
पार्ट 2 में, मीरा पेन उठाती है और ट्रांज़ैक्शन्स को एक सही जर्नल में दर्ज करना शुरू करती है। असली बुककीपिंग शुरू होती है।